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                <title>Temple News - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Temple News RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>राम मंदिर दान विवाद में नया मोड़: 23 कर्मचारियों का सामूहिक इस्तीफा, सुप्रीम कोर्ट में 13 जुलाई को होगी सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[दान गिनने वाले कर्मचारियों ने बढ़े कार्यभार और बदली व्यवस्था पर जताई नाराजगी, दान प्रबंधन और कथित गड़बड़ी मामले में CBI जांच की मांग वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/new-twist-in-ram-temple-donation-dispute-mass-resignation-of/article-58425"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bhopal-master-plan-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार चर्चा श्रद्धालुओं की आस्था या धार्मिक आयोजन को लेकर नहीं, बल्कि मंदिर में आने वाले दान की गिनती और उससे जुड़े प्रशासनिक विवाद को लेकर हो रही है। दान की गिनती का जिम्मा संभाल रहे 23 कर्मचारियों ने एक साथ अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। कर्मचारियों का कहना है कि दान चोरी का मामला सामने आने के बाद दान की प्रकृति बदल गई है, जिससे उनका कार्यभार पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है। इसी बीच इस पूरे मामले से जुड़ी विभिन्न याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट 13 जुलाई को सुनवाई करेगा, जिससे इस विवाद पर सभी की नजरें टिक गई हैं। मंदिर में आने वाले दान की गिनती का कार्य बैंक कर्मचारियों की टीम करती थी। पहले दान में बड़ी संख्या में 500 रुपये के नोट आते थे, जिससे गिनती का काम अपेक्षाकृत तेजी से पूरा हो जाता था। कर्मचारियों के मुताबिक पहले प्रतिदिन 500 रुपये के नोटों के 70 से 80 बंडल तैयार हो जाते थे। लेकिन दान चोरी की खबरें सामने आने के बाद श्रद्धालुओं के दान देने के तरीके में बदलाव देखने को मिला है। अब मंदिर में 10 और 20 रुपये के नोटों की संख्या काफी बढ़ गई है, जबकि 500 रुपये के नोटों की संख्या पहले के मुकाबले काफी कम हो गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">कर्मचारियों का कहना है कि छोटे मूल्य के नोटों की गिनती में अधिक समय लगता है। पहले जहां दो शिफ्टों में काम होता था और प्रत्येक कर्मचारी लगभग छह घंटे की ड्यूटी करता था, वहीं अब पूरी व्यवस्था बदल दी गई है। नई व्यवस्था के तहत कर्मचारियों को सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक लगातार काम करना पड़ रहा है। इसके बावजूद उनके वेतन में किसी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं की गई। बढ़े हुए कार्यभार और लंबी ड्यूटी के कारण कर्मचारियों में असंतोष बढ़ता गया और अंततः 23 कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा देने का फैसला कर लिया। बताया जा रहा है कि इस्तीफों के बाद अब केवल 13 कर्मचारी ही दान गिनने का काम संभाल रहे हैं। ऐसे में मंदिर में प्रतिदिन आने वाले दान की गिनती और रिकॉर्ड रखने की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है। यदि जल्द ही नई नियुक्तियां नहीं की गईं या कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में दान प्रबंधन की व्यवस्था और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">उधर, राम मंदिर दान प्रबंधन से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले ने कानूनी मोड़ भी ले लिया है। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में तीन अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई हैं। इन याचिकाओं में दान चोरी के आरोपों की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने, विशेष जांच दल (SIT) गठित करने और मंदिर में दान प्रबंधन की पूरी व्यवस्था की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने की मांग की गई है। इन सभी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ 13 जुलाई को सुनवाई करेगी। इस सुनवाई को पूरे देश में महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे आगे की जांच और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर दिशा तय हो सकती है। दान विवाद पर देश ही नहीं बल्कि पड़ोसी नेपाल से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। नेपाल के जनकपुर स्थित प्रसिद्ध जानकी मंदिर के महंत रोशन दास ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि भगवान राम के किसी मंदिर में दान से जुड़ी ऐसी घटना पहले कभी सुनने या देखने को नहीं मिली। उनके अनुसार, जब से उन्हें अयोध्या में दान से जुड़े विवाद की जानकारी मिली है, तब से वे बेहद दुखी और चिंतित हैं। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जानी चाहिए। राम मंदिर देशभर के करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में मंदिर की दान व्यवस्था को लेकर उठे सवालों ने स्वाभाविक रूप से लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। श्रद्धालु यह उम्मीद कर रहे हैं कि दान की राशि का पूरी पारदर्शिता के साथ उपयोग हो और उसकी गिनती एवं प्रबंधन की प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित तथा विश्वसनीय बनी रहे। अब सभी की निगाहें 13 जुलाई को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत के निर्देशों के आधार पर इस पूरे मामले में आगे की कार्रवाई तय होगी। यदि जांच एजेंसियों को जिम्मेदारी सौंपी जाती है या दान प्रबंधन प्रणाली में बदलाव के निर्देश दिए जाते हैं, तो इसका असर भविष्य में मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी दिखाई दे सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 17:11:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>जगन्नाथ रथयात्रा की परंपरा पर नया विवाद, पुरी गजपति महाराज ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से की हस्तक्षेप की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[ISKCON द्वारा अलग-अलग तिथियों पर रथयात्रा और स्नान यात्रा आयोजित करने पर जताई आपत्ति, शास्त्रीय परंपराओं की रक्षा और धार्मिक मर्यादा बनाए रखने की अपील।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/6a507984676f8/article-58357"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/jagannath-rath-yatra.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा को लेकर एक बार फिर परंपरा और आधुनिक व्यवस्थाओं के बीच विवाद गहरा गया है। ओडिशा के पुरी स्थित श्रीजगन्नाथ मंदिर के गजपति महाराज दिव्यसिंह देव ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर प्राचीन धार्मिक परंपराओं की रक्षा करने की मांग की है। उन्होंने विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्यरत इस्कॉन (ISKCON) द्वारा अलग-अलग तिथियों पर रथयात्रा और स्नान यात्रा आयोजित किए जाने पर गंभीर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि यह परंपरा, शास्त्रों और भगवान जगन्नाथ की निर्धारित धार्मिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है तथा इससे करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं प्रभावित हो रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">8 जुलाई को लिखे गए इस पत्र में गजपति महाराज ने कहा कि जगन्नाथ संस्कृति केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं बल्कि सदियों पुरानी आध्यात्मिक परंपरा का प्रतीक है। ऐसे में यदि अलग-अलग संस्थाएं अपनी सुविधा के अनुसार रथयात्रा की तिथियां तय करेंगी तो मूल परंपरा कमजोर होगी और श्रद्धालुओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा होगी। उन्होंने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि इस विषय पर गंभीरता से विचार कर उचित कदम उठाए जाएं, ताकि भगवान जगन्नाथ की प्राचीन परंपराओं की गरिमा बनी रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">गजपति महाराज दिव्यसिंह देव केवल पुरी राजघराने के प्रमुख ही नहीं, बल्कि श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति (SJTMC) के स्थायी अध्यक्ष भी हैं। जगन्नाथ परंपरा में उन्हें 'ठाकुर राजा' का विशेष सम्मान प्राप्त है। धार्मिक मान्यता के अनुसार वे भगवान जगन्नाथ के प्रथम सेवक माने जाते हैं। हर वर्ष रथयात्रा के दौरान तीनों रथों पर सोने की झाड़ू से सफाई करने की प्रसिद्ध 'छेरा पंहरा' सेवा भी गजपति महाराज द्वारा ही संपन्न की जाती है। यह सेवा राजसत्ता के बजाय भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण और सेवा भाव का प्रतीक मानी जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">दिव्यसिंह देव का राज्याभिषेक वर्ष 1970 में मात्र 17 वर्ष की आयु में हुआ था। उन्होंने विधि की उच्च शिक्षा प्राप्त की है और लंबे समय से श्रीजगन्नाथ मंदिर की धार्मिक व्यवस्थाओं तथा परंपराओं