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                <title>Corruption Case - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Corruption Case RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>बिलासपुर में सर्पदंश मुआवजा घोटाला, 17 करोड़ का फर्जीवाड़ा उजागर</title>
                                    <description><![CDATA[जशपुर से चार गुना ज्यादा मौतें दिखाकर सरकारी राशि हड़पी, 14 FIR दर्ज, जांच तेज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/snakebite-compensation-scam-fraud-of-rs-17-crore-exposed-in/article-56474"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bilaspur-snakebite-scam.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में सर्पदंश मौतों के नाम पर करीब 17 करोड़ 24 लाख रुपए के मुआवजा घोटाले का बड़ा मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि जिले में वास्तविक आंकड़ों से कई गुना ज्यादा मौतें दिखाकर सरकारी राशि का गलत तरीके से वितरण किया गया। मामला तब और गंभीर हो गया जब विधानसभा में बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने ध्यानाकर्षण के जरिए इस पूरे फर्जीवाड़े को उठाया। बताया जा रहा है कि बिलासपुर में 431 मौतें सर्पदंश से दिखाकर मुआवजा पास कराया गया, जबकि तुलना में जशपुर जिले में मात्र 96 मौतें दर्ज थीं। इस अंतर ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं और अब जांच एजेंसियां लगातार दस्तावेजों की पड़ताल कर रही हैं। यह पूरा घोटाला कई स्तरों पर मिलीभगत से अंजाम दिया गया। शुरुआती जांच में सामने आया है कि राजस्व विभाग, स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन के कुछ कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध है। आरोप है कि कुछ मामलों में सामान्य मौत को भी सर्पदंश बताकर फर्जी पंचनामा और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तैयार की गई। इसके बाद मुआवजे की राशि जारी कर दी गई। पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि वकीलों और बिचौलियों की एक संगठित टीम इस पूरे नेटवर्क को संचालित कर रही थी। कई मामलों में मृतकों के परिजनों की सहमति के बिना ही दस्तावेजों में हेरफेर कर सरकारी राशि निकाली गई। अब तक इस मामले में 14 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं और कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और आने वाले दिनों में कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं। तोरवा, सरकंडा, सिविल लाइन, कोनी और कोतवाली थानों में अलग-अलग प्रकरण दर्ज किए गए हैं। जांच में यह भी पता चला है कि तहसील कार्यालय में कार्यरत कुछ कर्मचारी और बाहरी लोग मिलकर फर्जी दावे तैयार करते थे। एक मामले में तो महिला डॉक्टर और अन्य सह-आरोपियों पर सामान्य मौत को सर्पदंश बताकर चार लाख रुपए की राशि हड़पने का आरोप भी सामने आया है। प्रशासन का कहना है कि यह मामला केवल आर्थिक अनियमितता का नहीं बल्कि एक संगठित सिंडिकेट के रूप में काम कर रहे नेटवर्क का हिस्सा प्रतीत होता है। विधानसभा में मामला उठने के बाद राजस्व मंत्री ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए थे, जिसके बाद अब कार्रवाई तेज कर दी गई है। वहीं स्थानीय लोगों के बीच इस पूरे मामले को लेकर नाराजगी और हैरानी दोनों देखी जा रही है। कई लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि इतनी बड़ी राशि आखिर बिना गंभीर जांच के कैसे जारी हो गई। विधायक सुशांत शुक्ला ने भी इस कार्रवाई पर असंतोष जताते हुए कहा है कि जांच को और गहराई से किया जाना चाहिए ताकि सभी दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो सके। पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम दस्तावेजों, बैंक ट्रांजेक्शन और मेडिकल रिकॉर्ड की बारीकी से जांच कर रही है </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 13:48:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>इंदौर नगर निगम के 92 करोड़ के फर्जी बिल घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[ड्रेनेज और सीवरेज परियोजनाओं के नाम पर करोड़ों की वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा, 43 संपत्तियां अटैच]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a1fd3c560e30/article-54838"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/indore-nagar-nigam.