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                <title>Water Conservation - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Water Conservation RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मध्यप्रदेश में अल्पवर्षा की आशंका पर सरकार अलर्ट, हर जिले में बनेगी जल संकट आकस्मिक योजना</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संभावित कम बारिश से निपटने के लिए सभी विभागों के साथ समीक्षा बैठक की। जल डैशबोर्ड, कंटिन्जेंसी क्रॉप प्लान, जल संरक्षण अभियान और किसानों के लिए वैज्ञानिक खेती पर विशेष जोर दिया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/government-alert-on-possibility-of-short-rainfall-in-madhya-pradesh/article-57709"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/madhya-pradesh.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश में संभावित अल्पवर्षा की आशंका को देखते हुए राज्य सरकार ने व्यापक स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में जल संकट, कृषि, सिंचाई और पेयजल प्रबंधन को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। सरकार ने तय किया है कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में कलेक्टर की अध्यक्षता में जल संकट से निपटने के लिए आकस्मिक कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसके साथ ही राज्य स्तर पर रियल-टाइम मॉनिटरिंग और पूर्व चेतावनी प्रणाली के लिए आधुनिक जल डैशबोर्ड विकसित किया जाएगा, जिससे जलाशयों, भूजल और पेयजल की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सके। सरकार का कहना है कि समय रहते वैज्ञानिक योजना और विभागों के बेहतर समन्वय से संभावित अल्पवर्षा के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि संभावित कम बारिश को केवल संकट के रूप में नहीं बल्कि बेहतर योजना और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाने के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि किसानों तक समय पर सही जानकारी और तकनीकी सलाह पहुंचाई जाए ताकि मौसम की चुनौती के बावजूद कृषि उत्पादन और किसानों की आय पर न्यूनतम असर पड़े। बैठक में किसान कल्याण एवं कृषि विकास, जल संसाधन, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन, सहकारिता और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग सहित कई विभागों की तैयारियों की समीक्षा की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को कम पानी और कम अवधि में तैयार होने वाली फसलों की खेती के लिए व्यापक स्तर पर जागरूक किया जाए। उन्होंने ज्वार, बाजरा, उड़द, मूंग, तुअर, कोदो और कुटकी जैसी मोटे अनाज एवं दलहनी फसलों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। उनका कहना था कि ये फसलें कम पानी में भी बेहतर उत्पादन देती हैं और किसानों के लिए आर्थिक रूप से भी लाभकारी साबित हो सकती हैं। इसके साथ ही किसानों से जल्दबाजी में बुआई नहीं करने की अपील करने के निर्देश भी दिए गए। सरकार चाहती है कि खेतों में पर्याप्त नमी बनने के बाद ही बुआई की जाए ताकि फसलों को शुरुआती नुकसान से बचाया जा सके। बैठक में आधुनिक कृषि तकनीकों के अधिकतम उपयोग पर भी बल दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की सलाह गांव-गांव तक पहुंचाई जाए ताकि किसान अपने क्षेत्र की जल उपलब्धता और मौसम के अनुसार उपयुक्त फसल का चयन कर सकें। इसके लिए कृषि विस्तार तंत्र को और अधिक सक्रिय बनाने की योजना तैयार की गई है। साथ ही कम अवधि में अधिक उत्पादन देने वाली उन्नत बीज किस्मों के उपयोग को भी बढ़ावा देने का निर्णय लिया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जल प्रबंधन को लेकर सरकार ने कई दीर्घकालिक योजनाओं पर भी काम शुरू करने का फैसला किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में जल जीवन मिशन के तहत प्रत्येक गांव की समीक्षा की जाएगी और बंद या अधूरी नल-जल योजनाओं की मरम्मत के लिए 90 दिवसीय विशेष अभियान चलाया जाएगा। वहीं शहरी निकायों में वैकल्पिक जल स्रोतों की पहचान कर टैंकर व्यवस्था की आकस्मिक योजना तैयार की जाएगी। अमृत 2.0 योजना के तहत लंबित जल प्रदाय परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश भी दिए गए हैं। सरकार ने "जलाभिषेक 2.0" अभियान के तहत प्रदेश के पुराने तालाबों, बावड़ियों, कुओं और अन्य पारंपरिक जल संरचनाओं का सर्वे और पुनर्जीवन करने की योजना बनाई है। मनरेगा के समन्वय से प्रत्येक विकासखंड में कम से कम 100 जल संरचनाओं को अगले दो वर्षों में पुनर्जीवित किया जाएगा। इसके अलावा भूजल पुनर्भरण अभियान के अंतर्गत रिचार्ज शाफ्ट, चेक डैम, स्टॉप डैम और खेत-तालाब निर्माण को मिशन मोड में पूरा किया जाएगा। सरकार "खेत का पानी खेत में और गांव का पानी गांव में" की अवधारणा को भी व्यापक स्तर पर लागू करेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक