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                <title>Technology News - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Technology News RSS Feed</description>
                
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                <title>ओपनएआई पर एप्पल का बड़ा मुकदमा, ट्रेड सीक्रेट चोरी का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[एप्पल ने अमेरिका की अदालत में दायर याचिका में ओपनएआई, उसके हार्डवेयर सहयोगी और दो पूर्व कर्मचारियों पर गोपनीय तकनीकी जानकारी के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/apples-big-lawsuit-against-openai-accused-of-trade-secret-theft/article-58482"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/pakistan-fuel-price-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">एप्पल और ओपनएआई के बीच चल रही प्रतिस्पर्धा अब कानूनी लड़ाई तक पहुंच गई है। अमेरिकी टेक कंपनी एप्पल ने ओपनएआई, उसके सहयोगी संस्थानों और अपने दो पूर्व कर्मचारियों के खिलाफ अमेरिका के उत्तरी कैलिफोर्निया स्थित जिला न्यायालय में मुकदमा दायर किया है। कंपनी का आरोप है कि उसके पूर्व कर्मचारियों ने नौकरी छोड़ने से पहले एप्पल की गोपनीय और संवेदनशील तकनीकी जानकारी हासिल की और बाद में उसका इस्तेमाल ओपनएआई के उपभोक्ता हार्डवेयर प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने में किया गया। एप्पल का कहना है कि यह केवल कर्मचारियों द्वारा जानकारी साथ ले जाने का मामला नहीं है, बल्कि कंपनी के व्यापारिक रहस्यों, उत्पाद विकास और सप्लाई चेन से जुड़ी रणनीतिक जानकारी के कथित दुरुपयोग का गंभीर मामला है। इस घटनाक्रम ने तकनीकी जगत में हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि दोनों कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उपभोक्ता तकनीक के क्षेत्र में प्रमुख प्रतिस्पर्धी मानी जाती हैं। मुकदमे में एप्पल ने अदालत से मामले की विस्तृत जांच और गोपनीय जानकारी के कथित उपयोग पर रोक लगाने की मांग की है। दूसरी ओर, मुकदमा दायर किए जाने तक ओपनएआई की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।</p>
<p>एप्पल की शिकायत में पूर्व वरिष्ठ सिस्टम इलेक्ट्रिकल इंजीनियर चांग लियू और आईफोन तथा एप्पल वॉच के पूर्व उपाध्यक्ष (प्रोडक्ट डिजाइन) टैंग यू टैन का नाम शामिल किया गया है। कंपनी का आरोप है कि चांग लियू ने नौकरी छोड़ते समय कंपनी का आधिकारिक लैपटॉप वापस नहीं किया और बाद में एक प्रमाणीकरण संबंधी तकनीकी खामी का कथित फायदा उठाकर एप्पल के आंतरिक नेटवर्क तक पहुंच बनाई। शिकायत के अनुसार उन्होंने हार्डवेयर से जुड़ी कई गोपनीय फाइलें डाउनलोड कीं। वहीं टैंग यू टैन पर आरोप है कि उन्होंने नौकरी छोड़ने से पहले एप्पल के आपूर्तिकर्ताओं, निर्माण प्रक्रियाओं और उद्योग से जुड़ी आंतरिक जानकारी स्वयं को ईमेल की। एप्पल का यह भी दावा है कि उन्होंने कुछ कर्मचारियों को ओपनएआई में इंटरव्यू के दौरान कंपनी के हार्डवेयर या पुर्जे साथ लाने के लिए प्रेरित किया, ताकि उन्हें दिखाया जा सके। शिकायत में एक कथित घटना का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें एक उम्मीदवार ने कथित तौर पर कहा कि उसे यह पता ही नहीं था कि कार्यालय से ऐसे उपकरण बाहर ले जाए जा सकते हैं। एप्पल का कहना है कि इस तरह की गतिविधियां कंपनी के बौद्धिक संपदा अधिकारों और व्यापारिक गोपनीयता का उल्लंघन हैं। मुकदमे में ओपनएआई फाउंडेशन, ओपनएआई ग्रुप पीबीसी और आईओ प्रोडक्ट्स को भी प्रतिवादी बनाया गया है। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से तत्काल कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।</p>
<p>एप्पल ने अदालत में यह भी कहा है कि वर्तमान में ओपनएआई में उसके 400 से अधिक पूर्व कर्मचारी काम कर रहे हैं। कंपनी का कहना है कि केवल पूर्व कर्मचारियों की मौजूदगी किसी संगठन को एप्पल के व्यापारिक रहस्यों का उपयोग करने का अधिकार नहीं देती। शिकायत के अनुसार ओपनएआई के कुछ कर्मचारियों ने एप्पल के आपूर्तिकर्ताओं से भी गोपनीय तकनीकी जानकारी हासिल करने की कोशिश की। एप्पल का दावा है कि एक आपूर्तिकर्ता से कथित तौर पर ऐसी विशेष धातु फिनिशिंग तकनीक का उपयोग कराया गया, जिसे एप्पल अपनी गोपनीय निर्माण प्रक्रिया का हिस्सा मानता है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष ओपनएआई ने पूर्व एप्पल डिजाइनर जॉनी आइव द्वारा स्थापित हार्डवेयर स्टार्टअप io Products का 6.5 अरब डॉलर में अधिग्रहण किया था। इस सौदे को ओपनएआई के सॉफ्टवेयर से आगे बढ़कर उपभोक्ता हार्डवेयर बाजार में प्रवेश की बड़ी रणनीति के रूप में देखा गया था। हालांकि जॉनी आइव का नाम इस मुकदमे में शामिल नहीं किया गया है। एप्पल और ओपनएआई के बीच तनाव पिछले कई महीनों से बढ़ रहा था। एप्पल का दावा है कि उसने फरवरी में ओपनएआई को पत्र लिखकर अपनी चिंताओं से अवगत कराया था और बातचीत की इच्छा जताई थी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। दिलचस्प बात यह है कि दोनों कंपनियां हाल तक साझेदार भी रही हैं। वर्ष 2024 में एप्पल ने अपने "Apple Intelligence" फीचर के साथ ChatGPT को सिरी और अन्य सेवाओं में एकीकृत किया था, जिससे आईफोन उपयोगकर्ताओं को सीधे चैटजीपीटी की सुविधाएं मिलने लगी थीं। इसके बावजूद एआई तकनीक, प्रतिभाशाली कर्मचारियों की भर्ती और नए हार्डवेयर उत्पादों की होड़ ने दोनों कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा को तेज कर दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 13:27:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>वॉट्सएप यूजरनेम फीचर पर सरकार की नजर, साइबर फ्रॉड की आशंका के बीच होगी जांच</title>
                                    <description><![CDATA[मोबाइल नंबर छिपाकर चैट की सुविधा पर केंद्र सतर्क, फर्जी प्रोफाइल और ऑनलाइन धोखाधड़ी रोकने के लिए सुरक्षा मानकों की होगी समीक्षा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/government-eyes-investigation-on-whatsapp-username-feature-amid-fear-of/article-57554"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/gaurav-khanna-(3).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भारत में करोड़ों लोग रोजमर्रा की बातचीत के लिए वॉट्सएप का इस्तेमाल करते हैं और अब इस लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का नया यूजरनेम फीचर लॉन्च होने से पहले ही चर्चा में आ गया है। केंद्र सरकार ने संकेत दिए हैं कि इस नए फीचर की विस्तार से जांच की जाएगी। सरकार की चिंता यह है कि यदि यूजर्स मोबाइल नंबर छिपाकर केवल यूजरनेम के जरिए बातचीत कर सकेंगे, तो इसका गलत इस्तेमाल भी बढ़ सकता है। विशेष रूप से साइबर अपराध, फर्जी पहचान बनाकर ठगी और ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसे मामलों में इजाफा होने की आशंका जताई जा रही है। वॉट्सएप की पैरेंट कंपनी मेटा ने हाल ही में ऐसा फीचर पेश किया है, जिसके जरिए यूजर्स बिना अपना मोबाइल नंबर साझा किए दूसरे लोगों से बातचीत कर सकेंगे। इस सुविधा में हर यूजर अपना एक अलग और यूनिक यूजरनेम बना सकेगा। भविष्य में कोई नया व्यक्ति मोबाइल नंबर की बजाय इसी यूजरनेम के माध्यम से संपर्क कर सकेगा। कंपनी का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य यूजर्स की निजता को पहले से अधिक मजबूत बनाना है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां इस फीचर के संभावित दुरुपयोग को लेकर सतर्क हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकारी अधिकारियों के अनुसार, भारत में वॉट्सएप के 50 करोड़ से अधिक सक्रिय यूजर्स हैं। इतने बड़े डिजिटल नेटवर्क में यदि फर्जी यूजरनेम बनाकर लोगों से संपर्क करना आसान हो गया, तो साइबर अपराधियों के लिए नई संभावनाएं खुल सकती हैं। इसी कारण सरकार इस फीचर के सुरक्षा मानकों, पहचान सत्यापन प्रक्रिया और फर्जी खातों को रोकने की व्यवस्था की समीक्षा करेगी। अधिकारियों का मानना है कि किसी भी नई डिजिटल सुविधा को लागू करने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि उसका उपयोग सुरक्षित तरीके से हो और आम नागरिक किसी तरह की ऑनलाइन ठगी का शिकार न बनें। मेटा ने 29 जून से दुनिया के अलग-अलग देशों में यूजरनेम बुकिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हालांकि यह सुविधा सभी यूजर्स को एक साथ उपलब्ध नहीं कराई जाएगी। आने वाले महीनों में इसे चरणबद्ध तरीके से रोलआउट किया जाएगा। जैसे ही किसी क्षेत्र में यह सुविधा शुरू होगी, संबंधित यूजर्स को वॉट्सएप के भीतर नोटिफिकेशन मिलेगा और वे अपनी पसंद का यूजरनेम सुरक्षित कर सकेंगे। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि लोकप्रिय और छोटे यूजरनेम पहले बुक होने की संभावना ज्यादा रहती है, इसलिए कई लोग इस फीचर का इंतजार कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">वॉट्सएप का कहना है कि यह फीचर खास तौर पर उन परिस्थितियों के लिए उपयोगी होगा, जहां लोग किसी नए व्यक्ति से बातचीत करना चाहते हैं लेकिन अपना मोबाइल नंबर साझा नहीं करना चाहते। उदाहरण के तौर पर किसी बिजनेस नेटवर्किंग कार्यक्रम, स्कूल के पैरेंट्स ग्रुप, नए सहकर्मी या किसी सामुदायिक कार्यक्रम में मिले व्यक्ति से संपर्क करते समय यूजर सिर्फ अपना यूजरनेम साझा कर सकेगा। इससे मोबाइल नंबर निजी रहेगा और यूजर की व्यक्तिगत जानकारी सुरक्षित बनी रहेगी। कंपनी ने यूजरनेम बनाने के लिए कुछ नियम भी तय किए हैं। यूजरनेम की लंबाई तीन से 35 कैरेक्टर के बीच होगी। इसमें केवल छोटे अंग्रेजी अक्षर, अंक, डॉट और अंडरस्कोर का इस्तेमाल किया जा सकेगा। हर यूजरनेम पूरी तरह यूनिक होगा और जरूरत पड़ने पर उसे बदला या हटाया भी जा सकेगा। हालांकि वॉट्सएप अकाउंट बनाने के लिए मोबाइल नंबर पहले की तरह अनिवार्य रहेगा। जिन लोगों के पास पहले से किसी यूजर का मोबाइल नंबर सेव है या जिनसे पहले बातचीत हो चुकी है, उनके लिए चैटिंग का तरीका नहीं बदलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए कंपनी यूजरनेम की नाम का एक वैकल्पिक सुरक्षा फीचर भी ला रही है। यह एक अतिरिक्त सुरक्षा कोड की तरह काम करेगा। यदि कोई यूजर इस सुविधा को सक्रिय करता है, तो सिर्फ यूजरनेम जान लेने से कोई भी व्यक्ति उसे मैसेज नहीं भेज पाएगा। पहली बार संपर्क करने वाले व्यक्ति को पहले यह सुरक्षा की दर्ज करनी होगी, तभी बातचीत शुरू हो सकेगी। कंपनी का दावा है कि इससे स्पैम मैसेज और अनचाहे संपर्कों को काफी हद तक रोका जा सकेगा। सरकार का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्राइवेसी और सुरक्षा दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। जहां एक ओर यूजरनेम फीचर लोगों की व्यक्तिगत जानकारी को सुरक्षित रखने में मदद करेगा, वहीं दूसरी ओर इसकी आड़ में फर्जी पहचान बनाकर अपराध करने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए सरकार इस फीचर के तकनीकी पहलुओं, सुरक्षा व्यवस्था और संभावित जोखिमों का मूल्यांकन करने के बाद ही आगे की रणनीति तय करेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 17:45:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ZIP फाइल खोलते ही फोन हो सकता है हैक, 'बॉस फ्रॉड' से बढ़ा साइबर खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[सीईओ या कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी बनकर भेजे जा रहे फर्जी मैसेज और ZIP फाइलों के जरिए साइबर अपराधी लोगों को निशाना बना रहे हैं। गृह मंत्रालय और साइबर विशेषज्ञों ने सतर्क रहने की सलाह दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/phone-can-be-hacked-as-soon-as-zip-file-is/article-57430"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/boss-zip-fraud.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">साइबर ठगी के तरीके लगातार बदल रहे हैं और अब अपराधियों ने लोगों को निशाना बनाने के लिए एक नया तरीका अपनाया है, जिसे ‘बॉस ZIP फ्रॉड’ या ‘CEO इम्पर्सनेशन स्कैम’ कहा जा रहा है। इस साइबर ठगी में अपराधी किसी कंपनी के सीईओ, डायरेक्टर या वरिष्ठ अधिकारी की पहचान का इस्तेमाल करते हैं और कर्मचारियों को व्हाट्सएप, ई-मेल या दूसरे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए संदेश भेजते हैं। इन संदेशों के साथ एक ZIP फाइल भी भेजी जाती है, जिसे जरूरी दस्तावेज, सिक्योरिटी अपडेट या तत्काल कार्रवाई से जुड़ी फाइल बताकर डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है। जैसे ही कर्मचारी इस फाइल को डाउनलोड या खोलता है, उसका मोबाइल या सिस्टम मैलवेयर की चपेट में आ सकता है। इसके बाद साइबर ठग डिवाइस पर नियंत्रण हासिल कर संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाने की कोशिश करते हैं। गृह मंत्रालय ने भी लोगों को इस तरह के साइबर हमलों से सतर्क रहने की सलाह दी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पिछले 30 महीनों के दौरान केवल छत्तीसगढ़ में ही साइबर ठग अलग-अलग तरीकों से करीब 791 करोड़ रुपये की ठगी कर चुके हैं। डिजिटल लेनदेन बढ़ने के साथ-साथ साइबर अपराधियों ने भी अपने तौर-तरीकों में बदलाव किया है। पहले जहां फर्जी कॉल और ओटीपी फ्रॉड अधिक देखने को मिलते थे, वहीं अब सोशल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल कर कर्मचारियों को मनोवैज्ञानिक दबाव में लाकर उनसे गलत कदम उठवाए जा रहे हैं। अपराधी अक्सर ऐसा माहौल बनाते हैं कि सामने वाला बिना सोचे-समझे ZIP फाइल डाउनलोड कर ले। साइबर एक्सपर्ट्स के अनुसार, इन ZIP फाइलों के अंदर कई बार EXE, DLL या अन्य हानिकारक फाइलें छिपी होती हैं। जैसे ही ऐसी फाइल सक्रिय होती है, डिवाइस में मैलवेयर इंस्टॉल हो सकता है। इसके बाद अपराधी मोबाइल या कंप्यूटर की कई जानकारियों तक पहुंच बनाने की कोशिश करते हैं। कई मामलों में बैंकिंग ऐप, सेव किए गए पासवर्ड, मैसेज, ओटीपी और अन्य संवेदनशील जानकारी भी खतरे में पड़ सकती है। कुछ मामलों में अपराधी डिवाइस का रिमोट एक्सेस हासिल कर लेते हैं और उपयोगकर्ता को इसकी भनक तक नहीं लगती।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस तरह की ठगी का एक और खतरनाक पहलू यह है कि साइबर अपराधी मोबाइल में सेव संपर्कों के साथ भी छेड़छाड़ कर सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक कई मामलों में असली अधिकारी या बॉस का नंबर हटाकर ठग अपना नंबर सेव कर देते हैं। इसके बाद कर्मचारी को लगता है कि वह अपने वरिष्ठ अधिकारी से ही बात कर रहा है। फिर तत्काल भुगतान, गोपनीय दस्तावेज भेजने या किसी खाते में रकम ट्रांसफर करने जैसे निर्देश दिए जाते हैं। जल्दबाजी और भरोसे का फायदा उठाकर अपराधी बड़ी रकम की ठगी कर लेते हैं।  किसी भी अनजान ZIP फाइल, EXE फाइल या DLL फाइल को बिना जांचे डाउनलोड नहीं करना चाहिए। यदि किसी वरिष्ठ अधिकारी के नाम से अचानक कोई संदिग्ध संदेश आए और उसमें तुरंत कार्रवाई करने का दबाव बनाया जाए तो पहले उसकी पुष्टि करना बेहद जरूरी है। फोन कॉल, वीडियो कॉल या सीधे संबंधित अधिकारी से संपर्क करके जानकारी की पुष्टि की जा सकती है। केवल व्हाट्सएप मैसेज या ई-मेल के आधार पर कोई आर्थिक लेनदेन करना या फाइल डाउनलोड करना जोखिम भरा साबित हो सकता है। मोबाइल और कंप्यूटर में हमेशा अपडेटेड सुरक्षा प्रणाली का उपयोग किया जाए। व्हाट्सएप सहित अन्य जरूरी ऐप्स में टू-स्टेप वेरिफिकेशन सक्रिय रखना चाहिए। मजबूत पासवर्ड का इस्तेमाल करें और समय-समय पर उन्हें बदलते रहें। किसी भी अज्ञात लिंक या अटैचमेंट पर क्लिक करने से पहले उसके स्रोत की जांच जरूर करें। यदि कंपनी में काम करते हैं तो साइबर सुरक्षा से जुड़े आंतरिक दिशा-निर्देशों का पालन करना भी आवश्यक है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">साइबर अपराधों पर कार्रवाई के लिए पुलिस और जांच एजेंसियां लगातार अभियान चला रही हैं। रायपुर पुलिस ने हाल ही में 101 म्यूल अकाउंट होल्डर्स को गिरफ्तार किया था। इन खातों का इस्तेमाल देशभर में करीब 1.57 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के लिए किया गया था। इसके अलावा पुलिस ने ऐसे गिरोह का भी खुलासा किया, जो अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर के जरिए विदेशी नागरिकों को निशाना बना रहा था। जांच में सामने आया कि इस गिरोह ने दो वर्षों में 50 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी को अंजाम दिया। पुलिस लगातार संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज करने और समय रहते पीड़ितों की रकम रोकने की कोशिश कर रही है, लेकिन बढ़ते मामलों के कारण चुनौती भी लगातार बढ़ रही है। अगर कोई व्यक्ति इस तरह की साइबर ठगी का शिकार हो जाता है तो उसे समय गंवाए बिना अपने बैंक और यूपीआई सेवा प्रदाता को सूचना देनी चाहिए ताकि लेनदेन रोका जा सके। इसके साथ ही राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत संपर्क करना चाहिए और साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए। स्क्रीनशॉट, बैंक ट्रांजैक्शन, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखना भी जांच में मददगार साबित होता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 15:41:29 +0530</pubDate>
