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                <title>Green Energy - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Green Energy RSS Feed</description>
                
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                <title>इंदौर बना ईवी और ग्रीन एनर्जी का नया हब, निवेशकों ने दिखाई रुचि</title>
                                    <description><![CDATA[ईवी कॉन्क्लेव में देशभर के निवेशक, स्टार्टअप और उद्योग विशेषज्ञ जुटे, स्वच्छ परिवहन, ग्रीन एनर्जी और भविष्य की तकनीकों पर हुआ मंथन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a3f6eff911c9/article-57105"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/indore-ev-conclave.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इंदौर ने एक बार फिर खुद को देश के उभरते हुए नवाचार केंद्र के रूप में साबित किया है। शुक्रवार को शहर में आयोजित इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) और ग्रीन एनर्जी कॉन्क्लेव में देशभर से आए निवेशकों, स्टार्टअप संस्थापकों, उद्योग विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं ने भाग लिया। इस आयोजन का उद्देश्य केवल इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना नहीं था, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा, टिकाऊ विकास और भविष्य की तकनीकों को लेकर एक साझा रोडमैप तैयार करना भी था। शेराटन ग्रैंड पैलेस में आयोजित इस कॉन्क्लेव ने यह संकेत दिया कि अब भारत के टियर-2 शहर भी हरित विकास और नई तकनीकों के बड़े केंद्र बनते जा रहे हैं। कार्यक्रम में 200 से अधिक वरिष्ठ अधिकारी, निवेशक, उद्योग प्रतिनिधि और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञ मौजूद रहे। आयोजन का संचालन ह्युन्स ऑफ ईवी द्वारा किया गया, जबकि इंदौर नगर निगम ने सिटी होस्ट पार्टनर के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शहर की स्वच्छता और सस्टेनेबल डेवलपमेंट की पहचान को देखते हुए यह आयोजन इंदौर के लिए काफी अहम माना गया। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे आयोजन स्थानीय उद्योगों और स्टार्टअप्स को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कॉन्क्लेव के दौरान इलेक्ट्रिक मोबिलिटी से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैटरी टेक्नोलॉजी, ऊर्जा प्रबंधन, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लीन ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स टेक्नोलॉजी, क्लाइमेट टेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सर्कुलर इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों में भविष्य की संभावनाओं पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने कहा कि आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों का विस्तार केवल निजी परिवहन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सार्वजनिक परिवहन, माल ढुलाई और औद्योगिक उपयोग में भी तेजी से बढ़ेगा। यदि चार्जिंग नेटवर्क, बैटरी निर्माण और ऊर्जा भंडारण तकनीकों में तेजी से निवेश किया जाता है तो भारत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हो सकता है। इसके लिए सरकारी नीतियों, निजी निवेश और तकनीकी नवाचार के बीच बेहतर तालमेल जरूरी होगा। कॉन्क्लेव में शामिल कई निवेशकों ने स्टार्टअप्स के साथ संभावित साझेदारी और निवेश को लेकर भी चर्चा की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कार्यक्रम का सबसे आकर्षक हिस्सा स्टार्टअप पिच सेशन रहा। देशभर से प्राप्त करीब 2,400 आवेदनों में से बहु-स्तरीय चयन प्रक्रिया के बाद केवल नौ स्टार्टअप्स को अंतिम प्रस्तुति का अवसर मिला। इन स्टार्टअप्स ने निवेशकों के सामने अपने उत्पाद, तकनीक और बिजनेस मॉडल पेश किए। कई स्टार्टअप्स ने इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग, स्मार्ट बैटरी सिस्टम, ऊर्जा प्रबंधन और एआई आधारित मोबिलिटी समाधान जैसे क्षेत्रों में अपने नवाचार प्रस्तुत किए। प्रस्तुति के बाद निवेशकों और स्टार्टअप संस्थापकों के बीच विस्तृत नेटवर्किंग और व्यावसायिक चर्चाएं भी हुईं। कॉन्क्लेव में भाग लेने वाले उद्योग प्रतिनिधियों का मानना था कि भारत में ग्रीन एनर्जी सेक्टर आने वाले वर्षों में सबसे तेजी से बढ़ने वाले क्षेत्रों में शामिल होगा। इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग, कार्बन उत्सर्जन कम करने के प्रयास और सरकार की प्रोत्साहन योजनाएं इस बदलाव को और गति देंगी। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि अब निवेशकों का रुझान केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि इंदौर जैसे शहर भी नई तकनीकों और स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ह्युन्स ऑफ ईवी के सीईओ डॉ. ललित सिंह ने कहा कि भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी तेजी से आगे बढ़ रही है और इस क्षेत्र में नवाचार की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। उनके अनुसार ऐसे मंच उद्योग, निवेशकों और युवा उद्यमियों को एक साथ लाकर नए अवसर पैदा करते हैं। वहीं सलाहकार स्वप्निल बंसल ने कहा कि टियर-2 और टियर-3 शहरों के स्टार्टअप्स अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं और उन्हें निवेश प्राप्त करने के बेहतर अवसर मिल रहे हैं। कार्यक्रम में डायरेक्टर आभा सिंह और एडिटर दिव्या ठक्कर ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि ग्रीन एनर्जी और ईवी आधारित तकनीक अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं रही। मध्य भारत तेजी से इस बदलाव का महत्वपूर्ण केंद्र बन रहा है। उन्होंने कहा कि यदि इसी तरह उद्योग, सरकार और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग बढ़ता रहा तो भारत स्वच्छ ऊर्जा और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है। कॉन्क्लेव के समापन पर यह स्पष्ट नजर आया कि इंदौर केवल स्वच्छ शहर ही नहीं, बल्कि भविष्य की हरित अर्थव्यवस्था और तकनीकी नवाचार का भी मजबूत केंद्र बनकर उभर रहा है। निवेशकों, उद्योग जगत और स्टार्टअप्स के बीच बने नए संपर्क आने वाले समय में कई बड़े प्रोजेक्ट्स और निवेश का आधार बन सकते हैं। इससे स्थानीय रोजगार, तकनीकी विकास और स्वच्छ ऊर्जा आधारित उद्योगों को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 13:11:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>100% इथेनॉल को मिली मंजूरी, जल्द सड़कों पर दौड़ेंगी नई पीढ़ी की गाड़ियां</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने दी जानकारी, अगले छह सप्ताह में कई कंपनियां लॉन्च कर सकती हैं इथेनॉल आधारित वाहन; पेट्रोल पर निर्भरता और प्रदूषण घटाने की दिशा में बड़ा कदम]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/100-ethanol-gets-approval-new-generation-vehicles-will-soon-run/article-55892"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ethanol-fuel-india.jpg" alt=""></a><br /><p>केंद्र सरकार ने देश में स्वच्छ और वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा फैसला लेते हुए 100 प्रतिशत शुद्ध इथेनॉल को वाहन ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने की मंजूरी दे दी है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान इसकी घोषणा की। उन्होंने बताया कि इस संबंध में आवश्यक नियमों और प्रावधानों को अंतिम रूप दिया जा चुका है और संबंधित फाइल पर हस्ताक्षर भी कर दिए गए हैं। सरकार का मानना है कि इस फैसले से न केवल देश की विदेशी तेल पर निर्भरता कम होगी बल्कि प्रदूषण नियंत्रण और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेंगे।</p>
<p>नितिन गडकरी ने कहा कि भारत लंबे समय से अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात के जरिए पूरा करता है। इससे देश पर आर्थिक बोझ बढ़ता है और वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारतीय उपभोक्ताओं पर पड़ता है। ऐसे में इथेनॉल जैसे वैकल्पिक ईंधन का उपयोग देश के लिए आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों दृष्टि से फायदेमंद साबित हो सकता है। सरकार पिछले कई वर्षों से इथेनॉल मिश्रित ईंधन को बढ़ावा दे रही है और अब 100 प्रतिशत इथेनॉल को मंजूरी मिलना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p>
<p>केंद्रीय मंत्री के अनुसार देश की कई प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियां पहले से ही फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक पर काम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि टोयोटा, सुजुकी, एमजी और हुंडई जैसी कंपनियां अगले छह सप्ताह के भीतर ऐसे वाहन बाजार में उतार सकती हैं जो पूरी तरह इथेनॉल पर चलने में सक्षम होंगे। ऑटोमोबाइल उद्योग ने भी इस बदलाव को सकारात्मक रूप से स्वीकार किया है। यदि इथेनॉल आधारित वाहनों का उत्पादन और उपयोग बढ़ता है तो यह भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए एक नए दौर की शुरुआत हो सकती है।</p>
