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                <title>NASA - दैनिक जागरण</title>
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                <description>NASA RSS Feed</description>
                
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                <title>तीन रॉकेट फेल, आखिरी दांव और फिर इतिहास; ऐसे बनी स्पेसएक्स की सफलता की कहानी</title>
                                    <description><![CDATA[लगातार असफलताओं, आर्थिक संकट और दिवालिया होने की कगार से उठकर इलॉन मस्क ने स्पेसएक्स को दुनिया की सबसे प्रभावशाली अंतरिक्ष कंपनियों में बदल दिया। 55वें जन्मदिन पर जानिए इस सफर की पूरी कहानी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/three-rockets-failed-the-last-bet-and-then-history-became/article-57192"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/elon-musk.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आज दुनिया के सबसे चर्चित उद्योगपतियों में शामिल इलॉन मस्क अपना 55वां जन्मदिन मना रहे हैं। उनकी कंपनी स्पेसएक्स का नाम अब अंतरिक्ष तकनीक की दुनिया में सबसे आगे गिना जाता है, लेकिन यहां तक पहुंचने का सफर बिल्कुल आसान नहीं था। एक समय ऐसा भी था जब लगातार तीन रॉकेट लॉन्च फेल हो चुके थे, टेस्ला आर्थिक संकट से जूझ रही थी और मस्क के पास बची हुई लगभग पूरी पूंजी चौथे लॉन्च पर लगी हुई थी। अगर वह मिशन भी असफल हो जाता तो स्पेसएक्स के साथ-साथ मस्क का कारोबारी भविष्य भी खत्म हो सकता था। लेकिन किस्मत और तकनीक दोनों ने साथ दिया और उसी लॉन्च ने इतिहास बदल दिया। आज स्पेसएक्स की सफलता ने मस्क को दुनिया के सबसे अमीर लोगों में सबसे आगे ला खड़ा किया है और उनकी संपत्ति ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े तक पहुंच चुकी है। इलॉन मस्क की कारोबारी यात्रा 1990 के दशक में शुरू हुई थी। उन्होंने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी छोड़कर Zip2 नाम का ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बनाया, जिसे बाद में कॉम्पैक ने खरीद लिया। इसके बाद उन्होंने X.com की शुरुआत की, जो आगे चलकर PayPal बना। जब eBay ने PayPal का अधिग्रहण किया तो मस्क को लगभग 180 मिलियन डॉलर मिले। आमतौर पर इतनी बड़ी रकम मिलने के बाद लोग सुरक्षित निवेश करते हैं, लेकिन मस्क ने इसके उलट पूरा पैसा ऐसे क्षेत्रों में लगाया, जिन्हें उस समय बेहद जोखिम भरा माना जाता था। उन्होंने स्पेसएक्स, टेस्ला और सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट्स में अपनी अधिकांश पूंजी निवेश कर दी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">स्पेसएक्स की शुरुआत के पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है। साल 2001 में मस्क रूस गए थे, जहां उनका मकसद पुराने रॉकेट खरीदना था। लेकिन बातचीत के दौरान उन्हें गंभीरता से नहीं लिया गया और कीमतें भी उनकी उम्मीद से कहीं ज्यादा बताई गईं। बताया जाता है कि इसी अनुभव के बाद उन्होंने फैसला किया कि अगर रॉकेट इतने महंगे हैं तो उन्हें खुद बनाना चाहिए। उन्होंने रॉकेट निर्माण की लागत का अध्ययन किया और पाया कि कच्चे माल की वास्तविक कीमत अंतिम कीमत का बहुत छोटा हिस्सा होती है। यहीं से कम लागत में अंतरिक्ष तकनीक विकसित करने का विचार जन्मा। स्पेसएक्स के शुरुआती साल बेहद कठिन रहे। पहला फाल्कन-1 रॉकेट मार्च 2006 में लॉन्च हुआ, लेकिन उड़ान भरने के कुछ समय बाद तकनीकी खराबी के कारण दुर्घटनाग्रस्त हो गया। दूसरी उड़ान भी लक्ष्य हासिल नहीं कर सकी। तीसरे मिशन में भी रॉकेट ऑर्बिट तक