<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.dainikjagranmpcg.com/rss/tag-14346" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>दैनिक जागरण RSS Feed Generator</generator>
                <title>RSS - दैनिक जागरण</title>
                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/tag/14346/rss</link>
                <description>RSS RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>विभाजन के विस्थापित शरणार्थी नहीं, संघर्ष के योद्धा थे: मोहन भागवत</title>
                                    <description><![CDATA[आरएसएस प्रमुख ने कहा कि 1947 के विभाजन के बाद भारत आने वाले लोगों ने मातृभूमि और अपने धर्म के सम्मान के लिए सबकुछ छोड़कर संघर्ष का रास्ता चुना था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/mohan-bhagwat-was-not-a-displaced-refugee-of-partition-but/article-57659"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/mohan-bhagwat.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने 1947 के भारत विभाजन के बाद पाकिस्तान से भारत आए लोगों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इन लोगों को शरणार्थी कहना उचित नहीं है, क्योंकि उन्होंने मजबूरी में नहीं बल्कि अपनी मातृभूमि और अपने धर्म के प्रति आस्था के कारण सब कुछ छोड़कर भारत आने का निर्णय लिया था। भागवत ने ऐसे लोगों को "संघर्ष के योद्धा" बताते हुए कहा कि उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अपने विश्वास और भारतीय संस्कृति को नहीं छोड़ा। उनके इस बयान के बाद विभाजन और उससे जुड़े इतिहास पर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। मोहन भागवत बुधवार को नागपुर में सिंधु एजुकेशन सोसाइटी के 75वें स्थापना दिवस कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने विभाजन की त्रासदी का जिक्र करते हुए कहा कि जिन लोगों ने पाकिस्तान में अपनी पीढ़ियों से बसाए घर, जमीन, कारोबार और संपत्ति छोड़कर भारत आने का फैसला किया, उन्होंने यह कदम पूरी समझ और विश्वास के साथ उठाया था। उनका उद्देश्य केवल सुरक्षित जीवन नहीं था, बल्कि ऐसे देश में रहना था जहां वे बिना किसी डर के अपने धर्म और परंपराओं का पालन कर सकें।</p>
<p style="text-align:justify;">भागवत ने कहा कि विभाजन के समय लाखों परिवारों ने भारी कष्ट झेले। उन्हें अपना सब कुछ छोड़ना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने भारत को ही अपनी अंतिम मंजिल बनाया। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को शरणार्थी कहना उनके संघर्ष और बलिदान के साथ न्याय नहीं करता। उनके अनुसार वे वास्तव में संघर्ष के योद्धा थे, जिन्होंने मातृभूमि के प्रति प्रेम और अपने धार्मिक विश्वास की रक्षा के लिए कठिन रास्ता चुना। अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि विभाजन केवल जमीन का बंटवारा नहीं था, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन पर गहरा असर डालने वाली ऐतिहासिक घटना थी। उस समय अनेक परिवारों ने अपनों को खोया, वर्षों की मेहनत से बनाई संपत्ति पीछे छोड़नी पड़ी और नई जगह पर जीवन की शुरुआत करनी पड़ी। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और नए सिरे से अपने जीवन का निर्माण किया। भागवत ने कहा कि यही संघर्ष उन्हें विशेष बनाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आरएसएस प्रमुख ने यह भी कहा कि उस समय इन लोगों ने जो लड़ाई हारी, वह पूरी तरह उनकी अपनी गलती नहीं थी। परिस्थितियां ऐसी थीं कि उन्हें अपना घर छोड़ना पड़ा। लेकिन उन्होंने विपरीत हालात में भी साहस नहीं खोया और भारत आकर समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों की कहानी आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती है। अपने भाषण में मोहन भागवत ने शिक्षा व्यवस्था पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी दिलाना नहीं होना चाहिए। अगर शिक्षा केवल रोजगार तक सीमित रह जाएगी तो समाज का समग्र विकास संभव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यक्ति के भीतर संस्कार, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य की भावना भी विकसित करे, तभी उसका वास्तविक उद्देश्य पूरा होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने विद्यार्थियों और शिक्षकों से आह्वान किया कि शिक्षा को केवल परीक्षा और अंकों तक सीमित न रखें। शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो व्यक्ति को अच्छा नागरिक बनाए, समाज के प्रति संवेदनशील बनाए और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता विकसित करे। उनके अनुसार समाज का भविष्य केवल तकनीकी ज्ञान से नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों और चरित्र निर्माण से मजबूत होगा। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि इतिहास से सीख लेना जरूरी है। विभाजन जैसी घटनाएं केवल किताबों का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि उनसे समाज को यह समझ मिलती है कि एकता, सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक समरसता कितनी महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि देश के विकास में उन लोगों का योगदान हमेशा याद रखा जाना चाहिए जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी।</p>