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                <title>कच्चे तेल की कीमतें फिर 72 डॉलर पर, एपल प्रोडक्ट महंगे; टेक और बाजार में बड़े बदलाव</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान युद्ध से पहले वाले स्तर पर लौटा ब्रेंट क्रूड, भारत में आईपैड और मैकबुक की कीमतों में भारी बढ़ोतरी, माइक्रोन ने मार्केट कैप में मेटा और टेस्ला को पीछे छोड़ा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/crude-oil-prices-again-at-72-apple-products-expensive-tech/article-57087"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/crude-oil-price-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर बड़ी गिरावट देखने को मिली है। ईरान से जुड़े तनाव के बीच जो उछाल कच्चे तेल में आया था, वह अब लगभग खत्म हो चुका है। गुरुवार को वैश्विक बाजार में बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड ऑयल 72 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। यह वही कीमत है जो युद्ध जैसे हालात बनने से पहले दर्ज की गई थी। ऊर्जा बाजार पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल सप्लाई को लेकर डर कम होने और बाजार में स्थिरता लौटने से कीमतों पर दबाव बना है। इसका असर आने वाले दिनों में कई देशों की अर्थव्यवस्था और ईंधन बाजार पर भी दिखाई दे सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ऐसे समय आई है जब दुनिया भर के निवेशक पश्चिम एशिया की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। कुछ सप्ताह पहले तक यह आशंका जताई जा रही थी कि यदि तनाव और बढ़ा तो तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इसी डर से कीमतों में तेजी देखने को मिली थी। लेकिन हालात फिलहाल नियंत्रण में रहने और सप्लाई चेन सामान्य रहने से बाजार का भरोसा वापस लौटा है। यही वजह है कि ब्रेंट क्रूड फिर से 72 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों के लिए यह राहत भरी खबर मानी जा रही है। देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में कमी आने पर आयात बिल घट सकता है। इससे पेट्रोल और डीजल की लागत पर भी सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद रहती है। हालांकि खुदरा ईंधन की कीमतों में किसी बदलाव का फैसला तेल कंपनियां और सरकार बाजार की स्थिति को देखते हुए करती हैं। फिलहाल उपभोक्ताओं की नजर इस बात पर है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की यह गिरावट घरेलू बाजार तक कब पहुंचती है। इधर टेक्नोलॉजी सेक्टर से भी बड़ी खबर सामने आई है। एपल ने अमेरिका में अपने कई लोकप्रिय प्रोडक्ट्स की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। कंपनी ने आईपैड और मैकबुक के कुछ मॉडल 300 डॉलर तक महंगे कर दिए हैं। इसका असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला है। भारत में इन डिवाइसों की कीमतों में लगभग एक लाख रुपये तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। नई कीमतें लागू होने के बाद प्रीमियम कैटेगरी के कई मॉडल पहले की तुलना में काफी महंगे हो गए हैं। कीमतों में यह बदलाव उत्पादन लागत, आयात शुल्क, वैश्विक सप्लाई चेन और मुद्रा विनिमय दर जैसे कई कारणों से जुड़ा हो सकता है। भारत में एपल के प्रोडक्ट पहले से ही प्रीमियम श्रेणी में आते हैं। ऐसे में नई कीमतें उन ग्राहकों पर सीधा असर डालेंगी जो नया आईपैड या मैकबुक खरीदने की योजना बना रहे हैं। कई रिटेल स्टोर्स पर नई कीमतों के अनुसार बिक्री शुरू हो चुकी है और ग्राहक भी इस बढ़ोतरी को लेकर चर्चा कर रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर शेयर बाजार और टेक इंडस्ट्री में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अमेरिकी चिप निर्माता माइक्रोन ने बाजार पूंजीकरण के मामले में बड़ी छलांग लगाई है। कंपनी का मार्केट कैप बढ़ने के बाद उसने दुनिया की दो बड़ी टेक कंपनियों मेटा और टेस्ला को पीछे छोड़ दिया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और हाई-परफॉर्मेंस मेमोरी चिप्स की बढ़ती मांग का सबसे बड़ा फायदा माइक्रोन को मिल रहा है। निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ने से कंपनी के शेयरों में तेजी आई और उसका मूल्यांकन भी मजबूत हुआ। एआई तकनीक के तेजी से विस्तार ने सेमीकंडक्टर कंपनियों की स्थिति बदल दी है। पहले जहां निवेशकों का अधिक ध्यान सोशल मीडिया और इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपनियों पर था, वहीं अब चिप बनाने वाली कंपनियां भी बाजार की अगली बड़ी ताकत बनती दिखाई दे रही हैं। माइक्रोन की इस उपलब्धि को उसी बदलाव का संकेत माना जा रहा है। आने वाले समय में यदि एआई आधारित तकनीकों की मांग इसी तरह बढ़ती रही तो सेमीकंडक्टर उद्योग में और भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। एक ही दिन में सामने आई इन तीन खबरों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की अलग-अलग तस्वीर पेश की है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ऊर्जा बाजार को राहत देती दिख रही है, वहीं एपल के महंगे प्रोडक्ट उपभोक्ताओं की जेब पर असर डाल सकते हैं। दूसरी तरफ माइक्रोन का तेजी से बढ़ता बाजार मूल्य यह संकेत देता है कि दुनिया की टेक इंडस्ट्री अब नई दिशा में आगे बढ़ रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 11:57:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>NEET UG परीक्षा तक टेलीग्राम पर रोक के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट पहुंची कंपनी</title>
                                    <description><![CDATA[22 जून तक लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को चुनौती, टेलीग्राम का दावा- कुछ लोगों की गलती की सजा 15 करोड़ से ज्यादा भारतीय यूजर्स को मिली]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/company-reaches-delhi-high-court-against-ban-on-telegram-till/article-56196"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/telegram-ban-india.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">टेलीग्राम पर केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध का मामला अब दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है। NEET UG 2026 की दोबारा आयोजित होने वाली परीक्षा से पहले सरकार ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर 22 जून तक रोक लगाने का फैसला किया था। इस फैसले के खिलाफ कंपनी की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत में तत्काल सुनवाई की तैयारी की गई है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब परीक्षा सुरक्षा, पेपर लीक और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही को लेकर देशभर में बहस जारी है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार का कहना है कि यह कदम छात्रों और परीक्षा प्रणाली के हित में उठाया गया है। अधिकारियों के अनुसार पिछले कुछ समय से परीक्षा से जुड़े फर्जी प्रश्नपत्र, भ्रामक दावे और कथित लीक सामग्री टेलीग्राम के विभिन्न चैनलों और ग्रुपों के माध्यम से साझा किए जाने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। इसी को ध्यान में रखते हुए परीक्षा से पहले एहतियातन यह फैसला लिया गया, ताकि किसी भी तरह की अफवाह या गलत जानकारी के प्रसार को रोका जा सके। NEET UG की पुनर्परीक्षा 21 जून को आयोजित की जानी है। इस परीक्षा को लेकर राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी यानी NTA पहले से ही अतिरिक्त सतर्कता बरत रही है। एजेंसी का मानना है कि सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए फर्जी पेपर लीक की खबरें फैलाकर छात्रों को भ्रमित किया जा सकता है। अधिकारियों के मुताबिक परीक्षा से पहले इस तरह की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए अस्थायी प्रतिबंध जरूरी माना गया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पूरे मामले में NTA के महानिदेशक अभिषेक सिंह का भी बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित और पारदर्शी बनाए रखना एजेंसी की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उनके अनुसार कुछ असामाजिक