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                <title>Fuel News - दैनिक जागरण</title>
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                <title>पेट्रोल-डीजल फिर हो सकता है महंगा, तेल कंपनियों के बढ़ते घाटे ने बढ़ाई चिंता</title>
                                    <description><![CDATA[कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और बढ़ती अंडर-रिकवरी के बीच पेट्रोल-डीजल में 5 रुपए प्रति लीटर तक और बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/6a23e695a8fb5/article-55103"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/petrol-price-hike.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ती दिखाई दे रही है। हाल ही में ईंधन की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के बाद अब यह आशंका जताई जा रही है कि आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल के दामों में 5 रुपए प्रति लीटर तक की अतिरिक्त बढ़ोतरी हो सकती है। आर्थिक विश्लेषण करने वाली एजेंसियों के आकलन के अनुसार सरकारी तेल विपणन कंपनियां लगातार बढ़ती लागत और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण भारी वित्तीय दबाव का सामना कर रही हैं। ऐसे में कीमतों में और वृद्धि की संभावना से आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">जानकारों के मुताबिक मई महीने के दूसरे पखवाड़े में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 8 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। इसके बावजूद सरकारी तेल कंपनियों को राहत नहीं मिली है। रिपोर्टों के अनुसार पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर कंपनियां अभी भी लागत से कम कीमत वसूल रही हैं, जिससे उन्हें रोजाना सैकड़ों करोड़ रुपए का घाटा उठाना पड़ रहा है। यही वजह है कि कीमतों में एक और बढ़ोतरी की चर्चा तेज हो गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों ने तेल बाजार को प्रभावित किया है। इसका सीधा असर भारत जैसी तेल आयातक अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है। देश की अधिकांश पेट्रोलियम जरूरतें आयात पर निर्भर हैं, इसलिए वैश्विक कीमतों में बदलाव का असर घरेलू बाजार पर भी दिखाई देता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">आर्थिक एजेंसियों के विश्लेषण के अनुसार हाल में हुई मूल्य वृद्धि के बावजूद तेल कंपनियों को पेट्रोल और डीजल पर प्रति लीटर कई रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है। यदि इस स्थिति को संतुलित करना है तो कंपनियों को खुदरा कीमतों में और बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। अनुमान यह भी लगाया जा रहा है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें इसी स्तर पर बनी रहीं तो कुल बढ़ोतरी 10 रुपए प्रति लीटर तक भी पहुंच सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">ईंधन की कीमतों में संभावित वृद्धि का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा। इसका व्यापक प्रभाव पूरे आर्थिक तंत्र पर पड़ सकता है। परिवहन लागत बढ़ने से वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर दबाव बढ़ेगा। सड़क परिवहन भारत की आपूर्ति श्रृंखला की रीढ़ माना जाता है। देश में अधिकांश माल ढुलाई सड़क मार्ग से होती है और परिवहन लागत का बड़ा हिस्सा ईंधन पर खर्च होता है। ऐसे में डीजल महंगा होने का असर खाद्य पदार्थों से लेकर रोजमर्रा की वस्तुओं तक पर दिखाई दे सकता है। विशेष रूप से दूध, फल, सब्जियां, दालें, मसाले, चाय, कॉफी, अंडे, मांस और मछली जैसे उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। इन वस्तुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में परिवहन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जब ईंधन महंगा होता है तो उसका अतिरिक्त खर्च अंततः उपभोक्ताओं तक पहुंच जाता है। यही कारण है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बदलाव को महंगाई से सीधे जोड़कर देखा जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उद्योग जगत पर भी इसका असर पड़ सकता है। विनिर्माण क्षेत्र की कंपनियों को पहले ही कच्चे माल की बढ़ती लागत का सामना करना पड़ रहा है। यदि परिवहन खर्च भी बढ़ता है तो उत्पादन लागत और अधिक बढ़ सकती है। इससे कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ेगा और कई मामलों में उत्पादों की कीमतें भी बढ़ानी पड़ सकती हैं। आर्थिक विशेषज्ञ इसे दोहरा झटका बता रहे हैं, क्योंकि उद्योगों को उत्पादन और वितरण दोनों स्तरों पर अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है। उधर, सरकार और तेल कंपनियों के सामने संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी बनी हुई है। एक तरफ कंपनियों के वित्तीय नुकसान को कम करना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर बढ़ती महंगाई और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले बोझ को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि ईंधन मूल्य निर्धारण को लेकर आने वाले दिनों में चर्चा और तेज होने की संभावना है।</p>