<p>इथेनॉल को पेट्रोल की तुलना में अपेक्षाकृत सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल ईंधन माना जाता है। इसके उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में कमी आने की संभावना है, जिससे वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। खासकर बड़े शहरों में जहां प्रदूषण लगातार चिंता का विषय बना हुआ है, वहां इथेनॉल आधारित ईंधन को एक उपयोगी विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे आम लोगों को ईंधन खर्च में भी राहत मिल सकती है।</p>
<p>इथेनॉल एक प्रकार का अल्कोहल है, जिसे मुख्य रूप से शर्करा और स्टार्च युक्त पदार्थों के फर्मेंटेशन से तैयार किया जाता है। भारत में इसका उत्पादन गन्ने के रस, मक्का, मीठे ज्वार, चुकंदर और अन्य कृषि उत्पादों से किया जाता है। इसके अलावा कृषि अवशेषों जैसे धान की भूसी, गेहूं की भूसी, बांस और अन्य जैविक पदार्थों से भी इथेनॉल बनाने की तकनीक विकसित की जा रही है। इससे किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिलने की भी संभावना है।</p>
<p>इथेनॉल आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलने से कृषि क्षेत्र को भी लाभ होगा। गन्ना, मक्का और अन्य फसलों की मांग बढ़ने से किसानों की आय में वृद्धि हो सकती है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में नए उद्योगों और रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं। सरकार लंबे समय से किसानों की आय बढ़ाने और जैव ईंधन उत्पादन को प्रोत्साहित करने की दिशा में काम कर रही है। ऐसे में 100 प्रतिशत इथेनॉल को मंजूरी इस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।</p>
<p>हाल ही में सरकार ने फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए E85 ईंधन भी पेश किया था, जिसमें 85 प्रतिशत इथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। अब 100 प्रतिशत इथेनॉल को मंजूरी मिलने से बायोफ्यूल सेक्टर में नई संभावनाएं खुलने की उम्मीद है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट कर रहे हैं कि सामान्य पेट्रोल इंजन वाले वाहन सीधे 100 प्रतिशत इथेनॉल का उपयोग नहीं कर सकेंगे। इसके लिए विशेष फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक वाले इंजन की आवश्यकता होगी।</p>
<p>वर्तमान में कुछ वाहन निर्माता कंपनियां पहले ही फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक पर आधारित मॉडल विकसित कर चुकी हैं। मारुति सुजुकी की फ्लेक्स-फ्यूल वैगनआर, हीरो मोटोकॉर्प की कुछ मोटरसाइकिलें और अन्य वाहन इस दिशा में उदाहरण माने जा रहे हैं। आने वाले समय में इस तकनीक वाले वाहनों की संख्या बढ़ने की संभावना है। यदि बाजार और उपभोक्ताओं से अच्छा प्रतिसाद मिलता है तो भारत में इथेनॉल आधारित परिवहन व्यवस्था तेजी से विस्तार कर सकती है।</p>
<p>सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब दुनिया भर में स्वच्छ ऊर्जा और वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। भारत भी कार्बन उत्सर्जन कम करने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता हासिल करने के लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। 100 प्रतिशत इथेनॉल को मंजूरी मिलने के बाद अब निगाहें वाहन कंपनियों और बाजार पर टिकी हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 13:18:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एथेनॉल मिक्स पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी खत्म, सरकार का बड़ा फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[22% से 30% एथेनॉल ब्लेंडिंग वाले पेट्रोल को टैक्स फ्री कर क्रूड ऑयल इम्पोर्ट घटाने और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने की तैयारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/governments-big-decision-to-end-excise-duty-on-ethanol-mix/article-55588"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ethanol-blended-petrol-india.