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                <title>Digvijaya Singh - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Digvijaya Singh RSS Feed</description>
                
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                <title>मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में बढ़ी सरगर्मी, आज नामांकन भरेंगे मीनाक्षी और महेश</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट के लिए भाजपा ने अंतिम समय में महेश केवट को उम्मीदवार बनाया, कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन पर दांव लगाया; दोनों दलों ने विधायकों की एकजुटता पर फोकस बढ़ाया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/there-is-increased-excitement-in-madhya-pradesh-rajya-sabha-elections/article-55254"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mp-rajya-sabha-election-2026.jpg" alt=""></a><br /><p>मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। तीसरी राज्यसभा सीट के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन और भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार महेश केवट सोमवार को अपना नामांकन दाखिल करेंगे। इस सीट को लेकर दोनों प्रमुख दलों के बीच सियासी मुकाबला दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। भाजपा ने जहां अंतिम समय में महेश केवट को उम्मीदवार बनाकर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है, वहीं कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन को मैदान में उतारकर मुकाबले को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना दिया है।</p>
<p>राजधानी भोपाल में सुबह से ही राजनीतिक हलचल बढ़ी हुई है। भाजपा की ओर से प्रदेश कार्यालय में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, पार्टी पदाधिकारी, विधायक और कार्यकर्ता एकत्रित होंगे। इसके बाद सभी नेता विधानसभा पहुंचकर महेश केवट का नामांकन दाखिल कराएंगे। दूसरी ओर कांग्रेस भी शक्ति प्रदर्शन की तैयारी में है। पार्टी के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार समेत कई बड़े नेता मीनाक्षी नटराजन के साथ विधानसभा पहुंचेंगे।</p>
<p>इस चुनाव की सबसे ज्यादा चर्चा तीसरी सीट को लेकर हो रही है। विधानसभा में संख्या बल के आधार पर भाजपा के दो उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है। पार्टी की ओर से पहले ही तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल नामांकन दाखिल कर चुके हैं। लेकिन तीसरी सीट के लिए उम्मीदवार उतारने को लेकर भाजपा लंबे समय तक मंथन करती रही। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस सीट पर जीत सुनिश्चित करने के लिए भाजपा को अतिरिक्त समर्थन की जरूरत पड़ सकती है।</p>
<p>रविवार को पूरे दिन मुख्यमंत्री निवास और भाजपा कार्यालय में बैठकों का दौर चला। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वरिष्ठ नेताओं के साथ कई चरणों में चर्चा की। देर शाम भाजपा प्रदेश कार्यालय में क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल, प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के बीच बैठक हुई। इसके बाद यह टीम मुख्यमंत्री निवास पहुंची जहां करीब एक घंटे तक रणनीति पर चर्चा चली। सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय नेतृत्व से सहमति मिलने के बाद महेश केवट के नाम पर अंतिम मुहर लगी और देर रात उनकी उम्मीदवारी की आधिकारिक घोषणा कर दी गई।</p>
<p>महेश केवट वर्तमान में मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष हैं। उनके नाम की घोषणा को भाजपा द्वारा सामाजिक और राजनीतिक संतुलन साधने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी को उम्मीद है कि इस फैसले से उसे व्यापक सामाजिक समर्थन का संदेश देने में मदद मिलेगी। वहीं कांग्रेस इसे संख्या बल से परे राजनीतिक प्रयोग मान रही है।</p>