तत्व डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर छात्रों से ठगी करने और फर्जी सामग्री फैलाने का प्रयास करते रहे हैं। ऐसे में किसी भी संभावित जोखिम को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया। दूसरी ओर टेलीग्राम ने इस फैसले पर कड़ा विरोध जताया है। कंपनी का कहना है कि कुछ गलत गतिविधियों के आधार पर पूरे प्लेटफॉर्म को बंद करना उचित नहीं है। टेलीग्राम के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी पावेल डुरोव ने कहा कि भारत में करोड़ों लोग इस प्लेटफॉर्म का उपयोग व्यक्तिगत और व्यावसायिक संचार के लिए करते हैं। उनके अनुसार कुछ चैनलों या यूजर्स की गतिविधियों के कारण पूरे प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाने से 15 करोड़ से अधिक भारतीय उपयोगकर्ता प्रभावित हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">डुरोव ने यह भी कहा कि कंपनी पहले से ही संदिग्ध चैनलों और फर्जी सामग्री के खिलाफ कार्रवाई कर रही थी। उनके मुताबिक हाल के सप्ताहों में ऐसे सैकड़ों चैनलों को हटाया गया, जिन पर कथित रूप से परीक्षा से जुड़ी भ्रामक सामग्री साझा की जा रही थी। कंपनी का दावा है कि वह सरकार और जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करने के लिए तैयार है, लेकिन पूरे प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाना एक कठोर कदम है। इस बीच तकनीकी स्तर पर भी कुछ बदलाव किए जा रहे हैं। टेलीग्राम ने संकेत दिए हैं कि वह अपने मैसेज एडिटिंग सिस्टम को और पारदर्शी बनाने पर काम कर रहा है। कंपनी का कहना है कि भविष्य में एडिट किए गए संदेशों को अधिक स्पष्ट तरीके से चिह्नित किया जाएगा, ताकि पुराने संदेशों में बदलाव कर उन्हें नए कंटेंट की तरह पेश करने जैसी गतिविधियों को रोका जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रतिबंध लागू होने के बाद गूगल और एप्पल ने भी सरकारी निर्देशों का पालन करते हुए अपने-अपने ऐप स्टोर से टेलीग्राम को अस्थायी रूप से हटा दिया। इससे नए यूजर्स के लिए एप्लिकेशन डाउनलोड करना मुश्किल हो गया है। हालांकि पहले से ऐप का इस्तेमाल कर रहे कई उपयोगकर्ताओं पर इसका प्रभाव अलग-अलग स्तर पर देखा जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला केवल एक मैसेजिंग प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल अधिकारों और सार्वजनिक हित के बीच संतुलन से भी जुड़ा हुआ है। अदालत को यह तय करना होगा कि परीक्षा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उठाया गया कदम कितना उचित और अनुपातिक था। वहीं दूसरी तरफ यह भी देखा जाएगा कि क्या किसी प्लेटफॉर्म पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय वैकल्पिक उपाय अपनाए जा सकते थे। दिल्ली हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर अब छात्रों, अभिभावकों, तकनीकी विशेषज्ञों और डिजिटल अधिकारों से जुड़े संगठनों की नजर बनी हुई है। अदालत का फैसला न केवल टेलीग्राम के भविष्य के संचालन को प्रभावित कर सकता है, बल्कि भविष्य में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सरकारी नियंत्रण और नियमन से जुड़े मामलों के लिए भी महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है। 22 जून तक टेलीग्राम पर प्रतिबंध जारी है। साथ ही जानकारी के अनुसार प्लेटफॉर्म पर मैसेज एडिटिंग फीचर भी 30 जून तक सीमित रहेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 13:32:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ब्रिटेन में 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर का बड़ा ऐलान, TikTok से Instagram तक कई प्लेटफॉर्म होंगे प्रतिबंधित; बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को बताया प्राथमिकता]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/social-media-ban-on-children-under-16-years-of-age/article-56071"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/uk-social-media-ban.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ब्रिटेन ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने घोषणा की है कि देश में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। सरकार का कहना है कि यह कदम बच्चों को ऑनलाइन खतरों, साइबर बुलिंग, हानिकारक कंटेंट और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों से बचाने के लिए उठाया जा रहा है। इस घोषणा के बाद ब्रिटेन उन देशों की सूची में शामिल हो गया है जो बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को नियंत्रित करने के लिए सख्त कानून बना रहे हैं। डाउनिंग स्ट्रीट में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रधानमंत्री स्टार्मर ने साफ कहा कि बच्चों की सुरक्षा किसी भी व्यावसायिक हित से ज्यादा महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यदि सोशल मीडिया कंपनियां इन नियमों का विरोध करती हैं तो सरकार पीछे हटने वाली नहीं है। उनके मुताबिक डिजिटल दुनिया ने बच्चों को नई संभावनाएं जरूर दी हैं, लेकिन इसके साथ कई गंभीर जोखिम भी सामने आए हैं। सरकार का मानना है कि लगातार बढ़ता स्क्रीन टाइम, ऑनलाइन उत्पीड़न और एल्गोरिदम आधारित कंटेंट बच्चों के मानसिक और सामाजिक विकास को प्रभावित कर रहा है। नई व्यवस्था के तहत ब्रिटेन में सोशल मीडिया अकाउंट बनाने की न्यूनतम आयु 13 साल से बढ़ाकर 16 साल की जाएगी। इसका असर TikTok, Instagram, Facebook, Snapchat, X, YouTube, Reddit, Threads, Twitch और Kick जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स पर पड़ेगा। सरकार का कहना है कि इन प्लेटफॉर्म्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि 16 साल से कम उम्र के बच्चे अकाउंट न बना सकें। हालांकि WhatsApp और Signal जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स को फिलहाल इस प्रतिबंध से बाहर रखा गया है क्योंकि इन्हें मुख्य रूप से निजी संचार का माध्यम माना जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सरकार केवल आयु सीमा बढ़ाने तक ही सीमित नहीं रहना चाहती। अधिकारियों के अनुसार नए कानून को प्रभावी बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। बच्चों द्वारा गलत उम्र बताकर अकाउंट बनाने की समस्या को देखते हुए एज-वेरीफिकेशन सिस्टम लागू किया जाएगा। इसके लिए फेस स्कैनिंग तकनीक, डिजिटल आईडी और अन्य सत्यापन उपायों का इस्तेमाल किया जा सकता है। सरकार का दावा है कि इससे उम्र छिपाकर अकाउंट बनाने की संभावना काफी हद तक कम हो जाएगी। ब्रिटिश सरकार कुछ और सख्त कदमों पर भी विचार कर रही है। इनमें 16 और 17 साल के किशोरों के लिए रात के समय सोशल मीडिया उपयोग पर सीमाएं लगाने और कुछ एआई चैटबॉट्स तक पहुंच नियंत्रित करने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। अधिकारियों का मानना है कि देर रात तक सोशल मीडिया का उपयोग बच्चों की नींद, पढ़ाई और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डालता है। इसी वजह से डिजिटल कर्फ्यू जैसे विकल्पों पर चर्चा हो रही है। पिछले कुछ वर्षों में बच्चों और किशोरों के बीच सोशल मीडिया का उपयोग तेजी से बढ़ा है। इसके साथ ही अवसाद, चिंता, आत्मविश्वास की कमी और ऑनलाइन उत्पीड़न जैसी समस्याओं के मामले भी सामने आए हैं। कई अध्ययनों में यह पाया गया है कि लंबे समय तक सोशल मीडिया पर रहने वाले बच्चों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां अधिक देखी गई हैं। यही कारण है कि दुनिया के कई देश इस दिशा में नए कानून बना रहे हैं। ब्रिटेन का यह फैसला ऑस्ट्रेलिया के मॉडल से प्रेरित माना जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया ने दिसंबर 2024 में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लागू कर दुनिया का पहला ऐसा देश बनने का दावा किया था। अब ब्रिटेन ने न केवल उसी दिशा में कदम बढ़ाया है, बल्कि कुछ मामलों में उससे भी अधिक सख्त नियम लागू करने की तैयारी दिखाई है। कनाडा, ब्राजील और इंडोनेशिया जैसे देशों में भी बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर नए नियमों पर काम चल रहा है। हालांकि इस फैसले को लेकर बहस भी शुरू हो गई है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा जरूरी है, लेकिन प्रतिबंध के साथ डिजिटल शिक्षा और जागरूकता पर भी उतना ही ध्यान दिया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि केवल प्लेटफॉर्म्स पर रोक लगाने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। बच्चों और अभिभावकों को सुरक्षित इंटरनेट उपयोग की जानकारी देना भी जरूरी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 13:25:06 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>2030 तक AI से 22% नौकरियों पर असर, डिग्री से ज्यादा स्किल्स की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[WEF की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, 9.2 करोड़ नौकरियां प्रभावित होने की आशंका; चीन ने 12 हजार से ज्यादा डिग्री प्रोग्राम बंद कर AI आधारित कोर्स शुरू किए]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/headline-ai-to-impact-22-jobs-by-2030-demand-for/article-56050"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ai-jobs-2030.