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                <title>Crime - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Crime RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>1.69 लाख का इनामी अंतरराज्यीय तस्कर गिरफ्तार, चरवाहा बनकर 15 दिन रेकी के बाद ‘ऑपरेशन नीलमणि’ में मिली सफलता</title>
                                    <description><![CDATA[भगवान कामतानाथ के दर्शन के बाद करीब पांच किलोमीटर की पदयात्रा परिक्रमा की, श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर किया स्वागत।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/interstate-smuggler-with-a-reward-of-rs-169-lakh-arrested/article-58274"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/sunil-rawat-meena.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजस्थान और मध्य प्रदेश पुलिस के लिए लंबे समय से चुनौती बने 1.69 लाख रुपये के इनामी अंतरराज्यीय तस्कर सुनील रावत मीणा को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया है। राजस्थान पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने मध्य प्रदेश पुलिस के सहयोग से चलाए गए विशेष अभियान ‘ऑपरेशन नीलमणि’ के तहत यह बड़ी सफलता हासिल की। करीब आठ महीने तक लगातार निगरानी, तकनीकी सर्विलांस और गुप्त सूचनाओं के आधार पर की गई कार्रवाई के बाद आरोपी को मध्य प्रदेश के नीमच जिले के जीरन थाना क्षेत्र से दबोच लिया गया। गिरफ्तारी के बाद उसे कड़ी सुरक्षा के बीच राजस्थान लाया गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार 27 वर्षीय सुनील रावत मीणा राजस्थान के नारकोटिक्स मामलों के टॉप-25 अपराधियों में शामिल था। उस पर मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध हथियार रखने, हत्या के प्रयास, धोखाधड़ी और अन्य गंभीर अपराधों सहित 19 से अधिक मामले दर्ज हैं। लंबे समय से फरार रहने के कारण वह दोनों राज्यों की पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच में सामने आया कि गिरफ्तारी से बचने के लिए सुनील जंगलों में लगातार अपने ठिकाने बदलता रहता था। वह किसी एक स्थान पर अधिक समय तक नहीं रुकता था, जिससे पुलिस के लिए उसकी सटीक लोकेशन का पता लगाना बेहद मुश्किल हो जाता था। उसकी पत्नी तय स्थान पर खाना छोड़ जाती थी और उसके सहयोगी वह भोजन जंगल में छिपे सुनील तक पहुंचाते थे। इसी नेटवर्क के कारण वह कई महीनों तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस पूरे नेटवर्क को तोड़ने के लिए एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने बेहद गोपनीय रणनीति तैयार की। टीम के एक कॉन्स्टेबल को चरवाहे के वेश में करीब 15 दिनों तक गांव और आसपास के इलाके में तैनात किया गया। वह स्थानीय लोगों के बीच रहकर सुनील की गतिविधियों, उसके संपर्कों और आने-जाने के संभावित रास्तों की जानकारी जुटाता रहा। इस दौरान पुलिस मुख्यालय से तकनीकी निगरानी भी लगातार जारी रही।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच में यह भी सामने आया कि सुनील गांव की एक युवती के संपर्क में था। पुलिस के अनुसार वह एक छोटे बच्चे के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान करता था ताकि किसी को उस पर शक न हो। पुलिस ने उसके इस संचार तंत्र पर भी नजर रखी और कई महत्वपूर्ण इनपुट जुटाए। इन्हीं सूचनाओं के आधार पर टीम ने गिरफ्तारी की योजना को अंतिम रूप दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">7 जुलाई की रात पुलिस को सूचना मिली कि सुनील अपने घर पहुंचा हुआ है और वहां दावत चल रही है। इसी दौरान इलाके में तेज बारिश शुरू हो गई। पुलिस ने आकलन किया कि मौसम खराब होने के कारण आरोपी उस रात वापस जंगल नहीं जा सकेगा। इसी मौके का फायदा उठाते हुए आधी रात को एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स और मध्य प्रदेश पुलिस की संयुक्त टीम ने नीमच जिले के गमेरपुरा गांव स्थित उसके घर की चारों ओर से घेराबंदी कर दी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस टीम ने दरवाजा खटखटाया तो सबसे पहले आरोपी की पत्नी बाहर आई। उसने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश करते हुए कहा कि घर में कोई नहीं है। हालांकि टीम पहले से मिली जानकारी के आधार पर पूरी तरह आश्वस्त थी कि आरोपी अंदर मौजूद है। इसके बाद घर की बारीकी से तलाशी शुरू की गई। तलाशी के दौरान एक कमरे में ड्रम के पीछे रजाई ओढ़कर छिपा सुनील अर्द्धनग्न अवस्था में मिला। पुलिस ने तुरंत उसे हिरासत में ले लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गिरफ्तारी के समय आरोपी ने अपनी पहचान छिपाने के लिए खुद को ‘दिनेश’ बताया, लेकिन पूछताछ और दस्तावेजों के मिलान के बाद उसकी असली पहचान सामने आ गई। पुलिस को आशंका थी कि उसके साथी मौके पर पहुंच सकते हैं, इसलिए बिना समय गंवाए टीम आरोपी को लेकर तुरंत राजस्थान के लिए रवाना हो गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों के मुताबिक सुनील पर कई गंभीर आरोप हैं। उस पर राजस्थान के पाली जिले के सांडेराव और देसूरी क्षेत्रों के अलावा प्रतापगढ़ जिले की छोटी सादड़ी में पुलिस टीमों पर फायरिंग करने के मामले दर्ज हैं। इन हमलों में पुलिसकर्मी रणवीर और चंद्रपाल घायल हुए थे। इसके अलावा उसने मध्य प्रदेश के जीरन थाना क्षेत्र में भी पुलिस पर हमला किया था। लगातार पुलिस पर हमले और मादक पदार्थों की तस्करी में सक्रिय भूमिका के कारण उसे बेहद खतरनाक अपराधी माना जाता था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">‘ऑपरेशन नीलमणि’ राजस्थान पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स और मध्य प्रदेश पुलिस का संयुक्त अभियान था। इस अभियान का उद्देश्य राजस्थान और मध्य प्रदेश में सक्रिय बड़े ड्रग नेटवर्क को तोड़ना और लंबे समय से फरार चल रहे अपराधियों को गिरफ्तार करना था। आठ महीने तक चली इस कार्रवाई में तकनीकी निगरानी, खुफिया सूचनाओं और जमीनी स्तर पर की गई रेकी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस का कहना है कि सुनील की गिरफ्तारी से मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का खुलासा होने की उम्मीद है। अब उससे पूछताछ कर उसके सहयोगियों, सप्लाई चेन, वित्तीय लेनदेन और अन्य राज्यों में फैले संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस कार्रवाई से राजस्थान और मध्य प्रदेश में सक्रिय ड्रग तस्करी के नेटवर्क पर प्रभावी चोट पहुंचेगी और आने वाले दिनों में कई अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी भी हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 13:14:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तेलंगाना के DSP के पास 300 करोड़ रुपये की कथित बेनामी संपत्ति का खुलासा, एसीबी की कार्रवाई से मचा हड़कंप</title>
                                    <description><![CDATA[16 ठिकानों पर छापेमारी के बाद गिरफ्तारी, रिश्तेदारों और सहयोगियों के नाम पर खरीदी गई करोड़ों की संपत्तियां; डायरी से खुले कई अहम राज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/telangana-dsp-reveals-alleged-benami-property-worth-rs-300-crores/article-58130"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/telangana-dsp.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">तेलंगाना में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच एक बड़े पुलिस अधिकारी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला सामने आने से प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई है। हैदराबाद में पुलिस कंप्यूटर सर्विसेज में तैनात डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (डीएसपी) संकीरेड्डी भीम रेड्डी को कथित तौर पर करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्ति रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। तेलंगाना एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की शुरुआती जांच में करीब 300 करोड़ रुपये की संपत्तियों का खुलासा हुआ है, जिन्हें कथित रूप से रिश्तेदारों, दोस्तों, सहयोगियों और बेनामी व्यक्तियों के नाम पर खरीदा गया था। मामले की जांच पिछले कई दिनों से चल रही थी। एसीबी ने 2 जुलाई को डीएसपी से जुड़े 16 अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी। तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी, सोना, चांदी, बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज और संपत्ति के रिकॉर्ड बरामद किए गए। जांच पूरी होने के बाद सोमवार देर शाम आरोपी अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया गया और मंगलवार सुबह उन्हें अदालत में पेश किया गया।</p>