के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में उनके द्वारा उठाया गया यह मुद्दा धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विवाद की मुख्य वजह इस वर्ष विभिन्न देशों में अलग-अलग समय पर आयोजित रथयात्राएं हैं। इस्कॉन ने जून और जुलाई के दौरान लंदन, न्यूयॉर्क तथा सिडनी सहित कई शहरों में रथयात्रा निकाली, जबकि पुरी में इस वर्ष भगवान जगन्नाथ की मुख्य रथयात्रा 16 जुलाई को आयोजित होनी है। इसके अलावा स्नान पूर्णिमा का आयोजन 29 जून को हुआ था। गजपति महाराज का कहना है कि शास्त्रों के अनुसार इन धार्मिक आयोजनों की निश्चित तिथियां निर्धारित हैं और उनसे अलग जाकर आयोजन करना उचित नहीं माना जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">गजपति महाराज ने मध्य प्रदेश में प्रस्तावित रथयात्राओं पर भी सवाल उठाए हैं। जानकारी के अनुसार उज्जैन स्थित इस्कॉन मंदिर द्वारा 16 से 25 जुलाई के बीच राज्य के 66 स्थानों पर रथयात्रा निकालने की योजना बनाई गई है। इस पर आपत्ति जताते हुए उन्होंने कहा कि धार्मिक ग्रंथों में रथयात्रा को आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से प्रारंभ होने वाला नौ दिवसीय उत्सव बताया गया है। इसलिए अलग-अलग स्थानों पर अलग तिथियों में रथयात्रा आयोजित करना शास्त्रीय परंपराओं के अनुरूप नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने अपने पत्र में स्कंद पुराण का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित स्कंद पुराण में स्वयं भगवान जगन्नाथ ने स्नान यात्रा और रथयात्रा की तिथियों का उल्लेख किया है। ऐसे में इन तिथियों में परिवर्तन करना धार्मिक दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता। गजपति महाराज का मानना है कि यदि इस प्रकार की परंपराएं लगातार बदलती रहीं तो आने वाली पीढ़ियों तक मूल धार्मिक स्वरूप सुरक्षित रखना कठिन हो जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर, इस्कॉन ने अपने पक्ष में स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य किसी भी परंपरा का उल्लंघन करना नहीं है। संगठन का कहना है कि भगवान जगन्नाथ केवल पुरी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरी दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र हैं। विदेशों में स्थानीय परिस्थितियां, सरकारी नियम, जलवायु और प्रशासनिक व्यवस्थाएं अलग-अलग होती हैं। कई देशों में निर्धारित तिथि पर विशाल रथयात्रा निकालने की अनुमति या आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध नहीं हो पातीं। इसलिए स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग तिथियों पर आयोजन किया जाता है, ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु इसमें शामिल हो सकें।</p>
<p style="text-align:justify;">इस्कॉन ने पहले भी स्पष्ट किया था कि रूस सहित कई देशों में मौसम और प्रशासनिक नियमों के कारण शास्त्रों में वर्णित तिथियों पर रथयात्रा आयोजित करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होता। संगठन का कहना है कि उसका उद्देश्य केवल भगवान जगन्नाथ की भक्ति और भारतीय संस्कृति का वैश्विक स्तर पर प्रचार-प्रसार करना है। रथयात्रा को लेकर यह विवाद पहली बार सामने नहीं आया है। वर्ष 2024 और 2025 में भी पुरी के गजपति महाराज ने इस्कॉन से अनुरोध किया था कि विदेशों में भी रथयात्रा पुरी के धार्मिक पंचांग के अनुसार आयोजित की जाए। हालांकि उस समय भी इस्कॉन ने स्थानीय परिस्थितियों का हवाला देते हुए अपने कार्यक्रमों का बचाव किया था। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 10:42:13 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>राममंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT की रिपोर्ट, CCTV में 70 संदिग्ध घटनाएं कैद</title>
                                    <description><![CDATA[प्रारंभिक जांच में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल, चढ़ावे की गिनती प्रक्रिया में गंभीर खामियां; कई कर्मचारियों और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका जांच के दायरे में।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/sit-report-in-ram-temple-offering-theft-case-70-suspicious/article-58042"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ram-mandir-donation-theft-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अयोध्या के राममंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की शुरुआती रिपोर्ट सामने आने के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक 27 अप्रैल से 5 जून के बीच चढ़ावे की गिनती वाले कमरे में लगे सीसीटीवी कैमरों में करीब 70 संदिग्ध घटनाएं रिकॉर्ड हुई हैं। जांच में सामने आया कि गिनती का काम कर रहे कुछ कर्मचारी नोटों की गड्डियां अपने कपड़ों, जेबों, जूतों और मोजों में छिपाते हुए दिखाई दिए। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों में से कई की गतिविधियां फुटेज में साफ नजर आई हैं। इसी बीच राममंदिर ट्रस्ट की बैठक में ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों के इस्तीफे भी स्वीकार किए गए, जिससे मामला और चर्चा में आ गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में मंदिर की नकदी गिनती और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। जांच टीम का कहना है कि चढ़ावे की गिनती की पूरी प्रक्रिया में कई ऐसी खामियां थीं, जिनका फायदा उठाकर लगातार चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि नकदी प्रबंधन और वित्तीय व्यवस्था की निगरानी से जुड़े डॉ. अनिल मिश्रा को पहले से सुरक्षा व्यवस्था में कमियों की जानकारी दी गई थी, लेकिन समय रहते प्रभावी लिखित निर्देश जारी नहीं किए गए। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि कर्मचारियों की नियमित तलाशी नहीं ली जाती थी, जिससे नकदी बाहर ले जाना आसान हो गया। अधिकारियों के अनुसार कर्मचारियों की बायोमैट्रिक उपस्थिति, तय यूनिफॉर्म, निजी सामान पर नियंत्रण, नकदी का रिकॉर्ड और दैनिक निगरानी जैसी व्यवस्थाएं पूरी तरह प्रभावी नहीं थीं। ऐसे हालात में सुरक्षा प्रणाली कमजोर पड़ती गई और चोरी की घटनाएं लगातार होती रहीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच में यह भी सामने आया कि चंपत राय के ड्राइवर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के पास बिना किसी औपचारिक लिखित आदेश के मंदिर की हुंडियों और गिनती कक्ष से जुड़ी चाबियों का नियंत्रण था। इतना ही नहीं, उसकी सिफारिश पर मनीष कुमार यादव को चढ़ावे की गिनती के काम में लगाया गया, जो बाद में आरोपियों में शामिल पाया गया। एसआईटी ने इसे सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी चूक माना है। रिपोर्ट के मुताबिक सीसीटीवी फुटेज में कई बार कर्मचारी एक-दूसरे को इशारों से सतर्क करते भी दिखाई दिए, जिससे जांच टीम को यह गतिविधि संगठित तरीके से होने का संदेह हुआ। जांच अधिकारियों ने इन घटनाओं को अलग-अलग नहीं बल्कि लगातार दोहराए गए पैटर्न के रूप में दर्ज किया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रारंभिक जांच के आधार पर अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय और रमाशंकर मिश्रा समेत कई लोगों की भूमिका संदिग्ध बताई गई है। एसआईटी का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज, बरामद नकदी और बैंक खातों की जांच में इनके खिलाफ पर्याप्त शुरुआती साक्ष्य मिले हैं। रिपोर्ट में इनके खिलाफ चोरी, आपराधिक न्यासभंग, आपराधिक दुर्विनियोग, षड्यंत्र और चोरी की संपत्ति रखने जैसी धाराओं में कार्रवाई की सिफारिश की गई है। इसी रिपोर्ट के आधार पर ट्रस्ट की ओर से मामला दर्ज कराया गया था, जिसके बाद आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आरोपी अविनाश शुक्ला के पास से अब तक 20.39 लाख रुपये नकद, 1121 अमेरिकी डॉलर, सोने-चांदी के आभूषण और अन्य कीमती सामान बरामद किया गया है। जांच में यह भी सामने आया कि लगभग 20 हजार रुपये मासिक वेतन पाने वाले कुछ कर्मचारियों के बैंक खातों में लाखों रुपये के लेन-देन दर्ज मिले हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आरोपी ने परिवार और दोस्तों पर बड़ी रकम खर्च करने की बात भी स्वीकार की है। एक भाई की शादी पर लाखों रुपये खर्च करने, दूसरे भाई को नकद राशि देने, कार खरीदने और दोस्तों को पैसे ट्रांसफर करने जैसे पहलुओं की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि चोरी की रकम को बैंक खातों और संपत्तियों के जरिए खपाने की कोशिश की गई हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि यह केवल शुरुआती जांच है और कई महत्वपूर्ण पहलुओं की पड़ताल अभी बाकी है। निगरानी व्यवस्था में लापरवाही, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका, सुरक्षा प्रोटोकॉल में सुधार और अन्य संभावित लोगों की संलिप्तता को लेकर विस्तृत जांच जारी है। अंतिम रिपोर्ट में इन सभी बिंदुओं पर विस्तृत निष्कर्ष और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुझाव सरकार को सौंपे जाएंगे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 11:59:29 +0530</pubDate>