में यह भी तय किया गया कि प्रदेश के सभी प्रमुख जलाशयों जैसे इंदिरा सागर, ओंकारेश्वर, बाणसागर और गांधीसागर में जल उपयोग के लिए स्पष्ट प्राथमिकता तय की जाएगी। सरकार ने पेयजल को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। इसके बाद सिंचाई और फिर जलविद्युत उत्पादन के लिए जल उपयोग किया जाएगा। साथ ही नहरों की सफाई और मरम्मत रबी सीजन से पहले पूरी करने तथा अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी भी संबंधित अधिकारियों को सौंपी जाएगी। कृषि क्षेत्र के लिए प्रत्येक जिले में कंटिन्जेंसी क्रॉप प्लान तैयार किया जाएगा। कम जल मांग वाली फसलों, दलहन, तिलहन और श्रीअन्न को बढ़ावा देने के साथ न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी की व्यवस्था मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है। धान उत्पादक क्षेत्रों में डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) और वैकल्पिक गीला-सूखा (AWD) तकनीक को बढ़ावा देने की भी योजना बनाई गई है। साथ ही डिजिटल क्रॉप सर्वे, सैटेलाइट इमेजरी आधारित फसल क्षति आकलन और फसल बीमा दावों के त्वरित निपटारे के लिए नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच सरकार की तैयारियों को लेकर विपक्ष ने भी सवाल उठाए हैं। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि यदि संभावित अल्पवर्षा के संकेत पहले से मौजूद थे तो अप्रैल और मई में ही तैयारी क्यों नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार समय रहते प्रभावी कदम उठाने में विफल रही है और अब समीक्षा बैठकों के जरिए स्थिति संभालने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने नहरों के अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने और किसानों के लिए जमीनी स्तर पर तत्काल राहत उपाय लागू करने की मांग की। वहीं राज्य सरकार का कहना है कि सभी विभाग समन्वय के साथ काम कर रहे हैं और संभावित जल संकट से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां तेजी से आगे बढ़ाई जा रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 06:07:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>इंदौर में ईद पर काजी की अपील, गाय को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करें</title>
                                    <description><![CDATA[नमाजियों ने हाथ उठाकर जताया समर्थन, पानी बचाने और नशे से दूर रहने का संदेश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a17cb9ba773f/article-54386"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/indore-eid-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में ईद-उल-अजहा के मौके पर सांप्रदायिक सौहार्द और गंगा-जमुनी तहजीब की एक बार फिर खूबसूरत तस्वीर देखने को मिली। सदर बाजार स्थित ईदगाह में ईद की नमाज से पहले शहर काजी डॉ. इशरत अली ने समाज को एकता, सद्भाव और जिम्मेदारी का संदेश दिया। उन्होंने खुले मंच से गाय को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग रखी, जिसका वहां मौजूद हजारों नमाजियों ने हाथ उठाकर समर्थन किया। इसके बाद शांतिपूर्ण माहौल में ईद की नमाज अदा की गई और लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर मुबारकबाद दी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईदगाह में सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग नमाज के लिए पहुंचने लगे थे। नमाज शुरू होने से पहले शहर काजी ने अपने संबोधन में सामाजिक और धार्मिक मुद्दों पर बात की। उन्होंने कहा कि गाय को लेकर समाज में कई तरह की धारणाएं और विवाद देखने को मिलते हैं, लेकिन इसे देश की धरोहर के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि “गाय को हमसाया कौम के लोग बड़े एहतराम से देखते हैं। मुसलमानों पर यह इल्जाम लगाया जाता है कि वे गाय काटकर खाते हैं। अब लंबे समय से मांग उठ रही है कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए। हम मांग करते हैं कि गाय को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाए, ताकि उसके कटने पर पाबंदी लग सके।”</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">काजी की इस अपील के बाद ईदगाह में मौजूद नमाजियों ने हाथ उठाकर समर्थन जताया। वहां मौजूद लोगों ने इसे सामाजिक सौहार्द और आपसी सम्मान का संदेश बताया। कई लोगों का कहना था कि इस तरह की पहल समाज में सकारात्मक माहौल बनाने में मदद करती है और विभिन्न समुदायों के बीच भरोसा मजबूत होता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शहर काजी ने अपने संबोधन में पर्यावरण और जल संरक्षण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने लोगों से बारिश के पानी को बचाने और उसे जमीन में उतारने की अपील की। उन्होंने कहा कि पानी की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है और इसका समाधान केवल