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                <title>AI - दैनिक जागरण</title>
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                <description>AI RSS Feed</description>
                
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                <title>ओपनएआई पर एप्पल का बड़ा मुकदमा, ट्रेड सीक्रेट चोरी का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[एप्पल ने अमेरिका की अदालत में दायर याचिका में ओपनएआई, उसके हार्डवेयर सहयोगी और दो पूर्व कर्मचारियों पर गोपनीय तकनीकी जानकारी के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/apples-big-lawsuit-against-openai-accused-of-trade-secret-theft/article-58482"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/pakistan-fuel-price-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">एप्पल और ओपनएआई के बीच चल रही प्रतिस्पर्धा अब कानूनी लड़ाई तक पहुंच गई है। अमेरिकी टेक कंपनी एप्पल ने ओपनएआई, उसके सहयोगी संस्थानों और अपने दो पूर्व कर्मचारियों के खिलाफ अमेरिका के उत्तरी कैलिफोर्निया स्थित जिला न्यायालय में मुकदमा दायर किया है। कंपनी का आरोप है कि उसके पूर्व कर्मचारियों ने नौकरी छोड़ने से पहले एप्पल की गोपनीय और संवेदनशील तकनीकी जानकारी हासिल की और बाद में उसका इस्तेमाल ओपनएआई के उपभोक्ता हार्डवेयर प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने में किया गया। एप्पल का कहना है कि यह केवल कर्मचारियों द्वारा जानकारी साथ ले जाने का मामला नहीं है, बल्कि कंपनी के व्यापारिक रहस्यों, उत्पाद विकास और सप्लाई चेन से जुड़ी रणनीतिक जानकारी के कथित दुरुपयोग का गंभीर मामला है। इस घटनाक्रम ने तकनीकी जगत में हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि दोनों कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उपभोक्ता तकनीक के क्षेत्र में प्रमुख प्रतिस्पर्धी मानी जाती हैं। मुकदमे में एप्पल ने अदालत से मामले की विस्तृत जांच और गोपनीय जानकारी के कथित उपयोग पर रोक लगाने की मांग की है। दूसरी ओर, मुकदमा दायर किए जाने तक ओपनएआई की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।</p>
<p>एप्पल की शिकायत में पूर्व वरिष्ठ सिस्टम इलेक्ट्रिकल इंजीनियर चांग लियू और आईफोन तथा एप्पल वॉच के पूर्व उपाध्यक्ष (प्रोडक्ट डिजाइन) टैंग यू टैन का नाम शामिल किया गया है। कंपनी का आरोप है कि चांग लियू ने नौकरी छोड़ते समय कंपनी का आधिकारिक लैपटॉप वापस नहीं किया और बाद में एक प्रमाणीकरण संबंधी तकनीकी खामी का कथित फायदा उठाकर एप्पल के आंतरिक नेटवर्क तक पहुंच बनाई। शिकायत के अनुसार उन्होंने हार्डवेयर से जुड़ी कई गोपनीय फाइलें डाउनलोड कीं। वहीं टैंग यू टैन पर आरोप है कि उन्होंने नौकरी छोड़ने से पहले एप्पल के आपूर्तिकर्ताओं, निर्माण प्रक्रियाओं और उद्योग से जुड़ी आंतरिक जानकारी स्वयं को ईमेल की। एप्पल का यह भी दावा है कि उन्होंने कुछ कर्मचारियों को ओपनएआई में इंटरव्यू के दौरान कंपनी के हार्डवेयर या पुर्जे साथ लाने के लिए प्रेरित किया, ताकि उन्हें दिखाया जा सके। शिकायत में एक कथित घटना का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें एक उम्मीदवार ने कथित तौर पर कहा कि उसे यह पता ही नहीं था कि कार्यालय से ऐसे उपकरण बाहर ले जाए जा सकते हैं। एप्पल का कहना है कि इस तरह की गतिविधियां कंपनी के बौद्धिक संपदा अधिकारों और व्यापारिक गोपनीयता का उल्लंघन हैं। मुकदमे में ओपनएआई फाउंडेशन, ओपनएआई ग्रुप पीबीसी और आईओ प्रोडक्ट्स को भी प्रतिवादी बनाया गया है। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से तत्काल कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।</p>
<p>एप्पल ने अदालत में यह भी कहा है कि वर्तमान में ओपनएआई में उसके 400 से अधिक पूर्व कर्मचारी काम कर रहे हैं। कंपनी का कहना है कि केवल पूर्व कर्मचारियों की मौजूदगी किसी संगठन को एप्पल के व्यापारिक रहस्यों का उपयोग करने का अधिकार नहीं देती। शिकायत के अनुसार ओपनएआई के कुछ कर्मचारियों ने एप्पल के आपूर्तिकर्ताओं से भी गोपनीय तकनीकी जानकारी हासिल करने की कोशिश की। एप्पल का दावा है कि एक आपूर्तिकर्ता से कथित तौर पर ऐसी विशेष धातु फिनिशिंग तकनीक का उपयोग कराया गया, जिसे एप्पल अपनी गोपनीय निर्माण प्रक्रिया का हिस्सा मानता है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष ओपनएआई ने पूर्व एप्पल डिजाइनर जॉनी आइव द्वारा स्थापित हार्डवेयर स्टार्टअप io Products का 6.5 अरब डॉलर में अधिग्रहण किया था। इस सौदे को ओपनएआई के सॉफ्टवेयर से आगे बढ़कर उपभोक्ता हार्डवेयर बाजार में प्रवेश की बड़ी रणनीति के रूप में देखा गया था। हालांकि जॉनी आइव का नाम इस मुकदमे में शामिल नहीं किया गया है। एप्पल और ओपनएआई के बीच तनाव पिछले कई महीनों से बढ़ रहा था। एप्पल का दावा है कि उसने फरवरी में ओपनएआई को पत्र लिखकर अपनी चिंताओं से अवगत कराया था और बातचीत की इच्छा जताई थी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। दिलचस्प बात यह है कि दोनों कंपनियां हाल तक साझेदार भी रही हैं। वर्ष 2024 में एप्पल ने अपने "Apple Intelligence" फीचर के साथ ChatGPT को सिरी और अन्य सेवाओं में एकीकृत किया था, जिससे आईफोन उपयोगकर्ताओं को सीधे चैटजीपीटी की सुविधाएं मिलने लगी थीं। इसके बावजूद एआई तकनीक, प्रतिभाशाली कर्मचारियों की भर्ती और नए हार्डवेयर उत्पादों की होड़ ने दोनों कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा को तेज कर दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 13:27:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका आजादी के 250वें वर्ष पर दफन करेगा 408 किलो का टाइम कैप्सूल, 2276 में खुलेगा इतिहास का यह अनोखा संदेश</title>
                                    <description><![CDATA[फिलाडेल्फिया के इंडिपेंडेंस नेशनल हिस्टोरिकल पार्क में 10 फीट नीचे रखा जाएगा विशेष टाइम कैप्सूल, जिसमें AI की भविष्यवाणी, ऐतिहासिक दस्तावेज, व्हेल की हड्डी और 50 राज्यों से चुनी गई यादगार वस्तुएं शामिल हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/america-will-bury-a-408-kg-time-capsule-on-the/article-57815"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/america-time-capsule.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">अमेरिका अपनी आजादी के 250 वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक ऐसा कदम उठाने जा रहा है, जो आने वाली कई पीढ़ियों के लिए इतिहास का अनमोल दस्तावेज बन सकता है। 4 जुलाई को फिलाडेल्फिया स्थित इंडिपेंडेंस नेशनल हिस्टोरिकल पार्क में करीब 408 किलो वजनी एक विशेष टाइम कैप्सूल जमीन के भीतर दफन किया जाएगा। इसे अब से ठीक 250 साल बाद यानी वर्ष 2276 में खोला जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य केवल कुछ वस्तुओं को सुरक्षित रखना नहीं है, बल्कि 2026 के अमेरिका की सोच, तकनीक, संस्कृति और सामाजिक जीवन की झलक भविष्य की पीढ़ियों तक पहुंचाना भी है। बताया जा रहा है कि इस टाइम कैप्सूल का रिकॉर्ड भी आधिकारिक रूप से दर्ज कर दिया गया है, ताकि आने वाले समय में इसकी सही पहचान और स्थान सुरक्षित रहे।</p>
<p>फिलाडेल्फिया को इस ऐतिहासिक पहल के लिए इसलिए चुना गया क्योंकि यही वह शहर है, जहां 4 जुलाई 1776 को अमेरिका के स्वतंत्रता घोषणा पत्र को मंजूरी मिली थी। इसी कारण इस स्थान को अमेरिकी लोकतंत्र और आजादी का प्रतीक माना जाता है। अधिकारियों के अनुसार, टाइम कैप्सूल में रखी गई वस्तुएं केवल सरकारी संस्थानों ने नहीं चुनीं, बल्कि देश के सभी 50 राज्यों और आम नागरिकों की भागीदारी से उनका चयन किया गया है। इनमें व्हेल की हड्डी, दुनिया के सबसे बड़े जिप्सम रेगिस्तान की रेत, राइट बंधुओं के ऐतिहासिक विमान का कपड़ा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI से जुड़ी भविष्यवाणियां, महत्वपूर्ण दस्तावेज और कई ऐसी वस्तुएं शामिल हैं, जो वर्तमान समय की पहचान मानी जाती हैं।</p>
<p>टाइम कैप्सूल एक ऐसा बंद कंटेनर होता है, जिसमें किसी खास दौर की वस्तुओं को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जाता है। इसका मकसद भविष्य के लोगों को यह बताना होता है कि उस समय समाज कैसा था, लोग किस तरह का जीवन जीते थे और विज्ञान तथा तकनीक किस स्तर पर पहुंच चुके थे। यही वजह है कि इस बार तैयार किया गया अमेरिकी टाइम कैप्सूल केवल इतिहास का संग्रह नहीं, बल्कि वर्तमान पीढ़ी की ओर से भविष्य के लोगों के लिए एक संदेश भी माना जा रहा है।</p>
<p>इस परियोजना की सबसे बड़ी चुनौती टाइम कैप्सूल को तैयार करना नहीं, बल्कि उसे पूरे 250 वर्षों तक सुरक्षित बनाए रखना था। वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने कई वर्षों तक शोध करने के बाद ऐसा डिजाइन तैयार किया, जो नमी, पानी, जंग और मौसम के प्रभाव से लंबे समय तक बचा रह सके। कैप्सूल को पारंपरिक चौकोर आकार की बजाय बेलनाकार बनाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि चौकोर कंटेनरों के कोनों पर समय के साथ दबाव अधिक पड़ता है और वहीं से पानी अंदर जाने की संभावना बढ़ जाती है। इसके विपरीत बेलनाकार संरचना अधिक मजबूत और टिकाऊ मानी जाती है।</p>
<p>कैप्सूल को विशेष गुणवत्ता वाले स्टेनलेस स्टील से तैयार किया गया है, जिसका उपयोग वैज्ञानिक उपकरणों और अत्यधिक सुरक्षित संरचनाओं में किया जाता है। इसे पहले ही पूरी तरह सील किया जा चुका है और 4 जुलाई को केवल जमीन के भीतर स्थापित किया जाएगा। सीलिंग के लिए इंडियम नाम की विशेष धातु का इस्तेमाल किया गया है। यह धातु बेहद मुलायम होती है और ढक्कन बंद करते समय सबसे छोटी दरार को भी भर देती है। इससे हवा और पानी के प्रवेश की संभावना लगभग समाप्त हो जाती है।</p>
<p>वैज्ञानिकों ने कैप्सूल के भीतर नमी का स्तर भी सावधानी से नियंत्रित किया है। यदि नमी अधिक होती तो कागज और अन्य सामग्री खराब हो सकती थी, जबकि अत्यधिक सूखापन कुछ वस्तुओं को नुकसान पहुंचा सकता था। इसलिए इसके अंदर लगभग 35 प्रतिशत आर्द्रता बनाए रखी गई है। इसे करीब 10 फीट गहराई में दफनाया जाएगा, जहां तापमान अपेक्षाकृत स्थिर रहता है और मौसम के बदलाव का असर बहुत कम होता है।</p>
<p>इस टाइम कैप्सूल की सुरक्षा के लिए एक अतिरिक्त स्टील सिलेंडर भी लगाया जाएगा। दोनों परतों के बीच मौजूद हवा पानी को भीतर पहुंचने से रोकेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि भविष्य में भूजल का स्तर बढ़ भी जाए या बाढ़ जैसी स्थिति बन जाए, तब भी यह संरचना लंबे समय तक सुरक्षित रह सकती है। परियोजना से जुड़े वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि किसी दिन इस कैप्सूल तक पानी पहुंच गया, तो इसका मतलब होगा कि पूरा क्षेत्र गंभीर प्राकृतिक संकट का सामना कर रहा होगा।</p>
<p>अमेरिका इस पहल के जरिए केवल अपनी उपलब्धियों को संरक्षित नहीं करना चाहता, बल्कि यह भी दिखाना चाहता है कि वर्ष 2026 का समाज किस तरह सोचता था और किन तकनीकों का उपयोग कर रहा था। यही कारण है कि इसमें सरकारी दस्तावेजों के साथ आम लोगों की ओर से चुनी गई वस्तुओं को भी समान महत्व दिया गया है। इससे भविष्य की पीढ़ियां उस दौर को केवल किताबों के माध्यम से नहीं, बल्कि वास्तविक वस्तुओं के जरिए भी समझ सकेंगी।</p>