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के इंदौर नगर निगम से जुड़े चर्चित फर्जी बिल घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मामले के मुख्य आरोपियों पर शिकंजा कस दिया है। जांच एजेंसी ने नगर निगम के पूर्व सहायक यंत्री अभय सिंह राठौर समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपियों में मोहम्मद जाकिर और राहुल वडेरा शामिल हैं। तीनों को विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें पूछताछ के लिए तीन दिन की ईडी रिमांड पर भेज दिया गया। इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर इंदौर नगर निगम का यह मामला सुर्खियों में आ गया है। ईडी की जांच में अब तक करीब 92 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेज सामने आए हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि नगर निगम में ड्रेनेज, सीवरेज और अन्य विकास कार्यों के नाम पर बड़े पैमाने पर फर्जी बिल तैयार कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कई परियोजनाओं के लिए करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया, लेकिन वास्तविकता में उन कार्यों का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह मामला कई वर्षों से जांच एजेंसियों के रडार पर था। आरोप है कि नगर निगम के कुछ अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों ने आपसी मिलीभगत से ऐसी योजनाओं के भुगतान स्वीकृत कराए जो या तो पूरी तरह कागजों पर थीं या जिनका वास्तविक कार्य बेहद सीमित था। इसके बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें पूर्ण परियोजना बताकर करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया। ईडी को जांच के दौरान कई ऐसे दस्तावेज मिले हैं जिनसे कथित तौर पर यह संकेत मिलता है कि फर्जी बिलों के माध्यम से बड़ी रकम निकाली गई। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं, जिससे घोटाले की परतें और खुल सकती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामले में गिरफ्तार पूर्व सहायक यंत्री अभय सिंह राठौर को इस पूरे नेटवर्क का प्रमुख किरदार माना जा रहा है। जांच एजेंसियों के अनुसार कई परियोजनाओं की स्वीकृति और भुगतान प्रक्रिया में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। हालांकि आरोपों की पुष्टि अदालत में सुनवाई और जांच पूरी होने के बाद ही होगी, लेकिन ईडी ने अब तक जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई को आगे बढ़ाया है। जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू कथित रूप से घोटाले से अर्जित धन के उपयोग से भी जुड़ा हुआ है। ईडी का दावा है कि सरकारी धन की हेराफेरी से प्राप्त राशि का इस्तेमाल मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में संपत्तियां खरीदने के लिए किया गया। इसी कड़ी में एजेंसी ने अब तक 43 संपत्तियों को अटैच किया है। इन संपत्तियों में आवासीय और व्यावसायिक परिसंपत्तियां शामिल बताई जा रही हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईडी अधिकारियों का कहना है कि वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच की जा रही है। बैंक खातों, निवेश, जमीन खरीद और अन्य वित्तीय गतिविधियों को खंगाला जा रहा है। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित रूप से निकाली गई राशि किन-किन माध्यमों से स्थानांतरित की गई और उससे कौन-कौन लाभान्वित हुआ। इंदौर नगर निगम से जुड़े इस मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस तरह से करोड़ों रुपये के भुगतान किए गए और लंबे समय तक कथित अनियमितताओं का पता नहीं चल सका, उसने सरकारी परियोजनाओं की निगरानी व्यवस्था पर भी चर्चा शुरू कर दी है। हालांकि संबंधित विभागों का कहना है कि मामले की जांच चल रही है और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> यह मामला केवल वित्तीय अनियमितताओं तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें प्रशासनिक जवाबदेही का पहलू भी जुड़ा हुआ है। यदि जांच में आरोप साबित होते हैं तो यह प्रदेश के सबसे बड़े नगरीय वित्तीय घोटालों में से एक माना जा सकता है। फिलहाल एजेंसियां हर पहलू की गहन जांच कर रही हैं। ईडी की हालिया कार्रवाई के बाद नगर निगम से जुड़े कई पुराने दस्तावेज और भुगतान रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में आ गए हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कुछ और लोगों से पूछताछ की जा सकती है। जांच एजेंसी इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि क्या इस कथित घोटाले का दायरा केवल कुछ परियोजनाओं तक सीमित था या फिर अन्य कार्यों में भी इसी तरह की अनियमितताएं हुईं। तीनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और ईडी को उम्मीद है कि रिमांड अवधि के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आएंगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 13:32:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>CSMCL ओवरटाइम घोटाला: 182 करोड़ की गड़बड़ी में 12 आरोपी, चार्जशीट दाखिल</title>