<p>जांच एजेंसी के अनुसार छापेमारी के दौरान डीएसपी के कब्जे से करीब 3.60 लाख रुपये नकद, लगभग 2 किलोग्राम सोने के आभूषण, करीब 20 किलोग्राम चांदी के सामान और विभिन्न बैंक खातों में लगभग 20 लाख रुपये की राशि मिली। हालांकि जांच का सबसे अहम हिस्सा वह निजी डायरी साबित हुई, जिसने पूरे मामले को नई दिशा दे दी। एसीबी अधिकारियों के मुताबिक तलाशी के दौरान भीम रेड्डी की हस्तलिखित एक निजी डायरी मिली, जिसमें उनकी संपत्तियों, निवेश, वित्तीय लेनदेन, देनदारियों और कथित बेनामीदारों के नाम दर्ज थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि इस डायरी में कई ऐसी जानकारियां थीं, जिनकी मदद से एजेंसी को नई संपत्तियों और निवेश का पता चला।</p>
<p>जांच में यह भी खुलासा हुआ कि डीएसपी ने मई महीने में चारधाम यात्रा पर जाने से पहले इस डायरी की स्कैन कॉपी अपने दोनों बेटों को व्हाट्सएप के माध्यम से भेजी थी। माना जा रहा है कि यात्रा के दौरान किसी अनहोनी की आशंका को देखते हुए उन्होंने अपनी वित्तीय जानकारी सुरक्षित रखने के उद्देश्य से ऐसा किया था। यही दस्तावेज अब जांच एजेंसी के लिए सबसे महत्वपूर्ण सबूत बन गया है। प्रारंभिक जांच के अनुसार आरोपी अधिकारी ने तेलंगाना और कर्नाटक के कई शहरों में बड़ी संख्या में अचल संपत्तियां खरीदी थीं। इनमें कृषि भूमि, प्लॉट, आवासीय भवन, व्यावसायिक परिसरों और अन्य निवेश शामिल बताए जा रहे हैं। इन संपत्तियों का स्वामित्व सीधे उनके नाम पर नहीं था, बल्कि रिश्तेदारों, मित्रों और सहयोगियों के नाम पर दर्ज किया गया था। एसीबी इन्हें कथित बेनामी संपत्ति मानकर उनकी कानूनी जांच कर रही है।</p>
<p>जांच अधिकारियों का कहना है कि बरामद दस्तावेजों और डायरी के आधार पर संपत्तियों की वास्तविक कीमत का आकलन किया जा रहा है। शुरुआती अनुमान लगभग 300 करोड़ रुपये का है, लेकिन विस्तृत जांच पूरी होने के बाद यह आंकड़ा और बढ़ भी सकता है। एजेंसी अब इन संपत्तियों से जुड़े बैंक रिकॉर्ड, रजिस्ट्री दस्तावेज, निवेश विवरण और आय के स्रोत की भी जांच कर रही है। आय से अधिक संपत्ति के मामलों में यह जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि आरोपी एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी हैं और लंबे समय से विभिन्न जिम्मेदार पदों पर कार्यरत रहे हैं। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सरकारी सेवा के दौरान अर्जित आय और घोषित संपत्ति के मुकाबले यह निवेश किस प्रकार किया गया। यदि आय के वैध स्रोत नहीं मिलते हैं तो आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p>एसीबी का कहना है कि मामले में अभी कई वित्तीय लेनदेन की जांच बाकी है। कुछ संपत्तियों के दस्तावेज और बैंक खातों की जानकारी भी जुटाई जा रही है। इसके अलावा जिन लोगों के नाम पर संपत्तियां खरीदी गई हैं, उनसे भी पूछताछ की जाएगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वे वास्तविक मालिक हैं या केवल नाम मात्र के बेनामीदार। इस कार्रवाई के बाद राज्य के प्रशासनिक और पुलिस महकमे में भी चर्चा तेज हो गई है। भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार अभियान चला रही एसीबी का कहना है कि किसी भी सरकारी अधिकारी के खिलाफ यदि आय से अधिक संपत्ति की विश्वसनीय शिकायत मिलती है तो निष्पक्ष जांच की जाएगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 10:12:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भोपाल के होटल में हथियारबंद बदमाशों का तांडव, तलवार-चाकू से हमला; CCTV में कैद हुई पूरी वारदात</title>
                                    <description><![CDATA[मिसरोद क्षेत्र के जैन ब्रदर्स होटल में 10-15 बदमाशों ने चार युवकों, शेफ और कर्मचारियों पर किया हमला। एक युवक गंभीर रूप से घायल, पुलिस CCTV फुटेज के आधार पर आरोपियों की तलाश में जुटी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/attack-by-armed-miscreants-in-bhopal-hotel-with-sword-and/article-57941"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bhopal-hotel-attack.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भोपाल के मिसरोद थाना क्षेत्र स्थित बंगरसिया-भोजपुर रोड पर शनिवार रात उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब 10 से 15 हथियारबंद बदमाश एक होटल में घुस आए और वहां मौजूद लोगों पर जानलेवा हमला कर दिया। तलवार, चाकू, हॉकी स्टिक और बेसबॉल बैट से लैस आरोपियों ने पहले होटल के भीतर तोड़फोड़ की, फिर चार युवकों को निशाना बनाया। बीच-बचाव करने पहुंचे होटल के शेफ और कर्मचारियों के साथ भी मारपीट की गई। पूरी घटना होटल में लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो गई, जिसके आधार पर पुलिस आरोपियों की पहचान करने में जुटी है।</p>
<p style="text-align:justify;">घटना शनिवार रात करीब 10:45 बजे जैन ब्रदर्स होटल में हुई। हमले में 24 वर्षीय लीलाधर कुशवाहा गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें तत्काल एम्स भोपाल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने उनकी मेडिकल लीगल केस (MLC) रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें 10 से 12 लोगों के समूह द्वारा धारदार हथियारों से हमला किए जाने का उल्लेख किया गया है। एक अन्य युवक भी घायल हुआ, जिसका प्राथमिक उपचार कराया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">घायल लीलाधर कुशवाहा ने बताया कि वह अपने तीन दोस्तों के साथ मंडीदीप स्थित फैक्ट्री से ड्यूटी खत्म कर पैदल होटल में खाना खाने जा रहे थे। राजपूत भवन के पास तेज रफ्तार और लापरवाही से बाइक चला रहे कुछ युवकों ने उन्हें टक्कर मार दी। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो बाइक सवार युवकों ने गाली-गलौज शुरू कर दी। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और मारपीट शुरू हो गई। जान बचाने के लिए चारों युवक पास के जैन ब्रदर्स होटल के अंदर चले गए, लेकिन कुछ ही मिनट बाद हालात और भयावह हो गए।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विवाद के कुछ ही देर बाद करीब 10 से 15 युवक तलवार, चाकू, हॉकी और बेसबॉल बैट लेकर होटल में घुस आए। उन्होंने होटल में मौजूद लोगों के बीच दहशत फैलाते हुए तोड़फोड़ शुरू कर दी। इसके बाद बदमाशों ने चारों युवकों पर हमला कर दिया। जब होटल के शेफ और अन्य कर्मचारी बीच-बचाव के लिए पहुंचे तो आरोपियों ने उनके साथ भी मारपीट की। अचानक हुए हमले से होटल में मौजूद ग्राहक भी घबरा गए और जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।</p>
<p style="text-align:justify;">घायल लीलाधर का आरोप है कि हमलावरों ने पहले होटल के अंदर उसकी बेरहमी से पिटाई की और फिर उसे घसीटकर बाहर ले गए। वहां गर्दन और शरीर के अन्य हिस्सों पर धारदार हथियारों से कई वार किए गए। मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार शरीर पर कई गहरे घाव पाए गए हैं। पीड़ित का कहना है कि यदि उसने किसी तरह अपना बचाव नहीं किया होता तो उसकी जान भी जा सकती थी। घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए।</p>