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                <title>काल भैरव मंदिर में VIP दर्शन से 45 दिनों में ₹3.09 करोड़ की आय, श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ बनी बड़ी वजह</title>
                                    <description><![CDATA[₹500 की शीघ्र दर्शन व्यवस्था से मंदिर प्रबंधन को मिली रिकॉर्ड आय, महाकाल मंदिर के बाद सबसे अधिक श्रद्धालु काल भैरव धाम पहुंच रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/the-early-darshan-vip-ticket-system-of-%E2%82%B9-500-started/article-57942"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/kal-bhairav-temple.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">उज्जैन स्थित प्रसिद्ध काल भैरव मंदिर में शुरू की गई ₹500 की शीघ्र दर्शन (VIP दर्शन) व्यवस्था मंदिर प्रबंधन के लिए आय का बड़ा स्रोत बनकर उभरी है। महज 45 दिनों के भीतर इस व्यवस्था से 3 करोड़ 9 लाख 27 हजार रुपये की आय दर्ज की गई है। 20 मई से 3 जुलाई के बीच हुई इस कमाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि काल भैरव मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है और दर्शन की सुगम व्यवस्था के लिए शुरू किया गया यह प्रयोग सफल साबित हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">मंदिर प्रबंधन के अनुसार, श्री महाकालेश्वर मंदिर के बाद उज्जैन में सबसे अधिक श्रद्धालु काल भैरव मंदिर पहुंचते हैं। विशेष रूप से शनिवार, रविवार, अवकाश और धार्मिक पर्वों पर यहां हजारों की संख्या में भक्त दर्शन के लिए आते हैं। इसी बढ़ती भीड़ को व्यवस्थित करने और श्रद्धालुओं को कम समय में दर्शन कराने के उद्देश्य से ₹500 की शीघ्र दर्शन टिकट व्यवस्था लागू की गई थी।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span>45 दिनों में तीन करोड़ से अधिक की आय</span></strong></h5>
<p style="text-align:justify;">मंदिर प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार 20 मई से 3 जुलाई तक VIP दर्शन टिकटों की बिक्री से कुल 3 करोड़ 9 लाख 27 हजार रुपये की आय हुई। यह आय केवल उन दिनों की है, जब टिकटों का नियमित वितरण हुआ। जिन दिनों अत्यधिक भीड़ के कारण टिकट वितरण रोक दिया गया था, उनकी आय इस आंकड़े में शामिल नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">मंदिर प्रबंधन का कहना है कि यह व्यवस्था पूरी तरह श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखकर शुरू की गई थी और इसका उद्देश्य सामान्य दर्शन व्यवस्था को प्रभावित किए बिना भीड़ का बेहतर प्रबंधन करना है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><span>महाकाल के बाद सबसे अधिक श्रद्धालु काल भैरव मंदिर में</span></h3>
<p style="text-align:justify;">मंदिर प्रबंधक संध्या मार्कंडेय के अनुसार उज्जैन आने वाले अधिकांश श्रद्धालु श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन के बाद काल भैरव मंदिर अवश्य पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार बाबा महाकाल के दर्शन तब तक पूर्ण नहीं माने जाते, जब तक श्रद्धालु काल भैरव के दर्शन नहीं करते।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी कारण वर्षभर यहां श्रद्धालुओं की अच्छी संख्या बनी रहती है। विशेष अवसरों और छुट्टियों के दौरान मंदिर परिसर में भारी भीड़ देखने को मिलती है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span>अलग प्रवेश मार्ग से कराए जाते हैं शीघ्र दर्शन</span></strong></h5>
<p style="text-align:justify;">VIP दर्शन व्यवस्था के तहत टिकट लेने वाले श्रद्धालुओं को अलग प्रवेश मार्ग से मंदिर में प्रवेश कराया जाता है। इससे उन्हें लंबी कतार में खड़े रहने की आवश्यकता नहीं पड़ती और कम समय में दर्शन हो जाते हैं। मंदिर प्रशासन का कहना है कि इस व्यवस्था से सामान्य दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं पर किसी प्रकार का अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता। दोनों व्यवस्थाएं अलग-अलग संचालित की जाती हैं ताकि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा न हो।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span>प्रतिदिन लाखों रुपये की होती है आय</span></strong></h5>
<p style="text-align:justify;">मंदिर प्रबंधन के अनुसार सामान्य दिनों में शीघ्र दर्शन टिकटों से प्रतिदिन लगभग 4 से 5 लाख रुपये तक की आय होती है। वहीं यदि किसी धार्मिक पर्व, शनिवार, रविवार या अवकाश के कारण श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है तो यह आय बढ़कर 10 से 11 लाख रुपये प्रतिदिन तक पहुंच जाती है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span>भीड़ बढ़ने पर रोकना पड़ता है टिकट वितरण</span></strong></h5>
<p style="text-align:justify;">काल भैरव मंदिर का परिसर सीमित क्षमता वाला है। ऐसे में यदि अचानक श्रद्धालुओं की संख्या अधिक हो जाती है तो सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए VIP टिकटों का वितरण अस्थायी रूप से रोक दिया जाता है। मंदिर प्रशासन ने बताया कि कई बार आधे घंटे या उससे अधिक समय तक टिकट बिक्री बंद रखनी पड़ती है ताकि परिसर में धक्का-मुक्की जैसी स्थिति न बने और सभी श्रद्धालु सुरक्षित तरीके से दर्शन कर सकें।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span>अवकाश के दिनों में रहती है सबसे ज्यादा भीड़</span></strong></h5>
<p style="text-align:justify;">शनिवार, रविवार, मुहर्रम सहित अन्य सार्वजनिक अवकाशों के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे दिनों में सामान्य दर्शन के साथ-साथ शीघ्र दर्शन टिकटों की मांग भी काफी बढ़ जाती है। हालांकि, अत्यधिक भीड़ होने पर प्रशासन को VIP टिकट जारी करना बंद करना पड़ता है ताकि मंदिर परिसर की क्षमता से अधिक लोगों का प्रवेश न हो। पहले छुट्टियों के दौरान भी टिकट जारी किए जाते थे, लेकिन बाद में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए इस व्यवस्था में बदलाव किया गया।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span>धार्मिक पर्यटन को मिल रहा बढ़ावा</span></strong></h5>
<p style="text-align:justify;">उज्जैन में धार्मिक पर्यटन लगातार बढ़ रहा है। श्री महाकाल लोक के निर्माण के बाद देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसका सकारात्मक प्रभाव काल भैरव, हरसिद्धि, मंगलनाथ, चिंतामन गणेश और अन्य प्रमुख मंदिरों में भी देखने को मिल रहा है। बेहतर व्यवस्थाओं और सुविधाओं के कारण श्रद्धालुओं का अनुभव पहले की तुलना में अधिक सहज हुआ है। इससे धार्मिक पर्यटन को भी नई गति मिली है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span>व्यवस्था और सुविधाओं पर रहेगा जोर</span></strong></h5>
<p style="text-align:justify;">मंदिर प्रबंधन का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता है। भविष्य में भी भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। साथ ही VIP दर्शन व्यवस्था का संचालन भी पूरी पारदर्शिता और निर्धारित नियमों के अनुसार जारी रहेगा। 45 दिनों में तीन करोड़ रुपये से अधिक की आय यह दर्शाती है कि काल भैरव मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था लगातार बढ़ रही है। मंदिर प्रशासन का मानना है कि आने वाले समय में धार्मिक पर्यटन और श्रद्धालुओं की संख्या में और वृद्धि होने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/the-early-darshan-vip-ticket-system-of-%E2%82%B9-500-started/article-57942</link>
