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                <title>Security Lapse - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Security Lapse RSS Feed</description>
                
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                <title>राममंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT की रिपोर्ट, CCTV में 70 संदिग्ध घटनाएं कैद</title>
                                    <description><![CDATA[प्रारंभिक जांच में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल, चढ़ावे की गिनती प्रक्रिया में गंभीर खामियां; कई कर्मचारियों और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका जांच के दायरे में।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/sit-report-in-ram-temple-offering-theft-case-70-suspicious/article-58042"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ram-mandir-donation-theft-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अयोध्या के राममंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की शुरुआती रिपोर्ट सामने आने के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक 27 अप्रैल से 5 जून के बीच चढ़ावे की गिनती वाले कमरे में लगे सीसीटीवी कैमरों में करीब 70 संदिग्ध घटनाएं रिकॉर्ड हुई हैं। जांच में सामने आया कि गिनती का काम कर रहे कुछ कर्मचारी नोटों की गड्डियां अपने कपड़ों, जेबों, जूतों और मोजों में छिपाते हुए दिखाई दिए। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों में से कई की गतिविधियां फुटेज में साफ नजर आई हैं। इसी बीच राममंदिर ट्रस्ट की बैठक में ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों के इस्तीफे भी स्वीकार किए गए, जिससे मामला और चर्चा में आ गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में मंदिर की नकदी गिनती और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। जांच टीम का कहना है कि चढ़ावे की गिनती की पूरी प्रक्रिया में कई ऐसी खामियां थीं, जिनका फायदा उठाकर लगातार चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि नकदी प्रबंधन और वित्तीय व्यवस्था की निगरानी से जुड़े डॉ. अनिल मिश्रा को पहले से सुरक्षा व्यवस्था में कमियों की जानकारी दी गई थी, लेकिन समय रहते प्रभावी लिखित निर्देश जारी नहीं किए गए। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि कर्मचारियों की नियमित तलाशी नहीं ली जाती थी, जिससे नकदी बाहर ले जाना आसान हो गया। अधिकारियों के अनुसार कर्मचारियों की बायोमैट्रिक उपस्थिति, तय यूनिफॉर्म, निजी सामान पर नियंत्रण, नकदी का रिकॉर्ड और दैनिक निगरानी जैसी व्यवस्थाएं पूरी तरह प्रभावी नहीं थीं। ऐसे हालात में सुरक्षा प्रणाली कमजोर पड़ती गई और चोरी की घटनाएं लगातार होती रहीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच में यह भी सामने आया कि चंपत राय के ड्राइवर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के पास बिना किसी औपचारिक लिखित आदेश के मंदिर की हुंडियों और गिनती कक्ष से जुड़ी चाबियों का नियंत्रण था। इतना ही नहीं, उसकी सिफारिश पर मनीष कुमार यादव को चढ़ावे की गिनती के काम में लगाया गया, जो बाद में आरोपियों में शामिल पाया गया। एसआईटी ने इसे सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी चूक माना है। रिपोर्ट के मुताबिक सीसीटीवी फुटेज में कई बार कर्मचारी एक-दूसरे को इशारों से सतर्क करते भी दिखाई दिए, जिससे जांच टीम को यह गतिविधि संगठित तरीके से होने का संदेह हुआ। जांच अधिकारियों ने इन घटनाओं को अलग-अलग नहीं बल्कि लगातार दोहराए गए पैटर्न के रूप में दर्ज किया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रारंभिक जांच के आधार पर अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय और रमाशंकर मिश्रा समेत कई लोगों की भूमिका संदिग्ध बताई गई है। एसआईटी का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज, बरामद नकदी और बैंक खातों की जांच में इनके खिलाफ पर्याप्त शुरुआती साक्ष्य मिले हैं। रिपोर्ट में इनके खिलाफ चोरी, आपराधिक न्यासभंग, आपराधिक दुर्विनियोग, षड्यंत्र और चोरी की संपत्ति रखने जैसी धाराओं में कार्रवाई की सिफारिश की गई है। इसी रिपोर्ट के आधार पर ट्रस्ट की ओर से मामला दर्ज कराया गया था, जिसके बाद आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आरोपी अविनाश शुक्ला के पास से अब तक 20.39 लाख रुपये नकद, 1121 अमेरिकी डॉलर, सोने-चांदी के आभूषण और अन्य कीमती सामान बरामद किया गया है। जांच में यह भी सामने आया कि लगभग 20 हजार रुपये मासिक वेतन पाने वाले कुछ कर्मचारियों के बैंक खातों में लाखों रुपये के लेन-देन दर्ज मिले हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आरोपी ने परिवार और दोस्तों पर बड़ी रकम खर्च करने की बात भी स्वीकार की है। एक भाई की शादी पर लाखों रुपये खर्च करने, दूसरे भाई को नकद राशि