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                <title>Indian Navy - दैनिक जागरण</title>
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                <title>भारत-न्यूजीलैंड के बीच 18 बड़े समझौते, FTA और निवेश पर बनी सहमति</title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विशाखापट्टनम में प्रोजेक्ट-17A के छठे स्टेल्थ फ्रिगेट INS महेंद्रगिरि को नौसेना में शामिल किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/18-major-agreements-fta-and-investment-agreed-between-india-and/article-58483"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ins-mahendragiri.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत को शुक्रवार को एक और बड़ी मजबूती मिली, जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम स्थित नेवल डॉकयार्ड में अत्याधुनिक स्टेल्थ युद्धपोत INS महेंद्रगिरि को औपचारिक रूप से नौसेना में शामिल किया। यह प्रोजेक्ट-17A के तहत तैयार किया गया नीलगिरि श्रेणी का छठा स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट है। इस युद्धपोत की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके निर्माण में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी उपकरण, तकनीक और प्रणालियों का उपयोग किया गया है। इससे देश की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता को नई मजबूती मिली है। समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत अब केवल रक्षा उपकरणों का उपभोक्ता नहीं, बल्कि आधुनिक सैन्य तकनीक विकसित करने वाला देश बन रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि INS महेंद्रगिरि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री सुरक्षा, रणनीतिक क्षमता और परिचालन दक्षता को नई ऊंचाई देगा। कार्यक्रम में नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी, रक्षा मंत्रालय के प्रतिनिधि और रक्षा उद्योग से जुड़े कई विशेषज्ञ भी मौजूद रहे। इस अवसर पर राजनाथ सिंह ने आंध्र प्रदेश के कुरनूल में विकसित किए जा रहे ड्रोन क्लस्टर का भी उल्लेख किया और कहा कि आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र देश का प्रमुख ड्रोन हब बनकर उभरेगा। उन्होंने कहा कि जिस तरह सूरत अपनी हीरा उद्योग और बेंगलुरु सूचना प्रौद्योगिकी के लिए पहचाना जाता है, उसी तरह कुरनूल ड्रोन निर्माण और नवाचार का राष्ट्रीय केंद्र बनेगा।</p>
<p>INS महेंद्रगिरि को भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने डिजाइन किया है, जबकि इसका निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) ने किया है। इसके निर्माण में देशभर की अनेक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) इकाइयों ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार इस परियोजना से घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा मिलने के साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए हैं। यह युद्धपोत अत्याधुनिक सरफेस-टू-सरफेस और सरफेस-टू-एयर मिसाइल प्रणालियों, उन्नत सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और एंटी-सबमरीन वॉरफेयर क्षमता से लैस है। इसमें इंटीग्रेटेड कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम लगाया गया है, जिससे यह हवा, समुद्र की सतह और समुद्र के भीतर मौजूद खतरों का एक साथ प्रभावी ढंग से सामना कर सकता है। जहाज में स्टेल्थ तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे रडार पर इसकी पहचान करना कठिन हो जाता है। इसके अलावा इसमें कम्बाइंड डीजल एंड गैस (CODOG) प्रोपल्शन सिस्टम लगाया गया है, जो इसे लंबी दूरी तक तेज गति से संचालन करने में सक्षम बनाता है। भारतीय नौसेना का मानना है कि यह युद्धपोत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री स्थिरता बनाए रखने और राष्ट्रीय हितों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल और समुद्री चुनौतियों को देखते हुए इस तरह के अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता को और मजबूत करेंगे।</p>