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब केवल तकनीक की दुनिया तक सीमित नहीं रह गया है। इसका असर तेजी से रोजगार, शिक्षा और उद्योगों पर दिखाई देने लगा है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2030 तक दुनिया की करीब 22 प्रतिशत नौकरियां AI और ऑटोमेशन से प्रभावित हो सकती हैं। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि आने वाले वर्षों में लगभग 9.2 करोड़ नौकरियां खत्म हो सकती हैं या उनका स्वरूप पूरी तरह बदल सकता है। हालांकि इसके साथ ही करीब 17 करोड़ नई नौकरियां भी पैदा होने की संभावना जताई गई है। इसका मतलब यह है कि रोजगार के अवसर खत्म नहीं होंगे, लेकिन काम करने का तरीका और जरूरी योग्यताएं पहले से काफी अलग होंगी। सबसे ज्यादा असर प्रशासनिक कार्यों, डेटा एंट्री, बेसिक कंटेंट राइटिंग, कस्टमर सपोर्ट और अकाउंटिंग जैसे क्षेत्रों पर पड़ रहा है। इन क्षेत्रों में कई प्रक्रियाएं तेजी से ऑटोमेट हो रही हैं। दूसरी ओर डेटा साइंस, मशीन लर्निंग, साइबर सिक्योरिटी, क्लाउड कंप्यूटिंग और ग्रीन एनर्जी जैसे सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहे हैं। कंपनियां अब ऐसे कर्मचारियों को तलाश रही हैं जो केवल डिग्रीधारी न हों, बल्कि AI टूल्स के साथ काम करने की क्षमता भी रखते हों। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में नौकरी पाने और बनाए रखने के लिए केवल शैक्षणिक योग्यता पर्याप्त नहीं होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">देश में आईटी, कानून, कॉमर्स, ट्रांसलेशन, डिजाइन और लाइब्रेरी साइंस जैसे क्षेत्रों में बदलाव की शुरुआत दिखाई देने लगी है। जिन कामों के लिए पहले बड़ी संख्या में लोगों की जरूरत होती थी, उनमें अब AI टूल्स की मदद से कम समय और कम संसाधनों में काम पूरा किया जा रहा है। एचआर कंपनी टीमलीज के मुताबिक करीब 40 प्रतिशत कंपनियां अब हाइब्रिड स्किल्स को प्राथमिकता दे रही हैं। यानी उम्मीदवार के पास डिग्री के साथ AI आधारित तकनीकों की समझ होना भी जरूरी माना जा रहा है। वहीं नैस्कॉम की रिपोर्ट बताती है कि देश के 82 प्रतिशत बीसीए और एमसीए ग्रेजुएट्स के पास AI टूल्स की औपचारिक ट्रेनिंग नहीं है, जो भविष्य में उनके लिए चुनौती बन सकती है।  AI इंसानों की जगह पूरी तरह नहीं लेगा, लेकिन जो लोग AI का प्रभावी उपयोग करना जानते हैं, वे निश्चित रूप से उन लोगों से आगे निकल जाएंगे जो नई तकनीक को अपनाने से बच रहे हैं। आईबीएम इंस्टीट्यूट फॉर बिजनेस वैल्यू की रिपोर्ट भी इसी ओर इशारा करती है। रिपोर्ट के अनुसार आने वाले समय में कंपनियां ऐसे कर्मचारियों को ज्यादा महत्व देंगी जो AI की मदद से अपनी उत्पादकता और कार्यक्षमता बढ़ा सकें।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस बीच चीन ने शिक्षा क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए पिछले चार वर्षों में 12,200 से अधिक अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम बंद या निलंबित कर दिए हैं। इसके साथ ही करीब 10,200 नए कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। इनमें AI, रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी और अन्य उभरते तकनीकी क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है। चीन सरकार का मानना है कि भविष्य की अर्थव्यवस्था को ऐसे युवाओं की जरूरत होगी जो नई तकनीकों के साथ काम कर सकें। यही कारण है कि कला, मानविकी, विदेशी भाषाओं और कुछ पारंपरिक प्रबंधन पाठ्यक्रमों में कटौती की गई है। भारत में भी इसी तरह के संकेत दिखाई देने लगे हैं। कर्नाटक सरकार ने हाल ही में सरकारी कॉलेजों में कम दाखिले वाले सैकड़ों पारंपरिक कोर्स कॉम्बिनेशन बंद कर दिए हैं और 1300 से ज्यादा कोर्सों में सीटें कम कर दी हैं। शिक्षा विशेषज्ञ इसे बदलती रोजगार जरूरतों का संकेत मान रहे हैं। उनका कहना है कि आने वाले वर्षों में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को अपने पाठ्यक्रमों में बड़े बदलाव करने होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 12:06:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>डेटा सुरक्षा भी सीमा सुरक्षा जितनी जरूरी, साइबर रिसर्च सेंटर बनेगा: मुख्यमंत्री मोहन यादव</title>
                                    <description><![CDATA[भोपाल में साइबर सुरक्षा कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा- डेटा आज की सबसे मूल्यवान संपत्ति, प्रदेश में साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर स्थापित किया जाएगा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a2fecf36a849/article-56019"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/cyber-security-madhya-pradesh.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">डिजिटल युग में तेजी से बढ़ती तकनीक और साइबर खतरों के बीच मध्यप्रदेश सरकार ने डेटा सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित “राज्य डेटा के लिए साइबर सुरक्षा फ्रेमवर्क को सुदृढ़ बनाने” विषयक कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए कहा कि आज के दौर में डेटा सबसे मूल्यवान संपत्ति बन चुका है और इसकी सुरक्षा देश की सीमाओं की सुरक्षा जितनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने प्रदेश में साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर स्थापित करने की घोषणा करते हुए साइबर अपराधों से निपटने के लिए मजबूत और आधुनिक व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में साइबर तकनीक और उससे जुड़ी चुनौतियों का स्वरूप तेजी से बदला है। हर दिन नए प्रकार के साइबर हमले और डिजिटल अपराध सामने आ रहे हैं। ऐसे में केवल तकनीकी विकास पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके साथ सुरक्षा तंत्र को भी मजबूत बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों के दौरान आधुनिक तकनीकों और ड्रोन आधारित गतिविधियों ने सुरक्षा के नए आयाम सामने रखे हैं, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि भविष्य की चुनौतियां पहले से कहीं अधिक जटिल होंगी। डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने समय रहते साइबर अपराध, डीपफेक और डिजिटल सुरक्षा जैसे विषयों को गंभीरता से लिया और देशभर में जागरूकता बढ़ाने के लिए कई पहल शुरू कीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ नागरिकों का भरोसा बनाए रखना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है और इसके लिए मजबूत साइबर सुरक्षा ढांचा अनिवार्य है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर की स्थापना की घोषणा की। यह केंद्र महू स्थित मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह केंद्र साइबर सुरक्षा अनुसंधान, नवाचार, प्रशिक्षण और कौशल विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही यह साइबर हमलों की पूर्व पहचान और निगरानी के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग करेगा, जिससे संभावित खतरों को समय रहते रोका जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश लगातार डिजिटल प्रशासन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। विभिन्न योजनाओं और सेवाओं को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से नागरिकों तक पहुंचाया जा रहा है। जनधन खातों और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) व्यवस्था का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान प्रणाली ने पारदर्शिता बढ़ाई है और लाभार्थियों तक योजनाओं का पूरा लाभ पहुंचाना संभव बनाया है। दुनिया आज भारत की यूपीआई भुगतान प्रणाली की सराहना कर रही है, लेकिन इसके साथ डिजिटल सुरक्षा की