<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.dainikjagranmpcg.com/mp-updates/tag-13767" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>दैनिक जागरण RSS Feed Generator</generator>
                <title>MP Updates - दैनिक जागरण</title>
                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/tag/13767/rss</link>
                <description>MP Updates RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>ट्विशा शर्मा मौत मामले में भोपाल कोर्ट में हाई वोल्टेज ड्रामा, पूर्व जज गिरिबाला सिंह और बेटे को 14 दिन की जेल</title>
                                    <description><![CDATA[सुनवाई के दौरान कोर्ट में तीखी बहस, आरोप-प्रत्यारोप और तनावपूर्ण माहौल ने खींचा सबका ध्यान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/6a1fd229bd318/article-54836"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/twisha-sharma-case-new-update-.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भोपाल में चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले की सुनवाई बुधवार को उस समय सुर्खियों में आ गई जब अदालत परिसर के भीतर अभूतपूर्व घटनाक्रम देखने को मिला। मामले में आरोपी पूर्व जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को अदालत ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया। सीबीआई द्वारा पुलिस रिमांड समाप्त होने के बाद दोनों आरोपियों को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में मौजूद लोगों ने एक ऐसा माहौल देखा, जहां कानूनी दलीलों के साथ-साथ तीखे आरोप, भावनात्मक प्रतिक्रियाएं और तनावपूर्ण बहसें भी सामने आईं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ट्विशा शर्मा मौत मामला पिछले कुछ समय से प्रदेश के सबसे चर्चित मामलों में शामिल रहा है। मामले की जांच सीबीआई के हाथ में है और एजेंसी लगातार विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है। इसी सिलसिले में आरोपी गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को अदालत में पेश किया गया था। सुनवाई शुरू होते ही अदालत कक्ष में असामान्य स्थिति बन गई। बड़ी संख्या में अधिवक्ता, पक्षकार और अन्य लोग कार्यवाही को देखने के लिए मौजूद थे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा उस समय हुई जब सेवानिवृत्त जज गिरिबाला सिंह स्वयं अपनी पैरवी के लिए खड़ी हो गईं। उन्होंने अदालत के सामने अपनी बात रखते हुए कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए। अदालत कक्ष में मौजूद लोगों के अनुसार उनका पक्ष रखने का अंदाज बेहद आत्मविश्वासपूर्ण और मुखर था। उन्होंने कई बिंदुओं पर विस्तार से अपनी बात रखी और विपक्षी पक्ष के आरोपों का जवाब देने की कोशिश की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कार्यवाही के दौरान गिरिबाला सिंह ने विपक्षी पक्ष के अधिवक्ता अनुराग श्रीवास्तव पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि जबलपुर हाईकोर्ट परिसर में उनके बेटे समर्थ सिंह के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की गई थी। इस आरोप के बाद अदालत कक्ष का माहौल और अधिक गर्म हो गया। विपक्षी पक्ष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यदि ऐसा कोई घटनाक्रम हुआ है तो संबंधित परिसर के सीसीटीवी फुटेज की जांच कराई जानी चाहिए, जिससे वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सुनवाई आगे बढ़ी तो दोनों पक्षों के बीच बहस और अधिक तीखी हो गई। कई मौकों पर अदालत को हस्तक्षेप कर कार्यवाही को व्यवस्थित बनाए रखना पड़ा। उपस्थित लोगों के अनुसार दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों को लेकर पूरी तरह आक्रामक नजर आए। हालांकि अदालत की मौजूदगी में स्थिति नियंत्रण में रही, लेकिन कुछ समय के लिए माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि हाथापाई जैसी स्थिति बनने की चर्चा भी सामने आई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामले के दौरान एक और महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया गया। विपक्षी पक्ष की ओर से सवाल किया गया कि समर्थ सिंह, जिनकी गिरफ्तारी को लेकर जांच एजेंसियां सक्रिय थीं और जिन पर इनाम भी घोषित किया गया था, उन्हें कथित रूप से एक न्यायिक परिसर में शरण कैसे मिली। इस सवाल ने सुनवाई को नया मोड़ दे दिया। अदालत में इस विषय पर भी लंबी बहस हुई और मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वहीं बचाव पक्ष ने इस आरोप का जवाब देते हुए कहा कि किसी भी नागरिक को अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि मामले से जुड़े कई तथ्यों को एकतरफा तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है और पूरी सच्चाई सामने आने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी। बचाव पक्ष ने अदालत से निष्पक्ष दृष्टिकोण अपनाने की अपील भी की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ट्विशा शर्मा मौत मामले को लेकर प्रदेशभर में लोगों की नजरें लगातार अदालत की कार्यवाही पर बनी हुई हैं। मामले में हर सुनवाई के बाद नए तथ्य और नए सवाल सामने आ रहे हैं। बुधवार की सुनवाई भी इसी वजह से काफी चर्चाओं में रही।  किसी भी संवेदनशील मामले में अदालत की कार्यवाही के दौरान सभी पक्षों को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार होता है। हालांकि अदालत का मुख्य उद्देश्य तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष निर्णय तक पहुंचना होता है। ऐसे मामलों में जांच एजेंसियों की रिपोर्ट, गवाहों के बयान और उपलब्ध दस्तावेज महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस बीच अदालत ने दोनों आरोपियों को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया है। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई निर्धारित तिथि पर होगी। जांच एजेंसियां भी अपने स्तर पर मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच जारी रखे हुए हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की संभावना जताई जा रही है। बुधवार की सुनवाई ने पूरे मामले को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। अदालत में हुई तीखी बहस, गंभीर आरोपों और तनावपूर्ण माहौल ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। अब सभी की निगाहें अगली सुनवाई और जांच की प्रगति पर टिकी हुई हैं, जहां इस चर्चित मामले में नए घटनाक्रम सामने आ सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/6a1fd229bd318/article-54836</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/6a1fd229bd318/article-54836</guid>