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">केंद्र सरकार ने देश में ऊर्जा नीति को लेकर एक बड़ा कदम उठाते हुए पेट्रोल में अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले फ्यूल पर एक्साइज ड्यूटी को खत्म कर दिया है। नए नियमों के अनुसार 22% से लेकर 30% तक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर अब कोई एक्साइज ड्यूटी नहीं लगेगी। सरकार का मकसद देश में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के आयात को कम करना और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना बताया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकारी नोटिफिकेशन के मुताबिक इस टैक्स छूट के दायरे में E22, E25, E27 और E30 जैसे नए फ्यूल वेरिएंट शामिल होंगे। हालांकि पहले से लागू E20 यानी 20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर इस फैसले का कोई सीधा लाभ नहीं दिया गया है। यह पहली बार है जब सरकार ने हाई लेवल एथेनॉल ब्लेंडिंग को वित्तीय प्रोत्साहन देकर बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। एथेनॉल एक प्रकार का अल्कोहल है, जिसे जैविक स्रोतों से तैयार किया जाता है। यह मुख्य रूप से गन्ने के रस, मक्का और अन्य स्टार्च आधारित फसलों से बनाया जाता है। इसे पेट्रोल में मिलाकर ईंधन को अधिक पर्यावरण अनुकूल बनाया जाता है, जिससे प्रदूषण में कमी और आयात पर निर्भरता घटाने में मदद मिलती है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार का कहना है कि भारत अपनी जरूरत का लगभग 87% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, जो देश की आर्थिक सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में एथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ाकर विदेशी मुद्रा की बचत की जा सकती है और किसानों को भी उनकी फसलों का बेहतर मूल्य मिल सकता है। एथेनॉल उत्पादन को लेकर देश में तीन प्रमुख श्रेणियां मानी जाती हैं। फर्स्ट जनरेशन एथेनॉल गन्ना, मक्का और मीठे फसलों से बनाया जाता है। सेकेंड जनरेशन एथेनॉल कृषि अवशेषों जैसे भूसी, बांस और वेस्ट मटेरियल से तैयार होता है। वहीं थर्ड जनरेशन बायोफ्यूल अभी विकास के चरण में है, जो मुख्य रूप से एल्गी (शैवाल) पर आधारित होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने इस नीति को लागू करने से पहले तकनीकी तैयारियों पर भी काम किया है। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने E22 से E30 तक के फ्यूल ब्लेंड्स के लिए गुणवत्ता मानक तय कर दिए हैं। इन मानकों में ऑक्टेन रेटिंग, सल्फर लेवल, सुरक्षा मानक और टेस्टिंग प्रोसेस शामिल हैं। ये नियम मई 2026 से प्रभावी हो चुके हैं, जिससे इस ईंधन को व्यावसायिक रूप से अपनाने का रास्ता साफ हो गया है। भारत का एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम पिछले कुछ वर्षों में तेजी से आगे बढ़ा है। पहले जहां 2030 तक E20 लक्ष्य रखा गया था, उसे बाद में संशोधित कर 2025-26 तक कर दिया गया। सरकारी तेल कंपनियों ने 10% ब्लेंडिंग का लक्ष्य समय से पहले हासिल कर लिया था, जिससे इस नीति की गति का अंदाजा लगाया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर कुछ उपभोक्ताओं ने चिंता भी जताई है। खासकर पुरानी गाड़ियों में माइलेज कम होने और इंजन पर असर पड़ने की आशंका को लेकर सवाल उठे थे। यह मामला न्यायालय तक भी पहुंचा था, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने E20 फ्यूल के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार का कहना है कि यह बदलाव पूरी तरह तकनीकी जांच के बाद लागू किया गया है और इससे किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। साथ ही, ऑटोमोबाइल कंपनियों ने भी स्पष्ट किया है कि E20 या उससे कम ब्लेंड वाले ईंधन से वाहन की सुरक्षा पर कोई बड़ा खतरा नहीं है, हालांकि माइलेज में मामूली अंतर संभव है। वर्तमान में एक चुनौती यह भी है कि एथेनॉल की लागत कई बार पेट्रोल से अधिक पड़ रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार ट्रांसपोर्ट और GST मिलाकर एथेनॉल की औसत लागत लगभग 71 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच चुकी है, जिससे रिटेल फ्यूल प्राइस को कम करना आसान नहीं हो पा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 11:04:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>आज PM मोदी का स्वीडन दौर, गोथेनबर्ग में ट्रेड, AI और रक्षा पर अहम डील होने की उम्मीद</title>