<p style="text-align:justify;">पूरी घटना होटल में लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो गई है। फुटेज में साफ दिखाई दे रहा है कि कई युवक हथियारों के साथ होटल में प्रवेश करते हैं और फिर हमला शुरू कर देते हैं। पीड़ित पक्ष ने सीसीटीवी फुटेज पुलिस को सौंप दिए हैं। पुलिस अब वीडियो के आधार पर हमलावरों की पहचान कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम बनाई जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">घटना की सूचना मिलते ही मिसरोद थाना पुलिस एम्स भोपाल पहुंची, जहां घायलों का उपचार चल रहा है। पुलिस ने अस्पताल में पीड़ितों के प्रारंभिक बयान दर्ज किए हैं। थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार ने बताया कि मामले की जांच जारी है। घायलों के विस्तृत बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर एफआईआर दर्ज की जाएगी। फिलहाल पुलिस सीसीटीवी फुटेज, मेडिकल रिपोर्ट और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान जुटा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस घटना के बाद इलाके के व्यापारियों और स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है। लोगों का कहना है कि सार्वजनिक स्थान पर इतनी बड़ी संख्या में हथियारबंद बदमाशों का पहुंच जाना कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 16:28:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रायपुर में ऑटो पार्ट्स कारोबारी से 14.37 लाख की धोखाधड़ी, तीन कर्मचारियों पर गबन का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[कबीर नगर स्थित दुकान में बिक्री की रकम जमा न कर कर्मचारियों पर लाखों रुपए हड़पने का आरोप, पुलिस ने केस दर्ज कर स्टॉक, बिल और लेनदेन की जांच शुरू की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/fraud-of-rs-1437-lakh-from-auto-parts-businessman-in/article-57885"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/raipur-fraud.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक ऑटो पार्ट्स कारोबारी के साथ लाखों रुपए की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। कबीर नगर क्षेत्र में स्थित एक ऑटो पार्ट्स दुकान के तीन कर्मचारियों पर आरोप है कि उन्होंने ग्राहकों को सामान बेचने के बाद बिक्री से प्राप्त रकम दुकान के खाते में जमा नहीं की और उसे अपने पास रख लिया। कारोबारी की शिकायत के आधार पर पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में करीब 14 लाख 37 हजार 226 रुपए के गबन की बात सामने आई है।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता मोहम्मद अनवर रायपुर के फेस-1, कबीर नगर क्षेत्र के निवासी हैं और वे इंडियन मोटर्स ऑटो पार्ट्स नाम से व्यवसाय संचालित करते हैं। उनकी दुकान पर कई कर्मचारी बिक्री और ग्राहकों से लेनदेन का कार्य संभालते थे। आरोप है कि दुकान में कार्यरत मोहम्मद फाजिल, सर्वर खान और कायनात ने लंबे समय तक सुनियोजित तरीके से बिक्री की रकम दुकान के खाते में जमा नहीं की और आर्थिक गड़बड़ी को छिपाते रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">शिकायत के मुताबिक, यह कथित धोखाधड़ी 11 मार्च 2025 से 5 नवंबर 2025 के बीच की गई। इस दौरान आरोपियों ने कई ग्राहकों को ऑटो पार्ट्स बेचे, लेकिन बिक्री से मिली राशि दुकान के कैश या बैंक खाते में जमा नहीं कराई। जब कारोबारी ने नियमित रूप से स्टॉक और नकदी का मिलान कराया तो बिक्री और जमा रकम के बीच बड़ा अंतर सामने आया। इसके बाद पूरे मामले की विस्तृत जांच की गई, जिसमें लाखों रुपए की वित्तीय अनियमितता का पता चला।</p>
<p style="text-align:justify;">कारोबारी का कहना है कि दुकान में सभी बिक्री का रिकॉर्ड बिलों और स्टॉक रजिस्टर में दर्ज किया जाता है। जब रिकॉर्ड का मिलान किया गया तो कई ऐसे लेनदेन सामने आए, जिनमें सामान तो ग्राहकों को दिया गया था, लेकिन उसकी राशि दुकान के खातों में दर्ज नहीं थी। इसी आधार पर उन्होंने संबंधित कर्मचारियों पर भरोसे का गलत फायदा उठाकर गबन करने का आरोप लगाया।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायत पुलिस तक पहुंचाई गई। कबीर नगर थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर तीनों कर्मचारियों के खिलाफ अमानत में खयानत और धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में शिकायत में लगाए गए आरोपों के समर्थन में कुछ दस्तावेज मिले हैं, लेकिन पूरे मामले की पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">जांच के दौरान पुलिस दुकान के स्टॉक रजिस्टर, बिक्री रजिस्टर, बिल बुक, कैश बुक, बैंक लेनदेन और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही है। इसके अलावा जिन ग्राहकों को सामान बेचा गया था, उनसे भी संपर्क कर बिक्री और भुगतान से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी। इससे यह स्पष्ट होगा कि भुगतान किस माध्यम से किया गया था और रकम दुकान तक क्यों नहीं पहुंची।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तीनों आरोपियों से भी पूछताछ की जाएगी। यदि जांच में यह साबित होता है कि उन्होंने जानबूझकर बिक्री की रकम अपने पास रखी और कारोबारी को आर्थिक नुकसान पहुंचाया, तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन की भी जांच कराई जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">व्यापारिक संस्थानों में इस प्रकार की घटनाएं कारोबारियों के लिए बड़ी चिंता का विषय बनती जा रही हैं। कई बार कर्मचारियों पर अत्यधिक भरोसा और वित्तीय निगरानी में कमी का फायदा उठाकर इस तरह की धोखाधड़ी की घटनाएं सामने आती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कारोबारियों को नियमित रूप से स्टॉक ऑडिट, कैश वेरिफिकेशन और डिजिटल रिकॉर्ड का मिलान करते रहना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी का समय रहते पता चल सके।</p>
<p style="text-align:justify;">व्यापारिक प्रतिष्ठानों में आधुनिक बिलिंग सिस्टम, सीसीटीवी निगरानी और ऑनलाइन अकाउंटिंग व्यवस्था अपनाने से ऐसी घटनाओं की संभावना काफी हद तक कम की जा सकती है। साथ ही कर्मचारियों की जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से तय करना और समय-समय पर आंतरिक ऑडिट कराना भी जरूरी माना जाता है। इससे किसी भी प्रकार की अनियमितता शुरुआती स्तर पर ही पकड़ में आ सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 18:45:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रायगढ़ में प्रोफेसर पर छात्रा से अश्लील हरकत का आरोप, थप्पड़ मारने का VIDEO वायरल; शिकायत के बाद हुआ समझौता</title>
                                    <description><![CDATA[युवती ने प्रोफेसर पर अश्लील संदेश और संबंध बनाने का दबाव डालने का आरोप लगाया, हंगामे के बाद मामला समझौते तक पहुंचा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/in-raigarh-video-of-professor-slapping-student-accused-of-obscene/article-57673"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/raigarh-human-trafficking1.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा जगत और समाज दोनों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। लैलूंगा थाना क्षेत्र में रहने वाली एक युवती ने शासकीय महाविद्यालय के प्रोफेसर पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह लंबे समय से उसे अश्लील संदेश भेज रहा था और शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बना रहा था। आरोपों से परेशान होकर युवती अपने मंगेतर के साथ प्रोफेसर के घर पहुंची, जहां दोनों के बीच विवाद हुआ और युवती ने गुस्से में प्रोफेसर को थप्पड़ मार दिए। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार, आरोपी प्रोफेसर रेमन भार्गव लैलूंगा के शासकीय महाविद्यालय कुंजारा में पदस्थ हैं। युवती का कहना है कि वह प्रोफेसर की पड़ोसी है और पिछले करीब डेढ़ वर्ष से लगातार मानसिक प्रताड़ना झेल रही थी। उसने आरोप लगाया कि प्रोफेसर व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए अश्लील संदेश भेजता था और कई बार संबंध बनाने का दबाव भी डाल चुका था। कई बार समझाने और मना करने के बावजूद उसकी हरकतें बंद नहीं हुईं।</p>
