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                <title>Defence Cooperation - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Defence Cooperation RSS Feed</description>
                
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                <title>भारत-ऑस्ट्रेलिया यूरेनियम समझौते पर मुहर, स्वच्छ ऊर्जा और गगनयान मिशन को मिलेगी नई ताकत</title>
                                    <description><![CDATA[पीएम मोदी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज की बैठक में रक्षा, ऊर्जा, स्पेस, क्रिटिकल मिनरल्स और नई तकनीकों पर कई अहम समझौते हुए, भारत को मिलेगा ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/india-australia-uranium-agreement-approved-clean-energy-and-gaganyaan-mission-will/article-58288"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/india-australia-uranium-deal.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भारत और ऑस्ट्रेलिया के रिश्तों में एक और बड़ा अध्याय जुड़ गया है। मेलबर्न में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक के बाद दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण समझौतों की घोषणा की। सबसे अहम फैसला भारत को ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम की आपूर्ति का रहा, जिसे भारत के स्वच्छ ऊर्जा कार्यक्रम और भविष्य की परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इसके अलावा रक्षा सहयोग, व्यापार, स्पेस टेक्नोलॉजी, क्रिटिकल मिनरल्स, साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में भी दोनों देशों ने साझेदारी को नई दिशा देने का फैसला किया। संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया से मिलने वाला यूरेनियम भारत के स्वच्छ ऊर्जा मिशन को मजबूती देगा। उन्होंने बताया कि दोनों देश मिलकर क्रिटिकल मिनरल्स कॉरिडोर विकसित करेंगे, जिससे भविष्य की हाई-टेक इंडस्ट्री और ऊर्जा क्षेत्र को लाभ मिलेगा। प्रधानमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि ऑस्ट्रेलिया के कोकोस (कीलिंग) द्वीप पर भारत के लिए स्पेस ट्रैकिंग टर्मिनल स्थापित किया जाएगा। इससे भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो के महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन को तकनीकी सहायता और बेहतर ट्रैकिंग सुविधा मिल सकेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">यह समझौता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत अब तक केवल चार देशों से यूरेनियम का आयात करता था। ऑस्ट्रेलिया इस सूची में शामिल होने वाला पांचवां देश बन गया है। दुनिया के सबसे बड़े यूरेनियम भंडार वाले देशों में ऑस्ट्रेलिया का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। ऐसे में भारत को लंबे समय तक स्थिर और भरोसेमंद आपूर्ति मिलने की संभावना बढ़ गई है।यूरेनियम एक ऐसा खनिज है जिसका उपयोग मुख्य रूप से परमाणु ऊर्जा उत्पादन में किया जाता है। परमाणु बिजली संयंत्रों में यूरेनियम ईंधन के रूप में इस्तेमाल होता है, जिससे बड़ी मात्रा में बिजली पैदा की जाती है। इसके अलावा उच्च स्तर तक संवर्धित यूरेनियम का उपयोग परमाणु हथियारों के निर्माण में भी किया जाता है। हालांकि भारत द्वारा आयात किया जाने वाला यूरेनियम मुख्य रूप से असैन्य यानी बिजली उत्पादन और ऊर्जा जरूरतों के लिए उपयोग किया जाएगा। भारत पहले से ही अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के नियमों के तहत असैन्य परमाणु कार्यक्रम चला रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत लगातार अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए स्वच्छ और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर जोर दे रहा है। कोयले और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। देश में कई नए परमाणु बिजली संयंत्रों की योजना पर काम चल रहा है। इन परियोजनाओं के लिए लगातार और पर्याप्त मात्रा में यूरेनियम की आवश्यकता होगी। यही कारण है कि भारत अलग-अलग देशों के साथ दीर्घकालिक आपूर्ति समझौते कर रहा है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया के रिश्तों की तुलना क्रिकेट से करते हुए कहा कि दोनों देशों का संबंध समय के साथ और मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं की मुलाकातें क्रिकेट की तरह होती हैं। एजेंडा वनडे मैच की तरह स्पष्ट होता है, फैसले टी-20 की तरह तेजी से लिए जाते हैं और दोनों देशों की साझेदारी टेस्ट क्रिकेट की तरह लंबी और मजबूत है। उनके इस बयान को दोनों देशों के बीच बढ़ते भरोसे और रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद के मुद्दे पर भी दोनों देशों की साझा सोच का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों आतंकवाद को पूरी मानवता के लिए गंभीर खतरा मानते हैं और इस चुनौती से निपटने के लिए आपसी सहयोग लगातार मजबूत किया जा रहा है। रक्षा और सुरक्षा सहयोग को भी आगे बढ़ाने पर दोनों देशों ने सहमति जताई है।ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कहा कि अब तक दोनों देशों की सप्लाई चेन तो जुड़ी हुई थी, लेकिन नीतियों में पर्याप्त समन्वय नहीं था। उन्होंने कहा कि नए समझौते इस दूरी को कम करेंगे और रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई देंगे। उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 के भारत-ऑस्ट्रेलिया परमाणु सहयोग समझौते के तहत अब भारत को यूरेनियम निर्यात की व्यवस्था पर औपचारिक हस्ताक्षर किए गए हैं। बैठक के दौरान दोनों देशों ने ऑस्ट्रेलिया-भारत साइबर, क्रिटिकल टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन पार्टनरशिप (PACTS) शुरू करने की भी घोषणा की। इस पहल के तहत दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, साइबर सुरक्षा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और नई तकनीकों के विकास पर मिलकर काम करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था में इन क्षेत्रों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी और यह साझेदारी दोनों देशों को तकनीकी रूप से और मजबूत बनाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान कई अन्य कार्यक्रम भी आयोजित हुए। उन्होंने मेलबर्न में विक्टोरिया की गवर्नर मार्गरेट गार्डनर से मुलाकात की, जहां उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। इसके अलावा प्रधानमंत्री ने ऑस्ट्रेलिया-भारत सीईओ फोरम में भाग लेकर दोनों देशों के उद्योगपतियों और निवेशकों से चर्चा की। कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री अल्बनीज ने नरेंद्र मोदी के साथ सेल्फी भी ली, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनीं। मेलबर्न में भारतीय समुदाय ने भी प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से भारत और ऑस्ट्रेलिया की साझा विरासत को प्रदर्शित किया गया। प्रसिद्ध डिडगेरिडू वादक रॉन मरे और तबला वादक डॉ. सैम इवांस की प्रस्तुति ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया। प्रधानमंत्री ने भारतीय समुदाय से मुलाकात के दौरान कहा कि विदेशों में बसे भारतीय दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 14:13:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची भारत दौरे पर, मोदी संग शिखर वार्ता में कई अहम मुद्दों पर होगी चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[तीन दिवसीय भारत यात्रा के दौरान व्यापार, निवेश, रक्षा, सेमीकंडक्टर, सप्लाई चेन और स्थानीय मुद्राओं में कारोबार जैसे विषयों पर दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण फैसलों की उम्मीद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/many-important-issues-will-be-discussed-in-the-summit-with/article-57511"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/india-japan-summit.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भारत और जापान के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को नई गति देने के उद्देश्य से जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची बुधवार को तीन दिवसीय भारत दौरे पर नई दिल्ली पहुंच रही हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला आधिकारिक भारत दौरा है, जिसे दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस यात्रा के दौरान वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगी। दोनों नेताओं के बीच होने वाली बैठक में व्यापार, निवेश, रक्षा, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, महत्वपूर्ण खनिज, सप्लाई चेन, समुद्री सुरक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग जैसे कई अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">विदेश मंत्रालय के अनुसार यह दौरा 1 से 3 जुलाई तक चलेगा। इस दौरान दोनों देशों के बीच चल रही विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। माना जा रहा है कि बैठक में आर्थिक सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ नई तकनीकों, औद्योगिक निवेश और रक्षा क्षेत्र में साझेदारी को लेकर भी सकारात्मक प्रगति हो सकती है। दोनों देशों के उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ भी प्रधानमंत्री स्तर पर मुलाकात का कार्यक्रम प्रस्तावित है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस यात्रा का एक महत्वपूर्ण पहलू भारत और जापान के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार की दिशा में आगे बढ़ने की तैयारी भी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों देश ऐसी व्यवस्था विकसित करने पर काम कर रहे हैं, जिसके तहत व्यापारिक भुगतान सीधे भारतीय