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                <title>Oil Market - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Oil Market RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>कच्चा तेल छह महीने के निचले स्तर पर, फिर भी पेट्रोल-डीजल के दाम जस के तस</title>
                                    <description><![CDATA[कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट के बावजूद आम लोगों को राहत नहीं, रिपोर्ट के मुताबिक तेल कंपनियां पेट्रोल और डीजल पर प्रति लीटर मजबूत मार्जिन कमा रही हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/crude-oil-is-at-its-lowest-in-six-months-yet/article-58185"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/crude-oil-price-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, लेकिन इसका फायदा अब तक देश के आम उपभोक्ताओं को नहीं मिल पाया है। अमेरिका-ईरान तनाव के दौरान रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने वाला कच्चा तेल अब करीब छह महीने के निचले स्तर पर कारोबार कर रहा है। इंडियन बास्केट के अनुसार कच्चे तेल की कीमत घटकर 68.69 डॉलर प्रति बैरल तक आ गई है। यह युद्ध के दौरान बने करीब 157 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर से लगभग 56 प्रतिशत कम है। इसके बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में किसी तरह की कमी नहीं की गई है। ऐसे में एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता हो चुका है तो घरेलू बाजार में उपभोक्ताओं को राहत क्यों नहीं मिल रही।</p>
<p style="text-align:justify;">मौजूदा हालात में सरकारी तेल विपणन कंपनियां अच्छी स्थिति में हैं। डीएएम कैपिटल की एक रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा कच्चे तेल की कीमत पर तेल कंपनियां पेट्रोल पर करीब 10.5 रुपए और डीजल पर लगभग 11 रुपए प्रति लीटर तक का मार्जिन हासिल कर रही हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जब इंडियन बास्केट का कच्चा तेल 87 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहता है, तब कंपनियां लगभग ब्रेक ईवन की स्थिति में होती हैं, यानी न उन्हें विशेष लाभ होता है और न ही नुकसान। चूंकि 1 जून के बाद से कच्चे तेल की कीमत लगातार इस स्तर से नीचे बनी हुई है, इसलिए कंपनियां पिछले कई सप्ताह से मुनाफे में कारोबार कर रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के दौरान वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला था। हालांकि युद्धविराम की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें धीरे-धीरे नीचे आने लगीं। शुरुआती युद्धविराम के बाद भी कच्चा तेल 115 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बना रहा और अब यह 70 डॉलर के आसपास पहुंच गया है। इसके बावजूद भारत में सरकारी तेल कंपनियों ने खुदरा ईंधन की कीमतों में कोई राहत नहीं दी है। यही वजह है कि उपभोक्ताओं के बीच असंतोष भी देखने को मिल रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो साफ दिखाई देता है कि कच्चे तेल की कीमतों और पेट्रोल-डीजल के खुदरा दामों के बीच सीधा संबंध हमेशा नहीं रहा। वर्ष 2018 में जब कच्चा तेल करीब 80 डॉलर प्रति बैरल था, तब दिल्ली में पेट्रोल लगभग 72 रुपए और डीजल करीब 70 रुपए प्रति लीटर बिक रहा था। इसके बाद 2020 में कोरोना महामारी के दौरान कच्चे तेल की कीमत गिरकर करीब 43 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, लेकिन खुदरा कीमतों में वैसी राहत देखने को नहीं मिली जैसी उपभोक्ता उम्मीद कर रहे थे। बाद में 2022 में जब कच्चा तेल 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई। हालांकि जनवरी 2023 में कच्चे तेल के दाम फिर करीब 75 डॉलर तक आ गए, लेकिन उस समय भी खुदरा कीमतों में कोई खास बदलाव नहीं किया गया। तेल कंपनियों का तर्क था कि वे पहले हुए नुकसान की भरपाई कर रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दिलचस्प बात यह भी है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों वाले दौर में भी तेल कंपनियों का वित्तीय प्रदर्शन मजबूत बना रहा। जनवरी से मार्च 2026 की चौथी तिमाही में देश की प्रमुख तेल कंपनियों के नतीजे सकारात्मक रहे। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार चार बड़ी तेल कंपनियों का संयुक्त मुनाफा पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में करीब 22 प्रतिशत तक बढ़ा। इसी अवधि में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 157 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा था और मार्च के दौरान इसका औसत भाव भी 125 डॉलर प्रति बैरल से अधिक रहा। इसके बावजूद कंपनियों के मुनाफे में कमी नहीं आई।