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                <title>Court Update - दैनिक जागरण</title>
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                <title>राम मंदिर चढ़ावा मामले में सुप्रीम कोर्ट की तत्काल सुनवाई से इनकार, छुट्टियों के बाद होगी सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की जांच के लिए सीबीआई जांच की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- इतनी जल्द सुनवाई की जरूरत क्या है?]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/supreme-court-refuses-to-give-immediate-hearing-in-ram-temple/article-57320"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ram-mandir-donation-case-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और हेरफेर के आरोपों से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। अदालत ने याचिकाकर्ता की जल्द सुनवाई की मांग स्वीकार नहीं की और स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई अब न्यायालय की छुट्टियां समाप्त होने के बाद नियमित प्रक्रिया के तहत होगी। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद फिलहाल इस मामले में किसी प्रकार की तत्काल न्यायिक कार्रवाई नहीं होगी। याचिका में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर मंदिर में आने वाले चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। याचिकाकर्ता का दावा है कि चढ़ावे की राशि और उससे जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड में कथित अनियमितताएं हुई हैं। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई कि मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की अगुवाई में गठित विशेष जांच दल से कराई जाए। साथ ही यह भी अनुरोध किया गया कि पूरी जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में तय समय सीमा के भीतर पूरी कराई जाए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से इस मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने की मांग की गई। उनका तर्क था कि मामला सार्वजनिक आस्था और करोड़ों श्रद्धालुओं से जुड़ा है, इसलिए इसमें देरी नहीं होनी चाहिए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील से सहमति नहीं जताई। अदालत ने याचिकाकर्ता से सवाल किया कि आखिर इस मामले में इतनी जल्द सुनवाई की आवश्यकता क्या है। अदालत की इस टिप्पणी के बाद तत्काल सुनवाई की मांग खारिज कर दी गई। सुप्रीम कोर्ट के इस रुख का मतलब यह नहीं है कि याचिका खारिज कर दी गई है। अदालत ने केवल तत्काल सुनवाई से इनकार किया है। अब यह मामला न्यायालय की नियमित प्रक्रिया के अनुसार सूचीबद्ध होने के बाद सुना जाएगा। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय आमतौर पर उन्हीं मामलों में तत्काल सुनवाई करता है, जहां किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों पर तत्काल प्रभाव पड़ रहा हो या स्थिति अत्यंत आपातकालीन हो। अन्य मामलों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत सूचीबद्ध किया जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">याचिका में यह भी मांग की गई है कि यदि प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही मंदिर में चढ़ावे के संग्रह, लेखा-जोखा और उपयोग की पूरी व्यवस्था की स्वतंत्र जांच कराई जाए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की पारदर्शिता संबंधी शंका न रहे। हालांकि इन आरोपों पर अभी तक अदालत की ओर से कोई टिप्पणी नहीं की गई है और न ही आरोपों की सत्यता पर कोई न्यायिक निष्कर्ष सामने आया है।मामले को लेकर राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से भी अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं आई है। कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद ही ट्रस्ट की ओर से अदालत में जवाब दाखिल किया जा सकता है। ऐसे मामलों में अदालत दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय करती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राम मंदिर देश की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक परियोजनाओं में से एक है और यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर निर्माण के बाद से चढ़ावे की राशि में लगातार वृद्धि हुई है। ऐसे में चढ़ावे के प्रबंधन और लेखा प्रणाली को लेकर समय-समय पर सार्वजनिक चर्चा भी होती रही है। हालांकि किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता का आरोप तभी कानूनी रूप से स्थापित माना जाएगा, जब जांच एजेंसियां या अदालत उसके संबंध में कोई निष्कर्ष दें। अदालत का तत्काल सुनवाई से इनकार करना किसी पक्ष के पक्ष या विपक्ष में फैसला नहीं माना जा सकता। यह केवल न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है। यदि अदालत को सुनवाई के दौरान प्रथम दृष्टया जांच की आवश्यकता महसूस होती है तो वह संबंधित एजेंसियों को निर्देश दे सकती है। फिलहाल ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया गया है। इस बीच याचिका को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोग मामले की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं, जबकि अन्य का कहना है कि बिना जांच पूरी हुए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में तथ्यों और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करना आवश्यक है ताकि किसी तरह की भ्रम की स्थिति पैदा न हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 16:57:06 +0530</pubDate>