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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 17:22:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राम मंदिर चढ़ावा मामले में सियासी हलचल, अयोध्या में कांग्रेस नेताओं पर पुलिस की कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर अयोध्या में राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल के प्रस्तावित कार्यक्रम से पहले पुलिस ने कई नेताओं पर एहतियाती कार्रवाई की, जबकि मामले की जांच भी लगातार आगे बढ़ रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/political-stir-in-ram-temple-offering-case-police-action-against/article-57413"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ayodhya-ram-mandir.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राम मंदिर में चढ़ावा प्रबंधन से जुड़े मामले को लेकर अयोध्या में मंगलवार को राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ अयोध्या पहुंचे थे। पार्टी की ओर से मंदिर ट्रस्ट कार्यालय के बाहर विरोध कार्यक्रम की घोषणा की गई थी। इससे पहले सोमवार देर रात पुलिस ने अजय राय को अयोध्या के एक होटल में रोक दिया। बाद में उन्हें कृषि विश्वविद्यालय के गेस्ट हाउस ले जाया गया। प्रशासन ने इसे एहतियाती कदम बताया। इसी दौरान कांग्रेस के कुछ अन्य नेताओं और जनप्रतिनिधियों को भी उनके आवास पर ही रोक दिया गया, ताकि कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो। मंगलवार दोपहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राम जन्मभूमि परिसर की ओर बढ़ने की कोशिश की। पुलिस ने मंदिर क्षेत्र से पहले टेढ़ी बाजार इलाके में बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक लिया। इस दौरान कुछ देर के लिए धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। हालात को देखते हुए पुलिस ने कुछ कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर वहां से हटा दिया। पूरे इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। अधिकारियों का कहना है कि संवेदनशील क्षेत्र होने के कारण सुरक्षा के सभी आवश्यक इंतजाम पहले से किए गए थे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उधर, अजय राय की पत्नी रीना राय ने वाराणसी से एक वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने अपने पति की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और कहा कि वह जल्द से जल्द उनसे मिलने की उम्मीद कर रही हैं। कांग्रेस की ओर से भी कहा गया कि पार्टी इस मुद्दे पर अपनी बात लोकतांत्रिक तरीके से रखेगी। वहीं प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और सभी फैसले उसी के अनुसार लिए गए। इस बीच चढ़ावा प्रबंधन से जुड़े मामले की जांच भी लगातार आगे बढ़ रही है। जांच के क्रम में राम मंदिर परिसर में लंबे समय से तैनात रेडियो ऑपरेशन अधिकारी (आरएमओ) अर्जुन देव का तबादला गोरखपुर कर दिया गया है। वह करीब 17 वर्षों से अयोध्या में तैनात थे। उनकी जिम्मेदारी मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी नेटवर्क की निगरानी से जुड़ी थी। बताया जाता है कि चढ़ावा गिनती वाले कक्ष सहित पूरे मंदिर परिसर में लगे लगभग 1600 सीसीटीवी कैमरों की निगरानी भी उनके कार्यक्षेत्र में शामिल थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> विशेष जांच दल (एसआईटी) इस पूरे मामले के विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है। जांच के दौरान संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी देखी जा रही है। अर्जुन देव की लंबे समय तक एक ही स्थान पर तैनाती को भी जांच के दायरे में शामिल किया गया है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे। प्रशासन की ओर से अभी तक इस पर कोई विस्तृत आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। जांच के सिलसिले में राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव रहे चंपत राय से भी पुलिस ने पूछताछ की। जानकारी के अनुसार उनसे यह जानने का प्रयास किया गया कि उन्हें मामले की जानकारी पहली बार कब मिली और उसके बाद क्या कदम उठाए गए। इससे पहले इस मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों की न्यायिक हिरासत अदालत ने 14 दिन के लिए बढ़ा दी थी। जांच एजेंसियां अब पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह मामला पहली बार 7 जून को सामने आया था। इसके बाद राज्य सरकार ने 13 जून को विशेष जांच दल का गठन किया। 25 जून को प्राथमिकी दर्ज की गई और मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसी दिन मंदिर ट्रस्ट से जुड़े दो पदाधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद से जांच लगातार जारी है और संबंधित दस्तावेजों व अन्य पहलुओं की भी समीक्षा की जा रही है। अयोध्या में सुरक्षा व्यवस्था पहले की तरह कड़ी रखी गई है और संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस बल की तैनाती जारी है। वहीं जांच एजेंसियां उपलब्ध साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर अपनी कार्रवाई आगे बढ़ा रही हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 14:17:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>108 कलशों के पवित्र जल से महाप्रभु का महाअभिषेक, खुले मंच से दिए भक्तों को दर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[देव स्नान पूर्णिमा पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा और सुदर्शन का वैदिक विधि-विधान से स्नान, अब 15 दिनों तक रहेंगे अनासार गृह में, इसके बाद होगा नवयौवन दर्शन और रथयात्रा का शुभारंभ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/mahaprabhus-mahaabhishek-with-the-holy-water-of-108-kalash-was/article-57321"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/jagannath-puri.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">सनातन आस्था के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजनों में शामिल देव स्नान पूर्णिमा का पर्व सोमवार को ओडिशा के श्रीजगन्नाथ धाम पुरी में पूरे श्रद्धा, उत्साह और वैदिक परंपराओं के साथ मनाया गया। इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई भगवान बलभद्र, बहन देवी सुभद्रा, सुदर्शन और मदनमोहन का 108 पवित्र कलशों के जल से महाअभिषेक किया गया। हर वर्ष ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन होने वाला यह दिव्य अनुष्ठान विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा महापर्व की औपचारिक शुरुआत माना जाता है। देश के अलग-अलग राज्यों के साथ विदेशों से भी हजारों श्रद्धालु इस दुर्लभ अवसर के साक्षी बनने पुरी पहुंचे। सुबह से ही श्रीमंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं और पूरा क्षेत्र शंखध्वनि, घंटानाद तथा वैदिक मंत्रों से गूंजता रहा। देव स्नान पूर्णिमा वर्ष का एकमात्र ऐसा दिन माना जाता है जब भगवान जगन्नाथ अपने भक्तों को खुले मंच से प्रत्यक्ष दर्शन देते हैं। सुबह मंगला आरती, अबकाश और अन्य दैनिक नीतियां पूरी होने के बाद पारंपरिक पहंडी विजय के माध्यम से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा और सुदर्शन को गर्भगृह से बाहर स्नान मंडप तक लाया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने जय जगन्नाथ के जयघोष के साथ महाप्रभु का स्वागत किया। पूरे मंदिर परिसर में आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला और श्रद्धालुओं में भगवान के दर्शन को लेकर विशेष उत्साह दिखाई दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd"><img alt="9k="></img></p>
<p class="isSelectedEnd">स्नान अनुष्ठान के लिए मंदिर परिसर स्थित पवित्र सुना कुआं यानी स्वर्ण कूप से जल निकाला गया। इस जल में चंदन, कपूर, अगरु, केसर, पुष्प और विभिन्न औषधीय जड़ी-बूटियों को मिलाकर उसे सुगंधित बनाया गया। इसके बाद 108 स्वर्ण कलशों में इस जल को भरकर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान का राजकीय स्नान कराया गया। परंपरा के अनुसार भगवान जगन्नाथ को 35 कलश, भगवान बलभद्र को 33, देवी सुभद्रा को 22 तथा सुदर्शन को 18 कलशों के पवित्र जल से स्नान कराया गया। यह अनुष्ठान श्रीजगन्नाथ परंपरा की सबसे प्राचीन और महत्वपूर्ण धार्मिक विधियों में से एक माना जाता है। महाअभिषेक के बाद गजपति महाराजा ने पारंपरिक 'छेरा पहंरा' की रस्म निभाई। इसके पश्चात भगवान जगन्नाथ और भगवान बलभद्र को दुर्लभ 'हाती बेश' अर्थात गजानन स्वरूप में सजाया गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान ने अपने परम भक्त गणपति भट्ट को दर्शन देने के लिए हाथी स्वरूप धारण किया था। तभी से देव स्नान पूर्णिमा पर भगवान को हाती बेश में सजाने की परंपरा चली आ रही है। इस दिव्य स्वरूप के दर्शन को अत्यंत शुभ माना जाता है और हर वर्ष लाखों श्रद्धालु विशेष रूप से इस अवसर पर पुरी पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार 108 कलशों के शीतल जल से स्नान कराने के बाद भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं। इसके बाद उन्हें अनासार गृह में विश्राम के लिए ले जाया जाता है, जहां अगले 15 दिनों तक आम श्रद्धालुओं के लिए प्रत्यक्ष दर्शन बंद रहते हैं। इस अवधि में केवल दैतापति सेवक भगवान की विशेष सेवा करते हैं और आयुर्वेदिक औषधियों से उनकी सेवा-सुश्रुषा की जाती है। इसे भगवान के विश्राम काल के रूप में देखा जाता है। अनासार अवधि पूरी होने के बाद नवयौवन दर्शन का आयोजन होता है, जिसमें भगवान नए स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसके तुरंत बाद विश्वविख्यात रथयात्रा का आयोजन किया जाता है, जिसका इंतजार देश-दुनिया के करोड़ों श्रद्धालु पूरे वर्ष करते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd"><img alt="9k="></img></p>