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच निजी क्षेत्र की ईंधन कंपनी नायरा एनर्जी ने 1 जुलाई को अपने ग्राहकों को राहत देते हुए पेट्रोल की कीमत में 5 रुपए प्रति लीटर और डीजल में 3 रुपए प्रति लीटर की कटौती की थी। इस फैसले के बाद कई शहरों में नायरा के पंपों पर ईंधन सरकारी कंपनियों की तुलना में सस्ता मिलने लगा। भोपाल जैसे शहरों में भी नायरा के पेट्रोल और डीजल की कीमतों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई। हालांकि इसके बाद भी सरकारी तेल कंपनियों ने अपनी कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले मई महीने में सरकारी तेल कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगे कच्चे तेल का हवाला देते हुए चरणबद्ध तरीके से पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतों में कुल 7.50 रुपए प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की थी। देशभर के अधिकांश पेट्रोल पंप इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के नियंत्रण में हैं, इसलिए इन कंपनियों के फैसलों का असर सीधे करोड़ों उपभोक्ताओं पर पड़ता है। फिलहाल कीमतों में कटौती नहीं होने से आम लोगों की जेब पर बोझ बना हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 13:55:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कच्चा तेल 72 डॉलर प्रति बैरल पर लौटा, पेट्रोल-डीजल में राहत के लिए करना होगा इंतजार</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान तनाव कम होने के बाद वैश्विक बाजार में क्रूड ऑयल सस्ता हुआ, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी आने में अभी करीब ढाई महीने का समय लग सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/crude-oil-returns-to-72-per-barrel-will-have-to/article-56980"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/crude-oil-price.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर उस स्तर पर पहुंच गई हैं, जहां वे ईरान से जुड़े तनाव शुरू होने से पहले थीं। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल करीब 72 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखाई दिया। यह लगभग वही स्तर है, जो युद्ध जैसे हालात बनने से पहले दर्ज किया गया था। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम कम होने से उम्मीद जरूर बढ़ी है कि आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी राहत मिल सकती है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि उपभोक्ताओं को इसका फायदा तुरंत मिलने वाला नहीं है। तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होना माना जा रहा है। हाल के दिनों में हुई बातचीत के बाद ईरानी तेल के निर्यात पर कुछ प्रतिबंधों में ढील दी गई है। इसके चलते होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों की आवाजाही फिर बढ़ने लगी है। यह मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में गिना जाता है। जहाजों की संख्या बढ़ने से बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता कम हुई और इसका असर सीधे कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिला।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अभी भी जहाजों की आवाजाही पहले जैसी सामान्य नहीं हुई है। युद्ध से पहले जहां प्रतिदिन 100 से अधिक जहाज इस मार्ग से गुजरते थे, वहीं अब यह संख्या उससे कुछ कम बनी हुई है। इसके बावजूद बाजार को यह भरोसा मिला है कि आने वाले समय में तेल की आपूर्ति सामान्य बनी रह सकती है। यही वजह है कि कच्चे तेल की कीमतों में लगातार नरमी देखने को मिल रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें घटने का असर सीधे पेट्रोल पंपों पर नहीं दिखता। इसकी सबसे बड़ी वजह तेल की खरीद और सप्लाई की लंबी प्रक्रिया है। उन्होंने बताया कि फिलहाल जिन पेट्रोल और डीजल उत्पादों की बिक्री हो रही है, वे उस कच्चे तेल से तैयार किए गए हैं, जिसे उस समय खरीदा गया था जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें काफी अधिक थीं। ऐसे में वर्तमान में सस्ता हुआ कच्चा तेल अभी उपभोक्ताओं तक पहुंचने में समय लेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">किसी भी देश से खरीदा गया कच्चा तेल पहले वहां के बंदरगाहों तक पहुंचता है और फिर जहाजों में लोड किया जाता है। इसके बाद समुद्री रास्ते से भारत आने में लगभग दो महीने तक का समय लग सकता है। भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने के बाद तेल को रिफाइनरियों में भेजा जाता है, जहां उससे पेट्रोल, डीजल और अन्य उत्पाद तैयार किए जाते हैं। इसके बाद यह ईंधन देशभर के डिपो और पेट्रोल पंपों तक पहुंचता है। पूरी प्रक्रिया में करीब 75 से 80 दिन लग जाते हैं। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें घटने के बावजूद उपभोक्ताओं को तत्काल राहत मिलने की संभावना नहीं है। अगर मौजूदा स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें स्थिर बनी रहती हैं तो अगस्त के आखिर या सितंबर की शुरुआत से कुछ असर दिखाई देना शुरू हो सकता है। वहीं पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में वास्तविक राहत दशहरे के आसपास मिलने की संभावना जताई जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एक और महत्वपूर्ण कारण तेल विपणन कंपनियों की वित्तीय स्थिति भी है। कंपनियां पिछले कुछ समय से पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर नुकसान झेल रही हैं। इसके अलावा सरकार ने पहले उत्पाद शुल्क में भी कटौती की थी, जिससे राजस्व पर असर पड़ा। ऐसे में यदि कच्चे तेल की कीमतें कम बनी रहती हैं तो शुरुआती अवधि में कंपनियां अपने नुकसान की भरपाई करने की कोशिश कर सकती हैं। इसके बाद ही खुदरा कीमतों में कटौती का फैसला लिया जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां पहले की तुलना में काफी स्थिर दिखाई दे रही हैं। यदि पश्चिम एशिया में दोबारा कोई बड़ा तनाव नहीं बढ़ता और तेल आपूर्ति सामान्य रहती है तो निकट भविष्य में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी तेजी आने की संभावना कम है। इससे भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों को राहत मिल सकती है और महंगाई पर भी सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 11:34:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>ईरान-अमेरिका जंग खत्म, कच्चे तेल में बड़ी गिरावट; पेट्रोल-डीजल पर टिकी निगाहें</title>