पहुंचने से पहले नष्ट हो गया। लगातार तीन असफलताओं के बाद निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ने लगा था। कंपनी आर्थिक संकट में थी और मस्क भी निजी तौर पर लगभग दिवालिया होने की स्थिति में पहुंच गए थे। कई लोगों ने सलाह दी कि अब इस प्रोजेक्ट को बंद कर देना चाहिए, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">28 सितंबर 2008 का दिन स्पेसएक्स के इतिहास का सबसे अहम मोड़ साबित हुआ। चौथा फाल्कन-1 मिशन सफल रहा और पहली बार किसी निजी कंपनी का रॉकेट पृथ्वी की कक्षा तक पहुंचने में कामयाब हुआ। इस उपलब्धि ने न सिर्फ स्पेसएक्स को बचा लिया बल्कि पूरी अंतरिक्ष इंडस्ट्री की सोच बदल दी। इसके बाद कंपनी को बड़े सरकारी और व्यावसायिक अनुबंध मिलने शुरू हुए और धीरे-धीरे उसका विस्तार तेज हो गया। स्पेसएक्स की सबसे बड़ी उपलब्धियों में फाल्कन-9 रॉकेट का विकास माना जाता है। पहले रॉकेट का पहला चरण मिशन पूरा होने के बाद समुद्र में गिरकर नष्ट हो जाता था, लेकिन स्पेसएक्स ने ऐसा सिस्टम विकसित किया जिसमें रॉकेट का पहला चरण वापस धरती पर सुरक्षित उतर सकता है और दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। दिसंबर 2015 में पहली बार फाल्कन-9 की सफल लैंडिंग हुई। इस तकनीक ने लॉन्च की लागत में भारी कमी लाई और अंतरिक्ष मिशनों को पहले की तुलना में काफी सस्ता बना दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी रणनीति का असर यह हुआ कि स्पेसएक्स ने वैश्विक कमर्शियल लॉन्च बाजार में मजबूत पकड़ बना ली। आज दुनिया के कई देशों, निजी कंपनियों और अंतरिक्ष एजेंसियों के सैटेलाइट स्पेसएक्स के जरिए लॉन्च किए जाते हैं। कंपनी का ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक अंतरिक्ष यात्रियों और सामान को पहुंचाने का नियमित माध्यम बन चुका है। हाल के वर्षों में यह स्पेसक्राफ्ट कई महत्वपूर्ण मानव मिशनों का हिस्सा भी रहा है। स्पेसएक्स अब केवल रॉकेट लॉन्च करने वाली कंपनी नहीं रह गई है। कंपनी स्टारशिप जैसे पूरी तरह रीयूजेबल रॉकेट पर काम कर रही है, जिसे भविष्य में चंद्रमा और मंगल ग्रह के मिशनों के लिए इस्तेमाल करने की योजना है। इलॉन मस्क का कहना है कि उनका अंतिम लक्ष्य इंसानों को बहुग्रहीय सभ्यता बनाना है। इसी दिशा में कंपनी चंद्रमा पर औद्योगिक गतिविधियों और भविष्य की अंतरिक्ष तकनीकों को लेकर भी लंबे समय की योजनाओं पर काम कर रही है। आज जब इलॉन मस्क अपने 55वें जन्मदिन पर दुनिया के सबसे प्रभावशाली उद्यमियों में गिने जाते हैं, तब उनकी कहानी केवल सफलता की नहीं बल्कि लगातार असफलताओं के बाद भी हार न मानने की मिसाल बन चुकी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 13:56:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>स्पेस में फीफा वर्ल्ड कप का जश्न, ISS पर खेला फुटबॉल</title>
                                    <description><![CDATA[नासा और ESA के अंतरिक्ष यात्रियों ने ISS में ट्रिओंडा बॉल के साथ खेलकर मनाया FIFA World Cup 2026, वीडियो हुआ वायरल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/fifa-world-cup-celebration-in-space-football-played-on-iss/article-56681"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/fifa-world-cup-2026-(8).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अंतरिक्ष की दुनिया में भी फीफा वर्ल्ड कप 2026 का रंग चढ़ गया है। अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) से सामने आए एक वीडियो ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच लिया है, जिसमें नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के अंतरिक्ष यात्री फुटबॉल खेलते नजर आ रहे हैं। इस अनोखे जश्न में जेसिका मीर, क्रिस विलियम्स, जैक हैथवे और सोफी एडेनोट शामिल थे, जिन्होंने शून्य गुरुत्वाकर्षण में फुटबॉल खेलकर वर्ल्ड कप का उत्साह अलग ही अंदाज में दिखाया। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि अंतरिक्ष के भीतर तीन अलग-अलग फुटबॉल धीरे-धीरे तैरते हुए आगे बढ़ रहे हैं। गुरुत्वाकर्षण की कमी के कारण गेंदें हवा में स्थिर नहीं रहतीं और धीरे-धीरे घूमती रहती हैं, जिससे खेल का अनुभव पूरी तरह अलग और रोमांचक बन जाता है। अंतरिक्ष यात्रियों ने इस दौरान संदेश भी दिया कि चाहे आप किसी भी देश या टीम का समर्थन करें, पूरे उत्साह और दिल से खेल का आनंद लें। उन्होंने कहा कि स्पेस स्टेशन से भी वर्ल्ड कप का उत्साह धरती तक महसूस किया जा सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस खास मौके पर ट्रिओंडा नाम की आधिकारिक वर्ल्ड कप गेंद भी चर्चा में रही, जिसे एडिडास ने तैयार किया है। फीफा वर्ल्ड कप 2026 के लिए बनाई गई यह गेंद तीन देशों अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको की संयुक्त मेजबानी को दर्शाती है। ‘ट्रिओंडा’ नाम स्पेनिश भाषा से लिया गया है, जिसका अर्थ ‘तीन लहरें’ होता है। यह नाम तीन मेजबान देशों की साझेदारी और एकता को दर्शाने के लिए चुना गया है। अंतरिक्ष से जुड़े इस आयोजन में इस गेंद का इस्तेमाल प्रतीकात्मक रूप से खास माना जा रहा है, जो खेल और विज्ञान के मेल को दर्शाता है। गेंद के डिजाइन में लाल, हरा और नीला रंग प्रमुख रूप से इस्तेमाल किया गया है, जो तीनों मेजबान देशों की पहचान को दर्शाते हैं। इसकी संरचना भी बेहद आधुनिक तकनीक पर आधारित है। चार पैनलों को मिलाकर इसे त्रिकोणीय आकार दिया गया है, जिससे गेंद की स्थिरता और नियंत्रण बेहतर होता है। इसमें गहरे सीम और उभरी हुई सतह दी गई है ताकि खिलाड़ियों को गीले या कठिन मौसम में भी बेहतर ग्रिप मिल सके। यह तकनीक गेंद की उड़ान को अधिक संतुलित और सटीक बनाती है। ISS पर हुआ यह अनोखा फुटबॉल खेल केवल मनोरंजन नहीं बल्कि एक प्रतीकात्मक संदेश भी देता है। अंतरिक्ष यात्रियों का मानना है कि खेल सीमाओं से परे होता है और यह लोगों को जोड़ने का काम करता है। शून्य गुरुत्वाकर्षण में खेलते हुए उन्होंने यह दिखाया कि विज्ञान और खेल मिलकर भी लोगों को एक साथ ला सकते हैं। यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है और दुनियाभर में फुटबॉल प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अंतरिक्ष में इस तरह के आयोजनों का उद्देश्य सिर्फ मनोरंजन नहीं होता, बल्कि यह लंबे अंतरिक्ष अभियानों के दौरान मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाए रखने में मदद करता है। ISS पर रहने वाले अंतरिक्ष यात्री लंबे समय तक पृथ्वी से दूर रहते हैं, ऐसे में छोटे-छोटे खेल और गतिविधियां उनके लिए तनाव कम करने का जरिया बनती हैं। फुटबॉल जैसे खेल उन्हें टीमवर्क और सहयोग की भावना से भी जोड़ते हैं। फीफा वर्ल्ड कप 2026 को लेकर पहले ही दुनियाभर में उत्साह चरम पर है, और अब अंतरिक्ष से आया यह वीडियो इस उत्साह को और बढ़ा रहा है। यह पहली बार नहीं है जब अंतरिक्ष में किसी खेल का आयोजन हुआ हो, लेकिन फुटबॉल जैसे लोकप्रिय खेल का इस तरह शून्य गुरुत्वाकर्षण में खेला जाना इसे खास बना देता है। सोशल मीडिया पर भी इस वीडियो को लेकर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। लोग इसे खेल और विज्ञान का शानदार मेल बता रहे हैं। कई यूजर्स ने लिखा कि यह दृश्य दिखाता है कि फुटबॉल सिर्फ एक खेल नहीं बल्कि एक वैश्विक भावना है, जो पृथ्वी से लेकर अंतरिक्ष तक लोगों को जोड़ती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 17:53:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जेफ बेजोस की कंपनी का न्यू ग्लेन रॉकेट टेस्टिंग के दौरान ब्लास्ट</title>