<p style="text-align:justify;">भागवत के इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। विभाजन को लेकर समय-समय पर अलग-अलग विचार सामने आते रहे हैं। इतिहासकारों के अनुसार 1947 का विभाजन आधुनिक इतिहास की सबसे बड़ी मानवीय त्रासदियों में से एक था। उस दौरान लाखों लोग विस्थापित हुए और बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी जान गंवाई। भारत और पाकिस्तान के बीच हुए इस विभाजन ने करोड़ों परिवारों के जीवन को हमेशा के लिए बदल दिया। विभाजन के बाद भारत आने वाले लोगों ने देश के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने नई परिस्थितियों में खुद को स्थापित किया और व्यापार, शिक्षा, उद्योग तथा अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया। कई शहरों के विकास में भी इन परिवारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">सिंधु एजुकेशन सोसाइटी के स्थापना दिवस कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने भी भागवत के विचारों को ध्यानपूर्वक सुना। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षा और सामाजिक मूल्यों पर चर्चा करना था, लेकिन विभाजन पर उनके विचार सबसे अधिक चर्चा का विषय बन गए। आरएसएस प्रमुख ने अंत में कहा कि समाज को उन लोगों के संघर्ष को सम्मान देना चाहिए जिन्होंने कठिनाइयों के बावजूद देश और संस्कृति के प्रति अपनी आस्था बनाए रखी। उन्होंने युवाओं से इतिहास को समझने, उससे प्रेरणा लेने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने का आह्वान किया। उनका कहना था कि राष्ट्र निर्माण केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक की भागीदारी से संभव होता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/mohan-bhagwat-was-not-a-displaced-refugee-of-partition-but/article-57659</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/mohan-bhagwat-was-not-a-displaced-refugee-of-partition-but/article-57659</guid>
                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 16:06:04 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/mohan-bhagwat.jpg"                         length="156304"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पवन खेड़ा का RSS पर हमला, बोले- आजादी की लड़ाई में कोई योगदान नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[रायपुर पहुंचे कांग्रेस नेता ने राम मंदिर ट्रस्ट पर भी उठाए सवाल, जिला अध्यक्षों के 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आज होगा समापन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/pawan-kheda-attacks-rss-says-no-contribution-in-freedom-struggle/article-57301"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/pawan-khera.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया एवं प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा रविवार देर रात रायपुर पहुंचे। सोमवार को वे कांग्रेस के जिला अध्यक्षों के 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के समापन समारोह में शामिल होंगे। राजधानी पहुंचते ही उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), राम मंदिर ट्रस्ट और मौजूदा राजनीतिक माहौल को लेकर कई मुद्दों पर अपनी पार्टी का पक्ष रखा। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि देश के स्वतंत्रता आंदोलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कोई योगदान नहीं रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भगवान राम के नाम पर किसी भी तरह के भ्रष्टाचार को स्वीकार नहीं किया जा सकता।पवन खेड़ा ने कहा कि कांग्रेस का प्रशिक्षण शिविर केवल संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि बदलते राजनीतिक और सामाजिक माहौल को समझने का भी एक महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल दौर में राजनीति का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और सोशल मीडिया का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे समय में पार्टी कार्यकर्ताओं और जिला अध्यक्षों को नई चुनौतियों के अनुरूप तैयार करना जरूरी है। यही वजह है कि इस प्रशिक्षण शिविर में संगठन, संवाद, मीडिया प्रबंधन और चुनावी रणनीति जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान पवन खेड़ा ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब देश आजादी की लड़ाई लड़ रहा था, तब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कोई भूमिका नहीं थी। उनका आरोप था कि स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में संघ का कोई योगदान दर्ज नहीं है। उन्होंने कहा कि जो संगठन देश की आजादी की लड़ाई का हिस्सा नहीं रहे, वे आज इतिहास की नई व्याख्या करने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस नेता ने कहा कि इतिहास को तथ्यों के आधार पर देखा जाना चाहिए, न कि राजनीतिक सुविधा के अनुसार।</p>
