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                <title>PWD - दैनिक जागरण</title>
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                <title>भोपाल-राजगढ़ वैकल्पिक मार्ग बंद, पार्वती नदी का बढ़ा जलस्तर बना वजह</title>
                                    <description><![CDATA[बैरसिया-नरसिंहगढ़ मार्ग पर अस्थायी डायवर्जन जलमग्न, प्रशासन ने आवागमन पर तत्काल रोक लगाई और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/bhopal-rajgarh-alternative-route-closed-due-to-increased-water-level-of/article-58066"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bhopal-news-(4).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भोपाल और राजगढ़ जिले को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग पर बारिश का असर साफ दिखाई देने लगा है। पार्वती नदी पर बने अस्थायी वैकल्पिक मार्ग को प्रशासन ने अगले आदेश तक पूरी तरह बंद कर दिया है। सोमवार देर रात बैरसिया के एसडीएम आशुतोष शर्मा ने आदेश जारी करते हुए इस मार्ग से सभी प्रकार के आवागमन पर रोक लगा दी। प्रशासन का कहना है कि लगातार हो रही बारिश के कारण पार्वती नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है, जिससे नदी के बीच बनाया गया अस्थायी डायवर्जन पूरी तरह पानी में डूब गया है। तेज बहाव को देखते हुए इस रास्ते से गुजरना बेहद जोखिमपूर्ण माना गया है। ऐसे में किसी भी संभावित दुर्घटना से बचने के लिए यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एसडीएम द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि बैरसिया-नरसिंहगढ़ मार्ग पर निर्मित अस्थायी वैकल्पिक रास्ता अब सुरक्षित नहीं है। नदी में लगातार बढ़ रहे जलस्तर और तेज बहाव के कारण वाहन चालकों और पैदल यात्रियों की जान को खतरा हो सकता है। प्रशासन ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि प्रतिबंधित क्षेत्र में पर्याप्त बैरिकेडिंग की जाए, चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं और सुरक्षा संकेतक स्पष्ट रूप से स्थापित किए जाएं ताकि कोई भी व्यक्ति जोखिम उठाकर इस मार्ग का उपयोग न करे। अधिकारियों को मौके पर लगातार निगरानी रखने और लोगों को सुरक्षित वैकल्पिक मार्गों की जानकारी देने के निर्देश भी दिए गए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रशासन ने आदेश के पालन की जिम्मेदारी तहसीलदार, नायब तहसीलदार, पुलिस विभाग, जनपद पंचायत और लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों को सौंपी है। सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त सुरक्षा बल भी तैनात किया जाए, ताकि कोई भी वाहन या व्यक्ति बंद किए गए रास्ते से गुजरने का प्रयास न कर सके। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 और अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल यह आदेश आगामी निर्देश जारी होने तक प्रभावी रहेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह अस्थायी वैकल्पिक मार्ग उस समय तैयार किया गया था जब पार्वती नदी पर बना करीब 49 वर्ष पुराना पुल जनवरी 2025 में क्षतिग्रस्त हो गया था। पुल के एक हिस्से में धंसाव आने के बाद एहतियातन उस पर आवागमन रोक दिया गया था। इसके बाद स्टॉप डैम से पानी खाली कर नदी के बीच अस्थायी डायवर्जन बनाया गया, जिससे बैरसिया और नरसिंहगढ़ के बीच यातायात फिर से शुरू हो सका। बारिश शुरू होने से पहले तक इसी मार्ग से बसें, ट्रक, कारें, ट्रैक्टर-ट्रॉलियां और दोपहिया वाहन नियमित रूप से गुजर रहे थे। लेकिन अब नदी का जलस्तर बढ़ने से यह रास्ता पूरी तरह जलमग्न हो गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले कुछ दिनों से कई वाहन चालक खतरा उठाकर पानी से भरे इस मार्ग को पार करने की कोशिश कर रहे थे। हालांकि प्रशासन लगातार लोगों से