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                <title>Job Card - दैनिक जागरण</title>
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                <title>आज से लागू हुआ VB-G RAM G कानून, अब 125 दिन रोजगार की गारंटी और बढ़ी मजदूरी</title>
                                    <description><![CDATA[मनरेगा की जगह विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) लागू, दिहाड़ी बढ़कर ₹327.40 प्रतिदिन हुई, नए रोजगार गारंटी कार्ड भी जारी होंगे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vb-gram-g-law-came-into-effect-from-today-now/article-57523"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/vb-g-ram-g.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">देशभर के ग्रामीण श्रमिकों और जरूरतमंद परिवारों के लिए बुधवार से एक बड़ा बदलाव लागू हो गया है। केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) की जगह विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) कानून, 2025 यानी VB-G RAM G को लागू कर दिया है। नई व्यवस्था के तहत अब पात्र ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 100 दिनों के बजाय 125 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी। इसके साथ ही मजदूरी की औसत दर में भी वृद्धि की गई है, जिससे ग्रामीण श्रमिकों की आय बढ़ने की उम्मीद है। नई योजना लागू होने के साथ ही देशभर में औसत दैनिक मजदूरी लगभग 299 रुपये से बढ़ाकर 327.40 रुपये कर दी गई है। यानी प्रत्येक कार्य दिवस पर औसतन करीब 28 रुपये से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाना, आजीविका को मजबूत करना और गांवों में विकास कार्यों को गति देना है। इससे लाखों परिवारों को सीधे तौर पर आर्थिक लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार नई योजना के सफल संचालन के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लगभग 95 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि उपलब्ध कराई गई है। इस धनराशि का उपयोग मजदूरी भुगतान, विकास कार्यों और योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में किया जाएगा ताकि श्रमिकों को समय पर भुगतान मिल सके और किसी भी स्तर पर काम प्रभावित न हो।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन लाभार्थियों के पुराने जॉब कार्ड का ई-केवाईसी पूरा हो चुका है, वे नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड मिलने तक पुराने कार्ड के आधार पर ही काम कर सकेंगे। इससे योजना के लागू होने के दौरान किसी भी श्रमिक को रोजगार से वंचित नहीं होना पड़ेगा। नए कार्ड चरणबद्ध तरीके से वितरित किए जाएंगे और सभी पात्र परिवारों को इसमें शामिल किया जाएगा। नई व्यवस्था में ग्राम पंचायतों की भूमिका पहले की तरह महत्वपूर्ण रहेगी। गांवों में कौन-कौन से विकास कार्य किए जाएंगे, उनकी प्राथमिकता तय करना, श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराना और कार्यों की निगरानी करना पंचायतों की जिम्मेदारी होगी। सरकार ने जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, खेत तालाब निर्माण, ग्रामीण सड़कें, कृषि विकास, महिला सशक्तीकरण और सामुदायिक परिसंपत्तियों के निर्माण जैसे कार्यों को विशेष प्राथमिकता देने की बात कही है।</p>
<p style="text-align:justify;">रोजगार के दिनों में 25 दिन की बढ़ोतरी से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है। जिन परिवारों की आय का प्रमुख स्रोत मजदूरी है, उनके लिए अतिरिक्त रोजगार का अवसर आर्थिक स्थिरता लाने में मददगार साबित हो सकता है। साथ ही गांवों में बुनियादी ढांचे के विकास और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से कृषि क्षेत्र को भी दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है। योजना के वित्तीय प्रावधानों में भी स्पष्ट व्यवस्था की गई है। सामान्य राज्यों में योजना का 60 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत खर्च राज्य सरकारें वहन करेंगी। वहीं हिमालयी राज्यों, पूर्वोत्तर राज्यों, जम्मू-कश्मीर और कुछ केंद्र शासित प्रदेशों के लिए केंद्र सरकार 90 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएगी। इससे भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी योजना के प्रभावी संचालन का रास्ता आसान होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">नई व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह भी रखा गया है कि बुवाई और कटाई जैसे कृषि के व्यस्त मौसम में राज्य सरकारें अधिकतम 60 दिनों तक योजना के अंतर्गत दिए जाने वाले कार्यों को सीमित कर सकेंगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खेती के महत्वपूर्ण समय में किसानों को मजदूरों की उपलब्धता बनी रहे और कृषि कार्य प्रभावित न हों। हालांकि अन्य समय में रोजगार की कानूनी गारंटी पूर्व निर्धारित नियमों के अनुसार लागू रहेगी। ग्रामीण विकास से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यदि योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया तो इसका लाभ केवल रोजगार तक सीमित नहीं रहेगा। इससे ग्रामीण बुनियादी ढांचे में सुधार, जल संरक्षण, कृषि उत्पादकता, महिला भागीदारी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के स्थायी अवसर भी बढ़ सकते हैं। मजदूरी में वृद्धि से ग्रामीण बाजारों में मांग बढ़ने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलने की संभावना है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार के अनुसार देश के अधिकांश राज्यों ने नई योजना के लिए आवश्यक बजटीय प्रावधान कर दिए हैं और बड़ी संख्या में राज्यों ने अपनी राज्य स्तरीय कार्ययोजना भी तैयार कर ली है। राष्ट्रीय स्तर पर इसका औपचारिक शुभारंभ आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले से किया जा रहा है, जहां लाभार्थियों को नए रोजगार गारंटी कार्ड वितरित किए जाएंगे और योजना की विस्तृत जानकारी भी दी जाएगी। VB-G RAM G कानून का उद्देश्य ग्रामीण भारत में रोजगार सुरक्षा को मजबूत करना, मजदूरी बढ़ाना और विकास कार्यों को अधिक प्रभावी बनाना है। 