<p>दुनिया में इससे पहले भी कई प्रसिद्ध टाइम कैप्सूल बनाए जा चुके हैं। अमेरिका का 'क्रिप्ट ऑफ सिविलाइजेशन' सबसे चर्चित उदाहरणों में शामिल है, जिसे लगभग 6,000 वर्षों तक बंद रखने की योजना बनाई गई है और इसे वर्ष 8113 में खोला जाएगा। वहीं 1939 में न्यूयॉर्क में दफन किया गया वेस्टिंगहाउस टाइम कैप्सूल भी भविष्य के लिए सुरक्षित रखा गया है। भारत में भी 1973 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल के दौरान लाल किले के पास 'कलपात्र' नाम से टाइम कैप्सूल दफन किया गया था, जिसे बाद में नई सरकार बनने पर बाहर निकाल लिया गया। हालांकि उसमें मौजूद सामग्री को लेकर आज भी कई चर्चाएं होती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 11:14:49 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, AI के फर्जी कानूनी उदाहरणों को बताया न्याय व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[एनसीएलटी का फैसला रद्द करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से तैयार किए गए झूठे कानूनी उदाहरण अदालतों में पेश करना न्यायिक व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर असर डाल सकता है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/supreme-courts-strict-comment-calls-fake-legal-examples-of-ai/article-57706"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/supreme-court-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने अदालतों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार किए गए फर्जी कानूनी उदाहरणों के इस्तेमाल पर कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे न्याय व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताया है। अदालत ने कहा कि AI तकनीक अपने आप में समस्या नहीं है, लेकिन यदि उससे तैयार की गई गलत या मनगढ़ंत जानकारी को असली कानूनी मिसाल बताकर अदालत के सामने पेश किया जाता है तो इससे न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सीधा असर पड़ता है। कोर्ट ने इस खतरे की गंभीरता समझाने के लिए भोपाल गैस त्रासदी में मिथाइल आइसोसाइनेट गैस के रिसाव का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह जहरीली गैस का प्रभाव दूरगामी और विनाशकारी था, उसी तरह न्यायिक प्रक्रिया में झूठी कानूनी जानकारी का प्रवेश भी बेहद नुकसानदायक हो सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने यह टिप्पणी नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) मुंबई के एक आदेश को रद्द करते हुए की। मामला एस्सेल इन्फ्राप्रोजेक्ट लिमिटेड, जम्मू-कश्मीर बैंक लिमिटेड और पूजा रमेश सिंह से जुड़े दिवालियापन विवाद का था। एनसीएलटी ने दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) की धारा-7 के तहत दायर याचिका को स्वीकार करते हुए अपने फैसले में कई ऐसे कानूनी मामलों का हवाला दिया था, जिनका वास्तविक अस्तित्व ही नहीं था। जांच के दौरान सामने आया कि आदेश में जिन फैसलों का उल्लेख किया गया, उनमें कुछ पूरी तरह मनगढ़ंत थे और उनकी कानूनी साइटेशन भी वास्तविक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती थीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालतों में किसी भी फैसले का आधार केवल प्रमाणिक और सत्यापित कानूनी सामग्री होनी चाहिए। यदि किसी आदेश में ऐसे मामलों का हवाला दिया जाए जो वास्तव में मौजूद ही नहीं हैं, तो यह केवल तकनीकी गलती नहीं बल्कि न्यायिक प्रक्रिया की मूल भावना के खिलाफ है। पीठ ने स्पष्ट किया कि इस तरह की चूक लोगों के न्यायपालिका पर भरोसे को कमजोर कर सकती है और भविष्य के मामलों में भी गलत कानूनी आधार तैयार कर सकती है। अदालत ने कहा कि न्याय व्यवस्था का पूरा ढांचा सत्य, पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर आधारित है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की फर्जी जानकारी के लिए कोई जगह नहीं हो सकती।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामले की सुनवाई के दौरान जम्मू-कश्मीर बैंक लिमिटेड ने शपथपत्र दाखिल कर कहा कि उसके वकीलों ने अपने तर्कों में इन कथित मामलों का कोई उल्लेख नहीं किया था। बैंक के अनुसार, एनसीएलटी ने अपने स्तर पर की गई कानूनी रिसर्च के दौरान इन उदाहरणों को आदेश में शामिल किया। इस दलील के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पूरे रिकॉर्ड की समीक्षा की और पाया कि आदेश में शामिल कुछ कानूनी संदर्भ वास्तविक न्यायिक अभिलेखों में उपलब्ध ही नहीं थे। इसके बाद अदालत ने एनसीएलटी का आदेश रद्द कर दिया और भविष्य के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश भी जारी किए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि वह AI तकनीक के उपयोग के खिलाफ नहीं है। अदालत ने कहा कि आधुनिक तकनीक न्यायिक शोध और दस्तावेजों की तैयारी में उपयोगी हो सकती है, लेकिन अंतिम जिम्मेदारी हमेशा इंसानों की ही रहेगी। यदि कोई वकील बिना तथ्य जांचे AI से प्राप्त जानकारी को अदालत में पेश करता है, तो यह उसकी गंभीर पेशेवर लापरवाही मानी जाएगी। इसी तरह यदि कोई न्यायिक अधिकारी या न्यायाधीश बिना सत्यापन के ऐसी सामग्री पर भरोसा करता है, तो यह भी न्यायिक जिम्मेदारी के अनुरूप नहीं माना जाएगा। अदालत ने कहा कि तकनीक केवल सहायक हो सकती है, लेकिन निर्णय और तथ्य सत्यापन का दायित्व मानव विवेक पर ही आधारित रहना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पीठ ने कहा कि केवल चेतावनी देना पर्याप्त नहीं होगा। यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर या लापरवाही से अदालत में फर्जी AI-आधारित कानूनी सामग्री प्रस्तुत करता है, तो उसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए। अदालत ने इस मुद्दे को भविष्य की न्यायिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि समय रहते स्पष्ट नियम बनाना आवश्यक है ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। न्यायपालिका में विश्वास बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि अदालतों में प्रस्तुत हर कानूनी संदर्भ का स्वतंत्र सत्यापन किया जाए। इसी क्रम में सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया को एक विशेषज्ञ समिति गठित करने की सिफारिश की है। अदालत का कहना है कि यह समिति अदालतों में AI के जिम्मेदार उपयोग के लिए दिशा-निर्देश तैयार करे और यह सुनिश्चित करे कि किसी भी वकील या पक्षकार द्वारा फर्जी अथवा भ्रामक AI सामग्री प्रस्तुत न की जाए। यदि ऐसे मामलों में नियमों का उल्लंघन होता है तो उसके लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई का भी प्रावधान होना चाहिए। अदालत ने कहा कि तकनीक का उपयोग स्वागतयोग्य है, लेकिन न्याय की प्रक्रिया में सत्य और प्रमाणिकता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 06:06:00 +0530</pubDate>
