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                <title>Group D - दैनिक जागरण</title>
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                <title>62 शॉट, फिर भी नहीं हुआ एक गोल; तुर्किये वर्ल्ड कप से बाहर</title>
                                    <description><![CDATA[ऑस्ट्रेलिया और पैराग्वे के खिलाफ कुल 62 शॉट लगाए, लेकिन एक भी गोल नहीं कर सकी टीम; कोच मोंटेला भी रहे हैरान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/62-shots-still-no-goal-scored-turkey-out-of-world/article-56503"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/turkey-world-cup-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वर्ल्ड कप 2026 में तुर्किये का सफर उम्मीदों और सपनों के बिल्कुल उलट साबित हुआ। जिस टीम को टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ग्रुप-डी की सबसे मजबूत टीमों में गिना जा रहा था और जिसे अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा था, वह दो मुकाबलों के भीतर ही प्रतियोगिता से बाहर हो गई। शुक्रवार को पैराग्वे के खिलाफ मिली 1-0 की हार ने तुर्किये के अभियान पर पूरी तरह विराम लगा दिया। हार के बाद मैदान पर बेहद भावुक दृश्य देखने को मिले। कई खिलाड़ी सिर झुकाकर घास पर बैठ गए, कुछ की आंखों से आंसू निकल आए और स्टेडियम में मौजूद समर्थकों के चेहरों पर भी गहरी निराशा साफ दिखाई दी। सबसे हैरानी की बात यह रही कि तुर्किये जैसी आक्रामक टीम पूरे टूर्नामेंट में एक भी गोल नहीं कर सकी। 24 साल बाद वर्ल्ड कप में वापसी करने वाली तुर्किये की टीम से इस बार काफी उम्मीदें थीं। टीम में कई युवा और प्रतिभाशाली खिलाड़ी मौजूद थे। अर्दा गुलर जैसे स्टार खिलाड़ियों को लेकर फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना था कि तुर्किये इस बार नॉकआउट दौर तक आसानी से पहुंच सकता है। टीम ने हाल के वर्षों में अपने प्रदर्शन से भी काफी प्रभावित किया था। यही वजह थी कि समर्थक बड़े सपने लेकर वर्ल्ड कप का इंतजार कर रहे थे। लेकिन मैदान पर जो कुछ हुआ, उसने सभी उम्मीदों को झटका दे दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">टूर्नामेंट के पहले मुकाबले में तुर्किये का सामना ऑस्ट्रेलिया से हुआ था। उस मैच में भी तुर्किये ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और लगातार हमले किए। आंकड़ों के अनुसार टीम ने पूरे मैच में 30 शॉट लगाए। कई बार ऐसा लगा कि गेंद गोललाइन पार कर जाएगी, लेकिन हर बार या तो फिनिशिंग में कमी रह गई या ऑस्ट्रेलिया की रक्षापंक्ति दीवार बनकर खड़ी हो गई। दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलिया ने अपने सीमित मौकों का बेहतर इस्तेमाल किया और मुकाबला 2-0 से जीत लिया। उस हार के बाद भी तुर्किये के पास वापसी का अवसर था, लेकिन पैराग्वे के खिलाफ मैच में भी कहानी लगभग वैसी ही दोहराई गई। पैराग्वे ने मुकाबले की शुरुआत बेहद आक्रामक अंदाज में की। मैच शुरू होने के केवल 64 सेकंड बाद माटियास गलार्जा ने लगभग 25 मीटर की दूरी से शानदार शॉट लगाकर गेंद को सीधे गोलपोस्ट में पहुंचा दिया। यह गोल इतना तेज और सटीक था कि तुर्किये का गोलकीपर उसे रोकने की कोशिश भी नहीं कर सका। इस गोल ने न केवल पैराग्वे को बढ़त दिलाई बल्कि तुर्किये को भी मानसिक रूप से झटका पहुंचाया। टूर्नामेंट का यह अब तक का सबसे तेज गोल माना जा रहा है। शुरुआती झटके के बाद तुर्किये ने लगातार जवाबी हमले किए। टीम ने गेंद पर अपना नियंत्रण मजबूत रखा और पैराग्वे के हाफ में लगातार दबाव बनाया। पहले हाफ में मर्ट मुल्दुर को बराबरी का शानदार मौका मिला। फ्री-किक पर आए क्रॉस को उन्होंने हेडर से गोल की दिशा में भेजा, लेकिन गेंद पहले क्रॉसबार से टकराई