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                <title>Maternal Health - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Maternal Health RSS Feed</description>
                
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                <title>रीवा संभाग में एनीमिया का बढ़ता संकट, 2 हजार से ज्यादा गर्भवती महिलाएं गंभीर रक्ताल्पता की शिकार</title>
                                    <description><![CDATA[रीवा, सतना, सीधी और सिंगरौली में सामने आए चिंताजनक आंकड़े, डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने कहा- स्वास्थ्य विभाग को प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/increasing-crisis-of-anemia-in-rewa-division-more-than-2/article-55896"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/rewa-anemia-cases.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">रीवा संभाग में गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। स्वास्थ्य विभाग के हालिया आंकड़ों के अनुसार संभाग के चार जिलों रीवा, सतना, सीधी और सिंगरौली में 2 हजार से अधिक गर्भवती महिलाएं गंभीर एनीमिया यानी रक्ताल्पता से पीड़ित हैं। इन महिलाओं के शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर 7 ग्राम प्रति डेसीलीटर से भी कम पाया गया है, जो चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार अत्यंत गंभीर स्थिति मानी जाती है। यह न केवल गर्भवती महिला के स्वास्थ्य के लिए खतरा है बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के विकास और जीवन पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। रीवा जिले में सबसे अधिक 884 गर्भवती महिलाओं में गंभीर रक्ताल्पता की समस्या पाई गई है। इसके बाद सतना जिले में 567, सीधी जिले में 303 और सिंगरौली जिले में 246 महिलाओं को गंभीर एनीमिया से ग्रसित पाया गया है। इन आंकड़ों ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश स्तर पर तैयार की गई रिपोर्ट में भी रीवा संभाग को गंभीर एनीमिया के मामलों के उपचार और प्रबंधन के मामले में सबसे कमजोर क्षेत्रों में शामिल बताया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">चिकित्सकों का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को सामान्य से अधिक पोषण और आयरन की आवश्यकता होती है। यदि समय पर पर्याप्त पोषण नहीं मिलता या नियमित जांच नहीं होती तो शरीर में खून की कमी तेजी से बढ़ सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी, संतुलित आहार का अभाव और स्वास्थ्य सेवाओं तक समय पर पहुंच न होना भी इस समस्या को बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में शामिल हैं। कई मामलों में महिलाएं गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच नहीं करातीं, जिसके कारण बीमारी का पता देर से चलता है। गंभीर एनीमिया से पीड़ित महिलाओं में अत्यधिक कमजोरी, चक्कर आना, सांस फूलना, लगातार थकान, सिरदर्द और त्वचा का पीला पड़ना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। हालांकि कई बार महिलाएं इन लक्षणों को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देती हैं। यही वजह है कि बीमारी धीरे-धीरे गंभीर रूप ले लेती है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि कई मामलों में महिलाओं को अपनी स्थिति की जानकारी तब मिलती है जब वे प्रसव के लिए अस्पताल पहुंचती हैं। ऐसे समय पर स्थिति काफी जटिल हो जाती है और डॉक्टरों को अतिरिक्त चिकित्सा प्रबंधन करना पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">गर्भावस्था के दौरान गंभीर रक्ताल्पता मां और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक हो सकती है। इससे समय से पहले प्रसव, कम वजन वाले बच्चे का जन्म, प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव और मातृ मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है। कई बार नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य पर भी इसका दीर्घकालिक असर देखा जाता है। यही कारण है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन और भारत सरकार गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की रोकथाम और उपचार को प्राथमिकता देते हैं। रीवा संभाग में सामने आए इन आंकड़ों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति की समीक्षा शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि गंभीर एनीमिया से पीड़ित महिलाओं की पहचान कर उन्हें आयरन सप्लीमेंट, पोषण संबंधी सलाह और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज की जाएगी। आशा कार्यकर्ताओं और आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से भी गर्भवती महिलाओं की निगरानी बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है। इसके अलावा नियमित स्वास्थ्य जांच शिविरों के आयोजन पर भी जोर दिया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस मुद्दे पर मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने भी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि एनीमिया की समस्या को हल्के में नहीं लिया जा सकता और यह सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत पहले से कई कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं और अब रीवा संभाग के आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को प्रभावी कार्रवाई के निर्देश देने की बात कही है ताकि गर्भवती महिलाओं को समय पर उपचार और पोषण संबंधी सहायता मिल सके। केवल सरकारी योजनाओं से ही इस समस्या का समाधान संभव नहीं है, बल्कि समाज और परिवार की भागीदारी भी जरूरी है। किशोरावस्था से ही लड़कियों को संतुलित आहार, आयरन युक्त भोजन और स्वास्थ्य जांच के प्रति जागरूक करना होगा। यदि शुरुआती उम्र में ही खून की कमी पर नियंत्रण कर लिया जाए तो गर्भावस्था के दौरान गंभीर एनीमिया के मामलों में काफी कमी लाई जा सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 14:30:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>मध्यप्रदेश में नवजात स्वास्थ्य सेवाएं हुईं और मजबूत: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव</title>
