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                <title>Film Review - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Film Review RSS Feed</description>
                
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                <title>मनोज बाजपेयी की दमदार अदाकारी के बावजूद फीकी पड़ी ‘गवर्नर’, फिल्म को लेकर बंटी राय</title>
                                    <description><![CDATA[1991 के आर्थिक संकट की पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म ‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ में मनोज बाजपेयी के अभिनय की जमकर तारीफ हो रही है, लेकिन कहानी और ऐतिहासिक दावों को लेकर समीक्षक सवाल उठा रहे हैं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/despite-manoj-bajpayees-strong-acting-the-film-governor-faded-opinions/article-55755"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/governor-movie-review-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">देश के चर्चित अभिनेता मनोज बाजपेयी की नई फिल्म ‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ रिलीज के साथ ही चर्चा में आ गई है। फिल्म 1990 के दशक की शुरुआत में भारत के आर्थिक संकट की पृष्ठभूमि पर आधारित है और दावा करती है कि उस दौर में एक केंद्रीय बैंक प्रमुख ने देश को आर्थिक तबाही से बचाने में निर्णायक भूमिका निभाई थी। हालांकि फिल्म को लेकर दर्शकों और समीक्षकों की राय बंटी हुई दिखाई दे रही है। जहां एक ओर मनोज बाजपेयी के अभिनय की जमकर सराहना हो रही है, वहीं दूसरी ओर इसकी कहानी, पटकथा और ऐतिहासिक तथ्यों की प्रस्तुति को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फिल्म का निर्देशन अभिनेता से निर्देशक बने चिन्मय मांडलेकर ने किया है। कहानी एक ऐसे गवर्नर के इर्द-गिर्द घूमती है जो देश के गंभीर आर्थिक संकट के दौरान विदेशी मुद्रा भंडार की कमी और संभावित दिवालियापन जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे वह पर्दे के पीछे रहकर ऐसे फैसले लेता है जो देश की अर्थव्यवस्था को संभालने में मदद करते हैं। कहानी में एक पत्रकार का किरदार भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जो इस पूरे घटनाक्रम के पीछे की सच्चाई जानने की कोशिश करती है। फिल्म में आर्थिक संकट, सोने को गिरवी रखने की प्रक्रिया, विदेशी कर्ज और सरकारी निर्णयों को रोमांचक अंदाज में पेश करने का प्रयास किया गया है। हालांकि कई समीक्षकों का मानना है कि फिल्म इन विषयों को गहराई से समझाने के बजाय नाटकीयता पर अधिक निर्भर हो जाती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मनोज बाजपेयी ने फिल्म में केंद्रीय बैंक प्रमुख की भूमिका निभाई है और यही फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष माना जा रहा है। उनके अभिनय को लेकर लगभग सभी समीक्षकों की राय सकारात्मक है। शांत, गंभीर और दृढ़ व्यक्तित्व वाले किरदार को उन्होंने बेहद संतुलित तरीके से पर्दे पर उतारा है। कई दृश्यों में बिना ज्यादा संवाद बोले भी वह अपने हावभाव और अभिव्यक्ति से दर्शकों पर प्रभाव छोड़ते हैं। फिल्म में उनके सहयोगी अधिकारी की भूमिका निभाने वाले कलाकार की भी सराहना की जा रही है। दोनों कलाकारों के बीच के दृश्य कहानी को कुछ मजबूती प्रदान करते हैं। हालांकि कई समीक्षकों का कहना है कि इतनी मजबूत अभिनय क्षमता होने के बावजूद फिल्म की कमजोर पटकथा इन कलाकारों की मेहनत का पूरा फायदा नहीं उठा पाती। फिल्म का सबसे विवादित पहलू इसके ऐतिहासिक दावे हैं। कहानी यह संकेत देने की कोशिश करती है कि देश के आर्थिक सुधारों और संकट से उबरने का श्रेय उन राजनीतिक नेताओं को नहीं मिलना चाहिए जिन्हें आमतौर पर इसके लिए याद किया जाता है। इसके बजाय फिल्म एक ऐसे व्यक्ति को केंद्र में रखती है जिसे कथित तौर पर पर्याप्त मान्यता नहीं मिली। इसी बिंदु को लेकर इतिहासकारों और फिल्म समीक्षकों ने आपत्ति जताई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आर्थिक सुधारों का दौर कई व्यक्तियों, संस्थाओं और नीतिगत फैसलों का संयुक्त परिणाम था। ऐसे में किसी एक व्यक्ति को पूरी उपलब्धि का श्रेय देना वास्तविक घटनाओं का अत्यधिक सरलीकरण माना जा सकता है। कुछ समीक्षकों ने इसे इतिहास की चयनात्मक व्याख्या भी बताया है। फिल्म की पटकथा पर भी सवाल उठे हैं। कई दर्शकों को कहानी का प्रवाह कमजोर लगा है। आर्थिक संकट जैसे गंभीर विषय को थ्रिलर के रूप में पेश करने की कोशिश की गई, लेकिन कथानक कई जगह बिखरा हुआ महसूस होता है। फिल्म में पत्रकार के किरदार को लेकर भी आलोचना हुई है। दर्शकों का कहना है कि यह चरित्र कई बार अवास्तविक और जरूरत से ज्यादा नाटकीय दिखाई देता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसके बावजूद फिल्म कुछ महत्वपूर्ण सवाल जरूर उठाती है। यह दर्शकों को देश के आर्थिक इतिहास के उस दौर की याद दिलाती है जब भारत गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रहा था। विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से घट रहा था और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता जा रहा था। फिल्म इन परिस्थितियों को दिखाने की कोशिश करती है, हालांकि इसके प्रस्तुतीकरण पर मतभेद बने हुए हैं। सोशल मीडिया पर भी फिल्म को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ दर्शक मनोज बाजपेयी की परफॉर्मेंस को उनके करियर की बेहतरीन प्रस्तुतियों में शामिल कर रहे हैं, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि फिल्म की कहानी उनके अभिनय के स्तर तक नहीं पहुंच पाती। कई दर्शकों ने इसे एक ऐसी फिल्म बताया है जिसे सिर्फ मनोज बाजपेयी के अभिनय के लिए देखा जा सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बॉक्स ऑफिस के लिहाज से शुरुआती प्रतिक्रिया सामान्य रही है, लेकिन फिल्म को लेकर चर्चा लगातार जारी है। राजनीतिक और आर्थिक विषयों पर बनी फिल्मों में रुचि रखने वाले दर्शकों के बीच इसे लेकर उत्सुकता बनी हुई है। आने वाले दिनों में दर्शकों की प्रतिक्रिया के आधार पर इसकी सफलता का सही आकलन हो सकेगा।  ‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ एक महत्वाकांक्षी फिल्म है जो भारत के आर्थिक इतिहास के एक महत्वपूर्ण दौर को बड़े पर्दे पर लाने का प्रयास करती है। मनोज बाजपेयी का शानदार अभिनय फिल्म को मजबूती देता है, लेकिन कमजोर पटकथा और विवादित ऐतिहासिक प्रस्तुति इसकी प्रभावशीलता को सीमित कर देती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 16:26:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर छाई ‘दृश्यम 3’, मोहनलाल की वापसी पर झूमे फैंस</title>
                                    <description><![CDATA[मोहनलाल की ‘दृश्यम 3’ सिनेमाघरों में रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर छा गई। फैंस फिल्म के सस्पेंस और क्लाइमैक्स की जमकर तारीफ कर रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/as-soon-as-drishyam-3-was-released-on-social-media/article-53894"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/drishyam-3-review.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मलयालम सिनेमा की चर्चित क्राइम थ्रिलर फ्रैंचाइज़ी </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">‘<span lang="hi" xml:lang="hi">दृश्यम</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">का तीसरा पार्ट आखिरकार सिनेमाघरों में रिलीज हो गया है। </span>21<span lang="hi" xml:lang="hi"> मई को रिलीज हुई मोहनलाल की </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">दृश्यम </span>3’ <span lang="hi" xml:lang="hi">को लेकर सुबह से ही थिएटर्स के बाहर जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। पहले दिन के पहले शो में दर्शकों ने फिल्म खत्म होते ही सोशल मीडिया पर अपने रिएक्शन देने शुरू कर दिए। एक्स और दूसरे प्लेटफॉर्म्स पर फिल्म के बारे में लगातार पोस्ट्स आ रहे हैं। कुछ दर्शकों ने इसे </span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">अब तक की सबसे दमदार थ्रिलर</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">माना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि कुछ ने जॉर्जकुट्टी के किरदार की वापसी को </span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">माइंड गेम का मास्टरक्लास</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">कहा। रिलीज के कुछ घंटों के भीतर ही फिल्म सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">फिल्म की कहानी वहीं से शुरू होती है जहाँ </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">‘<span lang="hi" xml:lang="hi">दृश्यम </span>2’ <span lang="hi" xml:lang="hi">खत्म हुई थी। इस बार जॉर्जकुट्टी को सिर्फ पुलिस से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि अपने अतीत के उन राज़ों से भी जूझना पड़ रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्हें उसने सालों से छिपा रखा है। शुरुआती दर्शकों का कहना है कि फिल्म का सस्पेंस आखिर तक बना रहता है और कई सीन्स में सिनेमा हॉल में सन्नाटा छा जाता है। खासकर क्लाइमैक्स पर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हो रही है। कुछ यूजर्स ने बताया कि फिल्म के ट्विस्ट का अंदाजा लगाना आसान नहीं है। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कई दर्शकों ने यह भी कहा कि फिल्म की शुरुआत थोड़ी धीरे होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन बाद में पूरी तरह से पकड़ में आ जाती है। अभी तक ऑनलाइन आए रिएक्शन ज्यादातर सकारात्मक नजर आ रहे हैं।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">निर्देशक जीथू जोसेफ ने एक बार फिर से अपनी कहानी कहने की शैली से दर्शकों को प्रभावित किया है। फिल्म में मोहनलाल के साथ मीना</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">आशा सरथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिद्दीकी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और एस्तेर अनिल जैसे कलाकार पुराने किरदारों में नजर आए हैं। तकनीकी दृष्टि से भी फिल्म को मजबूत बताया जा रहा है। बैकग्राउंड स्कोर और कैमरा वर्क की भी खास तारीफ हो रही है। </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">दृश्यम</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">फ्रैंचाइज़ी पहले से ही भारतीय सिनेमा की सबसे सफल थ्रिलर सीरीज मानी जाती रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और अब तीसरे पार्ट के लिए भी जबरदस्त दीवानगी देखने को मिल रही है। कई शहरों में सुबह के शो हाउसफुल रहे हैं। सोशल मीडिया पर कुछ फैंस ने कहा कि मोहनलाल ने जॉर्जकुट्टी के किरदार में फिर साबित कर दिया है कि वे इस तरह के रोल के असली बादशाह हैं। आने वाले दिनों में फिल्म के बॉक्स ऑफिस कलेक्शन पर सभी की नजर रहेगी।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 14:40:06 +0530</pubDate>
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