और फिर पोस्ट से लगकर बाहर निकल गई। यह क्षण मैच का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। यदि उस समय गोल हो जाता तो मुकाबले की दिशा बदल सकती थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरे हाफ में तुर्किये को एक और बड़ा मौका मिला जब पैराग्वे का एक खिलाड़ी रेड कार्ड मिलने के कारण मैदान से बाहर चला गया। इसके बाद लगभग आधे मैच तक तुर्किये को 10 खिलाड़ियों वाली टीम के खिलाफ खेलने का अवसर मिला। सामान्य परिस्थितियों में ऐसी स्थिति किसी भी टीम के लिए फायदेमंद मानी जाती है, लेकिन तुर्किये इसका लाभ नहीं उठा सका। बारिस यिलमाज, कैन उजुन और मेरिह डेमिराल जैसे खिलाड़ियों को अच्छे मौके मिले, मगर अंतिम क्षणों में निशाना चूकता रहा। कभी गेंद गोलपोस्ट के बाहर चली गई तो कभी गोलकीपर ने शानदार बचाव कर लिया। मुकाबले के अंत तक तुर्किये ने कुल 32 शॉट लगाए, लेकिन स्कोरबोर्ड पर उसका खाता नहीं खुला। पहले मैच के 30 प्रयासों को जोड़ दिया जाए तो टीम ने दो मुकाबलों में 62 शॉट लगाए और एक भी गोल नहीं कर पाई। फुटबॉल आंकड़ों के अनुसार 1966 से उपलब्ध रिकॉर्ड में यह पहला मौका है जब किसी टीम ने वर्ल्ड कप के लगातार दो मैचों में इतने प्रयास किए हों और फिर भी गोल करने में पूरी तरह विफल रही हो। यही आंकड़ा तुर्किये की सबसे बड़ी निराशा बन गया। हार के बाद युवा स्टार अर्दा गुलर बेहद भावुक दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि टीम ने जीत के लिए पूरी ताकत लगा दी थी, लेकिन नतीजा उनके पक्ष में नहीं आया। उन्होंने माना कि कई मौके ऐसे थे जिन्हें गोल में बदला जा सकता था। अर्दा ने कहा कि खिलाड़ी दुखी हैं, समर्थक दुखी हैं और पूरा देश इस नतीजे से निराश है। उन्होंने तुर्किये के लोगों से माफी भी मांगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वर्ल्ड कप 2026 में तुर्किये का सफर उम्मीदों और सपनों के बिल्कुल उलट साबित हुआ। जिस टीम को टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ग्रुप-डी की सबसे मजबूत टीमों में गिना जा रहा था और जिसे अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा था, वह दो मुकाबलों के भीतर ही प्रतियोगिता से बाहर हो गई। शुक्रवार को पैराग्वे के खिलाफ मिली 1-0 की हार ने तुर्किये के अभियान पर पूरी तरह विराम लगा दिया। हार के बाद मैदान पर बेहद भावुक दृश्य देखने को मिले। कई खिलाड़ी सिर झुकाकर घास पर बैठ गए, कुछ की आंखों से आंसू निकल आए और स्टेडियम में मौजूद समर्थकों के चेहरों पर भी गहरी निराशा साफ दिखाई दी। सबसे हैरानी की बात यह रही कि तुर्किये जैसी आक्रामक टीम पूरे टूर्नामेंट में एक भी गोल नहीं कर सकी। 24 साल बाद वर्ल्ड कप में वापसी करने वाली तुर्किये की टीम से इस बार काफी उम्मीदें थीं। टीम में कई युवा और प्रतिभाशाली खिलाड़ी मौजूद थे। अर्दा गुलर जैसे स्टार खिलाड़ियों को लेकर फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना था कि तुर्किये इस बार नॉकआउट दौर तक आसानी से पहुंच सकता है। टीम ने हाल के वर्षों में अपने प्रदर्शन से भी काफी प्रभावित किया था। यही वजह थी कि समर्थक बड़े सपने लेकर वर्ल्ड कप का इंतजार कर रहे थे। लेकिन मैदान पर जो कुछ हुआ, उसने सभी उम्मीदों को झटका दे दिया। टूर्नामेंट के पहले मुकाबले में तुर्किये का सामना ऑस्ट्रेलिया से हुआ था। उस मैच में भी तुर्किये ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और लगातार हमले किए। आंकड़ों के अनुसार टीम ने पूरे मैच में 30 शॉट लगाए। कई बार ऐसा लगा कि गेंद गोललाइन पार कर जाएगी, लेकिन हर बार या तो फिनिशिंग में कमी रह गई या ऑस्ट्रेलिया की रक्षापंक्ति दीवार बनकर खड़ी हो गई। दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलिया ने अपने सीमित मौकों का बेहतर इस्तेमाल किया