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                <title>Chhattisgarh Tourism - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Chhattisgarh Tourism RSS Feed</description>
                
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                <title>नंदनवन जू और जंगल सफारी घूमना हुआ महंगा, टिकट दरों में बड़ा इजाफा</title>
                                    <description><![CDATA[नई रेट पॉलिसी लागू, बच्चों से लेकर विदेशी पर्यटकों तक सभी पर बढ़े शुल्क का असर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/visiting-nandanvan-zoo-and-jungle-safari-becomes-expensive-big-increase/article-54613"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/nandanvan-zoo.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नवा रायपुर स्थित नंदनवन जू और जंगल सफारी घूमने का प्लान बना रहे पर्यटकों को अब पहले की तुलना में ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने जंगल सफारी और नंदनवन जू की टिकट दरों में संशोधन करते हुए नई रेट पॉलिसी लागू कर दी है। नई व्यवस्था के तहत प्रवेश टिकट, सफारी राइड और अन्य सुविधाओं के शुल्क में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है। कई श्रेणियों में टिकट दरें लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ाई गई हैं, जबकि कुछ मामलों में यह बढ़ोतरी दोगुनी से भी अधिक है। नए शुल्क लागू होने के बाद परिवार के साथ घूमने आने वाले पर्यटकों के बजट पर सीधा असर पड़ेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नई दरों के अनुसार अब 6 से 12 वर्ष तक के बच्चों के लिए जू एंट्री टिकट 25 रुपए के बजाय 50 रुपए देना होगा। यानी बच्चों के टिकट शुल्क में सीधे 100 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। वहीं 12 वर्ष से अधिक उम्र के पर्यटकों के लिए जू एंट्री टिकट 50 रुपए से बढ़ाकर 100 रुपए कर दिया गया है। इसका मतलब यह है कि अब एक सामान्य परिवार को पहले की तुलना में प्रवेश के लिए लगभग दोगुना खर्च करना पड़ेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विदेशी पर्यटकों के लिए भी शुल्क में बड़ा बदलाव किया गया है। पहले जहां विदेशी नागरिकों के लिए प्रवेश टिकट 200 रुपए था, वहीं अब इसे बढ़ाकर 500 रुपए कर दिया गया है। पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि विदेशी पर्यटकों के लिए शुल्क में हुई यह वृद्धि काफी बड़ी है और इसका असर आने वाले समय में पर्यटक संख्या पर भी पड़ सकता है। हालांकि वन विभाग का कहना है कि बढ़ी हुई राशि का उपयोग सुविधाओं के विकास और रखरखाव पर किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नई नीति में वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों को कुछ राहत जरूर दी गई है। 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग व्यक्तियों को पहले की तरह नि:शुल्क प्रवेश की सुविधा जारी रहेगी। इसके लिए उन्हें अपना वैध पहचान पत्र दिखाना होगा। हालांकि विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह छूट सप्ताहांत, सार्वजनिक अवकाश और सरकारी छुट्टियों के दौरान लागू नहीं होगी। ऐसे दिनों में उन्हें भी निर्धारित नियमों का पालन करना होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में जंगल सफारी और जू के रखरखाव, पशु संरक्षण, सुरक्षा व्यवस्था और पर्यटक सुविधाओं पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ा है। इसी को ध्यान में रखते हुए टिकट दरों में संशोधन का फैसला लिया गया है। विभाग का दावा है कि नई आय से सफारी क्षेत्र में बेहतर सुविधाएं विकसित की जाएंगी, पर्यटकों के लिए आधुनिक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जाएंगी और वन्यजीवों की देखभाल को और मजबूत बनाया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गौरतलब है कि पूर्व में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान जंगल सफारी के शुल्क में कमी की गई थी। उस समय नंदनवन जू का प्रवेश भी सफारी पैकेज में शामिल रहता था। बाद में दोनों को अलग-अलग कर दिया गया, जिससे पर्यटकों को अलग टिकट लेना पड़ने लगा। अब नए संशोधन के बाद कुल खर्च और बढ़ गया है। इससे खासकर उन परिवारों पर असर पड़ेगा जो बच्चों के साथ सप्ताहांत में यहां घूमने आते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नंदनवन जंगल सफारी छत्तीसगढ़ की प्रमुख पर्यटन और वन्यजीव स्थलों में से एक मानी जाती है। यह नवा रायपुर के सेक्टर-39 में स्थित है और राजधानी रायपुर से अच्छी