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                <title>Artificial Intelligence - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Artificial Intelligence RSS Feed</description>
                
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                <title>सर्जरी में इतिहास रचा:इंसानों जैसे रोबोट ने पहली बार जीवित शरीर पर किया सफल ऑपरेशन</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका के वैज्ञानिकों ने टेलीऑपरेटेड ह्यूमनॉइड रोबोट से प्रीक्लिनिकल ट्रायल में सफल गॉलब्लैडर सर्जरी की, भविष्य में दूरदराज के मरीजों तक पहुंच सकती है विशेषज्ञ इलाज की सुविधा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/history-created-in-surgery-human-like-robot-performed-successful-operation-on/article-58421"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/humanoid-robot.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">चिकित्सा विज्ञान लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है और अब सर्जरी के क्षेत्र में एक ऐसी उपलब्धि सामने आई है, जो भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर बदल सकती है। अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, सैन डिएगो (UC San Diego) के वैज्ञानिकों और सर्जनों की टीम ने पहली बार इंसानों जैसे दिखने वाले ह्यूमनॉइड रोबोट की मदद से जीवित प्राणियों पर सफल न्यूनतम इनवेसिव (Minimally Invasive) सर्जरी करने में सफलता हासिल की है। यह उपलब्धि आधुनिक रोबोटिक सर्जरी के इतिहास में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस शोध के परिणाम प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका नेचर में 8 जुलाई 2026 को प्रकाशित किए गए। अध्ययन का शीर्षक "In vivo feasibility study of humanoid robots in surgery" है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह पहली बार है जब किसी ह्यूमनॉइड रोबोट ने जीवित शरीर पर सर्जिकल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया है। अब तक अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले रोबोटिक सर्जरी सिस्टम किसी विशेष ऑपरेशन के लिए तैयार किए गए बड़े और महंगे उपकरण होते हैं। इन्हें संचालित करने के लिए विशेष ऑपरेशन थिएटर, अलग इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रशिक्षित टीम की आवश्यकता होती है। लेकिन इस नई तकनीक में वैज्ञानिकों ने सामान्य उपयोग वाले ह्यूमनॉइड रोबोट को सर्जरी के लिए तैयार किया है, जिससे भविष्य में अस्पतालों की लागत और तकनीकी जटिलता दोनों कम हो सकती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">शोधकर्ताओं ने इस रोबोटिक सिस्टम को "सर्जी" (Surgie) नाम दिया है। यह रोबोट लगभग पांच फीट लंबा और करीब 60 पाउंड वजन का है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह अस्पतालों में पहले से इस्तेमाल होने वाले सामान्य लैप्रोस्कोपिक उपकरणों के साथ काम कर सकता है। इसके लिए किसी विशेष सर्जिकल मशीन या महंगे उपकरण की आवश्यकता नहीं पड़ती। परीक्षण के दौरान अनुभवी सर्जनों ने दूर बैठकर एक विशेष टेलीऑपरेशन सिस्टम के जरिए रोबोट को नियंत्रित किया। रोबोट सर्जन के हाथों की हर गतिविधि की नकल करते हुए उसी प्रकार ऑपरेशन करता रहा। इस तकनीक का उद्देश्य यह जांचना था कि क्या मौजूदा ह्यूमनॉइड रोबोट इतनी सटीकता, नियंत्रण और सुरक्षा के साथ सर्जरी कर सकते हैं, जितनी आधुनिक रोबोटिक सिस्टम से अपेक्षित होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रीक्लिनिकल ट्रायल के तहत दो बड़े गैर-प्राइमेट स्तनधारी जीवों पर गॉलब्लैडर निकालने की सर्जरी की गई। पहले ऑपरेशन में एक ह्यूमनॉइड रोबोट ने मानव सर्जन के साथ मिलकर काम किया, जबकि दूसरे ऑपरेशन में दो टेलीऑपरेटेड ह्यूमनॉइड रोबोट ने मिलकर पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया। दोनों ही मामलों में सर्जरी सफल रही और किसी बड़ी तकनीकी विफलता की सूचना नहीं मिली।</p>
<p style="text-align:justify;">वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सफलता केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वास्तविक सर्जिकल परिस्थितियों में रोबोट की क्षमता को भी साबित करती है। इस परियोजना के दौरान पहले प्रयोगशाला परीक्षण, फिर ड्राई लैब और अंत में वास्तविक ऑपरेशन जैसी कई चरणों में तकनीक का मूल्यांकन किया गया। दुनिया के कई देशों में प्रशिक्षित सर्जनों की भारी कमी है। दूरदराज के इलाकों में मरीजों को समय पर विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं मिल पाते, जिससे इलाज में देरी होती है। ऐसे में टेलीऑपरेटेड ह्यूमनॉइड रोबोट भविष्य में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। यदि तकनीक और विकसित होती है, तो विशेषज्ञ डॉक्टर हजारों किलोमीटर दूर बैठकर भी मरीजों की सर्जरी कर सकेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">यूसी सैन डिएगो के प्रोफेसर माइकल यिप के अनुसार, इस तकनीक से केवल अमेरिका ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि जहां विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं, वहां भी भविष्य में रोबोटिक सर्जरी के जरिए मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा। इस शोध का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि ह्यूमनॉइड रोबोट बिना बड़े बदलाव के सामान्य ऑपरेशन थिएटर में आसानी से काम करने में सक्षम रहे। हालांकि कुछ विशेष एडाप्टर तैयार किए गए ताकि रोबोट सामान्य सर्जिकल उपकरण पकड़ सके, लेकिन अस्पताल की मौजूदा व्यवस्था में किसी बड़े बदलाव की जरूरत नहीं पड़ी। वैज्ञानिकों का मानना है कि यही विशेषता भविष्य में इस तकनीक को अधिक उपयोगी बना सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि अभी यह तकनीक पूरी तरह व्यावसायिक उपयोग के लिए तैयार नहीं है। ऑपरेशन के दौरान रोबोट को कई बार दोबारा कैलिब्रेट करना पड़ा, जिससे सर्जरी सामान्य रोबोटिक सिस्टम की तुलना में अधिक समय तक चली। इसके अलावा सर्जन के आदेश और रोबोट की प्रतिक्रिया के बीच कुछ तकनीकी देरी (Latency) भी देखी गई, जिसे भविष्य में बेहतर बनाने की जरूरत होगी। शोधकर्ताओं का कहना है कि नियंत्रण प्रणाली, सुरक्षा, विश्वसनीयता और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में और सुधार होने के बाद ही इन रोबोट्स का वास्तविक अस्पतालों में नियमित उपयोग संभव हो सकेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 17:11:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, AI के फर्जी कानूनी उदाहरणों को बताया न्याय व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[एनसीएलटी का फैसला रद्द करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से तैयार किए गए झूठे कानूनी उदाहरण अदालतों में पेश करना न्यायिक व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर असर डाल सकता है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/supreme-courts-strict-comment-calls-fake-legal-examples-of-ai/article-57706"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/supreme-court-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने अदालतों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार किए गए फर्जी कानूनी उदाहरणों के इस्तेमाल पर कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे न्याय व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताया है। अदालत ने कहा कि AI तकनीक अपने आप में समस्या नहीं है, लेकिन यदि उससे तैयार की गई गलत या मनगढ़ंत जानकारी को असली कानूनी मिसाल बताकर अदालत के सामने पेश किया जाता है तो इससे न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सीधा असर पड़ता है। कोर्ट ने इस खतरे की गंभीरता समझाने के लिए भोपाल गैस त्रासदी में मिथाइल आइसोसाइनेट गैस के रिसाव का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह जहरीली गैस का प्रभाव दूरगामी और विनाशकारी था, उसी तरह न्यायिक प्रक्रिया में झूठी कानूनी जानकारी का प्रवेश भी बेहद नुकसानदायक हो सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने यह टिप्पणी नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) मुंबई के एक आदेश को रद्द करते हुए की। मामला एस्सेल इन्फ्राप्रोजेक्ट लिमिटेड, जम्मू-कश्मीर बैंक लिमिटेड और पूजा रमेश सिंह से जुड़े दिवालियापन विवाद का था। एनसीएलटी ने दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) की धारा-7 के तहत दायर याचिका को स्वीकार करते हुए अपने फैसले में कई ऐसे कानूनी मामलों का हवाला दिया था, जिनका वास्तविक अस्तित्व ही नहीं था। जांच के दौरान सामने आया कि आदेश में जिन फैसलों का उल्लेख किया गया, उनमें कुछ पूरी तरह मनगढ़ंत थे और उनकी कानूनी साइटेशन भी वास्तविक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती थीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालतों में किसी भी फैसले का आधार केवल प्रमाणिक और सत्यापित कानूनी सामग्री होनी चाहिए। यदि किसी आदेश में ऐसे मामलों का हवाला दिया जाए जो वास्तव में मौजूद ही नहीं हैं, तो यह केवल तकनीकी गलती नहीं बल्कि न्यायिक प्रक्रिया की मूल भावना के खिलाफ है। पीठ ने स्पष्ट किया कि इस तरह की चूक लोगों के न्यायपालिका पर भरोसे को कमजोर कर सकती है और भविष्य के मामलों में भी गलत कानूनी आधार तैयार कर सकती है। अदालत ने कहा कि न्याय व्यवस्था का पूरा ढांचा सत्य, पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर आधारित है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की फर्जी जानकारी के लिए कोई जगह नहीं हो सकती।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामले की सुनवाई के दौरान जम्मू-कश्मीर बैंक लिमिटेड ने शपथपत्र दाखिल कर कहा कि उसके वकीलों ने अपने तर्कों में इन कथित मामलों का कोई उल्लेख नहीं किया था। बैंक के अनुसार, एनसीएलटी ने अपने स्तर पर की गई कानूनी रिसर्च के दौरान इन उदाहरणों को आदेश में शामिल किया। इस दलील के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पूरे रिकॉर्ड की समीक्षा की और पाया कि आदेश में शामिल कुछ कानूनी संदर्भ वास्तविक न्यायिक अभिलेखों में उपलब्ध ही नहीं थे। इसके बाद अदालत ने एनसीएलटी का आदेश रद्द कर दिया और भविष्य के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश भी जारी किए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि वह AI तकनीक के उपयोग के खिलाफ नहीं है। अदालत ने कहा कि आधुनिक तकनीक न्यायिक शोध और दस्तावेजों की तैयारी में उपयोगी हो सकती है, लेकिन अंतिम जिम्मेदारी हमेशा इंसानों की ही रहेगी। यदि कोई वकील बिना तथ्य जांचे AI से प्राप्त जानकारी को अदालत में पेश करता है, तो यह उसकी गंभीर पेशेवर लापरवाही मानी जाएगी। इसी तरह यदि कोई न्यायिक अधिकारी या न्यायाधीश बिना सत्यापन के ऐसी सामग्री पर भरोसा करता है, तो यह भी न्यायिक जिम्मेदारी के अनुरूप नहीं माना जाएगा। अदालत ने कहा कि तकनीक केवल सहायक हो सकती है, लेकिन निर्णय और तथ्य सत्यापन का दायित्व मानव विवेक पर ही आधारित रहना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पीठ ने कहा कि केवल चेतावनी देना पर्याप्त नहीं होगा। यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर या लापरवाही से अदालत में फर्जी AI-आधारित कानूनी सामग्री प्रस्तुत करता है, तो उसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए। अदालत ने इस मुद्दे को भविष्य की न्यायिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि समय रहते स्पष्ट नियम बनाना आवश्यक है ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। न्यायपालिका में विश्वास बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि अदालतों में प्रस्तुत हर कानूनी संदर्भ का स्वतंत्र सत्यापन किया जाए। इसी क्रम में सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया को एक विशेषज्ञ समिति गठित करने की सिफारिश की है। अदालत का कहना है कि यह समिति अदालतों में AI के जिम्मेदार उपयोग के लिए दिशा-निर्देश तैयार करे और यह सुनिश्चित करे कि किसी भी वकील या पक्षकार द्वारा फर्जी अथवा भ्रामक AI सामग्री प्रस्तुत न की जाए। यदि ऐसे मामलों में नियमों का उल्लंघन होता है तो उसके लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई का भी प्रावधान होना चाहिए। अदालत ने कहा कि तकनीक का उपयोग स्वागतयोग्य है, लेकिन न्याय की प्रक्रिया में सत्य और प्रमाणिकता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 06:06:00 +0530</pubDate>
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                <title>क्या युवा अब दोस्तों से ज्यादा ChatGPT पर करने लगे हैं भरोसा?</title>
                                    <description><![CDATA[AI चैटबॉट्स से बढ़ती बातचीत केवल तकनीक का प्रभाव नहीं, बल्कि बदलती जीवनशैली, अकेलेपन, गोपनीयता और बिना जजमेंट के सुने जाने की चाह का भी संकेत है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/opinion/have-youth-now-started-trusting-chatgpt-more-than-friends/article-57470"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ai-and-youth.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पिछले कुछ वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने लोगों के काम करने, सीखने और जानकारी हासिल करने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। लेकिन अब एक नया बदलाव भी तेजी से देखने को मिल रहा है। कई युवा केवल पढ़ाई, नौकरी या जानकारी के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी भावनाएं, उलझनें, रिश्तों की समस्याएं और जीवन से जुड़े सवाल भी ChatGPT जैसे AI चैटबॉट्स से साझा कर रहे हैं। यह सवाल अब अक्सर उठने लगा है कि क्या आज की युवा पीढ़ी इंसानों से ज्यादा AI के साथ अपने मन की बात करने में सहज महसूस करती है? इसका जवाब पूरी तरह "हां" या "नहीं" में देना आसान नहीं है, लेकिन यह जरूर कहा जा सकता है कि AI ने युवाओं के लिए संवाद का एक नया माध्यम तैयार किया है। इसके पीछे कई सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और तकनीकी कारण हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>बिना जजमेंट के अपनी बात कहने की आजादी</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">आज का युवा सबसे ज्यादा जिस चीज की तलाश में है, वह है ऐसा व्यक्ति या माध्यम जो उसकी बात बिना टोके, बिना आलोचना किए और बिना किसी पूर्वाग्रह के सुने। कई बार परिवार, दोस्त या रिश्तेदार सलाह देने से पहले ही निर्णय सुना देते हैं। इससे कई युवा अपनी भावनाएं दबाकर रखना बेहतर समझते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">AI के साथ बातचीत में उन्हें ऐसा महसूस होता है कि उनकी बात को बिना किसी व्यक्तिगत राय के सुना जा रहा है। यही कारण है कि वे कई बार ऐसी बातें भी लिख देते हैं, जो शायद किसी करीबी से कहने में हिचकिचाते।