<p class="isSelectedEnd">स्कंद पुराण के अनुसार देव स्नान पूर्णिमा की परंपरा का संबंध राजा इंद्रद्युम्न से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ के विग्रहों की स्थापना के बाद राजा इंद्रद्युम्न ने पहली बार इस महाअभिषेक का आयोजन कराया था। तभी से ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन यह परंपरा लगातार निभाई जा रही है। धार्मिक दृष्टि से इस दिन को भगवान जगन्नाथ के प्राकट्य दिवस के रूप में भी माना जाता है। यही कारण है कि देव स्नान पूर्णिमा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि सनातन परंपरा, ओडिशा की सांस्कृतिक विरासत और भगवान जगन्नाथ के प्रति अटूट आस्था का प्रतीक बन चुकी है। इस वर्ष भी मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए थे। दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष प्रबंधन किया गया ताकि बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के महाप्रभु के दर्शन कर सकें। पूरे दिन भजन-कीर्तन, वैदिक अनुष्ठान और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होता रहा। श्रद्धालुओं का मानना है कि देव स्नान पूर्णिमा पर भगवान के खुले मंच से दर्शन करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। देव स्नान पूर्णिमा के साथ अब जगन्नाथ संस्कृति का सबसे महत्वपूर्ण चरण शुरू हो गया है। अगले 15 दिनों तक भगवान अनासार गृह में रहेंगे, जिसके बाद नवयौवन दर्शन होगा और फिर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा अपने भव्य रथों पर सवार होकर नगर भ्रमण के लिए निकलेंगे। विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, संस्कृति और परंपरा का ऐसा उत्सव है, जिसकी पहचान पूरी दुनिया में है। पुरी की यह परंपरा सदियों से सनातन संस्कृति की जीवंत विरासत को आगे बढ़ाती आ रही है और हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से जोड़ती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 16:57:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राम मंदिर चढ़ावा मामले में सुप्रीम कोर्ट की तत्काल सुनवाई से इनकार, छुट्टियों के बाद होगी सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की जांच के लिए सीबीआई जांच की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- इतनी जल्द सुनवाई की जरूरत क्या है?]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/supreme-court-refuses-to-give-immediate-hearing-in-ram-temple/article-57320"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ram-mandir-donation-case-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और हेरफेर के आरोपों से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। अदालत ने याचिकाकर्ता की जल्द सुनवाई की मांग स्वीकार नहीं की और स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई अब न्यायालय की छुट्टियां समाप्त होने के बाद नियमित प्रक्रिया के तहत होगी। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद फिलहाल इस मामले में किसी प्रकार की तत्काल न्यायिक कार्रवाई नहीं होगी। याचिका में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर मंदिर में आने वाले चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। याचिकाकर्ता का दावा है कि चढ़ावे की राशि और उससे जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड में कथित अनियमितताएं हुई हैं। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई कि मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की अगुवाई में गठित विशेष जांच दल से कराई जाए। साथ ही यह भी अनुरोध किया गया कि पूरी जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में तय समय सीमा के भीतर पूरी कराई जाए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से इस मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने की मांग की गई। उनका तर्क था कि मामला सार्वजनिक आस्था और करोड़ों श्रद्धालुओं से जुड़ा है, इसलिए इसमें देरी नहीं होनी चाहिए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील से सहमति नहीं जताई। अदालत ने याचिकाकर्ता से सवाल किया कि आखिर इस मामले में इतनी जल्द सुनवाई की आवश्यकता क्या है। अदालत की इस टिप्पणी के बाद तत्काल सुनवाई की मांग खारिज कर दी गई। सुप्रीम कोर्ट के इस रुख का मतलब यह नहीं है कि याचिका खारिज कर दी गई है। अदालत ने केवल तत्काल सुनवाई से इनकार किया है। अब यह मामला न्यायालय की नियमित प्रक्रिया के अनुसार सूचीबद्ध होने के बाद सुना जाएगा। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय आमतौर पर उन्हीं मामलों में तत्काल सुनवाई करता है, जहां किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों पर तत्काल प्रभाव पड़ रहा हो या स्थिति अत्यंत आपातकालीन हो। अन्य मामलों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत सूचीबद्ध किया जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">याचिका में यह भी मांग की गई है कि यदि प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही मंदिर में चढ़ावे के संग्रह, लेखा-जोखा और उपयोग की पूरी व्यवस्था की स्वतंत्र जांच कराई जाए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की पारदर्शिता संबंधी शंका न रहे। हालांकि इन आरोपों पर अभी तक अदालत की ओर से कोई टिप्पणी नहीं की गई है और न ही आरोपों की सत्यता पर कोई न्यायिक निष्कर्ष सामने आया है।मामले को लेकर राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से भी अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं आई है। कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद ही ट्रस्ट की ओर से अदालत में जवाब दाखिल किया जा सकता है। ऐसे मामलों में अदालत दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय करती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राम मंदिर देश की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक परियोजनाओं में से एक है और यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर निर्माण के बाद से चढ़ावे की राशि में लगातार वृद्धि हुई है। ऐसे में चढ़ावे के प्रबंधन और लेखा प्रणाली को लेकर समय-समय पर सार्वजनिक चर्चा भी होती रही है। हालांकि किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता का आरोप तभी कानूनी रूप से स्थापित माना जाएगा, जब जांच एजेंसियां या अदालत उसके संबंध में कोई निष्कर्ष दें। अदालत का तत्काल सुनवाई से इनकार करना किसी पक्ष के पक्ष या विपक्ष में फैसला नहीं माना जा सकता। यह केवल न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है। यदि अदालत को सुनवाई के दौरान प्रथम दृष्टया जांच की आवश्यकता महसूस होती है तो वह संबंधित एजेंसियों को निर्देश दे सकती है। फिलहाल ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया गया है। इस बीच याचिका को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोग मामले की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं, जबकि अन्य का कहना है कि बिना जांच पूरी हुए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में तथ्यों और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करना आवश्यक है ताकि किसी तरह की भ्रम की स्थिति पैदा न हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 16:57:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राममंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस का बड़ा एक्शन, 8 आरोपियों के घरों पर एक साथ छापेमारी</title>
                                    <description><![CDATA[सुबह 7 बजे पुलिस की आठ टीमों ने एक साथ दी दबिश, कई घरों पर मिले ताले, परिजनों और पड़ोसियों से पूछताछ; संपत्तियों और बैंक खातों की भी जांच तेज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/big-police-action-in-ram-mandir-offering-theft-case-simultaneous/article-57177"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ram-mandir-donation-theft.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अयोध्या में राममंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। रविवार सुबह पुलिस ने इस मामले में गिरफ्तार किए जा चुके आठ आरोपियों के घरों पर एक साथ छापेमारी कर कार्रवाई को और तेज कर दिया। सुबह करीब 7 बजे पुलिस की अलग-अलग आठ टीमों ने एक ही समय पर सभी आरोपियों के ठिकानों पर दबिश दी। कार्रवाई के दौरान कई घरों पर ताले लगे मिले, जबकि कुछ स्थानों पर पुलिस ने परिजनों और आसपास रहने वाले लोगों से पूछताछ कर जरूरी जानकारी जुटाई। अधिकारियों के अनुसार मामले से जुड़े आर्थिक पहलुओं और आरोपियों की संपत्तियों की भी गहन जांच की जा रही है। पुलिस की कार्रवाई के दौरान आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के घर पर शुरुआत में ताला लगा मिला। कुछ देर बाद उनकी मां मौके पर पहुंचीं और घर का ताला खोला। इसके बाद पुलिस ने घर के अंदर तलाशी ली और जरूरी दस्तावेजों की जांच की। इसी तरह टिन्नू के भतीजे और सह-आरोपी मनीष यादव के घर पर भी ताला लगा मिला। पुलिस टीम वहां भी कुछ समय तक मौजूद रही और आसपास के लोगों से पूछताछ की। तीसरे आरोपी सुभाष चंद्र श्रीवास्तव के घर पर भी कोई मौजूद नहीं था और बाहर ताला लगा मिला।