सड़क कनेक्टिविटी के कारण बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं। रायपुर रेलवे स्टेशन से इसकी दूरी लगभग 35 किलोमीटर और स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट से करीब 15 किलोमीटर है। लगभग 800 एकड़ क्षेत्र में फैली यह सफारी प्राकृतिक सुंदरता और हरियाली के लिए जानी जाती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सफारी परिसर में 130 एकड़ का खांडवा जलाशय भी मौजूद है, जहां हर वर्ष विभिन्न प्रजातियों के प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं। यह क्षेत्र प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव फोटोग्राफरों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना रहता है। यहां आने वाले पर्यटक प्राकृतिक वातावरण के बीच वन्यजीवों को करीब से देखने का अनुभव प्राप्त करते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जंगल सफारी में चार अलग-अलग सफारी जोन विकसित किए गए हैं। इनमें शाकाहारी सफारी, भालू सफारी, टाइगर सफारी और शेर सफारी शामिल हैं। प्रत्येक जोन को वन्यजीवों की जरूरतों के अनुसार डिजाइन किया गया है। जानवरों के लिए प्राकृतिक वातावरण तैयार करने के उद्देश्य से यहां बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया गया है और लगभग 55 हजार पौधे लगाए गए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गर्मी के मौसम में वन्यजीवों की सुरक्षा और आराम के लिए विशेष इंतजाम भी किए गए हैं। कई बाड़ों में कूलर और पानी के फव्वारे लगाए गए हैं ताकि जानवरों को अत्यधिक तापमान से राहत मिल सके। भालुओं समेत अन्य वन्यजीवों के लिए विशेष आहार की व्यवस्था भी की जा रही है। उन्हें तरबूज और अन्य मौसमी फल दिए जा रहे हैं ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। नई टिकट दरों को लेकर पर्यटकों की मिश्रित प्रतिक्रिया सामने आ रही है। कुछ लोगों का मानना है कि बेहतर सुविधाओं के लिए शुल्क बढ़ाना जरूरी है, जबकि कई पर्यटक इसे आम परिवारों के बजट पर अतिरिक्त बोझ बता रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 18:05:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>समर वेकेशन में मां बम्लेश्वरी मंदिर ट्रिप बनाएं यादगार, घूमिए पहाड़ और चखिए छत्तीसगढ़ी स्वाद</title>
                                    <description><![CDATA[डोंगरगढ़ स्थित मां बम्लेश्वरी मंदिर गर्मियों में धार्मिक यात्रा, प्राकृतिक सुंदरता और स्थानीय फूड का शानदार अनुभव देता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/make-your-trip-to-maa-bamleshwari-temple-memorable-during-your/article-54301"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/maa-bamleshwari-temple.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">गर्मी की छुट्टियों में लोग ऐसी जगह घूमना पसंद करते हैं जहां धार्मिक शांति, प्राकृतिक सुंदरता और स्वादिष्ट खाना एक साथ मिल सके। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में स्थित मां बम्लेश्वरी मंदिर ऐसी ही खास जगहों में शामिल है। डोंगरगढ़ की पहाड़ियों पर स्थित यह मंदिर श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय है। हर साल हजारों लोग यहां माता के दर्शन करने और पहाड़ियों की खूबसूरती देखने पहुंचते हैं। समर सीजन में अगर आप धार्मिक और शांतिपूर्ण ट्रिप प्लान कर रहे हैं, तो मां बम्लेश्वरी मंदिर आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">डोंगरगढ़ में स्थित मां बम्लेश्वरी मंदिर ऊंची पहाड़ी पर बना हुआ है। मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब एक हजार सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। हालांकि अब यहां रोपवे की सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे पर्यटक आसानी से पहाड़ी तक पहुंच सकते हैं। रोपवे से ऊपर जाते समय आसपास के पहाड़, हरियाली और शहर का खूबसूरत नजारा देखने को मिलता है। गर्मी के मौसम में सुबह और शाम का समय यहां घूमने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">मां बम्लेश्वरी मंदिर छत्तीसगढ़ के प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है। यहां माता रानी के दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर परिसर का शांत वातावरण और पहाड़ियों के बीच स्थित इसकी भव्यता लोगों को आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराती है। नवरात्रि के दौरान यहां भारी भीड़ देखने को मिलती है, लेकिन गर्मी की छुट्टियों में भी यहां श्रद्धालुओं का आना लगातार बना रहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर आप समर ट्रिप प्लान कर रहे हैं तो सुबह जल्दी मंदिर पहुंचना बेहतर रहेगा। सुबह का मौसम ठंडा और सुहावना होता है, जिससे सीढ़ियां चढ़ने में ज्यादा परेशानी नहीं होती। दिन में तापमान बढ़ने के कारण दोपहर के समय घूमने से बचना चाहिए। हल्के कपड़े पहनना और पानी की बोतल साथ रखना जरूरी होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">मां बम्लेश्वरी मंदिर के आसपास कई घूमने लायक जगहें भी मौजूद हैं। डोंगरगढ़ की पहाड़ियां और प्राकृतिक दृश्य पर्यटकों को काफी पसंद आते हैं। यहां का प्रज्ञागिरी पहाड़ भी खास आकर्षण का केंद्र है। इस पहाड़ी पर भगवान बुद्ध की विशाल प्रतिमा स्थित है। यहां से आसपास का दृश्य बेहद खूबसूरत दिखाई देता है। शाम के समय यहां का वातावरण काफी शांत और मनमोहक होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा डोंगरगढ़ के आसपास छोटे-छोटे बाजार भी हैं, जहां स्थानीय वस्तुएं और पारंपरिक सामान खरीदा जा सकता है। धार्मिक वस्तुओं के साथ यहां हस्तशिल्प और स्थानीय कला से जुड़ी चीजें भी मिलती हैं। पर्यटक यहां से यादगार सामान खरीद सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">डोंगरगढ़ का स्थानीय भोजन भी पर्यटकों को काफी आकर्षित करता है। छत्तीसगढ़ी खानपान अपने सरल और स्वादिष्ट स्वाद के लिए जाना जाता है। यहां आने वाले लोगों को फरा, चीला और बफौरी जैसे पारंपरिक व्यंजन जरूर ट्राय करने चाहिए। चना दाल और चावल से बनने वाले ये व्यंजन स्वादिष्ट होने के साथ-साथ हेल्दी भी माने जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सुबह के नाश्ते में पोहा-जलेबी का स्वाद भी लोगों को खूब पसंद आता है। गर्मागरम पोहा पर सेव और धनिया डालकर परोसा जाता है, जबकि मीठी जलेबी इसका स्वाद बढ़ा देती है। इसके अलावा समोसा, कचौरी और चाट जैसी चीजें भी स्थानीय बाजारों में आसानी से मिल जाती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">गर्मी के मौसम में ठंडी लस्सी और शिकंजी पर्यटकों को राहत देती है। वहीं मीठा पसंद करने वालों के लिए देसी मिठाइयां भी आकर्षण का केंद्र रहती हैं। डोंगरगढ़ के छोटे फूड स्टॉल्स और स्थानीय दुकानों पर आपको पारंपरिक स्वाद का असली अनुभव मिल सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर आप परिवार या दोस्तों के साथ यात्रा कर रहे हैं तो शाम के समय पहाड़ियों के बीच बैठकर सूर्यास्त का नजारा जरूर देखें। यहां का शांत वातावरण और प्राकृतिक सुंदरता ट्रिप को यादगार बना देती है। फोटोग्राफी पसंद करने वालों के लिए भी यह जगह शानदार मानी जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">डोंगरगढ़ पहुंचने के लिए सड़क और रेल दोनों सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां का रेलवे स्टेशन प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। मंदिर के आसपास रुकने के लिए होटल और धर्मशालाएं भी आसानी से मिल जाती हैं। बजट से लेकर अच्छे होटल तक पर्यटकों के लिए कई विकल्प उपलब्ध रहते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">समर वेकेशन में मां बम्लेश्वरी मंदिर की यात्रा धार्मिक आस्था, प्राकृतिक सुंदरता और स्वादिष्ट भोजन का अनोखा अनुभव देती है। यहां की पहाड़ियां, शांत वातावरण और स्थानीय संस्कृति हर पर्यटक को खास अनुभव कराती है। अगर आप इस गर्मी में किसी शांत और आध्यात्मिक जगह घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो डोंगरगढ़ का मां बम्लेश्वरी मंदिर आपके लिए एक शानदार डेस्टिनेशन साबित हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 May 2026 12:25:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ के ये बेहतरीन टूरिस्ट प्लेस छुट्टियों को बना देंगे यादगार, जानें यहां</title>
                                    <description><![CDATA[रायपुर और आसपास के छत्तीसगढ़ के बेहतरीन टूरिस्ट प्लेस, जहां कम खर्च में परिवार और दोस्तों संग छुट्टियां यादगार बन सकती हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/these-best-tourist-places-of-chhattisgarh-will-make-your-holidays/article-53546"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/chhattisgarh-tourist-places.