<p style="text-align:justify;">युवती के मुताबिक उसकी जल्द ही शादी होने वाली है। ऐसे में वह लगातार मिल रही आपत्तिजनक गतिविधियों से बेहद परेशान थी। उसने बताया कि प्रोफेसर की हरकतों के कारण उसकी निजी जिंदगी और मानसिक स्थिति दोनों प्रभावित हो रही थीं। जब हालात असहनीय हो गए तो उसने परिवार और अपने मंगेतर को पूरी जानकारी दी।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद युवती अपने मंगेतर के साथ आरोपी प्रोफेसर के घर पहुंची। वहां पहले दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई। विवाद बढ़ने पर युवती ने प्रोफेसर का कॉलर पकड़ लिया और उसे थप्पड़ मार दिए। घटना के दौरान आसपास मौजूद लोगों ने मोबाइल फोन से वीडियो रिकॉर्ड कर लिया, जो कुछ ही समय में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">वायरल वीडियो में युवती काफी नाराज दिखाई देती है। वह प्रोफेसर पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहती है कि उसकी शादी होने वाली है और वह उसकी जिंदगी बर्बाद करने की कोशिश कर रहा है। वीडियो में प्रोफेसर की पत्नी भी दिखाई देती हैं, जो विवाद शांत कराने और माफी मांगने की कोशिश करती नजर आती हैं। मौके पर मौजूद कुछ अन्य युवतियां भी दिखाई देती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">युवती ने आरोप लगाया कि वह अकेली पीड़ित नहीं है। उसके अनुसार प्रोफेसर ने पहले भी कई अन्य लड़कियों को परेशान किया है। उसने अपील की कि यदि कोई और युवती भी ऐसी प्रताड़ना का शिकार हुई है तो वह सामने आए और न्याय की लड़ाई में उसका साथ दे। युवती का कहना है कि यदि उसे उचित न्याय नहीं मिला तो वह कानूनी लड़ाई आगे भी जारी रखेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">घटना के बाद युवती ने लैलूंगा थाना पहुंचकर लिखित शिकायत भी दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत प्राप्त कर मामले की प्रारंभिक जांच शुरू की। हालांकि बाद में दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से समझौता हो गया। इसके चलते पुलिस ने आगे कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की।</p>
<p style="text-align:justify;">लैलूंगा थाना प्रभारी गिरधारी साव ने बताया कि युवती द्वारा शिकायत दी गई थी, लेकिन बाद में दोनों पक्षों ने आपसी समझौता कर लिया। समझौते के बाद शिकायतकर्ता ने आगे कार्रवाई नहीं चाही, इसलिए मामला वहीं समाप्त कर दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं शासकीय महाविद्यालय कुंजारा के प्राचार्य एमएल पटेल ने कहा कि यह घटना कॉलेज परिसर की नहीं है, बल्कि दोनों पक्षों का निजी मामला है। उन्होंने बताया कि कॉलेज प्रशासन को पहले इस संबंध में कोई शिकायत नहीं मिली थी। यदि संस्थान को आधिकारिक शिकायत मिलती तो नियमानुसार उच्च अधिकारियों को जानकारी देकर आवश्यक कार्रवाई की जाती।</p>
<p style="text-align:justify;">इस घटना के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग युवती के साहस की सराहना कर रहे हैं, जबकि कई लोग यह सवाल भी उठा रहे हैं कि यदि आरोप इतने गंभीर थे तो कानूनी कार्रवाई तक मामला क्यों नहीं पहुंचा। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच होना बेहद जरूरी है ताकि सच्चाई सामने आ सके।  किसी भी प्रकार के यौन उत्पीड़न, अश्लील संदेश या मानसिक प्रताड़ना के आरोपों की गंभीरता से जांच होना आवश्यक है। यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक इस तरह की हरकतें करता है तो पीड़ित को कानूनी सहायता लेने और संबंधित अधिकारियों को समय रहते सूचना देने की जरूरत होती है। वहीं आरोपित व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा के लिए निष्पक्ष और तथ्य आधारित जांच भी उतनी ही जरूरी मानी जाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 16:06:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IPL क्रिकेटर शशांक सिंह और उनके पिता पर भोपाल में FIR, कुक से मारपीट का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[भोपाल के रातीबड़ थाने में दर्ज मामले में कुक ने मारपीट, गाली-गलौज और जबरन काम कराने के आरोप लगाए, पुलिस ने जांच शुरू की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/ipl-cricketer-shashank-singh-and-his-father-accused-of-assaulting/article-57431"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/shashank-singh.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भोपाल में आईपीएल क्रिकेटर शशांक सिंह और उनके पिता, मध्यप्रदेश पुलिस के सेवानिवृत्त स्पेशल डीजी शैलेष सिंह के खिलाफ मारपीट और गाली-गलौज के आरोपों में मामला दर्ज किया गया है। रातीबड़ थाना पुलिस ने एक कुक की शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि खाना पसंद नहीं आने पर उसके साथ अभद्र व्यवहार किया गया, मारपीट की गई और उसका मोबाइल भी छीन लिया गया। घटना के बाद शिकायतकर्ता का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह रोते हुए अपने साथ हुई कथित घटना की जानकारी देता दिखाई दे रहा है। हालांकि मामले में आरोपों की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है और अभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा गया है। शिकायतकर्ता विपेंद्र सिंह तोमर, जो रीवा जिले के रहने वाले हैं, ने पुलिस को बताया कि उन्हें परिचित मोहित सिंह सेंगर के माध्यम से भोपाल बुलाया गया था। उनके अनुसार उन्हें बताया गया था कि शैलेष सिंह के यहां खाना बनाने का काम करना होगा और भविष्य में सरकारी नौकरी दिलाने में भी मदद की जाएगी। उन्होंने बताया कि 15 हजार रुपये मासिक वेतन के साथ रहने और खाने की व्यवस्था का आश्वासन दिया गया था। इसी भरोसे पर वे भोपाल पहुंचे और नीलबड़ स्थित आवास पर काम शुरू किया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विपेंद्र सिंह का आरोप है कि काम शुरू करने के कुछ ही घंटों बाद लगातार काम कराया जाने लगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि घर में पहले से काम कर रहे दूसरे कुक के साथ भी गाली-गलौज की जा रही थी। शिकायतकर्ता के अनुसार जब उन्होंने यह माहौल देखकर काम छोड़ने की इच्छा जताई तो उनसे कथित रूप से कहा गया कि यदि काम नहीं करना था तो यहां आए क्यों। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी दौरान उनका मोबाइल फोन भी छीन लिया गया और उन्हें काम जारी रखने के लिए मजबूर किया गया। शिकायत में आगे कहा गया है कि डर के कारण उन्होंने खुद को एक कमरे में बंद कर लिया था। आरोप है कि इसके बाद शैलेष सिंह, उनके बेटे शशांक सिंह और एक ड्राइवर कमरे तक पहुंचे और उनके साथ मारपीट की। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस घटना में उन्हें चेहरे और शरीर पर चोटें आईं। बाद में उन्होंने अपने शरीर पर चोटों के निशान भी दिखाए और एक वीडियो जारी कर पूरी घटना का दावा किया। वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया। रातीबड़ थाना पुलिस ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद मामले की प्रारंभिक जांच की गई। फरियादी और गवाहों के बयान दर्ज किए गए तथा उपलब्ध तथ्यों के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस के अनुसार शैलेष सिंह, शशांक सिंह और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 296(बी), 115(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और जांच के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह पहला अवसर नहीं है जब शैलेष सिंह के खिलाफ इस तरह के आरोप सामने आए हैं। इससे पहले मई 2026 में विदिशा जिले के गंजबासौदा निवासी राजीव विश्वकर्मा ने भी उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। उस शिकायत में आरोप लगाया गया था कि नौकरी के दौरान उन्हें घर में बंधक बनाकर रखा गया, मारपीट की गई और उनका मोबाइल तथा बैग छीन लिया गया। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया था कि नौकरी छोड़ने की बात करने पर उन्हें झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दी गई थी। हालांकि उस मामले की जांच और परिणाम अलग कानूनी प्रक्रिया के अधीन हैं। दूसरी ओर, शशांक सिंह क्रिकेट जगत का जाना-पहचाना नाम हैं। उन्होंने अपने आईपीएल करियर की शुरुआत दिल्ली कैपिटल्स, राजस्थान रॉयल्स और सनराइजर्स हैदराबाद जैसी टीमों के साथ की थी, लेकिन शुरुआती वर्षों में उन्हें ज्यादा अवसर नहीं मिले। वर्ष 2024 में पंजाब किंग्स के लिए शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें पहचान मिली। इसके बाद फ्रेंचाइजी ने उन्हें लगातार दो सीजन के लिए रिटेन किया। हालांकि 2026 का आईपीएल सीजन उनके लिए अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा और वे सीमित रन ही बना सके। क्रिकेट मैदान पर प्रदर्शन और अब इस कानूनी मामले के कारण शशांक सिंह एक बार फिर सुर्खियों में हैं। हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर में लगाए गए आरोपों की पुष्टि अभी जांच के बाद ही हो सकेगी। भारतीय कानून के अनुसार किसी भी आरोपी को तब तक दोषी नहीं माना जाता, जब तक अदालत में आरोप सिद्ध न हो जाएं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/ipl-cricketer-shashank-singh-and-his-father-accused-of-assaulting/article-57431</link>
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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 15:41:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नागपुर फैक्ट्री ब्लास्ट मामले में कार्रवाई तेज, CEO की तलाश में रायपुर पहुंची पुलिस</title>
                                    <description><![CDATA[एसबीएल एनर्जी लिमिटेड के सीईओ और उनके भाई की गिरफ्तारी के लिए नागपुर पुलिस ने रायपुर में कई ठिकानों पर छापेमारी की, दोनों आरोपी नहीं मिले।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/action-intensified-in-nagpur-factory-blast-case-police-reached-raipur/article-57416"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/nagpur-factory-blast.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नागपुर फैक्ट्री ब्लास्ट मामले में पुलिस ने फरार आरोपियों की तलाश तेज कर दी है। महाराष्ट्र के नागपुर में स्थित एसबीएल एनर्जी लिमिटेड के विस्फोटक निर्माण संयंत्र में हुए भीषण हादसे की जांच के सिलसिले में नागपुर पुलिस की एक टीम सोमवार को रायपुर पहुंची। टीम ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) आलोक संपत सिंह चौधरी और उनके भाई संजय संपत सिंह चौधरी की गिरफ्तारी के लिए उनके संभावित ठिकानों पर छापेमारी की। हालांकि दोनों आरोपी पुलिस को नहीं मिले और फिलहाल उनकी तलाश जारी है। नागपुर पुलिस ने रायपुर की देवेंद्र नगर थाना पुलिस की सहायता से दोनों आरोपियों के आवास और कंपनी से जुड़े कार्यालयों में तलाशी अभियान चलाया। पुलिस के पास दोनों के खिलाफ पहले से स्थायी गिरफ्तारी वारंट मौजूद है। अधिकारियों का कहना है कि न्यायालय के आदेश के पालन में यह कार्रवाई की गई। छापेमारी के दौरान दोनों भाइयों का कोई सुराग नहीं मिला, जिसके बाद उनकी तलाश और तेज कर दी गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह पूरा मामला 1 मार्च 2026 को नागपुर स्थित एसबीएल एनर्जी लिमिटेड के गोला-बारूद और डेटोनेटर निर्माण संयंत्र में हुए भीषण विस्फोट से जुड़ा है। इस हादसे में 23 कर्मचारियों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि फैक्ट्री परिसर का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था और आसपास के क्षेत्र में भी इसका असर देखा गया था। घटना के बाद राहत एवं बचाव दल ने कई घंटों तक अभियान चलाकर घायलों को अस्पताल पहुंचाया था। हादसे के बाद नागपुर पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों ने मामले की विस्तृत जांच शुरू की। जांच के दौरान फैक्ट्री की सुरक्षा व्यवस्था, संचालन प्रक्रिया और सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर कई पहलुओं की जांच की गई। पुलिस ने जांच के आधार पर कंपनी के सीईओ आलोक संपत सिंह चौधरी, उनके भाई संजय संपत सिंह चौधरी तथा अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या, सबूत छिपाने और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। मामले में कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ने के बाद दोनों आरोपियों ने अग्रिम जमानत के लिए अदालत का रुख किया था। हालांकि बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। इसके बाद 23 मार्च 2026 को कलमेश्वर कोर्ट ने दोनों के खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी किया। साथ ही उनके नाम पर लुक-आउट सर्कुलर (एलओसी) भी जारी किया गया, ताकि देश से बाहर जाने की किसी भी संभावित कोशिश को रोका जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हाल के दिनों में यह मामला एक बार फिर चर्चा में आया है। इसकी वजह अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा एसबीएल एनर्जी लिमिटेड और उसके सीईओ पर लगाए गए प्रतिबंध बताए जा रहे हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने कंपनी पर सूडान में जारी गृहयुद्ध के दौरान कथित रूप से विस्फोटक सामग्री की आपूर्ति से जुड़े आरोपों के आधार पर कार्रवाई की है। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित भारतीय एजेंसियों की ओर से अलग से कोई आधिकारिक निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है। माना जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मामला चर्चा में आने के बाद नागपुर पुलिस ने भी अपने लंबित प्रकरण में आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए हैं। इसी क्रम में रायपुर में छापेमारी की गई। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानूनी प्रक्रिया के तहत आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और उनके संभावित ठिकानों की जानकारी जुटाई जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर के सिविल लाइन एसीपी रमाकांत साहू ने बताया कि नागपुर पुलिस की टीम स्थायी गिरफ्तारी वारंट की तामील के लिए रायपुर आई थी। स्थानीय पुलिस ने पूरी कार्रवाई में सहयोग किया और दोनों आरोपियों के संभावित ठिकानों पर संयुक्त रूप से तलाशी ली गई। हालांकि दोनों आरोपी मौके पर नहीं मिले। उन्होंने कहा कि आगे भी जरूरत पड़ने पर पुलिस की ओर से सहयोग जारी रहेगा। पुलिस के अनुसार आरोपियों की तलाश केवल रायपुर तक सीमित नहीं है। उनके संभावित अन्य ठिकानों की भी जानकारी जुटाई जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर दूसरे राज्यों में भी कार्रवाई की जा सकती है। जांच एजेंसियां इस बात का भी पता लगाने में जुटी हैं कि दोनों आरोपी फिलहाल कहां मौजूद हैं और क्या वे लगातार अपना ठिकाना बदल रहे हैं। फैक्ट्री ब्लास्ट में जान गंवाने वाले कर्मचारियों के परिजनों की ओर से भी लगातार निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की जाती रही है। इस मामले को लेकर श्रमिक संगठनों ने भी समय-समय पर सुरक्षा मानकों के पालन और औद्योगिक इकाइयों की जवाबदेही का मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि यदि सुरक्षा नियमों का सही तरीके से पालन किया जाता तो इतने बड़े हादसे से बचा जा सकता था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 14:34:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ट्विशा शर्मा केस में आज फिर सुनवाई, CBI ने आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की</title>
