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                <title>renewable energy - दैनिक जागरण</title>
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                <description>renewable energy RSS Feed</description>
                
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                <title>ऑस्ट्रेलिया में पीएम मोदी बोले- भारत और ऑस्ट्रेलिया की मजबूत साझेदारी दोनों देशों के भविष्य के लिए जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[मेलबर्न में भारत-ऑस्ट्रेलिया CEO फोरम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने निवेश, व्यापार, स्वच्छ ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग बढ़ाने पर दिया जोर, आज 40 हजार से अधिक भारतवंशियों से करेंगे मुलाकात।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/pm-modi-said-in-australia-strong-partnership-between-india/article-58242"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/_narendra-modi-australia-visit.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने तीन देशों के दौरे के तहत इन दिनों ऑस्ट्रेलिया में हैं। गुरुवार को उन्होंने मेलबर्न में आयोजित भारत-ऑस्ट्रेलिया CEO फोरम और इकोनॉमिक रोडमैप बिजनेस रिसेप्शन में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने दोनों देशों के बीच आर्थिक, रणनीतिक और व्यापारिक रिश्तों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत और ऑस्ट्रेलिया का भरोसेमंद साझेदार के रूप में साथ आगे बढ़ना दोनों देशों के लिए ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की आर्थिक स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रही है। वैश्विक अनिश्चितता, सप्लाई चेन में रुकावट, ऊर्जा संकट और बदलती आर्थिक परिस्थितियों के बीच भरोसेमंद साझेदारों की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे समय में भारत और ऑस्ट्रेलिया का सहयोग दोनों देशों को नए अवसरों तक पहुंचाने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों ने विश्वास और सहयोग के आधार पर मजबूत साझेदारी की नींव रखी है, जिसे अब और आगे बढ़ाने का समय है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने स्वच्छ ऊर्जा और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत वर्ष 2030 तक 500 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने और वर्ष 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा क्षमता विकसित करने के लक्ष्य पर तेजी से काम कर रहा है। इस दिशा में ऑस्ट्रेलिया की तकनीक, खनिज संसाधन और विशेष रूप से यूरेनियम की उपलब्धता दोनों देशों के सहयोग को नई मजबूती दे सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उन्होंने निवेश के क्षेत्र में भी ऑस्ट्रेलियाई उद्योग जगत को भारत आने का न्योता दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में बंदरगाह, हवाई अड्डे, सड़क, रेलवे, लॉजिस्टिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में तेजी से विकास हो रहा है। इन क्षेत्रों में ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों के लिए निवेश के बड़े अवसर मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि भारत लगातार व्यापार और निवेश के लिए अनुकूल माहौल तैयार कर रहा है, जिसका लाभ वैश्विक निवेशकों को मिल रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के राज्यों, विश्वविद्यालयों, छोटे शहरों और उद्योगों के बीच प्रत्यक्ष साझेदारी बढ़ाने का भी सुझाव दिया। उनका कहना था कि यदि राज्य-से-राज्य और सेक्टर-से-सेक्टर सहयोग को बढ़ावा दिया जाए तो इसका सीधा फायदा व्यापार, शिक्षा, कौशल विकास और नवाचार के क्षेत्र में देखने को मिलेगा। इससे स्थानीय स्तर पर भी आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उन्होंने आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौतों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते (ECTA) के लागू होने के बाद ऑस्ट्रेलिया को भारत का निर्यात लगभग दोगुना हो गया है। यह दोनों देशों के मजबूत आर्थिक संबंधों का प्रमाण है। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि व्यापक व्यापार समझौते की दिशा में आगे बढ़ने से दोनों देशों के कारोबारियों और निवेशकों के लिए नए अवसर पैदा होंगे। कार्यक्रम के बाद ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ आत्मीय मुलाकात की। दोनों नेताओं ने एक साथ सेल्फी भी खिंचवाई, जिसकी तस्वीरें चर्चा का विषय बनीं। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच विभिन्न द्विपक्षीय मुद्दों पर अनौपचारिक बातचीत भी हुई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे का सबसे बड़ा आकर्षण मेलबर्न के मार्वल स्टेडियम में आयोजित भारतीय समुदाय का कार्यक्रम माना जा रहा है। यहां करीब 40 हजार से अधिक भारतवंशियों के शामिल होने की संभावना है। प्रधानमंत्री इस कार्यक्रम को संबोधित करेंगे और भारतीय समुदाय से संवाद करेंगे। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीयों के बीच इस कार्यक्रम को लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के बीच औपचारिक द्विपक्षीय बैठक भी होगी। इस बैठक में व्यापार, रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, शिक्षा, तकनीक और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे कई अहम विषयों पर चर्चा होने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है। इसके अलावा दोनों देशों के प्रमुख उद्योगपतियों और कारोबारी प्रतिनिधियों के साथ भी बैठकें प्रस्तावित हैं, जिनमें निवेश और आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री के स्वागत के दौरान मेलबर्न में भारतीय संस्कृति की झलक भी देखने को मिली। भारतीय समुदाय की ओर से पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। कथक नृत्य, तबला वादन और ऑर्केस्ट्रा के माध्यम से अतिथियों का स्वागत किया गया। कार्यक्रम में "वंदे मातरम्" की प्रस्तुति ने विशेष आकर्षण पैदा किया। प्रधानमंत्री ने भी भारतीय समुदाय की गर्मजोशी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सराहना की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह दौरा भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंधों को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच आर्थिक, रणनीतिक और तकनीकी सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। ऐसे में इस यात्रा से व्यापार, निवेश, रक्षा और ऊर्जा जैसे कई क्षेत्रों में नए समझौतों और साझेदारी की संभावनाएं बढ़ गई हैं। ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद प्रधानमंत्री अपने विदेश दौरे के अगले चरण में न्यूजीलैंड रवाना होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 11:04:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>E20 पेट्रोल पर बड़ा बयान, रियल टेस्ट अगले साल आएगा</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने कहा—20% एथेनॉल ब्लेंडिंग जारी, नीति में बदलाव नहीं, असर का असली आकलन 2027 तक होगा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/big-statement-on-e20-petrol-real-test-will-come-next/article-57478"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/e20-petrol-india.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि देश में पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल (E20) ब्लेंडिंग का प्रयोग अभी भी चल रहा है और इसका वास्तविक प्रभाव यानी “रियल टेस्ट” अभी पूरा नहीं हुआ है। सरकार के अनुसार इस नीति के नतीजे अगले वर्ष तक स्पष्ट रूप से सामने आएंगे, जिसके बाद ही इसके दीर्घकालिक प्रभावों का सही आकलन संभव होगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब E20 पेट्रोल को लेकर देश में लगातार बहस जारी है और कई विशेषज्ञ यह आशंका जता रहे हैं कि इससे पुरानी गाड़ियों के इंजन पर असर पड़ सकता है। हालांकि सरकार ने कोर्ट में यह साफ कर दिया कि अब तक किसी तरह के ठोस वैज्ञानिक या तकनीकी सबूत नहीं मिले हैं, जिससे यह साबित हो सके कि E20 मिश्रण से वाहनों को मैकेनिकल नुकसान होता है। सरकार ने इसे ऊर्जा सुरक्षा, कच्चे तेल के आयात में कमी, किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण सुधार की दिशा में एक अहम नीति बताया है।</p>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट में यह टिप्पणी भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) की याचिका पर सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी द्वारा की गई। यह मामला कर्नाटक हाई कोर्ट के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें तेल कंपनियों को एक डिस्टिलरी के आवेदन पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया गया था। BPCL ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि हाई कोर्ट का आदेश राष्ट्रीय स्तर की एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि सरकार पहले ही E20 को एक व्यापक नीतिगत लक्ष्य के रूप में आगे बढ़ा रही है। सुनवाई के दौरान अदालत ने भी यह सवाल उठाया कि कंपनी ने पहले कर्नाटक हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच में अपील क्यों नहीं की, बजाय सीधे सुप्रीम कोर्ट आने के। इस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा कि देश के कई हाई कोर्ट में इसी तरह के मामले लंबित हैं, इसलिए इन सभी मामलों को एक साथ सुनना जरूरी हो सकता है ताकि नीति में असमानता न पैदा हो।</p>
<p style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि एथेनॉल सप्लाई वर्ष 2025-26 के अनुबंध पहले ही कई स्तरों पर अंतिम रूप दिए जा चुके हैं और अक्टूबर 2025 में इनके रिन्यूअल से पहले इस विवाद का निपटारा जरूरी है। वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने ट्रांसफर याचिका का विरोध करते हुए कहा कि इससे मामलों के निपटारे में अनावश्यक देरी होगी और नीति से जुड़े फैसलों पर असर पड़ सकता है। दूसरी ओर, अटॉर्नी जनरल ने यह भी कहा कि अलग-अलग अदालतों में चल रहे मामलों के कारण राष्ट्रीय नीति पर अस्थिरता की स्थिति बन सकती है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट में एक साथ सुनवाई उचित होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">कंपनी की ओर से यह दावा भी किया गया कि उसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता लगभग 9.90 करोड़ लीटर है, लेकिन उसे उसके अनुरूप एथेनॉल आवंटन नहीं मिला। इसी वजह से उसने अतिरिक्त आवंटन की मांग की थी। सरकार ने अदालत में स्पष्ट किया कि किसी भी कंपनी को “प्रेफरेंशियल अलोकेशन” या “बेस्ट एंडेवर” के आधार पर अतिरिक्त एथेनॉल आवंटन का कानूनी अधिकार नहीं है। यदि किसी एक कंपनी के लिए आवंटन बढ़ाया जाता है तो पूरी नीति में बदलाव करना पड़ेगा, जिसकी अनुमति कानून नहीं देता। सुनवाई के बाद सरकार ने दोहराया कि मौजूदा E20 नीति जारी रहेगी और इसमें किसी बदलाव की आवश्यकता नहीं है, जबकि वास्तविक प्रभाव का आकलन आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 09:48:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पीएम मोदी की नीदरलैंड यात्रा में बड़ा कदम, दोनों देशों के बीच हुए सेमीकंडक्टर-ग्रीन एनर्जी समेत 17 बड़े समझौते</title>
