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                <title>NEET UG - दैनिक जागरण</title>
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                <description>NEET UG RSS Feed</description>
                
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                <title>NEET-UG 2027 में बड़ा बदलाव, छह दिन तक होगी परीक्षा; पूरी तरह कंप्यूटर बेस्ड होगा एग्जाम</title>
                                    <description><![CDATA[पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा प्रणाली में बड़ा सुधार, देशभर में 1000 से ज्यादा परीक्षा केंद्र बनाए जाएंगे, JEE की तर्ज पर कई दिनों में होगा आयोजन।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-change-in-neet-ug-2027-the-exam-will-be-for/article-58290"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/neet-ug-2027.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG में वर्ष 2027 से बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में आयोजित करने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही परीक्षा एक ही दिन के बजाय कम से कम छह दिनों तक अलग-अलग शिफ्टों में कराई जाएगी। परीक्षा के लिए देशभर में एक हजार से अधिक परीक्षा केंद्र विकसित किए जाएंगे, ताकि बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को सुविधाजनक तरीके से परीक्षा दिलाई जा सके। यह बदलाव पिछले वर्षों में सामने आए पेपर लीक और परीक्षा संबंधी विवादों के बाद परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">हर साल मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस, बीडीएस, आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध और अन्य स्नातक चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली NEET-UG परीक्षा में लगभग 25 लाख अभ्यर्थी शामिल होते हैं। अब तक यह परीक्षा पूरे देश में एक ही दिन पेन-पेपर मोड में आयोजित की जाती रही है। लेकिन बढ़ती परीक्षार्थियों की संख्या, सुरक्षा संबंधी चुनौतियों और पेपर लीक जैसी घटनाओं को देखते हुए परीक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव की योजना बनाई गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">नई व्यवस्था के तहत परीक्षा इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा JEE Main की तरह कई दिनों तक आयोजित होगी। अभ्यर्थियों को अलग-अलग तिथियों और शिफ्टों में परीक्षा देने का अवसर मिलेगा। परीक्षा पूरी तरह कंप्यूटर आधारित होगी, जिससे प्रश्नपत्र लीक होने की संभावना काफी हद तक कम हो जाएगी। इसके अलावा डिजिटल परीक्षा प्रणाली से मूल्यांकन प्रक्रिया भी अधिक तेज और पारदर्शी बनने की उम्मीद है।</p>
<p style="text-align:justify;">परीक्षा के लिए देशभर में 1000 से अधिक आधुनिक परीक्षा केंद्र तैयार किए जाएंगे। इन केंद्रों पर पर्याप्त संख्या में कंप्यूटर, हाई-स्पीड इंटरनेट, सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी सहायता उपलब्ध रहेगी। परीक्षा केंद्रों का चयन इस तरह किया जाएगा कि अभ्यर्थियों को अपने घर से बहुत दूर यात्रा न करनी पड़े। सरकार और NTA का प्रयास है कि छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के उम्मीदवारों को भी कंप्यूटर आधारित परीक्षा की समान सुविधा मिल सके।</p>
<p style="text-align:justify;">NEET परीक्षा में यह बदलाव वर्ष 2024 में सामने आए पेपर लीक और अनियमितताओं के मामलों के बाद तेज हुए सुधारों का हिस्सा माना जा रहा है। उस समय परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर देशभर में सवाल उठे थे। कई राज्यों से पेपर लीक, फर्जीवाड़े और परीक्षा संचालन में गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली की व्यापक समीक्षा करने का फैसला लिया था। शिक्षा मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय पहले से ही कंप्यूटर आधारित परीक्षा पर विचार कर रहे थे, लेकिन विवाद के बाद इस प्रक्रिया को गति मिली।</p>
<p style="text-align:justify;">इस वर्ष भी NEET-UG परीक्षा चर्चा में रही। वर्ष 2026 में परीक्षा 3 मई को देश के 551 शहरों और विदेश के 14 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की गई थी। इसमें करीब 20 लाख अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था। परीक्षा के कुछ दिनों बाद गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आने लगीं। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के अनुसार 7 मई की शाम परीक्षा में अनियमितताओं की सूचना मिली, जिसके बाद मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों को सौंपी गई। जांच के आधार पर 12 मई को परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया गया और दोबारा परीक्षा कराने की घोषणा की गई। इसके बाद 15 मई को शिक्षा मंत्रालय और NTA ने री-एग्जाम की नई तारीख जारी की। मामले की जांच फिलहाल केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली लागू होने से कई समस्याओं का समाधान संभव है। प्रश्नपत्र डिजिटल माध्यम से सीधे परीक्षा केंद्रों तक पहुंचेगा, जिससे प्रिंटिंग, परिवहन और वितरण के दौरान सुरक्षा जोखिम कम होंगे। परीक्षा समाप्त होने के बाद उत्तरों का मूल्यांकन भी तेजी से किया जा सकेगा। हालांकि इसके साथ तकनीकी चुनौतियां भी होंगी, जिनसे निपटने के लिए मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना आवश्यक होगा। नई परीक्षा प्रणाली लागू करने के लिए केंद्र सरकार व्यापक स्तर पर तैयारी कर रही है। परीक्षा केंद्रों पर आधुनिक कंप्यूटर सिस्टम, बिजली की निर्बाध व्यवस्था, बैकअप नेटवर्क, साइबर सुरक्षा और तकनीकी विशेषज्ञों की तैनाती की जाएगी। इसके अलावा परीक्षा के दौरान किसी तकनीकी समस्या की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था भी उपलब्ध रहेगी ताकि किसी अभ्यर्थी को नुकसान न हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 14:16:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मेडिकल कॉलेजों में एनआरआई कोटा के नियम सख्त, सुप्रीम कोर्ट की शर्तें होंगी अनिवार्य</title>