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                <title>IRCTC घोटाला मामला: फिर टला फैसला, लालू परिवार पर अब 9 जून को आएगा कोर्ट का आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[IRCTC घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने फैसला टाल दिया है। लालू परिवार पर अब 9 जून को आदेश सुनाया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/irctc-scam-case-decision-postponed-again-now-court-order-on/article-53980"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/irctc-scam-lalu-yadav.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">नई दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में बुधवार को </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">IRCTC <span lang="hi" xml:lang="hi">घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले का फैसला फिर नहीं आया। अदालत ने सुनवाई के बाद अपना आदेश सुरक्षित रखते हुए अगली तारीख </span>9<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून तय की है। इस मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनकी पत्नी राबड़ी देवी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेटे तेजस्वी यादव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तेज प्रताप यादव और बेटी मीसा भारती सहित कई अन्य लोग आरोपी हैं। जैसे-जैसे तारीख नजदीक आ रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस केस के चारों ओर राजनीतिक और कानूनी हलचल बढ़ती जा रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पिछली सुनवाई के बाद से ही उम्मीद थी कि आज कोर्ट कुछ महत्वपूर्ण निर्णय ले सकती है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन मामला फिर से टल गया। इससे पहले </span>6<span lang="hi" xml:lang="hi"> मई को भी अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा था। अब </span>9<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून को जो आदेश आएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो इस पूरे केस की दिशा तय कर सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि आगे की कानूनी कार्रवाई इसी पर निर्भर करेगी। अदालत पहले ही आरोप तय करने की प्रक्रिया पूरी कर चुकी है और अब ट्रायल से पहले का ये अहम फैसला सबकी निगाहों में है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">यह पूरा मामला </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">2004<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>2009<span lang="hi" xml:lang="hi"> के बीच का है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब लालू प्रसाद यादव यूपीए सरकार में रेल मंत्री थे। उन पर आरोप है कि उस समय </span>IRCTC <span lang="hi" xml:lang="hi">के तहत रांची और पुरी में बीएनआर होटलों के संचालन के लिए हुए टेंडर में गंभीर अनियमितताएं की गईं। जांच एजेंसियों का कहना है कि नियमों को दरकिनार कर एक निजी कंपनी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुजाता होटल्स प्राइवेट लिमिटेड को ये टेंडर दिया गया और इसके बदले में लालू परिवार को पटना में बेशकीमती जमीन मिली।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सीबीआई और ईडी की जांच में यह भी सामने आया है कि यह जमीन डिलाइट मार्केटिंग लिमिटेड से लारा प्रोजेक्ट्स के नाम पर सिर्फ </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">65<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख रुपये में ट्रांसफर की गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि इसकी बाजार कीमत लगभग </span>94<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ रुपये और सर्कल रेट करीब </span>32<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ रुपये बताई गई है। जांच एजेंसियों का कहना है कि ये लेन-देन सीधे सत्ता के दुरुपयोग की ओर इशारा करता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कोर्ट ने पहले की सुनवाई में यह भी कहा था कि टेंडर प्रक्रिया में हस्तक्षेप के काफी सबूत सामने आए हैं और इससे कथित तौर पर लालू परिवार को आर्थिक लाभ हुआ। इसी आधार पर आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दी गई थी। ईडी ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी है और इसे मनी लॉन्ड्रिंग का गंभीर मामला बताया है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 18:06:11 +0530</pubDate>
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