<p class="isSelectedEnd">वर्तमान वित्तीय वर्ष के शुरुआती महीनों में कच्चे तेल की औसत कीमतें अनुमान से काफी ऊपर बनी हुई हैं। यदि वैश्विक परिस्थितियों में जल्द सुधार नहीं होता है तो घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। फिलहाल आम लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार और तेल कंपनियां आगे क्या फैसला लेती हैं और संभावित मूल्य वृद्धि को किस तरह संतुलित किया जाता है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी केवल ईंधन का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था, महंगाई दर, परिवहन व्यवस्था और आम नागरिकों के मासिक बजट से भी जुड़ा हुआ विषय है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 15:38:08 +0530</pubDate>
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                <title>पेट्रोल-डीजल फिर हुआ महंगा, 10 दिन में तीसरी बढ़ोतरी से बढ़ी टेंशन</title>
                                    <description><![CDATA[पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी हुई। दिल्ली में पेट्रोल 99.51 और डीजल 92.49 रुपये प्रति लीटर पहुंचा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/petrol-and-diesel-became-expensive-again-third-increase-in-10/article-54017"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/petrol-and-diesel-prices-today.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><strong>Petrol and Diesel Prices Today:</strong> देश में एक बार फिर पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा दिए गए हैं। शनिवार को जारी नई दरों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेट्रोल की कीमत </span>87<span lang="hi" xml:lang="hi"> पैसे प्रति लीटर और डीजल की कीमत </span>91<span lang="hi" xml:lang="hi"> पैसे प्रति लीटर बढ़ी है। पिछले </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिनों के अंदर यह तीसरी बार है जब ईंधन के दामों में इजाफा हुआ है। लगातार बढ़ती कीमतों का सीधा असर अब आम लोगों पर पड़ने लगा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर उन लोगों पर जो रोजाना वाहन का इस्तेमाल करते हैं और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में इससे चिंताएं बढ़ गई हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">नई दरों के लागू होने के बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमत </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">99.51<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि डीजल </span>92.49<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। इससे पहले </span>15<span lang="hi" xml:lang="hi"> मई को पेट्रोल और डीजल दोनों के दामों में </span>3-3<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये की बढ़ोतरी हुई थी और इसके बाद </span>19<span lang="hi" xml:lang="hi"> मई को भी दाम बढ़ाए गए थे। अब ताजा बढ़ोतरी के साथ देखते हैं तो पिछले </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमत में लगभग </span>5<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये का इजाफा हो चुका है। कई शहरों में इसका असर ऑटो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टैक्सी और मालभाड़े पर भी धीरे-धीरे देखने को मिल रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से ईंधन बचाने की अपील की थी। इसके बाद कई राज्यों के मुख्यमंत्री</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">मंत्री और बड़े नेता अपने काफिलों को छोटा करने लगे थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे सरकार ने ईंधन बचत का संदेश बताया। खुद प्रधानमंत्री मोदी के काफिले में भी गाड़ियों की संख्या कम की गई थी। इस दौरान कई जगहों से पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारों और ईंधन खत्म होने की खबरें भी आई थीं। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है और लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की गई थी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर दबाव बना हुआ है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के कारण वैश्विक बाजार पर भी असर पड़ रहा है। इस बीच खबर आई थी कि भारत ने मई महीने में सस्ता कच्चा तेल खरीदने की मात्रा बढ़ाई है। जानकारों का मानना है कि अगर आगे भी कम कीमत पर कच्चा तेल खरीदने का सिलसिला जारी रहता है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो भविष्य में पेट्रोल और डीजल के दामों पर दबाव कम हो सकता है। लेकिन फिलहाल बाजार की स्थिति को देखते हुए तुरंत राहत मिलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 11:25:40 +0530</pubDate>
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