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                <title>Ebola Virus - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Ebola Virus RSS Feed</description>
                
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                <title>इबोला को लेकर छत्तीसगढ़ अलर्ट, क्वारंटाइन किए गए लोगों में नहीं मिले संक्रमण के लक्षण</title>
                                    <description><![CDATA[स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा- प्रदेश में सभी स्तरों पर तैयारियां पूरी, एहतियातन तीन विदेशी नागरिकों को 21 दिन के लिए आइसोलेशन में रखा गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/chhattisgarh-alert-regarding-ebola-no-symptoms-of-infection-found-in/article-55079"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ebola-virus-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">छत्तीसगढ़ में इबोला वायरस संक्रमण की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। राज्य सरकार का कहना है कि फिलहाल घबराने जैसी कोई स्थिति नहीं है, लेकिन संभावित खतरे को ध्यान में रखते हुए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि प्रदेश में पिछले एक महीने से इबोला वायरस को लेकर लगातार निगरानी रखी जा रही है और स्वास्थ्य तंत्र को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रखा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन लोगों को क्वारंटाइन और आइसोलेशन में रखा गया है, उनमें अब तक संक्रमण के कोई लक्षण नहीं पाए गए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि अफ्रीकी देशों में इबोला संक्रमण के कुछ मामले सामने आने के बाद राज्य सरकार ने एहतियातन कदम उठाने शुरू कर दिए थे। दुर्ग जिले में तीन विदेशी नागरिकों को निगरानी में रखा गया है। इनमें कांगो, इथियोपिया और एक अन्य अफ्रीकी देश का नागरिक शामिल बताया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार ये लोग हाल ही में ऐसे क्षेत्रों से आए थे जहां संक्रमण को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। इसी वजह से स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें 21 दिनों के लिए क्वारंटाइन किया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">मंत्री ने कहा कि अब तक हुई चिकित्सकीय जांच में किसी भी व्यक्ति में इबोला संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। न तो बुखार, न रक्तस्राव और न ही अन्य कोई गंभीर लक्षण सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि यह पूरी कार्रवाई केवल सुरक्षा और सावधानी के तौर पर की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार इन लोगों की निगरानी कर रही हैं और समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी प्रकार के लक्षण दिखाई देते हैं तो तत्काल आवश्यक चिकित्सा प्रोटोकॉल लागू किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">इबोला वायरस को दुनिया के सबसे खतरनाक संक्रमणों में गिना जाता है। यह संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क में आने से फैल सकता है। इस बीमारी में तेज बुखार, कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी और गंभीर मामलों में आंतरिक रक्तस्राव जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। यही कारण है कि किसी भी संभावित मामले को लेकर स्वास्थ्य एजेंसियां अतिरिक्त सावधानी बरतती हैं। छत्तीसगढ़ सरकार का कहना है कि राज्य के सभी प्रमुख अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और जिला स्वास्थ्य केंद्रों को अलर्ट पर रखा गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">स्वास्थ्य विभाग ने एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और अन्य प्रवेश बिंदुओं पर भी निगरानी व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीमों को तैयार रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। राज्य के स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल प्रदेश में इबोला संक्रमण का कोई पुष्ट मामला नहीं है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए सावधानी बरतना जरूरी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस बीच स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने राज्य सरकार की नई सीएम हेल्पलाइन व्यवस्था को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह पहल आम नागरिकों और प्रशासन के बीच संवाद को मजबूत बनाने का काम करेगी। कई बार लोगों की शिकायतें और समस्याएं समय पर संबंधित अधिकारियों तक नहीं पहुंच पाती हैं, जिससे समाधान में देरी होती है। नई हेल्पलाइन व्यवस्था के माध्यम से लोग सीधे अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे और उनकी निगरानी भी प्रभावी ढंग से की जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">मंत्री के अनुसार सरकार चाहती है कि नागरिकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अनावश्यक दौड़भाग न करनी पड़े। सीएम हेल्पलाइन के जरिए शिकायतों का रिकॉर्ड तैयार होगा और उनके निपटारे की प्रक्रिया पर लगातार नजर रखी जाएगी। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और लोगों का शासन व्यवस्था पर विश्वास भी मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल शिकायत दर्ज करना नहीं बल्कि उसका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना है। इबोला जैसे संक्रमणों को लेकर जागरूकता और सतर्कता सबसे बड़ा बचाव है। लोगों को अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करना चाहिए। फिलहाल छत्तीसगढ़ में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है और स्वास्थ्य विभाग लगातार निगरानी बनाए हुए है। राज्य सरकार इबोला संक्रमण की आशंका को लेकर पूरी तरह सक्रिय नजर आ रही है। क्वारंटाइन किए गए लोगों में संक्रमण के लक्षण नहीं मिलने से राहत जरूर मिली है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग किसी भी तरह की लापरवाही से बचना चाहता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 14:11:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>इबोला संक्रमण को लेकर छत्तीसगढ़ अलर्ट, रायपुर एयरपोर्ट पर बढ़ाई गई निगरानी</title>