सरकार या प्रशासन के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। उन्होंने कहा, “यह मत सोचिए कि सब सरकार करेगी। प्रशासन आता-जाता रहता है, लेकिन हमें और आपको भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।” काजी ने लोगों से घरों और मोहल्लों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग जैसी व्यवस्था अपनाने की सलाह दी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अपने संबोधन में उन्होंने युवाओं में बढ़ते नशे को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज समाज में सबसे ज्यादा समस्याएं नशे के कारण पैदा हो रही हैं। नशा युवाओं की जिंदगी बर्बाद कर रहा है और परिवारों को तोड़ रहा है। उन्होंने कहा कि समाज को इस बुराई से मिलकर लड़ना होगा। काजी ने यह भी कहा कि कुछ लोग पैसे के लालच में नशे का कारोबार कर रहे हैं, जिससे नई पीढ़ी प्रभावित हो रही है। उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहने और अपने भविष्य पर ध्यान देने की अपील की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इंदौर की ईद इस बार एक और वजह से खास रही। यहां दशकों पुरानी परंपरा को एक बार फिर निभाया गया। पिछले 50 सालों से ईद के मौके पर एक हिंदू परिवार शहर काजी को उनके घर से ईदगाह तक लाने और वापस छोड़ने की जिम्मेदारी निभाता आ रहा है। इस बार भी सत्यनारायण सलवाडिया और उनके परिवार ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया। जब शहर काजी अपने घर से बाहर आए तो हिंदू परिवार के लोगों ने फूलों की माला पहनाकर उनका स्वागत किया और ईद की मुबारकबाद दी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसके बाद विशेष रूप से सजाई गई बग्घी और कार के जरिए शहर काजी को सम्मानपूर्वक सदर बाजार ईदगाह तक लाया गया। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा। लोगों ने इसे इंदौर की साझा संस्कृति और भाईचारे की मिसाल बताया। पिछले वर्षों में भी यह परंपरा चर्चा का विषय रही है। पिछली ईद पर शहर काजी को विंटेज कार से ईदगाह लाया गया था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईद के मौके पर शहर में सुरक्षा के भी व्यापक इंतजाम किए गए थे। पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर नजर आया। सभी प्रमुख चौराहों, ईदगाहों और संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल तैनात किया गया था। ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी के जरिए भी निगरानी रखी गई। अधिकारियों के मुताबिक पूरे शहर में त्योहार शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ और कहीं से किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।</p>
<p style="text-align:justify;">नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे से मुलाकात की और भाईचारे का संदेश दिया। बच्चों और युवाओं में खास उत्साह दिखाई दिया। बाजारों में भी दिनभर रौनक बनी रही। ईद के इस मौके पर इंदौर से जो तस्वीर सामने आई, उसने एक बार फिर यह दिखाया कि सामाजिक सौहार्द और आपसी सम्मान की भावना आज भी लोगों के बीच मजबूत है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 11:44:14 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>भोपाल के भारत भवन में आज से ‘सदानीरा समागम’, जल संरक्षण पर राष्ट्रीय मंथन</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे शुभारंभ, जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत सात दिवसीय सांस्कृतिक और वैचारिक आयोजन शुरू]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/national-brainstorming-on-water-conservation-sadanira-samagam-from-today-at/article-54269"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/sadanira-samagam-bhopal.jpg" alt=""></a><br /><p>भोपाल के भारत भवन में बुधवार से ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के अंतर्गत राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं सांस्कृतिक उत्सव ‘सदानीरा समागम’ का शुभारंभ होने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस सात दिवसीय आयोजन का उद्घाटन करेंगे। कार्यक्रम में जल संरक्षण, भारतीय ज्ञान परंपरा, पंचमहाभूत और सतत विकास जैसे विषयों पर राष्ट्रीय स्तर पर विमर्श होगा।</p>
<p>यह आयोजन वीर भारत न्यास द्वारा किया जा रहा है और 2 जून तक चलेगा। समागम में देश-विदेश के विद्वान, पर्यावरण विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, नीति-निर्माता, कलाकार और शोधकर्ता शामिल होंगे। कार्यक्रम को मध्यप्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों और कई राष्ट्रीय संस्थानों का सहयोग प्राप्त है। उद्घाटन समारोह में खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग, राज्य मंत्री कृष्णा गौर और धर्मेंद्र सिंह लोधी भी मौजूद रहेंगे। आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय परंपरा और आधुनिक विज्ञान के माध्यम से जल संरक्षण को लेकर व्यापक जनजागरण करना है।</p>