और मुकाबला 2-0 से जीत लिया। उस हार के बाद भी तुर्किये के पास वापसी का अवसर था, लेकिन पैराग्वे के खिलाफ मैच में भी कहानी लगभग वैसी ही दोहराई गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पैराग्वे ने मुकाबले की शुरुआत बेहद आक्रामक अंदाज में की। मैच शुरू होने के केवल 64 सेकंड बाद माटियास गलार्जा ने लगभग 25 मीटर की दूरी से शानदार शॉट लगाकर गेंद को सीधे गोलपोस्ट में पहुंचा दिया। यह गोल इतना तेज और सटीक था कि तुर्किये का गोलकीपर उसे रोकने की कोशिश भी नहीं कर सका। इस गोल ने न केवल पैराग्वे को बढ़त दिलाई बल्कि तुर्किये को भी मानसिक रूप से झटका पहुंचाया। टूर्नामेंट का यह अब तक का सबसे तेज गोल माना जा रहा है।  शुरुआती झटके के बाद तुर्किये ने लगातार जवाबी हमले किए। टीम ने गेंद पर अपना नियंत्रण मजबूत रखा और पैराग्वे के हाफ में लगातार दबाव बनाया। पहले हाफ में मर्ट मुल्दुर को बराबरी का शानदार मौका मिला। फ्री-किक पर आए क्रॉस को उन्होंने हेडर से गोल की दिशा में भेजा, लेकिन गेंद पहले क्रॉसबार से टकराई और फिर पोस्ट से लगकर बाहर निकल गई। यह क्षण मैच का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। यदि उस समय गोल हो जाता तो मुकाबले की दिशा बदल सकती थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरे हाफ में तुर्किये को एक और बड़ा मौका मिला जब पैराग्वे का एक खिलाड़ी रेड कार्ड मिलने के कारण मैदान से बाहर चला गया। इसके बाद लगभग आधे मैच तक तुर्किये को 10 खिलाड़ियों वाली टीम के खिलाफ खेलने का अवसर मिला। सामान्य परिस्थितियों में ऐसी स्थिति किसी भी टीम के लिए फायदेमंद मानी जाती है, लेकिन तुर्किये इसका लाभ नहीं उठा सका। बारिस यिलमाज, कैन उजुन और मेरिह डेमिराल जैसे खिलाड़ियों को अच्छे मौके मिले, मगर अंतिम क्षणों में निशाना चूकता रहा। कभी गेंद गोलपोस्ट के बाहर चली गई तो कभी गोलकीपर ने शानदार बचाव कर लिया। मुकाबले के अंत तक तुर्किये ने कुल 32 शॉट लगाए, लेकिन स्कोरबोर्ड पर उसका खाता नहीं खुला। पहले मैच के 30 प्रयासों को जोड़ दिया जाए तो टीम ने दो मुकाबलों में 62 शॉट लगाए और एक भी गोल नहीं कर पाई। फुटबॉल आंकड़ों के अनुसार 1966 से उपलब्ध रिकॉर्ड में यह पहला मौका है जब किसी टीम ने वर्ल्ड कप के लगातार दो मैचों में इतने प्रयास किए हों और फिर भी गोल करने में पूरी तरह विफल रही हो। यही आंकड़ा तुर्किये की सबसे बड़ी निराशा बन गया। हार के बाद युवा स्टार अर्दा गुलर बेहद भावुक दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि टीम ने जीत के लिए पूरी ताकत लगा दी थी, लेकिन नतीजा उनके पक्ष में नहीं आया। उन्होंने माना कि कई मौके ऐसे थे जिन्हें गोल में बदला जा सकता था। अर्दा ने कहा कि खिलाड़ी दुखी हैं, समर्थक दुखी हैं और पूरा देश इस नतीजे से निराश है। उन्होंने तुर्किये के लोगों से माफी भी मांगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुख्य कोच विन्सेन्जो मोंटेला ने भी हार पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि टीम ने मौके बनाए, लेकिन गेंद किसी तरह गोल में नहीं जा सकी। उनके मुताबिक खिलाड़ियों ने पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ खेला, इसलिए वह किसी को दोषी नहीं ठहरा सकते। मोंटेला ने कहा कि फुटबॉल हमेशा तर्क के अनुसार नहीं चलता और यही इसकी खूबसूरती भी है। हालांकि उन्होंने माना कि केवल दो मैचों में वर्ल्ड कप से बाहर होना उनके लिए बेहद चौंकाने वाला अनुभव है। तुर्किये के लिए यह हार केवल एक मैच की हार नहीं बल्कि टूटे हुए सपनों की कहानी बन गई है। बड़े सपनों और उम्मीदों के साथ टूर्नामेंट में उतरी टीम अब बिना एक भी गोल किए घर लौटने की स्थिति में है। समर्थकों को सबसे ज्यादा दुख इस बात का है कि उनकी टीम ने मौके तो बनाए, लेकिन उन्हें गोल