                                    <description><![CDATA[पीएम मोदी की नीदरलैंड यात्रा में 17 बड़े समझौते हुए। सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन, शिक्षा और निवेश सहयोग से भारत-नीदरलैंड रिश्तों को नई मजबूती मिली।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-step-in-pm-modis-visit-to-netherlands-17-big/article-53607"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/india-netherlands-agreements.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">15<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>17<span lang="hi" xml:lang="hi"> मई </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक की नीदरलैंड यात्रा ने भारत और नीदरलैंड के संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ लाया। हेग में हुई उच्चस्तरीय वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के बीच व्यापक चर्चा हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके नतीजे में दोनों देशों ने </span>17<span lang="hi" xml:lang="hi"> महत्वपूर्ण समझौतों और साझेदारियों पर सहमति जताई। बातचीत से यह स्पष्ट हुआ कि अब दोनों देश अपने रिश्तों को रणनीतिक साझेदारी के नए स्तर पर ले जाने की दिशा में बढ़ रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निवेश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऊर्जा और सुरक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। यह दौरा काफी खास है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि लंबे समय से दोनों देशों के बीच सहयोग तो था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इस बार इसका दायरा और गहराई दोनों बढ़ी हैं। हेग में हुई बैठकों के बाद यह साफ दिखा कि आने वाले समय में सहयोग मात्र कागजों तक सीमित नहीं रहेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि इसका असर वास्तविकता में भी नजर आएगा।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">यात्रा के दौरान सबसे ज्यादा ध्यान सेमीकंडक्टर सेक्टर में हुए समझौते पर था</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ गुजरात के धोलेरा में सेमीकंडक्टर फैब को लेकर </span>Tata Electronics <span lang="hi" xml:lang="hi">और वैश्विक कंपनी </span>ASML <span lang="hi" xml:lang="hi">के बीच </span>MoU <span lang="hi" xml:lang="hi">पर सहमति बनी। इसे भारत की चिप मैन्युफैक्चरिंग क्षमता के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्रीन हाइड्रोजन और रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्रों में भी दोनों देशों ने मिलकर काम करने का निर्णय लिया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके लिए विशेष रोडमैप और जॉइंट वर्किंग ग्रुप बनाने पर चर्चा हुई। क्रिटिकल मिनरल्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जल प्रबंधन और गुजरात के महत्वाकांक्षी काल्पसर प्रोजेक्ट पर भी तकनीकी सहयोग के समझौते किए गए हैं। वहीं </span>Mobility and Migration <span lang="hi" xml:lang="hi">समझौते के जरिए छात्रों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेशेवरों और कुशल कार्यकर्ताओं की आवाजाही को सुगम बनाने पर सहमति बनी है। सांस्कृतिक स्तर पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐतिहासिक चोल ताम्रपत्र भारत को लौटाने पर भी नीदरलैंड ने अपनी सहमति जताई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो दोनों देशों के सांस्कृतिक रिश्तों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शिक्षा और रिसर्च के क्षेत्र में भी कई समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे कि </span>Nalanda University <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>University of Groningen <span lang="hi" xml:lang="hi">के बीच अकादमिक सहयोग</span>, Leiden University Libraries <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>Archaeological Survey of India <span lang="hi" xml:lang="hi">के बीच साझेदारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और उच्च शिक्षा से जुड़ी कई </span>MoU <span lang="hi" xml:lang="hi">शामिल हैं। इसके अतिरिक्त</span>, Indian Council of Medical Research <span lang="hi" xml:lang="hi">और नीदरलैंड के </span>RIVM <span lang="hi" xml:lang="hi">के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा दी गई है। सीमा शुल्क सहयोग को मजबूत करने के लिए भी एक महत्वपूर्ण समझौता किया गया है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इन सभी समझौतों के साथ</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">दोनों देशों ने </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">से </span>2030 <span lang="hi" xml:lang="hi">के लिए </span>‘India–Netherlands Strategic Partnership Roadmap’ <span lang="hi" xml:lang="hi">या </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">विजन </span>2030’ <span lang="hi" xml:lang="hi">को भी पेश किया है। इस रोडमैप में स्पष्ट किया गया है कि आने वाले समय में ध्यान केवल पारंपरिक व्यापार या कूटनीति तक सीमित नहीं रहेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नई तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइबर सुरक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इंडो-पैसिफिक रणनीति और ऊर्जा परिवर्तन जैसे क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया जाएगा। नीति आयोग और नीदरलैंड सरकार के बीच ऊर्जा परिवर्तन परियोजनाओं को लेकर भी एक संयुक्त सहमति बनी है। कृषि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डेयरी और हेल्थ सेक्टर में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भी ठोस योजनाएँ बनाई गई हैं। कुल मिलाकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये समझौते भारत और नीदरलैंड के रिश्तों को एक नई तकनीकी और रणनीतिक दिशा देने के प्रयास के रूप में देखे जा रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ विकास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोजगार और वैश्विक सप्लाई चेन में दोनों देशों की भूमिका को और मजबूत करने की आशा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 16:03:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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