                                    <description><![CDATA[अदालत में सीबीआई ने पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला की न्यायिक हिरासत 14 जुलाई तक बढ़ाने का अनुरोध किया, जांच अब भी जारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/hearing-in-twisha-sharma-case-again-today-cbi-demanded-to/article-57400"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/twisha-sharma-case-(8).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बहुचर्चित ट्विशा शर्मा केस में मंगलवार को एक बार फिर अदालत में सुनवाई हुई, जहां केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मामले में गिरफ्तार दोनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की। यह सुनवाई न्यायिक मजिस्ट्रेट आरती आदित्य बांदिल की अदालत (कोर्ट जी-14) में हुई। सुनवाई के दौरान ट्विशा शर्मा के पिता और भाई भी अदालत पहुंचे और पूरी न्यायिक प्रक्रिया के दौरान मौजूद रहे। मामले को लेकर अदालत परिसर में भी हलचल बनी रही, क्योंकि इस केस पर लगातार लोगों की नजर बनी हुई है। सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत से आरोपी पति समर्थ सिंह और उनकी मां, सेवानिवृत्त न्यायाधीश गिरिबाला की न्यायिक हिरासत 14 जुलाई तक बढ़ाने का अनुरोध किया। एजेंसी ने अदालत को बताया कि मामले की जांच अभी अंतिम चरण में नहीं पहुंची है और कई महत्वपूर्ण पहलुओं की पड़ताल की जानी बाकी है। ऐसे में आरोपियों का न्यायिक अभिरक्षा में रहना जांच के हित में आवश्यक है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं, हालांकि समाचार लिखे जाने तक इस पर अंतिम आदेश जारी नहीं किया गया था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सीबीआई ने अदालत को यह भी बताया कि मामले में कई गवाहों के बयान अभी दर्ज किए जाने हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि अब तक जुटाए गए साक्ष्यों के अलावा कुछ नए तथ्यों की भी पुष्टि की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, जांच को पूरी तरह निष्पक्ष और वैज्ञानिक तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है ताकि किसी भी महत्वपूर्ण पहलू को नजरअंदाज न किया जाए। एजेंसी का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी। मामले में डिजिटल साक्ष्यों की भूमिका भी काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सीबीआई ने अदालत को बताया कि आरोपियों से जब्त किए गए मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच अभी जारी है। इन उपकरणों से मिलने वाले डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है, जिससे घटनाक्रम से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। एजेंसी का कहना है कि डिजिटल जांच पूरी होने में अभी कुछ और समय लगेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान सीबीआई ने समर्थ सिंह के लैपटॉप का मुद्दा भी अदालत के सामने रखा। एजेंसी के अनुसार जांच के लिए लैपटॉप में मौजूद डेटा तक पहुंच बेहद जरूरी है, लेकिन उसका पासवर्ड अब तक उपलब्ध नहीं हो सका है। जांच अधिकारियों ने अदालत को बताया कि पासवर्ड के बिना डिवाइस में मौजूद संभावित महत्वपूर्ण जानकारियों तक पहुंचना संभव नहीं हो पा रहा है। एजेंसी ने कहा कि फॉरेंसिक विशेषज्ञ तकनीकी स्तर पर भी इस दिशा में काम कर रहे हैं, लेकिन जांच को गति देने के लिए पासवर्ड की आवश्यकता बनी हुई है। सीबीआई ने यह भी संकेत दिया कि यदि जांच के दौरान जरूरत महसूस हुई तो दोनों आरोपियों की दोबारा पुलिस रिमांड भी मांगी जा सकती है। एजेंसी का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले नए तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। फिलहाल न्यायिक हिरासत के दौरान भी जांच की प्रक्रिया लगातार जारी है और विभिन्न तकनीकी एवं दस्तावेजी साक्ष्यों का परीक्षण किया जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इससे पहले 16 जून को अदालत ने समर्थ सिंह और गिरिबाला को 30 जून तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया था। उसी आदेश की अवधि पूरी होने के बाद मंगलवार को दोनों आरोपियों को फिर अदालत में पेश किया गया। अब सीबीआई ने हिरासत की अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया है ताकि लंबित जांच को पूरा किया जा सके। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत में सुनवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी सामान्य दिनों की तुलना में अधिक सतर्क रखी गई। ट्विशा शर्मा केस लगातार चर्चा में बना हुआ है और हर सुनवाई पर पीड़ित पक्ष तथा आम लोगों की नजर बनी रहती है। परिवार की ओर से भी मामले की निष्पक्ष जांच और जल्द न्याय की उम्मीद जताई गई है। दूसरी ओर सीबीआई का कहना है कि जांच पूरी तरह तथ्यों, वैज्ञानिक साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। एजेंसी किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं की गहराई से जांच करना चाहती है। अब पूरे मामले में अगला महत्वपूर्ण कदम अदालत के आदेश पर निर्भर करेगा। यदि अदालत सीबीआई की मांग स्वीकार कर लेती है तो दोनों आरोपी 14 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में रहेंगे और इस दौरान जांच एजेंसी डिजिटल साक्ष्यों, गवाहों के बयान और अन्य तकनीकी पहलुओं पर काम जारी रखेगी। वहीं यदि अदालत कोई अलग आदेश देती है तो उसके अनुसार आगे की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 12:59:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>सक्ती में दिनदहाड़े युवती की गोली मारकर हत्या, हमलावर मौके से फरार</title>
                                    <description><![CDATA[घर में घुसकर बाइक सवार दो बदमाशों ने की फायरिंग, सिर में गोली लगने से युवती की मौत, पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की तलाश में जुटी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/the-attacker-absconded-from-the-spot-after-shooting-a-girl/article-57031"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/sakti-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में शुक्रवार सुबह दिनदहाड़े हुई गोलीबारी की घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। सक्ती थाना क्षेत्र में रहने वाली 25 वर्षीय युवती पूर्णिमा चौहान की अज्ञात बदमाशों ने उसके घर में घुसकर गोली मारकर हत्या कर दी। घटना उस समय हुई जब वह अपने घर पर मौजूद थी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बाइक पर सवार होकर आए दो युवक घर पहुंचे। इनमें से एक युवक बाहर खड़ा रहा, जबकि दूसरा घर के भीतर गया और पूर्णिमा के बारे में पूछताछ करने लगा। जैसे ही युवती सामने आई, आरोपी ने उस पर ताबड़तोड़ तीन राउंड फायरिंग कर दी। गोली उसके सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर वहीं गिर पड़ी। फायरिंग की आवाज सुनकर परिवार के सदस्य और आसपास के लोग मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक दोनों हमलावर फरार हो चुके थे। सूचना मिलते ही डायल-112 की टीम मौके पर पहुंची और गंभीर हालत में युवती को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है और पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पूर्णिमा चौहान पिछले करीब चार वर्षों से स्वामिनी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में कार्यरत थी। बताया जा रहा है कि कंपनी का मुख्य संचालन पंजाब से होता है। शुक्रवार सुबह लगभग 11 बजे दो अज्ञात युवक बाइक से उसके घर पहुंचे। घर के भीतर घुसे आरोपी ने पहले सामान्य तरीके से पूर्णिमा के बारे में पूछा, जिससे किसी को कोई संदेह नहीं हुआ। जैसे ही वह बाहर आई, आरोपी ने बिना किसी बहस या विवाद के उस पर लगातार गोलियां चला दीं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पूरी घटना कुछ ही सेकंड में हुई और हमलावर तुरंत बाइक पर बैठकर फरार हो गए। परिवार के लोगों ने जब पूर्णिमा को खून से लथपथ हालत में देखा तो तुरंत पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांच में घटना सुनियोजित प्रतीत हो रही है, हालांकि हत्या के पीछे का कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है। फिलहाल यह भी साफ नहीं है कि आरोपी युवती को पहले