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                <title>UPSC - दैनिक जागरण</title>
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                <title>राज्य पुलिस सेवा के अफसरों की आज डीपीसी, 9 अधिकारियों को मिल सकता है आईपीएस अवार्ड</title>
                                    <description><![CDATA[संघ लोक सेवा आयोग की चयन समिति करेगी नामों पर विचार, 27 अधिकारियों की सूची में से नौ को भारतीय पुलिस सेवा में पदोन्नति मिलने की संभावना]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/9-dpc-officers-of-state-police-service-can-get-ips/article-56895"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mp-police-dpc.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश में राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों के लिए गुरुवार का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। लंबे समय से प्रतीक्षित विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक आज आयोजित होने जा रही है, जिसमें राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों को भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में पदोन्नति देने के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। गृह विभाग की ओर से भेजे गए प्रस्ताव के बाद संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने डीपीसी की तारीख को मंजूरी दी थी। इसके बाद अब सभी औपचारिकताएं पूरी कर बैठक आयोजित की जा रही है। इस बैठक पर प्रदेश के पुलिस महकमे की नजर बनी हुई है, क्योंकि इससे कई वरिष्ठ अधिकारियों के करियर की दिशा तय होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">डीपीसी की बैठक में मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और संघ लोक सेवा आयोग के प्रतिनिधि शामिल होंगे। चयन समिति उपलब्ध रिक्तियों, वरिष्ठता, सेवा रिकॉर्ड और अन्य निर्धारित मानकों के आधार पर अधिकारियों के नामों पर विचार करेगी। इस बार कुल नौ रिक्त पदों के लिए चयन प्रक्रिया की जा रही है। माना जा रहा है कि बैठक में विस्तृत चर्चा के बाद अंतिम सूची तैयार की जाएगी, जिसे बाद में औपचारिक मंजूरी के लिए आगे भेजा जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गृह विभाग की ओर से भारतीय पुलिस सेवा में पदोन्नति के लिए प्रस्तावित सूची में कुल 27 अधिकारियों के नाम शामिल किए गए हैं। इनमें वर्ष 1997 और 1998 बैच के राज्य पुलिस सेवा अधिकारी प्रमुख रूप से शामिल हैं। वरिष्ठता सूची और उपलब्ध रिक्तियों के आधार पर चयन समिति इन अधिकारियों की सेवा अवधि, कार्य निष्पादन और प्रशासनिक रिकॉर्ड का मूल्यांकन करेगी। पुलिस मुख्यालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अधिकांश अधिकारियों के रिकॉर्ड पहले ही परीक्षण प्रक्रिया से गुजर चुके हैं और डीपीसी में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस बार जिन अधिकारियों के नामों पर विचार होना है उनमें वर्ष 1997 बैच के सीताराम ससत्या और अमृत मीणा शामिल हैं। वहीं 1998 बैच से निमिषा पांडेय, राजेश मिश्रा, मलय जैन, अमित सक्सेना, मनीषा सोनी, सुमन गुर्जर, संदीप मिश्रा, सब्यसाची सर्राफ, समर वर्मा और सत्येन्द्र सिंह तोमर सहित अन्य अधिकारियों के नाम सूची में हैं। कुल 27 अधिकारियों में से नौ अधिकारियों को भारतीय पुलिस सेवा में शामिल करने का प्रस्ताव है। इसलिए चयन प्रक्रिया को लेकर अधिकारियों के बीच उत्सुकता बनी हुई है। इस बार कुछ नामों को लेकर विशेष चर्चा होने की संभावना है। बताया जा रहा है कि कुछ अधिकारियों के मामलों में तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर कुछ मुद्दे लंबित हैं, जिन पर डीपीसी के दौरान विचार किया जा सकता है। ऐसे मामलों में चयन समिति उपलब्ध दस्तावेजों और रिपोर्टों के आधार पर निर्णय लेती है। यदि किसी अधिकारी के खिलाफ कोई जांच या अन्य प्रक्रिया लंबित होती है तो उसके मामले में सीलबंद लिफाफा प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है। हालांकि अंतिम निर्णय बैठक में मौजूद चयन समिति ही करेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि कुछ अधिकारियों की पदोन्नति प्रक्रिया पर लंबित मामलों का असर पड़ सकता है। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। अधिकारियों का कहना है कि डीपीसी पूरी तरह सेवा नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आयोजित की जाएगी। सभी नामों पर निष्पक्ष तरीके से विचार किया जाएगा और पात्रता के आधार पर निर्णय लिया जाएगा। राज्य पुलिस सेवा से भारतीय पुलिस सेवा में पदोन्नति को पुलिस अधिकारियों के करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। आईपीएस अवार्ड मिलने के बाद अधिकारियों को अखिल भारतीय सेवा का दर्जा प्राप्त होता है और उन्हें बड़े प्रशासनिक तथा पुलिस नेतृत्व से जुड़े दायित्व सौंपे जाते हैं। यही वजह है कि हर वर्ष होने वाली डीपीसी को लेकर अधिकारियों के बीच विशेष उत्साह और प्रतीक्षा रहती है। कई अधिकारी वर्षों की सेवा के बाद इस अवसर का इंतजार करते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस बीच राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की डीपीसी को लेकर भी चर्चाएं जारी हैं। हालांकि सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से अभी तक संबंधित प्रस्ताव आगे नहीं भेजा गया है। इसके चलते राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की पदोन्नति प्रक्रिया फिलहाल लंबित बनी हुई है। दूसरी ओर पुलिस विभाग की प्रक्रिया अपेक्षाकृत आगे बढ़ चुकी है और आज की बैठक के बाद महत्वपूर्ण निर्णय सामने आने की उम्मीद है। पुलिस विभाग से जुड़े जानकारों का मानना है कि डीपीसी केवल पदोन्नति प्रक्रिया नहीं बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने का भी माध्यम होती है। वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारियों को उच्च जिम्मेदारियां मिलने से पुलिस प्रशासन को नेतृत्व स्तर पर मजबूती मिलती है। यही कारण है कि इस प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता और नियमों के अनुरूप संपन्न कराया जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 13:41:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>यूपीएससी ने जारी की सिविल सेवा प्रीलिम्स 2026 की आंसर-की, उम्मीदवारों को बड़ी राहत</title>
                                    <description><![CDATA[पहली बार अंतिम परिणाम से पहले जारी हुई आंसर-की, अभ्यर्थियों को आपत्ति दर्ज कराने का मौका]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/upsc-released-the-answer-key-of-civil-services-prelims-2026/article-54401"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/upsc-answer-key-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी ने सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026 की आंसर-की जारी कर दी है। आयोग ने पहली बार ऐसा कदम उठाया है, जब अंतिम परिणाम आने से पहले ही प्रीलिम्स परीक्षा की आंसर-की सार्वजनिक की गई है। इस फैसले को परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और अभ्यर्थियों को समय रहते जानकारी देने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। आंसर-की जारी होने के बाद अब लाखों उम्मीदवार अपने उत्तरों का मिलान कर परीक्षा में संभावित प्रदर्शन का अनुमान लगा सकेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd">यूपीएससी की ओर से सामान्य अध्ययन पेपर-1 और सामान्य अध्ययन पेपर-2 यानी सीसैट की आंसर-की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई है। आयोग ने इसे पीडीएफ फॉर्मेट में जारी किया है, ताकि उम्मीदवार आसानी से डाउनलोड कर सकें। इसके साथ ही आयोग ने छात्रों को प्रश्नों और उत्तरों पर आपत्ति दर्ज कराने की सुविधा भी दी है। माना जा रहा है कि यह प्रक्रिया भविष्य में परीक्षा प्रणाली को और अधिक जवाबदेह बना सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस बार आयोग के फैसले ने अभ्यर्थियों के बीच काफी चर्चा पैदा कर दी है। लंबे समय से उम्मीदवार मांग कर रहे थे कि प्रीलिम्स परीक्षा की आंसर-की जल्दी जारी की जाए, ताकि वे अपने प्रदर्शन का सही आकलन कर सकें। पहले यूपीएससी अंतिम परिणाम घोषित होने के बाद ही आंसर-की जारी करता था। ऐसे में उम्मीदवारों को काफी इंतजार करना पड़ता था और कई बार उन्हें यह समझने में मुश्किल होती थी कि किन सवालों में गलती हुई।</p>