                                    <description><![CDATA[107 दिन बाद शांति समझौते पर सहमति, क्रूड ऑयल 4 फीसदी से ज्यादा टूटा; भारत में ईंधन कीमतों में राहत की उम्मीद बढ़ी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/iran-america-war-ends-big-fall-in-crude-oil-eyes-on/article-55974"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/us-iran-peace-deal.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">लगातार तीन महीने से अधिक समय तक दुनिया की नजरें जिस अमेरिका-ईरान संघर्ष पर टिकी थीं, उसे लेकर सोमवार को बड़ी राहत भरी खबर सामने आई। दोनों देशों ने करीब 107 दिन तक चले तनाव और सैन्य कार्रवाई के बाद शांति समझौते पर सहमति जता दी है। इस घोषणा के साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। तेल बाजार में आई इस नरमी ने दुनिया भर के निवेशकों के साथ-साथ भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों को भी राहत दी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई इस गिरावट का फायदा भारत के आम उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कमी देखने को मिलेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सोमवार सुबह एशियाई बाजार खुलते ही कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई क्रूड करीब 4.39 प्रतिशत गिरकर 81.15 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। वहीं ब्रेंट क्रूड भी करीब 4 प्रतिशत टूटकर 84 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया। कुछ दिन पहले तक ब्रेंट क्रूड 87 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहा था। युद्ध समाप्त होने की खबर के बाद तेल आपूर्ति को लेकर बना डर लगभग खत्म हो गया है, जिसके कारण निवेशकों ने तेजी से बिकवाली की और कीमतों में नरमी आई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">युद्ध के दौरान सबसे बड़ी चिंता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर थी। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। अगर यह मार्ग बंद होता या लंबे समय तक बाधित रहता तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता था। लेकिन अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि ईरान के साथ समझौता पूरा हो चुका है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से सामान्य रूप से खोला जाएगा। इसके साथ ही अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने का भी फैसला लिया गया है। इस घोषणा ने तेल बाजार में राहत का माहौल पैदा कर दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई इस गिरावट का असर भारत पर भी पड़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में जब भी वैश्विक बाजार में तेल महंगा होता है, उसका असर घरेलू पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर देखने को मिलता है। पिछले कुछ महीनों में अमेरिका-ईरान तनाव के कारण तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई थी। इसका असर भारतीय उपभोक्ताओं पर भी पड़ा और पेट्रोल-डीजल के दामों में कई बार बढ़ोतरी की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मई महीने में ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों में चार बार संशोधन किया गया था। 15 मई के बाद दो सप्ताह के भीतर ईंधन के दामों में लगभग 7.5 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। उस समय तेल कंपनियों का तर्क था कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जिसके कारण लागत बढ़ गई है। अब जब हालात सामान्य होने लगे हैं और तेल की कीमतें नीचे आ रही हैं, तो आम लोगों को भी राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। 15 जून को जारी ताजा दरों के अनुसार दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। मुंबई में पेट्रोल 111.21 रुपये और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर है। कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपये और डीजल 99.02 रुपये प्रति लीटर पर बना हुआ है। वहीं चेन्नई में पेट्रोल 107.77 रुपये और डीजल 99.55 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने हाल ही में कहा था कि घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों का फैसला अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के रुख को देखते हुए किया जाएगा। ऐसे में आने वाले दिनों में यदि क्रूड ऑयल की कीमतें इसी तरह नीचे बनी रहती हैं, तो तेल कंपनियां कीमतों की समीक्षा कर सकती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/iran-america-war-ends-big-fall-in-crude-oil-eyes-on/article-55974</link>