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी अनुकल्प मिश्रा के घर पर भी लंबी कार्रवाई की। यहां बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। अधिकारियों ने घर के अंदर मौजूद दस्तावेजों की जांच की और खरीदी गई संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले। साथ ही बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन से संबंधित जानकारी भी जुटाई गई। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कहीं चोरी की रकम का इस्तेमाल संपत्ति खरीदने या अन्य निवेश में तो नहीं किया गया। छापेमारी अभियान में पुलिस के साथ राजस्व विभाग के अधिकारी, विशेष रूप से लेखपालों को भी शामिल किया गया। इनकी मदद से आरोपियों के नाम पर दर्ज जमीन, मकान और अन्य संपत्तियों का सत्यापन किया जा रहा है। यदि जांच में किसी प्रकार की अवैध संपत्ति या संदिग्ध निवेश सामने आता है तो संबंधित कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। पुलिस परिवार के सदस्यों के बयान भी दर्ज कर रही है ताकि मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की पुष्टि की जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह मामला 7 जून को सामने आया था, जब राममंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और चोरी की जानकारी सामने आई। मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। एसआईटी ने विभिन्न दस्तावेजों, रिकॉर्ड और संबंधित लोगों से पूछताछ के बाद 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को सौंपी। इसके बाद जांच में मिले तथ्यों के आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ाई गई। 25 जून को मंदिर ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर इस मामले में पहली एफआईआर दर्ज की गई। शिकायत में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू सहित आठ लोगों को नामजद किया गया। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। अगले दिन 26 जून को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत ने सभी आरोपियों को तीन दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। इसके बाद से लगातार मामले की जांच जारी है और पुलिस विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस पूरे घटनाक्रम के बीच मंदिर ट्रस्ट में भी बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिला। शनिवार को श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट ने महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे की पुष्टि की। हालांकि ट्रस्ट की ओर से इस्तीफों के कारणों को लेकर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई, लेकिन यह घटनाक्रम मामले की जांच के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस घटनाक्रम के बाद पूरे मामले पर लोगों की नजर बनी हुई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच के दौरान नए तथ्य सामने आते हैं या किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसे भी जांच के दायरे में लाया जाएगा। फिलहाल पुलिस दस्तावेजों, बैंक खातों, संपत्तियों और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड का मिलान कर रही है ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जा सके। अधिकारियों के अनुसार जांच निष्पक्ष और सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए आगे बढ़ाई जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 12:42:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सोमवार भस्म आरती में महाकाल का दिव्य श्रृंगार, पंचामृत पूजन के बाद दिए राजा स्वरूप दर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में तड़के भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल का जलाभिषेक, पंचामृत पूजन और रजत आभूषणों से विशेष श्रृंगार किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन किए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a38cce6c593f/article-56623"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mahakal-bhasma-aarti-(9).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में सोमवार तड़के आयोजित होने वाली भस्म आरती के दौरान श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। अलसुबह चार बजे मंदिर के पट खुलते ही गर्भगृह में धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम शुरू हुआ। मंदिर के पंडे-पुजारियों ने विधि-विधान के साथ भगवान महाकाल का पूजन-अर्चन किया और इसके बाद जलाभिषेक संपन्न कराया। भस्म आरती में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालु देर रात से ही मंदिर परिसर में कतारबद्ध होकर बाबा महाकाल के दर्शन की प्रतीक्षा कर रहे थे। सोमवार होने के कारण महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में अधिक रही। मंदिर के पट खुलने के बाद सबसे पहले गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का पूजन किया गया। इसके पश्चात भगवान महाकाल का पवित्र जल से अभिषेक किया गया। धार्मिक परंपराओं के अनुसार अभिषेक के दौरान वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया गया, जिससे मंदिर परिसर पूरी तरह आध्यात्मिक वातावरण में डूब गया। हर-हर महादेव और जय श्री महाकाल के जयघोष से पूरा परिसर गूंज उठा। जलाभिषेक के बाद भगवान महाकाल का पंचामृत से विशेष पूजन किया गया। दूध, दही, घी, शक्कर और विभिन्न फलों के रस से तैयार पंचामृत भगवान को अर्पित किया गया। सनातन परंपरा में पंचामृत पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इससे भगवान प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर अपनी विशेष कृपा बनाए रखते हैं। पूजन के दौरान पुजारियों ने वैदिक विधि से आराधना करते हुए भक्तों की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भस्म आरती से पहले प्रथम घंटाल बजाकर मंदिर में प्रवेश किया गया और मंत्रोच्चार के साथ भगवान का ध्यान किया गया। इसके बाद हरिओम का पवित्र जल अर्पित कर विशेष पूजा की गई। कपूर आरती के पश्चात भगवान महाकाल के मस्तक पर भांग, चंदन और त्रिपुंड अर्पित किया गया। यह श्रृंगार भगवान शिव के स्वरूप का प्रतीक माना जाता है और महाकाल मंदिर की परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस समय भगवान महाकाल का स्वरूप अत्यंत दिव्य और आकर्षक दिखाई देता है। श्रृंगार की अगली प्रक्रिया में भगवान महाकाल को रजत आभूषणों से अलंकृत किया गया। जटाधारी स्वरूप में विराजमान बाबा महाकाल को राजा स्वरूप में सजाया गया। रजत मुकुट, रजत की मुंडमाल, रुद्राक्ष की मालाएं और अन्य आभूषण अर्पित किए गए। इसके साथ ही सुगंधित पुष्पों से निर्मित विशेष मालाओं से भी भगवान का श्रृंगार किया गया। मोगरा और गुलाब के फूलों की सुगंध से पूरा गर्भगृह महक उठा। भगवान महाकाल का यह राजसी स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">श्रृंगार पूर्ण होने के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर भस्म अर्पित करने की प्रक्रिया शुरू की गई। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को पवित्र भस्म अर्पित की गई। भस्म आरती महाकाल मंदिर की सबसे प्राचीन और विशेष परंपराओं में से एक मानी जाती है। यह परंपरा केवल उज्जैन के महाकाल मंदिर में ही देखने को मिलती है, जिसके कारण देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि भस्म आरती को देखने और इसमें शामिल होने की श्रद्धालुओं में विशेष उत्सुकता रहती है। आरती के दौरान मंदिर परिसर में मौजूद भक्त पूरी श्रद्धा के साथ बाबा महाकाल के जयकारे लगाते नजर आए। कई श्रद्धालु इस पल को अपने जीवन का सौभाग्य मानते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भस्म आरती के पश्चात भगवान महाकाल को फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया। मंदिर प्रशासन के अनुसार प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन सोमवार और विशेष पर्वों पर यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है। सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर मंदिर प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए थे ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसकी धार्मिक मान्यता अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यहां प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती को देखने के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन को आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से विशेष स्थान प्राप्त है। सावन, महाशिवरात्रि और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है। सोमवार की भस्म आरती में भी यही आस्था और भक्ति देखने को मिली। पंचामृत पूजन, रजत आभूषणों से सुसज्जित राजसी श्रृंगार और भस्म आरती के दिव्य दृश्य ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। बाबा महाकाल के दर्शन कर भक्तों ने अपने परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की। मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्ति का माहौल बना रहा और श्रद्धालु महाकाल के जयघोष के साथ आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करते रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 14:07:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>पीतांबरा पीठ पहुंचे सीएम योगी, सुरक्षा के चलते डेढ़ घंटे रुके श्रद्धालु</title>