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                <title>क्या युवा अब दोस्तों से ज्यादा ChatGPT पर करने लगे हैं भरोसा?</title>
                                    <description><![CDATA[AI चैटबॉट्स से बढ़ती बातचीत केवल तकनीक का प्रभाव नहीं, बल्कि बदलती जीवनशैली, अकेलेपन, गोपनीयता और बिना जजमेंट के सुने जाने की चाह का भी संकेत है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/opinion/have-youth-now-started-trusting-chatgpt-more-than-friends/article-57470"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ai-and-youth.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पिछले कुछ वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने लोगों के काम करने, सीखने और जानकारी हासिल करने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। लेकिन अब एक नया बदलाव भी तेजी से देखने को मिल रहा है। कई युवा केवल पढ़ाई, नौकरी या जानकारी के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी भावनाएं, उलझनें, रिश्तों की समस्याएं और जीवन से जुड़े सवाल भी ChatGPT जैसे AI चैटबॉट्स से साझा कर रहे हैं। यह सवाल अब अक्सर उठने लगा है कि क्या आज की युवा पीढ़ी इंसानों से ज्यादा AI के साथ अपने मन की बात करने में सहज महसूस करती है? इसका जवाब पूरी तरह "हां" या "नहीं" में देना आसान नहीं है, लेकिन यह जरूर कहा जा सकता है कि AI ने युवाओं के लिए संवाद का एक नया माध्यम तैयार किया है। इसके पीछे कई सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और तकनीकी कारण हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>बिना जजमेंट के अपनी बात कहने की आजादी</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">आज का युवा सबसे ज्यादा जिस चीज की तलाश में है, वह है ऐसा व्यक्ति या माध्यम जो उसकी बात बिना टोके, बिना आलोचना किए और बिना किसी पूर्वाग्रह के सुने। कई बार परिवार, दोस्त या रिश्तेदार सलाह देने से पहले ही निर्णय सुना देते हैं। इससे कई युवा अपनी भावनाएं दबाकर रखना बेहतर समझते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">AI के साथ बातचीत में उन्हें ऐसा महसूस होता है कि उनकी बात को बिना किसी व्यक्तिगत राय के सुना जा रहा है। यही कारण है कि वे कई बार ऐसी बातें भी लिख देते हैं, जो शायद किसी करीबी से कहने में हिचकिचाते।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>गोपनीयता का एहसास</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">डिजिटल युग में प्राइवेसी एक बड़ा मुद्दा बन चुकी है। युवाओं को अक्सर यह चिंता रहती है कि कहीं उनकी निजी बातें किसी और तक न पहुंच जाएं। AI के साथ बातचीत करते समय उन्हें अपेक्षाकृत अधिक गोपनीयता का अनुभव होता है। यही वजह है कि वे रिश्तों, करियर, आत्मविश्वास, तनाव या भविष्य से जुड़े सवाल खुलकर पूछते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, यह भी जरूरी है कि उपयोगकर्ता किसी भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अत्यधिक संवेदनशील या व्यक्तिगत जानकारी साझा करते समय सावधानी बरतें।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>हर समय उपलब्ध रहने की सुविधा</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">इंसानी रिश्तों की अपनी सीमाएं होती हैं। हर दोस्त, परिवार का सदस्य या सलाहकार हर समय उपलब्ध नहीं हो सकता। लेकिन AI दिन हो या रात, किसी भी समय बातचीत के लिए तैयार रहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">रात के दो बजे अगर कोई छात्र परीक्षा के तनाव में हो या कोई युवा अपने करियर को लेकर परेशान हो, तो उसे तुरंत बातचीत का अवसर मिल जाता है। यही सुविधा AI को अलग बनाती है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>डिजिटल पीढ़ी की नई आदतें</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">आज की पीढ़ी बचपन से ही इंटरनेट, स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के बीच बड़ी हुई है। उनके लिए चैट करके अपनी बात कहना कई बार आमने-सामने बातचीत से भी आसान होता है। यही वजह है कि AI के साथ संवाद उन्हें स्वाभाविक लगता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह केवल तकनीक की आदत नहीं, बल्कि बदलती संचार शैली का भी हिस्सा है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>क्या AI सचमुच दोस्त बन सकता है?</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">यह सबसे महत्वपूर्ण सवाल है। AI बातचीत कर सकता है, जानकारी दे सकता है, विचारों को व्यवस्थित करने में मदद कर सकता है और कई बार प्रेरित भी कर सकता है। लेकिन वह इंसान की तरह भावनाओं को महसूस नहीं करता।</p>
<p style="text-align:justify;">AI के पास न व्यक्तिगत अनुभव होते हैं और न ही वास्तविक संवेदनाएं। वह आपके शब्दों को समझने की कोशिश करता है, लेकिन आपके जीवन को उसी तरह महसूस नहीं कर सकता, जैसे कोई करीबी मित्र या परिवार का सदस्य कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए AI को एक सहायक संवाद माध्यम माना जा सकता है, लेकिन वास्तविक रिश्तों का विकल्प नहीं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>मानसिक स्वास्थ्य के संदर्भ में AI</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">आज मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता पहले की तुलना में काफी बढ़ी है। कई लोग शुरुआती स्तर पर अपनी चिंता, तनाव या भावनात्मक उलझनों को समझने के लिए AI से बातचीत करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यह आत्मचिंतन और अपनी भावनाओं को शब्द देने में मददगार हो सकता है। लेकिन यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय से अवसाद, अत्यधिक चिंता, आत्महत्या के विचार या गंभीर मानसिक परेशानी हो, तो केवल AI पर निर्भर रहना उचित नहीं है। ऐसे मामलों में प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिक, मनोचिकित्सक या भरोसेमंद व्यक्ति से संपर्क करना आवश्यक होता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>क्या युवा रिश्तों से दूर हो रहे हैं?