से जानते थे या नहीं। पुलिस सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी, फोरेंसिक विशेषज्ञ और जांच टीम मौके पर पहुंची। घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र किए गए हैं और आसपास के लोगों से पूछताछ भी शुरू कर दी गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस ने आरोपियों की पहचान के लिए आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि वारदात के दौरान हमलावर जिस बाइक से आए थे, उसकी पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके अलावा शहर से बाहर जाने वाले मार्गों पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है। पुलिस का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों और प्रत्यक्षदर्शियों से मिली जानकारी के आधार पर जल्द ही आरोपियों तक पहुंचने की उम्मीद है। घटना के बाद मृतका के परिजन अस्पताल पहुंचे, जहां उनका रो-रोकर बुरा हाल था। पूरे क्षेत्र में इस वारदात को लेकर लोगों में चिंता और आक्रोश देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दिनदहाड़े इस तरह घर में घुसकर हत्या की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि पुलिस ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और जांच पूरी होने तक संयम बनाए रखने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि हत्या के पीछे की वजह फिलहाल सामने नहीं आई है और किसी भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। व्यक्तिगत रंजिश, पेशेवर विवाद या अन्य कारणों सहित सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस का दावा है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए अलग-अलग टीमें गठित कर दी गई हैं और फरार आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने के लिए लगातार दबिश दी जा रही है। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही घटना के पीछे की वास्तविक वजह और आरोपियों की पहचान का खुलासा किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 15:02:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>खाना खिलाने के बाद युवक की हत्या, आरोपी HIV संक्रमित निकला; पुलिस संपर्क में आए लोगों की कर रही जांच</title>
                                    <description><![CDATA[भोपाल में समलैंगिक संबंध बनाने के विवाद के बाद हत्या का आरोप, मेडिकल जांच में आरोपी के HIV संक्रमित होने की पुष्टि; पुलिस और स्वास्थ्य विभाग सतर्क]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/accused-of-murder-of-young-man-after-feeding-him-found/article-56993"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bhopal-murder-case.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सामने आए एक सनसनीखेज हत्याकांड ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कटारा हिल्स थाना क्षेत्र में एक युवक की हत्या के मामले में पुलिस ने जिस आरोपी को गिरफ्तार किया है, वह मेडिकल जांच में HIV संक्रमित पाया गया है। पुलिस का कहना है कि आरोपी लंबे समय से अलग-अलग लोगों के संपर्क में रहा है। अब स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर यह पता लगाया जा रहा है कि वह किन-किन लोगों के संपर्क में आया था। पुलिस के अनुसार, हत्या की यह वारदात 24 मई को इकोलॉजिकल पार्क के पास हुई थी। पुलिस के मुताबिक मृतक की पहचान सतलापुर निवासी रोहित (बदला हुआ नाम) के रूप में हुई है। वह मंडीदीप की एक फैक्ट्री में काम करता था और उस रात ड्यूटी के लिए घर से निकला था। रास्ते में उसकी मुलाकात भोपाल निवासी सुरेश (बदला हुआ नाम) से हुई। प्रारंभिक जांच के अनुसार आरोपी ने पहले रोहित को विश्वास में लिया, उसे खाना खिलाया और फिर इकोलॉजिकल पार्क के पास पुलिया के नीचे स्थित सुनसान जगह पर ले गया। वहां दोनों के बीच समलैंगिक संबंध बनाने को लेकर विवाद हुआ। पुलिस का दावा है कि विरोध होने पर आरोपी ने पहले युवक को धक्का दिया और बाद में भारी पत्थर से सिर पर हमला कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच अधिकारियों के अनुसार हत्या के बाद आरोपी ने मामले को सड़क हादसा दिखाने की कोशिश भी की। उसने मृतक की एक्टिवा को घटनास्थल से कुछ दूरी पर सड़क किनारे कंटीले तारों के पास खड़ा कर दिया और उसकी चाबी दूर फेंक दी। इतना ही नहीं, मृतक का मोबाइल फोन भी अपने साथ ले गया। बाद में वह मोबाइल किसी अन्य व्यक्ति को बेच दिया गया। पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड, मोबाइल सर्विलांस और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी तक पहुंच बनाई और उसे गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी का मेडिकल परीक्षण कराया गया, जिसमें उसके HIV संक्रमित होने की पुष्टि हुई। इसके बाद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग दोनों सतर्क हो गए हैं। अधिकारियों के अनुसार अब यह पता लगाया जा रहा है कि आरोपी किन लोगों के संपर्क में आया था, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें स्वास्थ्य जांच और काउंसलिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और सभी पहलुओं की विस्तार से पड़ताल की जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कटारा हिल्स थाना प्रभारी के अनुसार पूछताछ में यह जानकारी सामने आई कि आरोपी अक्सर भोपाल के न्यू मार्केट और वीआईपी रोड इलाके में घूमता था और वहां लोगों से संपर्क बनाने की कोशिश करता था। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि जेल से छूटने के बाद वह किन लोगों के संपर्क में आया था। हालांकि संपर्क में आए लोगों की वास्तविक संख्या और संक्रमण से जुड़े सभी पहलुओं की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी का पहले भी आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। अधिकारियों के मुताबिक वह पहले एक युवक के साथ दुष्कर्म जैसे मामले में जेल जा चुका है। वर्ष 2023 में भी उसके खिलाफ इसी तरह का मामला दर्ज हुआ था और वह कई महीने तक जेल में रहा था। पुलिस अब उसके पुराने मामलों और वर्तमान केस के बीच भी कड़ियां जोड़ने की कोशिश कर रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग की भूमिका भी अहम हो गई है। HIV संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने का मतलब यह नहीं होता कि संक्रमण स्वतः फैल गया है। संक्रमण केवल कुछ विशेष परिस्थितियों में फैलता है और समय पर जांच तथा इलाज से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए पुलिस जिन लोगों की पहचान कर रही है, उन्हें घबराने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेने और आवश्यक जांच कराने की सलाह दी जाएगी। आरोपी के खिलाफ हत्या समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। उसे अदालत में पेश किए जाने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य सबूतों के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 13:23:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>गोरखपुर में दिल दहला देने वाली वारदात</title>