रुपये और जापानी येन में किया जा सकेगा। यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो दोनों देशों के बीच पहली बार स्थानीय मुद्राओं में औपचारिक व्यापारिक भुगतान प्रणाली स्थापित होगी। इससे अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम होगी और व्यापारिक लेनदेन पहले की तुलना में अधिक आसान तथा किफायती बन सकेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रस्तावित व्यवस्था के तहत जापानी कंपनियां भारत के बैंकों में विशेष खाते खोलकर सीधे रुपये और येन में भुगतान कर सकेंगी। इससे विदेशी मुद्रा विनिमय की अतिरिक्त लागत कम होगी और भुगतान प्रक्रिया भी तेज होगी। व्यापारिक समुदाय का मानना है कि इससे दोनों देशों के बीच कारोबार करने वाली कंपनियों को समय और धन दोनों की बचत होगी। साथ ही छोटे और मध्यम उद्योगों को भी इसका लाभ मिल सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय मुद्राओं में व्यापार की यह पहल नई जरूर है, लेकिन इसकी नींव पहले ही रखी जा चुकी थी। अगस्त 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अगले दस वर्षों के लिए साझा विजन दस्तावेज जारी किया था। उस समय भी भुगतान प्रणाली को सरल बनाने और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने पर सहमति बनी थी। अब उसी दिशा में ठोस कदम उठाने की तैयारी की जा रही है। भारतीय रिजर्व बैंक पहले ही विशेष रुपया वोस्त्रो अकाउंट की व्यवस्था शुरू कर चुका है, जिसके माध्यम से कई देशों के साथ रुपये में व्यापार को बढ़ावा दिया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत सरकार के अनुसार वर्तमान में 30 देशों के 123 विदेशी बैंकों के लिए भारत के 26 बैंकों में 156 विशेष रुपया वोस्त्रो खाते खोले जा चुके हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार में मजबूत विदेशी मुद्राओं पर निर्भरता कम करना और भारतीय रुपये के वैश्विक उपयोग को बढ़ावा देना है। जापान भी एशियाई देशों के साथ स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है और भारत के साथ यह सहयोग उसी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत और जापान के आर्थिक संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच लगभग 27.5 अरब डॉलर का व्यापार दर्ज किया गया। इसी अवधि में जापान ने भारत में करीब 3.2 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष निवेश किया। जापान ने अगले दस वर्षों में भारत में 61 अरब डॉलर से अधिक निवेश करने का लक्ष्य भी तय किया है। वर्तमान में भारत में लगभग 1400 जापानी कंपनियां कार्यरत हैं, जिनमें बड़ी संख्या विनिर्माण क्षेत्र से जुड़ी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">दोनों देशों के सहयोग का सबसे बड़ा उदाहरण मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना है, जिसमें जापान की शिनकानसेन तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इसके अलावा सेमीकंडक्टर, क्लीन एनर्जी, ऑटोमोबाइल, डिजिटल टेक्नोलॉजी और महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए भी दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं। चीन पर वैश्विक निर्भरता कम करने की रणनीति के तहत भारत और जापान ने वर्ष 2025 में सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में विशेष रणनीतिक संवाद भी शुरू किया था। प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची का यह दौरा केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा, क्वाड सहयोग और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने जैसे विषयों पर भी महत्वपूर्ण संदेश देगा। ऐसे समय में जब वैश्विक अर्थव्यवस्था और भू-राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं, भारत और जापान की रणनीतिक साझेदारी दोनों देशों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 13:44:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका ने भारत को दिया बड़ा रक्षा तोहफा, बढ़ेगी सैन्य ताकत</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका ने भारत को Apache हेलीकॉप्टर और M777 तोपों के लिए 428 मिलियन डॉलर का रक्षा सपोर्ट पैकेज मंजूर किया, जिससे सेना की क्षमता बढ़ेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/america-gave-a-big-defense-gift-to-india-military-strength/article-53779"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/india-us-defence-deal.