देने, कार खरीदने और दोस्तों को पैसे ट्रांसफर करने जैसे पहलुओं की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि चोरी की रकम को बैंक खातों और संपत्तियों के जरिए खपाने की कोशिश की गई हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि यह केवल शुरुआती जांच है और कई महत्वपूर्ण पहलुओं की पड़ताल अभी बाकी है। निगरानी व्यवस्था में लापरवाही, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका, सुरक्षा प्रोटोकॉल में सुधार और अन्य संभावित लोगों की संलिप्तता को लेकर विस्तृत जांच जारी है। अंतिम रिपोर्ट में इन सभी बिंदुओं पर विस्तृत निष्कर्ष और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुझाव सरकार को सौंपे जाएंगे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 11:59:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रीवा बाल संप्रेक्षण गृह से 6 नाबालिग फरार, CCTV में कैद हुई पूरी घटना</title>
                                    <description><![CDATA[बाथरूम की खिड़की तोड़कर भागे बाल अपचारी, पुलिस ने शुरू किया सर्च ऑपरेशन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/6-minors-abscond-from-rewa-child-observation-home-entire-incident/article-54817"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/rewa-juvenile-home.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">मध्य प्रदेश के रीवा जिले से बाल संप्रेक्षण गृह की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली घटना सामने आई है। जिले के समान थाना क्षेत्र में स्थित बाल संप्रेक्षण गृह से मंगलवार सुबह 6 नाबालिग बाल अपचारी फरार हो गए। बताया जा रहा है कि सभी बाल अपचारी बाथरूम की खिड़की तोड़कर परिसर से बाहर निकलने में सफल रहे। घटना के बाद प्रशासन और पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस की कई टीमें सक्रिय हो गईं और फरार नाबालिगों की तलाश शुरू कर दी गई।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक यह घटना मंगलवार सुबह करीब 7 से 8 बजे के बीच की बताई जा रही है। बाल संप्रेक्षण गृह के कर्मचारियों को जब कुछ बच्चों के गायब होने की जानकारी मिली तो तत्काल परिसर की जांच शुरू की गई। जांच के दौरान बाथरूम की एक खिड़की टूटी हुई मिली, जिसके बाद फरारी की आशंका पुख्ता हो गई। अधिकारियों को इसकी सूचना दी गई और स्थानीय पुलिस को मौके पर बुलाया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल संप्रेक्षण गृह में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। फुटेज में देखा गया कि कुछ नाबालिग बेहद सुनियोजित तरीके से बाथरूम की खिड़की के रास्ते बाहर निकल रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि फरारी की योजना पहले से बनाई गई थी। बताया जा रहा है कि सभी बाल अपचारी एक के बाद एक खिड़की से बाहर निकले और फिर तेजी से परिसर से दूर भाग गए।</p>
<p class="isSelectedEnd">सूत्रों के अनुसार फरार हुए सभी नाबालिग विभिन्न गंभीर मामलों में बाल संप्रेक्षण गृह में रखे गए थे। हालांकि अधिकारियों ने अभी तक उनके मामलों की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। पुलिस का कहना है कि सुरक्षा कारणों से कुछ जानकारियां जांच पूरी होने तक साझा नहीं की जा सकतीं। लेकिन यह जरूर माना जा रहा है कि इन बच्चों का एक साथ भाग जाना सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक की ओर इशारा करता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">घटना के बाद रीवा पुलिस ने पूरे शहर में अलर्ट जारी कर दिया। बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और प्रमुख मार्गों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। कई स्थानों पर वाहनों की जांच की जा रही है ताकि फरार नाबालिग जिले की सीमा पार न कर सकें। पुलिस की अलग-अलग टीमें संभावित ठिकानों और आसपास के इलाकों में लगातार तलाश कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि जल्द ही इनकी लोकेशन का पता लगाया जा सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">स्थानीय पुलिस के साथ-साथ बाल कल्याण विभाग के अधिकारी भी मामले की निगरानी कर रहे हैं। संप्रेक्षण गृह के कर्मचारियों और सुरक्षा कर्मियों से पूछताछ की जा रही है। यह जानने की कोशिश की जा रही है कि आखिर इतनी बड़ी घटना कैसे हो गई और सुरक्षा में कहां चूक हुई। यह भी जांच का विषय है कि क्या नाबालिगों को बाहर से किसी तरह की मदद मिली थी या उन्होंने पूरी योजना अपने स्तर पर बनाई थी।</p>
<p class="isSelectedEnd">घटना सामने आने के बाद स्थानीय लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बन गई है। लोगों का कहना है कि यदि गंभीर मामलों में बंद नाबालिग इतनी आसानी से भाग सकते हैं तो सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जानी चाहिए। कई सामाजिक संगठनों ने भी इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि ऐसी घटनाएं भविष्य में दोबारा न हों, इसके लिए सुरक्षा मानकों को और मजबूत किया जाना चाहिए। बाल संप्रेक्षण गृह केवल सुरक्षा केंद्र नहीं होते, बल्कि यहां नाबालिगों के सुधार और पुनर्वास पर भी काम किया जाता है। ऐसे में सुरक्षा और निगरानी के बीच संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होती है। हालांकि किसी भी स्थिति में बच्चों का इस तरह फरार हो जाना प्रशासन के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है।</p>