                                    <description><![CDATA[अफ्रीकी देशों में बढ़ते मामलों के बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क, यात्रियों की स्क्रीनिंग और ट्रैवल हिस्ट्री जांच शुरू]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/chhattisgarh-alert-regarding-ebola-infection-increased-surveillance-at-raipur-airport/article-54456"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/ebola-virus.jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr">वैश्विक स्तर पर इबोला वायरस को लेकर बढ़ती चिंता के बीच छत्तीसगढ़ में भी स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है। राजधानी रायपुर स्थित स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट पर यात्रियों की स्क्रीनिंग शुरू कर दी गई है। एयरपोर्ट पर अलग से जांच काउंटर बनाए गए हैं, जहां बाहर से आने वाले यात्रियों की थर्मल स्कैनिंग की जा रही है। साथ ही उनकी ट्रैवल हिस्ट्री भी खंगाली जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल राज्य में इबोला संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन एहतियात के तौर पर सतर्कता बढ़ा दी गई है।</p>
<p dir="ltr">बताया जा रहा है कि एयरपोर्ट पर स्वास्थ्य विभाग की टीम सुबह से ही तैनात है। खासकर उन यात्रियों पर नजर रखी जा रही है जो अंतरराष्ट्रीय यात्रा करके लौटे हैं या हाल के दिनों में अफ्रीकी देशों से होकर आए हैं। अधिकारियों के अनुसार यदि किसी यात्री में बुखार, कमजोरी, उल्टी या अन्य संदिग्ध लक्षण दिखाई देते हैं तो उसे तुरंत अलग रखने और मेडिकल जांच कराने की व्यवस्था की गई है। इसके लिए एयरपोर्ट परिसर में ही प्राथमिक आइसोलेशन की सुविधा भी तैयार रखी गई है।</p>
<p dir="ltr">स्वास्थ्य विभाग ने रायपुर एयरपोर्ट प्रबंधन के साथ बैठक कर विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। एयरपोर्ट के भीतर मेडिकल टीम, हेल्प डेस्क और निगरानी काउंटर सक्रिय किए गए हैं। सूत्रों ने बताया कि राज्य सरकार नहीं चाहती कि किसी भी तरह की लापरवाही हो, क्योंकि इबोला वायरस बेहद खतरनाक माना जाता है और इसके संक्रमण की दर भी काफी गंभीर रहती है। इसी वजह से हर यात्री की सामान्य जांच के साथ उसकी हाल की यात्रा संबंधी जानकारी भी दर्ज की जा रही है।</p>
<p dir="ltr">दरअसल, अफ्रीकी देशों खासकर कांगो और युगांडा में इबोला संक्रमण के बढ़ते मामलों के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO ने चिंता जताई है। इसके बाद कई देशों ने अपने एयरपोर्ट और सीमावर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। भारत सरकार ने भी राज्यों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। हालांकि अब तक देश में इबोला का कोई मरीज नहीं मिला है, लेकिन स्वास्थ्य एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे को लेकर तैयारी में जुटी हैं।</p>
<p dir="ltr">रायपुर एयरपोर्ट पर यात्रियों की स्क्रीनिंग शुरू होने के बाद लोगों के बीच भी चर्चा का माहौल है। कुछ यात्रियों ने इसे जरूरी कदम बताया, जबकि कई लोग जांच प्रक्रिया को लेकर सवाल पूछते नजर आए। एयरपोर्ट पर मौजूद स्वास्थ्यकर्मी यात्रियों को वायरस के लक्षण और बचाव संबंधी जानकारी भी दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि विदेश यात्रा से लौटने वाले लोगों को कुछ दिनों तक अपनी सेहत पर नजर रखने की सलाह दी गई है।</p>
<p dir="ltr">केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने हाल ही में कहा था कि देश में फिलहाल इबोला संक्रमण का कोई मामला नहीं है, लेकिन केंद्र सरकार पूरी तरह सतर्क है। एयरपोर्ट, बंदरगाह और सीमावर्ती इलाकों में स्क्रीनिंग बढ़ा दी गई है। साथ ही ICMR और अन्य स्वास्थ्य एजेंसियों को सर्विलांस और टेस्टिंग की तैयारी बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। राज्यों से भी कहा गया है कि संदिग्ध मामलों की जानकारी तुरंत साझा की जाए।</p>
<p dir="ltr">इबोला वायरस संक्रमित व्यक्ति के शरीर से निकलने वाले तरल पदार्थों के संपर्क में आने से फैलता है। इसके शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे हो सकते हैं, जिससे पहचान में दिक्कत भी आती है। यही वजह है कि स्वास्थ्य विभाग शुरुआती स्तर पर ही सतर्कता बरत रहा है। घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी बेहद जरूरी है। अस्पतालों को भी अलर्ट रहने के लिए कहा गया है।</p>
<p dir="ltr">छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि किसी भी संदिग्ध मरीज की जानकारी तुरंत राज्य स्तर पर भेजी जाए। रायपुर के अलावा अन्य बड़े शहरों में भी निगरानी बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक आने वाले दिनों में रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी जागरूकता अभियान चलाया जा सकता है। राज्य में स्थिति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं है। एयरपोर्ट पर जांच और निगरानी का यह अभियान अगले आदेश तक जारी रहेगा। अधिकारियों का कह</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 11:40:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कांगो में इबोला का कहर: 80 मौतें हुईं, 246 संदिग्ध केस से मचा हड़कंप, WHO ने घोषित की ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी</title>