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>गोपनीयता का एहसास</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">डिजिटल युग में प्राइवेसी एक बड़ा मुद्दा बन चुकी है। युवाओं को अक्सर यह चिंता रहती है कि कहीं उनकी निजी बातें किसी और तक न पहुंच जाएं। AI के साथ बातचीत करते समय उन्हें अपेक्षाकृत अधिक गोपनीयता का अनुभव होता है। यही वजह है कि वे रिश्तों, करियर, आत्मविश्वास, तनाव या भविष्य से जुड़े सवाल खुलकर पूछते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, यह भी जरूरी है कि उपयोगकर्ता किसी भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अत्यधिक संवेदनशील या व्यक्तिगत जानकारी साझा करते समय सावधानी बरतें।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>हर समय उपलब्ध रहने की सुविधा</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">इंसानी रिश्तों की अपनी सीमाएं होती हैं। हर दोस्त, परिवार का सदस्य या सलाहकार हर समय उपलब्ध नहीं हो सकता। लेकिन AI दिन हो या रात, किसी भी समय बातचीत के लिए तैयार रहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">रात के दो बजे अगर कोई छात्र परीक्षा के तनाव में हो या कोई युवा अपने करियर को लेकर परेशान हो, तो उसे तुरंत बातचीत का अवसर मिल जाता है। यही सुविधा AI को अलग बनाती है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>डिजिटल पीढ़ी की नई आदतें</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">आज की पीढ़ी बचपन से ही इंटरनेट, स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के बीच बड़ी हुई है। उनके लिए चैट करके अपनी बात कहना कई बार आमने-सामने बातचीत से भी आसान होता है। यही वजह है कि AI के साथ संवाद उन्हें स्वाभाविक लगता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह केवल तकनीक की आदत नहीं, बल्कि बदलती संचार शैली का भी हिस्सा है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>क्या AI सचमुच दोस्त बन सकता है?</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">यह सबसे महत्वपूर्ण सवाल है। AI बातचीत कर सकता है, जानकारी दे सकता है, विचारों को व्यवस्थित करने में मदद कर सकता है और कई बार प्रेरित भी कर सकता है। लेकिन वह इंसान की तरह भावनाओं को महसूस नहीं करता।</p>
<p style="text-align:justify;">AI के पास न व्यक्तिगत अनुभव होते हैं और न ही वास्तविक संवेदनाएं। वह आपके शब्दों को समझने की कोशिश करता है, लेकिन आपके जीवन को उसी तरह महसूस नहीं कर सकता, जैसे कोई करीबी मित्र या परिवार का सदस्य कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए AI को एक सहायक संवाद माध्यम माना जा सकता है, लेकिन वास्तविक रिश्तों का विकल्प नहीं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>मानसिक स्वास्थ्य के संदर्भ में AI</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">आज मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता पहले की तुलना में काफी बढ़ी है। कई लोग शुरुआती स्तर पर अपनी चिंता, तनाव या भावनात्मक उलझनों को समझने के लिए AI से बातचीत करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यह आत्मचिंतन और अपनी भावनाओं को शब्द देने में मददगार हो सकता है। लेकिन यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय से अवसाद, अत्यधिक चिंता, आत्महत्या के विचार या गंभीर मानसिक परेशानी हो, तो केवल AI पर निर्भर रहना उचित नहीं है। ऐसे मामलों में प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिक, मनोचिकित्सक या भरोसेमंद व्यक्ति से संपर्क करना आवश्यक होता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>क्या युवा रिश्तों से दूर हो रहे हैं?</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">कई लोगों का मानना है कि AI के बढ़ते उपयोग से इंसानी रिश्ते कमजोर हो रहे हैं। लेकिन इसे पूरी तरह सही नहीं कहा जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">असल में युवा ऐसे माहौल की तलाश में हैं जहां उन्हें बिना डर, बिना शर्म और बिना आलोचना के अपनी बात रखने का अवसर मिले। यदि परिवार, मित्र और समाज ऐसा सुरक्षित वातावरण प्रदान करें, तो शायद AI केवल एक सहायक माध्यम बनकर रह जाएगा, मुख्य सहारा नहीं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>भविष्य में क्या होगा?</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">आने वाले समय में AI और इंसानी रिश्ते एक-दूसरे के विरोधी नहीं होंगे। AI जानकारी, मार्गदर्शन, योजना बनाने और शुरुआती भावनात्मक सहायता में उपयोगी साबित हो सकता है। वहीं, जीवन की वास्तविक खुशियां, अपनापन, विश्वास, प्रेम और कठिन समय में साथ केवल इंसानी रिश्ते ही दे सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">तकनीक जितनी भी विकसित हो जाए, एक सच्चे दोस्त की मुस्कान, माता-पिता का स्नेह, भाई-बहन का साथ या किसी प्रिय व्यक्ति का हौसला आज भी किसी मशीन से कहीं अधिक मूल्यवान है।</p>
<p style="text-align:justify;">AI ने युवाओं को अपनी बात कहने का एक नया और सुविधाजनक मंच दिया है। बिना जजमेंट के बातचीत, हर समय उपलब्धता और डिजिटल सहजता इसकी सबसे बड़ी ताकत हैं। लेकिन यह भी उतना ही सच है कि AI इंसानी भावनाओं का विकल्प नहीं बन सकता। सबसे बेहतर रास्ता यही है कि AI का उपयोग सीखने, समझने और आत्मचिंतन के लिए किया जाए, जबकि जीवन के सबसे महत्वपूर्ण रिश्तों को भी उतना ही समय और महत्व दिया जाए। आखिरकार, तकनीक सुविधा दे सकती है, लेकिन अपनापन, विश्वास और सच्चा साथ आज भी इंसानों से ही मिलता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपीनियन</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/opinion/have-youth-now-started-trusting-chatgpt-more-than-friends/article-57470</link>
