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                <title>MGNREGA - दैनिक जागरण</title>
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                <title>रीवा में मनरेगा घोटाले का खुलासा, RTI कार्यकर्ता के नाम फर्जी मस्टर रोल जारी</title>
                                    <description><![CDATA[बिना तालाब निर्माण और मजदूरी के खाते में भुगतान दर्शाया गया, जांच में सचिव, उपयंत्री और सहायक यंत्री दोषी पाए गए]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/6a1a99b6636e4/article-54557"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/रीवा-में-मनरेगा-योजना-के-तहत-बड़ा-फर्जीवाड़ा-उजागर.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">रीवा जिले में मनरेगा योजना के तहत कथित फर्जीवाड़े का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने ग्रामीण विकास योजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गंगेव जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाले कैथा गांव में एक आरटीआई कार्यकर्ता के नाम पर बिना उसकी जानकारी और सहमति के फर्जी मस्टर रोल जारी कर रोजगार दर्शाने का मामला उजागर हुआ है। जांच में सामने आया कि जिस व्यक्ति के नाम पर मजदूरी दिखाई गई, उसके खेत में स्वीकृत कार्य शुरू तक नहीं हुआ था। इसके बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में उसे रोजगार प्राप्त होना और भुगतान दर्ज कर दिया गया। मामले के सामने आने के बाद जिला पंचायत स्तर पर जांच कराई गई, जिसमें कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ग्राम कैथा निवासी और सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने इस मामले को उजागर करने में अहम भूमिका निभाई। जानकारी के अनुसार वर्ष 2023-24 में उनके खेत में तालाब निर्माण के लिए करीब 3.85 लाख रुपए की तकनीकी स्वीकृति दी गई थी। योजना के तहत खेत तालाब का निर्माण होना था, लेकिन लंबे समय तक कोई काम शुरू नहीं हुआ। निर्माण कार्य नहीं होने से परेशान होकर उन्होंने 21 मई 2025 को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई और काम शुरू कराने की मांग की। बताया जा रहा है कि शिकायत के बाद निर्माण कार्य प्रारंभ करने के बजाय पंचायत स्तर पर एक अलग ही रास्ता अपनाया गया। आरोप है कि संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों ने शिकायत का निराकरण दिखाने के लिए हितग्राही के नाम पर ही फर्जी मस्टर रोल तैयार कर दिए और रिकॉर्ड में रोजगार दर्शा दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">जिला पंचायत की मनरेगा शाखा द्वारा कराई गई जांच में यह सामने आया कि मनरेगा पोर्टल पर शिवानंद द्विवेदी का नाम कई मस्टर रोल में दर्ज किया गया था। रिकॉर्ड के अनुसार उन्हें करीब 20 दिनों तक रोजगार प्राप्त होना दर्शाया गया। हैरानी की बात यह रही कि उनके जॉब कार्ड पर मजदूरी भुगतान का विवरण भी दर्ज कर दिया गया था। दस्तावेजों में एक राशि का भुगतान और कुछ राशि बकाया होना भी प्रदर्शित किया गया। जबकि शिकायतकर्ता का कहना था कि उन्होंने न तो किसी प्रकार की मजदूरी की और न ही उन्हें रोजगार उपलब्ध कराया गया। जब जांच टीम ने पूरे रिकॉर्ड का परीक्षण किया तो कई विसंगतियां सामने आईं।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रारंभिक जांच के बाद जिला पंचायत के मनरेगा लेखाधिकारी ने संबंधित दस्तावेजों और पोर्टल की प्रविष्टियों का मिलान किया। इस दौरान पाया गया कि जिस निर्माण कार्य के नाम पर मजदूरी दर्शाई गई, उस स्थल पर वास्तविक रूप से कोई कार्य ही नहीं हुआ था। जब तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव से मजदूरी के प्रमाण मांगे गए तो वे कोई संतोषजनक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। न तो कार्यस्थल की तस्वीरें उपलब्ध कराई जा सकीं और न ही मजदूरी मांगने से जुड़े कोई आवेदन या हस्ताक्षरयुक्त मस्टर रोल प्रस्तुत किए गए। इससे जांच अधिकारियों का संदेह और गहरा गया।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले में सबसे गंभीर तथ्य यह सामने आया कि बिना काम हुए ही तकनीकी स्तर पर कार्य का मूल्यांकन और सत्यापन भी कर दिया गया था। जांच रिपोर्ट के अनुसार उपयंत्री और सहायक यंत्री द्वारा ई-एमबी प्रणाली में ऑनलाइन सत्यापन किया गया, जबकि मौके पर कोई निर्माण कार्य नहीं मिला। अधिकारियों का मानना है कि यदि स्थल पर काम नहीं हुआ था तो उसका मूल्यांकन और ऑनलाइन प्रमाणन कैसे किया गया, यह अपने आप में गंभीर अनियमितता का संकेत है। जांच में इसे केवल लापरवाही नहीं बल्कि वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में माना गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूरे मामले की विस्तृत जांच के बाद ग्राम पंचायत कैथा के सचिव महेश पटेल, तत्कालीन उपयंत्री प्रवीण पाण्डेय और तत्कालीन सहायक यंत्री निखिल मिश्रा को जिम्मेदार माना गया है। 31 पन्नों की जांच रिपोर्ट तैयार कर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को भेज दी गई है। रिपोर्ट में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय और वैधानिक कार्रवाई की अनुशंसा भी की गई है। बताया जा रहा है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तर पर भी इसकी समीक्षा की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस खुलासे के बाद जिले के मनरेगा विभाग में हलचल तेज हो गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित विकास कार्यों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शिकायतकर्ता स्वयं आरटीआई कार्यकर्ता नहीं होता तो शायद यह मामला कभी सामने नहीं आता। वहीं प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और दोषियों के खिलाफ नियमों के अनुसार कदम उठाए जाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 13:56:17 +0530</pubDate>