<p>INS महेंद्रगिरि प्रोजेक्ट-17A के तहत तैयार किए जा रहे कुल सात स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट्स में से एक है। इस परियोजना के अंतर्गत चार युद्धपोतों का निर्माण मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड, मुंबई और तीन युद्धपोतों का निर्माण गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स, कोलकाता द्वारा किया जा रहा है। प्रोजेक्ट-17A को पहले के शिवालिक श्रेणी (प्रोजेक्ट-17) का उन्नत संस्करण माना जाता है। इसमें पहली बार बड़े स्तर पर इंटीग्रेटेड ब्लॉक कंस्ट्रक्शन तकनीक का उपयोग किया गया है। इस तकनीक में जहाज के विभिन्न हिस्सों का निर्माण अलग-अलग किया जाता है और बाद में उन्हें जोड़कर पूरा युद्धपोत तैयार किया जाता है। इससे निर्माण प्रक्रिया अधिक तेज, सटीक और गुणवत्ता के अनुरूप होती है। INS महेंद्रगिरि का नाम ओडिशा के प्रसिद्ध महेंद्रगिरि पर्वत के नाम पर रखा गया है, जिसका भारतीय संस्कृति और पौराणिक परंपरा में विशेष महत्व है। मान्यता है कि भगवान परशुराम ने इसी पर्वत पर तपस्या की थी और रामायण में भी इसका उल्लेख मिलता है। भारतीय नौसेना अपनी कई युद्धपोतों के नाम देश के ऐतिहासिक पर्वतों, नदियों और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े स्थलों पर रखती है, जिससे आधुनिक सैन्य शक्ति के साथ भारतीय परंपरा और सांस्कृतिक पहचान का भी सम्मान बना रहता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 14:44:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>चीन के मिसाइल परीक्षण ने बढ़ाई हिंद-प्रशांत की चिंता, परमाणु पनडुब्बी से बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च के बाद भारत भी सतर्क</title>
                                    <description><![CDATA[चीन की समुद्र आधारित परमाणु क्षमता में बढ़ोतरी से क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण बदलने की आशंका, भारत के लिए समुद्री निगरानी और रक्षा तैयारियों को मजबूत करना होगा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/chinas-missile-test-increases-the-concern-of-indo-pacific-india-also/article-58131"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/china-missile-test.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक बार फिर रणनीतिक तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। चीन ने परमाणु ऊर्जा से संचालित अपनी पनडुब्बी से लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण कर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इस परीक्षण को चीन ने नियमित सैन्य अभ्यास का हिस्सा बताया है, लेकिन अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड समेत कई देशों ने इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर संकेत माना है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल एक सैन्य परीक्षण नहीं, बल्कि चीन की बदलती रणनीति और समुद्र आधारित परमाणु शक्ति को मजबूत करने का स्पष्ट संदेश भी है।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारों के अनुसार इस परीक्षण में चीन ने अपनी नई पीढ़ी की सबमरीन लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM) का इस्तेमाल किया है, जिसे परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम माना जाता है। माना जा रहा है कि यह मिसाइल हजारों किलोमीटर दूर तक लक्ष्य भेदने की क्षमता रखती है। इसका सबसे बड़ा रणनीतिक महत्व यह है कि ऐसी मिसाइलें समुद्र में गहराई तक मौजूद परमाणु पनडुब्बियों से दागी जा सकती हैं, जिससे दुश्मन के लिए उनका पता लगाना बेहद कठिन हो जाता है। चीन लंबे समय से अपनी समुद्री परमाणु क्षमता को मजबूत करने पर काम कर रहा है। पहले उसका सैन्य फोकस मुख्य रूप से दक्षिण चीन सागर और ताइवान के आसपास देखा जाता था, लेकिन अब उसकी गतिविधियां हिंद महासागर और व्यापक हिंद-प्रशांत क्षेत्र तक फैल चुकी हैं। इसी वजह से भारत सहित कई देशों की रणनीतिक चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत के लिए यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में चीनी नौसेना की पनडुब्बियां कई बार हिंद महासागर क्षेत्र में देखी गई हैं। इसके अलावा जिबूती में चीन का सैन्य अड्डा, पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह में उसकी सक्रियता और श्रीलंका के हम्बनटोटा बंदरगाह पर बढ़ता प्रभाव पहले से ही भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। यदि चीन अधिक आधुनिक, कम शोर वाली और लंबी दूरी की मिसाइलों से लैस परमाणु पनडुब्बियों की तैनाती बढ़ाता है तो हिंद महासागर में उसकी रणनीतिक मौजूदगी और मजबूत हो सकती है। समुद्र आधारित परमाणु हथियार किसी भी देश की रणनीतिक ताकत का महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते हैं। पनडुब्बी से छोड़ी गई बैलिस्टिक मिसाइलों का पता लगाना बेहद मुश्किल होता है और यही कारण है कि दुनिया की प्रमुख सैन्य शक्तियां अपनी नौसेना में इस क्षमता को लगातार विकसित कर रही हैं। चीन का हालिया परीक्षण इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत की परमाणु नीति "क्रेडिबल मिनिमम डेटेरेंस" और "नो फर्स्ट यूज" के सिद्धांत पर आधारित है। ऐसे में यदि चीन अपनी समुद्र आधारित परमाणु क्षमता तेजी से बढ़ाता है तो भारत को भी अपने रणनीतिक प्रतिरोधक तंत्र को और मजबूत करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में भारत को अधिक परमाणु पनडुब्बियों के निर्माण, लंबी दूरी की K-4 और K-5 बैलिस्टिक मिसाइलों के विकास तथा समुद्री निगरानी प्रणाली के विस्तार पर और अधिक ध्यान देना होगा। चीन की बढ़ती समुद्री सक्रियता का असर केवल सैन्य संतुलन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र की भू-राजनीति पर भी पड़ सकता है। भारत पहले से उत्तरी सीमा पर चीन और पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान जैसी दोहरी सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है। यदि समुद्री क्षेत्र में भी चीन की मौजूदगी लगातार बढ़ती है तो भारत को भूमि, वायु और समुद्र—तीनों मोर्चों पर अपनी रक्षा तैयारियों को संतुलित तरीके से मजबूत करना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बदलते परिदृश्य में अंडमान एवं निकोबार कमांड की रणनीतिक भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाएगी। यह कमांड मलक्का जलडमरूमध्य के निकट स्थित है, जहां से दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्ग गुजरते हैं। यदि चीन की पनडुब्बियों की गतिविधियां इस क्षेत्र में बढ़ती हैं तो भारत को पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता, समुद्री निगरानी ड्रोन, आधुनिक सोनार सिस्टम और P-8I समुद्री निगरानी विमानों की तैनाती और बढ़ानी पड़ सकती है। चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों का एक और बड़ा प्रभाव QUAD समूह पर भी पड़ सकता है। भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया पहले से ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मुक्त और सुरक्षित समुद्री मार्ग बनाए रखने के लिए सहयोग कर रहे हैं। ऐसे में समुद्री सुरक्षा, खुफिया जानकारी साझा करने और संयुक्त नौसैनिक अभ्यासों की संख्या आने वाले समय में और बढ़ सकती है। मालाबार जैसे संयुक्त अभ्यास इस सहयोग को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन अपनी सैन्य शक्ति बढ़ाकर ताइवान पर दबाव बनाए रखना चाहता है। साथ ही वह प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका की रणनीतिक बढ़त को चुनौती देने और वैश्विक स्तर पर अपनी सैन्य क्षमता का प्रदर्शन करने की कोशिश भी कर रहा है। समुद्र आधारित परमाणु क्षमता को मजबूत करना इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। दूसरी ओर भारत भी अपनी समुद्री शक्ति को लगातार मजबूत कर रहा है। भारतीय नौसेना के पास पहले से परमाणु पनडुब्बियां, बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम, आधुनिक समुद्री निगरानी विमान और मजबूत नौसैनिक कमांड मौजूद हैं। इसके अलावा मित्र देशों के साथ बढ़ता रक्षा सहयोग और हिंद महासागर क्षेत्र में सक्रिय रणनीतिक निगरानी भारत की सुरक्षा नीति का अहम हिस्सा बन चुका है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 10:12:49 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अदन की खाड़ी में भारतीय नौसेना का बड़ा ऑपरेशन, INS त्रिकंड ने समुद्री लुटेरों की साजिश की नाकाम</title>
                                    <description><![CDATA[भारत के लिए महत्वपूर्ण कार्गो लेकर आ रहे व्यापारी जहाज MV Golden Arsenal पर हमले की कोशिश भारतीय नौसेना ने समय रहते विफल कर दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/indian-navys-major-operation-in-the-gulf-of-aden-ins/article-57707"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ins-trikand.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारतीय नौसेना ने एक बार फिर समुद्री सुरक्षा के प्रति अपनी तत्परता और क्षमता का प्रदर्शन करते हुए अदन की खाड़ी में समुद्री लुटेरों की एक बड़ी कोशिश को नाकाम कर दिया। बुधवार रात भारत के लिए महत्वपूर्ण कार्गो लेकर आ रहे व्यापारी जहाज MV Golden Arsenal पर समुद्री डाकुओं ने कब्जा करने की कोशिश की, लेकिन भारतीय युद्धपोत INS त्रिकंड की त्वरित कार्रवाई के चलते उनका मंसूबा सफल नहीं हो सका। नौसेना के पहुंचते ही लुटेरे मौके से फरार हो गए। इसके बाद भारतीय नौसेना के विशेष कमांडो दस्ते मार्कोस (MARCOS) ने जहाज पर चढ़कर पूरी तलाशी ली और जहाज को सुरक्षित घोषित किया। इस घटना में किसी भी चालक दल के सदस्य के घायल होने या जहाज को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने नहीं आई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> MV Golden Arsenal एक व्यावसायिक मालवाहक जहाज है, जो 1 जुलाई को यमन के अदन बंदरगाह से रवाना हुआ था। जहाज भारत के लिए महत्वपूर्ण कार्गो लेकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहा था। जहाज पर कुल 21 चालक दल के सदस्य मौजूद थे, जिनमें एक भारतीय नागरिक भी शामिल था। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, अदन की खाड़ी में डीजिबूती से करीब 300 नॉटिकल मील पूर्व-उत्तर-पूर्व की दिशा में यात्रा के दौरान समुद्री लुटेरों ने तेज रफ्तार छोटी नौकाओं के जरिए जहाज के करीब पहुंचकर उस पर चढ़ने की कोशिश की। हालात अचानक बिगड़ते देख चालक दल ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया और खुद को जहाज के सुरक्षित कमरे में बंद कर लिया। चालक दल ने सुरक्षित स्थान से रेडियो संचार प्रणाली के जरिए तत्काल मदद की गुहार लगाई। संकट संदेश मिलते ही क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा मिशन पर तैनात भारतीय नौसेना का युद्धपोत INS त्रिकंड बिना समय गंवाए घटनास्थल की ओर रवाना हुआ। जैसे ही युद्धपोत हमलावरों के करीब पहुंचा, समुद्री लुटेरों ने स्थिति का अंदाजा लगाते हुए वहां से भागना ही बेहतर समझा। नौसेना के अधिकारियों का कहना है कि भारतीय युद्धपोत की तेज प्रतिक्रिया और उसकी मौजूदगी ने संभावित समुद्री डकैती की घटना को पूरी तरह विफल कर दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसके बाद भारतीय नौसेना के विशेष बल मार्कोस कमांडो हेलीकॉप्टर और तेज नौकाओं की मदद से व्यापारी जहाज पर पहुंचे। कमांडो ने जहाज के हर हिस्से की गहन तलाशी ली ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई हमलावर जहाज पर छिपा न हो। जांच पूरी होने के बाद जहाज और उसके चालक दल को सुरक्षित घोषित कर दिया गया। नौसेना ने बताया कि चालक दल के सभी 21 सदस्य पूरी तरह सुरक्षित हैं और जहाज अपनी निर्धारित यात्रा आगे जारी रखने की स्थिति में है। जहाज पर मौजूद कार्गो भारत के लिए रणनीतिक और व्यावसायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि सुरक्षा कारणों से कार्गो की प्रकृति या उसके गंतव्य से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। अधिकारियों का कहना है कि व्यापारी जहाजों की सुरक्षा भारतीय नौसेना की प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल है, विशेषकर उन समुद्री मार्गों पर जहां समुद्री डकैती की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। अदन की खाड़ी और पश्चिमी हिंद महासागर लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों के लिए संवेदनशील क्षेत्र माने जाते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह पहली बार नहीं है जब INS त्रिकंड ने समुद्री डकैती की कोशिश को नाकाम किया हो। बीते दो महीनों में यह तीसरी ऐसी घटना है जिसमें इस युद्धपोत ने समय रहते हस्तक्षेप कर व्यापारी जहाजों को सुरक्षित बचाया है। इससे पहले 19 जून को पश्चिमी हिंद महासागर में व्यापारी जहाज MV Fareeda से संकट संदेश मिलने पर भी INS त्रिकंड ने तत्काल कार्रवाई की थी और संभावित समुद्री डकैती को विफल कर दिया था। उस समय भी भारतीय नौसेना ने जहाज और उसके चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए समुद्री मार्ग को सुरक्षित बनाए रखा था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसके अलावा 27 मई को भारतीय नौसेना के युद्धपोत INS कोलकाता ने भी पश्चिमी हिंद महासागर में MV Mashallah नामक व्यापारी जहाज के पास संदिग्ध समुद्री डकैती की गतिविधियों को विफल किया था। उस अभियान में नौसेना ने हेलीकॉप्टर, निगरानी उपकरणों और बोर्डिंग टीम की मदद से पूरे क्षेत्र की तलाशी ली थी। समय पर की गई कार्रवाई के कारण संभावित खतरा टल गया और व्यापारी जहाज सुरक्षित अपने गंतव्य की ओर बढ़ सका।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारतीय नौसेना लगातार यह दोहराती रही है कि वह हिंद महासागर क्षेत्र में 'प्राथमिक सुरक्षा साझेदार' और 'फर्स्ट रिस्पॉन्डर' की भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। नौसेना का उद्देश्य केवल भारतीय जहाजों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों को सुरक्षित बनाए रखना भी उसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। हाल के वर्षों में समुद्री डकैती की घटनाओं में कमी आई है, लेकिन संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। ऐसे में भारतीय नौसेना लगातार निगरानी, गश्त और त्वरित प्रतिक्रिया के जरिए समुद्री सुरक्षा को मजबूत बनाए हुए है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 06:06:45 +0530</pubDate>