</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">कई लोगों का मानना है कि AI के बढ़ते उपयोग से इंसानी रिश्ते कमजोर हो रहे हैं। लेकिन इसे पूरी तरह सही नहीं कहा जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">असल में युवा ऐसे माहौल की तलाश में हैं जहां उन्हें बिना डर, बिना शर्म और बिना आलोचना के अपनी बात रखने का अवसर मिले। यदि परिवार, मित्र और समाज ऐसा सुरक्षित वातावरण प्रदान करें, तो शायद AI केवल एक सहायक माध्यम बनकर रह जाएगा, मुख्य सहारा नहीं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>भविष्य में क्या होगा?</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">आने वाले समय में AI और इंसानी रिश्ते एक-दूसरे के विरोधी नहीं होंगे। AI जानकारी, मार्गदर्शन, योजना बनाने और शुरुआती भावनात्मक सहायता में उपयोगी साबित हो सकता है। वहीं, जीवन की वास्तविक खुशियां, अपनापन, विश्वास, प्रेम और कठिन समय में साथ केवल इंसानी रिश्ते ही दे सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">तकनीक जितनी भी विकसित हो जाए, एक सच्चे दोस्त की मुस्कान, माता-पिता का स्नेह, भाई-बहन का साथ या किसी प्रिय व्यक्ति का हौसला आज भी किसी मशीन से कहीं अधिक मूल्यवान है।</p>
<p style="text-align:justify;">AI ने युवाओं को अपनी बात कहने का एक नया और सुविधाजनक मंच दिया है। बिना जजमेंट के बातचीत, हर समय उपलब्धता और डिजिटल सहजता इसकी सबसे बड़ी ताकत हैं। लेकिन यह भी उतना ही सच है कि AI इंसानी भावनाओं का विकल्प नहीं बन सकता। सबसे बेहतर रास्ता यही है कि AI का उपयोग सीखने, समझने और आत्मचिंतन के लिए किया जाए, जबकि जीवन के सबसे महत्वपूर्ण रिश्तों को भी उतना ही समय और महत्व दिया जाए। आखिरकार, तकनीक सुविधा दे सकती है, लेकिन अपनापन, विश्वास और सच्चा साथ आज भी इंसानों से ही मिलता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपीनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 00:00:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केतन मर्डर केस पर कंगना रनोट बोलीं, बच्चों की गलतियों के लिए माता-पिता को दोष न दें</title>
                                    <description><![CDATA[सोशल मीडिया और AI के बढ़ते प्रभाव का किया जिक्र, सिया गोयल और उसके बॉयफ्रेंड पर केतन अग्रवाल की हत्या का आरोप]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/dont-blame-parents-for-childrens-mistakes-says-kangana-ranaut-on/article-57145"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ketan-agrawal-murder-case-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल हत्याकांड को लेकर अभिनेत्री और सांसद कंगना रनोट ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि किसी भी बच्चे या युवा के गलत फैसलों के लिए सीधे उसके माता-पिता या पूरे परिवार को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। कंगना ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि आज के समय में बच्चों का व्यवहार केवल घर के माहौल से तय नहीं होता, बल्कि सोशल मीडिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), दोस्त और बाहरी माहौल भी उनकी सोच और फैसलों पर गहरा असर डालते हैं। यह मामला उस समय चर्चा में आया जब पुलिस ने जांच के बाद केतन अग्रवाल की मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार दोनों ने मिलकर पहले हत्या की साजिश बनाई और फिर उसे अंजाम दिया। फिलहाल दोनों आरोपी न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं और मामले की जांच जारी है। कंगना रनोट ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा कि आज बच्चों को केवल उनके माता-पिता नहीं बल्कि कई दूसरी चीजें भी प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यह समझना जरूरी है कि आखिर बच्चों को कौन प्रभावित कर रहा है और किस तरह उनकी सोच बदल रही है। उनके मुताबिक किसी एक घटना के आधार पर पूरे परिवार का आकलन करना सही नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में लोग अलग-अलग तरह की जिंदगी जी रहे हैं और ऐसे में किसी परिवार को बिना पूरी जानकारी के कठघरे में खड़ा नहीं किया जाना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस मामले पर कंगना से पहले अभिनेत्री खुशबू पटानी, आंचल खुराना और हिना खान भी अपनी प्रतिक्रिया दे चुकी हैं। इन सभी ने घटना पर दुख जताते हुए आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी। सोशल मीडिया पर भी यह मामला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग इस हत्याकांड को लेकर अलग-अलग राय रख रहे हैं। पुलिस जांच के मुताबिक 26 वर्षीय केतन अग्रवाल और सिया गोयल की सगाई इसी साल फरवरी में हुई थी। दोनों की शादी नवंबर में तय थी और परिवार शादी की तैयारियों में जुटा हुआ था। जांच में सामने आया कि सिया कथित तौर पर चेतन चौधरी के साथ रिश्ते में थी। पुलिस का दावा है कि इसी वजह से दोनों ने केतन को रास्ते से हटाने की योजना बनाई। जांच एजेंसियों के अनुसार हत्या की पहली कोशिश 14 जून को की गई थी। बताया गया कि सिया केतन को लोहागढ़ किले पर लेकर गई, जहां उसे घाटी की ओर धक्का देने की कोशिश की गई। हालांकि उस समय केतन एक झाड़ी पकड़कर बच गए। पुलिस का कहना है कि उस दौरान सिया ने सांप दिखाई देने की बात कहकर पूरा मामला सामान्य दिखाने की कोशिश की और बाद में दोनों वापस लौट आए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पहली कोशिश नाकाम होने के बाद कुछ दिन बाद फिर से केतन को उसी किले पर ले जाया गया। पुलिस के अनुसार इस बार चेतन चौधरी पहले से वहां मौजूद था। जैसे ही केतन एक सुनसान जगह पहुंचे, दोनों