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                <title>Administrative News - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Administrative News RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ पुलिस में बड़ा फेरबदल, डीएसपी समेत 15 अधिकारियों की नई तैनाती</title>
                                    <description><![CDATA[गृह विभाग ने जारी किए तबादला और पदस्थापना आदेश, पदोन्नति के बाद अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नई तैनाती]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/major-reshuffle-in-chhattisgarh-police-new-posting-of-15-officers/article-58408"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-police.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य पुलिस प्रशासन में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक फेरबदल करते हुए दो उप पुलिस अधीक्षकों (डीएसपी) और 13 सहायक सेनानियों (असिस्टेंट कमांडेंट) की नई पदस्थापना के आदेश जारी किए हैं। गृह विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार विभागीय पदोन्नति एवं छानबीन समिति की अनुशंसा के आधार पर अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं और सभी पदस्थापनाएं अगले आदेश तक प्रभावी रहेंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य सरकार का कहना है कि प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी, संतुलित तथा सुचारू बनाने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। समय-समय पर पुलिस विभाग में अधिकारियों के स्थानांतरण और पदस्थापना की प्रक्रिया प्रशासनिक आवश्यकता के अनुसार की जाती है, जिससे कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ-साथ विभिन्न इकाइयों में अनुभवी अधिकारियों की सेवाओं का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। गृह विभाग द्वारा जारी आदेश में राज्य पुलिस सेवा के पदोन्नत अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। इनमें विशेष शाखा से जुड़े अधिकारियों के साथ सहायक सेनानी पद पर पदोन्नत अधिकारियों की पदस्थापना भी शामिल है। सरकार का मानना है कि नई नियुक्तियों से विभिन्न इकाइयों में कार्यों के बेहतर समन्वय और प्रशासनिक दक्षता को मजबूती मिलेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">आदेश के अनुसार उप पुलिस अधीक्षक (विशेष शाखा) सविता सिंह परिहार को पुलिस मुख्यालय नवा रायपुर से स्थानांतरित कर विशेष शाखा भिलाई में पदस्थ किया गया है। वहीं अर्नोल्ड संतरी बड़ा, जो वर्तमान में जशपुर से संबद्ध रहते हुए पुलिस मुख्यालय नवा रायपुर में कार्यरत थे, उन्हें विशेष शाखा बिलासपुर में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा विभाग ने 13 सहायक सेनानियों की भी नई पदस्थापना की है। इन अधिकारियों को राज्य के विभिन्न जिलों और बटालियनों में प्रशासनिक आवश्यकता के अनुसार नियुक्त किया गया है। गृह विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी अधिकारियों को अपने नए पदस्थापन स्थल पर तत्काल कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस विभाग में इस तरह के प्रशासनिक फेरबदल को सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा माना जाता है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि समय-समय पर अधिकारियों की कार्यक्षमता, अनुभव और प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जिम्मेदारियों में बदलाव किया जाता है। इससे विभागीय कार्यप्रणाली में नई ऊर्जा आती है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में भी मदद मिलती है।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेष शाखा पुलिस विभाग की एक महत्वपूर्ण इकाई मानी जाती है, जो सुरक्षा संबंधी सूचनाओं के संकलन, विश्लेषण और संवेदनशील मामलों की निगरानी का कार्य करती है। ऐसे में इस शाखा में अनुभवी अधिकारियों की नियुक्ति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नई पदस्थापनाओं से विशेष शाखा की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने की उम्मीद जताई जा रही है। पुलिस विभाग में समय-समय पर किए जाने वाले स्थानांतरण और पदस्थापन न केवल प्रशासनिक संतुलन बनाए रखते हैं, बल्कि अधिकारियों को नई परिस्थितियों में कार्य करने का अवसर भी प्रदान करते हैं। इससे विभाग में जवाबदेही बढ़ती है और विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर कार्य संस्कृति विकसित होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य सरकार लगातार पुलिस व्यवस्था को आधुनिक और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसके तहत पुलिस बल के