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                <title>Sustainability - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Sustainability RSS Feed</description>
                
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                <title>इंदौर में 26 जून को ईवी और सस्टेनेबिलिटी कॉन्क्लेव, निवेशकों और स्टार्टअप्स का होगा बड़ा संगम</title>
                                    <description><![CDATA[स्वच्छ परिवहन, हरित ऊर्जा और नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित होगा आयोजन, देशभर से स्टार्टअप्स और उद्योग विशेषज्ञ होंगे शामिल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/ev-and-sustainability-conclave-will-be-a-big-gathering-of/article-56789"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ev-conclave-indore-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचान बना चुके इंदौर में अब स्वच्छ तकनीक और हरित विकास को नई दिशा देने की तैयारी की जा रही है। इसी कड़ी में 26 जून को शहर के शेराटन ग्रैंड पैलेस में एचईवी कैपिटल कनेक्ट का आयोजन होने जा रहा है। यह आयोजन इलेक्ट्रिक वाहन, हरित ऊर्जा, सतत विकास और नवाचार आधारित स्टार्टअप्स को एक साझा मंच प्रदान करेगा। आयोजकों का दावा है कि यह मध्य भारत का सबसे बड़ा ईवी और सस्टेनेबिलिटी केंद्रित निवेश एवं नवाचार सम्मेलन होगा, जिसमें देशभर से निवेशक, उद्योग विशेषज्ञ, स्टार्टअप फाउंडर और कॉर्पोरेट प्रतिनिधि शामिल होंगे। इंदौर नगर निगम भी इस आयोजन में शहर मेजबान भागीदार की भूमिका निभा रहा है, जिससे इसकी महत्ता और बढ़ गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पिछले कुछ वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से बदलाव देखने को मिला है। केंद्र और राज्य सरकारें भी स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के लिए लगातार नई नीतियां लागू कर रही हैं। ऐसे समय में इंदौर में आयोजित होने वाला यह कॉन्क्लेव केवल एक कारोबारी कार्यक्रम नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे भविष्य की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छोटे और मध्यम शहरों में विकसित हो रहे नवाचारों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना और उन्हें निवेश उपलब्ध कराना है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आयोजन से जुड़े अधिकारियों के अनुसार देशभर से लगभग 2,400 स्टार्टअप्स ने इस कार्यक्रम में भागीदारी को लेकर रुचि दिखाई थी। इसके बाद कई चरणों में मूल्यांकन और चयन प्रक्रिया पूरी की गई। प्रारंभिक छंटनी के बाद 100 स्टार्टअप्स का चयन किया गया और अंततः इनमें से 10 सर्वश्रेष्ठ स्टार्टअप्स को निवेशकों के सामने लाइव पिचिंग का अवसर मिलेगा। इन स्टार्टअप्स को अपने बिजनेस मॉडल, तकनीकी समाधान और भविष्य की योजनाओं को वेंचर कैपिटल फर्मों, एंजेल निवेशकों और उद्योग प्रतिनिधियों के सामने प्रस्तुत करने का मौका मिलेगा। आयोजकों का मानना है कि इससे उभरते उद्यमियों को न केवल वित्तीय सहयोग मिलेगा बल्कि उद्योग जगत के अनुभवी लोगों से मार्गदर्शन भी प्राप्त होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कार्यक्रम के आयोजकों ने बताया कि अब तक इस आयोजन के लिए 50 करोड़ रुपए से अधिक की निवेश रुचि दर्ज की जा चुकी है। यह संकेत है कि निवेशकों की नजर अब महानगरों के साथ-साथ टियर-2, टियर-3 और टियर-4 शहरों के नवाचारों पर भी है। इंदौर जैसे शहरों में विकसित हो रहे स्टार्टअप्स कम लागत और स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ऐसे समाधान तैयार कर रहे हैं, जिनकी राष्ट्रीय स्तर पर मांग बढ़ रही है। यही कारण है कि निवेशक भी अब इन क्षेत्रों में अवसर तलाश रहे हैं। कॉन्क्लेव में 50 से अधिक स्टार्टअप्स, 12 निवेशक, 16 उद्योग विशेषज्ञ और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिनिधि भाग लेंगे। इसके अलावा इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और परिवहन क्षेत्र की कई प्रमुख कंपनियां भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगी। कार्यक्रम में इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण, बैटरी तकनीक, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स समाधान और ऊर्जा प्रबंधन जैसे विषयों पर चर्चा होगी। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार तेजी से विस्तार करेगा और भारत इस क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कॉन्क्लेव में हरित ऊर्जा और क्लाइमेट टेक्नोलॉजी को लेकर भी विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसमें सौर ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण प्रणाली, कार्बन उत्सर्जन में कमी, सर्कुलर इकोनॉमी और सतत विकास से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञ अपने विचार साझा करेंगे। इसके अलावा कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई आधारित समाधानों पर भी चर्चा होगी, जो परिवहन और ऊर्जा क्षेत्र को अधिक प्रभावी और स्मार्ट बनाने में मदद कर सकते हैं। बताया जा रहा है कि कई स्टार्टअप्स ऐसे नवाचार लेकर आए हैं जो ऊर्जा खपत कम करने और पर्यावरणीय प्रभाव घटाने में उपयोगी साबित हो सकते हैं। कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की वर्चुअल उपस्थिति संभावित मानी जा रही है। इसके अलावा प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, सांसद शंकर लालवानी और इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव भी कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं। इन जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी से यह संकेत भी मिलता है कि सरकार स्वच्छ परिवहन और हरित तकनीक को बढ़ावा देने के लिए गंभीरता से काम कर रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह आयोजन इंदौर के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। शहर पहले ही स्वच्छता के क्षेत्र में राष्ट्रीय पहचान बना चुका है और लगातार कई वर्षों से देश का सबसे स्वच्छ शहर चुना जाता रहा है। अब यदि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, हरित निवेश और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में भी इंदौर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराता है, तो यह मध्य भारत के लिए एक नए आर्थिक केंद्र के रूप में उभर सकता है। स्थानीय स्टार्टअप्स को निवेश, नेटवर्किंग और बाजार तक पहुंच का अवसर मिलेगा, जिससे रोजगार और उद्योग दोनों को बढ़ावा मिलने की संभावना है। आयोजकों का कहना है कि इस तरह के कार्यक्रम केवल निवेश जुटाने तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे नए विचारों को आगे बढ़ाने और उद्योग जगत को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने का काम भी करते हैं। ऐसे में 26 जून को होने वाला यह कॉन्क्लेव इंदौर को स्वच्छ तकनीक, हरित ऊर्जा और नवाचार आधारित विकास के नए दौर की ओर ले जाने वाला महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 13:29:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून को, धरती बचाने का संदेश देगा वैश्विक अभियान</title>
                                    <description><![CDATA[पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और हरित भविष्य पर रहेगा फोकस, दुनिया भर में होंगे जागरूकता कार्यक्रम]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/global-campaign-will-give-the-message-of-saving-the-earth/article-54626"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/world-environment-day-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हर साल 5 जून को मनाया जाने वाला विश्व पर्यावरण दिवस इस बार भी पर्यावरण संरक्षण और जलवायु संकट जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर दुनिया का ध्यान आकर्षित करेगा। 2026 का विश्व पर्यावरण दिवस ऐसे समय में आ रहा है जब दुनिया के कई हिस्से बढ़ते तापमान, प्रदूषण, जल संकट और प्राकृतिक संसाधनों के तेजी से दोहन जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में यह दिन केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रकृति और मानव जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने की सामूहिक जिम्मेदारी की याद दिलाने वाला अवसर बन गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विश्व पर्यावरण दिवस की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 1972 में की गई थी। इसके बाद 1974 से इसे हर साल वैश्विक स्तर पर मनाया जाने लगा। पिछले कई दशकों में यह दिवस पर्यावरण संरक्षण को लेकर सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय अभियानों में शामिल हो चुका है। दुनिया के 150 से अधिक देशों में सरकारें, शैक्षणिक संस्थान, सामाजिक संगठन और आम नागरिक इस दिन विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारत सहित दुनिया के कई देशों में इस अवसर पर वृक्षारोपण अभियान, स्वच्छता कार्यक्रम, जागरूकता रैलियां, सेमिनार और पर्यावरण विषयक चर्चाओं का आयोजन किया जाएगा। स्कूलों और कॉलेजों में विशेष गतिविधियां आयोजित होंगी, जहां विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के महत्व के बारे में बताया जाएगा। कई संस्थाएं प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली अपनाने और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए अभियान चलाएंगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में जलवायु परिवर्तन का प्रभाव पहले से अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। अत्यधिक गर्मी, अनियमित वर्षा, बाढ़, सूखा और जंगलों में आग जैसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। भारत में भी कई राज्यों ने रिकॉर्ड तापमान का सामना किया है। पर्यावरण वैज्ञानिकों के अनुसार यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विश्व पर्यावरण दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि पर्यावरण केवल सरकारों या संगठनों की जिम्मेदारी नहीं है। हर व्यक्ति की छोटी-छोटी आदतें भी प्रकृति पर बड़ा असर डालती हैं। पानी की बचत, बिजली का सीमित उपयोग, प्लास्टिक का कम इस्तेमाल, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना और अधिक से अधिक पेड़ लगाना जैसे कदम पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पर्यावरण संरक्षण का मुद्दा अब केवल जंगलों और वन्यजीवों तक सीमित नहीं रह गया है। इसका सीधा संबंध मानव स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और भविष्य की पीढ़ियों से भी जुड़ गया है। प्रदूषित हवा और दूषित जल के कारण हर साल लाखों लोग विभिन्न बीमारियों का शिकार होते हैं। वहीं कृषि उत्पादन पर भी जलवायु परिवर्तन का प्रभाव पड़ रहा है, जिससे खाद्य सुरक्षा की चुनौती बढ़ रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">देश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में कई प्रयास किए गए हैं। सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और हरित तकनीकों के उपयोग को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों की ओर बढ़ना कार्बन उत्सर्जन कम करने का प्रभावी तरीका है। इसके साथ ही उद्योगों और शहरी क्षेत्रों में पर्यावरण अनुकूल नीतियों को लागू करना भी जरूरी माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जल