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                <title>होर्मुज पार कर भारत पहुंचा LPG टैंकर, 20 हजार टन गैस लेकर कांडला पहुंची खेप</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान तनाव के बीच एक और LPG टैंकर सुरक्षित होर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत पहुंचा। 20 हजार टन गैस लेकर जहाज कांडला पोर्ट पहुंचा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/lpg-tanker-crossed-hormuz-and-reached-india-consignment-reached-kandla/article-53608"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/hormuz-strait-lpg-news-india-energy.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ईरान और पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच भारत के लिए कुछ राहत की खबर आई है। एक और </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">LPG <span lang="hi" xml:lang="hi">टैंकर सुरक्षित तरीके से होर्मुज स्ट्रेट पार कर गुजरात के कांडला पोर्ट पहुंच गया है। मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला टैंकर </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">सिमी</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">लगभग 20 हजार टन </span>LPG <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकर भारत पहुंचा है। बताया जा रहा है कि युद्ध जैसे हालात के बावजूद समुद्री रास्तों पर निगरानी बढ़ाई जा रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि ऊर्जा सप्लाई प्रभावित न हो। </span>ANI <span lang="hi" xml:lang="hi">की रिपोर्ट के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक 15</span> LPG <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाज सुरक्षित रूप से भारत आ चुके हैं। जब दुनिया की नजर होर्मुज स्ट्रेट पर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब यह खेप भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">प्रारंभिक जानकारी के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">टैंकर </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">सिमी</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">ने 13 मई को होर्मुज स्ट्रेट पार किया था। इस दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने लगातार जहाज की मूवमेंट पर नज़र रखी। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि भारत आने वाला एक और </span>LPG <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाज </span>‘MV <span lang="hi" xml:lang="hi">सनशाइन</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">भी हाल ही में सुरक्षित तरीके से इस समुद्री मार्ग को पार कर चुका है। होर्मुज स्ट्रेट विश्व के सबसे व्यस्त और संवेदनशील समुद्री व्यापारिक रास्तों में से एक है। खाड़ी देशों से निकलने वाला अधिकांश तेल और गैस इसी रास्ते से होकर विभिन्न देशों तक पहुंचता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी तरह का सैन्य तनाव ऊर्जा सप्लाई और कीमतों पर सीधा असर डाल सकता है। पिछले कुछ दिनों से इसी चिंता ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल मचाई हुई है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अधिकारियों का कहना है कि भारतीय जहाजों और गैस टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए भारतीय नौसेना सहित कई एजेंसियां सक्रिय हैं। समुद्री निगरानी बढ़ा दी गई है और जहाजों को संवेदनशील इलाकों में विशेष सुरक्षा अलर्ट के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से बातचीत में भरोसा दिलाया कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षा बनाए रखने की अपनी जिम्मेदारी निभाएगा। उन्होंने कहा कि मित्र देशों को व्यापारिक सुरक्षा के मामले में ईरान पर भरोसा होना चाहिए। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने भी कहा कि क्षेत्र में हालात सामान्य होने पर होर्मुज स्ट्रेट और भी अधिक सुरक्षित बनेगा। इस समय भारत की नजर लगातार ऊर्जा सप्लाई पर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि घरेलू जरूरतों के लिए देश काफी हद तक आयातित तेल और गैस पर निर्भर है। ऐसे में </span>LPG <span lang="hi" xml:lang="hi">टैंकरों का सुरक्षित भारत आना सरकार और बाजार दोनों के लिए राहत की बात है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 16:03:23 +0530</pubDate>
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