प्रशिक्षण, संसाधनों के आधुनिकीकरण, तकनीकी सुविधाओं के विस्तार और प्रशासनिक सुधारों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अधिकारियों की नई पदस्थापना को भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नई जिम्मेदारियों के साथ अधिकारी अपने अनुभव का बेहतर उपयोग कर सकेंगे। कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अपराध नियंत्रण, खुफिया तंत्र को मजबूत करने तथा जनता के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने में इन नियुक्तियों की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। गृह विभाग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि सभी पदस्थापनाएं प्रशासनिक आधार पर की गई हैं और आवश्यकता के अनुसार भविष्य में इनमें बदलाव भी किया जा सकता है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे शीघ्र ही अपने नवीन पदस्थापन स्थल पर कार्यभार ग्रहण कर विभागीय जिम्मेदारियों का निर्वहन करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 16:32:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मध्य प्रदेश में पदोन्नति प्रक्रिया फिर होगी शुरू, सरकार ने सभी विभागों को दिए तैयारी के निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[सामान्य प्रशासन विभाग ने महाधिवक्ता की कानूनी राय के आधार पर सभी विभागों को पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए, हालांकि सभी प्रमोशन अदालत के अंतिम फैसले के अधीन रहेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/promotion-process-will-start-again-in-madhya-pradesh-government-has/article-57451"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mp-promotion-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के लाखों सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए लंबे इंतजार के बाद राहत भरी खबर सामने आई है। करीब एक दशक से विभिन्न कानूनी कारणों और न्यायालय में लंबित मामलों के चलते रुकी हुई पदोन्नति (प्रमोशन) प्रक्रिया अब दोबारा शुरू होने की दिशा में बढ़ती दिखाई दे रही है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने सोमवार को राज्य के सभी अपर मुख्य सचिवों, विभागाध्यक्षों, संभागायुक्तों और कलेक्टरों को पत्र जारी कर पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। विभागों को यह कार्रवाई महाधिवक्ता की कानूनी राय के आधार पर करने के लिए कहा गया है। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि दिए जाने वाले सभी प्रमोशन हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों के अंतिम निर्णय के अधीन होंगे। राज्य सरकार के इस फैसले को लंबे समय से प्रमोशन की प्रतीक्षा कर रहे कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। कई विभागों में वर्षों से पदोन्नति नहीं होने के कारण अधिकारी एक ही पद पर लंबे समय से कार्यरत हैं। इसका असर न केवल कर्मचारियों के करियर पर पड़ा, बल्कि विभागों की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था भी प्रभावित हुई। अब सरकार के ताजा निर्देशों के बाद विभागीय स्तर पर पदोन्नति समितियों (DPC) की बैठकें बुलाने की तैयारी शुरू होने की संभावना है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी पत्र में बताया गया है कि मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 को लेकर न्यायालय में कई याचिकाएं लंबित हैं। इन मामलों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने महाधिवक्ता से कानूनी राय प्राप्त की थी। महाधिवक्ता ने वरिष्ठ अधिवक्ता सी.एस. वैद्यनाथन की राय सरकार को भेजी, जिसके आधार पर विभागों को आगे की कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए गए हैं। कानूनी राय में स्पष्ट किया गया है कि वर्तमान में हाईकोर्ट ने पदोन्नति नियम-2025 पर किसी प्रकार की अंतरिम रोक (स्टे) नहीं लगाई है। पहले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से प्रमोशन नहीं करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन वह न्यायालय के आदेश का हिस्सा नहीं था और न ही किसी आधिकारिक न्यायिक रिकॉर्ड में दर्ज किया गया। कानूनी विशेषज्ञों का मत है कि अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं और मामला नए सिरे से सुनवाई के लिए जाएगा। ऐसे में सरकार अपने वैधानिक अधिकारों का उपयोग करते हुए पदोन्नति प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हालांकि कानूनी राय में यह भी कहा गया है कि सभी पदोन्नतियां न्यायालय के अंतिम फैसले के अधीन रहेंगी। इसका मतलब यह है कि यदि भविष्य में हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट का निर्णय अलग आता है, तो सरकार को उसी के