                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 13:33:17 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/twisha-sharma-case-new-update-.jpg"                         length="192870"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मध्यप्रदेश में नवजात स्वास्थ्य सेवाएं हुईं और मजबूत: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव</title>
                                    <description><![CDATA[मध्यप्रदेश में नवजात और मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हुआ है। नवजात डिस्चार्ज दर 82.3% पहुंची, ICU बेड क्षमता भी बढ़ाई गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/newborn-health-services-are-becoming-stronger-in-madhya-pradesh-discharge/article-53548"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/madhya-pradesh-health-services-dr.-mohan-yadav.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मध्यप्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मज़बूत करने में लगी हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मातृ और नवजात स्वास्थ्य सेवाओं पर खासा जोर दिया जा रहा है। भोपाल में शनिवार को मिली जानकारी के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रदेश में नवजात शिशुओं के इलाज और देखभाल से जुड़े आंकड़ों में इस साल सुधार देखने को मिला है। सरकार का कहना है कि आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विशेषज्ञ डॉक्टर्स और निगरानी व्यवस्थाओं को बेहतर किया जा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका असर अब ज़मीन पर भी देखा जा रहा है। गंभीर रूप से बीमार और समय से पहले जन्मे नवजातों के लिए एसएनसीयू</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यानी नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाइयों में इलाज पहले से ज़्यादा बेहतर हुआ है। अधिकारियों के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नवजातों की डिस्चार्ज दर अब 82.3 प्रतिशत तक पहुंच गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सरकारी आंकड़ों के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 1 लाख 34 हजार से अधिक नवजातों को एसएनसीयू में उपचार दिया गया है। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">1 अप्रैल से 15 मई 2026 के बीच 62 एसएनसीयू इकाइयों में 15 हजार से अधिक नवजात भर्ती हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें से 12,818 बच्चों को स्वस्थ होने पर छुट्टी दी गई। शुरुआती जानकारी से यह भी पता चला है कि प्रदेश में नवजात मृत्यु दर और रेफरल दर राष्ट्रीय औसत से कम है। राज्य सरकार ने आईसीयू बेड की संख्या भी बढ़ाई है। पहले जहां 1,654 बेड थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब ये बढ़कर 1,770 हो गए हैं। इससे गंभीर हालत वाले बच्चों को समय पर इलाज मिल पा रहा है। अस्पतालों में वेंटिलेटर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सी-पैप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फोटोथेरेपी और ऑक्सीजन सपोर्ट जैसी आधुनिक सुविधाओं का उपयोग बढ़ा है। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को खास ट्रेनिंग भी दी जा रही है ताकि नवजातों को बेहतर उपचार मिल सके।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">प्रदेश में न्यूबॉर्न स्टैबिलाइजेशन यूनिट यानी एनबीएसयू के जरिए भी जिला और उप जिला स्तर पर नवजातों को चिकित्सा सुविधाएं दी जा रही हैं। इस साल अब तक 2,000 से अधिक बच्चों को उपचार के बाद डिस्चार्ज किया गया है। सरकार </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">'<span lang="hi" xml:lang="hi">जीरो सेपरेशन</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">मॉडल पर भी काम कर रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें मां और नवजात को अलग नहीं किया जाता। इसे मदर एंड न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एमएनसीयू) के रूप में विकसित किया जा रहा है। फिलहाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रदेश में 23 एमएनसीयू चालू हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इससे स्तनपान और नवजात देखभाल को बढ़ावा मिल रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर कम वजन वाले बच्चों के लिए यह व्यवस्था बहुत सहायक साबित हो रही है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इसी बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">मातृ दुग्ध इकाइयों के जरिए भी कमजोर और बीमार नवजातों को पोषण उपलब्ध कराया जा रहा है। भोपाल और इंदौर में संचालित सीएलएमसी केंद्रों में इस साल 241 लीटर से अधिक मातृ दूध दान किया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे जरूरतमंद बच्चों तक पहुंचाया गया है। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ई-शिशु परियोजना के माध्यम से डिजिटल मॉनिटरिंग और विशेषज्ञ सलाह की सुविधाएं भी शुरू की गई हैं। दिसंबर 2025 से अब तक करीब 9</span>,<span lang="hi" xml:lang="hi">889 नवजात इस योजना से लाभान्वित हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इससे रेफरल और मृत्यु दर में कमी देखने को मिली है। सरकार का दावा है कि भविष्य में प्रदेश के सभी क्षेत्रों में नवजात और मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत किया जाएगा।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/newborn-health-services-are-becoming-stronger-in-madhya-pradesh-discharge/article-53548</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/newborn-health-services-are-becoming-stronger-in-madhya-pradesh-discharge/article-53548</guid>