                                    <description><![CDATA[नीट-यूजी और पीजी काउंसलिंग 2026-27 में वैधानिक अभिभावक का प्रमाण जरूरी, फर्जी एनआरआई प्रमाणपत्रों पर रोक लगाने की तैयारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/strict-rules-of-nri-quota-in-medical-colleges-supreme-courts/article-58055"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/nri-quota.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मेडिकल कॉलेजों में एनआरआई (नॉन-रेजिडेंट इंडियन) कोटा के तहत प्रवेश लेने वाले छात्रों के लिए इस वर्ष नियम पहले की तुलना में काफी सख्त कर दिए गए हैं। मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (एमसीसी) ने सभी राज्यों और मेडिकल कॉलेजों को निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 की नीट-यूजी और नीट-पीजी काउंसलिंग में केवल वही अभ्यर्थी एनआरआई कोटे का लाभ ले सकेंगे, जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरी तरह पूरा करेंगे। अधिकारियों के अनुसार इस कदम का उद्देश्य एनआरआई कोटे के दुरुपयोग पर रोक लगाना और केवल वास्तविक पात्र उम्मीदवारों को ही इसका लाभ सुनिश्चित करना है। पिछले कुछ वर्षों में कई राज्यों से फर्जी एनआरआई प्रमाणपत्रों के जरिए मेडिकल सीट हासिल करने की शिकायतें सामने आने के बाद यह फैसला लिया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नए दिशा-निर्देशों के तहत अब केवल किसी एनआरआई रिश्तेदार का नाम बताकर प्रवेश लेना संभव नहीं होगा। अभ्यर्थी को यह भी साबित करना होगा कि संबंधित व्यक्ति उसका वैधानिक अभिभावक है। इसके लिए गार्जियन एंड वाड्र्स एक्ट, 1890 के तहत जारी अभिभावक होने का वैध प्रमाण और शपथ-पत्र जमा करना अनिवार्य रहेगा। यह नियम केवल एनआरआई श्रेणी के छात्रों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) और वे अभ्यर्थी भी इसके दायरे में आएंगे जिन्होंने भारतीय नागरिकता से एनआरआई श्रेणी में बदलाव किया है। अधिकारियों का कहना है कि दस्तावेजों की जांच पहले की तुलना में अधिक सख्ती से की जाएगी और किसी भी तरह की कमी पाए जाने पर एनआरआई कोटे का लाभ नहीं दिया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मेडिकल काउंसलिंग कमेटी ने राज्यों से कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाए और केवल उन्हीं अभ्यर्थियों को पात्र माना जाए जिनके माता-पिता वास्तव में एनआरआई हों, विदेश में निवास करते हों या फिर कोई निकट संबंधी कानूनी रूप से वैधानिक अभिभावक घोषित किया गया हो। अदालत ने पहले भी अपने फैसलों में स्पष्ट किया था कि एनआरआई कोटे का उद्देश्य विदेश में रहने वाले भारतीय परिवारों के बच्चों को अवसर देना है, न कि इसे सामान्य प्रवेश प्रक्रिया से बचने के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जाए। इसी आधार पर अब दस्तावेजों की जांच और पात्रता का सत्यापन अधिक विस्तृत तरीके से किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश में इन नए नियमों को लागू करने को लेकर फिलहाल स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार राज्य में अभी भी वर्ष 2018 के नियमों के आधार पर मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया संचालित की जाती है। ऐसे में यदि केंद्र के नए दिशा-निर्देशों को लागू करना है तो पहले राज्य सरकार को संबंधित नियमों में संशोधन कर राजपत्र (गजट) में अधिसूचना जारी करनी होगी। उसके बाद ही नई व्यवस्था प्रभावी हो सकेगी। जब तक राज्य सरकार औपचारिक संशोधन नहीं करती, तब तक पुराने नियमों के आधार पर प्रक्रिया चलने की संभावना बनी हुई है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद अधिकांश राज्यों को अपने नियमों में बदलाव करना ही पड़ेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पिछले कुछ वर्षों में देश के कई राज्यों में ऐसे मामले सामने आए, जिनमें मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश पाने के लिए फर्जी एनआरआई प्रमाणपत्रों और गलत दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। जांच के दौरान कई प्रवेश रद्द भी किए गए थे। इन्हीं घटनाओं को देखते हुए मेडिकल काउंसलिंग कमेटी ने इस बार दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया को और मजबूत करने का फैसला किया है। माना जा रहा है कि नए नियम लागू होने के बाद केवल वास्तविक पात्र उम्मीदवार ही एनआरआई कोटे का लाभ उठा सकेंगे और फर्जीवाड़े की संभावनाएं काफी हद तक कम होंगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेजों में एनआरआई कोटे के तहत लगभग 15 प्रतिशत सीटें आरक्षित हैं। राज्य के छह निजी मेडिकल कॉलेजों में कुल मिलाकर करीब 100 से 110 सीटें इस श्रेणी के लिए निर्धारित हैं। इन सीटों की वार्षिक फीस लगभग 30 लाख रुपये तक पहुंचती है। यही कारण है कि हर वर्ष बड़ी संख्या में अभ्यर्थी इस कोटे के माध्यम से प्रवेश लेने का प्रयास करते हैं। अब नए नियम लागू होने पर उन छात्रों और अभिभावकों पर सीधा असर पड़ेगा जो एनआरआई कोटे के तहत आवेदन करने की तैयारी कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 12:00:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत में ‘कॉकरोच पार्टी’ के नेतृत्व में प्रदर्शन तीसरे दिन भी जारी</title>
                                    <description><![CDATA[NEET-UG विवाद और पेपर लीक आरोपों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का धरना, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/protests-under-the-leadership-of-%E2%80%98cockroach-party%E2%80%99-in-india-continue/article-56666"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/neet-protest-delhi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET-UG परीक्षा विवाद को लेकर चल रहा प्रदर्शन लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। देश के अलग-अलग हिस्सों से आए सैकड़ों छात्र, युवा पेशेवर और नौकरी तलाशने वाले लोग इस धरने में शामिल हुए हैं। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। यह विरोध उस मेडिकल प्रवेश परीक्षा को लेकर है, जिसे पेपर लीक के आरोपों के बाद विवादों के केंद्र में देखा जा रहा है। इस प्रदर्शन का नेतृत्व एक नए और अनोखे समूह ‘कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)’ द्वारा किया जा रहा है, जिसने सोशल मीडिया पर अपनी व्यंग्यात्मक राजनीति शैली के कारण तेजी से ध्यान आकर्षित किया है। इस समूह का प्रतीक ‘कॉकरोच’ है और यह नाम भारत की सत्ताधारी पार्टी बीजेपी के संदर्भ में व्यंग्यात्मक तरीके से रखा गया बताया जाता है। संगठन का कहना है कि उनका उद्देश्य शिक्षा प्रणाली में जवाबदेही और पारदर्शिता को बढ़ाना है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि NEET-UG जैसी अत्यंत प्रतिस्पर्धी परीक्षा में कथित पेपर लीक ने लाखों छात्रों के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विवाद बढ़ने के बाद प्रशासन ने परीक्षा परिणाम रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया था। रविवार को देशभर के लाखों अभ्यर्थियों ने कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच दोबारा परीक्षा दी, जिसमें बायोमेट्रिक जांच और निगरानी के विशेष इंतजाम किए गए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने बाद में बयान जारी कर कहा था कि री-एग्जाम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ है और किसी भी प्रकार की पेपर लीक की शिकायत नहीं मिली है। हालांकि जंतर-मंतर पर बैठे प्रदर्शनकारियों के लिए यह जवाब पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि समस्या सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे शिक्षा सिस्टम की जवाबदेही का सवाल है। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिषेक दीपके ने रविवार को समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि यह आंदोलन सिर्फ परीक्षा विवाद का नहीं बल्कि सिस्टम में सुधार का है। उन्होंने कहा कि जब तक जिम्मेदारी तय नहीं होगी, तब तक छात्र इसी तरह सड़कों पर आवाज उठाते रहेंगे। दीपके अमेरिका के बोस्टन यूनिवर्सिटी में छात्र हैं और हाल ही में भारत आकर उन्होंने इस आंदोलन की शुरुआत की थी। 19 जून को शुरू हुआ यह धरना प्रशासन की अनुमति के साथ तय समय तक चलना था, लेकिन 20 जून को समय समाप्त होने के बाद भी प्रदर्शनकारियों ने जगह नहीं छोड़ी। उनका कहना है कि जब तक शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इसी दौरान कई प्रदर्शनकारी रात भर जंतर-मंतर पर ही रुके रहे और सड़कों पर सोते नजर आए।</p>
<p style="text-align:justify;">धरना स्थल पर हालात भी लगातार चर्चा में बने रहे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि अनुमति समाप्त होने के बाद पुलिस ने लाइटें बंद कर दीं और पानी तथा शौचालय की सुविधा सीमित कर दी गई। हालांकि बाद में ये सुविधाएं बहाल कर दी गईं। दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। इस आंदोलन में सिर्फ छात्र ही नहीं बल्कि आम नागरिक भी शामिल हो रहे हैं। दिल्ली के एक स्टोरकीपर ज्योति ठाकुर ने कहा कि वह इस आंदोलन में इसलिए शामिल हुईं क्योंकि उनका मानना है कि बेहतर शिक्षा व्यवस्था ही बेहतर समाज की नींव है। वहीं 39 वर्षीय वकील गौरव जैन ने कहा कि वे जवाबदेही के मुद्दे पर समर्थन देने पहुंचे हैं और शिक्षा प्रणाली में सुधार जरूरी है। कॉकरोच जनता पार्टी का उदय भी एक विवादित टिप्पणी से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा बेरोजगार युवाओं पर की गई टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर नाराजगी फैल गई थी। बाद में स्पष्ट किया गया कि टिप्पणी का संदर्भ फर्जी डिग्री रखने वालों से जुड़ा था, लेकिन तब तक विरोध की लहर फैल चुकी थी।  शिक्षा मंत्रालय और सत्ताधारी पार्टी की ओर से इस आंदोलन और इस्तीफे की मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। वहीं जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है और छात्र लगातार नारेबाजी कर रहे हैं कि यह लड़ाई सिर्फ परीक्षा की नहीं बल्कि सिस्टम की जिम्मेदारी तय करने की है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 17:00:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>री-NEET 2026: रीवा में प्लास से निकाली चेन-बटन, भोपाल में सेकंडों की देरी पर नहीं मिली एंट्री</title>
                                    <description><![CDATA[एमपी में री-NEET परीक्षा सख्त सुरक्षा के बीच। रीवा में मेटल बटन निकालने के लिए प्लास-पेचकस का इस्तेमाल। भोपाल में सेकंडों की देरी पर छात्र बाहर।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/re-neet-2026-chain-button-taken-out-from-the-plas-in-rewa/article-56574"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/re-neet-ug-2026-pliers-used-to-remove-pant-chains-and-buttons-in-rewa;-morena-student&#039;s-centre-changed-from-gwalior-to-bhopal-at-last-minute-(2).jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr"><strong>एमपी के 30 जिलों के 283 केंद्रों पर एक लाख से अधिक अभ्यर्थी दे रहे परीक्षा, सख्त सुरक्षा के बीच 1:30 बजे बंद हुए गेट</strong></p>
<p dir="ltr">रविवार को मध्य प्रदेश में री-NEET UG 2026 परीक्षा अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था के बीच आयोजित की गई। प्रदेश के 30 जिलों के 283 परीक्षा केंद्रों पर एक लाख से अधिक मेडिकल अभ्यर्थी परीक्षा दे रहे हैं।</p>
<p dir="ltr">भोपाल में 32 केंद्रों पर 13,774 अभ्यर्थी हैं, जबकि इंदौर में सबसे अधिक 14,000 से अधिक अभ्यर्थी हैं। जबलपुर में 23 केंद्रों पर 10,426, ग्वालियर में 25 केंद्रों पर 5,000 अभ्यर्थी हैं। छिंदवाड़ा में 4,303, गुना में 1,839, विदिशा में 1,709, नर्मदापुरम में 1,283 और अशोकनगर में 865 अभ्यर्थी हैं।</p>
<p dir="ltr">परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक पेन-पेपर मोड में हो रही है। सुबह 11 बजे से रिपोर्टिंग, बायोमेट्रिक सत्यापन और फ्रिस्किंग शुरू हुई, जो 1:30 बजे तक जारी रहेगी। 1:30 बजे के बाद किसी भी अभ्यर्थी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा।</p>
<p dir="ltr">अभ्यर्थियों को मोबाइल, ब्लूटूथ, ईयरफोन, स्मार्ट वॉच या किसी भी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट को केंद्र में ले जाने की सख्त मनाही है।</p>
<p dir="ltr"> रीवा: प्लास-पेचकस से निकाली गईं पैंट की चेन और बटन</p>
<p dir="ltr">रीवा जिले में 13 केंद्रों पर 5,399 अभ्यर्थी परीक्षा दे रहे हैं। सुबह 11:30 बजे से प्रवेश शुरू हुआ। अभ्यर्थियों की मेटल डिटेक्टर और मैनुअल फ्रिस्किंग के जरिए सघन जांच की गई।</p>
<p dir="ltr">सुरक्षा इतनी सख्त थी कि कई अभ्यर्थियों की पैंट की चेन और बटन तक प्लास और पेचकस की मदद से निकाले गए, उसके बाद ही उन्हें प्रवेश मिला। चेन, धातु के बटन, कलावा, गहने और अन्य धातु की वस्तुएं बाहर उतरवा ली गईं। कड़ी जांच के कारण कुछ केंद्रों पर अफरा-तफरी भी देखने को मिली। 50% महिला पुलिसकर्मी तैनात की गईं।</p>
<p dir="ltr"> भोपाल: सेकंडों की देरी पर छात्रों को नहीं मिली एंट्री</p>
<p dir="ltr">भोपाल के सरोजिनी सुभाष उच्चतर माध्यमिक उत्कृष्ट विद्यालय में महज 30-40 सेकंड की देरी पर अभ्यर्थियों को प्रवेश नहीं दिया गया। परिजनों ने नाराजगी जताई और आरोप लगाया कि केंद्र के बाहर मार्गदर्शन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी।</p>
<p dir="ltr">एडिशनल एसपी ने कहा, "इन्हें अंदर भेजना मेरे हाथ में नहीं है।" पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय नंबर 2 में ठीक 1:30 बजे गेट बंद कर दिए गए। गेट बंद होने के बाद भी तीन अभ्यर्थी बाहर खड़े रहे।</p>
<p dir="ltr">एक छात्र अपना आधार कार्ड घर भूल गया। उसने व्हाट्सएप पर डिजिटल कॉपी मंगवाई, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने डिजिटल कॉपी स्वीकार नहीं की। उसे मूल आधार कार्ड लाने के लिए वापस जाना पड़ा।</p>
<p dir="ltr"> इंदौर: पुलिसकर्मी की मदद से छात्रा समय पर पहुंची केंद्र</p>