<p class="isSelectedEnd">महात्मा गांधी को लेकर RSS के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पवन खेड़ा ने कहा कि ऐसे बयानों पर अधिक समय खर्च करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि देश इस समय महंगाई, बेरोजगारी और किसानों समेत कई अहम मुद्दों का सामना कर रहा है। राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों को इन विषयों पर चर्चा करनी चाहिए, न कि ऐसे विवादित बयानों के जरिए लोगों का ध्यान भटकाना चाहिए। अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े कथित चोरी के मामले को लेकर भी पवन खेड़ा ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आई हैं और इन मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रस्ट का गठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सोच और निगरानी में हुआ है तथा इसकी गतिविधियों पर प्रधानमंत्री कार्यालय की भी नजर रही है। उन्होंने कहा कि भगवान राम करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र हैं और उनके नाम पर किसी भी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार स्वीकार नहीं किया जा सकता। खेड़ा ने कहा कि अयोध्या से लेकर उज्जैन तक सामने आए कुछ मामलों ने लोगों के मन में सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना था कि अगर कहीं भी अनियमितता की शिकायत सामने आती है तो उसकी पारदर्शी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थाओं से जुड़े मामलों में जवाबदेही और पारदर्शिता दोनों जरूरी हैं ताकि लोगों का विश्वास बना रहे।रायपुर में चल रहे कांग्रेस के प्रशिक्षण शिविर को लेकर भी उन्होंने विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि पिछले दस दिनों से पार्टी के जिला अध्यक्षों को संगठन को मजबूत करने, बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने, चुनावी तैयारी, जनसंपर्क अभियान और मीडिया के प्रभावी उपयोग जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया। उनका कहना था कि बदलते राजनीतिक माहौल में केवल पारंपरिक तरीके पर्याप्त नहीं हैं। कार्यकर्ताओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के प्रभावी उपयोग की भी जानकारी होना जरूरी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण शिविर का उद्देश्य केवल भाषण देना नहीं, बल्कि संवाद स्थापित करना और जमीनी स्तर पर आने वाली समस्याओं को समझना भी है। जिला अध्यक्षों ने भी अपने अनुभव साझा किए और विभिन्न राज्यों में संगठन के सामने आने वाली चुनौतियों पर चर्चा की। इससे पार्टी नेतृत्व को भी कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं और सुझावों को समझने का अवसर मिला। गौरतलब है कि इस प्रशिक्षण शिविर में इससे पहले कांग्रेस सांसद राहुल गांधी भी शामिल हुए थे। उन्होंने संगठन को मजबूत बनाने, आम जनता के बीच सक्रिय रहने और विचारधारा आधारित राजनीति को आगे बढ़ाने पर जोर दिया था। राहुल गांधी ने जिला अध्यक्षों से कहा था कि संगठन की मजबूती ही चुनावी सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है। उनके संबोधन के बाद सोमवार को होने वाला समापन समारोह भी कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आगामी चुनावों को देखते हुए कांग्रेस अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रही है। रायपुर में आयोजित यह प्रशिक्षण शिविर उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व का प्रयास है कि जिला स्तर के पदाधिकारियों को नई राजनीतिक परिस्थितियों के अनुरूप तैयार किया जाए, ताकि वे जनता के बीच अधिक प्रभावी तरीके से पार्टी का संदेश पहुंचा सकें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/pawan-kheda-attacks-rss-says-no-contribution-in-freedom-struggle/article-57301</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/pawan-kheda-attacks-rss-says-no-contribution-in-freedom-struggle/article-57301</guid>
                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 14:53:53 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/pawan-khera.jpg"                         length="113366"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ग्वालियर में 15 साल से रखी है भोजशाला की मां वाग्देवी प्रतिमा, अब बढ़ीं स्थापना की उम्मीदें</title>