सावधानी बरतने की अपील कर रहा था। पिछले वर्ष भी इसी मार्ग पर कई हादसे हो चुके हैं। अक्टूबर में एक यात्री बस पानी के बीच तिरछी होकर फंस गई थी, जिसे काफी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया था। वहीं हाल ही में एक ट्रैक्टर-ट्रॉली भी अस्थायी सड़क से फिसलकर स्टॉप डैम के पानी में गिर गई थी। सौभाग्य से उसमें सवार चारों लोग सुरक्षित बच गए, लेकिन इन घटनाओं ने इस मार्ग की जोखिमपूर्ण स्थिति को फिर उजागर कर दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पार्वती नदी पर बना यह पुल केवल भोपाल और राजगढ़ जिलों के बीच संपर्क का माध्यम नहीं है, बल्कि कई अन्य जिलों के लिए भी महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। यह पुल भोपाल, राजगढ़, गुना, विदिशा, शिवपुरी, अशोकनगर, आगर-मालवा, शाजापुर, उज्जैन और इंदौर आने-जाने वाले हजारों लोगों के लिए प्रमुख रास्ता रहा है। साथ ही यह आगरा-बंबई राष्ट्रीय राजमार्ग से भी जुड़ता है। जब पुल पूरी तरह चालू था, तब प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग और मालवाहक वाहन इस मार्ग का उपयोग करते थे। पुल बंद होने के बाद भी अस्थायी डायवर्जन से हजारों लोगों की आवाजाही जारी रही, लेकिन अब बारिश के कारण यह विकल्प भी बंद हो गया है। पार्वती नदी का यह पुल वर्ष 1976 में बनाया गया था। पिछले करीब पांच दशकों में इसकी केवल दो बार मरम्मत हुई। अंतिम बार वर्ष 2019-20 में पुल की मरम्मत कराई गई थी। नियमित रखरखाव की कमी और समय के साथ बढ़ते दबाव के कारण पुल की स्थिति लगातार खराब होती गई। जनवरी 2025 में पुल के धंसने के बाद इसकी जर्जर हालत सामने आई और सुरक्षा कारणों से इसे बंद करना पड़ा। अब स्थानीय लोग स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं ताकि हर मानसून में इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 12:37:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>इंजीनियरों का कमाल... गारंटी वाली सड़कों को फिर बनाने का भेज दिया प्रस्ताव, 9 अफसरों को नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[परफॉर्मेंस गारंटी में शामिल सड़कों पर दोबारा निर्माण की मांग, 140 करोड़ रुपए के प्रस्ताव पर विभाग सख्त]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/amazing-work-of-engineers-proposal-to-reconstruct-roads-with-guarantee/article-54714"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/pwd-road-scam.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने विभागीय कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जिन सड़कों की मरम्मत और रखरखाव की जिम्मेदारी अभी भी संबंधित ठेकेदारों के पास थी, उन्हीं सड़कों को दोबारा बनाने के लिए करोड़ों रुपए के प्रस्ताव शासन को भेज दिए गए। मामला सामने आने के बाद विभाग ने इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए नौ इंजीनियरों को नोटिस जारी कर दिया है और उनसे 15 दिन के भीतर जवाब मांगा गया है। अधिकारियों का कहना है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक प्रदेश के विभिन्न जिलों में ऐसी 19 सड़कें चिन्हित हुई हैं जो अभी परफॉर्मेंस गारंटी अवधि में हैं। नियमों के अनुसार इस अवधि के दौरान सड़क की गुणवत्ता बनाए रखने, मरम्मत करने और किसी भी प्रकार की खराबी दूर करने की जिम्मेदारी ठेकेदार की होती है। इसके बावजूद कुछ अधिकारियों ने इन सड़कों के लिए नए निर्माण और पुनर्निर्माण के प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिए। इन प्रस्तावों की कुल लागत लगभग 140 करोड़ रुपए बताई गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामला सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर जांच की गई तो पता चला कि भोपाल, रायसेन, ग्वालियर, नर्मदापुरम, मंदसौर और मुरैना जिलों की सड़कों के लिए यह प्रस्ताव