                <pubDate>Sat, 16 May 2026 18:43:08 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/madhya-pradesh-health-services-dr.-mohan-yadav.jpg"                         length="98509"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भोजशाला से फिर चर्चा में आई मां वाग्देवी की प्रतिमा, मुगल आक्रमण में हुई थी खंडित, 17 साल से ब्रिटिश म्यूजियम में रखी है मूल प्रतिमा</title>
                                    <description><![CDATA[धार भोजशाला को लेकर हाईकोर्ट के फैसले के बाद लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी मां वाग्देवी की प्रतिमा फिर चर्चा में आ गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/the-statue-of-maa-vagdevi-came-into-limelight-again-from/article-53549"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/bhojshala-mother-vagdevi-idol.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने धार के भोजशाला को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए इसे हिंदू मंदिर माना है। इस फैसले के दौरान कोर्ट ने पुरातात्विक साक्ष्यों</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">एएसआई की सर्वे रिपोर्ट और ऐतिहासिक तथ्यों का जिक्र किया। इसके बाद एक बार फिर भोजशाला और मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा की चर्चा शुरू हो गई है। कहा जाता है कि यह वही प्रतिमा है जिसे हिंदू संगठन भोजशाला की आराध्य देवी मानते हैं। मुग़ल आक्रमण के दौरान यह प्रतिमा खंडित हो गई थी और बाद में इसे अंग्रेजों ने खुदाई में निकाला। अब यह प्रतिमा पिछले 117 साल से लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम के ग्रेट रसल स्ट्रीट में एक कांच के बॉक्स में सुरक्षित रखी गई है। धार से लगभग 7350 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस प्रतिमा को भारत वापस लाने की मांग वर्षों से उठती रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">धार के कृष पाल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो लंदन में रहते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ने ब्रिटिश म्यूजियम जाकर इस प्रतिमा को करीब से देखा। उन्होंने बताया कि बचपन से ही वे भोजशाला और मां वाग्देवी के बारे में सुनते आए थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए उन्हें इसे देखने की इच्छा थी। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहां पहुंचना आसान नहीं था। म्यूजियम में भारत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चीन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अफ्रीका और अन्य देशों की ऐतिहासिक धरोहरें रखी गई हैं। मां वाग्देवी की यह प्रतिमा एक बड़े कांच के बॉक्स में सुरक्षित रखी गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे छूने की अनुमति नहीं है। प्रतिमा करीब चार से पांच फीट ऊंची है और इसकी दो भुजाएं टूटी हुई हैं। विवरण के अनुसार इसे जैन देवी अंबिका बताया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि हिंदू संगठन इसे मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा मानते हैं। जानकारी के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह प्रतिमा 1909 में लंदन ले जाई गई थी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ब्रिटिश म्यूजियम में भारत से लाकर रखी गई कई मूर्तियां हैं। मां वाग्देवी की प्रतिमा के पास देवी दुर्गा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">गणेशजी और भगवान महावीर समेत अन्य जैन तीर्थंकरों की प्रतिमाएं भी रखी गई हैं। बताया जा रहा है कि इस सफेद पत्थर की प्रतिमा के नीचे 1034 ईस्वी का शिलालेख भी मौजूद है। भोजशाला से जुड़े लोग दावा करते हैं कि यह प्रतिमा राजा भोज की नगरी धार की विद्या की देवी की है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भोजशाला को लेकर वर्षों से विवाद और संघर्ष होते आए हैं। हिंदू पक्ष इसे मंदिर मानता है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं मुस्लिम पक्ष इसे मस्जिद मानता है। इतिहास में यहां कई बार संघर्ष और विरोध की घटनाएं देखी गई हैं। हिंदू संगठनों का कहना है कि 1952 से लगातार इस प्रतिमा को भारत वापस लाने की मांग की जा रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके लिए कई सरकारों और नेताओं को ज्ञापन भी दिए गए हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">समिति से जुड़े लोगों का कहना है कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">उमा भारती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक से प्रतिमा लौटाने की मांग की जा चुकी है। 1961 में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इतिहासकार पद्मश्री डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर भी लंदन गए थे और उन्होंने यह साबित किया था कि यह धार की मां वाग्देवी की प्रतिमा है। अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद भोजशाला और प्रतिमा की वापसी का मुद्दा फिर से गरमाने लगा है। धार और आसपास के क्षेत्र में इस फैसले के बाद धार्मिक और ऐतिहासिक चर्चाएं भी बढ़ गई हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/the-statue-of-maa-vagdevi-came-into-limelight-again-from/article-53549</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/the-statue-of-maa-vagdevi-came-into-limelight-again-from/article-53549</guid>
                <pubDate>Sat, 16 May 2026 18:43:00 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/bhojshala-mother-vagdevi-idol.jpg"                         length="123910"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        