<p>दूसरी तरफ कांग्रेस भी इस चुनाव को हल्के में लेने के मूड में नहीं दिख रही। पार्टी को आशंका है कि मतदान के दौरान क्रॉस वोटिंग की संभावना से मुकाबले की तस्वीर बदल सकती है। इसी वजह से कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रखने की रणनीति पर काम कर रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी अपने विधायकों को कुछ समय के लिए दूसरे राज्य भेज सकती है ताकि किसी तरह की टूट-फूट या दबाव की स्थिति न बने। हालांकि इस संबंध में अभी तक पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।</p>
<p>दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन वर्तमान में तेलंगाना की प्रदेश प्रभारी भी हैं। ऐसे में तेलंगाना से जुड़े कांग्रेस नेताओं की सक्रियता भी बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि वहां के मुख्यमंत्री अनुमुला रेवंत रेड्डी भी मध्य प्रदेश के राज्यसभा चुनाव की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। कांग्रेस नेतृत्व इस चुनाव को केवल एक सीट का मामला नहीं बल्कि संगठनात्मक एकजुटता की परीक्षा के रूप में देख रहा है। तीसरी सीट का चुनाव केवल गणित का नहीं बल्कि रणनीति और प्रबंधन का भी मुकाबला बन गया है। दोनों दल अपने-अपने विधायकों को साधने और चुनावी समीकरण मजबूत करने में जुटे हैं। आने वाले दिनों में राजनीतिक बयानबाजी और गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 12:59:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>संसदीय समिति ने NTA और CBSE से पेपर लीक पर मांगे जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[NEET पेपर लीक और OSM सिस्टम विवाद पर दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली समिति ने दोनों संस्थानों से कड़े सवाल पूछे, बैकग्राउंड जांच और परिभाषा पर उठे गंभीर प्रश्न]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/parliamentary-committee-seeks-answers-from-nta-and-cbse-on-paper/article-55242"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/nta-paper-leak.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">संसदीय समिति ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (National Testing Agency) और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (Central Board of Secondary Education) से जुड़े परीक्षा प्रणाली, पेपर लीक और डिजिटल मूल्यांकन व्यवस्था पर कई गंभीर और सीधे सवाल उठाए हैं। NEET पेपर लीक विवाद और ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर चल रही जांच के बीच समिति की बैठक में माहौल काफी सख्त रहा और अधिकारियों से लिखित जवाब भी मांगे गए। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस सांसद (Digvijaya Singh) की अध्यक्षता वाली इस समिति ने सबसे पहले यही सवाल किया कि आखिर ‘पेपर लीक’ की परिभाषा सरकारी परीक्षा एजेंसियों के हिसाब से क्या मानी जाती है, और क्या इस परिभाषा को लेकर किसी तरह की स्पष्ट गाइडलाइन मौजूद है या नहीं। बैठक में यह भी पूछा गया कि जब संस्थान खुद यह दावा करते हैं कि सिस्टम से कोई पेपर लीक नहीं हुआ, तो फिर अलग-अलग स्तर पर सामने आने वाली गड़बड़ियों और लीक जैसे आरोपों को किस श्रेणी में रखा जाए। इस पूरे सवाल-जवाब के दौरान समिति ने यह भी संकेत दिया कि केवल तकनीकी सफाई देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और जवाबदेही को भी स्पष्ट करना जरूरी है, क्योंकि देशभर में लाखों छात्र इन परीक्षाओं पर निर्भर हैं और किसी भी तरह की गड़बड़ी का सीधा असर उनके भविष्य पर पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">समिति ने विशेष रूप से National Testing Agency से 2018 के बाद आयोजित सभी प्रमुख परीक्षाओं का पूरा रिकॉर्ड मांगा है और पूछा है कि क्या कभी आधिकारिक रूप से किसी परीक्षा में पेपर लीक की पुष्टि हुई है या केवल अफवाह और तकनीकी गड़बड़ी के आधार पर ही ऐसे मामले सामने आते रहे हैं। हाल ही में एजेंसी की ओर से यह दावा किया गया था कि उनके सिस्टम में वास्तविक पेपर लीक नहीं हुआ, बल्कि केवल एक ‘गेस पेपर’ या अनुमानित प्रश्न पत्र प्रसारित हुआ था, जिस पर समिति ने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर यह केवल अनुमानित सामग्री थी तो फिर परीक्षा सुरक्षा प्रणाली की मजबूती पर सवाल क्यों खड़े होते हैं। इसके अलावा समिति ने NTA से उसके आंतरिक ढांचे, मानव संसाधन, तकनीकी टीम और पिछले तीन वर्षों में की गई सभी नियुक्तियों का पूरा ब्योरा भी तलब किया है। बताया जा रहा है कि समिति यह समझने की कोशिश कर रही है कि इतनी बड़ी परीक्षा एजेंसी के भीतर स्टाफिंग, निगरानी और तकनीकी नियंत्रण की व्यवस्था कितनी मजबूत है। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि बार-बार सामने आने वाले विवाद केवल बाहरी समस्या हैं या फिर सिस्टम के भीतर कोई संरचनात्मक कमजोरी मौजूद है। इसी संदर्भ में यह सवाल भी उठा कि क्या परीक्षा संचालन के दौरान किसी भी स्तर पर लापरवाही या निगरानी की कमी रही है, जिसके कारण छात्रों के बीच असंतोष बढ़ता जा रहा है और परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (Central Board of Secondary Education) के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम और डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर भी समिति ने विस्तृत सवाल पूछे हैं। सबसे बड़ा सवाल कोएम्प्ट (Coempt) कंपनी को दिए गए ठेके और उसके चयन की प्रक्रिया पर केंद्रित रहा। समिति ने पूछा कि क्या बोर्ड ने टेंडर देने से पहले कंपनी का विस्तृत बैकग्राउंड वेरिफिकेशन किया था या नहीं, और क्या यह जानकारी थी कि कंपनी के डायरेक्टर पहले ग्लोबरेना टेक्नोलॉजीज से जुड़े रहे हैं, जिस पर पहले परीक्षा परिणामों में गड़बड़ी के आरोप लग चुके हैं। सूत्रों के अनुसार, समिति ने यह भी पूछा कि विवादित इतिहास वाली कंपनियों को चयन प्रक्रिया से बाहर करने की शर्त को तीसरे टेंडर में क्यों हटा दिया गया और क्या यह किसी विशेष कंपनी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया था या तकनीकी कारणों से। इसके अलावा 12वीं बोर्ड की उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग प्रक्रिया में आधुनिक रोबोटिक स्कैनर के बजाय सामान्य स्कैनर के उपयोग की अनुमति देने पर भी सवाल उठाए गए। समिति का कहना है कि जब परीक्षा मूल्यांकन जैसे संवेदनशील कार्य में तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है, तो उसमें गुणवत्ता और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। इसी बीच राजनीतिक हलकों में भी यह मुद्दा तेजी से गरमाया हुआ है, खासकर जब कांग्रेस नेता (Rahul Gandhi) ने सार्वजनिक रूप से कोएम्प्ट कंपनी और टेंडर प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए थे, जिसके बाद यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया। अब समिति की ओर से मांगे गए जवाबों के बाद माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस पूरे प्रकरण पर और अधिक राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल देखने को मिल सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 11:07:15 +0530</pubDate>
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                <title>दिग्विजय सिंह बोले- धर्म जोड़ता है, राजनीति नहीं; गुना महायज्ञ में जुटे लाखों श्रद्धालु</title>
                                    <description><![CDATA[भैंसाना में श्रीराम महायज्ञ की पूर्णाहुति, आठ दिन में 30 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/digvijay-singh-said-religion-unites-not-politics-lakhs-of/article-54491"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/_digvijaya-singh.jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr" style="text-align:justify;">गुना जिले के राघौगढ़ क्षेत्र के भैंसाना गांव में आयोजित आठ दिवसीय श्रीराम महायज्ञ का समापन गुरुवार को भव्य पूर्णाहुति के साथ हुआ। भीषण गर्मी के बावजूद यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। आयोजन समिति के मुताबिक आठ दिनों के दौरान करीब 30 लाख से ज्यादा लोगों ने महायज्ञ स्थल पहुंचकर दर्शन किए। समापन अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, विधायक जयवर्धन सिंह और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा भी मौजूद रहे। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूर्णाहुति दी गई और पूरे पंडाल में “जय श्रीराम” के जयघोष गूंजते रहे।