                                    <description><![CDATA[फ्लोरिडा लॉन्चपैड पर बड़ा हादसा, बोले बेजोस- फिर उड़ान भरेंगे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/jeff-bezoss-companys-new-glenn-rocket-explodes-during-testing/article-54509"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/blue-origin.jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr" style="text-align:justify;">अमेजन के मालिक जेफ बेजोस की स्पेस कंपनी ब्लू ओरिजिन को बड़ा झटका लगा है। कंपनी का न्यू ग्लेन रॉकेट गुरुवार रात फ्लोरिडा के केप कैनावेरल लॉन्चपैड पर टेस्टिंग के दौरान ब्लास्ट हो गया। हादसे का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसकी काफी चर्चा हो रही है। वीडियो में देखा जा सकता है कि लॉन्चपैड पर खड़ा विशाल रॉकेट अचानक तेज धमाके के साथ आग के बड़े गोले में बदल गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई कर्मचारी घायल नहीं हुआ।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">ब्लू ओरिजिन की तरफ से बताया गया कि न्यू ग्लेन रॉकेट का ‘हॉट फायर टेस्ट’ किया जा रहा था। यह टेस्ट किसी भी रॉकेट को लॉन्च करने से पहले बेहद अहम माना जाता है। इसमें रॉकेट को लॉन्चपैड पर मजबूत क्लैम्प्स से बांधकर उसके इंजनों को पूरी ताकत से कुछ समय के लिए चालू किया जाता है। इसी दौरान रॉकेट में तकनीकी गड़बड़ी आ गई और बड़ा विस्फोट हो गया। हादसा रात करीब 9 बजे हुआ। धमाका इतना तेज था कि आसपास मौजूद लोगों ने दूर तक आग की लपटें और धुआं उठते देखा।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">घटना के बाद लॉन्चपैड के आसपास इमरजेंसी टीमों को तुरंत सक्रिय किया गया। अमेरिकी स्पेस फोर्स और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। शुरुआती जांच में कहा गया है कि आम लोगों को इस हादसे से कोई खतरा नहीं हुआ। फिलहाल पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में रखा गया है और विशेषज्ञ टीम हादसे की असली वजह पता लगाने में जुटी है।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">ब्लू ओरिजिन के फाउंडर जेफ बेजोस ने हादसे के बाद बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि “आज का दिन कठिन रहा, लेकिन हमारे सभी कर्मचारी सुरक्षित हैं। हम यह पता लगा रहे हैं कि आखिर गलती कहां हुई। जो भी दोबारा बनाना पड़ेगा, हम बनाएंगे और फिर से उड़ान भरेंगे।” बेजोस का यह बयान तेजी से वायरल हो रहा है। स्पेस इंडस्ट्री से जुड़े कई लोगों ने भी टीम का हौसला बढ़ाया है।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">नासा के एडमिनिस्ट्रेटर जैरेड इसाकमैन ने भी घटना पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि स्पेसफ्लाइट आसान नहीं होती और हैवी-लिफ्ट रॉकेट तैयार करना दुनिया के सबसे कठिन तकनीकी कामों में शामिल है। उन्होंने कहा कि नासा इस पूरे मामले की जांच में सहयोग करेगा और आगे के मिशनों पर इसके असर का आकलन किया जाएगा।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">यह घटना ऐसे समय हुई है जब ब्लू ओरिजिन अपने स्पेस प्रोग्राम को तेजी से आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है। पिछले साल नवंबर में कंपनी ने न्यू ग्लेन रॉकेट की सफल लॉन्चिंग कर बड़ी उपलब्धि हासिल की थी। उसी मिशन में कंपनी ने पहली बार अपने रीयूजेबल बूस्टर को सफलतापूर्वक लैंड कराया था। इसे ब्लू ओरिजिन के लिए बड़ी तकनीकी सफलता माना गया था।