में नहीं बदल सकी। यही कमी अंततः तुर्किये के वर्ल्ड कप अभियान का अंत बन गई। विन्सेन्जो मोंटेला ने भी हार पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि टीम ने मौके बनाए, लेकिन गेंद किसी तरह गोल में नहीं जा सकी। उनके मुताबिक खिलाड़ियों ने पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ खेला, इसलिए वह किसी को दोषी नहीं ठहरा सकते। मोंटेला ने कहा कि फुटबॉल हमेशा तर्क के अनुसार नहीं चलता और यही इसकी खूबसूरती भी है। हालांकि उन्होंने माना कि केवल दो मैचों में वर्ल्ड कप से बाहर होना उनके लिए बेहद चौंकाने वाला अनुभव है। तुर्किये के लिए यह हार केवल एक मैच की हार नहीं बल्कि टूटे हुए सपनों की कहानी बन गई है। बड़े सपनों और उम्मीदों के साथ टूर्नामेंट में उतरी टीम अब बिना एक भी गोल किए घर लौटने की स्थिति में है। समर्थकों को सबसे ज्यादा दुख इस बात का है कि उनकी टीम ने मौके तो बनाए, लेकिन उन्हें गोल में नहीं बदल सकी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 17:08:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>फीफा वर्ल्ड कप 2026 में ऑस्ट्रेलिया की शानदार शुरुआत, तुर्किये को 2-0 से हराया</title>
                                    <description><![CDATA[नेस्टोरी इरानकुंडा और कॉनर मेटकाफ के गोलों की बदौलत ग्रुप डी मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया ने दर्ज की जीत, 24 साल बाद वर्ल्ड कप में लौटी तुर्किये की शुरुआत रही निराशाजनक]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/australia-made-a-great-start-in-fifa-world-cup-2026/article-55905"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/fifa-world-cup-2026-(5).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फीफा वर्ल्ड कप 2026 में ऑस्ट्रेलिया ने अपने अभियान की शानदार शुरुआत करते हुए ग्रुप डी के मुकाबले में तुर्किये को 2-0 से हराकर महत्वपूर्ण जीत दर्ज की। कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के वैंकूवर में खेले गए इस मुकाबले में ऑस्ट्रेलियाई टीम ने आक्रामक खेल और मजबूत रक्षा पंक्ति का शानदार प्रदर्शन किया। मैच के दौरान तुर्किये की टीम कई मौकों पर वापसी की कोशिश करती दिखाई दी, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के अनुशासित खेल के सामने उसकी एक नहीं चली। इस जीत के साथ ऑस्ट्रेलिया ने टूर्नामेंट में अपने इरादे साफ कर दिए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुकाबले की शुरुआत दोनों टीमों ने सावधानी के साथ की। शुरुआती मिनटों में गेंद पर कब्जे को लेकर दोनों पक्षों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। तुर्किये की टीम 24 साल बाद वर्ल्ड कप में वापसी कर रही थी, इसलिए उसके खिलाड़ियों में उत्साह साफ दिखाई दे रहा था। हालांकि ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों ने शुरुआत से ही दबाव बनाना शुरू कर दिया। टीम लगातार आक्रमण करती रही और विपक्षी रक्षा पंक्ति को व्यस्त रखा। मैच के 27वें मिनट में ऑस्ट्रेलिया को उसकी मेहनत का फल मिला।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">युवा स्टार नेस्टोरी इरानकुंडा ने शानदार गोल दागकर ऑस्ट्रेलिया को 1-0 की बढ़त दिला दी। इरानकुंडा ने बेहतरीन नियंत्रण और सटीक निशाने का प्रदर्शन करते हुए गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचाया। इस गोल के बाद स्टेडियम में मौजूद ऑस्ट्रेलियाई समर्थकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। तुर्किये के खिलाड़ियों ने गोल खाने के बाद जवाबी हमला करने की कोशिश की, लेकिन ऑस्ट्रेलिया की रक्षा पंक्ति ने उन्हें ज्यादा मौके नहीं दिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पहले हाफ के बाकी समय में तुर्किये ने बराबरी का गोल करने के लिए कई प्रयास किए। टीम ने मिडफील्ड से खेल को नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के डिफेंडरों ने संयम बनाए रखा। गोलकीपर ने भी कुछ महत्वपूर्ण बचाव किए, जिससे तुर्किये का स्कोर खोलने का सपना अधूरा रह गया। पहले हाफ की समाप्ति तक ऑस्ट्रेलिया 1-0 की बढ़त बनाए रखने में सफल रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरे हाफ में तुर्किये ने अधिक आक्रामक रवैया अपनाया। टीम ने लगातार आगे बढ़कर हमले किए और ऑस्ट्रेलिया पर दबाव बनाने की कोशिश की। कुछ मौकों पर ऐसा लगा कि तुर्किये बराबरी का गोल कर सकती है, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों ने बेहतरीन तालमेल और अनुशासन का परिचय दिया। रक्षा पंक्ति ने हर हमले को विफल करते हुए विपक्षी खिलाड़ियों को निराश किया। मैच आगे बढ़ने के साथ तुर्किये पर दबाव बढ़ता गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुकाबले के 75वें मिनट में ऑस्ट्रेलिया ने अपनी बढ़त दोगुनी कर दी। मिडफील्डर कॉनर मेटकाफ ने लगभग 20 गज की दूरी से शानदार शॉट लगाकर गेंद को गोल में पहुंचा दिया। यह गोल तुर्किये के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। 2-0 की बढ़त मिलने के बाद ऑस्ट्रेलिया ने खेल पर पूरी तरह नियंत्रण स्थापित कर लिया। तुर्किये की टीम अंतिम मिनटों में वापसी की कोशिश करती रही, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस जीत में ऑस्ट्रेलिया की रक्षा पंक्ति की भूमिका बेहद अहम रही। पूरी टीम ने सामूहिक प्रयास से तुर्किये के हमलों को नाकाम किया। खिलाड़ियों ने न केवल गोल किए बल्कि पूरे मैच में अनुशासित खेल भी दिखाया। कोच और टीम प्रबंधन इस प्रदर्शन से संतुष्ट नजर आएंगे क्योंकि टूर्नामेंट के पहले मुकाबले में जीत आत्मविश्वास बढ़ाने का काम करती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर तुर्किये के लिए यह हार निराशाजनक रही। 24 साल बाद वर्ल्ड कप में वापसी करने वाली टीम बेहतर शुरुआत की उम्मीद कर रही थी, लेकिन ऑस्ट्रेलिया ने उसके सपनों पर पानी फेर दिया। हालांकि टूर्नामेंट अभी लंबा है और तुर्किये के पास अगले मुकाबलों में वापसी का मौका रहेगा। टीम को अपनी आक्रमण क्षमता और फिनिशिंग में सुधार करने की जरूरत होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी दिन खेले गए अन्य मुकाबलों में भी रोमांच देखने को मिला। ग्रुप सी में ब्राजील और मोरक्को के बीच मुकाबला 1-1 की बराबरी पर समाप्त हुआ। मोरक्को के लिए इस्माइल सैबारी ने गोल किया, जबकि ब्राजील की ओर से विनीसियस जूनियर ने बराबरी दिलाई। वहीं स्कॉटलैंड ने हैती को 1-0 से हराकर टूर्नामेंट में अपनी पहली जीत दर्ज की। जॉन मैकगिन के पहले हाफ में किए गए गोल की बदौलत स्कॉटलैंड को जीत मिली और टीम ग्रुप सी में शीर्ष स्थान पर पहुंच गई। ग्रुप डी में ऑस्ट्रेलिया ने जीत के साथ मजबूत शुरुआत कर दी है। टीम का आत्मविश्वास बढ़ा है और अगले मुकाबलों में भी उससे अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 15:15:45 +0530</pubDate>
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                <title>पश्चिम बंगाल में युवाओं को मिली बड़ी राहत! सरकार ने बढ़ा दी नौकरियों में उम्र सीमा, जानें डिटेल</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल सरकार ने सरकारी नौकरियों के लिए अधिकतम आयु सीमा बढ़ा दी है। ग्रुप A से D तक नई एज लिमिट लागू होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-relief-to-the-youth-in-west-bengal-government-increased/article-53665"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/west-bengal-government-jobs-age-limit-recruitment-rules-cm-suvendu-adhikari.