125 दिन की रोजगार गारंटी और बढ़ी हुई मजदूरी से ग्रामीण परिवारों को आर्थिक सहारा मिलने की उम्मीद है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 15:14:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>मनरेगा की जगह जुलाई से लागू होगी VB-G RAM G योजना, अब मिलेगा 125 दिन का रोजगार</title>
                                    <description><![CDATA[1 जुलाई 2026 से मनरेगा की जगह VB-G RAM G योजना लागू होगी। नई स्कीम में ग्रामीण परिवारों को 125 दिन रोजगार देने का दावा किया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/vb-gram-g-scheme-will-be-implemented-from-july-instead/article-53865"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/vb-g-ram-g.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव आने वाला है। केंद्र सरकार 1 जुलाई 2026 से नई ग्रामीण रोजगार योजना </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">VB-G RAM G <span lang="hi" xml:lang="hi">को लागू करने की योजना बना रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो मौजूदा मनरेगा के स्थान पर आएगी। सरकार का दावा है कि यह नई योजना गांवों में रोजगार बढ़ाने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विकास कार्यों को तेज करने और पारदर्शिता लाने पर केंद्रित होगी। इस फैसले के बाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्रामीण क्षेत्रों में चर्चाएं तेज हो गई हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि मनरेगा ने पिछले लगभग 20 वर्षों से ग्रामीण रोजगार का एक बड़ा सहारा दिया है। अब सरकार इस नई योजना के माध्यम से रोजगार गारंटी को एक नए मॉडल में बदलने का इरादा रखती है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने संसद की स्थायी समिति को जानकारी दी है कि कई राज्यों ने इस योजना के लिए अपना हिस्सा का फंड जारी कर दिया है और जुलाई से इसे लागू करने की तैयारी कर रहे हैं। इस योजना का पूरा नाम "विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)" यानी </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">VB-G RAM G <span lang="hi" xml:lang="hi">रखा गया है। सबसे बड़ा बदलाव रोजगार के दिनों से संबंधित है। वर्तमान में मनरेगा के तहत ग्रामीण परिवारों को साल में 100 दिन का रोजगार मिलता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन नई योजना में इसे बढ़ाकर 125 दिन करने का प्रस्ताव है। सरकार का कहना है कि इससे ग्रामीण परिवारों की आय में इजाफा होगा और पलायन को कम करने में मदद मिलेगी।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">नई स्कीम में तकनीकी का इस्तेमाल भी बढ़ेगा। पुराने जॉब कार्ड की जगह स्मार्ट रोजगार कार्ड दिए जाएंगे</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें फेस रिकग्निशन और </span>e-KYC <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसी सुविधाएँ होंगी। इसका उद्देश्य फर्जीवाड़ा रोकना और भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना है। गांवों में होने वाले कामों में भी बदलाव किया जाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे कि पानी संरक्षण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्रामीण सड़कें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आजीविका मिशन और जलवायु से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। हर ग्राम पंचायत को अपनी जरूरत के अनुसार विकास योजना तैयार करनी होगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे ग्राम सभा से मंजूरी प्राप्त होगी। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर योजना का खर्च उठाएंगे। सामान्य राज्यों में खर्च का अनुपात 60:40 रहेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों के लिए यह 90:10 होगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि मनरेगा के तहत चल रहे अधूरे काम अचानक बंद नहीं किए जाएंगे। उन्हें नई योजना में शामिल कर पूरा किया जाएगा ताकि मजदूरों को रोजगार पाने में कोई परेशानी न हो। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विपक्ष और कुछ सामाजिक संगठनों ने नई योजना पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनका कहना है कि बदलाव के दौरान ग्रामीण मजदूरों को मुश्किलें आ सकती हैं। फिलहाल सरकार इस योजना को ग्रामीण विकास के नए मॉडल के रूप में पेश कर रही है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 12:17:35 +0530</pubDate>
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