                                    <description><![CDATA[PM Modi Sweden visit के तहत Gothenburg में ट्रेड, AI, रक्षा और ग्रीन एनर्जी पर अहम बातचीत होगी। भारत-स्वीडन रिश्तों को नई दिशा मिलने की उम्मीद।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/pm-modis-visit-to-sweden-today-important-deal-expected-on/article-53584"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/pm-modi-sweden-visit.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"><strong>PM Modi Sweden Visit:</strong> <span lang="hi" xml:lang="hi">पीएम मोदी की स्वीडन यात्रा को लेकर आज पूरा यूरोपीय राजनयिक हलका काफी सक्रिय नजर आ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थोड़ी देर में गोथेनबर्ग पहुंचने वाले हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां से उनका दो दिन का दौरा शुरू होगा। यह दौरा भारत और स्वीडन के रिश्तों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर इस समय जब दोनों देशों के बीच तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और आर्थिक साझेदारी को लेकर बातचीत जारी है। एयरपोर्ट से लेकर शहर तक सुरक्षा और स्वागत की विशेष तैयारियां की गई हैं और स्थानीय भारतीय समुदाय में भी इसको लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूत्रों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">पीएम मोदी अपने स्वीडिश समकक्ष </span>Ulf Kristersson <span lang="hi" xml:lang="hi">के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इसमें ट्रेड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रक्षा सहयोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्रीन ट्रांजिशन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्पेस टेक्नोलॉजी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और स्टार्टअप इकोसिस्टम जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। कहा जा रहा है कि बातचीत में कई महत्वपूर्ण समझौतों पर भी बात आगे बढ़ सकती है। यह यात्रा इसलिए भी खास है क्योंकि यह भारत और यूरोपीय संघ के बीच जनवरी </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> में लागू हुए </span>Free Trade Agreement <span lang="hi" xml:lang="hi">के बाद उनका पहला बड़ा यूरोप दौरा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इसी वजह से यह यात्रा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देखी जा रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">गोथेनबर्ग को स्वीडन का औद्योगिक और नवाचार केंद्र माना जाता है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए पीएम मोदी का वहां जाना रणनीतिक तौर पर भी महत्वपूर्ण है। भारतीय राजदूत अनुराग भूषण ने बताया कि यह शहर तकनीक और विश्वविद्यालयों का हब है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साथ ही यहां भारतीय प्रवासियों की भी अच्छी खासी संख्या है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के आगमन को लेकर लोगों में काफी उत्साह है और कई भारतीय मूल के लोग उनसे मिलने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पीएम मोदी यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष </span>Ursula von der Leyen <span lang="hi" xml:lang="hi">के साथ यूरोपीय राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री को संबोधित करेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो उद्योग जगत के सबसे प्रभावशाली मंचों में से एक माना जाता है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">आर्थिक आंकड़ों की बात करें तो </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">2025 <span lang="hi" xml:lang="hi">में भारत और स्वीडन के बीच व्यापार लगभग </span>7.75 <span lang="hi" xml:lang="hi">अरब डॉलर तक पहुंच चुका है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो दोनों देशों के मजबूत होते रिश्तों को दर्शाता है। इसी बीच पीएम मोदी की स्वीडन यात्रा के दौरान रक्षा उत्पादन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मेक इन इंडिया</span>, AI <span lang="hi" xml:lang="hi">सहयोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और ग्रीन ऊर्जा परियोजनाओं से जुड़ी कुछ नई घोषणाओं की भी संभावना जताई जा रही है। हालांकि आधिकारिक रूप से अभी सभी एजेंडे साझा नहीं किए गए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन कूटनीतिक हलकों में इसे बहुत महत्वपूर्ण यात्रा माना जा रहा है। कुल मिलाकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह दौरा भारत-यूरोप संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें तकनीक और रणनीतिक साझेदारी दोनों को साथ लेकर चलने की कोशिश होगी।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 13:20:38 +0530</pubDate>
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