<p dir="ltr">इंदौर में रिया नाम की छात्रा अपना आधार कार्ड हॉस्टल में भूल गई थी। शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय बाल विनय मंदिर में ड्यूटी पर तैनात पलासिया थाने की उपनिरीक्षक अभिरुचि ने छात्रा की मदद की। उन्होंने परिजनों से व्हाट्सएप पर आधार कार्ड की कॉपी मंगवाई और छात्रा को समय पर प्रवेश दिलाया।</p>
<p dir="ltr">एसजीएसआईटीएस केंद्र पर एक छात्र को कान की बाली उतारनी पड़ी। सुरक्षाकर्मियों ने मेटल डिटेक्टर से सघन जांच की।</p>
<p dir="ltr"> मुरैना: ग्वालियर से भोपाल बदला सेंटर, छात्र को करनी पड़ी यात्रा</p>
<p dir="ltr">मुरैना निवासी धर्मेंद्र प्रजापति का परीक्षा केंद्र पहले ग्वालियर में था, लेकिन अंतिम समय में एनटीए ने उसे बदलकर भोपाल कर दिया। उन्हें ग्वालियर से भोपाल तक का सफर तय करना पड़ा। "बदलाव से थोड़ी परेशानी हुई, लेकिन समय रहते व्यवस्था कर ली," उन्होंने कहा।</p>
<p dir="ltr">मुरैना में 7 परीक्षा केंद्र हैं और 180 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।</p>
<p dir="ltr"> छतरपुर: गलत केंद्र पहुंचा छात्र, 22 किमी दूर था असली सेंटर</p>
<p dir="ltr">एक छात्र पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय, छतरपुर को अपना केंद्र समझकर पहुंच गया। दस्तावेज जांच के दौरान पता चला कि उसका वास्तविक केंद्र नौगांव में था - 22 किलोमीटर दूर। वह तुरंत बाइक से नौगांव की ओर रवाना हो गया।</p>
<p dir="ltr"> सतना: पानी की बोतलों के रैपर हटवाए, टॉप्स उतरवाए</p>
<p dir="ltr">सतना के परीक्षा केंद्रों पर सख्त जांच हुई। पानी की बोतलों के रैपर हटवाए गए। कान में टॉप्स पहनकर पहुंची छात्राओं को उन्हें उतारना पड़ा। एक अभ्यर्थी के जूते बाहर रखवा दिए गए और उसे नंगे पैर ही प्रवेश दिया गया।</p>
<p dir="ltr"> छात्रों की आवाज: 'एक प्रतिशत भी भरोसा नहीं'</p>
<p dir="ltr">छात्रों ने पेपर लीक प्रकरण पर चिंता और निराशा व्यक्त की। दिव्यानी परिहार, जो भोपाल में परीक्षा दे रही थीं, ने कहा कि वे तीन साल से तैयारी कर रही हैं और पिछली परीक्षा अच्छी गई थी, लेकिन रद्द होने के बाद वापस आनी पड़ी।</p>
<p dir="ltr">एक छात्र ने कहा: "दोबारा एग्जाम देने में बुरा लग रहा है। ये भी नहीं पता कि इस बार एग्जाम हो पाएगा या ये पेपर भी लीक हो जाएगा।"</p>
<p dir="ltr">गुना में एक छात्र ने कहा: "पिछले डेढ़ महीने तनाव और अनिश्चितता से भरे रहे हैं। पेपर लीक जैसी घटनाओं ने हमारी मेहनत और मानसिक स्थिति पर असर डाला है।"</p>
<p dir="ltr">प्राची ने कहा कि उनकी तैयारी अच्छी है, लेकिन पेपर लीक को लेकर "एक प्रतिशत भी भरोसा नहीं"।</p>
<p dir="ltr">प्रणवी उपाध्याय, जो जेईई की तैयारी कर रही हैं, ने भारतीय शिक्षा प्रणाली को "बहुत गंदी" बताया और कहा कि पेपर लीक लाखों छात्रों के सपने तोड़ते हैं।</p>
<p dir="ltr"> री-परीक्षा क्यों?</p>
<p dir="ltr">NEET-UG परीक्षा 3 मई 2026 को हुई थी। पेपर लीक के आरोपों के बाद NTA ने 12 मई को इसे रद्द कर दिया। CBI मामले की जांच कर रही है। आज की परीक्षा दोबारा आयोजित की जा रही है।</p>
<p dir="ltr">प्रश्नपत्र ले जाने वाले वाहनों में GPS ट्रैकिंग, CRPF एस्कॉर्ट, CCTV निगरानी, आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन और अतिरिक्त बायोमेट्रिक मशीनें लगाई गई हैं। देशभर के 551 शहरों और 14 विदेशी शहरों में 22.79 लाख से अधिक अभ्यर्थी परीक्षा दे रहे हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 14:40:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दैनिक जागरण]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>री-NEET 2026: रायपुर में 1:30 बजे बंद एंट्री, सुरक्षा जांच में आधा घंटा</title>
                                    <description><![CDATA[ री-NEET UG परीक्षा आज, रायपुर सेंटर पर समय सीमा सख्त। 1:30 बजे के बाद प्रवेश नहीं। 45 हजार अभ्यर्थी, सुरक्षा के कड़े इंतजाम।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/re-neet-2026-entry-closed-in-raipur-at-130-hrs-half/article-56556"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/re-neet-ug-2026-raipur-exam-centers-make-time-bound-entry-announcements,-security-checks-take-30-minutes-(1).jpg" alt=""></a><br /><h2 dir="ltr"><strong>देशभर में आज री-NEET UG 2026 परीक्षा, छत्तीसगढ़ में 45 हजार अभ्यर्थी, पेपर लीक के बाद रद्द हुई थी परीक्षा</strong></h2>
<p dir="ltr">देशभर में आज री-NEET UG 2026 परीक्षा आयोजित की जा रही है। परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक होगी। रायपुर के परीक्षा केंद्रों पर लगातार अनाउंसमेंट के माध्यम से अभ्यर्थियों से समय पर अंदर प्रवेश करने की अपील की जा रही है।</p>
<p dir="ltr">अनाउंसमेंट में बताया जा रहा है कि सुरक्षा जांच और दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया में लगभग आधा घंटा लग सकता है। अभ्यर्थियों को किसी भी तरह की जल्दबाजी से बचने के लिए समय रहते परीक्षा केंद्र में प्रवेश करने की सलाह दी गई है।</p>
<p dir="ltr">परीक्षा केंद्रों के बाहर अभ्यर्थियों और अभिभावकों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। छत्तीसगढ़ में इस परीक्षा में करीब 45 हजार अभ्यर्थी शामिल होंगे, जिनमें 28 हजार 100 छात्र-छात्राएं राज्य के हैं। पूरे प्रदेश में 127 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जबकि रायपुर में 25 केंद्रों पर परीक्षा हो रही है।</p>
<h2 dir="ltr">सख्त समय-सीमा और सुरक्षा प्रोटोकॉल</h2>
<p dir="ltr">परीक्षा केंद्रों पर सुबह 11 बजे से रिपोर्टिंग, बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और फ्रिस्किंग शुरू हो गई है, जो दोपहर 1:30 बजे तक चलेगी। इसके बाद किसी भी अभ्यर्थी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। दिव्यांग अभ्यर्थियों को 65 मिनट का अतिरिक्त समय दिया जाएगा।</p>
<p dir="ltr">किसी भी अभ्यर्थी को मोबाइल, ब्लूटूथ, ईयरफोन, स्मार्ट वॉच जैसे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस केंद्र में ले जाने की अनुमति नहीं होगी। ड्रेस कोड का पालन भी अनिवार्य किया गया है - हल्के रंग के साधारण कपड़े पहनने की सलाह दी गई है।</p>
<h2 dir="ltr">जिलों में विशेष व्यवस्थाएं</h2>
<p dir="ltr">जगदलपुर: बस्तर जिले में चार केंद्र बनाए गए हैं - गवर्नमेंट पीजी कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, एमएलबी स्कूल और जगतु महारा स्कूल। कलेक्टर आकाश छिकारा ने बताया कि सभी केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।</p>