<p class="isSelectedEnd">अब आयोग के इस कदम से उम्मीदवारों को तैयारी की रणनीति बनाने में भी मदद मिलेगी। जिन अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा की तैयारी करनी है, वे अपने संभावित स्कोर का अनुमान लगाकर आगे की योजना बना सकेंगे। वहीं जिन उम्मीदवारों को कटऑफ को लेकर संशय है, उन्हें भी स्थिति स्पष्ट करने में आसानी होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">परीक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यूपीएससी का यह फैसला प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव है। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई विशेषज्ञों ने कहा कि इससे परीक्षा प्रणाली पर उम्मीदवारों का भरोसा और मजबूत होगा। साथ ही अगर किसी प्रश्न या उत्तर में त्रुटि होती है तो उसे समय रहते ठीक किया जा सकेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">यूपीएससी ने उम्मीदवारों को निर्धारित समय सीमा के भीतर आपत्ति दर्ज कराने की सुविधा दी है। अभ्यर्थी ऑनलाइन माध्यम से संबंधित प्रश्नों पर अपनी आपत्तियां और सुझाव भेज सकते हैं। इसके लिए आयोग ने प्रक्रिया और दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। आयोग का कहना है कि सभी आपत्तियों की विशेषज्ञों की टीम द्वारा जांच की जाएगी और जरूरत पड़ने पर अंतिम उत्तरों में संशोधन किया जा सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस बार सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में देशभर से बड़ी संख्या में उम्मीदवार शामिल हुए थे। परीक्षा केंद्रों पर सुबह से ही अभ्यर्थियों की भीड़ देखने को मिली थी। कई राज्यों में गर्मी और मौसम की चुनौती के बावजूद छात्र परीक्षा देने पहुंचे। परीक्षा समाप्त होने के बाद से ही सोशल मीडिया और विभिन्न शैक्षणिक प्लेटफॉर्म पर संभावित कटऑफ और उत्तरों को लेकर चर्चा चल रही थी।</p>
<p class="isSelectedEnd">कोचिंग संस्थानों और शिक्षा विशेषज्ञों ने भी आयोग के इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे छात्रों का मानसिक दबाव कम होगा और परीक्षा प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी दिखाई देगी। कई शिक्षकों का मानना है कि भविष्य में अन्य भर्ती एजेंसियां भी इसी तरह की व्यवस्था अपना सकती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन परीक्षाओं में मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार आईएएस, आईपीएस, आईएफएस और अन्य केंद्रीय सेवाओं में चयन के लिए परीक्षा देते हैं। प्रारंभिक परीक्षा इस चयन प्रक्रिया का पहला चरण होती है, जिसके बाद मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू आयोजित किए जाते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">उम्मीदवारों के बीच इस बार कटऑफ को लेकर भी काफी चर्चा है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि सामान्य अध्ययन पेपर-1 का स्तर मध्यम से कठिन रहा, जबकि सीसैट में गणित और तार्किक प्रश्नों ने कई अभ्यर्थियों को चुनौती दी। हालांकि वास्तविक स्थिति अब आंसर-की जारी होने के बाद ज्यादा स्पष्ट होने लगी है। सोशल मीडिया पर भी कई अभ्यर्थियों ने आयोग के इस फैसले की सराहना की है। छात्रों का कहना है कि इससे उन्हें तैयारी में दिशा मिलेगी और परिणाम का इंतजार करते समय अनिश्चितता कम होगी। कई उम्मीदवारों ने इसे छात्र हित में उठाया गया सकारात्मक कदम बताया।</p>
<p class="isSelectedEnd">आयोग की ओर से जारी सूचना में कहा गया है कि उम्मीदवार केवल आधिकारिक वेबसाइट से ही आंसर-की डाउनलोड करें और किसी भ्रामक जानकारी से बचें। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि अंतिम परिणाम और कटऑफ बाद में अलग से जारी किए जाएंगे। अब अभ्यर्थियों की नजर अगले चरण यानी मुख्य परीक्षा की तैयारी और संभावित कटऑफ पर टिकी हुई है। वहीं शिक्षा जगत में यूपीएससी का यह कदम आने वाले समय में प्रतियोगी परीक्षाओं के ढांचे में बदलाव की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 12:47:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>UPSC  परीक्षा  होते ही जारी हो जाएंगी आंसर-की जारी, छात्रों को क्या मिलेगा फायदा</title>