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अमेरिका ने भारत के साथ अपनी रक्षा भागीदारी को मजबूती देते हुए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने भारत के लिए 428 मिलियन डॉलर से अधिक का सपोर्ट और मेंटेनेंस पैकेज मंजूर किया है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें </span>Apache <span lang="hi" xml:lang="hi">अटैक हेलीकॉप्टर और </span>M<span lang="hi" xml:lang="hi">777</span>A<span lang="hi" xml:lang="hi">2 अल्ट्रा-लाइट होवित्जर तोपों से संबंधित महत्वपूर्ण सेवाएं शामिल हैं। ये सभी सेवाएं </span>Foreign Military Sales (FMS) <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोग्राम के तहत प्रदान की जाएंगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका अमेरिका अपने रणनीतिक साझेदार देशों को सैन्य उपकरण और सपोर्ट देने के लिए उपयोग करता है। बताया जा रहा है कि इस पैकेज में </span>Apache <span lang="hi" xml:lang="hi">सिस्टम के लिए लगभग 198.2 मिलियन डॉलर और </span>M<span lang="hi" xml:lang="hi">777 तोपों के लिए करीब 230 मिलियन डॉलर का दीर्घकालिक मेंटेनेंस सपोर्ट शामिल है। यह डील उस समय सामने आई है जब भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग लगातार बढ़ रहा है और दोनों देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा संतुलन को लेकर पहले से ज्यादा सक्रिय दिख रहे हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूत्रों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, Apache <span lang="hi" xml:lang="hi">हेलीकॉप्टरों के लिए जो सपोर्ट पैकेज मंजूर हुआ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसमें सिर्फ मशीनरी या पार्ट्स नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि तकनीकी और लॉजिस्टिक सपोर्ट की पूरी व्यवस्था शामिल है। इसमें इंजीनियरिंग सहायता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीकी डेटा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पब्लिकेशन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ट्रेनिंग और फील्ड सपोर्ट जैसी सेवाएं दी जाएंगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि भारतीय सेना के </span>Apache <span lang="hi" xml:lang="hi">बेड़े की ऑपरेशनल क्षमता लंबे समय तक मजबूत बनी रहे। इस प्रोग्राम में अमेरिका की दो बड़ी कंपनियाँ </span>Boeing <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>Lockheed Martin <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रमुख ठेकेदार के रूप में काम कर रही हैं। इस सपोर्ट से </span>Apache <span lang="hi" xml:lang="hi">हेलीकॉप्टरों की सर्विसिंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मेंटेनेंस और मिशन रेडीनेस में काफी सुधार की उम्मीद है। ये हेलीकॉप्टर भारतीय सेना के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर सीमावर्ती क्षेत्रों और संवेदनशील ऑपरेशनों में इनकी भूमिका लगातार बढ़ती रही है। इसलिए इस नए पैकेज से इनकी उपलब्धता और तकनीकी निर्भरता दोनों में संतुलन आने की उम्मीद है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वहीं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, M<span lang="hi" xml:lang="hi">777</span>A<span lang="hi" xml:lang="hi">2 </span>Ultra-Light Howitzers <span lang="hi" xml:lang="hi">के लिए लगभग 230 मिलियन डॉलर का लॉन्ग-टर्म सपोर्ट पैकेज भी मंजूर हुआ है। इसमें स्पेयर पार्ट्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रिपेयर सर्विस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फील्ड सर्विस प्रतिनिधि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीकी सहायता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशिक्षण और डिपो स्तर का सपोर्ट जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। इस डील में ब्रिटेन की </span>BAE Systems <span lang="hi" xml:lang="hi">को मुख्य ठेकेदार बनाया गया है। </span>M<span lang="hi" xml:lang="hi">777 तोपें भारतीय सेना के लिए खासकर पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में बेहद उपयोगी मानी जाती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ भारी तोपों की तैनाती मुश्किल होती है। लद्दाख से लेकर उत्तर-पूर्वी सीमाओं तक इनकी तैनाती ने सेना की मारक क्षमता को सटीक और तेज बना दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग का कहना है कि यह सौदा भारत की मौजूदा और भविष्य की रक्षा जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इससे क्षेत्रीय सैन्य संतुलन पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये उम्मीद जताई गई है कि इस सहयोग से भारत की रक्षा प्रणालियों में तकनीकी मजबूती आएगी और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी और अधिक स्थिर होगी।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 15:31:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>आज PM मोदी का स्वीडन दौर, गोथेनबर्ग में ट्रेड, AI और रक्षा पर अहम डील होने की उम्मीद</title>