अनुरूप आगे की कार्रवाई करनी होगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य एक ओर प्रशासनिक कार्यों को सुचारु बनाए रखना है, वहीं दूसरी ओर न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान भी सुनिश्चित करना है। सरकार ने अपने पक्ष में यह भी कहा है कि लंबे समय से प्रमोशन नहीं होने के कारण कई महत्वपूर्ण पद खाली पड़े हैं। अनेक विभाग अपनी स्वीकृत क्षमता के मुकाबले लगभग 40 प्रतिशत कर्मचारियों के साथ काम कर रहे हैं। वरिष्ठ पद रिक्त होने से निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है और निचले स्तर पर नई भर्तियां भी समय पर नहीं हो पा रही हैं। इससे प्रशासनिक व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> यदि पदोन्नति प्रक्रिया समय पर पूरी होती है तो इसका सकारात्मक असर पूरे प्रशासनिक ढांचे पर दिखाई देगा। वरिष्ठ पदों पर अधिकारियों की नियुक्ति होने से विभागों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और खाली पदों पर नई भर्ती का रास्ता भी साफ होगा। इससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी बन सकते हैं। राज्य के कर्मचारी संगठनों ने भी सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि कई अधिकारी और कर्मचारी पिछले आठ से दस वर्षों से प्रमोशन का इंतजार कर रहे हैं। पदोन्नति नहीं मिलने के कारण न केवल उनका वेतन और सेवा लाभ प्रभावित हुए, बल्कि मनोबल पर भी असर पड़ा। संगठनों का कहना है कि यदि न्यायालय की शर्तों का पालन करते हुए प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है तो इससे कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी। अब सभी विभागों की नजर सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशों के बाद होने वाली विभागीय पदोन्नति समितियों की बैठकों पर रहेगी। माना जा रहा है कि विभाग अपने-अपने स्तर पर पात्र कर्मचारियों की वरिष्ठता सूची, सेवा अभिलेख और अन्य आवश्यक दस्तावेजों का परीक्षण शुरू करेंगे। इसके बाद डीपीसी की अनुशंसा के आधार पर पदोन्नति आदेश जारी किए जा सकते हैं। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी आदेश न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन होंगे। यदि भविष्य में अदालत कोई अलग निर्देश देती है तो उसी के अनुसार संशोधित कार्रवाई की जाएगी। इसलिए कर्मचारियों को प्रमोशन मिलने के बावजूद अंतिम कानूनी स्थिति का इंतजार करना पड़ सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 18:04:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>पंचायत सचिवों के तबादलों पर नई सख्त गाइडलाइन जारी, गृहग्राम में पोस्टिंग पर रोक</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य प्रदेश में 23 हजार से अधिक पंचायत सचिवों के लिए नई स्थानांतरण नीति लागू, 10 साल से अधिक पदस्थ कर्मचारियों का प्राथमिकता से होगा ट्रांसफर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/new-strict-guidelines-issued-on-transfers-of-panchayat-secretaries-ban/article-55559"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/panchayat-secretary-transfer.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">मध्य प्रदेश में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने पंचायत सचिवों के स्थानांतरण को लेकर नई और सख्त गाइडलाइन जारी कर दी है। तबादला सीजन के बीच जारी इस आदेश के बाद अब राज्य की हजारों पंचायतों में कार्यरत सचिवों की तैनाती व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। नई नीति के अनुसार अब कोई भी पंचायत सचिव अपने गृहग्राम या ससुराल की पंचायत में पदस्थ नहीं रह सकेगा। इसके साथ ही यदि किसी सचिव के रिश्तेदार सरपंच या उपसरपंच चुने जाते हैं तो ऐसी स्थिति में संबंधित सचिव का तबादला अनिवार्य रूप से किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रदेश में यह निर्णय सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशों के आधार पर लिया गया है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने सभी जिला कलेक्टरों और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि स्थानांतरण प्रक्रिया निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी की जाए। राज्य में वर्तमान में 23 हजार से अधिक पंचायत सचिव कार्यरत हैं, जिन पर इस नई नीति का सीधा असर पड़ेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">जारी आदेश के अनुसार 15 जून तक केवल जिले के भीतर ही पंचायत सचिवों के स्थानांतरण किए जा सकेंगे। इस पूरी प्रक्रिया में स्थानांतरण प्रस्ताव जिला कलेक्टर की अनुशंसा और प्रभारी मंत्री की स्वीकृति के बाद ही लागू होंगे। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया 1 जून से प्रभावी मानी जाएगी। सभी स्थानांतरण आदेश जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा जारी किए जाएंगे। इसके साथ ही जिला और अंतरजिला स्तर पर स्थानांतरण की विस्तृत प्रक्रिया भी तय कर दी गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">सरकार के इस निर्णय के पीछे लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक और स्थानीय स्तर की समस्याएं प्रमुख कारण बताई जा रही हैं। विभागीय जानकारी के अनुसार वर्ष 1994 से 1996 के बीच पंचायत कर्मियों की नियुक्ति ग्राम सभा के अनुमोदन से की गई थी, जो आज पंचायत सचिव के रूप में कार्यरत हैं। उस समय कई मामलों में सरपंच, उपसरपंच या प्रभावशाली व्यक्तियों के रिश्तेदारों को ही नियुक्त किया गया था। इसके कारण कई जगहों पर हितों के टकराव और प्रशासनिक गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आती रही हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रशासन का मानना है कि कई मामलों में जनप्रतिनिधि और सचिवों के बीच पारिवारिक संबंधों या व्यक्तिगत समीकरणों के कारण कार्य निष्पक्ष तरीके से प्रभावित हुआ है। जांचों में भी कई बार यह पाया गया कि कुछ स्थानों पर सरपंच, उपसरपंच और सचिवों की मिलीभगत से वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताएं हुई हैं। इसी को देखते हुए सरकार ने यह सख्त नीति लागू करने का निर्णय लिया है ताकि पंचायत स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd">नई गाइडलाइन के अनुसार कुछ परिस्थितियों में स्थानांतरण को अनिवार्य किया गया है। यदि किसी ग्राम पंचायत में सचिव का कोई रिश्तेदार सरपंच या उपसरपंच बन जाता है, तो वहां से तत्काल स्थानांतरण किया जाएगा। इसके अलावा किसी भी सचिव को उसके गृहग्राम या ससुराल की पंचायत में पदस्थ नहीं रखा जाएगा। साथ ही जो सचिव 10 वर्ष या उससे अधिक समय से एक ही पंचायत में कार्यरत हैं, उनका प्राथमिकता के आधार पर तबादला किया जाएगा। यदि स्थानांतरण की सीमा से अधिक ऐसे सचिव पाए जाते हैं जो लंबे समय से एक ही जगह कार्यरत हैं, तो सबसे अधिक अवधि से पदस्थ सचिव का पहले स्थानांतरण किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रशासनिक स्थिरता के साथ-साथ निष्पक्ष कार्य प्रणाली को बढ़ावा देना बताया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">हालांकि कुछ विशेष परिस्थितियों में प्रतिबंध अवधि के दौरान भी स्थानांतरण संभव होगा। इनमें भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता या गंभीर शिकायतों से जुड़े मामले शामिल हैं। इसके अलावा अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित होने, लोकायुक्त या ईओडब्ल्यू जैसी जांच एजेंसियों की कार्रवाई से जुड़े मामलों में भी सचिवों का स्थानांतरण किया जा सकेगा। उच्च प्राथमिकता वाले प्रशासनिक मामलों में शासन स्तर से निर्देश मिलने पर भी तबादला किया जा सकता है। ऐसे सभी मामलों में विभागीय मंत्री की स्वीकृति के बाद आयुक्त या पंचायत राज संचालनालय द्वारा आदेश जारी किए जाएंगे। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि गंभीर मामलों में प्रशासनिक कार्रवाई में कोई देरी न हो।</p>
<p class="isSelectedEnd">अंतरजिला स्थानांतरण को लेकर नीति में स्पष्ट किया गया है कि यह केवल स्वैच्छिक आधार पर ही किया जाएगा। महिला पंचायत सचिवों को विशेष सुविधा दी गई है, जिसके तहत विवाहित, विधवा और तलाकशुदा महिलाएं अपने पति, ससुराल या माता-पिता के जिले में स्थानांतरण के लिए आवेदन कर सकती हैं। इसके अलावा अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त सचिव भी अपने मूल जिले में स्थानांतरण के लिए पात्र होंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd">स्थानांतरण के लिए आवेदन वर्तमान पदस्थ जिले के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को देना होगा। इसके बाद रिक्त पदों की उपलब्धता की जांच की जाएगी। यदि संबंधित जिले में पद खाली होता है तो प्रस्ताव पंचायत राज संचालनालय भोपाल भेजा जाएगा। प्रशासनिक स्वीकृति के बाद अंतिम आदेश जारी किए जाएंगे। स्थानांतरण के बाद संबंधित सचिव को वरिष्ठता सूची में सबसे नीचे रखा जाएगा और यह सुविधा केवल एक बार ही दी जाएगी। नई नीति के लागू होने के बाद पंचायत स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था में बड़े बदलाव की उम्मीद की जा रही है। सरकार का मानना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर होने वाली अनियमितताओं पर अंकुश लगाया जा सकेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 09:58:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ में सरकारी खर्च पर सख्ती, CM-मंत्रियों के काफिले होंगे छोटे, जारी हुई नई गाइडलाइन</title>