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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 00:00:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>2030 तक AI से 22% नौकरियों पर असर, डिग्री से ज्यादा स्किल्स की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[WEF की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, 9.2 करोड़ नौकरियां प्रभावित होने की आशंका; चीन ने 12 हजार से ज्यादा डिग्री प्रोग्राम बंद कर AI आधारित कोर्स शुरू किए]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/headline-ai-to-impact-22-jobs-by-2030-demand-for/article-56050"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ai-jobs-2030.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब केवल तकनीक की दुनिया तक सीमित नहीं रह गया है। इसका असर तेजी से रोजगार, शिक्षा और उद्योगों पर दिखाई देने लगा है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2030 तक दुनिया की करीब 22 प्रतिशत नौकरियां AI और ऑटोमेशन से प्रभावित हो सकती हैं। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि आने वाले वर्षों में लगभग 9.2 करोड़ नौकरियां खत्म हो सकती हैं या उनका स्वरूप पूरी तरह बदल सकता है। हालांकि इसके साथ ही करीब 17 करोड़ नई नौकरियां भी पैदा होने की संभावना जताई गई है। इसका मतलब यह है कि रोजगार के अवसर खत्म नहीं होंगे, लेकिन काम करने का तरीका और जरूरी योग्यताएं पहले से काफी अलग होंगी। सबसे ज्यादा असर प्रशासनिक कार्यों, डेटा एंट्री, बेसिक कंटेंट राइटिंग, कस्टमर सपोर्ट और अकाउंटिंग जैसे क्षेत्रों पर पड़ रहा है। इन क्षेत्रों में कई प्रक्रियाएं तेजी से ऑटोमेट हो रही हैं। दूसरी ओर डेटा साइंस, मशीन लर्निंग, साइबर सिक्योरिटी, क्लाउड कंप्यूटिंग और ग्रीन एनर्जी जैसे सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहे हैं। कंपनियां अब ऐसे कर्मचारियों को तलाश रही हैं जो केवल डिग्रीधारी न हों, बल्कि AI टूल्स के साथ काम करने की क्षमता भी रखते हों। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में नौकरी पाने और बनाए रखने के लिए केवल शैक्षणिक योग्यता पर्याप्त नहीं होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">देश में आईटी, कानून, कॉमर्स, ट्रांसलेशन, डिजाइन और लाइब्रेरी साइंस जैसे क्षेत्रों में बदलाव की शुरुआत दिखाई देने लगी है। जिन कामों के लिए पहले बड़ी संख्या में लोगों की जरूरत होती थी, उनमें अब AI टूल्स की मदद से कम समय और कम संसाधनों में काम पूरा किया जा रहा है। एचआर कंपनी टीमलीज के मुताबिक करीब 40 प्रतिशत कंपनियां अब हाइब्रिड स्किल्स को प्राथमिकता दे रही हैं। यानी उम्मीदवार के पास डिग्री के साथ AI आधारित तकनीकों की समझ होना भी जरूरी माना जा रहा है। वहीं नैस्कॉम की रिपोर्ट बताती है कि देश के 82 प्रतिशत बीसीए और एमसीए ग्रेजुएट्स के पास AI टूल्स की औपचारिक ट्रेनिंग नहीं है, जो भविष्य में उनके लिए चुनौती बन सकती है।  AI इंसानों की जगह पूरी तरह नहीं लेगा, लेकिन जो लोग AI का प्रभावी उपयोग करना जानते हैं, वे निश्चित रूप से उन लोगों से आगे निकल जाएंगे जो नई तकनीक को अपनाने से बच रहे हैं। आईबीएम इंस्टीट्यूट फॉर बिजनेस वैल्यू की रिपोर्ट भी इसी ओर इशारा करती है। रिपोर्ट के अनुसार आने वाले समय में कंपनियां ऐसे कर्मचारियों को ज्यादा महत्व देंगी जो AI की मदद से अपनी उत्पादकता और कार्यक्षमता बढ़ा सकें।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस बीच चीन ने शिक्षा क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए पिछले चार वर्षों में 12,200 से अधिक अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम बंद या निलंबित कर दिए हैं। इसके साथ ही करीब 10,200 नए कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। इनमें AI, रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी और अन्य उभरते तकनीकी क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है। चीन सरकार का मानना है कि भविष्य की अर्थव्यवस्था को ऐसे युवाओं की जरूरत होगी जो नई तकनीकों के साथ काम कर सकें। यही कारण है कि कला, मानविकी, विदेशी भाषाओं और कुछ पारंपरिक प्रबंधन पाठ्यक्रमों में कटौती की गई है। भारत में भी इसी तरह के संकेत दिखाई देने लगे हैं। कर्नाटक सरकार ने हाल ही में सरकारी कॉलेजों में कम दाखिले वाले सैकड़ों पारंपरिक कोर्स कॉम्बिनेशन बंद कर दिए हैं और 1300 से ज्यादा कोर्सों में सीटें कम कर दी हैं। शिक्षा विशेषज्ञ इसे बदलती रोजगार जरूरतों का संकेत मान रहे हैं। उनका कहना है कि आने वाले वर्षों में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को अपने पाठ्यक्रमों में बड़े बदलाव करने होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 12:06:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>भारत बना दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी डिजिटल इकॉनोमी, एआई प्रदर्शन में भी चौथा स्थान</title>
                                    <description><![CDATA[डिजिटल कनेक्टिविटी, फिनटेक और नवाचार के दम पर भारत ने कई विकसित देशों को पीछे छोड़ा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/india-becomes-the-worlds-fifth-largest-digital-economy-and-also/article-54581"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/india-digital-economy.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। देश अब दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी डिजिटल इकॉनोमी बन गया है। हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार भारत ने डिजिटल प्रदर्शन के मामले में जर्मनी, फ्रांस, जापान और कनाडा जैसी विकसित अर्थव्यवस्थाओं को पीछे छोड़ दिया है। यह उपलब्धि ऐसे समय में सामने आई है जब देश में डिजिटल सेवाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है और करोड़ों लोग रोजमर्रा के कामों के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस की ओर से जारी ‘इंडियाज डिजिटल इकोनॉमी 2026’ रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2025 में भारत डिजिटलाइजेशन के मामले में आठवें स्थान पर था, लेकिन एक वर्ष के भीतर तीन स्थान की छलांग लगाकर पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल भुगतान, इंटरनेट पहुंच, मोबाइल कनेक्टिविटी और तकनीकी नवाचार ने इस प्रगति में अहम भूमिका निभाई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रिपोर्ट में दुनिया की जीडीपी के लगभग 96 प्रतिशत हिस्से को कवर करने वाले 71 देशों का अध्ययन किया गया। इस अध्ययन में पाया गया कि भारत की डिजिटल क्षमता और तकनीकी विस्तार कई स्थापित अर्थव्यवस्थाओं से अधिक तेजी से बढ़ रहा है। डिजिटल क्षेत्र में देश की मजबूती का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारत ने डिजिटल माध्यमों से करीब 31 लाख करोड़ रुपये का व्यापार किया है। यह आंकड़ा देश में बढ़ते डिजिटल लेनदेन और ऑनलाइन आर्थिक गतिविधियों की ओर इशारा करता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के क्षेत्र में भी भारत ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। चिप्स-एआई इंडेक्स में भारत अमेरिका, चीन और सिंगापुर के बाद चौथे स्थान पर पहुंच गया है। यह रैंकिंग देश की तकनीकी क्षमता, प्रतिभा और एआई अपनाने की गति को दर्शाती है। पिछले कुछ वर्षों में एआई आधारित स्टार्टअप, अनुसंधान परियोजनाएं और डिजिटल सेवाओं में तेजी से वृद्धि हुई है, जिसका असर अब वैश्विक स्तर पर दिखाई देने लगा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह भी है कि दुनिया के अधिकांश एआई उपयोगकर्ता अब विकासशील देशों में मौजूद हैं। आंकड़ों के