                                    <description><![CDATA[PM Modi Sweden visit के तहत Gothenburg में ट्रेड, AI, रक्षा और ग्रीन एनर्जी पर अहम बातचीत होगी। भारत-स्वीडन रिश्तों को नई दिशा मिलने की उम्मीद।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/pm-modis-visit-to-sweden-today-important-deal-expected-on/article-53584"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/pm-modi-sweden-visit.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"><strong>PM Modi Sweden Visit:</strong> <span lang="hi" xml:lang="hi">पीएम मोदी की स्वीडन यात्रा को लेकर आज पूरा यूरोपीय राजनयिक हलका काफी सक्रिय नजर आ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थोड़ी देर में गोथेनबर्ग पहुंचने वाले हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां से उनका दो दिन का दौरा शुरू होगा। यह दौरा भारत और स्वीडन के रिश्तों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर इस समय जब दोनों देशों के बीच तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और आर्थिक साझेदारी को लेकर बातचीत जारी है। एयरपोर्ट से लेकर शहर तक सुरक्षा और स्वागत की विशेष तैयारियां की गई हैं और स्थानीय भारतीय समुदाय में भी इसको लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूत्रों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">पीएम मोदी अपने स्वीडिश समकक्ष </span>Ulf Kristersson <span lang="hi" xml:lang="hi">के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इसमें ट्रेड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रक्षा सहयोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्रीन ट्रांजिशन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्पेस टेक्नोलॉजी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और स्टार्टअप इकोसिस्टम जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। कहा जा रहा है कि बातचीत में कई महत्वपूर्ण समझौतों पर भी बात आगे बढ़ सकती है। यह यात्रा इसलिए भी खास है क्योंकि यह भारत और यूरोपीय संघ के बीच जनवरी </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> में लागू हुए </span>Free Trade Agreement <span lang="hi" xml:lang="hi">के बाद उनका पहला बड़ा यूरोप दौरा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इसी वजह से यह यात्रा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देखी जा रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">गोथेनबर्ग को स्वीडन का औद्योगिक और नवाचार केंद्र माना जाता है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए पीएम मोदी का वहां जाना रणनीतिक तौर पर भी महत्वपूर्ण है। भारतीय राजदूत अनुराग भूषण ने बताया कि यह शहर तकनीक और विश्वविद्यालयों का हब है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साथ ही यहां भारतीय प्रवासियों की भी अच्छी खासी संख्या है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के आगमन को लेकर लोगों में काफी उत्साह है और कई भारतीय मूल के लोग उनसे मिलने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पीएम मोदी यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष </span>Ursula von der Leyen <span lang="hi" xml:lang="hi">के साथ यूरोपीय राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री को संबोधित करेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो उद्योग जगत के सबसे प्रभावशाली मंचों में से एक माना जाता है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">आर्थिक आंकड़ों की बात करें तो </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">2025 <span lang="hi" xml:lang="hi">में भारत और स्वीडन के बीच व्यापार लगभग </span>7.75 <span lang="hi" xml:lang="hi">अरब डॉलर तक पहुंच चुका है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो दोनों देशों के मजबूत होते रिश्तों को दर्शाता है। इसी बीच पीएम मोदी की स्वीडन यात्रा के दौरान रक्षा उत्पादन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मेक इन इंडिया</span>, AI <span lang="hi" xml:lang="hi">सहयोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और ग्रीन ऊर्जा परियोजनाओं से जुड़ी कुछ नई घोषणाओं की भी संभावना जताई जा रही है। हालांकि आधिकारिक रूप से अभी सभी एजेंडे साझा नहीं किए गए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन कूटनीतिक हलकों में इसे बहुत महत्वपूर्ण यात्रा माना जा रहा है। कुल मिलाकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह दौरा भारत-यूरोप संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें तकनीक और रणनीतिक साझेदारी दोनों को साथ लेकर चलने की कोशिश होगी।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 13:20:38 +0530</pubDate>
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