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                <title>Jaipur News - दैनिक जागरण</title>
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                <title>हर स्कूल में थिएटर विषय होना चाहिए, बोले एनएसडी निदेशक</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर में चितरंजन त्रिपाठी ने कला और शिक्षा के रिश्ते पर रखी बात, कहा- चिंटू की प्रतिभा को भी उतनी ही अहमियत मिलनी चाहिए जितनी पिंटू के अंकों को]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/nsd-director-said-theater-should-be-a-subject-in-every/article-55321"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/nsd-director.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) के निदेशक चितरंजन त्रिपाठी ने कहा है कि देश की शिक्षा व्यवस्था में थिएटर को केवल एक अतिरिक्त गतिविधि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे स्कूल शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए। जयपुर में आयोजित थिएटर वर्कशॉप ‘कोलाज ऑफ किलकारी’ के समापन समारोह में उन्होंने कला, संगीत और रंगमंच के महत्व पर विस्तार से बात की। इस दौरान उन्होंने शिक्षा व्यवस्था और समाज के उस नजरिए की भी चर्चा की, जिसमें अक्सर अकादमिक उपलब्धियों को कला और रचनात्मक प्रतिभा से अधिक महत्व दिया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम में मौजूद विद्यार्थियों, शिक्षकों और रंगकर्मियों को संबोधित करते हुए त्रिपाठी ने एक काल्पनिक उदाहरण के जरिए अपनी बात समझाई। उन्होंने कहा कि लगभग हर स्कूल में दो तरह के बच्चे होते हैं। एक वह छात्र जो पढ़ाई में बहुत अच्छे अंक लाता है और दूसरा वह जो पढ़ाई के साथ-साथ संगीत, अभिनय, चित्रकला या किसी अन्य कला में असाधारण प्रतिभा रखता है। उन्होंने इन दोनों छात्रों को प्रतीकात्मक रूप से ‘पिंटू’ और ‘चिंटू’ का नाम दिया। उनके अनुसार समाज और स्कूल व्यवस्था अक्सर पिंटू को ज्यादा महत्व देती है, क्योंकि अच्छे अंकों को सफलता का पैमाना मान लिया गया है। दूसरी ओर चिंटू की प्रतिभा को उतनी गंभीरता से नहीं लिया जाता, जबकि वह कला और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय क्षमता रखता है।</p>
<p style="text-align:justify;">चितरंजन त्रिपाठी ने कहा कि यह विडंबना तब और स्पष्ट दिखाई देती है जब स्कूलों में कोई बड़ा कार्यक्रम आयोजित होता है। किसी मंत्री, सांसद, अधिकारी या विशेष अतिथि के आने पर अचानक उन बच्चों की जरूरत महसूस होती है जो गाना गा सकते हैं, नाटक कर सकते हैं या मंच संचालन कर सकते हैं। तब वही छात्र, जिन्हें सामान्य दिनों में केवल अतिरिक्त गतिविधियों तक सीमित समझा जाता है, कार्यक्रम का केंद्र बन जाते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ समय के लिए इन बच्चों को सम्मान मिलता है, लेकिन कार्यक्रम समाप्त होते ही वे फिर से उसी स्थिति में पहुंच जाते हैं जहां उनकी प्रतिभा को मुख्यधारा का हिस्सा नहीं माना जाता।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में यह सोच बदलने की जरूरत है। कला, संगीत और रंगमंच केवल मनोरंजन के साधन नहीं हैं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण के महत्वपूर्ण माध्यम हैं। थिएटर बच्चों में आत्मविश्वास विकसित करता है, संवाद कौशल को मजबूत बनाता है और उन्हें समाज तथा जीवन को अलग-अलग दृष्टिकोण से देखने की क्षमता देता है। उनके अनुसार मंच पर कोई बच्चा जब किसान, सैनिक, शिक्षक, राजा या आम नागरिक की भूमिका निभाता है तो वह केवल अभिनय नहीं कर रहा होता, बल्कि वह जीवन के विभिन्न अनुभवों को समझने की प्रक्रिया से गुजर रहा होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान चितरंजन त्रिपाठी ने राजस्थान में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय का क्षेत्रीय केंद्र स्थापित किए जाने की मांग का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि एक रंगकर्मी के रूप में उनकी इच्छा है कि देश के हर राज्य में एनएसडी का एक क्षेत्रीय केंद्र हो। इससे स्थानीय कलाकारों को बेहतर प्रशिक्षण के अवसर मिलेंगे और उन्हें रंगमंच की शिक्षा के लिए दिल्ली आने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। उन्होंने माना कि राजस्थान जैसी सांस्कृतिक रूप से समृद्ध भूमि में ऐसे केंद्र की संभावनाएं काफी मजबूत हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी नए केंद्र की स्थापना केवल इच्छा से संभव नहीं है। इसके लिए भूमि, भवन, वित्तीय संसाधन, तकनीकी सुविधाएं और प्रशिक्षित मानव संसाधन की आवश्यकता होती है। साथ ही केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय और सहमति भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि एनएसडी का निदेशक होने के नाते वह कोई ऐसा वादा नहीं करना चाहते जो उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर हो, लेकिन व्यक्तिगत रूप से वह इस पहल का समर्थन करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">त्रिपाठी ने भारतीय रंगमंच की ऐतिहासिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में नाट्यकला की जड़ें हजारों वर्ष पुरानी हैं। भरतमुनि के नाट्यशास्त्र में भी रंगमंच को समाज के मानसिक और सांस्कृतिक विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बताया गया है। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में नाटक केवल मनोरंजन का साधन नहीं था, बल्कि समाज को शिक्षित करने और भावनात्मक संतुलन बनाए रखने का माध्यम भी था। उनका मानना है कि रंगमंच तनाव और अवसाद को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">एनएसडी की गतिविधियों पर जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि इस वर्ष देशभर में 92 शहरों में थिएटर कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। पहले गर्मी की छुट्टियों में सीमित संख्या में कार्यशालाएं होती थीं, लेकिन अब इसका दायरा काफी बढ़ चुका है। इन कार्यशालाओं में केवल रंगकर्मियों को ही नहीं, बल्कि ट्रांसजेंडर समुदाय, वरिष्ठ नागरिकों, जेल बंदियों, झुग्गी बस्तियों के बच्चों और समाज के अन्य वंचित वर्गों को भी शामिल किया जा रहा है। उनका उद्देश्य रंगमंच को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में नाट्यकला को पंचम वेद का दर्जा प्राप्त था, लेकिन समय के साथ इसे केवल अतिरिक्त गतिविधि तक सीमित कर दिया गया। उनके अनुसार अब समय आ गया है कि थिएटर को फिर से मुख्यधारा में लाया जाए और शिक्षा व्यवस्था में उसे वह स्थान दिया जाए जिसका वह हकदार है। उनका मानना है कि यदि स्कूलों में थिएटर को विषय के रूप में शामिल किया जाए तो इससे केवल कलाकार ही नहीं, बल्कि बेहतर और संवेदनशील नागरिक भी तैयार होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 18:04:53 +0530</pubDate>