                                    <description><![CDATA[CSMCL ओवरटाइम घोटाला मामले में ACB-EOW ने 12 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। 182.98 करोड़ की गड़बड़ी और मैनपावर कंपनियों की भूमिका सामने आई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/12-accused-chargesheet-filed-in-csmcl-overtime-scam-embezzlement-of/article-53740"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/csmcl-overtime-scam.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">छत्तीसगढ़ में हाल ही में सामने आए बड़े वित्तीय मामले</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, CSMCL <span lang="hi" xml:lang="hi">ओवरटाइम घोटाले को लेकर </span>ACB-EOW <span lang="hi" xml:lang="hi">ने सोमवार को पहली चार्जशीट अदालत में पेश कर दी है। इस मामले में जांच एजेंसियों ने 12 लोगों को आरोपी बनाया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें कारोबारी अनवर ढेबर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नवीन प्रताप सिंह तोमर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तिजऊराम निर्मलकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अभिषेक सिंह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नीरज कुमार चौधरी सहित कई और नाम शामिल हैं। चार्जशीट के आने के बाद यह मामला फिर से चर्चा में आ गया है और सिस्टम पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साल 2019-20 से 2023-24 के बीच शराब दुकानों के कर्मचारियों के ओवरटाइम और अन्य भुगतानों में काफी गड़बड़ी की गई है। जांच एजेंसियों का कहना है कि कागजों पर तो भुगतान कर्मचारियों के नाम पर दिखाया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन असल में अधिकतर राशि मैनपावर कंपनियों और कथित सिंडिकेट तक पहुंची। ओवरटाइम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बोनस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक्स्ट्रा वर्किंग डे और सर्विस चार्ज जैसे मदों में भी फर्जी तरीके से दावे किए गए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये सब बाते जांच में सामने आई हैं। शुरुआती अनुमानों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूरे मामले में करीब 182.98 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता उजागर हुई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो कि अपने आप में एक बड़ा आंकड़ा है और सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जांच रिपोर्ट में जिन मैनपावर कंपनियों की भूमिका सामने आई है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनमें सुमित फैसिलिटीज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्राइमवन वर्कफोर्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ए-टू-जेड इंफ्रासर्विसेज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अलर्ट कमांडोज और ईगल हंटर सॉल्यूशंस जैसी एजेंसियों के नाम प्रमुख हैं। बताया जा रहा है कि इन एजेंसियों के जरिए कर्मचारियों के नाम पर भुगतान को आगे बढ़ाया जाता था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद उसमें से कमीशन के तौर पर रकम का बंटवारा अलग-अलग स्तरों पर होता था। ओवरटाइम के नाम पर लगभग 101.20 करोड़</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बोनस के रूप में 12.21 करोड़</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चार अतिरिक्त कार्य दिवसों के भुगतान के नाम पर करीब 54.46 करोड़ और सर्विस चार्ज के तौर पर लगभग 15.11 करोड़ रुपये के भुगतान का भी जिक्र है। यह पूरा ढांचा धीरे-धीरे एक नेटवर्क की तरह काम कर रहा था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां कागजों पर सब कुछ सामान्य दिखता था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अंदर ही अंदर फाइलों के जरिए बड़ा खेल चलता रहा।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इसी बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">29 नवंबर 2023 को 28.80 लाख रुपये नकद बरामद होने की घटना को भी जांच एजेंसियां इस पूरे सिस्टम की एक महत्वपूर्ण कड़ी मान रही हैं। शुरुआती जांच से ये संकेत मिले हैं कि यह रकम कर्मचारियों के ओवरटाइम भुगतान से जुड़ी हो सकती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे गलत तरीके से लिया गया।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">ACB-EOW <span lang="hi" xml:lang="hi">की कार्रवाई में अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और न्यायालय ने उन्हें रिमांड खत्म होने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इस मामले में </span>ED <span lang="hi" xml:lang="hi">की रिपोर्ट के आधार पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और </span>IPC <span lang="hi" xml:lang="hi">की धारा 420 व 120-बी के तहत केस दर्ज किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह केवल पहली चार्जशीट है और जांच अभी खत्म नहीं हुई है। आने वाले दिनों में और भी लोगों की भूमिका सामने आ सकती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साथ ही पैसों के निवेश और लेन-देन के नए लिंक भी तलाशे जा रहे हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 11:04:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>AAP मंत्री संजीव अरोड़ा को हुई 14 दिन की जेल, कोर्ट में बेटी से मिलकर हुए भावुक, जानें क्या था केस</title>