संरक्षण पर भी विशेष चर्चा होने की संभावना है। देश के कई हिस्सों में भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। बढ़ती आबादी और संसाधनों पर बढ़ता दबाव आने वाले समय में जल संकट को और गहरा बना सकता है। ऐसे में वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों का संरक्षण और जिम्मेदारी से पानी का उपयोग समय की आवश्यकता बन चुका है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पर्यावरणविदों का मानना है कि केवल सरकारी योजनाओं से पर्यावरण की रक्षा संभव नहीं है। इसके लिए समाज के हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है। जब लोग अपने आसपास के वातावरण को साफ रखने, कचरे का सही निपटान करने और हरित जीवनशैली अपनाने का संकल्प लेते हैं, तभी वास्तविक बदलाव दिखाई देता है। यही कारण है कि विश्व पर्यावरण दिवस लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ उन्हें कार्रवाई के लिए प्रेरित भी करता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">युवाओं की भूमिका भी इस अभियान में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से नई पीढ़ी पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संदेशों को व्यापक स्तर तक पहुंचा रही है। कई युवा समूह स्थानीय स्तर पर सफाई अभियान, पौधारोपण और जागरूकता कार्यक्रम चला रहे हैं। यह सकारात्मक पहल भविष्य के लिए उम्मीद जगाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">5 जून को मनाया जाने वाला विश्व पर्यावरण दिवस एक बार फिर यह संदेश देगा कि पृथ्वी केवल वर्तमान पीढ़ी की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की भी धरोहर है। पर्यावरण की रक्षा के लिए उठाया गया हर छोटा कदम भविष्य को सुरक्षित बनाने में योगदान देता है। ऐसे में यह दिन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संकल्प लेने का अवसर है। यदि समाज, सरकार और नागरिक मिलकर प्रयास करें तो एक स्वच्छ, हरित और सुरक्षित भविष्य का निर्माण संभव है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 31 May 2026 09:32:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल में सस्टेनेबिलिटी पर जोर, सरकारी दफ्तरों में खर्च कम करने के आदेश जारी</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल सरकार ने सस्टेनेबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए दफ्तरों में बिजली, कागज और संसाधनों की खपत कम करने के नए निर्देश जारी किए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/emphasis-on-sustainability-in-west-bengal-orders-issued-to-reduce/article-53761"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/west-bengal-sustainability-government-order.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पश्चिम बंगाल की राज्य सरकार ने सस्टेनेबिलिटी को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब सरकारी दफ्तरों में बिजली</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">कागज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और अन्य संसाधनों के उपयोग पर बढ़ती सख्ती लागू होगी। हाल ही में दिए गए आदेशों में यह स्पष्ट किया गया है कि प्रशासनिक स्तर पर अनावश्यक खर्चों को कम करने और कार्य को ज्यादा प्रभावी और पर्यावरण के अनुकूल बनाने पर जोर दिया जाएगा। ये निर्देश कोलकाता समेत सभी विभागों तक पहुंचा दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि इस पहल का उद्देश्य सिर्फ खर्चों में कटौती नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सरकारी सिस्टम की दक्षता बढ़ाना भी है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूत्रों के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">कई विभागों में लंबे समय से बिजली की खपत और कागज के अति उपयोग को लेकर चिंता जताई जा रही थी। अब इस आदेश के बाद दफ्तरों में प्रिंटिंग को सीमित करने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल फाइलिंग को बढ़ावा देने और बेवजह लाइट-एसी चलाने जैसी आदतों पर रोक लगाने की बात की गई है। आज सुबह से ही दफ्तरों में इस पर हलचल देखने को मिली। कुछ कर्मचारियों का कहना है कि यह बदलाव अचानक आया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन वे मानते हैं कि धीरे-धीरे इसकी आदत पड़ जाएगी। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशासनिक स्तर पर इसे आवश्यक कदम माना जा रहा है ताकि सरकारी खर्चों पर नियंत्रण रखा जा सके।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अधिकारियों का कहना है कि पश्चिम बंगाल सस्टेनेबिलिटी अभियान के तहत आने वाले महीनों में और भी कड़े नियम लागू किए जा सकते हैं। खासकर बड़े सरकारी दफ्तरों में एनर्जी ऑडिट कराने की योजना भी बनाई जा रही है। यह भी बताया गया है कि जिन विभागों में संसाधनों की खपत अधिक मिलेगी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहां जिम्मेदारी तय की जाएगी। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अभी यह सिर्फ एक दिशा-निर्देश के रूप में लागू किया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन आगे इसे मॉनिटरिंग सिस्टम से जोड़ा जा सकता है। कुछ कर्मचारियों ने यह भी कहा कि डिजिटल सिस्टम के बढ़ने से काम करना आसान होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इंटरनेट और तकनीकी संसाधनों पर निर्भरता भी बढ़ेगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे संभालना जरूरी होगा।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 12:19:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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