                                    <description><![CDATA[कांगो में इबोला से 80 मौतें और 246 संदिग्ध केस सामने आए। WHO ने ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर पड़ोसी देशों में अलर्ट जारी किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/ebola-wreaks-havoc-in-congo-80-deaths-246-suspected-cases/article-53565"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/who-emergency-africa-congo-ebola-virus.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कांगो के इटुरी प्रांत में इबोला वायरस ने एक बार फिर हालात को बेहद गंभीर बना दिया है। अब तक यहां 80 लोगों की जान जा चुकी है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">और 246 संदिग्ध मामलों की पुष्टि या जांच चल रही है। इस स्थिति को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (</span>WHO) <span lang="hi" xml:lang="hi">ने इसे वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि इसे अभी महामारी की श्रेणी में नहीं रखा गया है। कांगो में इबोला के बढ़ते मामलों के कारण आस-पास के कई अफ्रीकी देशों में चौकसी बढ़ा दी गई है और स्वास्थ्य एजेंसियां लगातार इसकी निगरानी कर रही हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कांगो के स्वास्थ्य मंत्री सैमुअल-रोजर कंबा के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">पहला मामला एक नर्स का था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने 24 अप्रैल को जान गंवाई। उसके बाद जब जांच की गई तो इबोला के बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के कम से कम 8 मामलों की पुष्टि हुई। संक्रमण अब इटुरी प्रांत के बुनीया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रवामपारा और मोंगवालू जैसे इलाकों में फैल चुका है। यहाँ की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि यह इलाका पहले भी कई स्वास्थ्य संकटों का सामना कर चुका है। विशेषज्ञ बताते हैं कि इस बार जो स्ट्रेन पाया गया है वह बुंडीबुग्यो है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि कांगो में पहले ज्यादातर मामले जायरे स्ट्रेन से जुड़े रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे इलाज और वैक्सीन पर नई चुनौतियाँ पैदा हो सकती हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बुनीया शहर से आ रही रिपोर्टों में हालात की गंभीरता का पता चलता है। वहां के स्थानीय लोगों का कहना है कि हाल के दिनों में लगातार मौतों की खबरें आ रही हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">और कई परिवारों में डर का माहौल है। एक स्थानीय निवासी ने बताया कि कई बार एक ही दिन में दो या तीन अंतिम संस्कार भी करने पड़ रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे स्थिति का गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। फिर भी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बाजार और सार्वजनिक जगहों पर गतिविधियां पूरी तरह से बंद नहीं हुई हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन लोगों में सतर्कता काफी स्पष्ट है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">पड़ोसी देशों में भी अलर्ट जारी कर दिया गया है। युगांडा में एक इबोला मामला सामने आया है जिसमें संक्रमित मरीज की 14 मई को कंपाला के अस्पताल में मौत हो गई थी। उसके बाद शव को कांगो वापस भेजा गया। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">युगांडा ने अब तक किसी नए स्थानीय संक्रमण की पुष्टि नहीं की है। अफ्रीका की पब्लिक हेल्थ एजेंसी ने युगांडा और दक्षिण सूडान में संक्रमण फैलने की आशंका जताई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि केन्या ने भी अपने सीमा क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। सरकार ने एंट्री पॉइंट्स पर स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य टीमों को तैनात कर दिया है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इबोला वायरस का इतिहास अफ्रीका में काफी पुराना है। यह पहली बार 1976 में सामने आया था और इसका नाम इबोला नदी पर रखा गया था। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थ</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे खून</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उल्टी या अन्य स्राव के संपर्क में आने से फैलता है। आंकड़ों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इबोला से मृत्यु दर 25% से 90% तक देखी जा चुकी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे यह बेहद घातक बन जाता है। 2014 से 2016 के बीच पश्चिम अफ्रीका में इबोला का सबसे बड़ा प्रकोप हुआ था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें 11,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हालांकि पिछले कुछ सालों में वैक्सीन और इलाज के विकास से स्थिति में काफी सुधार हुआ है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन नए स्ट्रेन के सामने आने पर चुनौतियाँ फिर से बढ़ जाती हैं। इसी कारण से इस नए बुंडीबुग्यो स्ट्रेन ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। </span>WHO <span lang="hi" xml:lang="hi">और स्थानीय एजेंसियां अब संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए तेजी से निगरानी और रोकथाम के उपायों पर काम कर रही हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 10:43:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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