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">भैंसाना गांव पिछले कई दिनों से धार्मिक आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ था। दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पहुंच रहे थे। आयोजन स्थल पर सुबह से लेकर देर रात तक भक्ति का माहौल बना रहा। रामायण पाठ, भागवत कथा और यज्ञ में शामिल होने के लिए लोगों की लंबी कतारें लग रही थीं। गुरुवार को पूर्णाहुति के दौरान भी भारी भीड़ उमड़ी। आयोजकों को व्यवस्था संभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">इस दौरान आयोजन के मुख्य केंद्र रहे गुड्डा महाराज भी चर्चा में रहे। उन्होंने अपने संकल्प के अनुसार पूरे 27 साल बाद अन्न ग्रहण किया। जैसे ही उन्होंने भोजन ग्रहण किया, पूरा परिसर जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने इसे भावुक पल बताया। कई लोग मंच के सामने खड़े होकर मोबाइल से वीडियो बनाते नजर आए।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">समारोह को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने धर्म और राजनीति को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि “हम लोगों ने हमेशा धर्म को आस्था का केंद्र माना है। हमने कभी धर्म को बेचा नहीं। धर्म को राजनीति में नहीं लाए।” उन्होंने कहा कि इस आयोजन में सभी को आमंत्रित किया गया था, चाहे किसी भी दल या विचारधारा से जुड़े लोग हों। मुख्यमंत्री मोहन यादव को भी व्यक्तिगत रूप से आमंत्रण दिया गया था।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">दिग्विजय सिंह ने कहा कि धर्म लोगों को जोड़ने का काम करता है, जबकि राजनीति अक्सर समाज को बांट देती है। उनके इस बयान के दौरान पंडाल में मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर समर्थन जताया। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा के ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा फैलाते हैं और लोगों को एक मंच पर लाते हैं।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">अपने संबोधन के दौरान उन्होंने राघौगढ़ किले के हनुमान मंदिर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनके परिवार का अस्तित्व हनुमान जी की कृपा से जुड़ा है। गुड्डा महाराज की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह से पूरे आयोजन की तैयारी की गई, वह अपने आप में अनोखी है। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि “इतने बड़े-बड़े इंजीनियर देखे, लेकिन आपके जैसा इंजीनियर नहीं देखा।” इस दौरान मंच पर मौजूद लोग भी मुस्कुराते नजर आए।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">दिग्विजय सिंह ने आयोजन स्थल की व्यवस्थाओं की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि इतनी भीषण गर्मी के बीच सूखी लकड़ियों से बना विशाल पंडाल सुरक्षित तरीके से चलाना आसान काम नहीं था। उन्होंने कहा कि सही मुहूर्त और योजना के कारण पूरा कार्यक्रम बिना किसी परेशानी के संपन्न हुआ। उन्होंने मजाक में कुंभराज वाले महाराज से अपनी कुंडली बनाने की भी बात कही। बोले कि “मुझे कुंडली पर कभी ज्यादा विश्वास नहीं रहा, क्योंकि हजारों लोगों ने कुंडली बनाई लेकिन किसी ने नहीं बताया कि मैं मुख्यमंत्री बनूंगा।”</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">गुड्डा महाराज ने भी मंच से दिग्विजय सिंह और जयवर्धन सिंह के साथ अपने संबंधों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह रिश्ता सिर्फ राजनीति का नहीं बल्कि आत्मीयता का है। उन्होंने दिग्विजय सिंह को आयोजन का संरक्षक बताया और कहा कि राजा के संरक्षण के बिना ऐसा बड़ा यज्ञ सफल नहीं हो सकता।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">विधायक जयवर्धन सिंह ने आयोजन को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह सिर्फ धार्मिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि समाज में संस्कार और सकारात्मक सोच फैलाने का माध्यम भी बना। उन्होंने कहा कि हजारों स्वयंसेवकों और सेवा समितियों ने दिन-रात मेहनत कर व्यवस्था संभाली। गर्मी के बावजूद लोगों में उत्साह कम नहीं हुआ।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">महायज्ञ स्थल पर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था भी बड़ी चुनौती रही। प्रशासन की ओर से अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था। गांव की छोटी सड़कों पर लगातार वाहनों की आवाजाही बनी रही। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर धार्मिक आयोजन इस इलाके में पहली बार देखने को मिला। आसपास के गांवों में भी कई दिनों तक इसी आयोजन की चर्चा होती रही।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">समापन के बाद भी श्रद्धालुओं की भीड़ देर शाम तक बनी रही। लोग यज्ञशाला और कथा स्थल के दर्शन करते रहे। पूरा भैंसाना गांव भक्ति और आस्था के माहौल में डूबा नजर आया। आयोजन खत्म होने के बाद भी यहां का माहौल लोगों को लंबे समय तक याद रहने वाला है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 15:20:44 +0530</pubDate>