<p dir="ltr">बिलासपुर: 19 परीक्षा केंद्रों वाले इस जिले में अन्य जिलों से भी बड़ी संख्या में छात्र और उनके परिजन पहुंच रहे हैं। पुलिस ने शहर में भारी वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है।</p>
<h2 dir="ltr">तीन-लेयर सुरक्षा, कलेक्टर ने किया निरीक्षण</h2>
<p dir="ltr">सभी परीक्षा केंद्रों पर तीन-लेयर सुरक्षा व्यवस्था की गई है। कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने परीक्षा से दो दिन पहले रायपुर के अलग-अलग परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण किया था - पीएम श्री आत्मानंद आर.डी. तिवारी स्कूल आमापारा, केंद्रीय विद्यालय क्रमांक-2 डीडीयू नगर और एनआईटी स्थित केंद्र।</p>
<p dir="ltr">रायपुर के एक केंद्र पर जांच के दौरान एक छात्रा की चप्पलें बदलवाई गईं।</p>
<h2 dir="ltr">क्यों हो रही री-NEET? पेपर लीक विवाद</h2>
<p dir="ltr">NEET-UG परीक्षा 3 मई 2026 को आयोजित हुई थी, लेकिन पेपर लीक के आरोपों के बाद 12 मई को NTA ने इसे रद्द कर दिया। मामले की जांच CBI कर रही है और आज 21 जून को दोबारा परीक्षा हो रही है।</p>
<p dir="ltr">गौरतलब है कि लोक परीक्षा अधिनियम 2024 के तहत पेपर लीक और नकल के मामलों में 10 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपए के जुर्माने का प्रावधान है।</p>
<h2 dir="ltr">पहली बार: 15 मिनट का अतिरिक्त समय</h2>
<p dir="ltr">पहली बार परीक्षा की अवधि 15 मिनट बढ़ा दी गई है। NTA ने निर्देश पढ़ने, फोटो लगाने या सिग्नेचर करने में होने वाली देरी को कम करने के लिए यह बदलाव किया है।</p>
<h2 dir="ltr">केंद्र पर ले जाने वाले जरूरी दस्तावेज:</h2>
<ul>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">री-नीट एडमिट कार्ड</p>
</li>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">पासपोर्ट आकार फोटो</p>
</li>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">वैध फोटो पहचान पत्र</p>
</li>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">PwD/PwBD प्रमाणपत्र (यदि लागू हो)</p>
</li>
</ul>
<h2 dir="ltr">5 लाख से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात</h2>
<p dir="ltr">परीक्षा प्रक्रिया पर 5 लाख से अधिक सुरक्षाकर्मी, 6 हजार से अधिक सुपरवाइजर और 674 सिटी कोऑर्डिनेटर नजर रखेंगे। सभी केंद्रों पर सीसीटीवी निगरानी और तकनीकी प्रणालियां लगाई गई हैं।</p>
<h2 dir="ltr">ड्रेस कोड का रखें ध्यान</h2>
<p dir="ltr">अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि:</p>
<ul>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">हल्के और साधारण कपड़े पहनें</p>
</li>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">मेटल वाले बटन, चेन, गहने या भारी फुटवियर से बचें</p>
</li>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">साधारण चप्पल या सैंडल पहनें</p>
</li>
</ul>
<p dir="ltr">धार्मिक या पारंपरिक ड्रेस में आने वाले अभ्यर्थियों को सुरक्षा जांच में अधिक समय लग सकता है, इसलिए उन्हें और पहले पहुंचने की सलाह दी गई है।</p>
<h2 dir="ltr">क्यों मायने रखती है NEET परीक्षा</h2>
<p dir="ltr">NEET-UG भारत में मेडिकल और डेंटल कोर्सेज में एडमिशन के लिए राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा है। इसके माध्यम से MBBS, BDS, आयुष (BAMS, BHMS), नर्सिंग और अन्य मेडिकल कोर्सेज में एडमिशन मिलता है, जिसमें AIIMS और JIPMER जैसे प्रतिष्ठित संस्थान भी शामिल हैं। हर साल 1 लाख से अधिक सीटें इस परीक्षा के माध्यम से भरी जाती हैं।</p>
<p dir="ltr">एक संबंधित खबर में, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने अर्जेंट हियरिंग में रायपुर सेंट्रल जेल में बंद एक छात्र को NEET परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी। कोर्ट ने रायपुर पुलिस कमिश्नर और जेल अधीक्षक को छात्र को पुलिस सुरक्षा में परीक्षा केंद्र ले जाने का निर्देश दिया है।</p>
<p dir="ltr">प्रशासन ने अभिभावकों और शिक्षकों से अपील की है कि वे बच्चों को तनावमुक्त माहौल दें और किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 13:19:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दैनिक जागरण]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>NEET री-एग्जाम के दबाव में बढ़ी चिंता, दो दिन में चार छात्रों की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[तमिलनाडु और गुजरात में सामने आए नए मामले, परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों के मानसिक दबाव पर फिर उठे सवाल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/concern-increased-due-to-pressure-of-neet-re-exam-four-students/article-56327"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/neet-ug-2026-(5).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">देश में NEET-UG परीक्षा को लेकर जारी विवाद के बीच छात्रों की मानसिक स्थिति को लेकर चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। पिछले दो दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों से चार छात्रों की मौत के मामले सामने आए हैं, जिनमें तमिलनाडु और गुजरात की घटनाएं सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। इन घटनाओं ने एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव, परीक्षा व्यवस्था में अनिश्चितता और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि परीक्षा रद्द होने और दोबारा परीक्षा की घोषणा के बाद कई छात्र तनाव और असमंजस की स्थिति में हैं। तमिलनाडु के कोयंबटूर में रहने वाली 19 वर्षीय छात्रा अनुकीर्तना की मौत ने लोगों को झकझोर दिया है। वह NEET परीक्षा की तैयारी कर रही थी और मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पाने का सपना देख रही थी। परिवार के अनुसार उसने परीक्षा दी थी और परिणाम तथा काउंसलिंग प्रक्रिया का इंतजार कर रही थी। इसी बीच परीक्षा रद्द होने और दोबारा परीक्षा की घोषणा के बाद वह काफी परेशान रहने लगी थी। बताया जा रहा है कि मौत से पहले उसने अपने कुछ करीबी रिश्तेदारों और चाचा को संदेश भेजा था, जिसमें उसने भविष्य को लेकर चिंता और दोबारा परीक्षा देने के डर का जिक्र किया था। उसने यह भी लिखा था कि परिवार ने उसकी पढ़ाई पर काफी खर्च किया है और उसे उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाने की चिंता सता रही थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">परिजनों के मुताबिक छात्रा लंबे समय से डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना चाहती थी। कोयंबटूर के कोवईपुदुर क्षेत्र में रहने वाली अनुकीर्तना ने एक निजी स्कूल से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की थी और मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी में जुटी हुई