                                    <description><![CDATA[दतिया में मां बगलामुखी और वानखंडेश्वर महादेव के किए दर्शन, वीआईपी मूवमेंट के कारण आम श्रद्धालुओं की एंट्री बंद रहने पर लोगों ने जताई नाराजगी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a365bbe0ad50/article-56490"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/yogi-adityanath-datia-visit-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को मध्यप्रदेश के दतिया पहुंचे, जहां उन्होंने विश्व प्रसिद्ध पीतांबरा पीठ में मां बगलामुखी और वानखंडेश्वर महादेव के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री का यह दौरा कुछ ही मिनटों का था, लेकिन उनके आगमन को लेकर मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। सुरक्षा कारणों से करीब डेढ़ घंटे तक आम श्रद्धालुओं की एंट्री रोक दी गई, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोगों को मंदिर के बाहर इंतजार करना पड़ा। इस व्यवस्था को लेकर कुछ श्रद्धालुओं ने नाराजगी भी जताई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सुबह करीब 10:15 बजे विशेष विमान से दतिया हवाई पट्टी पहुंचे। वहां से उनका काफिला सीधे पीतांबरा पीठ के लिए रवाना हुआ। प्रशासन ने पहले से ही पूरे मंदिर परिसर को सुरक्षा घेरे में ले लिया था। मंदिर के सभी प्रमुख प्रवेश द्वारों पर पुलिस बल तैनात किया गया था और वीआईपी मूवमेंट के दौरान आम लोगों की आवाजाही सीमित कर दी गई थी। अधिकारियों के अनुसार सुरक्षा एजेंसियों की सलाह पर यह व्यवस्था लागू की गई थी। पीतांबरा पीठ देश के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक माना जाता है और यहां रोजाना हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। शनिवार होने के कारण भी सुबह से मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की अच्छी-खासी भीड़ मौजूद थी। कई लोग दूर-दराज के शहरों और राज्यों से दर्शन करने पहुंचे थे। लेकिन मुख्यमंत्री के आगमन की सूचना के बाद मंदिर परिसर में प्रवेश अस्थायी रूप से रोक दिया गया। इससे श्रद्धालुओं को बाहर खड़े होकर इंतजार करना पड़ा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंदिर पहुंचकर विधि-विधान के साथ मां बगलामुखी की पूजा की। इसके बाद उन्होंने वानखंडेश्वर महादेव मंदिर में भी दर्शन किए। बताया जा रहा है कि उन्होंने प्रदेश और देश की सुख-समृद्धि, शांति और विकास की कामना की। मंदिर में पूजा-अर्चना के दौरान पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराया। पूरा कार्यक्रम बेहद सीमित समय में संपन्न हुआ और मुख्यमंत्री करीब 15 मिनट तक मंदिर परिसर में रहे। दर्शन कार्यक्रम के दौरान मंदिर के बाहर इंतजार कर रहे श्रद्धालुओं में कुछ लोगों ने व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई। ग्वालियर से आए एक श्रद्धालु ने बताया कि वह सुबह जल्दी मंदिर पहुंच गए थे ताकि भीड़ से पहले दर्शन कर सकें, लेकिन उन्हें प्रवेश नहीं मिला। उन्होंने कहा कि सुरक्षा जरूरी है, लेकिन श्रद्धालुओं की सुविधा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। इसी तरह कई अन्य लोगों ने भी लंबे इंतजार को लेकर असंतोष व्यक्त किया। एक महिला श्रद्धालु ने बताया कि वह तेज धूप और गर्मी से बचने के लिए सुबह के समय ही मंदिर पहुंची थीं। लेकिन प्रवेश बंद होने के कारण उन्हें बाहर ही इंतजार करना पड़ा। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों और महिलाओं के लिए इस तरह की स्थिति कठिन हो जाती है। हालांकि सुरक्षा व्यवस्था हटने के बाद सभी श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश दे दिया गया और दर्शन की प्रक्रिया सामान्य रूप से शुरू हो गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मंदिर प्रशासन का कहना है कि मुख्यमंत्री स्तर के दौरे में सुरक्षा एजेंसियों के दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होता है। प्रशासन के अनुसार श्रद्धालुओं को होने वाली असुविधा को कम करने की कोशिश की गई थी, लेकिन सुरक्षा कारणों से कुछ समय के लिए प्रवेश रोकना जरूरी था। अधिकारियों ने बताया कि पूरे कार्यक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति सामान्य बनी रही और किसी प्रकार की अव्यवस्था नहीं हुई। मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर दतिया प्रशासन कई दिनों से तैयारियों में जुटा हुआ था। हवाई पट्टी से लेकर मंदिर परिसर तक सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे। मार्गों पर पुलिस बल तैनात किया गया था और संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त निगरानी रखी गई। वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी लगातार व्यवस्थाओं की मॉनिटरिंग कर रहे थे। पीतांबरा पीठ में दर्शन के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सड़क मार्ग से झांसी के लिए रवाना हो गए। झांसी में उनका करीब 20 घंटे का कार्यक्रम निर्धारित है। वहां वे विभिन्न विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रमों में भाग लेंगे। बताया जा रहा है कि करीब 1500 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगात झांसी क्षेत्र को मिलने वाली है। इसके अलावा मुख्यमंत्री अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक भी करेंगे और कई प्रशासनिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दतिया और झांसी दोनों जिलों में मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में रहा। सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ यातायात प्रबंधन और अन्य व्यवस्थाओं पर भी विशेष ध्यान दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि दौरे को सफल बनाने के लिए सभी विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया गया था। गौरतलब है कि पीतांबरा पीठ लंबे समय से देशभर के राजनेताओं, उद्योगपतियों और श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य सहित कई वरिष्ठ नेता समय-समय पर यहां दर्शन के लिए पहुंचते रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां बगलामुखी की पूजा विशेष सिद्धि और सफलता प्रदान करने वाली मानी जाती है, जिसके कारण देशभर से लोग यहां आते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह दौरा धार्मिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 15:46:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रविवार भस्म आरती में राजा स्वरूप सजे बाबा महाकाल, श्रद्धालुओं ने किए दिव्य दर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[श्री महाकालेश्वर मंदिर में तड़के भस्म आरती के दौरान पंचामृत अभिषेक, भांग, चंदन और बिल्वपत्र अर्पित कर किया गया विशेष श्रृंगार, बड़ी संख्या में पहुंचे भक्त]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/devotees-had-divine-darshan-of-baba-mahakal-dressed-as-king/article-55874"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mahakal-bhasma-aarti-(7).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में रविवार तड़के आयोजित भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का दिव्य और भव्य श्रृंगार किया गया। सुबह करीब 4 बजे मंदिर के पट खुलते ही धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हुई। मंदिर के पंडे-पुजारियों ने सबसे पहले गर्भगृह में विराजित सभी देवी-देवताओं का विधि-विधान से पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और दूध, दही, घी, शक्कर तथा फलों के रस से तैयार पंचामृत से विशेष अभिषेक संपन्न कराया गया। तड़के से ही मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं और भस्म आरती में शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह नजर आया।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रारंभिक धार्मिक विधियों के बाद भगवान महाकाल का आकर्षक श्रृंगार किया गया। बाबा महाकाल को त्रिशूल, त्रिपुंड और डमरू से अलंकृत किया गया। परंपरा के अनुसार उन्हें भांग अर्पित की गई तथा चंदन और बिल्वपत्र से विशेष पूजन किया गया। गर्भगृह में वैदिक मंत्रोच्चार और शंखनाद के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। मंदिर में मौजूद श्रद्धालु बाबा महाकाल के इस अद्भुत स्वरूप के दर्शन कर भावविभोर दिखाई दिए। ऐसा कहा जाता है कि भस्म आरती के समय बाबा महाकाल के दर्शन का विशेष धार्मिक महत्व होता है और दूर-दूर से श्रद्धालु इस अलौकिक अनुष्ठान को देखने के लिए उज्जैन पहुंचते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">अभिषेक और श्रृंगार के बाद भगवान महाकाल को हरि ओम का जल अर्पित किया गया तथा कपूर आरती उतारी गई। आरती के दौरान मंदिर परिसर जय महाकाल के जयघोष से गूंज उठा। श्रृंगार पूर्ण होने के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर भस्म अर्पित करने की प्रक्रिया शुरू की गई। यह भस्म आरती मंदिर की सबसे प्राचीन और विशिष्ट परंपराओं में शामिल है, जिसे देखने के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। रविवार होने के कारण भक्तों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में अधिक रही।</p>