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">करीब 29 मंजिला इमारत जितने ऊंचे इस न्यू ग्लेन रॉकेट को तैयार करने में कंपनी ने लगभग एक दशक का समय और अरबों डॉलर खर्च किए हैं। यह रॉकेट दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले सिस्टम पर आधारित है। इसे खासतौर पर इलॉन मस्क की स्पेस कंपनी स्पेसएक्स के फॉल्कन और स्टारशिप रॉकेट्स को चुनौती देने के लिए डिजाइन किया गया है।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">दिलचस्प बात यह है कि हादसे से एक दिन पहले ही ब्लू ओरिजिन ने अमेजन के इंटरनेट प्रोजेक्ट से जुड़ी बड़ी घोषणा की थी। कंपनी ने कहा था कि न्यू ग्लेन रॉकेट के जरिए जल्द ही 48 ‘लियो’ सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। इन सैटेलाइट्स की मदद से अमेजन दुनिया भर में ब्रॉडबैंड इंटरनेट सेवा शुरू करना चाहता है। इसे सीधे तौर पर इलॉन मस्क के स्टारलिंक नेटवर्क को चुनौती देने की तैयारी माना जा रहा था।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">हादसे के बाद सोशल मीडिया पर इलॉन मस्क की प्रतिक्रिया भी सामने आई। उन्होंने एक्स पर लिखा कि “बेहद दुर्भाग्यपूर्ण। रॉकेट बनाना और उन्हें ऑपरेट करना बेहद कठिन काम है।” मस्क का यह बयान काफी चर्चा में है क्योंकि स्पेसएक्स खुद भी कई बार टेस्टिंग के दौरान ऐसे विस्फोटों का सामना कर चुकी है।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">पिछले कुछ महीनों में ब्लू ओरिजिन को दूसरी बार बड़ा झटका लगा है। इससे पहले फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन ने एक असफल सैटेलाइट लॉन्चिंग की जांच के आदेश दिए थे, जिसके बाद कंपनी के न्यू ग्लेन प्रोग्राम को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा था। अब इस नए हादसे ने कंपनी की आगामी लॉन्चिंग योजनाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। रॉकेट साइंस में असफलताएं नई बात नहीं हैं। कई बार टेस्टिंग के दौरान हुई विफलताएं ही आगे की सफलता का रास्ता तैयार करती हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 16:18:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>कब लगेगा साल का दूसरा सूर्य ग्रहण? जानें सही टाइमिंग और तारीख</title>
                                    <description><![CDATA[Surya Grahan 2026 अगस्त में लगने वाला है। जानिए दूसरे सूर्य ग्रहण की सही तारीख, समय, सूतक काल और कहां दिखाई देगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/when-will-the-second-solar-eclipse-of-the-year-occur/article-53846"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/surya-grahan-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"><strong>Surya Grahan </strong><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>2026:</strong> अगस्त 2026 में एक और सूर्य ग्रहण होने वाला है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इसको लेकर लोगों में चर्चा तेज हो गई है। खासकर उन लोगों के बीच</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिष में रुचि रखते हैं। वे इसकी तारीख</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समय और सूतक काल के बारे में जानकारी इकट्ठा कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 को होगा। इससे पहले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साल का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को देखा गया था। अब दूसरा ग्रहण श्रावण अमावस्या को पड़ रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे धार्मिक दृष्टि से अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत में इसे देखा नहीं जा सकेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए यहां सूतक काल मान्य नहीं होगा।