<p>सदानीरा समागम के तहत विभिन्न वैचारिक सत्रों में जल, पृथ्वी, वायु, अग्नि और आकाश जैसे पंचमहाभूतों पर आधारित भारतीय दर्शन और आधुनिक पर्यावरणीय चुनौतियों पर चर्चा की जाएगी। विशेषज्ञ भूगर्भीय जल स्रोतों, नवीकरणीय ऊर्जा, जल प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और पारंपरिक भारतीय ज्ञान प्रणाली पर अपने विचार साझा करेंगे। आयोजन से जुड़े लोगों का कहना है कि बदलते पर्यावरणीय संकट और जल की कमी को देखते हुए यह कार्यक्रम केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं बल्कि एक राष्ट्रीय संवाद का मंच बनेगा। कार्यक्रम में वैज्ञानिक और शिक्षाविद जल संरक्षण के व्यावहारिक मॉडल और सामुदायिक भागीदारी पर भी चर्चा करेंगे।</p>
<h5><strong>देशभर के विशेषज्ञ शामिल</strong></h5>
<p>वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी के अनुसार इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, आईआईएम बोधगया और कई अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। विभिन्न कॉर्पोरेट घरानों के सीएसआर प्रमुख भी पर्यावरण संरक्षण और जल संवर्धन से जुड़े अपने अनुभव साझा करेंगे।</p>
<p>कार्यक्रम के दौरान जल संकट और सतत विकास को लेकर कई शोधपत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके साथ ही जल संरक्षण से जुड़े स्थानीय और पारंपरिक मॉडल पर भी चर्चा होगी। विशेषज्ञ यह बताएंगे कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जल संसाधनों का संतुलित उपयोग किस तरह किया जा सकता है। आयोजकों के मुताबिक समागम में युवाओं और विद्यार्थियों की भागीदारी पर भी विशेष ध्यान दिया गया है ताकि नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक बनाया जा सके।</p>
<h5><strong>सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण</strong></h5>
<p>सदानीरा समागम केवल वैचारिक मंच तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें प्रतिदिन सांस्कृतिक और रचनात्मक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। शाम के सत्रों में नृत्य-नाटिकाएं, लोकगायन, रंगमंचीय प्रस्तुतियां और संगीत कार्यक्रम होंगे।</p>
<p>भारतीय नौसेना बैंड की सिम्फनी, ‘गोवर्धन लीला’ और ‘गंगा यात्रा’ जैसी प्रस्तुतियां कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहेंगी। आयोजकों का मानना है कि संस्कृति और कला के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश अधिक प्रभावी ढंग से समाज तक पहुंचाया जा सकता है। इसके अलावा ‘जल, जंगल, जीवन’ विषय पर राष्ट्रीय जनजातीय चित्रांकन कार्यशाला भी आयोजित की जाएगी। पारंपरिक चित्र शैलियों में जल संरक्षण पर आधारित रचनात्मक कार्यशालाओं में देशभर के कलाकार हिस्सा लेंगे।</p>
<h5><strong>विशेष प्रदर्शनियां भी लगेंगी</strong></h5>
<p>भारत भवन परिसर में चार विशेष प्रदर्शनियां भी लगाई जाएंगी। इनमें जलचर जीवन, मध्यप्रदेश के जल गंगा संवर्धन अभियान, लघु चित्रों में जल और भूगर्भीय जल स्रोतों से जुड़ी जानकारियां प्रदर्शित की जाएंगी। इन प्रदर्शनियों के आयोजन में मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, बरकतुल्ला विश्वविद्यालय और क्षेत्रीय प्राकृतिक विज्ञान संग्रहालय का सहयोग रहेगा। आयोजन स्थल पर आने वाले लोग जल संरक्षण से जुड़े वैज्ञानिक और सांस्कृतिक पहलुओं को करीब से समझ सकेंगे।</p>
<p>कार्यक्रम में जल और संस्कृति पर आधारित कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का लोकार्पण भी किया जाएगा। इनमें ‘अंतर्जली यात्रा’, ‘पुरोवाक्’, प्रेमशंकर शुक्ल की ‘आत्मा की घाटी में पानी का संगीत’ और राजेश्वर त्रिवेदी की ‘जल, संस्कृति और स्थापत्य’ प्रमुख हैं। इस आयोजन को सफल बनाने में भारत भवन, मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय, जनसंपर्क विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय, दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान, यूनाइटेड कॉन्शसनेस, सेज, एलएनसीटी, सैम ग्लोबल यूनिवर्सिटी, केंद्रीय भूजल बोर्ड और नर्मदा समग्र सहित कई संस्थाएं सहयोग कर रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