<p class="isSelectedEnd">भस्म अर्पित किए जाने के बाद भगवान महाकाल का एक और दिव्य स्वरूप भक्तों के सामने प्रकट हुआ। उन्हें रजत शेषनाग मुकुट, रजत मुंडमाला और रुद्राक्ष की मालाओं से सजाया गया। इसके साथ ही मोगरा और गुलाब के सुगंधित पुष्पों की मालाएं अर्पित की गईं। गर्भगृह में फूलों की सुगंध और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच आध्यात्मिक वातावरण का विशेष अनुभव हुआ। श्रृंगार के बाद भगवान महाकाल को फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया तथा मंदिर परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना का क्रम आगे बढ़ाया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">मंदिर प्रशासन के अनुसार भस्म आरती में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे थे। कई श्रद्धालु देर रात से ही मंदिर परिसर के बाहर कतार में खड़े दिखाई दिए। भस्म आरती के दौरान सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर भी विशेष इंतजाम किए गए थे ताकि दर्शन व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो सके। श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की।</p>
<p class="isSelectedEnd">महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भी परंपरा के अनुसार भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि महाकाल मंदिर की भस्म आरती देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी विशेष पहचान रखती है। इस अनूठी परंपरा को देखने और बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।</p>
<p>रविवार की भस्म आरती में भी श्रद्धा, आस्था और भक्ति का ऐसा ही संगम देखने को मिला। मंदिर परिसर में सुबह से ही धार्मिक वातावरण बना रहा और बाबा महाकाल के जयघोष लगातार गूंजते रहे। दिव्य श्रृंगार, विशेष पूजा-अर्चना और भस्म आरती के दर्शन कर श्रद्धालु स्वयं को धन्य महसूस करते नजर आए। धार्मिक नगरी उज्जैन में एक बार फिर बाबा महाकाल की भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद हर श्रद्धालु को आध्यात्मिक अनुभूति से भर दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 12:12:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>महाकाल मंदिर में भव्य भस्म आरती, राजा स्वरूप में हुए बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में तड़के 4 बजे खुलने के साथ शुरू हुई भस्म आरती, हजारों श्रद्धालुओं ने किए बाबा महाकाल के दर्शन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/grand-bhasma-aarti-in-mahakal-temple-divine-darshan-of-baba/article-55255"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mahakal-bhasma-aarti-(6).jpg" alt=""></a><br /><p>उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार तड़के आयोजित भस्म आरती के दौरान एक बार फिर आस्था और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह करीब चार बजे मंदिर के पट खुलते ही गर्भगृह में धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हुई और बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने पूरे परिसर को भक्तिमय बना दिया। ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए देर रात से ही कतारें लगनी शुरू हो गई थीं और जैसे ही मंदिर के द्वार खुले, श्रद्धालुओं में उत्साह साफ दिखाई दिया।</p>
<p>मंदिर परंपरा के अनुसार सबसे पहले गर्भगृह में विराजमान सभी देव प्रतिमाओं का पूजन किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक संपन्न हुआ। मंदिर के पुजारियों ने विधि-विधान से भगवान को जल अर्पित किया और फिर दूध, दही, घी, शक्कर तथा विभिन्न फलों के रस से तैयार पंचामृत से अभिषेक किया गया। पूरे गर्भगृह में वैदिक मंत्रों की गूंज सुनाई दे रही थी। धार्मिक वातावरण के बीच यह अनुष्ठान लंबे समय तक चलता रहा और श्रद्धालु बड़ी श्रद्धा के साथ इस दृश्य को निहारते रहे।</p>
<p>अभिषेक के बाद बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। जटाधारी स्वरूप में विराजमान भगवान महाकाल को चंदन का तिलक लगाया गया और विविध आभूषण अर्पित किए गए। राजा स्वरूप में किए गए इस श्रृंगार को देखने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्सुकता रही। मंदिर प्रशासन के अनुसार प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती में श्रृंगार का विशेष महत्व माना जाता है और इसी परंपरा का पालन सोमवार को भी किया गया। गर्भगृह में मौजूद पुजारी और सेवक पूरे विधि-विधान के साथ अनुष्ठानों को संपन्न करते रहे।</p>
<p>भस्म आरती की शुरुआत प्रथम घंटा बजाकर की गई। मंदिर परिसर में घंटों की ध्वनि और मंत्रोच्चार के बीच हरिओम का जल अर्पित किया गया। इसके बाद कपूर आरती संपन्न हुई, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह आरती भगवान महाकाल के विशेष पूजन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। आरती के दौरान श्रद्धालु लगातार भगवान के जयकारे लगाते रहे और पूरा परिसर शिवमय वातावरण में डूबा दिखाई दिया।</p>
<p>विशेष श्रृंगार के अगले चरण में भगवान महाकाल के मस्तक पर भांग, चंदन और त्रिपुंड अर्पित किया गया। इसके बाद श्रृंगार पूर्ण होने पर ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर पवित्र भस्म अर्पित की गई। यह क्षण भस्म आरती का सबसे प्रमुख और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी विश्वास के कारण देशभर से श्रद्धालु भस्म आरती में शामिल होने उज्जैन पहुंचते हैं।</p>
<p>भस्म अर्पित किए जाने के बाद भगवान महाकाल को रजत शेषनाग मुकुट पहनाया गया। साथ ही रजत मुंडमाला, रुद्राक्ष की मालाएं और विभिन्न प्रकार के आभूषण अर्पित किए गए। इसके अलावा मोगरा और गुलाब के सुगंधित फूलों से बाबा महाकाल का आकर्षक श्रृंगार किया गया। फूलों की खुशबू से पूरा गर्भगृह और मंदिर परिसर महक उठा। दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालु इस दिव्य स्वरूप को देखकर भावविभोर नजर आए। कई श्रद्धालुओं ने इसे जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बताया।</p>
<p>पूजन और श्रृंगार के बाद भगवान महाकाल को फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया। मंदिर परंपराओं के अनुसार प्रतिदिन अलग-अलग प्रकार के भोग लगाए जाते हैं और सोमवार के दिन विशेष श्रद्धा के साथ यह प्रक्रिया पूरी की गई। पुजारियों ने पूरे विधि-विधान से भोग अर्पित किया और भगवान से विश्व कल्याण की प्रार्थना की। इस दौरान मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालु भी पूजा-अर्चना में शामिल रहे।</p>
<p>महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भी भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और महाकाल मंदिर की भस्म आरती का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं का पालन करते हुए अखाड़े के संतों ने भी इस अनुष्ठान में भाग लिया। मंदिर प्रशासन के अनुसार भस्म आरती के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए गए थे ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।</p>
<p>सोमवार को आयोजित इस भव्य भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त किया। सुबह के समय मंदिर परिसर में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। उज्जैन में स्थित बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती देश और दुनिया के श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। सोमवार की यह आरती भी उसी आस्था और परंपरा का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई, जहां हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर अपने जीवन को धन्य माना।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म</category>
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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 12:59:18 +0530</pubDate>
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