थी। घटना की जानकारी मिलने के बाद परिवार और रिश्तेदारों में शोक की लहर फैल गई। मामले की सूचना मिलने पर पुलिस ने जांच शुरू की और छात्रा का मोबाइल फोन भी जब्त किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। घटना के बाद छात्रा के परिवार ने परीक्षा प्रक्रिया और हालिया घटनाक्रम पर सवाल उठाए हैं। कुछ राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने भी इस मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। कोयंबटूर में कई लोगों ने परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और छात्रों पर पड़ने वाले मानसिक दबाव को कम करने की मांग की। परिवार का कहना है कि छात्रों को केवल परीक्षा परिणामों के आधार पर नहीं आंका जाना चाहिए और उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उधर गुजरात के अहमदाबाद से भी एक दुखद मामला सामने आया है। यहां 17 वर्षीय एक छात्र की मौत हुई, जो NEET परीक्षा की तैयारी कर रहा था। पुलिस के अनुसार घटना की जांच जारी है और अभी तक किसी स्पष्ट कारण की पुष्टि नहीं हुई है। छात्र के परिजनों और परिचितों से पूछताछ की जा रही है ताकि घटना के पीछे की परिस्थितियों को समझा जा सके। इस मामले ने भी स्थानीय स्तर पर लोगों को चिंता में डाल दिया है, क्योंकि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लाखों छात्र इसी तरह के दबाव से गुजरते हैं। इससे पहले देहरादून और लखनऊ से भी दो छात्रों की मौत की खबरें सामने आई थीं। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने शिक्षा विशेषज्ञों, मनोवैज्ञानिकों और अभिभावकों को चिंतित कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता का दबाव पहले से ही काफी अधिक होता है। ऐसे में परीक्षा रद्द होने, अनिश्चितता बढ़ने या दोबारा परीक्षा की घोषणा जैसी परिस्थितियां कई छात्रों पर अतिरिक्त मानसिक बोझ डाल सकती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गौरतलब है कि NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई को आयोजित की गई थी, जिसमें देशभर से करीब 23 लाख छात्र शामिल हुए थे। परीक्षा के बाद कई राज्यों से पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोप सामने आए। जांच एजेंसियों द्वारा मामले की समीक्षा के बाद परीक्षा को रद्द कर दोबारा आयोजित करने का निर्णय लिया गया। इस फैसले का असर लाखों छात्रों पर पड़ा, जो पहले से परिणाम का इंतजार कर रहे थे। कई छात्रों और अभिभावकों ने दोबारा परीक्षा को लेकर चिंता भी जताई है। NEET देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं में से एक है। इसके माध्यम से एमबीबीएस, बीडीएस, आयुष और अन्य मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिया जाता है। देशभर के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए यह परीक्षा अनिवार्य मानी जाती है। हर साल लाखों छात्र इस परीक्षा में शामिल होते हैं और बेहतर रैंक हासिल करने के लिए लंबे समय तक तैयारी करते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 16:54:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>NEET UG परीक्षा तक टेलीग्राम पर रोक के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट पहुंची कंपनी</title>
                                    <description><![CDATA[22 जून तक लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को चुनौती, टेलीग्राम का दावा- कुछ लोगों की गलती की सजा 15 करोड़ से ज्यादा भारतीय यूजर्स को मिली]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/company-reaches-delhi-high-court-against-ban-on-telegram-till/article-56196"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/telegram-ban-india.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">टेलीग्राम पर केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध का मामला अब दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है। NEET UG 2026 की दोबारा आयोजित होने वाली परीक्षा से पहले सरकार ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर 22 जून तक रोक लगाने का फैसला किया था। इस फैसले के खिलाफ कंपनी की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत में तत्काल सुनवाई की तैयारी की गई है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब परीक्षा सुरक्षा, पेपर लीक और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही को लेकर देशभर में बहस जारी है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार का कहना है कि यह कदम छात्रों और परीक्षा प्रणाली के हित में उठाया गया है। अधिकारियों के अनुसार पिछले कुछ समय से परीक्षा से जुड़े फर्जी प्रश्नपत्र, भ्रामक दावे और कथित लीक सामग्री टेलीग्राम के विभिन्न चैनलों और ग्रुपों के माध्यम से साझा किए जाने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। इसी को ध्यान में रखते हुए परीक्षा से पहले एहतियातन यह फैसला लिया गया, ताकि किसी भी तरह की अफवाह या गलत जानकारी के प्रसार को रोका जा सके। NEET UG की पुनर्परीक्षा 21 जून को आयोजित की जानी है। इस परीक्षा को लेकर राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी यानी NTA पहले से ही अतिरिक्त सतर्कता बरत रही है। एजेंसी का मानना है कि सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए फर्जी पेपर लीक की खबरें फैलाकर छात्रों को भ्रमित किया जा सकता है। अधिकारियों के मुताबिक परीक्षा से पहले इस तरह की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए अस्थायी प्रतिबंध जरूरी माना गया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पूरे मामले में NTA के महानिदेशक अभिषेक सिंह का भी बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित और पारदर्शी बनाए रखना एजेंसी की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उनके अनुसार कुछ असामाजिक तत्व डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर छात्रों से ठगी करने और फर्जी सामग्री फैलाने का प्रयास करते रहे हैं। ऐसे में किसी भी संभावित जोखिम को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया। दूसरी ओर टेलीग्राम ने इस फैसले पर कड़ा विरोध जताया है। कंपनी का कहना है कि कुछ गलत गतिविधियों के आधार पर पूरे प्लेटफॉर्म को बंद करना उचित नहीं है। टेलीग्राम के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी पावेल डुरोव ने कहा कि भारत में करोड़ों लोग इस प्लेटफॉर्म का उपयोग व्यक्तिगत और व्यावसायिक संचार के लिए करते हैं। उनके अनुसार कुछ चैनलों या यूजर्स की गतिविधियों के कारण पूरे प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाने से 15 करोड़ से अधिक भारतीय उपयोगकर्ता प्रभावित हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">डुरोव ने यह भी कहा कि कंपनी पहले से ही संदिग्ध चैनलों और फर्जी सामग्री के खिलाफ कार्रवाई कर रही थी। उनके मुताबिक हाल के सप्ताहों में ऐसे सैकड़ों चैनलों को हटाया गया, जिन पर कथित रूप से परीक्षा से जुड़ी भ्रामक सामग्री साझा की जा रही थी। कंपनी का दावा है कि वह सरकार और जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करने के लिए तैयार है, लेकिन पूरे प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाना एक कठोर कदम है। इस बीच तकनीकी स्तर पर भी कुछ बदलाव किए जा रहे हैं। टेलीग्राम ने संकेत दिए हैं कि वह अपने मैसेज एडिटिंग सिस्टम को और पारदर्शी बनाने पर काम कर रहा है। कंपनी का कहना है कि भविष्य में एडिट किए गए संदेशों को अधिक स्पष्ट तरीके से चिह्नित किया जाएगा, ताकि पुराने संदेशों में बदलाव कर उन्हें नए कंटेंट की तरह पेश करने जैसी गतिविधियों को रोका जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रतिबंध लागू होने के बाद गूगल और एप्पल ने भी सरकारी निर्देशों का पालन करते हुए अपने-अपने ऐप स्टोर से टेलीग्राम को अस्थायी रूप से हटा दिया। इससे नए यूजर्स के लिए एप्लिकेशन डाउनलोड करना मुश्किल हो गया है। हालांकि पहले से ऐप का इस्तेमाल कर रहे कई उपयोगकर्ताओं पर इसका प्रभाव अलग-अलग स्तर पर देखा जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला केवल एक मैसेजिंग प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल अधिकारों और सार्वजनिक हित के बीच संतुलन से भी जुड़ा हुआ है। अदालत को यह तय करना होगा कि परीक्षा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उठाया गया कदम कितना उचित और अनुपातिक था। वहीं दूसरी तरफ यह भी देखा जाएगा कि क्या किसी प्लेटफॉर्म पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय वैकल्पिक उपाय अपनाए जा सकते थे। दिल्ली हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर अब छात्रों, अभिभावकों, तकनीकी विशेषज्ञों और डिजिटल अधिकारों से जुड़े संगठनों की नजर बनी हुई है। अदालत का फैसला न केवल टेलीग्राम के भविष्य के संचालन को प्रभावित कर सकता है, बल्कि भविष्य में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सरकारी नियंत्रण और नियमन से जुड़े मामलों के लिए भी महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है। 22 जून तक टेलीग्राम पर प्रतिबंध जारी है। साथ ही जानकारी के अनुसार प्लेटफॉर्म पर मैसेज एडिटिंग फीचर भी 30 जून तक सीमित रहेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 13:32:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ के 5 नए मेडिकल कॉलेजों को NMC से नहीं मिली मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[इन्फ्रास्ट्रक्चर, फैकल्टी और जरूरी दस्तावेजों की कमी के चलते राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने पांच प्रस्तावित सरकारी मेडिकल कॉलेजों के आवेदन खारिज किए, 250 नई एमबीबीएस सीटों पर फिलहाल लगा विराम]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/6a2bbc754f70f/article-55720"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chhattisgarh-medical-colleges.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार को बड़ा झटका लगा है। राज्य में प्रस्तावित पांच नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों को नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) से मान्यता नहीं मिल पाई है। आयोग ने सभी कॉलेजों के आवेदन खारिज कर दिए हैं, जिसके चलते इस शैक्षणिक सत्र से शुरू होने वाली 250 नई एमबीबीएस सीटों का रास्ता फिलहाल बंद हो गया है। इस फैसले के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग की तैयारियों और योजनाओं पर भी सवाल उठने लगे हैं। जिन पांच मेडिकल कॉलेजों को मान्यता नहीं मिली है, वे कवर्धा, जांजगीर-चांपा, मनेंद्रगढ़, दंतेवाड़ा और कुनकुरी में प्रस्तावित थे। प्रत्येक कॉलेज में 50 एमबीबीएस सीटों का प्रस्ताव रखा गया था। यदि इन संस्थानों को मंजूरी मिल जाती तो राज्य में मेडिकल शिक्षा का दायरा और बढ़ता तथा बड़ी संख्या में छात्रों को इसका लाभ मिलता। प्रदेश में हर साल हजारों छात्र मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी में शामिल होते हैं। सीटों की सीमित संख्या के कारण प्रतियोगिता काफी कठिन रहती है। ऐसे में 250 नई सीटें जुड़ने से छात्रों के लिए अवसर बढ़ सकते थे। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नई सीटों के जुड़ने से प्रवेश प्रक्रिया में कुछ राहत मिलती और कटऑफ पर भी प्रभाव देखने को मिल सकता था। छत्तीसगढ़ में 10 सरकारी और 5 निजी मेडिकल कॉलेज संचालित हैं, जिनमें कुल 2330 एमबीबीएस सीटें उपलब्ध हैं। राज्य सरकार लंबे समय से मेडिकल शिक्षा के विस्तार की दिशा में काम कर रही थी और इन नए कॉलेजों को उसी योजना का हिस्सा माना जा रहा था। हालांकि आवश्यक तैयारियां पूरी नहीं होने के कारण यह प्रयास सफल नहीं हो सका।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एनएमसी की टीम द्वारा तय मानकों के आधार पर आवेदन की समीक्षा की गई थी। जांच में पाया गया कि कई कॉलेजों में पर्याप्त इन्फ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध नहीं था। कुछ स्थानों पर भवन निर्माण और अन्य मूलभूत सुविधाओं का काम अधूरा बताया गया। वहीं मेडिकल कॉलेजों के संचालन के लिए जरूरी फैकल्टी और चिकित्सा संसाधनों की भी कमी सामने आई। बताया जा रहा है कि राज्य सरकार ने कई प्रस्तावित कॉलेजों में केवल डीन और अस्पताल अधीक्षक की प्रभार नियुक्तियां की थीं। नियमित शिक्षकों और विशेषज्ञ फैकल्टी की नियुक्ति नहीं हो सकी थी। मेडिकल शिक्षा में फैकल्टी की उपलब्धता सबसे महत्वपूर्ण मानकों में से एक मानी जाती है और इसी क्षेत्र में सबसे अधिक कमी देखने को मिली। मामले से जुड़े जानकारों का कहना है कि जिला अस्पतालों में कार्यरत कुछ डॉक्टरों को असिस्टेंट प्रोफेसर और जूनियर रेजिडेंट के रूप में पदस्थ करने के आदेश जारी किए गए थे, लेकिन यह व्यवस्था एनएमसी के मानकों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं मानी गई। आयोग कॉलेजों में स्थायी और निर्धारित संख्या में शिक्षकों की उपलब्धता को प्राथमिकता देता है। इस पूरे मामले में डॉक्टरों के लंबित प्रमोशन को भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार प्रदेश में लगभग 296 डॉक्टर पदोन्नति के पात्र हैं, जबकि कई असिस्टेंट प्रोफेसरों का प्रोबेशन पीरियड भी समय पर पूरा नहीं किया गया। यदि इन पदोन्नतियों की प्रक्रिया पहले पूरी हो जाती तो नए कॉलेजों में प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर की नियुक्ति आसान हो सकती थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अधिकारियों