<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.dainikjagranmpcg.com/indian-economy/tag-1475" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>दैनिक जागरण RSS Feed Generator</generator>
                <title>Indian Economy - दैनिक जागरण</title>
                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/tag/1475/rss</link>
                <description>Indian Economy RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>शेयर बाजार में शानदार तेजी: सेंसेक्स 828 अंक उछला, निफ्टी 24,200 के पार; बैंकिंग और रियल्टी शेयरों ने भरी उड़ान</title>
                                    <description><![CDATA[टीसीएस के बेहतर तिमाही नतीजों और मजबूत निवेशक धारणा से बाजार में लौटी रौनक, बैंक, रियल्टी और आईटी शेयरों में जोरदार खरीदारी देखने को मिली।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/great-rise-in-the-stock-market-sensex-jumped-828-points/article-58422"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/today-sensex.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया। घरेलू और वैश्विक सकारात्मक संकेतों के बीच बाजार में जोरदार खरीदारी देखने को मिली, जिससे प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों मजबूती के साथ बंद हुए। बैंकिंग, रियल्टी और आईटी सेक्टर के शेयरों में आई तेजी ने बाजार को नई ऊंचाई तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। कारोबार के अंत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 828 अंक यानी 1.08 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,569 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 50 भी 244 अंक यानी 1.02 प्रतिशत चढ़कर 24,206 के स्तर पर पहुंच गया। दिनभर के कारोबार के दौरान निवेशकों का रुझान खासतौर पर बैंकिंग और रियल्टी सेक्टर की कंपनियों की ओर रहा। इन दोनों सेक्टरों में सबसे अधिक खरीदारी दर्ज की गई। इसके अलावा आईटी और चुनिंदा वित्तीय कंपनियों के शेयरों में भी अच्छी तेजी देखने को मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत कॉर्पोरेट नतीजों और वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों ने घरेलू बाजार की धारणा को मजबूत किया।</p>
<p style="text-align:justify;">आज के कारोबार में सबसे अधिक चर्चा देश की दिग्गज आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के तिमाही नतीजों की रही। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहने के बाद कंपनी के शेयर में करीब 0.90 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 2,068 रुपये पर बंद हुआ। हालांकि पिछले छह महीनों में टीसीएस के शेयर में लगभग 30 प्रतिशत और एक वर्ष में करीब 40 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली थी, लेकिन ताजा नतीजों ने निवेशकों का भरोसा एक बार फिर मजबूत किया। टीसीएस ने पहली तिमाही में शानदार वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया। कंपनी का शुद्ध लाभ (नेट प्रॉफिट) पिछले वर्ष की समान तिमाही के 12,760 करोड़ रुपये की तुलना में करीब 5 प्रतिशत बढ़कर 13,349 करोड़ रुपये हो गया। वहीं परिचालन से प्राप्त कुल राजस्व (रेवेन्यू) में भी सालाना आधार पर लगभग 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई और यह बढ़कर 72,275 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। मजबूत आय और कारोबार में वृद्धि ने निवेशकों को सकारात्मक संकेत दिए। कंपनी के निदेशक मंडल ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए प्रति शेयर 12 रुपये के अंतरिम लाभांश (इंटरिम डिविडेंड) को भी मंजूरी दी है। इसके लिए 15 जुलाई को रिकॉर्ड डेट निर्धारित की गई है। डिविडेंड की घोषणा के बाद निवेशकों की दिलचस्पी कंपनी के शेयरों में और बढ़ गई। घरेलू बाजार को मजबूती मिलने के पीछे वैश्विक बाजारों का सकारात्मक प्रदर्शन भी एक बड़ा कारण रहा। एशियाई बाजारों में शुक्रवार को अच्छी तेजी दर्ज की गई। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 2.52 प्रतिशत चढ़ा, जबकि जापान का निक्केई 1.20 प्रतिशत मजबूत हुआ। हांगकांग के हैंगसेंग इंडेक्स में भी करीब 0.60 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली। एशियाई बाजारों की मजबूती का सीधा असर भारतीय बाजारों पर भी दिखाई दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले गुरुवार को अमेरिकी शेयर बाजार भी बढ़त के साथ बंद हुए थे। डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में 0.27 प्रतिशत, एसएंडपी 500 में 0.81 प्रतिशत और टेक्नोलॉजी शेयरों से जुड़े नैस्डैक इंडेक्स में 1.30 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई थी। अमेरिकी बाजारों में आई तेजी ने वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ाया, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी सकारात्मक रूप से दिखाई दिया। हालांकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने गुरुवार को भारतीय बाजार से 533 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने करीब 2,058 करोड़ रुपये के शेयर खरीदकर बाजार को मजबूती प्रदान की। पिछले सात दिनों में भी डीआईआई लगातार खरीदारी करते रहे हैं, जिससे बाजार में स्थिरता बनी हुई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी विदेशी निवेशकों की बिकवाली के असर को काफी हद तक संतुलित कर रही है। गौरतलब है कि इससे पहले गुरुवार को सेंसेक्स 238 अंकों की बढ़त के साथ 76,742 के स्तर पर बंद हुआ था। शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन आई तेज बढ़त ने निवेशकों का भरोसा और मजबूत किया है। बाजार जानकारों का मानना है कि यदि सकारात्मक माहौल बना रहा तो आने वाले सत्रों में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों नए रिकॉर्ड स्तर की ओर बढ़ सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/great-rise-in-the-stock-market-sensex-jumped-828-points/article-58422</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/great-rise-in-the-stock-market-sensex-jumped-828-points/article-58422</guid>
                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 17:11:52 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/today-sensex.jpg"                         length="119575"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सेंसेक्स 200 अंक चढ़ा, IT और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी से बाजार मजबूत</title>