जिम्मेदारी भी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध के मामले कई बार ऐसे होते हैं जिनमें लोगों की वर्षों की जमा पूंजी कुछ ही मिनटों में ठगी का शिकार हो जाती है। ऐसे अपराध दिखाई नहीं देते, लेकिन उनका प्रभाव बेहद गंभीर होता है। इसलिए साइबर अपराधों की रोकथाम, त्वरित कार्रवाई और जनजागरूकता को प्राथमिकता देना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि डेटा ब्रीच जैसी घटनाओं में सरकार की जिम्मेदारी और जवाबदेही भी तय होती है, इसलिए डेटा सुरक्षा के मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कार्यशाला में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव एम. सेल्वेन्द्रन ने बताया कि मध्यप्रदेश ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। प्रदेश में नागरिकों को बड़ी संख्या में डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं और इन्हें सुरक्षित बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा, भूमि और वित्तीय जानकारी जैसे संवेदनशील डेटा की सुरक्षा के लिए मजबूत नीतिगत और तकनीकी ढांचे की आवश्यकता है। एमपीएसईडीसी के प्रबंध संचालक आशीष वशिष्ठ ने बताया कि प्रदेश में 1700 से अधिक शासकीय सेवाएं डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि एमपी-सीईआरटी, स्टेट डेटा सेंटर और सुरक्षित स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क जैसी व्यवस्थाएं साइबर सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही हैं। भविष्य में इन प्रणालियों को और उन्नत बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कार्यशाला में एडीजी ए. साई मनोहर ने बताया कि प्रदेश में साइबर अपराधों से निपटने के लिए लगातार क्षमता बढ़ाई जा रही है। वर्तमान में साइबर कमांडो की विशेष टीम कार्यरत है और आने वाले समय में इसकी संख्या बढ़ाई जाएगी। उन्होंने जानकारी दी कि सिंहस्थ-2028 से पहले 44 साइबर कमांडो तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा करीब 3 हजार इंजीनियरिंग विद्यार्थियों और युवा स्वयंसेवकों को साइबर वॉरियर के रूप में प्रशिक्षित करने की योजना बनाई गई है। कार्यशाला के दौरान डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम, साइबर अपराध नियंत्रण, डिजिटल अवसंरचना सुरक्षा, सुरक्षित एआई तकनीक और डेटा संरक्षण जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तृत प्रस्तुति दी। विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने समूह चर्चाओं में भाग लेकर साइबर सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों और समाधान पर सुझाव भी साझा किए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 18:09:32 +0530</pubDate>
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                <title>स्पेसएक्स IPO के बाद ट्रिलियन डॉलर क्लब के करीब पहुंचे एलन मस्क</title>
                                    <description><![CDATA[स्पेसएक्स की रिकॉर्ड वैल्यूएशन और शेयर बाजार में धमाकेदार एंट्री ने एलन मस्क की कुल संपत्ति को 971 अरब डॉलर तक पहुंचाया, अब दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर बनने से सिर्फ कुछ कदम दूर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/6a2ba244b9219/article-55699"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/elon-musk-net-worth.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क एक और ऐतिहासिक उपलब्धि के बेहद करीब पहुंच गए हैं। उनकी अंतरिक्ष कंपनी स्पेसएक्स के शेयर बाजार में उतरने के बाद उनकी कुल संपत्ति में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया है। नई वैल्यूएशन के अनुसार मस्क की कुल नेटवर्थ करीब 971 अरब डॉलर तक पहुंच गई है, जिससे वह दुनिया के पहले ट्रिलियन डॉलर यानी एक लाख करोड़ डॉलर से अधिक संपत्ति वाले व्यक्ति बनने की दहलीज पर खड़े नजर आ रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">स्पेसएक्स के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) की कीमत 135 डॉलर प्रति शेयर तय की गई। इस मूल्यांकन के आधार पर एलन मस्क की स्पेसएक्स में हिस्सेदारी का मूल्य लगभग 688 अरब डॉलर आंका गया है। यह उनकी कुल संपत्ति का सबसे बड़ा हिस्सा बन गया है। वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि अगर स्पेसएक्स के शेयरों में शुरुआती कारोबार के दौरान मामूली बढ़त भी दर्ज होती है, तो मस्क ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को छू सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">स्पेसएक्स के बाजार में उतरने से पहले भी एलन मस्क दुनिया के सबसे धनी व्यक्ति थे। उनकी संपत्ति का बड़ा हिस्सा पहले से ही स्पेसएक्स, टेस्ला, न्यूरालिंक और द बोरिंग कंपनी जैसी कंपनियों में हिस्सेदारी से जुड़ा हुआ था। हालांकि स्पेसएक्स की नई वैल्यूएशन ने उनकी संपत्ति में सबसे बड़ा इजाफा किया है। बताया जा रहा है कि कंपनी की वैल्यू पिछले एक साल में तेजी से बढ़ी है और निवेशकों का भरोसा लगातार मजबूत हुआ है। यदि स्पेसएक्स का शेयर मूल्य 140.71 डॉलर तक पहुंच जाता है तो एलन मस्क की कुल संपत्ति एक ट्रिलियन डॉलर के स्तर को पार कर सकती है। मौजूदा स्थिति में वह इस लक्ष्य से करीब 29 अरब डॉलर दूर हैं। यह अंतर सुनने में बड़ा लगता है, लेकिन मस्क की कुल संपत्ति के मुकाबले यह केवल लगभग तीन प्रतिशत की वृद्धि के बराबर है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्पेसएक्स की सफलता के पीछे कंपनी की लगातार बढ़ती व्यावसायिक उपलब्धियां हैं। अंतरिक्ष प्रक्षेपण सेवाओं, उपग्रह इंटरनेट नेटवर्क और अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में कंपनी ने पिछले कुछ वर्षों में मजबूत पकड़ बनाई है। निवेशकों का मानना है कि आने वाले समय में स्पेसएक्स वैश्विक अंतरिक्ष उद्योग की सबसे प्रभावशाली कंपनियों में शामिल रह सकती है। इसी उम्मीद ने कंपनी की वैल्यूएशन को रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचाने में मदद की है। एलन मस्क की संपत्ति में पिछले एक वर्ष के दौरान लगभग 163 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह उछाल मुख्य रूप से स्पेसएक्स की बढ़ती कीमत और उसके कारोबारी विस्तार का परिणाम माना जा रहा है। वर्ष 2025 के दौरान कंपनी की वैल्यू में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई थी और बाद में एआई क्षेत्र से जुड़ी गतिविधियों ने भी निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया। इससे कंपनी के प्रति बाजार का भरोसा और मजबूत हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">मस्क की दूसरी प्रमुख कंपनी टेस्ला ने भी इस दौरान अच्छा प्रदर्शन किया है। इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनी के शेयरों में बीते एक साल में करीब 22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। टेस्ला में मस्क की हिस्सेदारी का मूल्य अब लगभग 165 अरब डॉलर बताया जा रहा है। हालांकि यह बढ़ोतरी स्पेसएक्स जितनी तेज नहीं रही, लेकिन फिर भी उनकी कुल संपत्ति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में इसका महत्वपूर्ण योगदान रहा। दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सूची में एलन मस्क अपने प्रतिद्वंद्वियों से काफी आगे निकल चुके हैं। आंकड़ों के अनुसार, गूगल के सह-संस्थापक लैरी पेज लगभग 310 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ दूसरे स्थान पर हैं। यह अंतर दिखाता है कि मस्क फिलहाल संपत्ति के मामले में किस स्तर पर पहुंच चुके हैं। यदि वह ट्रिलियन डॉलर का आंकड़ा पार कर लेते हैं, तो यह वैश्विक वित्तीय इतिहास में एक अभूतपूर्व उपलब्धि होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रिलियन डॉलर की व्यक्तिगत संपत्ति केवल एक प्रतीकात्मक उपलब्धि नहीं होगी, बल्कि यह तकनीक, अंतरिक्ष उद्योग और नवाचार आधारित कंपनियों की बढ़ती ताकत को भी दर्शाएगी। पिछले दशक में तकनीकी कंपनियों की तेजी से बढ़ती वैल्यूएशन ने दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सूची को पूरी तरह बदल दिया है और मस्क इसका सबसे बड़ा उदाहरण बनकर उभरे हैं। दुनिया की निगाहें स्पेसएक्स के शेयर प्रदर्शन पर टिकी हुई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 12:19:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>WWDC 2026 में Apple का बड़ा दांव, Siri AI और iOS 27 के साथ बदलेगा iPhone का अनुभव</title>