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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 18:22:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>आज पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं, जानें आपके शहर के लेटेस्ट रेट</title>
                                    <description><![CDATA[17 मई 2026 को पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रहे। जानें आपके शहर में आज क्या हैं नए रेट और बाजार की पूरी स्थिति।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/there-is-no-change-in-the-prices-of-petrol-and/article-53594"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/petrol-diesel-price-today.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"><strong>Petrol Diesel Price Today:</strong> <span lang="hi" xml:lang="hi">17 मई 2026 को देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर कुछ राहत की खबरें आई हैं। जानकारी के अनुसार आज बड़े शहरों में ईंधन के दामों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव में उथल-पुथल के बावजूद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">घरेलू तेल कंपनियों ने रेट को स्थिर रखने का फैसला किया है। इससे आम लोगों से लेकर ट्रांसपोर्ट सेक्टर तक को थोड़ी राहत मिली है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सुबह-सुबह लोग अपने-अपने शहरों में पेट्रोल-डीजल के नए रेट चेक करते नजर आए</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने वही पुरानी कीमतें जारी कीं। नई दिल्ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुंबई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोलकाता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में भी दरें वैसी ही रहीं। खबरें हैं कि वर्तमान समय में सरकार और कंपनियां महंगाई के चलते किसी भी बढ़ोतरी से बच रही हैं। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बाजार से जुड़े जानकारों का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय हालात स्थिर रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कुछ दिनों तक यही स्थिति बनी रह सकती है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हालांकि</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तेल बाजार पूरी तरह से शांत नहीं है। मध्य पूर्व में चल रहे तनाव और कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में आए दिन के बदलाव चिंता का सबब बने हुए हैं। ईरान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इजराइल और अमेरिका से जुड़े भू-राजनीतिक हालातों ने सप्लाई में अनिश्चितता बढ़ा दी है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल सप्लाई प्रभावित होने की आशंका समय-समय पर सामने आती रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो वैश्विक तेल बाजार का एक महत्वपूर्ण रास्ता है। इस वजह से आने वाले दिनों में कीमतों पर दबाव पड़ने की संभावना भी बनी हुई है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें हर दिन सुबह 6 बजे अपडेट होती हैं और यह प्रक्रिया ऑयल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा निर्धारित की जाती है। इसमें अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑयल की कीमत</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">डॉलर-रुपया विनिमय दर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और टैक्स स्ट्रक्चर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी कारण अलग-अलग राज्यों और शहरों में ईंधन के दामों में फर्क होता है। ट्रांसपोर्ट खर्च और स्थानीय टैक्स भी इस अंतर का एक बड़ा कारण हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">फिलहाल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो रेट सामने आए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनके मुताबिक दिल्ली में पेट्रोल लगभग 94 रुपये के आसपास और मुंबई में 104 रुपये के ऊपर बना हुआ है। डीजल के दाम भी लगभग स्थिर हैं। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ निजी कंपनियों के फ्यूल स्टेशनों पर हल्की बढ़ोतरी की खबरें आई हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे कुछ शहरों में उपभोक्ताओं को थोड़ा फर्क महसूस हो सकता है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अधिकारियों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">हालात नियंत्रण में हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं और रुपये में कमजोरी आई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो घरेलू ईंधन दरों पर असर पड़ सकता है। लेकिन फिलहाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राहत की बात यह है कि आज कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है और बाजार स्थिर बना हुआ है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 13:50:35 +0530</pubDate>
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