                                    <description><![CDATA[भोजशाला पर कोर्ट फैसले के बाद ग्वालियर में रखी मां वाग्देवी की अष्टधातु प्रतिमा फिर चर्चा में है। 15 साल से स्थापना का इंतजार जारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhojshalas-mother-vagdevi-statue-has-been-kept-in-gwalior-for/article-53814"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/bhojshala-dispute,-gwalior-dhar-goddess-vagdevi.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भोजशाला के बारे में आए कोर्ट के फैसले के बाद मध्य प्रदेश का धार्मिक और सांस्कृतिक माहौल अचानक बदल गया है। फैसले के बाद धार में श्रद्धालुओं की संख्या में इजाफा हुआ है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं ग्वालियर में एक ऐसा घर है जो पिछले 15 साल से मां वाग्देवी की अष्टधातु प्रतिमा को स्थापित करने की उम्मीद कर रहा है। यह वही प्रतिमा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे 2011 में भोजशाला के गर्भगृह में रखा जाना था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन विवाद और प्रशासनिक कारणों के चलते इसे धार नहीं ले जाया जा सका। अब जब कोर्ट ने भोजशाला को मंदिर मान कर पूजा-अर्चना की इजाजत दी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो ग्वालियर में इस प्रतिमा को लेकर चर्चा फिर से तेज हो गई है। खास बात यह है कि यह प्रतिमा लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी मूल मां वाग्देवी प्रतिमा की हूबहू नकल मानी जाती है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ग्वालियर के मशहूर मूर्तिकार प्रभात राय और उनकी टीम ने इसे तैयार किया था। उनके बेटे अनुज राय के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह प्रतिमा अष्टधातु से बनाई गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसकी ऊंचाई लगभग 3.5 फीट है और वजन ढाई क्विंटल से अधिक बताया जा रहा है। इसे बनाने में 2011 में करीब ढाई से तीन लाख रुपए खर्च हुए थे। उस समय 26 कलाकारों ने लगभग 35 से 40 दिन लगातार काम करके इसे तैयार किया था। प्रतिमा की बनावट और नक्काशी इस तरह से की गई कि यह लंदन म्यूजियम में रखी मूल प्रतिमा से मेल खाती है। सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ नेता नवल किशोर ने इस मूर्ति के निर्माण का जिम्मा लिया था। मूर्ति बनकर तैयार थी और बसंत पंचमी पर धार भेजने की योजना थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उसी समय भोजशाला के मामले में माहौल तनावपूर्ण हो गया। प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से मूर्ति को ग्वालियर में ही रोक दिया। हालात इतने संवेदनशील हो गए थे कि कुछ समय के लिए मूर्तिकार के घर पर पुलिस सुरक्षा भी लगानी पड़ी। अनुज बताते हैं कि 2011 से 2015 तक हर बसंत पंचमी पर पुलिस निगरानी में प्रतिमा को कुछ समय के लिए बाहर रखा जाता था।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अब कोर्ट के फैसले के बाद इस प्रतिमा को लेकर फिर से उम्मीदें जगी हैं। हालांकि</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशासन या किसी संगठन ने अभी तक प्रतिमा को धार ले जाने के लिए आधिकारिक संपर्क नहीं किया है। ऐसा कहा जा रहा है कि सभी पक्ष कोर्ट के विस्तृत आदेश और कानूनी प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धार की भोजशाला में माहौल पूरी तरह उत्सव जैसा दिखाई दे रहा है। श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। मां वाग्देवी की आरती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूजा और अखंड ज्योति स्थापना के बाद परिसर में धार्मिक उल्लास फैल गया है। इंदौर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">झाबुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खरगोन और आसपास के जिलों से लोग परिवार के साथ भोजशाला पहुंच रहे हैं। इस बीच</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मूर्तिकार परिवार ने भी अपनी भावनाएं व्यक्त की हैं। अनुज राय ने कहा कि अगर भविष्य में कोई इस प्रतिमा को लेने नहीं आता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वे इसे अपने पास सम्मान के साथ रखेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि यह सिर्फ एक मूर्ति नहीं बल्कि भारतीय इतिहास और आस्था का प्रतीक है। ग्वालियर में रखी यह प्रतिमा एक बार फिर चर्चा में है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और आने वाले दिनों में इस पर बड़ा फैसला हो सकता है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhojshalas-mother-vagdevi-statue-has-been-kept-in-gwalior-for/article-53814</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhojshalas-mother-vagdevi-statue-has-been-kept-in-gwalior-for/article-53814</guid>
                <pubDate>Wed, 20 May 2026 11:05:49 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/bhojshala-dispute%2C-gwalior-dhar-goddess-vagdevi.jpg"                         length="152740"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        