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                <title>भोजशाला विवाद पर दिग्विजय सिंह बोले- ASI रिपोर्ट में मूर्ति का जिक्र नहीं, सुप्रीम कोर्ट करेगा पूजा होगी या इबादत</title>
                                    <description><![CDATA[भोजशाला विवाद पर दिग्विजय सिंह ने सुप्रीम कोर्ट से फैसले की बात कही। ASI रिपोर्ट, पूजा-अर्चना और आर्थिक मुद्दों पर भी केंद्र को घेरा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/digvijay-singh-said-on-bhojshala-controversy-there-is-no/article-53513"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/bhojshala-dispute,-digvijaya-singh.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">धार के भोजशाला विवाद पर एक बार फिर सियासत गरमा गई है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश के बाद भोजशाला परिसर में पूजा शुरू होने की संभावनाएं बढ़ गई हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">और शनिवार सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु वहां पहुंचने लगे हैं। इसी बीच</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मामला अब एक संवेदनशील मोड़ पर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट को लेना चाहिए। उन्होंने बताया कि भोजशाला एक </span>ASI <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोटेक्टेड मॉन्यूमेंट है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए यह तय करना कि यहां पूजा होगी या इबादत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोर्ट के दायरे में आता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दिग्विजय सिंह ने बातचीत में कहा कि वे इस मामले का अध्ययन कर रहे हैं और जो भी निर्णय होगा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो देश के कानून और नियमों के आधार पर ही होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे कई मामले पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे वाराणसी का ज्ञानवापी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संभल की मस्जिद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और मथुरा-वृंदावन से जुड़े विवाद। भोजशाला के बारे में उन्होंने दोहराया कि यह </span>ASI <span lang="hi" xml:lang="hi">द्वारा संरक्षित स्मारक है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए इसका उपयोग कैसे होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह अंततः सर्वोच्च न्यायालय ही तय करेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में हिंदू-मुसलमान के नाम पर तनाव बढ़ाना उचित नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इससे समाज में और दूरी पैदा हो सकती है। उनके इस बयान के बाद स्थानीय राजनीति में भी हलचल देखने को मिली है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जब उनसे वाग्देवी की मूर्ति के बारे में सवाल किया गया</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो दिग्विजय सिंह ने कहा कि इस पर पहले भी प्रयास किए गए थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा के समय भी इस दिशा में कोशिशें हुई थीं। उन्होंने कहा कि मूर्ति का विषय भावनात्मक जरूर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन </span>ASI <span lang="hi" xml:lang="hi">की रिपोर्ट में इसका स्पष्ट जिक्र नहीं है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 May 2026 13:54:31 +0530</pubDate>
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