                                    <description><![CDATA[निफ्टी भी 24,500 के करीब पहुंचा, घरेलू बाजार में सकारात्मक रुख; एशियाई बाजारों में दबाव के बीच भारतीय सूचकांकों ने दिखाई मजबूती।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/sensex-rises-200-points-and-market-strengthens-due-to-buying/article-58052"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/sensex-today-(6).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने सकारात्मक शुरुआत की। मंगलवार को शुरुआती कारोबार में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स करीब 200 अंकों की बढ़त के साथ 78,500 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी लगभग 50 अंक मजबूत होकर 24,500 के आसपास पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में सबसे ज्यादा खरीदारी आईटी और बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में देखने को मिली। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू निवेशकों की लगातार खरीदारी और कुछ प्रमुख कंपनियों में मजबूत निवेशकों की दिलचस्पी से बाजार को सहारा मिल रहा है। हालांकि वैश्विक बाजारों से मिले मिश्रित संकेतों के बीच निवेशक अब आगे आने वाले आर्थिक आंकड़ों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर भी नजर बनाए हुए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बाजार खुलने के साथ ही कई बड़ी आईटी और बैंकिंग कंपनियों के शेयरों में अच्छी तेजी दर्ज की गई। शुरुआती सत्र में निवेशकों ने इन क्षेत्रों में ज्यादा रुचि दिखाई, जिससे दोनों प्रमुख सूचकांकों को मजबूती मिली। जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में पहली तिमाही के वित्तीय नतीजों का सीजन शुरू होने वाला है। ऐसे में निवेशकों की नजर खास तौर पर आईटी, बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और ऑटोमोबाइल कंपनियों के प्रदर्शन पर बनी हुई है। यदि कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहते हैं तो बाजार में तेजी का यह रुख आगे भी जारी रह सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हालांकि वैश्विक बाजारों का माहौल पूरी तरह सकारात्मक नहीं रहा। एशियाई शेयर बाजारों में मंगलवार को दबाव देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक सबसे ज्यादा गिरावट के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। जापान का निक्केई सूचकांक भी कमजोरी के साथ खुला, जबकि हांगकांग के हैंगसेंग इंडेक्स में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में जारी उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती और निवेशकों का भरोसा भारतीय बाजार को वैश्विक दबाव से काफी हद तक बचाए हुए है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर अमेरिकी शेयर बाजारों से सकारात्मक संकेत मिले थे। पिछले कारोबारी सत्र में डाउ जोंस, नैस्डैक और एसएंडपी 500 तीनों प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए। विशेष रूप से तकनीकी कंपनियों में खरीदारी के चलते नैस्डैक में एक प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई। अमेरिकी बाजारों की मजबूती का असर भारतीय निवेशकों के मनोबल पर भी देखने को मिला। जब वैश्विक स्तर पर जोखिम लेने की धारणा मजबूत रहती है तो उसका सकारात्मक प्रभाव उभरते बाजारों, खासकर भारत जैसे देशों पर भी दिखाई देता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की सक्रिय खरीदारी भी बाजार को मजबूती देने वाले प्रमुख कारणों में शामिल रही। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पिछले कारोबारी दिन घरेलू संस्थागत निवेशकों ने करीब 3,792 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। वहीं विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की ओर से भी सीमित स्तर पर सकारात्मक निवेश दर्ज किया गया। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि पिछले कुछ समय से घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी भारतीय बाजार की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है। इससे विदेशी निवेश में उतार-चढ़ाव का असर पहले की तुलना में कम दिखाई दे रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सोमवार के कारोबारी सत्र में भी शेयर बाजार में अच्छी तेजी देखने को मिली थी। उस दिन सेंसेक्स 521 अंक चढ़कर 78,285 के स्तर पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 160 अंक की बढ़त के साथ 24,430 पर पहुंच गया था। लगातार दूसरे दिन बाजार में बनी मजबूती यह संकेत देती है कि निवेशकों का भरोसा फिलहाल कायम है। हालांकि विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि मौजूदा स्तरों पर सोच-समझकर निवेश करें और केवल मजबूत बुनियादी आधार वाली कंपनियों में ही निवेश को प्राथमिकता दें।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आर्थिक मोर्चे पर भी आने वाले दिनों में कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम बाजार की दिशा तय कर सकते हैं। निवेशकों की नजर महंगाई के आंकड़ों, केंद्रीय बैंक की नीति से जुड़े संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक घटनाओं पर बनी रहेगी। इसके अलावा कंपनियों के तिमाही परिणाम भी बाजार में सेक्टर आधारित उतार-चढ़ाव ला सकते हैं। यदि आईटी और बैंकिंग कंपनियों के नतीजे मजबूत आते हैं तो इन क्षेत्रों में निवेशकों की दिलचस्पी और बढ़ सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/sensex-rises-200-points-and-market-strengthens-due-to-buying/article-58052</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/sensex-rises-200-points-and-market-strengthens-due-to-buying/article-58052</guid>
                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 12:00:27 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/sensex-today-%286%29.jpg"                         length="160043"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सेंसेक्स में 200 अंक की गिरावट, आईटी और ऑटो शेयरों में बिकवाली से बाजार दबाव में</title>
                                    <description><![CDATA[सप्ताह के पहले कारोबारी दिन घरेलू शेयर बाजार कमजोर शुरुआत के साथ कारोबार करता दिखा। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में रहे, जबकि आईटी और ऑटो सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/sensex-falls-by-200-points-market-under-pressure-due-to/article-57374"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/nifty-today.