अनुसार वैश्विक स्तर पर लगभग 72 प्रतिशत एआई उपयोगकर्ता विकासशील देशों से आते हैं। भारत और चीन मिलकर दुनिया के करीब 40 प्रतिशत एआई उपयोगकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनमें भारत अकेले लगभग 26 प्रतिशत वैश्विक एआई उपयोगकर्ताओं का हिस्सा रखता है। यह दर्शाता है कि देश में नई तकनीकों को अपनाने की गति काफी तेज है और आम लोगों के बीच भी डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग तेजी से बढ़ा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारत को दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एआई टैलेंट हब भी माना जा रहा है। बड़ी संख्या में भारतीय इंजीनियर, डेटा साइंटिस्ट और तकनीकी विशेषज्ञ वैश्विक कंपनियों और स्टार्टअप्स में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। देश के विभिन्न तकनीकी संस्थान और विश्वविद्यालय भी एआई और मशीन लर्निंग से जुड़े पाठ्यक्रमों पर लगातार जोर दे रहे हैं। इसके कारण आने वाले वर्षों में भारत की तकनीकी क्षमता और मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हालांकि रिपोर्ट में कुछ चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया गया है। एआई उपयोग और प्रतिभा के मामले में भारत मजबूत स्थिति में है, लेकिन निवेश के क्षेत्र में अभी भी काफी अंतर दिखाई देता है। वैश्विक निजी एआई निवेश का केवल लगभग 1 प्रतिशत हिस्सा ही भारत को प्राप्त हो रहा है। यह आंकड़ा बताता है कि तकनीकी क्षमता होने के बावजूद निवेश आकर्षित करने के लिए अभी काफी काम करने की जरूरत है। एडवांस सेमीकंडक्टर चिप्स, उच्च क्षमता वाले कंप्यूटिंग संसाधन और बड़े एआई मॉडल अभी भी दुनिया के कुछ चुनिंदा देशों तक सीमित हैं। ऐसे में भारत को अपने डिजिटल विस्तार को मजबूत करने के लिए अनुसंधान, नवाचार और इंफ्रास्ट्रक्चर पर अधिक निवेश करना होगा। साथ ही स्टार्टअप, उद्योग और विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग बढ़ाने की भी आवश्यकता है ताकि नई तकनीकों का विकास देश के भीतर ही हो सके।</p>
<p style="text-align:justify;">डिजिटल इंडिया अभियान, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI), तेज इंटरनेट विस्तार और सरकारी डिजिटल सेवाओं ने भारत को वैश्विक डिजिटल मानचित्र पर एक मजबूत पहचान दिलाई है। ग्रामीण क्षेत्रों तक इंटरनेट और डिजिटल भुगतान की पहुंच बढ़ने से भी डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। यही वजह है कि भारत अब केवल उपभोक्ता बाजार नहीं बल्कि डिजिटल नवाचार और तकनीकी विकास का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 16:00:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रायपुर के रिटायर्ड प्रोफेसर ने बनाया AI प्लेटफॉर्म, ChatGPT-जेमिनाई से बताया बेहतर</title>
                                    <description><![CDATA[रायपुर के रिटायर्ड प्रोफेसर गौरव तिवारी ने “जेमिनाई GT” नाम का AI प्लेटफॉर्म तैयार करने का दावा किया है, जो 8K इमेज जनरेट कर रहा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/retired-professor-of-raipur-created-ai-platform-chatgpt-said-it/article-54252"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/professor-from-raipur-develops-new-ai-platform.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के एक रिटायर्ड प्रोफेसर ने एक ऐसा </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">AI <span lang="hi" xml:lang="hi">प्लेटफॉर्म बनाने का दावा किया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो टेक सेक्टर में काफी चर्चा का विषय बन गया है। गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज के पूर्व प्रोफेसर गौरव तिवारी ने अपना </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">सिस्टम नाम </span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">जेमिनाई </span>GT” <span lang="hi" xml:lang="hi">रखा है। उनका कहना है कि यह प्लेटफॉर्म कई मामलों में </span>ChatGPT <span lang="hi" xml:lang="hi">और गूगल जेमिनाई जैसे बड़े </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">टूल्स से आगे है। खास बात ये है कि यह सिस्टम कुछ ही सेकंड में </span>8K <span lang="hi" xml:lang="hi">रिजॉल्यूशन की हाई-क्वालिटी इमेज तैयार कर रहा है। फिलहाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह प्लेटफॉर्म बीटा फेज में है और इसे सीमित यूजर्स के लिए उपलब्ध कराया गया था। शुरुआती ट्रायल में लगभग </span>30<span lang="hi" xml:lang="hi"> हजार यूजर्स ने इसे इस्तेमाल किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अचानक सर्वर पर लोड बढ़ने के कारण इसे अस्थायी रूप से बंद किया गया है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">गौरव तिवारी आईटी और सॉफ्टवेयर सेक्टर में काफी समय से सक्रिय हैं। उन्होंने बताया कि इस </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">AI <span lang="hi" xml:lang="hi">प्लेटफॉर्म को विकसित करने में करीब दो साल का वक्त लगा। उनके मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह प्लेटफॉर्म सिर्फ चैटिंग या कंटेंट बनाने तक सीमित नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह वेबसाइट डिजाइनिंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मोबाइल ऐप डेवलपमेंट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वीडियो और फोटो एन्हांसमेंट से लेकर एडवांस </span>3D <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजाइनिंग तक काफी काम कर सकता है। उनका दावा है कि अगर कोई यूजर केवल टेक्स्ट में अपनी जरूरत लिख देता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">खुद ही वेबसाइट का डिजाइन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कलर थीम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बटन और मोबाइल फ्रेंडली लेआउट तैयार कर देगा। इसका मतलब है कि जिन्हें कोडिंग की जानकारी नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वे भी आसानी से बेसिक वेबसाइट और ऐप बना सकेंगे। बताया गया है कि इंटरफेस भी काफी यूजर-फ्रेंडली है ताकि सामान्य यूजर्स बिना ज्यादा तकनीकी ज्ञान के भी इसका इस्तेमाल कर सकें।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जेमिनाई </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">GT <span lang="hi" xml:lang="hi">की </span>8K <span lang="hi" xml:lang="hi">इमेज जनरेशन क्षमता ने काफी ध्यान खींचा है। गौरव कहते हैं कि मौजूदा कई </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">टूल्स अधिक उपयोग के बाद गड़बड़ियां दिखाना शुरू कर देते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे चेहरे बिगड़ना या तस्वीरों में असामान्य खामियां आना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उनका सिस्टम लगातार इस्तेमाल के बाद भी स्थिर क्वालिटी बनाए रखता है। शुरुआती डेमो में कुछ हाई रिजॉल्यूशन तस्वीरें भी दिखाई गईं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन पर सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हुई हैं। उनका यह भी दावा है कि प्लेटफॉर्म </span>12 <span lang="hi" xml:lang="hi">से अधिक भाषाओं में कंटेंट तैयार कर सकता है। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अभी इसके सभी फीचर्स आम लोगों के लिए ओपन नहीं किए गए हैं। सूत्रों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसे आने वाले समय में सब्सक्रिप्शन मॉडल पर लॉन्च किया जा सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां अलग-अलग फीचर्स के लिए अलग प्लान उपलब्ध होंगे। टेक एक्सपर्ट्स इस दावे को लेकर उत्सुकता दिखा रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन बड़े </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">प्लेटफॉर्म को टक्कर देने की असली तस्वीर इसके फुल लॉन्च के बाद ही साफ होगी।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 May 2026 16:28:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>विजय सरकार का बड़ा फैसला, तमिलनाडु में AI के लिए बनाया अलग विभाग</title>
                                    <description><![CDATA[थलपति विजय की तमिलनाडु सरकार ने AI के लिए अलग विभाग बनाया। आर कुमार को AI, IT और डिजिटल सेवाओं का मंत्री नियुक्त किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-decision-of-vijay-government-separate-department-created-for-ai/article-53961"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/tvk-government-thalapathy-vijay-tamil-nadu-ai-department.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">तमिलनाडु की नई सरकार ने अपने पहले बड़े कैबिनेट विस्तार में एक ऐसा फैसला लिया है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो अब पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्हें लोग थलपति विजय के नाम से जानते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">के लिए अलग विभाग बनाकर अपना चुनावी वादा पूरा कर दिया है। केरल के बाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तमिलनाडु ऐसा करने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है। गुरुवार को चेन्नई में हुए मंत्रिमंडल विस्तार में </span>23<span lang="hi" xml:lang="hi"> नए मंत्रियों को शामिल किया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इसी दौरान </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">विभाग की आधिकारिक घोषणा भी की गई। राजनीतिक हलकों में इसे विजय सरकार का टेक्नोलॉजी और डिजिटल गवर्नेंस पर बड़ा कदम माना जा रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">नई कैबिनेट में टीवीके विधायक आर कुमार को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">सूचना प्रौद्योगिकी और डिजिटल सेवाओं का जिम्मा सौंपा गया है। वे वेलाचेरी विधानसभा सीट से विधायक चुने गए हैं। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने उन्हें मंत्री पद की शपथ दिलाई। इस विभाग को सीधे राज्य की डिजिटल नीति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टेक निवेश और भविष्य की तकनीकी परियोजनाओं से जोड़ा जाएगा। चुनाव प्रचार के दौरान विजय ने कहा था कि तमिलनाडु को देश की </span>“AI <span lang="hi" xml:lang="hi">राजधानी</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">बनाया जाएगा और उन्होंने </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी और </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">सिटी विकसित करने का वादा भी किया था। अब सरकार का यह फैसला उसी रोडमैप की शुरुआत मानी जा रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मंत्रिमंडल विस्तार में समाजिक और क्षेत्रीय संतुलन पर भी ध्यान दिया गया है। नई कैबिनेट में अनुसूचित समुदायों से सात मंत्रियों को जगह दी गई है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">साथ ही चार महिला मंत्रियों को भी शामिल किया गया है। सरकार का दावा है कि नई टीम प्रशासन और विकास दोनों मोर्चों पर काम करेगी। कई महत्वपूर्ण विभाग नए चेहरों को सौंपे गए हैं। मंत्री श्रीनाथ को मत्स्य पालन और मछुआरा कल्याण विभाग मिला है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि कमाली को पशुपालन विभाग दिया गया है। विजयलक्ष्मी को डेयरी और दूध उत्पाद विभाग का जिम्मा सौंपा गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि पर्यटन विभाग की जिम्मेदारी राजेश कुमार को मिली है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सरकार ने तकनीकी और शिक्षा से जुड़े विभागों को भी अहमियत दी है। विश्वनाथन को उच्च शिक्षा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीकी शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इलेक्ट्रॉनिक्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग दिया गया है। श्रम कल्याण और कौशल विकास मंत्रालय मोहम्मद फरवाज को मिला है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और मानव संसाधन प्रबंधन और पूर्व सैनिक कल्याण विभाग सरथकुमार को सौंपा गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विजय सरकार युवाओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोजगार और तकनीकी क्षेत्र पर ज्यादा फोकस करना चाहती है। खासकर </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">विभाग की घोषणा को भविष्य की राजनीति और निवेश से जोड़कर देखा जा रहा है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हालांकि</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">अभी दो विभागों का बंटवारा बाकी है</span>- <span lang="hi" xml:lang="hi">आदि द्रविड़ कल्याण और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग। सूत्रों का कहना है कि इनमें से एक विभाग </span>VCK <span lang="hi" xml:lang="hi">और दूसरा </span>IUML <span lang="hi" xml:lang="hi">को दिया जा सकता है। सरकार पहले ही संकेत दे चुकी है कि </span>IUML <span lang="hi" xml:lang="hi">को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए आने वाले दिनों में कैबिनेट में और विस्तार देखने को मिल सकता है। फिलहाल</span>, AI <span lang="hi" xml:lang="hi">विभाग का गठन तमिलनाडु की राजनीति को राष्ट्रीय चर्चा में ला चुका है और बाकी राज्यों की नजरें अब इस मॉडल पर टिकी हुई हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 13:37:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केरल में बना देश का पहला AI मंत्रालय, जानें कैसे काम करेगी यह मिनिस्ट्री</title>