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शुरूआती जानकारी के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह सूर्य ग्रहण 12 अगस्त की रात 9 बजकर 4 मिनट पर शुरू होगा और 13 अगस्त की सुबह 4 बजकर 25 मिनट पर खत्म होगा। ज्योतिष के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह कंकणाकृति सूर्य ग्रहण होगा और यह कर्क राशि के अश्लेषा नक्षत्र में आएगा। कई लोग इसे धार्मिक दृष्टि से संवेदनशील समय मानते हैं। मान्यता है कि ग्रहण के समय पूजा-पाठ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शुभ कार्य और मूर्तियों को छूने से बचना चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इस बार भारत में यह ग्रहण नजर नहीं आएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए मंदिरों के दरवाजे बंद नहीं होंगे और मांगलिक कार्यों पर कोई रोक नहीं होगी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लोगों में यह जानने की उत्सुकता है कि सूर्य ग्रहण कहां-कहां दिखाई देगा। कहा जा रहा है कि इसे कनाडा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्रीनलैंड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आइसलैंड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तरी स्पेन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रूस के कुछ हिस्सों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फ्रांस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ब्रिटेन और यूरोप के कई देशों में देखा जा सकेगा। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अटलांटिक महासागर और उत्तर-पश्चिम अफ्रीका के इलाकों में भी यह खगोलीय घटना दिखाई दे सकती है। भारत में इसे सीधे नहीं देखा जा सकेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन डिजिटल प्लेटफार्मों पर लोग इसका लाइव प्रसारण देख सकेंगे। कई अंतरिक्ष एजेंसियां और वैज्ञानिक संस्थान हर बड़े ग्रहण का लाइव टेलीकास्ट करते हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">खगोल विज्ञान के जानकार बताते हैं कि सूर्य ग्रहण एक सामान्य खगोलीय प्रक्रिया है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इसे विशेष प्रभाव वाला समय माना जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके कारण ग्रहण के दौरान खानपान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यात्रा और पूजा से जुड़ी कई परंपराएं निभाई जाती हैं। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैज्ञानिक लगातार लोगों से अपील करते हैं कि ग्रहण के बारे में अफवाहों पर विश्वास न करें। सीधे आंखों से सूर्य ग्रहण देखने की मनाही होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि इससे आंखों को नुकसान पहुंच सकता है। विशेषज्ञ सुरक्षित सोलर फिल्टर या प्रमाणित चश्मों का इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया पर </span>'Surya Grahan <span lang="hi" xml:lang="hi">2026</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">ट्रेंड कर रहा है। लोग इसकी सही तारीख और टाइमिंग के बारे में पोस्ट साझा कर रहे हैं। कई यूजर्स ने इसे सावन महीने से जोड़कर धार्मिक चर्चाएं भी शुरू कर दी हैं। आगे चलकर ग्रहण के बारे में और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 10:29:04 +0530</pubDate>
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