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्स करीब 200 अंक तक फिसलकर 76,550 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी करीब 50 अंक की गिरावट के साथ 23,900 के स्तर पर बना रहा। बाजार खुलते ही निवेशकों ने मुनाफावसूली का रुख अपनाया, जिसका असर प्रमुख सूचकांकों के साथ कई बड़े सेक्टरों पर भी दिखाई दिया। खास तौर पर आईटी और ऑटो कंपनियों के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली दर्ज की गई, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया। कारोबार की शुरुआत में निवेशकों की नजर घरेलू और वैश्विक संकेतों पर रही। पिछले कुछ दिनों से बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव का माहौल बना हुआ है और निवेशक किसी भी बड़े निवेश से पहले सतर्क नजर आ रहे हैं। शुरुआती कारोबार में कई दिग्गज आईटी कंपनियों के शेयर लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। इसके अलावा ऑटो सेक्टर के शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के दिनों में जिन शेयरों में अच्छी तेजी आई थी, उनमें निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे प्रमुख सूचकांक दबाव में आ गए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हालांकि सभी सेक्टरों में एक जैसी स्थिति नहीं रही। कुछ चुनिंदा शेयरों में खरीदारी भी देखने को मिली, लेकिन उसका असर बाजार की समग्र दिशा बदलने के लिए पर्याप्त नहीं था। बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में सीमित दायरे में कारोबार होता रहा, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी मिश्रित रुख देखने को मिला। निवेशकों का फोकस फिलहाल आगामी आर्थिक आंकड़ों, कंपनियों के तिमाही नतीजों और वैश्विक बाजारों से मिलने वाले संकेतों पर बना हुआ है। वैश्विक बाजारों की बात करें तो एशियाई शेयर बाजारों में मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। निक्केई में करीब 0.93 प्रतिशत और कोस्पी में लगभग 0.69 प्रतिशत की मजबूती दर्ज की गई। दूसरी ओर हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स कमजोरी के साथ कारोबार करता नजर आया और इसमें करीब 0.93 प्रतिशत की गिरावट रही। एशियाई बाजारों के इस मिश्रित रुख का असर भी भारतीय बाजार की शुरुआत पर देखने को मिला, जहां निवेशकों ने सतर्कता बरतना बेहतर समझा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिकी शेयर बाजार से हालांकि सकारात्मक संकेत मिले थे। पिछले कारोबारी सत्र में डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज, नैस्डैक और एसएंडपी 500 तीनों प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए। नैस्डैक में दो प्रतिशत से अधिक की तेजी रही, जबकि डाउ जोन्स और एसएंडपी 500 में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई। अमेरिकी बाजारों की मजबूती के बावजूद घरेलू बाजार में उसका सकारात्मक असर सीमित रहा। इसकी एक बड़ी वजह घरेलू स्तर पर जारी मुनाफावसूली और विदेशी निवेशकों की बिकवाली मानी जा रही है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रही हैं। हाल के सात कारोबारी दिनों में विदेशी निवेशकों ने करीब 2,810 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की है। वहीं पिछले 30 दिनों के दौरान भी विदेशी निवेशकों की ओर से 46 हजार करोड़ रुपये से अधिक की निकासी दर्ज की गई है। इसके उलट घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) लगातार खरीदारी कर रहे हैं। पिछले सात दिनों में उन्होंने 12 हजार करोड़ रुपये से अधिक और बीते एक महीने में लगभग 79 हजार करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं। घरेलू निवेशकों की यह खरीदारी बाजार को बड़े स्तर पर गिरने से रोकने में सहायक साबित हो रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पिछले कारोबारी सत्र में भी बाजार दबाव में रहा था। सेंसेक्स 372 अंक की गिरावट के साथ 76,728 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 110 अंक टूटकर 23,946 के स्तर पर आ गया था। लगातार दूसरे कारोबारी दिन बाजार में कमजोरी बने रहने से निवेशकों के बीच सतर्कता बढ़ी है। यह गिरावट व्यापक घबराहट की नहीं बल्कि सामान्य उतार-चढ़ाव का हिस्सा है। निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए और मजबूत कंपनियों में लंबी अवधि के नजरिए से निवेश बनाए रखना चाहिए। आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों, डॉलर की चाल, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कंपनियों के पहली तिमाही के वित्तीय नतीजों का असर बाजार की दिशा पर साफ दिखाई देगा। यदि विदेशी निवेशकों की बिकवाली कम होती है और घरेलू निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है। वहीं किसी भी बड़े वैश्विक घटनाक्रम या आर्थिक आंकड़े का असर भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/sensex-falls-by-200-points-market-under-pressure-due-to/article-57374</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/sensex-falls-by-200-points-market-under-pressure-due-to/article-57374</guid>
                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 11:20:52 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/nifty-today.jpg"                         length="189515"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शेयर बाजार में जोरदार वापसी, सेंसेक्स 500 अंक चढ़ा; निफ्टी 24,150 के पार</title>
                                    <description><![CDATA[सप्ताह के पहले कारोबारी दिन बाजार में खरीदारी का माहौल दिखा। IT और ऑयल एंड गैस शेयरों में तेजी से सेंसेक्स 77,300 के करीब पहुंचा, जबकि निफ्टी में भी 150 अंकों की बढ़त दर्ज की गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/6a38cae5b4995/article-56611"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/sensex-today-(4).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार ने मजबूत शुरुआत की। पिछले कारोबारी सत्र में आई भारी गिरावट के बाद निवेशकों की वापसी देखने को मिली और बाजार में चौतरफा खरीदारी का माहौल बना रहा। शुरुआती कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 500 अंक की तेजी के साथ 77,300 के स्तर के आसपास पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी लगभग 150 अंक मजबूत होकर 24,150 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। बाजार में सबसे ज्यादा खरीदारी सूचना प्रौद्योगिकी यानी IT और ऑयल एंड गैस सेक्टर के शेयरों में देखने को मिली।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत और विदेशी निवेशकों की खरीदारी ने घरेलू बाजार को सहारा दिया है। पिछले कुछ दिनों से बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ था, लेकिन सोमवार को निवेशकों का भरोसा लौटता दिखाई दिया। बड़ी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी बढ़ने से प्रमुख सूचकांकों को मजबूती मिली। कारोबार के शुरुआती घंटों में कई दिग्गज IT कंपनियों के शेयर हरे निशान में कारोबार करते नजर आए। इसके अलावा तेल और गैस क्षेत्र की कंपनियों में भी निवेशकों की रुचि बढ़ी। माना जा रहा है कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजार में स्थिरता और घरेलू मांग के सकारात्मक संकेतों ने इन शेयरों को समर्थन दिया है। बैंकिंग और ऑटो सेक्टर में भी सीमित लेकिन सकारात्मक बढ़त दर्ज की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एशियाई बाजारों की बात करें तो सोमवार को वहां मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। जापान का निक्केई सूचकांक मजबूत बढ़त के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी भी हरे निशान में रहा और निवेशकों का उत्साह देखने को मिला। हालांकि हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स दबाव में रहा और उसमें गिरावट दर्ज की गई। एशियाई बाजारों के इस मिश्रित प्रदर्शन के बावजूद भारतीय बाजार ने मजबूती दिखाई, जिसे घरेलू निवेशकों के भरोसे का संकेत माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वैश्विक बाजारों से भी भारतीय निवेशकों को सकारात्मक संकेत मिले हैं। पिछले कारोबारी सत्र में अमेरिकी बाजार बढ़त के साथ बंद हुए थे। डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में मामूली तेजी दर्ज की गई, जबकि नैस्डैक और एसएंडपी 500 में मजबूत उछाल देखने को मिला। तकनीकी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी बढ़ने से अमेरिकी बाजारों को सहारा मिला था। इसका असर सोमवार को एशियाई और भारतीय बाजारों पर भी देखने को मिला।