                                    <description><![CDATA[मध्यप्रदेश में नवजात और मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हुआ है। नवजात डिस्चार्ज दर 82.3% पहुंची, ICU बेड क्षमता भी बढ़ाई गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/newborn-health-services-are-becoming-stronger-in-madhya-pradesh-discharge/article-53548"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/madhya-pradesh-health-services-dr.-mohan-yadav.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मध्यप्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मज़बूत करने में लगी हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मातृ और नवजात स्वास्थ्य सेवाओं पर खासा जोर दिया जा रहा है। भोपाल में शनिवार को मिली जानकारी के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रदेश में नवजात शिशुओं के इलाज और देखभाल से जुड़े आंकड़ों में इस साल सुधार देखने को मिला है। सरकार का कहना है कि आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विशेषज्ञ डॉक्टर्स और निगरानी व्यवस्थाओं को बेहतर किया जा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका असर अब ज़मीन पर भी देखा जा रहा है। गंभीर रूप से बीमार और समय से पहले जन्मे नवजातों के लिए एसएनसीयू</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यानी नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाइयों में इलाज पहले से ज़्यादा बेहतर हुआ है। अधिकारियों के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नवजातों की डिस्चार्ज दर अब 82.3 प्रतिशत तक पहुंच गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सरकारी आंकड़ों के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 1 लाख 34 हजार से अधिक नवजातों को एसएनसीयू में उपचार दिया गया है। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">1 अप्रैल से 15 मई 2026 के बीच 62 एसएनसीयू इकाइयों में 15 हजार से अधिक नवजात भर्ती हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें से 12,818 बच्चों को स्वस्थ होने पर छुट्टी दी गई। शुरुआती जानकारी से यह भी पता चला है कि प्रदेश में नवजात मृत्यु दर और रेफरल दर राष्ट्रीय औसत से कम है। राज्य सरकार ने आईसीयू बेड की संख्या भी बढ़ाई है। पहले जहां 1,654 बेड थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब ये बढ़कर 1,770 हो गए हैं। इससे गंभीर हालत वाले बच्चों को समय पर इलाज मिल पा रहा है। अस्पतालों में वेंटिलेटर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सी-पैप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फोटोथेरेपी और ऑक्सीजन सपोर्ट जैसी आधुनिक सुविधाओं का उपयोग बढ़ा है। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को खास ट्रेनिंग भी दी जा रही है ताकि नवजातों को बेहतर उपचार मिल सके।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">प्रदेश में न्यूबॉर्न स्टैबिलाइजेशन यूनिट यानी एनबीएसयू के जरिए भी जिला और उप जिला स्तर पर नवजातों को चिकित्सा सुविधाएं दी जा रही हैं। इस साल अब तक 2,000 से अधिक बच्चों को उपचार के बाद डिस्चार्ज किया गया है। सरकार </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">'<span lang="hi" xml:lang="hi">जीरो सेपरेशन</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">मॉडल पर भी काम कर रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें मां और नवजात को अलग नहीं किया जाता। इसे मदर एंड न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एमएनसीयू) के रूप में विकसित किया जा रहा है। फिलहाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रदेश में 23 एमएनसीयू चालू हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इससे स्तनपान और नवजात देखभाल को बढ़ावा मिल रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर कम वजन वाले बच्चों के लिए यह व्यवस्था बहुत सहायक साबित हो रही है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इसी बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">मातृ दुग्ध इकाइयों के जरिए भी कमजोर और बीमार नवजातों को पोषण उपलब्ध कराया जा रहा है। भोपाल और इंदौर में संचालित सीएलएमसी केंद्रों में इस साल 241 लीटर से अधिक मातृ दूध दान किया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे जरूरतमंद बच्चों तक पहुंचाया गया है। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ई-शिशु परियोजना के माध्यम से डिजिटल मॉनिटरिंग और विशेषज्ञ सलाह की सुविधाएं भी शुरू की गई हैं। दिसंबर 2025 से अब तक करीब 9</span>,<span lang="hi" xml:lang="hi">889 नवजात इस योजना से लाभान्वित हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इससे रेफरल और मृत्यु दर में कमी देखने को मिली है। सरकार का दावा है कि भविष्य में प्रदेश के सभी क्षेत्रों में नवजात और मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत किया जाएगा।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 May 2026 18:43:08 +0530</pubDate>
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