आरोपियों ने पीछे से धक्का दे दिया, जिससे वह गहरी खाई में गिर गए। गंभीर चोट लगने से मौके पर ही उनकी मौत हो गई। बाद में पुलिस ने तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच के दौरान पुलिस को कई अहम सुराग मिले। पहले केतन की बहन को सिया के व्यवहार पर शक हुआ। जब उसने घटना के बारे में सवाल पूछा तो सिया संतोषजनक जवाब नहीं दे सकी। इसके बाद परिवार ने पुलिस के सामने अपनी शंका जाहिर की और मामले की दोबारा गहराई से जांच की मांग की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरा अहम सुराग लोहागढ़ किले के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों से मिला। पुलिस को फुटेज में एक युवक संदिग्ध तरीके से घूमता दिखाई दिया। गर्मी के मौसम में भी वह हुडी पहनकर अपना चेहरा छिपाने की कोशिश कर रहा था। जांच आगे बढ़ने पर उसकी पहचान चेतन चौधरी के रूप में होने का दावा किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण सुराग कॉल डिटेल रिकॉर्ड से मिला। पुलिस के मुताबिक सिया गोयल ने एक ही मोबाइल नंबर पर दो हजार से अधिक बार बातचीत की थी। जांच में यह नंबर चेतन चौधरी का निकला। पुलिस का कहना है कि दोनों के बीच लगातार संपर्क था और इसी आधार पर पूछताछ का दायरा बढ़ाया गया। बाद में दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसमें कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आईं।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस हत्या के पीछे की पूरी साजिश, दोनों आरोपियों की भूमिका और अन्य संभावित पहलुओं की जांच कर रही है। वहीं अदालत ने दोनों आरोपियों को पुलिस हिरासत में भेजा था और मामले की सुनवाई न्यायिक प्रक्रिया के तहत जारी है। दूसरी ओर कंगना रनोट की प्रतिक्रिया ने इस मामले को एक नई बहस से जोड़ दिया है। उनका कहना है कि अपराध की जिम्मेदारी अपराधी की होती है और हर घटना के बाद पूरे परिवार को दोषी मान लेना समाज के लिए सही सोच नहीं हो सकती।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 16:08:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>इंदौर बना ईवी और ग्रीन एनर्जी का नया हब, निवेशकों ने दिखाई रुचि</title>
                                    <description><![CDATA[ईवी कॉन्क्लेव में देशभर के निवेशक, स्टार्टअप और उद्योग विशेषज्ञ जुटे, स्वच्छ परिवहन, ग्रीन एनर्जी और भविष्य की तकनीकों पर हुआ मंथन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a3f6eff911c9/article-57105"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/indore-ev-conclave.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इंदौर ने एक बार फिर खुद को देश के उभरते हुए नवाचार केंद्र के रूप में साबित किया है। शुक्रवार को शहर में आयोजित इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) और ग्रीन एनर्जी कॉन्क्लेव में देशभर से आए निवेशकों, स्टार्टअप संस्थापकों, उद्योग विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं ने भाग लिया। इस आयोजन का उद्देश्य केवल इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना नहीं था, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा, टिकाऊ विकास और भविष्य की तकनीकों को लेकर एक साझा रोडमैप तैयार करना भी था। शेराटन ग्रैंड पैलेस में आयोजित इस कॉन्क्लेव ने यह संकेत दिया कि अब भारत के टियर-2 शहर भी हरित विकास और नई तकनीकों के बड़े केंद्र बनते जा रहे हैं। कार्यक्रम में 200 से अधिक वरिष्ठ अधिकारी, निवेशक, उद्योग प्रतिनिधि और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञ मौजूद रहे। आयोजन का संचालन ह्युन्स ऑफ ईवी द्वारा किया गया, जबकि इंदौर नगर निगम ने सिटी होस्ट पार्टनर के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शहर की स्वच्छता और सस्टेनेबल डेवलपमेंट की पहचान को देखते हुए यह आयोजन इंदौर के लिए काफी अहम माना गया। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे आयोजन स्थानीय उद्योगों और स्टार्टअप्स को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कॉन्क्लेव के दौरान इलेक्ट्रिक मोबिलिटी से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैटरी टेक्नोलॉजी, ऊर्जा प्रबंधन, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लीन ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स टेक्नोलॉजी, क्लाइमेट टेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सर्कुलर इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों में भविष्य की संभावनाओं पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने कहा कि आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों का विस्तार केवल निजी परिवहन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सार्वजनिक परिवहन, माल ढुलाई और औद्योगिक उपयोग में भी तेजी से बढ़ेगा। यदि चार्जिंग नेटवर्क, बैटरी निर्माण और ऊर्जा भंडारण तकनीकों में तेजी से निवेश किया जाता है तो भारत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हो सकता है। इसके लिए सरकारी नीतियों, निजी निवेश और तकनीकी नवाचार के बीच बेहतर तालमेल जरूरी होगा। कॉन्क्लेव में शामिल कई निवेशकों ने स्टार्टअप्स के साथ संभावित साझेदारी और निवेश को लेकर भी चर्चा की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कार्यक्रम का सबसे आकर्षक हिस्सा स्टार्टअप पिच सेशन रहा। देशभर से प्राप्त करीब 2,400 आवेदनों में से बहु-स्तरीय चयन प्रक्रिया के बाद केवल नौ स्टार्टअप्स को अंतिम प्रस्तुति का अवसर मिला। इन स्टार्टअप्स ने निवेशकों के सामने अपने उत्पाद, तकनीक और बिजनेस मॉडल पेश किए। कई स्टार्टअप्स ने इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग, स्मार्ट बैटरी सिस्टम, ऊर्जा प्रबंधन और एआई आधारित मोबिलिटी समाधान जैसे क्षेत्रों में अपने नवाचार प्रस्तुत किए। प्रस्तुति के बाद निवेशकों और स्टार्टअप संस्थापकों के बीच विस्तृत नेटवर्किंग और व्यावसायिक चर्चाएं भी हुईं। कॉन्क्लेव में भाग लेने वाले उद्योग प्रतिनिधियों का मानना था कि भारत में ग्रीन एनर्जी सेक्टर आने वाले वर्षों में सबसे तेजी से बढ़ने वाले क्षेत्रों में शामिल होगा। इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग, कार्बन उत्सर्जन कम करने के प्रयास और सरकार की प्रोत्साहन योजनाएं इस बदलाव को और गति देंगी। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि अब निवेशकों का रुझान केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि इंदौर जैसे शहर भी नई तकनीकों और स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ह्युन्स ऑफ ईवी के सीईओ डॉ. ललित सिंह ने कहा कि भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी तेजी से आगे बढ़ रही है और इस क्षेत्र में नवाचार की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। उनके अनुसार ऐसे मंच उद्योग, निवेशकों और युवा उद्यमियों को एक साथ लाकर नए अवसर पैदा करते हैं। वहीं सलाहकार स्वप्निल बंसल ने कहा कि टियर-2 और टियर-3 शहरों के स्टार्टअप्स अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं और उन्हें निवेश प्राप्त करने के बेहतर अवसर मिल रहे हैं। कार्यक्रम में डायरेक्टर आभा सिंह और एडिटर दिव्या ठक्कर ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि ग्रीन एनर्जी और ईवी आधारित तकनीक अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं रही। मध्य भारत तेजी से इस बदलाव का महत्वपूर्ण केंद्र बन रहा है। उन्होंने कहा कि यदि इसी तरह उद्योग, सरकार और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग बढ़ता रहा तो भारत स्वच्छ ऊर्जा और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है। कॉन्क्लेव के समापन पर यह स्पष्ट नजर आया कि इंदौर केवल स्वच्छ शहर ही नहीं, बल्कि भविष्य की हरित अर्थव्यवस्था और तकनीकी नवाचार का भी मजबूत केंद्र बनकर उभर रहा है। निवेशकों, उद्योग जगत और स्टार्टअप्स के बीच बने नए संपर्क आने वाले समय में कई बड़े प्रोजेक्ट्स और निवेश का आधार बन सकते हैं। इससे स्थानीय रोजगार, तकनीकी विकास और स्वच्छ ऊर्जा आधारित उद्योगों को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 13:11:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>2030 तक AI से 22% नौकरियों पर असर, डिग्री से ज्यादा स्किल्स की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[WEF की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, 9.2 करोड़ नौकरियां प्रभावित होने की आशंका; चीन ने 12 हजार से ज्यादा डिग्री प्रोग्राम बंद कर AI आधारित कोर्स शुरू किए]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/headline-ai-to-impact-22-jobs-by-2030-demand-for/article-56050"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ai-jobs-2030.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब केवल तकनीक की दुनिया तक सीमित नहीं रह गया है। इसका असर तेजी से रोजगार, शिक्षा और उद्योगों पर दिखाई देने लगा है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2030 तक दुनिया की करीब 22 प्रतिशत नौकरियां AI और ऑटोमेशन से प्रभावित हो सकती हैं। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि आने वाले वर्षों में लगभग 9.2 करोड़ नौकरियां खत्म हो सकती हैं या उनका स्वरूप पूरी तरह बदल सकता है। हालांकि इसके साथ ही करीब 17 करोड़ नई नौकरियां भी पैदा होने की संभावना जताई गई है। इसका मतलब यह है कि रोजगार के अवसर खत्म नहीं होंगे, लेकिन काम करने का तरीका और जरूरी योग्यताएं पहले से काफी अलग होंगी। सबसे ज्यादा असर प्रशासनिक कार्यों, डेटा एंट्री, बेसिक कंटेंट राइटिंग, कस्टमर सपोर्ट और अकाउंटिंग जैसे क्षेत्रों पर पड़ रहा है। इन क्षेत्रों में कई प्रक्रियाएं तेजी से ऑटोमेट हो रही हैं। दूसरी ओर डेटा साइंस, मशीन लर्निंग, साइबर सिक्योरिटी, क्लाउड कंप्यूटिंग और ग्रीन एनर्जी जैसे सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहे हैं। कंपनियां अब ऐसे कर्मचारियों को तलाश रही हैं जो केवल डिग्रीधारी न हों, बल्कि AI टूल्स के साथ काम करने की क्षमता भी रखते हों। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में नौकरी पाने और बनाए रखने के लिए केवल शैक्षणिक योग्यता पर्याप्त नहीं होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">देश में आईटी, कानून, कॉमर्स, ट्रांसलेशन, डिजाइन और लाइब्रेरी साइंस जैसे क्षेत्रों में बदलाव की शुरुआत दिखाई देने लगी है। जिन कामों के लिए पहले बड़ी संख्या में लोगों की जरूरत होती थी, उनमें अब AI टूल्स की मदद से कम समय और कम संसाधनों में काम पूरा किया जा रहा है। एचआर कंपनी टीमलीज के मुताबिक करीब 40 प्रतिशत कंपनियां अब हाइब्रिड स्किल्स को प्राथमिकता दे रही हैं। यानी उम्मीदवार के पास डिग्री के साथ AI आधारित तकनीकों की समझ होना भी जरूरी माना जा रहा है। वहीं नैस्कॉम की रिपोर्ट बताती है कि देश के 82 प्रतिशत बीसीए और एमसीए ग्रेजुएट्स के पास AI टूल्स की औपचारिक ट्रेनिंग नहीं है, जो भविष्य में उनके लिए चुनौती बन सकती है।  AI इंसानों की जगह पूरी तरह नहीं लेगा, लेकिन जो लोग AI का प्रभावी उपयोग करना जानते हैं, वे निश्चित रूप से उन लोगों से आगे निकल जाएंगे जो नई तकनीक को अपनाने से बच रहे हैं। आईबीएम इंस्टीट्यूट फॉर बिजनेस वैल्यू की रिपोर्ट भी इसी ओर इशारा करती है। रिपोर्ट के अनुसार आने वाले समय में कंपनियां ऐसे कर्मचारियों को ज्यादा महत्व देंगी जो AI की मदद से अपनी उत्पादकता और कार्यक्षमता बढ़ा सकें।