                                    <description><![CDATA[छत्तीसगढ़ सरकार ने खर्च घटाने के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। CM-मंत्रियों के काफिले छोटे होंगे, विदेश यात्रा पर भी सख्ती रहेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/strictness-on-government-expenditure-in-chhattisgarh-cm-convoys-of-ministers-will/article-53547"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/chhattisgarh-government.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">छत्तीसगढ़ सरकार ने सरकारी खर्चों पर नियंत्रण के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। वित्त विभाग की तरफ से नई गाइडलाइन जारी की गई है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें कहा गया है कि अब सिर्फ जरूरी कामों पर ही सरकारी धन खर्च होगा। सभी विभागों को अनावश्यक खर्चों पर रोक लगाने के निर्देश दिए जा चुके हैं। इसके तहत मुख्यमंत्री</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मंत्रियों और निगम-मंडलों के अधिकारियों की गाड़ियों की संख्या भी कम की जाएगी। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो अधिकारी सरकारी खर्च पर विदेश यात्रा करेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें पहले मुख्यमंत्री की अनुमति लेनी होगी। जानकारी के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिना गंभीर कारण के विदेश यात्रा की मंजूरी नहीं मिलेगी। ये सभी निर्देश 30 सितंबर 2026 तक लागू रहेंगे।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">नई गाइडलाइन में वाहन पूलिंग सिस्टम को अनिवार्य भी किया गया है। इसका मतलब है कि एक ही दिशा या ऑफिस की ओर जाने वाले अधिकारी अलग-अलग गाड़ियों के बजाय एक साथ यात्रा करेंगे। अधिकारियों का मानना है कि इससे पेट्रोल और डीजल की बचत होगी और सरकारी खर्च कम होगा। रायपुर समेत कई जिलों में इस व्यवस्था को जल्दी लागू करने की तैयारी चल रही है। शुरुआती जानकारी के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">विभागों से सरकारी वाहनों का डेटा भी मांग लिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा। वहीं कुछ अधिकारियों का कहना है कि इस कदम से ट्रैफिक और फिजूल खर्च पर भी असर पड़ेगा। लेकिन इस फैसले को लेकर अंदरखाने में विभिन्न प्रतिक्रियाएं भी आ रही हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/chhattisgarh-government.webp" alt="Chhattisgarh Government" width="512" height="653"></img></span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सरकार ने ऑनलाइन ट्रेनिंग और डिजिटल सिस्टम के उपयोग पर भी जोर दिया है। इसके लिए </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">IGOT <span lang="hi" xml:lang="hi">कर्मयोगी पोर्टल का अधिक उपयोग करने की सलाह दी गई है। यह एक केंद्र सरकार का ऑनलाइन ट्रेनिंग प्लेटफॉर्म है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को नई तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशासनिक कार्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल गवर्नेंस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और फाइल वर्क से जुड़ी ट्रेनिंग दी जाती है। सूत्रों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार चाहती है कि ट्रेनिंग और बैठकों में होने वाले फिजिकल खर्च कम हों और ज्यादा काम डिजिटल तरीके से किया जाए। कई विभागों को मीटिंग और सेमिनार पर होने वाले खर्चों की समीक्षा करने के लिए भी कहा गया है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/chhattisgarh-government-(2).webp" alt="Chhattisgarh Government (2)" width="512" height="646"></img></span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूत्रों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">राज्य सरकार फिलहाल वित्तीय अनुशासन बनाए रखने पर जोर दे रही है। इसी कारण विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि नए वाहनों की खरीद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनावश्यक यात्रा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और गैरजरूरी आयोजनों से बचना चाहिए। वित्त विभाग का मानना है कि सीमित संसाधनों का सही तरीके से इस्तेमाल सरकारी व्यवस्था को और मजबूत करेगा। आने वाले महीनों में इन निर्देशों का असली असर क्या दिखता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये देखना दिलचस्प होगा।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 May 2026 18:42:49 +0530</pubDate>
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