तैयार किए गए थे। नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अधिकारियों ने नियमों के विपरीत कार्य करते हुए परफॉर्मेंस गारंटी अवधि में ही नई लागत का आकलन कर प्रशासकीय स्वीकृति के लिए प्रस्ताव भेज दिए। यह प्रक्रिया विभागीय नियमों और वित्तीय अनुशासन के खिलाफ मानी गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सबसे बड़ा प्रस्ताव भोपाल और रायसेन क्षेत्र से जुड़ा बताया जा रहा है। यहां कार्यपालन यंत्री योगेंद्र कुमार ने आठ सड़कों पर व्हाइट टॉपिंग के लिए करीब 51.65 करोड़ रुपए का प्रस्ताव भेजा था। विभागीय अधिकारियों के अनुसार जिन सड़कों के लिए यह प्रस्ताव बनाया गया, उनमें से कई सड़कें अभी गारंटी अवधि में थीं। ऐसे में नए निर्माण का प्रस्ताव भेजना सवालों के घेरे में आ गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी तरह राकेश निगम ने तीन सड़कों के लिए 27.50 करोड़ रुपए की मांग की थी। वहीं एसआर परते ने तीन सड़कों को दोबारा बनाने के लिए 19.03 करोड़ रुपए का प्रस्ताव तैयार किया। ग्वालियर क्षेत्र में एके जैन ने गांधी रोड के निर्माण के लिए 13.56 करोड़ रुपए का प्रस्ताव भेजा था। दिलचस्प बात यह रही कि इसी सड़क के लिए ओमहरि शर्मा द्वारा भी प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था। इससे विभागीय स्तर पर समन्वय और प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मंदसौर जिले में आदित्य सोनी ने दो सड़कों के लिए 5.20 करोड़ रुपए की लागत का प्रस्ताव तैयार किया था। वहीं रायसेन जिले में पीके झा ने छींद मार्ग के लिए 5.12 करोड़ रुपए की मांग रखी। नर्मदापुरम क्षेत्र में सुभाष पाटिल और संजय रायकवार ने चार सड़कों की मरम्मत के लिए 2.23 करोड़ रुपए का प्रस्ताव शासन को भेजा था। अब इन सभी प्रस्तावों की जांच की जा रही है और संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विभागीय सूत्रों का कहना है कि परफॉर्मेंस गारंटी अवधि का उद्देश्य ही यह सुनिश्चित करना होता है कि सड़क निर्माण के बाद यदि कोई तकनीकी कमी सामने आती है तो उसका खर्च सरकारी खजाने पर न पड़े। ठेकेदार निर्धारित अवधि तक सड़क की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए बाध्य रहता है। ऐसे में यदि उसी अवधि के दौरान सड़क को दोबारा बनाने या मरम्मत कराने के लिए सरकारी धन की मांग की जाती है तो यह नियमों की मूल भावना के विपरीत माना जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामले ने विभाग के भीतर भी हलचल बढ़ा दी है। अधिकारियों का कहना है कि यदि प्रस्तावों को समय रहते नहीं रोका जाता तो करोड़ों रुपए का अतिरिक्त वित्तीय बोझ सरकार पर पड़ सकता था। यही वजह है कि अब पूरे मामले की गहन समीक्षा की जा रही है। संबंधित फाइलों, तकनीकी स्वीकृतियों और प्रस्तावों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। इस तरह के मामलों में जवाबदेही तय होना जरूरी है ताकि सार्वजनिक धन का सही उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। सभी नौ इंजीनियरों को नोटिस जारी कर 15 दिन के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 12:36:04 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>8 साल बाद आज खुलेगा कचना रेलवे ओवरब्रिज, 3 लाख लोगों को मिलेगी राहत</title>
                                    <description><![CDATA[रायपुर में 8 साल बाद कचना रेलवे ओवरब्रिज शुरू हो गया। रोज जाम से परेशान लाखों लोगों को अब बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/kachna-railway-overbridge-will-open-today-after-8-years-3/article-53949"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/chhattisgarh-raipur-kachna-overbridge.