                                    <description><![CDATA[पंजाब के AAP मंत्री संजीव अरोड़ा को मनी लॉन्ड्रिंग केस में गुरुग्राम कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा। पेशी के दौरान परिवार से मिलकर भावुक हुए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/aap-minister-sanjeev-arora-got-14-days-jail-got-emotional/article-53699"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/aap-minister-sanjeev-arora-jailed-ed-action.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पंजाब में आम आदमी पार्टी के मंत्री संजीव अरोड़ा को सोमवार को गुरुग्राम कोर्ट में पेश किया गया</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जहां उन्हें </span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">14</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार किया था। कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई </span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">1</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> जून को तय की है। पेशी के दौरान कोर्ट परिसर में भावुक माहौल देखा गया। संजीव अरोड़ा का चेहरा थका हुआ नजर आया और उनकी बढ़ी हुई दाढ़ी चर्चा का कारण बनी। परिवार से मुलाकात के समय वह खुद को संभाल नहीं पाए और अपनी बेटी कृतिका अरोड़ा को गले लगाकर भावुक हो गए</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिससे वहां मौजूद लोग कुछ समय के लिए चुप हो गए। कहा जा रहा है कि यह गिरफ्तारी के बाद परिवार से उनकी पहली मुलाकात थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ईडी ने मंत्री संजीव अरोड़ा को </span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">9</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> मई को चंडीगढ़ से गिरफ्तार किया था। एजेंसी का दावा है कि मामला करोड़ों रुपए के कथित मनी लॉन्ड्रिंग</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">फर्जी निवेश और शेल कंपनियों के जरिए फंड रूटिंग से जुड़ा हुआ है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें पहले सात दिन और फिर दो दिन की रिमांड पर लिया गया था। सोमवार को रिमांड खत्म होने पर उन्हें गुरुग्राम कोर्ट में पेश किया गया। इसी बीच पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में उनकी गिरफ्तारी और रिमांड को चुनौती देने वाली याचिका पर भी सुनवाई हुई</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जहां ईडी को जवाब दाखिल करना था।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जांच अब मंत्री तक ही सीमित नहीं रही</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बल्कि कई अधिकारियों और कारोबारियों की भी जांच की जा रही है। सूत्रों के अनुसार</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ईडी ने ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) से जुड़े दस्तावेज भी मांगे हैं। इसके अलावा</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पावरकॉम के चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर बसंत गर्ग</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">डायरेक्टर कमर्शियल हरशरण कौर त्रेहन और कारोबारियों हेमंत सूद और चंद्रशेखर अग्रवाल को भी तलब किया गया है। जांच एजेंसी यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या कुछ कंपनियों को नियमों के खिलाफ लाभ पहुंचाया गया। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">संजीव अरोड़ा से जुड़ी कंपनी पर फर्जी एक्सपोर्ट</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">संदिग्ध निवेश और करोड़ों के लेनदेन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ईडी को शक है कि कई लेनदेन कागजातों पर दिखाए गए हैं और पैसों को विभिन्न कंपनियों के जरिए घुमाया गया। हालांकि</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">आम आदमी पार्टी इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रही है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि विपरीत राजनीतिक दलों के नेताओं को एजेंसियों के जरिए दबी हुई कार्रवाई का शिकार बनाया जा रहा है</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जबकि बीजेपी इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की तरह देख रही है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 16:17:40 +0530</pubDate>
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