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बाजार विशेषज्ञों के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। शुक्रवार को एफआईआई ने भारतीय शेयर बाजार में करीब 4,859 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की थी। यह आंकड़ा निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। हालांकि पिछले 30 दिनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो विदेशी निवेशकों की कुल निकासी अभी भी अधिक बनी हुई है, लेकिन हाल के दिनों में उनकी खरीदारी ने बाजार को राहत दी है। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी डीआईआई की भूमिका भी महत्वपूर्ण बनी हुई है। पिछले कुछ महीनों में घरेलू निवेशकों ने बाजार में लगातार निवेश किया है, जिससे वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय बाजार को स्थिरता मिली है। म्यूचुअल फंड और बीमा कंपनियों की ओर से लगातार निवेश बाजार के लिए मजबूत आधार तैयार कर रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सोमवार की तेजी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पिछले सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। शुक्रवार को सेंसेक्स करीब 607 अंक टूटकर 76,802 के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी भी 154 अंक गिरकर 24,013 के स्तर पर आ गया था। उस गिरावट के बाद निवेशकों में कुछ चिंता देखी जा रही थी, लेकिन सप्ताह की शुरुआत में आई तेजी ने बाजार की धारणा को बेहतर किया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर कई महत्वपूर्ण आर्थिक संकेतकों और वैश्विक घटनाक्रमों पर बनी रहेगी। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियां, विदेशी निवेशकों का रुख और मानसून की प्रगति जैसे कारक बाजार की दिशा तय कर सकते हैं। इसके अलावा कंपनियों के तिमाही नतीजों को लेकर भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ने लगी है। छोटे और मझोले शेयरों में भी सोमवार को सकारात्मक रुझान देखने को मिला। कई सेक्टरों में खरीदारी का दायरा बढ़ा, जिससे व्यापक बाजार को मजबूती मिली। हालांकि विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि वे केवल तेजी देखकर निवेश के फैसले न लें और कंपनियों की बुनियादी स्थिति का मूल्यांकन जरूर करें।  सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने मजबूती के साथ शुरुआत की है। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में आई बढ़त ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। विदेशी निवेशकों की खरीदारी, वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत और चुनिंदा सेक्टरों में मजबूत प्रदर्शन के कारण बाजार में उत्साह का माहौल बना हुआ है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/6a38cae5b4995/article-56611</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/6a38cae5b4995/article-56611</guid>
                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 11:38:51 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/sensex-today-%284%29.jpg"                         length="165188"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जियो प्लेटफॉर्म्स के सबसे बड़े IPO की तैयारी, 12.5 लाख करोड़ वैल्यूएशन का अनुमान</title>
                                    <description><![CDATA[रिलायंस समर्थित जियो ने सेबी के पास DRHP दाखिल किया, भारत के सबसे बड़े IPO की दिशा में ऐतिहासिक कदम, 27 करोड़ नए शेयर जारी होंगे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/preparation-for-the-biggest-ipo-of-jio-platforms-estimated-valuation/article-56438"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/jio-ipo-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारत के पूंजी बाजारों में एक ऐतिहासिक मोड़ लेते हुए रिलायंस इंडस्ट्रीज समर्थित जियो प्लेटफॉर्म्स ने शुक्रवार को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल कर दिया है। इस कदम के साथ देश के अब तक के सबसे बड़े प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) की नींव रखी गई है, जिसकी अनुमानित वैल्यूएशन करीब 12.5 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है। जियो प्लेटफॉर्म्स इस आईपीओ के तहत लगभग 27 करोड़ नए शेयर जारी करेगी और इससे करीब 36,000 करोड़ रुपये तक की राशि जुटाने की संभावना है। यह पूरी फंडरेजिंग नई इक्विटी जारी करके की जाएगी और इसमें मौजूदा निवेशकों द्वारा किसी तरह का ऑफर फॉर सेल शामिल नहीं होगा। इसका मतलब है कि मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेचकर बाहर नहीं निकलेंगे, बल्कि कंपनी की ग्रोथ में बने रहेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कंपनी द्वारा जुटाई गई इस राशि का उपयोग मुख्य रूप से मौजूदा कर्ज को कम करने और सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों को पूरा करने में किया जाएगा। DRHP के अनुसार करीब 27,500 करोड़ रुपये के कर्ज को आंशिक या पूर्ण रूप से चुकाने की योजना है। यह कदम कंपनी के बैलेंस शीट को मजबूत करने और भविष्य की ग्रोथ को गति देने के उद्देश्य से उठाया गया है।इस IPO को भारतीय कैपिटल मार्केट्स के लिए एक बड़ी परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। हाल के महीनों में वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और बाजार की अस्थिरता के कारण निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई थी, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह मेगा आईपीओ बाजार में नई ऊर्जा ला सकता है। दूसरी ओर, NSE द्वारा भी अपना DRHP दाखिल करने की तैयारी से आने वाले महीनों में IPO मार्केट में तेज गतिविधि देखने को मिल सकती है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने इस घोषणा को एक भावनात्मक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल रिलायंस परिवार बल्कि करोड़ों शेयरधारकों के लिए भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उनके बच्चे आकाश, ईशा और अनंत जियो IPO प्रक्रिया का नेतृत्व कर रहे हैं और भविष्य में कंपनी के नए विकास अवसरों को आगे बढ़ाएंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रिलायंस इंडस्ट्रीज ने 2020 में वैश्विक निवेशकों से बड़ी पूंजी जुटाकर जियो प्लेटफॉर्म्स में अपनी हिस्सेदारी लगभग 33 प्रतिशत कम की थी। उस दौर में Meta, Google, KKR, Silver Lake, Vista Equity Partners और कई sovereign funds जैसे Abu Dhabi Investment Authority ने जियो में निवेश किया था। यह