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">छत्तीसगढ़ में घूमने के लिए सिर्फ बड़े शहर या मशहूर जगहें ही नहीं हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि वहां कई प्राकृतिक और धार्मिक स्थल भी हैं जहां आप कम खर्च कर शानदार समय बिता सकते हैं। रायपुर और उसके आसपास के ये टूरिस्ट प्लेस परिवार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दोस्तों और बच्चों के साथ एक दिन की ट्रिप के लिए बेहद पसंद किए जाते हैं। खास बात ये है कि ज्यादातर जगहें </span>50<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>100<span lang="hi" xml:lang="hi"> किलोमीटर की दूरी पर हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे लोग सुबह जाते हैं और शाम तक लौट आते हैं। इन दिनों गर्मी और छुट्टियों के चलते यहां पर्यटकों की भीड़ बढ़ने लगी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और कई लोग धार्मिक यात्रा के साथ पिकनिक का भी प्लान बना रहे हैं। अगर आप भी इस बार कहीं घूमने का मन बना रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो छत्तीसगढ़ के ये </span>9<span lang="hi" xml:lang="hi"> टूरिस्ट प्लेस आपकी ट्रिप को खास बना सकते हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रायपुर से करीब </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">45<span lang="hi" xml:lang="hi"> किलोमीटर दूर चंपारण धार्मिक पर्यटन के लिए बहुत ही प्रसिद्ध है। महानदी के किनारे बने मंदिरों की बनावट लोगों को वृंदावन की याद दिलाती है। यह महाप्रभु श्रीवल्लभाचार्य की जन्मस्थली भी मानी जाती है। यहां चंपेश्वर महादेव मंदिर और राम जानकी मंदिर लोगों को काफी आकर्षित करते हैं। वहीं बलौदाबाजार जिले का तुरतुरिया भी घूमने वालों के बीच पसंदीदा बनता जा रहा है। ये माना जाता है कि यह लव-कुश की जन्मस्थली है। घने जंगल और पहाड़ों के बीच स्थित बाल्मीकि आश्रम का शांत वातावरण लोगों को भाता है। दूसरी ओर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजिम को छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहा जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां महानदी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पैरी और सोंढुर नदी का संगम होता है। संगम के बीच बने कुलेश्वर महादेव मंदिर में हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और छुट्टियों के दौरान यहां भीड़ और बढ़ जाती है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अगर आपको प्राकृतिक जगहें पसंद हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो जतमई-घटारानी वाटरफॉल एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। पहाड़ियों से गिरता झरना और चारों तरफ हरियाली यहां की सबसे बड़ी खासियत है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और बारिश के मौसम में यहां का नजारा और भी खूबसूरत हो जाता है। रायपुर के पास स्थित जंगल सफारी भी लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है। इसे एशिया का सबसे बड़ा मानव निर्मित जंगल सफारी कहा जाता है। यहां खुले माहौल में जंगली जानवरों को देखने का अलग अनुभव होता है। चंदखुरी में स्थित कौशल्याधाम भी धार्मिक आस्था का बड़ा केंद्र है। कहा जाता है कि यह भगवान राम की माता कौशल्या की जन्मस्थली है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और तालाब के बीच बना मंदिर यहां आने वाले लोगों को बहुत आकर्षित करता है। इसी तरह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बालोद जिले का सियादेवी मंदिर भी अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। झरनों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जंगल और पहाड़ियों के बीच स्थित ये जगह पिकनिक के लिए काफी मशहूर है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">धमतरी का गंगरेल बांध भी इन दिनों पर्यटकों के बीच पसंदीदा बना हुआ है। कई लोग इसे छत्तीसगढ़ का मिनी गोवा भी कहते हैं। यहां वाटर स्पोर्ट्स</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">बोटिंग और रिसॉर्ट्स का मजा लिया जा सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और शाम के वक्त बांध का नजारा बेहद खूबसूरत होता है। वहीं सिमगा के पास सोमनाथ मंदिर धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व रखता है। यहां का प्राचीन शिवमंदिर और स्वयंभू शिवलिंग देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं। खारून और शिवनाथ नदी का संगम स्थल होने के चलते यहां का माहौल काफी शांत और सुखद रहता है। तो अगर आप कम बजट में परिवार या दोस्तों के साथ घूमने का सोच रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो छत्तीसगढ़ के ये टूरिस्ट प्लेस आपके लिए बेहतरीन विकल्प साबित हो सकते हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 May 2026 18:42:42 +0530</pubDate>
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