                                    <description><![CDATA[Apple ने WWDC 2026 में Siri AI, iOS 27 और Apple Intelligence से जुड़े कई बड़े फीचर्स पेश किए। नया अपडेट ईमेल-मैसेज लिखने से लेकर बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और फोटो एडिटिंग तक कई बदलाव लेकर आया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/apples-big-bet-in-wwdc-2026-will-change-iphone-experience/article-55379"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/apple-wwdc-2026.jpg" alt=""></a><br /><p>WWDC 2026 के पहले दिन Apple ने अपने सबसे बड़े सॉफ्टवेयर अपडेट्स में से एक का ऐलान करते हुए Siri, iOS 27 और Apple Intelligence को नए रूप में पेश किया। कैलिफोर्निया स्थित Apple Park में आयोजित इस वार्षिक डेवलपर सम्मेलन के दौरान कंपनी ने साफ संकेत दिए कि वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दौड़ में अब पहले से कहीं ज्यादा आक्रामक रणनीति के साथ आगे बढ़ना चाहती है। सबसे ज्यादा चर्चा नई Siri AI की रही, जिसे अब सिर्फ एक वॉयस असिस्टेंट नहीं बल्कि एक कॉन्टेक्स्ट समझने वाली डिजिटल सहायक के रूप में तैयार किया गया है। कंपनी के अनुसार Siri AI अब बिना किसी ऐप को बदले ईमेल ड्राफ्ट कर सकेगी, मैसेज तैयार करेगी और स्क्रीन पर मौजूद जानकारी के आधार पर जवाब भी दे सकेगी। Apple का दावा है कि यह अब तक का सबसे बड़ा Siri अपग्रेड है। साल 2011 में iPhone के साथ शुरू हुई Siri अब AI युग के हिसाब से पूरी तरह बदलती नजर आ रही है।</p>
<p>इवेंट के दौरान Apple ने Apple Intelligence प्लेटफॉर्म को भी और मजबूत बनाने की घोषणा की। कंपनी का कहना है कि नया सिस्टम अलग-अलग ऐप्स के बीच जानकारी को बेहतर तरीके से समझेगा। उदाहरण के तौर पर यदि कोई यूजर फोन कॉल पर बात कर रहा है तो डिवाइस संबंधित ईमेल, मैसेज या अन्य ऐप्स की जानकारी को समझकर उपयोगी सुझाव दे सकेगा। मैसेज ऐप में AI आधारित रिप्लाई सजेशन दिए जाएंगे जबकि Safari ब्राउजर में टैब मैनेजमेंट और पासवर्ड से जुड़े नए फीचर्स जोड़े गए हैं। Apple ने इस मौके पर एक बार फिर यूजर प्राइवेसी को अपनी प्राथमिकता बताया। कंपनी के अधिकारियों के अनुसार AI फीचर्स का इस्तेमाल करते समय यूजर डेटा केवल उसी अनुरोध को पूरा करने के लिए उपयोग किया जाएगा और इसकी स्वतंत्र रूप से जांच भी कराई जा सकेगी। Apple का यह रुख ऐसे समय में सामने आया है जब AI कंपनियों के बीच डेटा सुरक्षा को लेकर लगातार बहस जारी है।</p>
<p>iOS 27 को लेकर भी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गईं। Apple ने बताया कि iPhone 11 और उसके बाद लॉन्च हुए सभी मॉडल्स को यह अपडेट मिलेगा। कंपनी का दावा है कि नए ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ परफॉर्मेंस में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा। फोटो पहले की तुलना में अधिक तेजी से लोड होंगे, AirDrop ट्रांसफर की स्पीड बढ़ेगी और मल्टीटास्किंग अनुभव भी बेहतर होगा। इसके अलावा सिस्टम सर्च को पूरी तरह नया बनाया गया है। Spotlight, Mail और Photos में अब ज्यादा सटीक और तेज परिणाम मिलेंगे। कीबोर्ड में इन-बिल्ट AI डिक्टेशन फीचर भी जोड़ा गया है, जो बोलकर लिखे गए टेक्स्ट की स्पेलिंग, विराम चिह्न और फॉर्मेटिंग को अपने आप ठीक करेगा। बताया जा रहा है कि यह फीचर उन यूजर्स के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकता है जो लंबे संदेश या नोट्स वॉयस के जरिए तैयार करते हैं। Shortcuts ऐप में भी बदलाव किए गए हैं और अब सामान्य भाषा में कमांड लिखकर ऑटोमेशन तैयार किए जा सकेंगे।</p>
<p>बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर भी Apple ने खास ध्यान दिया है। कंपनी ने नए पेरेंटल कंट्रोल टूल्स की घोषणा करते हुए बताया कि 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए “Ask to Browse” और “Ask to Buy” जैसे फीचर्स डिफॉल्ट रूप से सक्रिय रहेंगे। इससे माता-पिता यह नियंत्रित कर सकेंगे कि बच्चा किन वेबसाइट्स पर जा सकता है और कौन से ऐप डाउनलोड कर सकता है। इसी के साथ Health ऐप में महिलाओं के लिए पेरिमेनोपॉज और मेनोपॉज सपोर्ट जोड़ा गया है। फोटो ऐप को भी AI की मदद से अधिक शक्तिशाली बनाया गया है। नया Reframe फीचर तस्वीर के एंगल को बदल सकता है जबकि Extend टूल इमेज का विस्तार करके दृश्य को बड़ा दिखाने में मदद करेगा। Cleanup टूल को भी अपग्रेड किया गया है जिससे फोटो से अनचाही वस्तुओं को अधिक प्राकृतिक तरीके से हटाया जा सकेगा। वहीं पिछले साल पेश किए गए Liquid Glass डिजाइन में भी कुछ बदलाव किए गए हैं ताकि यूजर्स अपने अनुसार इंटरफेस को कस्टमाइज कर सकें।</p>
<p>इस बार का WWDC एक और वजह से खास रहा। Apple के मुख्य कार्यकारी अधिकारी टिम कुक ने मंच से भावुक संदेश देते हुए कहा कि कंपनी का सबसे अच्छा दौर अभी आना बाकी है। उन्होंने कहा कि Apple का लक्ष्य हमेशा ऐसे उत्पाद बनाना रहा है जो लोगों के जीवन को बेहतर बना सकें। उद्योग जगत में पहले से चर्चा है कि 1 सितंबर से कंपनी की कमान हार्डवेयर इंजीनियरिंग प्रमुख जॉन टर्नस संभालेंगे। ऐसे में WWDC 2026 को टिम कुक के नेतृत्व वाले दौर के अंतिम बड़े आयोजनों में से एक माना जा रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 11:34:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>भारत बना दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी डिजिटल इकॉनोमी, एआई प्रदर्शन में भी चौथा स्थान</title>
                                    <description><![CDATA[डिजिटल कनेक्टिविटी, फिनटेक और नवाचार के दम पर भारत ने कई विकसित देशों को पीछे छोड़ा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/india-becomes-the-worlds-fifth-largest-digital-economy-and-also/article-54581"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/india-digital-economy.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। देश अब दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी डिजिटल इकॉनोमी बन गया है। हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार भारत ने डिजिटल प्रदर्शन के मामले में जर्मनी, फ्रांस, जापान और कनाडा जैसी विकसित अर्थव्यवस्थाओं को पीछे छोड़ दिया है। यह उपलब्धि ऐसे समय में सामने आई है जब देश में डिजिटल सेवाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है और करोड़ों लोग रोजमर्रा के कामों के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस की ओर से जारी ‘इंडियाज डिजिटल इकोनॉमी 2026’ रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2025 में भारत डिजिटलाइजेशन के मामले में आठवें स्थान पर था, लेकिन एक वर्ष के भीतर तीन स्थान की छलांग लगाकर पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल भुगतान, इंटरनेट पहुंच, मोबाइल कनेक्टिविटी और तकनीकी नवाचार ने इस प्रगति में अहम भूमिका निभाई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रिपोर्ट में दुनिया की जीडीपी के लगभग 96 प्रतिशत हिस्से को कवर करने वाले 71 देशों का अध्ययन किया गया। इस अध्ययन में पाया गया कि भारत की डिजिटल क्षमता और तकनीकी विस्तार कई स्थापित अर्थव्यवस्थाओं से अधिक तेजी से बढ़ रहा है। डिजिटल क्षेत्र में देश की मजबूती का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारत ने डिजिटल माध्यमों से करीब 31 लाख करोड़ रुपये का व्यापार किया है। यह आंकड़ा देश में बढ़ते डिजिटल लेनदेन और ऑनलाइन आर्थिक गतिविधियों की ओर इशारा करता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के क्षेत्र में भी भारत ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। चिप्स-एआई इंडेक्स में भारत अमेरिका, चीन और सिंगापुर के बाद चौथे स्थान पर पहुंच गया है। यह रैंकिंग देश की तकनीकी क्षमता, प्रतिभा और एआई अपनाने की गति को दर्शाती है। पिछले कुछ वर्षों में एआई आधारित स्टार्टअप, अनुसंधान परियोजनाएं और डिजिटल सेवाओं में तेजी से वृद्धि हुई है, जिसका असर अब वैश्विक स्तर पर दिखाई देने लगा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह भी है कि दुनिया के अधिकांश एआई उपयोगकर्ता अब विकासशील देशों में मौजूद हैं। आंकड़ों के अनुसार वैश्विक स्तर पर लगभग 72 प्रतिशत एआई उपयोगकर्ता विकासशील देशों से आते हैं। भारत और चीन मिलकर दुनिया के करीब 40 प्रतिशत एआई उपयोगकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनमें भारत अकेले लगभग 26 प्रतिशत वैश्विक एआई उपयोगकर्ताओं का