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                <title>मनरेगा की जगह जुलाई से लागू होगी VB-G RAM G योजना, अब मिलेगा 125 दिन का रोजगार</title>
                                    <description><![CDATA[1 जुलाई 2026 से मनरेगा की जगह VB-G RAM G योजना लागू होगी। नई स्कीम में ग्रामीण परिवारों को 125 दिन रोजगार देने का दावा किया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/vb-gram-g-scheme-will-be-implemented-from-july-instead/article-53865"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/vb-g-ram-g.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव आने वाला है। केंद्र सरकार 1 जुलाई 2026 से नई ग्रामीण रोजगार योजना </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">VB-G RAM G <span lang="hi" xml:lang="hi">को लागू करने की योजना बना रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो मौजूदा मनरेगा के स्थान पर आएगी। सरकार का दावा है कि यह नई योजना गांवों में रोजगार बढ़ाने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विकास कार्यों को तेज करने और पारदर्शिता लाने पर केंद्रित होगी। इस फैसले के बाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्रामीण क्षेत्रों में चर्चाएं तेज हो गई हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि मनरेगा ने पिछले लगभग 20 वर्षों से ग्रामीण रोजगार का एक बड़ा सहारा दिया है। अब सरकार इस नई योजना के माध्यम से रोजगार गारंटी को एक नए मॉडल में बदलने का इरादा रखती है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने संसद की स्थायी समिति को जानकारी दी है कि कई राज्यों ने इस योजना के लिए अपना हिस्सा का फंड जारी कर दिया है और जुलाई से इसे लागू करने की तैयारी कर रहे हैं। इस योजना का पूरा नाम "विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)" यानी </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">VB-G RAM G <span lang="hi" xml:lang="hi">रखा गया है। सबसे बड़ा बदलाव रोजगार के दिनों से संबंधित है। वर्तमान में मनरेगा के तहत ग्रामीण परिवारों को साल में 100 दिन का रोजगार मिलता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन नई योजना में इसे बढ़ाकर 125 दिन करने का प्रस्ताव है। सरकार का कहना है कि इससे ग्रामीण परिवारों की आय में इजाफा होगा और पलायन को कम करने में मदद मिलेगी।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">नई स्कीम में तकनीकी का इस्तेमाल भी बढ़ेगा। पुराने जॉब कार्ड की जगह स्मार्ट रोजगार कार्ड दिए जाएंगे</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें फेस रिकग्निशन और </span>e-KYC <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसी सुविधाएँ होंगी। इसका उद्देश्य फर्जीवाड़ा रोकना और भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना है। गांवों में होने वाले कामों में भी बदलाव किया जाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे कि पानी संरक्षण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्रामीण सड़कें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आजीविका मिशन और जलवायु से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। हर ग्राम पंचायत को अपनी जरूरत के अनुसार विकास योजना तैयार करनी होगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे ग्राम सभा से मंजूरी प्राप्त होगी। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर योजना का खर्च उठाएंगे। सामान्य राज्यों में खर्च का अनुपात 60:40 रहेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों के लिए यह 90:10 होगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि मनरेगा के तहत चल रहे अधूरे काम अचानक बंद नहीं किए जाएंगे। उन्हें नई योजना में शामिल कर पूरा किया जाएगा ताकि मजदूरों को रोजगार पाने में कोई परेशानी न हो। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विपक्ष और कुछ सामाजिक संगठनों ने नई योजना पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनका कहना है कि बदलाव के दौरान ग्रामीण मजदूरों को मुश्किलें आ सकती हैं। फिलहाल सरकार इस योजना को ग्रामीण विकास के नए मॉडल के रूप में पेश कर रही है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 12:17:35 +0530</pubDate>
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