                                    <description><![CDATA[केरल देश का पहला राज्य बना जहां AI के लिए अलग मंत्रालय बनाया गया। पी. के. कुन्हालीकुट्टी को AI विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/countrys-first-ai-ministry-formed-in-kerala-know-how-this/article-53962"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/kerala-ai-minister-ai-ministry.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भारत में पहली बार किसी राज्य सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">AI) <span lang="hi" xml:lang="hi">के लिए एक अलग मंत्रालय का गठन किया है। यह कदम केंद्रीय सरकार की बजाय केरल सरकार ने उठाया है। नई सरकार में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के वरिष्ठ नेता पी. के. कुन्हालीकुट्टी को </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। इस तरह केरल देश का पहला राज्य बन गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">के लिए न केवल एक मंत्रालय बल्कि एक मंत्री भी बनाया गया है। यह निर्णय तकनीकी दृष्टिकोण से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आने वाले समय में प्रशासनिक और आर्थिक तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का मानना है कि </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">अब सिर्फ मोबाइल ऐप या चैटबॉट तक सीमित नहीं रहेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ट्रैफिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी सेवाओं और रोजगार पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ेगा।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सरकारी सूत्रों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, AI <span lang="hi" xml:lang="hi">मंत्रालय का काम विभिन्न विभागों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग को एक नीति के तहत लाना होगा। पहले टेक्नोलॉजी से जुड़े फैसले अलग-अलग विभाग अपने तरीके से लेते थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अब </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">से संबंधित कार्यों के लिए एक केंद्रीकृत व्यवस्था बनाई जाएगी। खबर है कि अस्पतालों में बीमारियों की जल्दी पहचान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ट्रैफिक सिस्टम को स्मार्ट बनाने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी शिकायतों के निपटारे और ऑनलाइन सेवाओं को तेज करने में </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">का उपयोग बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा। राज्य सरकार इस दिशा में रिसर्च और टेक्नोलॉजी कंपनियों के साथ भी सहयोग कर सकती है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">केरल हमेशा से शिक्षा और डिजिटल साक्षरता में अग्रणी रहा है। अब </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">AI <span lang="hi" xml:lang="hi">मंत्रालय की स्थापना के बाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राज्य स्टार्टअप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रिसर्च सेंटर और निवेश आकर्षित करने का प्रयास करेगा। सूत्रों के मुताबिक</span>, AI <span lang="hi" xml:lang="hi">आधारित उद्योग आने वाले वर्षों में एक बड़ा रोजगार क्षेत्र बन सकती है। इसीलिए सरकार कॉलेजों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्कूलों और प्रोफेशनल संस्थानों में </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">और डिजिटल स्किल्स से जुड़े ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरु करने की योजना बना रही है। ऐसा माना जा रहा है कि पारंपरिक नौकरियों में बदलाव के खतरे को देखते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार नए तकनीक के मुताबिक लोगों को तैयार करना चाहती है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">केरल के इस कदम से पड़ोसी राज्य तमिलनाडु पर भी प्रभाव पड़ा है। चुनावी प्रचार के दौरान टीवीके प्रमुख थलपति विजय ने भी अलग </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">AI <span lang="hi" xml:lang="hi">मंत्रालय या </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">गवर्नेंस सिस्टम बनाने का वादा किया था। राजनीतिक हलकों में चर्चा चल रही है कि तमिलनाडु सरकार भी जल्द इस दिशा में कोई महत्वपूर्ण निर्णय ले सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में अन्य राज्य भी </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">को लेकर अपनी नीतियाँ बना सकते हैं। अब </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">को केवल टेक्नोलॉजी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि प्रशासन और अर्थव्यवस्था का नया इंजन माना जा रहा है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अगर हम दुनिया के दूसरे देशों पर नजर डालें तो संयुक्त अरब अमीरात ने 2017 में ही </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">AI <span lang="hi" xml:lang="hi">मंत्री नियुक्त कर लिया था। </span>UAE <span lang="hi" xml:lang="hi">आज स्मार्ट सिटी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऑटोमेशन और </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">रिसर्च में भारी निवेश कर रहा है। वहीं सऊदी अरब और सिंगापुर भी </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">नीति और सुरक्षा ढांचे पर तेजी से काम कर रहे हैं। ऐसे में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केरल का यह कदम भारत में </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">गवर्नेंस की नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 13:37:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>6 महीने में बदली कोडिंग दुनिया, पीछे छूट रहे पुराने ढर्रे वाले इंजीनियर: बोले- पूर्व गूगल CEO </title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हाल के महीनों में टेक जगत में जो हो रहा है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसे लेकर काफी बातें हो रही हैं। पूर्व गूगल सीईओ एरिक श्मिट ने हाल ही में एक यूट्यूब बातचीत में बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट की प्रक्रिया में तेजी से बदलाव ला दिया है। उनका मानना है कि पिछले छह महीनों में जो बदलाव आया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो पिछले कई सालों में भी नहीं देखा गया। इसका सीधा असर सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स के काम करने के तरीके पर पड़ा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर उन पर जो अभी भी पुराने तरीके से कोड लिख रहे हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">एरिक श्मिट ने</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/the-coding-world-has-changed-in-6-months-old-fashioned-engineers/article-53520"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/ai-coding-eric-schmidt-statement-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हाल के महीनों में टेक जगत में जो हो रहा है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसे लेकर काफी बातें हो रही हैं। पूर्व गूगल सीईओ एरिक श्मिट ने हाल ही में एक यूट्यूब बातचीत में बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट की प्रक्रिया में तेजी से बदलाव ला दिया है। उनका मानना है कि पिछले छह महीनों में जो बदलाव आया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो पिछले कई सालों