हिस्सा रखता है। यह दर्शाता है कि देश में नई तकनीकों को अपनाने की गति काफी तेज है और आम लोगों के बीच भी डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग तेजी से बढ़ा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारत को दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एआई टैलेंट हब भी माना जा रहा है। बड़ी संख्या में भारतीय इंजीनियर, डेटा साइंटिस्ट और तकनीकी विशेषज्ञ वैश्विक कंपनियों और स्टार्टअप्स में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। देश के विभिन्न तकनीकी संस्थान और विश्वविद्यालय भी एआई और मशीन लर्निंग से जुड़े पाठ्यक्रमों पर लगातार जोर दे रहे हैं। इसके कारण आने वाले वर्षों में भारत की तकनीकी क्षमता और मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हालांकि रिपोर्ट में कुछ चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया गया है। एआई उपयोग और प्रतिभा के मामले में भारत मजबूत स्थिति में है, लेकिन निवेश के क्षेत्र में अभी भी काफी अंतर दिखाई देता है। वैश्विक निजी एआई निवेश का केवल लगभग 1 प्रतिशत हिस्सा ही भारत को प्राप्त हो रहा है। यह आंकड़ा बताता है कि तकनीकी क्षमता होने के बावजूद निवेश आकर्षित करने के लिए अभी काफी काम करने की जरूरत है। एडवांस सेमीकंडक्टर चिप्स, उच्च क्षमता वाले कंप्यूटिंग संसाधन और बड़े एआई मॉडल अभी भी दुनिया के कुछ चुनिंदा देशों तक सीमित हैं। ऐसे में भारत को अपने डिजिटल विस्तार को मजबूत करने के लिए अनुसंधान, नवाचार और इंफ्रास्ट्रक्चर पर अधिक निवेश करना होगा। साथ ही स्टार्टअप, उद्योग और विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग बढ़ाने की भी आवश्यकता है ताकि नई तकनीकों का विकास देश के भीतर ही हो सके।</p>
<p style="text-align:justify;">डिजिटल इंडिया अभियान, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI), तेज इंटरनेट विस्तार और सरकारी डिजिटल सेवाओं ने भारत को वैश्विक डिजिटल मानचित्र पर एक मजबूत पहचान दिलाई है। ग्रामीण क्षेत्रों तक इंटरनेट और डिजिटल भुगतान की पहुंच बढ़ने से भी डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। यही वजह है कि भारत अब केवल उपभोक्ता बाजार नहीं बल्कि डिजिटल नवाचार और तकनीकी विकास का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 16:00:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>केरल में बना देश का पहला AI मंत्रालय, जानें कैसे काम करेगी यह मिनिस्ट्री</title>
                                    <description><![CDATA[केरल देश का पहला राज्य बना जहां AI के लिए अलग मंत्रालय बनाया गया। पी. के. कुन्हालीकुट्टी को AI विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/countrys-first-ai-ministry-formed-in-kerala-know-how-this/article-53962"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/kerala-ai-minister-ai-ministry.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भारत में पहली बार किसी राज्य सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">AI) <span lang="hi" xml:lang="hi">के लिए एक अलग मंत्रालय का गठन किया है। यह कदम केंद्रीय सरकार की बजाय केरल सरकार ने उठाया है। नई सरकार में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के वरिष्ठ नेता पी. के. कुन्हालीकुट्टी को </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। इस तरह केरल देश का पहला राज्य बन गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">के लिए न केवल एक मंत्रालय बल्कि एक मंत्री भी बनाया गया है। यह निर्णय तकनीकी दृष्टिकोण से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आने वाले समय में प्रशासनिक और आर्थिक तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का मानना है कि </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">अब सिर्फ मोबाइल ऐप या चैटबॉट तक सीमित नहीं रहेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ट्रैफिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी सेवाओं और रोजगार पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ेगा।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सरकारी सूत्रों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, AI <span lang="hi" xml:lang="hi">मंत्रालय का काम विभिन्न विभागों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग को एक नीति के तहत लाना होगा। पहले टेक्नोलॉजी से जुड़े फैसले अलग-अलग विभाग अपने तरीके से लेते थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अब </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">से संबंधित कार्यों के लिए एक केंद्रीकृत व्यवस्था बनाई जाएगी। खबर है कि अस्पतालों में बीमारियों की जल्दी पहचान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ट्रैफिक सिस्टम को स्मार्ट बनाने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी शिकायतों के निपटारे और ऑनलाइन सेवाओं को तेज करने में </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">का उपयोग बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा। राज्य सरकार इस दिशा में रिसर्च और टेक्नोलॉजी कंपनियों के साथ भी सहयोग कर सकती है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">केरल हमेशा से शिक्षा और डिजिटल साक्षरता में अग्रणी रहा है। अब </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">AI <span lang="hi" xml:lang="hi">मंत्रालय की स्थापना के बाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राज्य स्टार्टअप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रिसर्च सेंटर और निवेश आकर्षित करने का प्रयास करेगा। सूत्रों के मुताबिक</span>, AI <span lang="hi" xml:lang="hi">आधारित उद्योग आने वाले वर्षों में एक बड़ा रोजगार क्षेत्र बन सकती है। इसीलिए सरकार कॉलेजों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्कूलों और प्रोफेशनल संस्थानों में </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">और डिजिटल स्किल्स से जुड़े ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरु करने की योजना बना रही है। ऐसा माना जा रहा है कि पारंपरिक नौकरियों में बदलाव के खतरे को देखते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार नए तकनीक के मुताबिक लोगों को तैयार करना चाहती है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">केरल के इस कदम से पड़ोसी राज्य तमिलनाडु पर भी प्रभाव पड़ा है। चुनावी प्रचार के दौरान टीवीके प्रमुख थलपति विजय ने भी अलग </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">AI <span lang="hi" xml:lang="hi">मंत्रालय या </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">गवर्नेंस सिस्टम बनाने का वादा किया था। राजनीतिक हलकों में चर्चा चल रही है कि तमिलनाडु सरकार भी जल्द इस दिशा में कोई महत्वपूर्ण निर्णय ले सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में अन्य राज्य भी </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">को लेकर अपनी नीतियाँ बना सकते हैं। अब </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">को केवल टेक्नोलॉजी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि प्रशासन और अर्थव्यवस्था का नया इंजन माना जा रहा है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अगर हम दुनिया के दूसरे देशों पर नजर डालें तो संयुक्त अरब अमीरात ने 2017 में ही </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">AI <span lang="hi" xml:lang="hi">मंत्री नियुक्त कर लिया था। </span>UAE <span lang="hi" xml:lang="hi">आज स्मार्ट सिटी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऑटोमेशन और </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">रिसर्च में भारी निवेश कर रहा है। वहीं सऊदी अरब और सिंगापुर भी </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">नीति और सुरक्षा ढांचे पर तेजी से काम कर रहे हैं। ऐसे में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केरल का यह कदम भारत में </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">गवर्नेंस की नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 13:37:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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