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रायपुर के कचना इलाके में लंबे इंतजार के बाद आखिरकार शुक्रवार शाम कचना रेलवे ओवरब्रिज आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा। मुख्यमंत्री </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">Vishnu Deo Sai <span lang="hi" xml:lang="hi">शाम करीब 6 बजे इसका लोकार्पण करेंगे। उद्घाटन के साथ ही लोगों की आवाजाही शुरू हो जाएगी। पिछले कई सालों से इस रेलवे फाटक पर लगने वाले जाम से परेशान लोग अब राहत की उम्मीद कर रहे हैं। स्थानीय लोगों में सुबह से ही उत्साह का माहौल दिखा। कई लोग उद्घाटन से पहले ही ब्रिज पर पहुंच गए थे। देर रात तक यहां स्ट्रीट लाइट और अंतिम तैयारियों का काम चलता रहा। बताया जा रहा है कि डामरीकरण समेत बाकी तकनीकी काम पहले ही पूरे हो चुके थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिर्फ उद्घाटन का इंतजार था।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कचना रेलवे फाटक शहर के सबसे व्यस्त रेलवे क्रॉसिंग में गिना जाता है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार इस रूट से हर दिन करीब 120 यात्री और मालगाड़ियां गुजरती हैं। हालात ऐसे थे कि औसतन हर 15 मिनट में फाटक बंद हो जाता था। सुबह ऑफिस टाइम हो या शाम की भीड़</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">यहां लंबा जाम लगना आम बात थी। लोग धूप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बारिश और ट्रैफिक के बीच काफी देर तक फंसे रहते थे। आसपास की कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ती थी। वीआईपी स्टेट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अशोका रतन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बाराडेरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जोरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भावना नगर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पार्वती नगर और कचना हाउसिंग बोर्ड जैसे इलाकों की बड़ी आबादी इसी रास्ते पर निर्भर है। अब ओवरब्रिज शुरू होने के बाद सीधे तौर पर करीब 3 लाख लोगों को फायदा मिलने की बात कही जा रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लोकार्पण कार्यक्रम को देखते हुए प्रशासन ने शाम 5 बजे से रात 8 बजे तक ट्रैफिक डायवर्ट किया है। अनुपम नगर से कचना जाने वाले वाहनों को श्रीराम नगर ओवरब्रिज और बीएसएनएल ऑफिस वाले रास्ते से भेजा जाएगा। वहीं कचना से खम्हारडीह आने वाले वाहनों के लिए भी यही वैकल्पिक रूट तय किया गया है। पुलिस और ट्रैफिक विभाग की टीम दोपहर से ही मौके पर तैनात रही। कार्यक्रम में पीडब्ल्यूडी मंत्री </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">Arun Sao, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्थानीय विधायक और जनप्रतिनिधियों के शामिल होने की जानकारी है। शहर में पिछले कुछ समय से इस ओवरब्रिज को लेकर लगातार चर्चा चल रही थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि इसका काम कई बार अलग-अलग वजहों से प्रभावित हुआ।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">करीब 35 करोड़ रुपए की लागत से बने इस ओवरब्रिज की लंबाई 871 मीटर और चौड़ाई 12 मीटर है। यह टू-लेन ब्रिज खम्हारडीह स्थित सीएससीबी कार्यालय के पास से शुरू होकर हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी तक जाता है। पीडब्ल्यूडी ने करीब 8 साल पहले इसकी योजना बनाई थी। उस समय यह इलाका शहर का बाहरी हिस्सा माना जाता था</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अब यहां तेजी से आबादी बढ़ी है और ट्रैफिक दबाव भी कई गुना हो चुका है। ऐसे में ओवरब्रिज को शहर की बड़ी जरूरत माना जा रहा था। शुक्रवार शाम इसके खुलने के साथ ही लोगों को रोजाना लगने वाले जाम और रेलवे फाटक के इंतजार से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 11:47:01 +0530</pubDate>
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