में भी नहीं देखा गया। इसका सीधा असर सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स के काम करने के तरीके पर पड़ा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर उन पर जो अभी भी पुराने तरीके से कोड लिख रहे हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">एरिक श्मिट ने बातचीत में अपनी पुरानी यादें भी साझा कीं। उन्होंने कहा कि जब वो 20 साल के थे</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब खुद कोड लिखना उनके लिए बड़ी बात थी। लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल गए हैं। उनका कहना है कि आज एआई सिस्टम ने कोडिंग को इतना आसान और तेज बना दिया है कि पुराने तरीके से काम करना अब पीछे छूटता जा रहा है। उनके मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कई कंपनियों को अब यह सवाल करना चाहिए कि आखिर टीम अभी भी उसी पुराने तरीके से कोड क्यों लिख रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब तकनीक इसी तरह आगे बढ़ चुकी है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">टेक इंडस्ट्री में इस बदलाव को लेकर अलग-अलग राय हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन श्मिट का कहना है कि एआई का असर केवल एक सहायक टूल तक सीमित नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह काम करने की पूरी प्रक्रिया को बदल रहा है। उनकी रिपोर्ट्स के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एआई की मदद से अब वही काम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो पहले कई इंजीनियर्स मिलकर करते थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो अब बहुत कम समय में हो सकता है। यहां तक कि एक अकेला डेवलपर भी एआई टूल्स की सहायता से बड़े और जटिल ऐप्स बना सकता है। श्मिट का ये भी कहना है कि यह बदलाव अचानक ही तेजी से आया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसकी शुरुआत पिछले साल से मानी जा रही है।</span></span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"> </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उन्होंने यह भी बताया कि एआई की क्षमता देखकर वे खुद कई बार आश्चर्यचकित हो जाते हैं। उनका कहना है कि यह तकनीक न केवल काम को आसान बना रही है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सॉफ्टवेयर बनाने के तरीके को भी पूरी तरह से बदल रही है। इस बीच</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टेक कंपनियों में भी चर्चा चल रही है कि भविष्य में इंजीनियर्स की भूमिका कैसी होगी और उन्हें किन नई क्षमताओं पर ध्यान देना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि जो लोग एआई टूल्स को अपनाने में पीछे रह जाएंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वे प्रतिस्पर्धा में कमजोर पड़ सकते हैं। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो इंजीनियर्स इन बदलावों के साथ खुद को ढाल लेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनके लिए और भी अवसर बढ़ सकते हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
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                <pubDate>Sat, 16 May 2026 16:04:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>15 साल के लड़के का कमाल, बनाया पानी में तैरने वाला रोबोट कछुआ</title>
                                    <description><![CDATA[कनाडा के 15 साल के छात्र ने BURT नाम का रोबोट कछुआ बनाया, जो पानी में तैरकर 96% सटीकता से खतरे पहचानता है और पर्यावरण बचाने में मदद करता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/a-15-year-old-boy-created-a-robot-turtle-that/article-53501"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/15-year-old-boy-creates-robot-turtle-burt-innovation.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कनाडा के एक 15 साल के छात्र ने ऐसा कमाल कर दिखाया है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने विज्ञान और प्रौद्योगिकी की दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस किशोर ने एक ऐसा रोबोट कछुआ बनाया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो पानी में बिना शोर किए तैर सकता है और समुद्री जीवन पर आने वाले खतरों का पता लगाने में सक्षम है। इस प्रोजेक्ट का नाम </span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">रोबोटिक टर्टल</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">या </span>BURT (Bionic Underwater Robotic Turtle) <span lang="hi" xml:lang="hi">रखा गया है। रिपोर्ट्स कहती हैं कि इस रोबोट की पहचान क्षमता करीब 96% तक सटीक है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो इसे खास बनाती है। इवान बड्ज नाम के इस लड़के की चर्चा अब यूरोपियन यूनियन कॉन्टेस्ट फॉर यंग साइंटिस्ट्स (</span>EUCYS) <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे मंचों पर हो रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जानकारी के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">इवान ने यह पूरी मशीन बिना ज्यादा खर्च किए बनाई है। उन्होंने साधारण तौर पर बाजार में आसानी से मिलने वाले हिस्सों का इस्तेमाल किया और धीरे-धीरे इस पानी में चलने वाले कछुए का मॉडल तैयार किया। रोबोटिक टर्टल को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह पानी में मौजूद प्लास्टिक कचरे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोरल रीफ के नुकसान और विदेशी प्रजातियों के खतरों का पता लगा सके। खास बात ये है कि यह रोबोट पानी के भीतर बेहद शांत तरीके से चलता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे आसपास के जीवों को कोई डर या परेशानी नहीं होती। कहा जा रहा है कि इसमें तेज प्रोपेलर का इस्तेमाल नहीं किया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">सॉफ्ट-फिन</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीक अपनाई गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे इसकी मूवमेंट और भी प्राकृतिक लगती है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इवान ने इस विचार को तब सोचा जब वह कनाडा के ग्रेट लेक्स इलाके में अपने दोस्तों के साथ कैम्पिंग पर थे। वहां उन्होंने असली कछुओं को पानी में बहुत सहजता से तैरते देखा। उसी अनुभव ने उनके दिमाग में सवाल उठाया कि क्या ऐसा कोई रोबोट बनाया जा सकता है जो बिना शोर किए पानी में काम कर सके और पर्यावरण की निगरानी कर सके। इसके बाद इवान ने बिना समय बर्बाद किए इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया। शुरुआत में ये काफी साधारण था</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन धीरे-धीरे इसमें कैमरा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (</span>AI) <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसी तकनीकें जोड़ी गईं</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 May 2026 12:56:20 +0530</pubDate>
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