निवेश भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था पर वैश्विक भरोसे का संकेत माना गया था। आज जियो प्लेटफॉर्म्स केवल एक टेलीकॉम कंपनी नहीं रह गई है, बल्कि यह AI, क्लाउड सेवाओं, एंटरप्राइज नेटवर्क और डिजिटल एप्लिकेशन जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार कर चुकी है। भारत की 1.4 अरब की जनसंख्या, सस्ती इंटरनेट दरें और तेजी से बढ़ती डिजिटल पहुंच ने कंपनी को बड़े पैमाने पर विकास का अवसर दिया है। वित्तीय वर्ष 2026 में जियो प्लेटफॉर्म्स ने 1.47 लाख करोड़ रुपये का राजस्व और लगभग 30,000 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया है, जो इसकी मजबूत वित्तीय स्थिति को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस IPO से कंपनी की वैश्विक स्थिति और मजबूत होगी और यह भारत को टेक्नोलॉजी कंपनियों के वैश्विक हब के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा। जियो प्लेटफॉर्म्स का यह प्रस्तावित IPO भारतीय बाजार के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/preparation-for-the-biggest-ipo-of-jio-platforms-estimated-valuation/article-56438</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/preparation-for-the-biggest-ipo-of-jio-platforms-estimated-valuation/article-56438</guid>
                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 11:24:11 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/jio-ipo-2026.jpg"                         length="142790"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सोने के आयात में 70% गिरावट, शुल्क वृद्धि का बड़ा असर</title>
                                    <description><![CDATA[पीएम मोदी की अपील और बढ़े सीमा शुल्क के बाद आयात मात्रा में भारी कमी, हालांकि मूल्य में बढ़ोतरी जारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/70-decline-in-gold-imports-big-impact-of-duty-increase/article-56363"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/gold-import-india-decline.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देश में सोने के आयात को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सरकार की नीतियों, आयात शुल्क में वृद्धि और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से की गई सोना कम खरीदने की अपील का सीधा असर अब आंकड़ों में साफ नजर आने लगा है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, एक महीने के भीतर भारत में सोने का आयात मात्रा के हिसाब से करीब 70 प्रतिशत तक घट गया है। पहले जहां आयात 75 से 100 टन के बीच था, अब यह गिरकर लगभग 25 से 30 टन तक पहुंच गया है। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब सरकार ने 13 मई से सोने पर सीमा शुल्क को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था। अधिकारियों के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य सोने के आयात पर निर्भरता कम करना और चालू खाते के घाटे को नियंत्रित करना था। इसके साथ ही प्रधानमंत्री की ओर से लोगों से अपील की गई थी कि एक वर्ष तक सोने की खरीद में संयम बरता जाए, जिसका असर भी बाजार में देखने को मिल रहा है। हालांकि दिलचस्प बात यह है कि आयात मात्रा में भारी गिरावट के बावजूद सोने के कुल आयात मूल्य में वृद्धि दर्ज की गई है। मई महीने में सोने का आयात सालाना आधार पर 34 प्रतिशत बढ़कर 3.41 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसका प्रमुख कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में तेजी बताई जा रही है। यानी कम मात्रा में आयात होने के बावजूद कीमतों की बढ़ोतरी ने कुल मूल्य को ऊपर बनाए रखा है।</p>
<p style="text-align:justify;">अप्रैल और मई के दौरान भारत का कुल सोने का आयात 60 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 9.04 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने रिकॉर्ड स्तर पर 71.98 अरब डॉलर मूल्य का सोना आयात किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 24 प्रतिशत अधिक है। हालांकि मात्रा के हिसाब से इसमें 4.76 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और कुल आयात 721.03 टन पर रहा। यह स्पष्ट करता है कि देश में सोने की मांग बनी हुई है, लेकिन महंगे दामों और नीतिगत बदलावों के कारण इसका स्वरूप बदल रहा है। सोने के आयात में यह बदलाव भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सोना देश के कुल आयात का 5 प्रतिशत से अधिक हिस्सा रखता है। आयात में कमी से विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम हो सकता है, लेकिन घरेलू मांग और निवेश व्यवहार पर इसका असर भी देखने को मिलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी बीच चालू वित्त वर्ष 2026-27 में शुद्ध आयकर संग्रह में भी मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 17 जून तक शुद्ध आयकर संग्रह 15 प्रतिशत बढ़कर 5.21 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। इसमें कॉरपोरेट और गैर-कॉरपोरेट दोनों तरह के कर संग्रह शामिल हैं। कॉरपोरेट टैक्स संग्रह में 22 प्रतिशत की मजबूत बढ़ोतरी देखी गई है और यह 2.08 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। वहीं गैर-कॉरपोरेट टैक्स संग्रह 8 प्रतिशत बढ़कर 2.94 लाख करोड़ रुपये हो गया है। यह संकेत देता है कि देश की कर प्रणाली में सुधार और आर्थिक गतिविधियों में तेजी का असर राजस्व पर भी दिखाई दे रहा है। सोने के आयात में आई भारी गिरावट और कर संग्रह में बढ़ोतरी भारतीय अर्थव्यवस्था की बदलती तस्वीर को दर्शाती है। एक तरफ जहां सरकार आयात पर नियंत्रण और राजस्व बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है, वहीं दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय कीमतें और घरेलू मांग स्थिति को संतुलित बनाए हुए हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/70-decline-in-gold-imports-big-impact-of-duty-increase/article-56363</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/70-decline-in-gold-imports-big-impact-of-duty-increase/article-56363</guid>
                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 11:00:27 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/gold-import-india-decline.jpg"                         length="190943"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सेंसेक्स में हल्की गिरावट, IT और मीडिया शेयर दबाव में</title>
                                    <description><![CDATA[निफ्टी भी फिसला, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक बाजारों के मिश्रित संकेतों का असर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/slight-fall-in-sensex-and-media-shares-under-pressure/article-56249"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/nifty-fall-2026.jpg" alt=""></a><br /><div class="qMYqUG_convSearchResultHighlightRoot">
<div>