<p>पुलिस अधिकारियों के अनुसार फरार नाबालिगों की तस्वीरें और विवरण विभिन्न थानों को भेज दिए गए हैं। आसपास के जिलों को भी सतर्क कर दिया गया है। साइबर और तकनीकी टीमों की मदद भी ली जा रही है ताकि उनके संभावित संपर्कों और गतिविधियों का पता लगाया जा सके। अधिकारियों का दावा है कि खोज अभियान लगातार जारी है और जल्द ही सकारात्मक परिणाम मिलने की उम्मीद है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 11:47:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>भोपाल में CM मोहन यादव की सुरक्षा में हुई बड़ी चूक, अचानक काफिले में घुसी कार, जांच शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[भोपाल में सीएम मोहन यादव के काफिले में कार घुसने से हड़कंप मच गया। वाहन चला रहे आरक्षक से पूछताछ, विभागीय जांच शुरू।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/there-was-a-big-lapse-in-the-security-of-cm/article-53860"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/mohan-yadav-security-breach.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बुधवार रात को मोहन यादव की सुरक्षा में एक बड़ी चूक हो गई</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब भोपाल में अचानक एक कार उनके काफिले में घुस गई। यह घटना लगभग 10 बजे की है। मुख्यमंत्री लखनऊ से लौटते समय स्टेट हैंगर से बाहर आए थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और जैसे ही वे थोड़ा आगे बढ़े</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक गाड़ी उनके कारकेड के बीच पहुंच गई। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस महकमे में अफरा-तफरी मच गई। मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत उस वाहन को रोका और चालक को हिरासत में ले लिया। बाद में पता चला कि कार चला रहा व्यक्ति पुलिस के आरक्षक शैलेश अवस्थी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो वीआईपी ड्यूटी पर तैनात था। कोहेफिजा थाना पुलिस ने उस वाहन को जब्त कर लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुख्यमंत्री को जेड प्लस सुरक्षा मिली हुई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए उनके काफिले में किसी अनधिकृत वाहन का आना गंभीर मामला है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि आरक्षक शैलेश अवस्थी का काम मुख्यमंत्री के स्वागत से जुड़ा था। उन्हें कार्यक्रम स्थल और आने वाली फूल-मालाओं व बुके की जांच करनी थी। बताया जा रहा है कि ड्यूटी खत्म होने के बाद वे अपनी कार से घर जा रहे थे</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इसी जल्दबाजी में उनकी गाड़ी मुख्यमंत्री के काफिले में घुस गई। पुलिस अधिकारियों ने आरक्षक का मेडिकल भी कराया है और उससे लगातार पूछताछ जारी है। सूत्रों का कहना है कि सुरक्षा प्रोटोकॉल में स्पष्ट रूप से यह निर्धारित किया गया है कि मुख्यमंत्री के काफिले के दौरान कौन-सी गाड़ी कहां तक जा सकती है। ऐसे में सुरक्षा घेरे के बीच एक अनधिकृत कार का पहुंच जाना कई सवाल खड़े करता है। हालाँकि इसे किसी साजिश के रूप में नहीं देखा जा रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन विभागीय स्तर पर इसे गंभीरता से लिया गया है। भोपाल पुलिस के उच्च अधिकारियों ने पूरे मामले की रिपोर्ट तैयार करने का काम शुरू कर दिया है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">आरक्षक शैलेश अवस्थी ने पूछताछ में बताया कि वह करीब 15 घंटे से लगातार ड्यूटी पर थे और खाना भी नहीं खाया था। थकान के चलते वह जल्दी घर पहुंचना चाह रहे थे। इसी जल्दबाजी में उनकी गाड़ी मुख्यमंत्री के काफिले में शामिल हो गई। अब विभागीय जांच की तैयारी की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर यह तय होगा कि आरक्षक को लाइन अटैच किया जाएगा या निलंबन जैसी कार्रवाई होगी। इस घटना ने वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाना शुरू कर दिया है। राजधानी में पहले भी कई बार वीआईपी मूवमेंट के दौरान सुरक्षा प्रबंधन को लेकर चर्चाएं होती रही हैं। फिलहाल पुलिस आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी देख रही है ताकि पूरी घटना की टाइमलाइन स्पष्ट हो सके। रात देर तक इस मामले पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बैठकें होती रहीं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 12:15:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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