                                    <description><![CDATA[UPSC CSE 2026 में नया नियम लागू, परीक्षा के तुरंत बाद प्रोविजनल आंसर-की जारी होगी। जानें आपत्ति प्रक्रिया और छात्रों को क्या फायदा मिलेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/answer-key-will-be-released-as-soon-as-upsc-exam/article-53780"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/upsc-cse-answer-key-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">UPSC CSE Answer Key <span lang="hi" xml:lang="hi">2026 के बारे में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संघ लोक सेवा आयोग ने आखिरकार एक लंबे समय से चल रही मांग को मान लिया है। अब सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026 के तुरंत बाद प्रोविजनल आंसर-की जारी की जाएगी। इसे परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आयोग के अध्यक्ष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डॉ. अजय कुमार ने इसे एक नई शुरुआत बताया है और कहा है कि इससे उम्मीदवारों के साथ संवाद और अधिक स्पष्टता के साथ किया जा सकेगा। पहले आंसर-की परीक्षा और रिजल्ट के काफी समय बाद जारी होती थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे छात्रों को अपनी उत्तर कुंजी की जांच करने और किसी भी गलती पर आपत्ति दर्ज कराने का बहुत ही सीमित मौका मिलता था। कई उम्मीदवार लंबे समय से इस प्रक्रिया में बदलाव की मांग कर रहे थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और अब आयोग ने उसी दिशा में यह बड़ा कदम उठाया है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस नए नियम के तहत</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">छात्रों को प्रोविजनल आंसर-की देखने का मौका मिलेगा और वे उस पर अपनी आपत्ति भी दर्ज करा सकेंगे। इसके लिए आयोग ने 31 मई की शाम 6 बजे तक आपत्तियां ऑनलाइन दर्ज करने की एक समय सीमा निर्धारित की है। यह प्रक्रिया </span>UPSC <span lang="hi" xml:lang="hi">की आधिकारिक वेबसाइट </span>upsconline.nic.in <span lang="hi" xml:lang="hi">पर मौजूद </span>‘Online Question Paper Representation Portal (QPRep)’ <span lang="hi" xml:lang="hi">के माध्यम से की जाएगी। उम्मीदवारों को यह ध्यान रखना होगा कि आपत्ति दर्ज करने के लिए केवल दावा करना ही काफी नहीं होगा</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें अपने दावे के समर्थन में ठोस और प्रमाणिक दस्तावेज भी प्रस्तुत करने होंगे। आयोग ने स्पष्ट किया है कि कम से कम तीन प्रामाणिक स्रोत या समर्थन प्राप्त प्रूफ अपलोड करना अनिवार्य होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि किसी भी उत्तर पर निष्पक्षता से पुनर्विचार किया जा सके। इसके बाद एक्सपर्ट्स की एक टीम सभी आपत्तियों की गहराई से समीक्षा करेगी और जरूरत पड़ने पर आंसर-की में संशोधन भी किया जाएगा। अंतिम आंसर-की तभी जारी की जाएगी जब सभी आपत्तियों की विस्तृत समीक्षा पूरी हो जाएगी।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस बदलाव का सीधा असर छात्रों की तैयारी और मानसिक स्थिति पर पड़ेगा। पहले</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां छात्रों को रिजल्ट आने तक यह पता नहीं चलता था कि उनके प्रदर्शन का क्या हाल है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं अब परीक्षा के तुरंत बाद एक स्पष्ट तस्वीर मिल सकेगी। खासकर उन छात्रों के लिए यह अच्छा होगा जो कट-ऑफ के आसपास होते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि हर अंक उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। अब वे जल्दी समझ सकेंगे कि उन्हें मेंस परीक्षा की तैयारी तेज करनी है या फिर फिर से प्रीलिम्स पर ध्यान केंद्रित करना होगा। कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न केवल पारदर्शिता बढ़ाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि प्रतियोगी छात्रों की रणनीति बनाने में भी मदद करेगा। इससे अनिश्चितता की स्थिति कम होगी और तैयारी को अधिक व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जा सकेगा। कुल मिलाकर</span>, UPSC <span lang="hi" xml:lang="hi">का यह निर्णय परीक्षा प्रणाली में एक महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे लाखों उम्मीदवारों को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 15:16:21 +0530</pubDate>
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