<div class="text-base my-auto mx-auto pb-10 [--thread-content-margin:var(--thread-content-margin-xs,calc(var(--spacing)*4))] @w-sm/main:[--thread-content-margin:var(--thread-content-margin-sm,calc(var(--spacing)*6))] @w-lg/main:[--thread-content-margin:var(--thread-content-margin-lg,calc(var(--spacing)*16))] px-(--thread-content-margin)">
<div class="[--thread-content-max-width:40rem] @w-lg/main:[--thread-content-max-width:48rem] mx-auto max-w-(--thread-content-max-width) flex-1 group/turn-messages focus-visible:outline-hidden relative flex w-full min-w-0 flex-col agent-turn">
<div class="flex max-w-full flex-col gap-4 grow">
<div class="min-h-8 text-message relative flex w-full flex-col items-end gap-2 text-start break-words whitespace-normal outline-none keyboard-focused:focus-ring [.text-message+&amp;]:mt-1">
<div class="flex w-full flex-col gap-1 empty:hidden">
<div class="markdown prose dark:prose-invert wrap-break-word w-full light markdown-new-styling">
<p style="text-align:justify;">आज यानी 18 जून को घरेलू शेयर बाजार में हल्की कमजोरी देखने को मिली और कारोबार के दौरान बाजार सीमित दायरे में ही घूमता नजर आया। सुबह की शुरुआत से ही निवेशकों में सतर्कता का माहौल था और इसका असर सीधे इंडेक्स पर दिखा। सेंसेक्स करीब 50 अंक की गिरावट के साथ 77,100 के आसपास कारोबार करता रहा, जबकि निफ्टी भी लगभग 20 अंक टूटकर 24,050 के स्तर पर आ गया। पूरे सत्र में बाजार में बड़ी हलचल नहीं दिखी लेकिन IT और मीडिया सेक्टर में लगातार बिकवाली का दबाव बना रहा, जिससे कुल मिलाकर सेंटीमेंट कमजोर रहा। कारोबार के दौरान देखा गया कि शुरुआती मिनटों में बाजार स्थिर था लेकिन जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी। खासकर टेक और मीडिया कंपनियों के शेयरों में दबाव ज्यादा रहा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के दिनों में तेज़ी के बाद निवेशक अब थोड़ा मुनाफा निकाल रहे हैं, जिससे इंडेक्स पर असर पड़ रहा है। इसके साथ ही वैश्विक संकेतों में अनिश्चितता भी बाजार को ऊपर जाने से रोक रही है। कई ब्रोकरेज हाउस का कहना है कि फिलहाल बाजार में “वेट एंड वॉच” की स्थिति बनी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">विदेशी निवेशकों की गतिविधियों ने भी बाजार पर असर डाला है। पिछले कुछ दिनों से FIIs लगातार बिकवाली कर रहे हैं, जिससे बाजार में दबाव बढ़ा है। बीते 7 दिनों में विदेशी निवेशकों ने लगभग 1,530 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की है। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) लगातार खरीदारी कर रहे हैं, जिससे बाजार को कुछ हद तक सपोर्ट मिल रहा है, लेकिन यह सपोर्ट उतना मजबूत नहीं है कि पूरे बाजार को ऊपर खींच सके। यही कारण है कि बाजार बार-बार ऊपर जाने की कोशिश करता है लेकिन फिर सीमित दायरे में लौट आता है। वैश्विक बाजारों की बात करें तो एशियाई बाजारों में आज मिला-जुला रुख देखने को मिला। साउथ कोरिया का कोस्पी इंडेक्स मजबूती के साथ ऊपर रहा और इसमें करीब 1 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई। वहीं जापान का निक्केई इंडेक्स भी मजबूत बढ़त के साथ बंद हुआ। लेकिन दूसरी ओर हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स दबाव में रहा और इसमें करीब 1.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इससे साफ है कि एशियाई बाजारों में भी निवेशकों की धारणा एक जैसी नहीं है और अलग-अलग संकेतों के चलते अस्थिरता बनी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी बाजारों में पिछले कारोबारी सत्र में गिरावट देखने को मिली थी। डाउ जोन्स, नैस्डैक और S&amp;P 500 तीनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए थे। इसका असर आज भारतीय बाजार पर भी दिखा क्योंकि ग्लोबल निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं। ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और वैश्विक आर्थिक सुस्ती की आशंका ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। यही वजह है कि दुनिया भर के बाजारों में अस्थिरता का माहौल बना हुआ है और भारत भी इससे अछूता नहीं है। घरेलू स्तर पर देखें तो पिछले कारोबारी दिन यानी 17 जून को बाजार में तेजी देखने को मिली थी। उस दिन सेंसेक्स 347 अंक की बढ़त के साथ 77,156 पर बंद हुआ था और निफ्टी भी 97 अंक चढ़कर 24,086 पर पहुंचा था। लेकिन एक दिन बाद ही बाजार उस तेजी को कायम नहीं रख सका और हल्की गिरावट में आ गया। यह दिखाता है कि बाजार फिलहाल किसी एक दिशा में मजबूत ट्रेंड नहीं बना पा रहा है। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक विदेशी निवेशकों के रुख, ग्लोबल संकेतों और कॉरपोरेट अर्निंग्स पर निर्भर करेगी। अगर FII की बिकवाली कम होती है और वैश्विक बाजारों में स्थिरता आती है तो बाजार फिर से ऊपर की ओर जा सकता है। लेकिन फिलहाल स्थिति यह है कि बाजार एक सीमित दायरे में फंसा हुआ है और किसी बड़े ट्रिगर का इंतजार कर रहा है। 18 जून का दिन शेयर बाजार के लिए हल्की सुस्ती और सावधानी भरा रहा। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में मामूली गिरावट दर्ज हुई और सेक्टोरल दबाव खासकर IT और मीडिया में देखने को मिला। </p>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>

</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/slight-fall-in-sensex-and-media-shares-under-pressure/article-56249</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/slight-fall-in-sensex-and-media-shares-under-pressure/article-56249</guid>
                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:35:32 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/nifty-fall-2026.jpg"                         length="204609"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद बाजार में जबरदस्त उछाल</title>
                                    <description><![CDATA[वैश्विक रैली और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से सेंसेक्स 1100 अंक उछला, निफ्टी ने भी मजबूत शुरुआत की]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/6a2f910dcfeae/article-55952"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/stock-market-news-india.