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                <title>पुणे से सीकर-जयपुर तक ऐसे पहुंचा नीट का पेपर, शिक्षा मंत्री ने खुद बताया</title>
                                    <description><![CDATA[NEET Paper Leak 2026 में बड़ा खुलासा, पुणे से जयपुर तक नेटवर्क पहुंचा। परीक्षा रद्द, सीबीआई जांच और विदेशी कनेक्शन की जांच जारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/this-is-how-neet-paper-reached-from-pune-to-sikar-jaipur/article-53506"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/neet-paper-leak-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">NEET Paper Leak <span lang="hi" xml:lang="hi">2026 पर हंगामे के बीच</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने रविवार को एक बड़ा ऐलान किया है। सरकार ने गंभीर गड़बड़ी और पेपर लीक के पुख्ता सबूत मिलने के बाद </span>NEET UG <span lang="hi" xml:lang="hi">2026 को कैंसल करने का फैसला किया है। अब यह परीक्षा 21 जून 2026 को फिर से आयोजित की जाएगी। मंत्रालय ने साफ कहा है कि इस बार परीक्षा पुराने ढांचे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यानी कि पेन-एंड-पेपर मोड में होगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अगले साल से इसे पूरी तरह से कंप्यूटर बैस्ड टेस्ट (</span>CBT) <span lang="hi" xml:lang="hi">मोड में शिफ्ट करने की योजना है ताकि सिस्टम में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो सके।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जांच की प्रक्रिया के चलते </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">NEET <span lang="hi" xml:lang="hi">पेपर लीक की नई परतें खुलती जा रही हैं। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने पुणे से जुड़े तारों का पता लगाया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां प्रोफेसर पी.पी. कुलकर्णी को गिरफ्तार किया गया है। कहा जा रहा है कि वह लंबे समय से परीक्षा सेटिंग पैनल का हिस्सा था। शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि बायोलॉजी और केमिस्ट्री के कुछ महत्वपूर्ण सवाल प्रिंटिंग से पहले ही लीक हो गए थे। इसके बाद ये प्रश्न तेजी से एक नेटवर्क के द्वारा राजस्थान के कोचिंग हब सीकर और जयपुर तक पहुंच गए। जांच एजेंसियों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धनंजय लोखंडे नाम के व्यक्ति ने इन सवालों को कोचिंग नेटवर्क में फैला दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि एक और आरोपी शुभम पर टेलीग्राम के माध्यम से सैकड़ों प्रश्न साझा करने का आरोप है। दिल्ली की विशेष अदालत ने धनंजय को 6 दिन की सीबीआई रिमांड पर भेजा है ताकि इस पूरे नेटवर्क की गहराई तक पहुंचा जा सके।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस पूरे मामले ने परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। नियमों के अनुसार पेपर बनाने वाले विशेषज्ञों की कड़ी जांच होती है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">बॉडी स्कैन से लेकर मोबाइल और कागज भी अंदर ले जाना सख्त मना है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और हर गतिविधि सीसीटीवी निगरानी में रहती है। फिर भी ये पेपर बाहर कैसे आया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह अभी भी सबसे बड़ा रहस्य बना हुआ है। क्या यह किसी आंतरिक लापरवाही का नतीजा है या फिर सिस्टम में बैठे लोगों की मिलीभगत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस पर जांच एजेंसियां अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं कह पा रही हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"> </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इसी बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जांच में एक और चौंकाने वाला पहलू उभर कर आया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे विदेशी कनेक्शन बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परीक्षा से करीब 8 दिन पहले पेपर भारत के बाहर 12 देशों के 14 शहरों में भेजा गया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें दुबई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दोहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुवैत सिटी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिंगापुर और बैंकॉक जैसे स्थान शामिल हैं। माना जा रहा है कि इन विदेशी केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था स्थानीय एजेंसियों पर निर्भर होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां से लीक होने की संभावना ज्यादा रहती है। राजस्थान एसओजी अब इसी अंतरराष्ट्रीय रूट की गहन जांच कर रही है। फिलहाल पूरा मामला देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है और छात्र समुदाय में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 May 2026 12:56:06 +0530</pubDate>
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