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पश्चिम बंगाल सरकार ने सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं को बड़ी राहत दी है। राज्य के वित्त विभाग ने हाल ही में एक नई अधिसूचना जारी की है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें विभिन्न सरकारी पदों के लिए अधिकतम आयु सीमा बढ़ाने का फैसला लिया गया है। ये कदम लंबे समय से अभ्यर्थियों की आयु सीमा बढ़ाने की मांग को देखते हुए उठाया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर उन उम्मीदवारों के लिए जो भर्ती प्रक्रिया की देरी और परीक्षाओं के टलने के कारण आयु सीमा पार कर चुके थे। अब इस फैसले से बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को सरकारी नौकरियों के लिए फिर से आवेदन करने का मौका मिलेगा। नई व्यवस्था 11 मई 2026 से लागू होगी। इसके लिए वित्त विभाग ने वेस्ट बंगाल सर्विसेज (रेजिंग ऑफ एज-लिमिट) रूल्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">1981 में संशोधन किया है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस अधिसूचना के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">अलग-अलग ग्रुप के पदों के लिए नई अधिकतम आयु सीमा तय की गई है। ग्रुप </span>‘A’ <span lang="hi" xml:lang="hi">के पदों के लिए अब उम्मीदवार 41 वर्ष तक आवेदन कर सकेंगे। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां पहले से अधिक आयु सीमा लागू है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहां वही पुरानी व्यवस्था जारी रहेगी। ग्रुप </span>‘B’ <span lang="hi" xml:lang="hi">के पदों के लिए अधिकतम आयु सीमा 44 वर्ष कर दी गई है। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्रुप </span>‘C’ <span lang="hi" xml:lang="hi">और ग्रुप </span>‘D’ <span lang="hi" xml:lang="hi">की नौकरियों के लिए अब उम्मीदवार 45 वर्ष तक आवेदन कर सकेंगे। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि पब्लिक सर्विस कमीशन यानी </span>PSC <span lang="hi" xml:lang="hi">के दायरे से बाहर होने वाली कई भर्तियों में भी यही नई आयु सीमा लागू होगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें राज्य के वैधानिक निकाय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी कंपनियां और स्थानीय निकायों की नौकरियां शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस फैसले का मुख्य उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा युवाओं को सरकारी सेवा में मौका देना है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">राज्य में हाल ही में सत्ता परिवर्तन के बाद कई बड़े प्रशासनिक फैसले लिए जा रहे हैं। 2026 में बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में शानदार जीत दर्ज की और शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में नई सरकार का गठन हुआ। चुनाव में बीजेपी ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 207 सीटें जीतीं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस केवल 80 सीटों पर सिमट गई। इस राजनीतिक बदलाव के बाद सरकार भर्ती और प्रशासनिक ढांचे में सुधार की बात कर रही है। माना जा रहा है कि सरकारी नौकरियों में आयु सीमा बढ़ाने का फैसला भी इसी दिशा में उठाया गया एक कदम है। इस फैसले के बाद राज्य के लाखों नौकरी अभ्यर्थियों में राहत और उत्साह का माहौल है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि कई उम्मीदवार ऐसे थे जिनकी उम्र भर्ती प्रक्रिया के लंबे खिंचाव के कारण निकल चुकी थी या निकलने वाली थी।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 11:50:55 +0530</pubDate>
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