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                <pubDate>Wed, 27 May 2026 10:24:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>एमपी को नंबर-1 बनाने की तैयारी, सीएम मोहन यादव ने समीक्षा बैठक में अफसरों को दिया बड़ा टास्क</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री मोहन यादव ने समीक्षा बैठक में नर्मदा मिशन, जल संरक्षण, किसानों, पर्यटन और सरकारी कार्यों को लेकर अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/preparation-to-make-mp-number-1-cm-mohan-yadav-gave-a/article-53523"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/cm-mohan-yadav-review-meeting.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मध्यप्रदेश को देश के शीर्ष राज्यों में लाने के लक्ष्य के साथ मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार को मंत्रालय में एक बड़ी समीक्षा बैठक की। इस बैठक में विभिन्न विभागों की गतिविधियों</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">योजनाओं की प्रगति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और ज़मीनी चुनौतियों पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि विकास योजनाओं का प्रभाव लोगों तक पहुंचना चाहिए और हर विभाग को अपनी ज़िम्मेदारी गंभीरता से लेनी चाहिए। अधिकारियों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बैठक में प्रशासनिक कार्यों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जल संरक्षण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्रामीण विकास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धार्मिक पर्यटन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और किसानों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर दिशा-निर्देश जारी किए गए।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार प्रदेशवासियों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने विभागों को निर्देश दिया कि जिन जिलों या क्षेत्रों में प्रगति धीमी है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहां विशेष ध्यान दिया जाए। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नर्मदा समग्र मिशन के लिए अलग नोडल विभाग और स्पेशल सेल बनाने की प्रक्रिया जारी है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ग्राम पंचायत स्तर तक लोगों को नर्मदा अभियान से जोड़ा जाए। साथ ही अमरकंटक और अन्य प्रमुख नदी उद्गम स्थलों के संरक्षण पर जोर दिया गया। बैठक में यह भी कहा गया कि प्राकृतिक सौंदर्य को बनाए रखने के लिए उद्गम स्थलों के आसपास अनियंत्रित निर्माण कम किए जाएं और दूर सैटेलाइट टाउनशिप विकसित की जाएं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ग्रामीण क्षेत्रों में स्वामित्व योजना के तहत महिलाओं के नाम पर रजिस्ट्री कराने पर भी सरकार का जोर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आबादी भूमि की नि:शुल्क रजिस्ट्री अभियान चलाकर पूरी की जाए और पंचायत प्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। गर्मी को देखते हुए पेयजल व्यवस्था की भी समीक्षा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि हर ग्राम पंचायत और वार्ड स्तर पर पानी की उपलब्धता पर नजर रखी जाए। जल संरक्षण को जनअभियान बनाने की बात भी बैठक में उठी। यह सुझाव दिया गया है कि सरकार गांवों और शहरों में स्थानीय लोगों को जल संरक्षण गतिविधियों में जोड़ने के लिए अलग अभियान चला सकती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बैठक में धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक परियोजनाओं पर भी चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने चित्रकूट धाम के विकास को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार के साथ एक संयुक्त बैठक करने का उल्लेख किया। मंदाकिनी नदी में पानी का प्रवाह बनाए रखने के लिए योजना बनाई जा रही है। साथ ही ओंकारेश्वर और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग क्षेत्रों के विकास पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों को श्रीराम वन गमन पथ और श्री कृष्ण पाथेय जैसी परियोजनाओं को समय सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए गए। महाकाल महालोक समेत बड़े धार्मिक स्थलों पर होमगार्ड व्यवस्था को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">किसानों और युवाओं से जुड़े निर्णय भी बैठक में सामने आए। मुख्यमंत्री ने खंडवा और बुरहानपुर मंडियों में कपास उत्पादक किसानों के लिए मंडी शुल्क को एक रुपए से घटाकर 55 पैसे करने के निर्देश दिए। सरकार का मानना है कि इससे किसानों को राहत मिलेगी और पड़ोसी महाराष्ट्र के समान शुल्क होने से व्यापार में आसानी होगी। इसके अलावा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">औद्योगिक क्षेत्रों के आसपास आईटीआई और पॉलिटेक्निक संस्थानों में सेक्टर आधारित प्रशिक्षण शुरू करने पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योगों को स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण और रोजगार देने की दिशा में कदम बढ़ाने चाहिए। राजधानी भोपाल के मंत्रालय भवनों में लागू बायोमैट्रिक उपस्थिति व्यवस्था की समीक्षा करते हुए उन्होंने इसे पूरे प्रदेश के सरकारी कार्यालयों में लागू करने की बात कही।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 May 2026 16:05:10 +0530</pubDate>
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