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">15 जून 2026, सोमवार की सुबह भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद मजबूत शुरुआत लेकर आई। वैश्विक स्तर पर बने सकारात्मक माहौल और कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट का सीधा असर घरेलू बाजारों पर देखने को मिला। सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव का खत्म होना और 107 दिन चले संघर्ष के बाद शांति समझौता माना जा रहा है। इस खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निवेशकों का भरोसा बढ़ा और इसका असर भारतीय इक्विटी बाजार पर भी साफ दिखाई दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सुबह के शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स ने जोरदार छलांग लगाई और 1,112.70 अंकों की बढ़त के साथ 76,648.74 के स्तर तक पहुंच गया। वहीं एनएसई का निफ्टी भी मजबूती के साथ खुला और 335.55 अंकों की तेजी के साथ 23,956.40 पर कारोबार करता देखा गया। शुरुआती मिनटों में ही बाजार में चौतरफा खरीदारी देखने को मिली और लगभग सभी प्रमुख सेक्टर्स हरे निशान में दिखाई दिए। बैंकिंग, आईटी, ऑटो और एनर्जी शेयरों में खास तौर पर मजबूत खरीदारी का रुझान रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिका-ईरान शांति समझौते ने वैश्विक स्तर पर जोखिम की धारणा को कम किया है। लंबे समय से चले आ रहे तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई थी, लेकिन अब स्थिति में सुधार के संकेत मिलने से निवेशकों का भरोसा वापस लौटा है। इसका असर सीधे तौर पर एशियाई बाजारों पर पड़ा और भारतीय बाजार ने भी उसी रफ्तार को पकड़ लिया। साथ ही, कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए राहत की बड़ी खबर मानी जा रही है, जिससे महंगाई और चालू खाते के घाटे पर दबाव कम होने की उम्मीद है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विदेशी बाजारों की बात करें तो एशिया के प्रमुख सूचकांक भी मजबूत बढ़त के साथ खुले। जापान, दक्षिण कोरिया और हांगकांग के बाजारों में सकारात्मक रुझान देखा गया। अमेरिकी फ्यूचर्स में भी तेजी का माहौल रहा, जिससे वैश्विक निवेशकों की धारणा और मजबूत हुई। इस वैश्विक रैली का सीधा फायदा भारतीय बाजारों को मिला और निवेशकों ने शुरुआती कारोबार में आक्रामक खरीदारी की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घरेलू स्तर पर भी बाजार में सकारात्मक माहौल बना हुआ है। निवेशकों का रुझान खासकर लार्जकैप शेयरों की ओर देखने को मिला, जिससे प्रमुख सूचकांकों को मजबूती मिली। बैंकिंग सेक्टर में सार्वजनिक और निजी दोनों तरह के बैंकों के शेयरों में खरीदारी देखी गई। आईटी सेक्टर में भी विदेशी मांग की उम्मीद के चलते तेजी रही। ऑटो और एनर्जी सेक्टर में भी निवेशकों की रुचि बनी रही, जिससे पूरे बाजार को सपोर्ट मिला।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट को इस तेजी का एक अहम कारण माना जा रहा है। ब्रेंट क्रूड में नरमी आने से तेल आयात बिल पर दबाव कम होने की उम्मीद है। इससे न केवल कंपनियों की लागत घटेगी, बल्कि महंगाई पर भी नियंत्रण रखने में मदद मिल सकती है। इसी वजह से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और बाजार में नई पूंजी का प्रवाह देखने को मिल रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हालांकि, कुछ बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यह तेजी पूरी तरह स्थायी नहीं मानी जा सकती। वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां अभी भी पूरी तरह स्थिर नहीं हैं और किसी भी तरह के नए तनाव से बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसके बावजूद, फिलहाल निवेशकों का रुझान सकारात्मक बना हुआ है और बाजार में खरीदारी का माहौल हावी है। देखा जाए तो 15 जून 2026 का दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद मजबूत शुरुआत लेकर आया है। वैश्विक शांति संकेत, तेल की कीमतों में गिरावट और निवेशकों की मजबूत धारणा ने मिलकर बाजार को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। आने वाले दिनों में यदि वैश्विक परिस्थितियां स्थिर रहती हैं तो बाजार में और तेजी की संभावना जताई जा रही है</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/6a2f910dcfeae/article-55952</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/6a2f910dcfeae/article-55952</guid>
                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 11:41:02 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/stock-market-news-india.jpg"                         length="214666"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स 400 अंक उछला</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने के बावजूद निवेशकों का भरोसा कायम, आईटी और एफएमसीजी शेयरों में खरीदारी से बाजार मजबूत; रुपया कमजोर हुआ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/sensex-rises-400-points-in-indian-stock-market-amid-iran/article-55497"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/indian-stock-market.jpg" alt=""></a><br /><p>भारतीय शेयर बाजार ने 10 जून 2026 को वैश्विक तनावों के बीच भी मजबूती दिखाई। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण दुनिया भर के वित्तीय बाजारों में सतर्कता का माहौल देखने को मिला, लेकिन भारतीय निवेशकों ने फिलहाल घबराहट नहीं दिखाई। बुधवार सुबह कारोबार शुरू होते ही सेंसेक्स करीब 400 अंकों की बढ़त के साथ 74,300 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी लगभग 100 अंक चढ़कर 23,350 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार में सबसे ज्यादा खरीदारी आईटी और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों में देखने को मिली, जिससे प्रमुख सूचकांकों को सहारा मिला।</p>
<p>वैश्विक स्तर पर निवेशकों की नजर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव पर बनी हुई है। ताजा घटनाक्रम में अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे अमेरिकी हेलीकॉप्टर गिराए जाने की घटना के जवाब में उठाया गया कदम बताया। इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। आमतौर पर ऐसे हालात में निवेशक जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाते हैं, लेकिन भारतीय बाजार में इसका असर सीमित दिखाई दिया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी और भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण ने बाजार को संभाले रखा।</p>
<p>तेल बाजार पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है। मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के बावजूद कच्चे तेल की कीमतों में फिलहाल बड़ा उछाल नहीं देखा गया। वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड लगभग 91.40 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता रहा। तेल की कीमतों में स्थिरता भारतीय बाजार के लिए राहत की बात मानी जा रही है क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। यदि तेल की कीमतों में तेज उछाल आता तो इसका असर महंगाई और कॉर्पोरेट मुनाफे दोनों पर पड़ सकता था। फिलहाल तेल बाजार की स्थिरता ने निवेशकों को कुछ राहत दी है।</p>
<p>हालांकि एशियाई बाजारों का रुख भारतीय बाजार से अलग दिखाई दिया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक लगभग 3.77 प्रतिशत टूट गया, जबकि जापान का निक्केई और हांगकांग का हैंगसेंग भी लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। एशियाई निवेशकों में भू-राजनीतिक तनाव को लेकर चिंता साफ दिखाई दी। इसके मुकाबले भारतीय बाजार में खरीदारी का माहौल यह संकेत देता है कि घरेलू निवेशक फिलहाल वैश्विक जोखिमों से ज्यादा स्थानीय आर्थिक संकेतकों पर ध्यान दे रहे हैं।</p>