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस बीच चीन ने शिक्षा क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए पिछले चार वर्षों में 12,200 से अधिक अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम बंद या निलंबित कर दिए हैं। इसके साथ ही करीब 10,200 नए कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। इनमें AI, रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी और अन्य उभरते तकनीकी क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है। चीन सरकार का मानना है कि भविष्य की अर्थव्यवस्था को ऐसे युवाओं की जरूरत होगी जो नई तकनीकों के साथ काम कर सकें। यही कारण है कि कला, मानविकी, विदेशी भाषाओं और कुछ पारंपरिक प्रबंधन पाठ्यक्रमों में कटौती की गई है। भारत में भी इसी तरह के संकेत दिखाई देने लगे हैं। कर्नाटक सरकार ने हाल ही में सरकारी कॉलेजों में कम दाखिले वाले सैकड़ों पारंपरिक कोर्स कॉम्बिनेशन बंद कर दिए हैं और 1300 से ज्यादा कोर्सों में सीटें कम कर दी हैं। शिक्षा विशेषज्ञ इसे बदलती रोजगार जरूरतों का संकेत मान रहे हैं। उनका कहना है कि आने वाले वर्षों में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को अपने पाठ्यक्रमों में बड़े बदलाव करने होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 12:06:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>6 महीने में बदली कोडिंग दुनिया, पीछे छूट रहे पुराने ढर्रे वाले इंजीनियर: बोले- पूर्व गूगल CEO </title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हाल के महीनों में टेक जगत में जो हो रहा है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसे लेकर काफी बातें हो रही हैं। पूर्व गूगल सीईओ एरिक श्मिट ने हाल ही में एक यूट्यूब बातचीत में बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट की प्रक्रिया में तेजी से बदलाव ला दिया है। उनका मानना है कि पिछले छह महीनों में जो बदलाव आया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो पिछले कई सालों में भी नहीं देखा गया। इसका सीधा असर सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स के काम करने के तरीके पर पड़ा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर उन पर जो अभी भी पुराने तरीके से कोड लिख रहे हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">एरिक श्मिट ने</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/the-coding-world-has-changed-in-6-months-old-fashioned-engineers/article-53520"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/ai-coding-eric-schmidt-statement-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हाल के महीनों में टेक जगत में जो हो रहा है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसे लेकर काफी बातें हो रही हैं। पूर्व गूगल सीईओ एरिक श्मिट ने हाल ही में एक यूट्यूब बातचीत में बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट की प्रक्रिया में तेजी से बदलाव ला दिया है। उनका मानना है कि पिछले छह महीनों में जो बदलाव आया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो पिछले कई सालों में भी नहीं देखा गया। इसका सीधा असर सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स के काम करने के तरीके पर पड़ा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर उन पर जो अभी भी पुराने तरीके से कोड लिख रहे हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">एरिक श्मिट ने बातचीत में अपनी पुरानी यादें भी साझा कीं। उन्होंने कहा कि जब वो 20 साल के थे</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब खुद कोड लिखना उनके लिए बड़ी बात थी। लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल गए हैं। उनका कहना है कि आज एआई सिस्टम ने कोडिंग को इतना आसान और तेज बना दिया है कि पुराने तरीके से काम करना अब पीछे छूटता जा रहा है। उनके मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कई कंपनियों को अब यह सवाल करना चाहिए कि आखिर टीम अभी भी उसी पुराने तरीके से कोड क्यों लिख रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब तकनीक इसी तरह आगे बढ़ चुकी है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">टेक इंडस्ट्री में इस बदलाव को लेकर अलग-अलग राय हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन श्मिट का कहना है कि एआई का असर केवल एक सहायक टूल तक सीमित नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह काम करने की पूरी प्रक्रिया को बदल रहा है। उनकी रिपोर्ट्स के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एआई की मदद से अब वही काम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो पहले कई इंजीनियर्स मिलकर करते थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो अब बहुत कम समय में हो सकता है। यहां तक कि एक अकेला डेवलपर भी एआई टूल्स की सहायता से बड़े और जटिल ऐप्स बना सकता है। श्मिट का ये भी कहना है कि यह बदलाव अचानक ही तेजी से आया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसकी शुरुआत पिछले साल से मानी जा रही है।</span></span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"> </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उन्होंने यह भी बताया कि एआई की क्षमता देखकर वे खुद कई बार आश्चर्यचकित हो जाते हैं। उनका कहना है कि यह तकनीक न केवल काम को आसान बना रही है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सॉफ्टवेयर बनाने के तरीके को भी पूरी तरह से बदल रही है। इस बीच</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टेक कंपनियों में भी चर्चा चल रही है कि भविष्य में इंजीनियर्स की भूमिका कैसी होगी और उन्हें किन नई क्षमताओं पर ध्यान देना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि जो लोग एआई टूल्स को अपनाने में पीछे रह जाएंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वे प्रतिस्पर्धा में कमजोर पड़ सकते हैं। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो इंजीनियर्स इन बदलावों के साथ खुद को ढाल लेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनके लिए और भी अवसर बढ़ सकते हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 May 2026 16:04:50 +0530</pubDate>
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