को इस बात का भरोसा था कि सरकारी मेडिकल कॉलेज होने के कारण उन्हें आसानी से मंजूरी मिल जाएगी। लेकिन राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग पिछले कुछ वर्षों से निर्धारित मानकों का सख्ती से पालन कर रहा है। वर्ष 2023 के बाद से निरीक्षण और मूल्यांकन की प्रक्रिया और अधिक कठोर हो गई है। ऐसे में केवल प्रस्ताव और प्रशासनिक मंजूरी के आधार पर मेडिकल कॉलेजों को मान्यता नहीं मिल सकती। एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया है कि जिन कॉलेजों के आवेदन खारिज हुए, उनमें से कुछ संस्थानों ने आवेदन के साथ हेल्थ साइंस यूनिवर्सिटी का एफिलिएशन सर्टिफिकेट भी संलग्न नहीं किया था। यह दस्तावेज किसी भी मेडिकल कॉलेज की मान्यता प्रक्रिया का आवश्यक हिस्सा माना जाता है। ऐसे में दस्तावेजी कमियों ने भी आवेदन पर नकारात्मक प्रभाव डाला। इस फैसले का सबसे बड़ा असर उन छात्रों पर पड़ सकता है जो राज्य में मेडिकल सीटों के बढ़ने की उम्मीद कर रहे थे। हर साल सीमित सीटों के कारण बड़ी संख्या में छात्रों को दूसरे राज्यों या निजी संस्थानों का रुख करना पड़ता है। नई सीटें शुरू होने से उन्हें अतिरिक्त अवसर मिल सकते थे, लेकिन अब उन्हें अगले चरण की प्रक्रिया का इंतजार करना होगा। राज्य सरकार और चिकित्सा शिक्षा विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन कमियों को दूर करना है। यदि इन्फ्रास्ट्रक्चर, फैकल्टी और दस्तावेजी प्रक्रियाओं को समय पर पूरा किया जाए तो भविष्य में इन कॉलेजों को मान्यता मिलने की संभावना बढ़ सकती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 14:00:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अब अगले साल से ऑनलाइन होगी नीट की परीक्षा, 21 जून को होगा दोबारा एग्जाम</title>
                                    <description><![CDATA[NEET-UG 2026 परीक्षा पेपर लीक के बाद रद्द, अब 21 जून को रीएग्जाम होगा। शिक्षा मंत्री ने अगले साल से ऑनलाइन परीक्षा का ऐलान किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/now-neet-exam-will-be-online-from-next-year-re-exam/article-53453"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/neet-ug-re-exam-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">NEET-UG <span lang="hi" xml:lang="hi">2026 को लेकर चल रहे विवाद के बीच</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि इस साल हुई परीक्षा में पेपर लीक जैसी घटनाओं की पुष्टि हुई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके कारण परीक्षा रद्द करनी पड़ी। अब </span>NEET-UG <span lang="hi" xml:lang="hi">का रीएग्जाम 21 जून को होगा। यह परीक्षा पहले की तरह पेपर-पेंसिल के तरीके से ही आयोजित की जाएगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अगले साल से इसे ऑनलाइन कराने की तैयारी चल रही है। सरकार इस बार कोई रिस्क नहीं लेना चाहती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर जब लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों का दबाव है। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">7 मई को गड़बड़ी की पहली जानकारी मिली थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद एनटीए ने सरकार को रिपोर्ट भेजी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और 12 मई को परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया गया।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सरकार यह नहीं चाहती थी कि किसी भी गलत तरीके से फायदा उठाने वाले उम्मीदवार का चयन हो। उन्होंने माना कि यह निर्णय आसान नहीं था</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन हालात ऐसे थे कि परीक्षा रद्द करना पड़ा। रीएग्जाम में छात्रों को 15 मिनट अतिरिक्त समय दिया जाएगा और वे अपनी पसंद के परीक्षा केंद्र का चुनाव कर सकेंगे। इससे उन छात्रों को राहत मिलेगी जो दूसरे राज्यों में सेंटर मिलने की परेशानी का सामना कर रहे थे। इस साल 3 मई को परीक्षा देश के 551 शहरों और विदेश के 14 शहरों में आयोजित की गई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें 5400 से ज्यादा परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। परीक्षा के बाद कई राज्यों से पेपर लीक और सॉल्वर गैंग की समस्याएं सामने आई थीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और सोशल मीडिया पर भी लगातार सवाल उठ रहे थे। स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि मामला जांच एजेंसियों तक पहुंच गया।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शिक्षा मंत्री ने कहा कि राधाकृष्ण समिति की सिफारिशों को लागू करने के बावजूद इतनी बड़ी चूक कैसे हुई</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसकी भी जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि इस बार सरकारी मशीनरी को पहले से ज्यादा सावधान रहने के निर्देश दिए गए हैं ताकि दोबारा कोई गड़बड़ी न हो। उन्होंने अपने आप को सिर्फ मंत्री नहीं बल्कि एक अभिभावक भी बताया और कहा कि लाखों छात्रों के भविष्य को देखते हुए यह कठिन निर्णय लेना पड़ा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों की यात्रा और सुविधा को लेकर राज्य सरकारों से बातचीत की जाएगी। कई राज्यों में छात्रों के लिए विशेष परिवहन व्यवस्था भी की जा सकती है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दूसरी ओर</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, NEET <span lang="hi" xml:lang="hi">पेपर लीक मामले में </span>CBI <span lang="hi" xml:lang="hi">की जांच तेजी से चल रही है। एजेंसी अब तक सात लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें राजस्थान से मांगी लाल बिंवाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दिनेश बिंवाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विकास बिंवाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरियाणा के गुरुग्राम निवासी यश यादव और नासिक के शुभम खैरनार शामिल हैं। इन सभी को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां से सात दिन की कस्टडी मंजूर हुई। इससे पहले पुणे की ब्यूटीशियन मनीषा वाघमारे और नासिक के धनंजय लोखंडे की गिरफ्तारी भी हुई थी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जांच एजेंसियों को कई राज्यों में फैले नेटवर्क के संकेत मिले हैं। आने वाले दिनों में कुछ और गिरफ्तारियों की उम्मीद की जा रही है। इस पूरे मामले ने देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 May 2026 16:51:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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