                                    <description><![CDATA[बलुआ बुजुर्ग गांव में देर रात हुई घटना, पुलिस जांच में पारिवारिक विवाद और मानसिक स्थिति की भी पड़ताल जारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/heart-wrenching-incident-in-gorakhpur/article-56665"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/gorakhpur-murder-case-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया है। जिले के बांसगांव थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बलुआ बुजुर्ग गांव में एक 16 वर्षीय किशोर पर अपने ही बड़े भाई, भाभी और तीन वर्षीय भतीजे की बेरहमी से हत्या करने का आरोप लगा है। यह घटना सोमवार तड़के लगभग 3 बजे के आसपास हुई, जब पूरा परिवार गहरी नींद में सो रहा था। पुलिस के अनुसार, मृतकों की पहचान अमित गुप्ता, उनकी पत्नी रंजना और उनके तीन वर्षीय पुत्र श्रेयांश गुप्ता के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि तीनों लोग घर के एक ही कमरे में सो रहे थे, जबकि परिवार के अन्य सदस्य, जिनमें आरोपी किशोर के माता-पिता भी शामिल हैं, दूसरे कमरे में सो रहे थे। इसी दौरान कथित तौर पर आरोपी ने धारदार हथियार से उन पर हमला कर दिया, जिससे तीनों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई। जैसे ही चीख-पुकार सुनाई दी, आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और स्थिति को देखकर स्तब्ध रह गए। तुरंत पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद बांसगांव थाना पुलिस और वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने तीनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">आरोपी किशोर को पुलिस ने मौके से ही हिरासत में ले लिया। उससे पूछताछ जारी है, लेकिन अभी तक हत्या के पीछे का स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में मामला पारिवारिक विवाद, मानसिक तनाव या किसी व्यक्तिगत रंजिश से जुड़ा हो सकता है, लेकिन सभी पहलुओं की गहराई से जांच की जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार, परिवार में पिछले कुछ समय से सामान्य तनाव की स्थिति थी, लेकिन किसी को भी इस तरह की भयावह घटना की उम्मीद नहीं थी। गांव के लोग आरोपी किशोर के व्यवहार को सामान्य बताते हैं और यह मानने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं कि वह ऐसी जघन्य वारदात को अंजाम दे सकता है। पुलिस ने बताया कि घटनास्थल से महत्वपूर्ण सबूत जुटाए गए हैं और फॉरेंसिक टीम को भी जांच के लिए बुलाया गया है। घर के कमरे और आसपास के क्षेत्र की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। इसके साथ ही आरोपी के मोबाइल फोन और अन्य व्यक्तिगत सामान की भी जांच की जा रही है। इस दर्दनाक घटना ने न केवल गांव बल्कि पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है। मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह घटना उनके लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं है, जिसे वे लंबे समय तक भूल नहीं पाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस प्रशासन ने गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त बल तैनात कर दिया है। अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की अपील की है। साथ ही यह भी कहा गया है कि जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक सच्चाई सामने आएगी। आरोपी किशोर को बाल न्यायालय (Juvenile Justice Board) के समक्ष पेश करने की प्रक्रिया चल रही है। वहां से आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कहीं इस घटना के पीछे कोई मानसिक स्वास्थ्य समस्या या बाहरी प्रभाव तो नहीं था। समय रहते ऐसे मामलों में ध्यान न दिया जाए तो परिणाम बेहद खतरनाक हो सकते हैं। जांच अभी जारी है और पुलिस का कहना है कि सभी तथ्यों के सामने आने के बाद ही हत्या के पीछे की असली वजह स्पष्ट हो पाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 16:59:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जबलपुर आरक्षक हत्याकांड: एक फोन कॉल से खुला पूरा राज</title>
                                    <description><![CDATA[हत्या, जांच और तीन अलग-अलग कहानियों के बीच उलझा सच]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/satyakatha/jabalpur-constable-murder-case-whole-secret-revealed-by-one-phone/article-54789"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/jabalpur-murder-case.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">जबलपुर में छठवीं बटालियन में पदस्थ आरक्षक राजेश बेन की हत्या का मामला उस समय पूरे इलाके में सनसनी बन गया था, जब 2017 में उनका शव झाड़ियों में मिला। शुरुआत में यह एक अज्ञात हत्या का मामला लगा, लेकिन धीरे-धीरे पुलिस जांच, सोशल मीडिया पहचान और एक फोन कॉल की रिकॉर्डिंग ने इस केस की दिशा ही बदल दी।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस की शुरुआती जांच में शव की हालत देखकर यह स्पष्ट हो गया था कि यह सामान्य मौत नहीं, बल्कि गला दबाकर की गई हत्या है। शव की पहचान तब हुई जब सोशल मीडिया पर तस्वीरें फैलने के बाद एक आरक्षक ने कलाई पर बने टैटू देखकर पहचान की पुष्टि की। इसके बाद मामला तेजी से आगे बढ़ा और जांच का केंद्र मृतक की पत्नी पर आकर टिक गया।</p>
<p style="text-align:justify;">जांच का सबसे अहम मोड़ तब आया जब एक महिला आरक्षक ने पुलिस को एक फोन कॉल की रिकॉर्डिंग भेजी। इस रिकॉर्डिंग में कथित तौर पर मृतक की पत्नी अपने भाई से शव को ठिकाने लगाने में मदद मांगती हुई सुनाई दी। इसी रिकॉर्डिंग ने पूरे मामले को नई दिशा दी और पुलिस को शक के घेरे को मजबूत आधार मिला। इसके बाद पुलिस ने पत्नी से पूछताछ की, जिसमें शुरुआती इनकार के बाद कई अहम खुलासे हुए। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर मामले की तह तक जाने की कोशिश की। पुलिस जांच के दौरान यह सामने आया कि हत्या में केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि कई लोगों की भूमिका हो सकती है। जांच में पत्नी के साथ उसकी चचेरी बहन और एक अन्य नाबालिग सहेली के शामिल होने की बात भी सामने आई। पुलिस ने दावा किया कि हत्या में इस्तेमाल कपड़ा और वाहन भी बरामद किए गए। जांच के अनुसार घटना के बाद शव को घर में कई घंटों तक छिपाकर रखा गया और फिर देर से उसे ठिकाने लगाने की कोशिश की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, मामला और जटिल होता गया। एक ओर पुलिस की जांच में घरेलू विवाद और प्रताड़ना को कारण बताया गया, वहीं दूसरी ओर परिजनों ने पूरी कहानी को अलग नजरिए से पेश किया। परिजनों ने आरोप लगाया कि हत्या के पीछे आर्थिक विवाद और बाहरी संबंधों की भूमिका हो सकती है। उनका दावा था कि यह केवल घरेलू हिंसा का मामला नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश भी हो सकती है। इस पूरे मामले की सबसे बड़ी जटिलता यह रही कि एक ही हत्या के पीछे तीन अलग-अलग कहानियां सामने आईं। पहली कहानी पुलिस और आरोपी पक्ष की ओर से घरेलू विवाद और प्रताड़ना को कारण बताती है। दूसरी कहानी परिजनों द्वारा आर्थिक और निजी संबंधों को कारण मानती है। तीसरी कहानी चर्चाओं के आधार पर व्यक्तिगत विवादों और आपसी तनाव को जिम्मेदार ठहराती है। इन अलग-अलग दावों ने जांच को और पेचीदा बना दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस केस में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती साक्ष्यों और बयानों के बीच तालमेल बैठाने की थी। फोन रिकॉर्डिंग, गवाहों के बयान और घटनास्थल से मिले सबूतों के आधार पर जांच आगे बढ़ी। लेकिन लगातार बदलते बयान और नए आरोपों ने केस को जटिल बना दिया। पुलिस अधिकारियों का मानना था कि यह मामला केवल एक साधारण हत्या नहीं, बल्कि कई स्तरों पर जुड़ा हुआ विवाद है, जिसमें पारिवारिक और व्यक्तिगत कारण दोनों शामिल हो सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस घटना ने स्थानीय स्तर पर कई सवाल खड़े कर दिए। क्या घरेलू विवाद इतने बड़े अपराध में बदल सकते हैं? क्या तकनीक जैसे फोन रिकॉर्डिंग आज अपराध सुलझाने में सबसे बड़ा सबूत बन चुकी है? और क्या हर कहानी के पीछे एक ही सच होता है? यह मामला केवल एक हत्या तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक ऐसा केस बन गया जिसमें सच और दावों के बीच की रेखा धुंधली हो गई। जबलपुर आरक्षक हत्याकांड एक ऐसा मामला है जिसने यह दिखाया कि आधुनिक जांच तकनीक और मानवीय रिश्तों की जटिलता मिलकर कैसे एक अपराध की पूरी तस्वीर बदल सकती है। एक फोन कॉल ने जहां जांच की दिशा तय की, वहीं अलग-अलग कहानियों ने इस केस को रहस्यमय बनाए रखा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सत्यकथा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 18:31:03 +0530</pubDate>
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