<p>अमेरिकी शेयर बाजारों का प्रदर्शन भी मिश्रित रहा। डाउ जोंस में मामूली बढ़त दर्ज की गई, लेकिन नैस्डैक और एसएंडपी 500 सूचकांक दबाव में रहे। तकनीकी शेयरों में बिकवाली और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण अमेरिकी बाजारों में निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है। इसके बावजूद भारतीय बाजार में सकारात्मक शुरुआत ने यह संकेत दिया कि निवेशकों का भरोसा अभी बरकरार है।</p>
<p>विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। 9 जून को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 4,566 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की। पिछले सात और तीस दिनों के आंकड़े भी विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली की ओर इशारा कर रहे हैं। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों ने खरीदारी जारी रखी है। घरेलू निवेशकों की मजबूत हिस्सेदारी ही बाजार को गिरावट से बचाने में अहम भूमिका निभा रही है। जानकारों का कहना है कि यदि घरेलू निवेशकों का समर्थन इसी तरह बना रहा तो विदेशी बिकवाली का असर सीमित रह सकता है।</p>
<p>मुद्रा बाजार में हालांकि दबाव देखने को मिला। बुधवार सुबह शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 15 पैसे कमजोर होकर 95.56 के स्तर पर पहुंच गया। वैश्विक तनाव और विदेशी निवेशकों की निकासी का असर भारतीय मुद्रा पर दिखाई दिया। कमजोर रुपया आयात लागत बढ़ा सकता है, लेकिन निर्यातकों के लिए यह कुछ राहत भी लेकर आता है।</p>
<p>बाजार को मजबूती मिलने की एक वजह मंगलवार का सकारात्मक कारोबार भी माना जा रहा है। 9 जून को सेंसेक्स लगभग 395 अंक चढ़कर 73,918.76 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 23,242.10 के स्तर पर पहुंच गया था। उस तेजी का असर बुधवार के कारोबार में भी दिखाई दिया। निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर बनी रहेगी। यदि वैश्विक तनाव और नहीं बढ़ता है तो भारतीय बाजार अपनी मजबूती बनाए रख सकता है, हालांकि आने वाले दिनों में उतार-चढ़ाव से इनकार नहीं किया जा सकता।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/sensex-rises-400-points-in-indian-stock-market-amid-iran/article-55497</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/sensex-rises-400-points-in-indian-stock-market-amid-iran/article-55497</guid>
                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 13:25:18 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/indian-stock-market.jpg"                         length="153341"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान-इजरायल तनाव से शेयर बाजार में हड़कंप, सेंसेक्स 900 अंक टूटा</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर दिखा, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली से भारतीय बाजार दबाव]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/6a265aa8a5d71/article-55252"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/sensex-today-(2).jpg" alt=""></a><br /><p>भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 8 जून 2026 को कारोबार की शुरुआत भारी दबाव के साथ हुई। मध्य पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच एक बार फिर बढ़े सैन्य तनाव ने दुनिया भर के निवेशकों की चिंता बढ़ा दी, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया। सुबह बाजार खुलते ही सेंसेक्स करीब 900 अंक तक टूट गया, जबकि निफ्टी में भी लगभग एक प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में निफ्टी 23,113 के स्तर तक फिसल गया। हालांकि बाद में कुछ चुनिंदा शेयरों में खरीदारी लौटने से बाजार ने अपने नुकसान का एक हिस्सा कम किया, लेकिन पूरे दिन निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल बना रहा।</p>
<p>ईरान और इजरायल के बीच हालिया सैन्य कार्रवाई ने वैश्विक निवेशकों को जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाने के लिए मजबूर किया है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों और उसके जवाब में ईरान की मिसाइल कार्रवाई ने पहले से संवेदनशील वैश्विक माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया। ऐसे हालात में निवेशक आमतौर पर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं और शेयर बाजारों से पैसा निकालने लगते हैं। यही वजह रही कि भारतीय बाजार में भी बिकवाली का दबाव बढ़ गया।</p>
<p>सेंसेक्स में शामिल कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखी गई। टीसीएस, महिंद्रा एंड महिंद्रा, इंडिगो, बजाज फाइनेंस, एलएंडटी और इटरनल जैसे शेयर शुरुआती कारोबार में प्रमुख नुकसान झेलने वालों में शामिल रहे। आईटी, ऑटो, वित्तीय सेवाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर से जुड़े शेयरों पर दबाव अधिक दिखाई दिया। निवेशकों को डर है कि यदि मध्य पूर्व का संकट लंबा खिंचता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था और व्यापार पर इसका असर पड़ सकता है।</p>
<p>सेक्टोरल स्तर पर भी अधिकांश सूचकांक लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। रियल्टी सेक्टर में सबसे अधिक कमजोरी देखने को मिली और यह करीब दो प्रतिशत तक नीचे फिसल गया। इसके अलावा मेटल, ऑटो, आईटी और एफएमसीजी सेक्टरों में भी गिरावट दर्ज की गई। हालांकि फार्मा, हेल्थकेयर और पीएसयू बैंकिंग शेयरों में कुछ मजबूती देखने को मिली। बाजार जानकारों के अनुसार अनिश्चित परिस्थितियों में निवेशक अक्सर डिफेंसिव सेक्टरों की ओर रुख करते हैं, इसलिए स्वास्थ्य और दवा कंपनियों के शेयर अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करते नजर आए।</p>
<p>इस बीच कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। मध्य पूर्व दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक क्षेत्रों में से एक माना जाता है और वहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव तेल आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है। इसी आशंका के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत में तेज उछाल दर्ज किया गया और यह 96 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। वहीं वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 93 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी महंगाई और व्यापार घाटे को प्रभावित कर सकती है, इसलिए बाजार ने इस खबर पर भी नकारात्मक प्रतिक्रिया दी।</p>
<p>भारतीय बाजार पर विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर भी साफ दिखाई दिया। हाल के कारोबारी सत्रों में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने लगातार भारतीय शेयरों में बिकवाली की है। 5 जून को भी विदेशी निवेशकों ने हजारों करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी ने कुछ हद तक बाजार को सहारा देने का काम किया, लेकिन विदेशी पूंजी की निकासी का दबाव अभी भी बना हुआ है। जब तक वैश्विक स्तर पर स्थिति सामान्य नहीं होती, विदेशी निवेशकों का रुख सतर्क बना रह सकता है।</p>
<p>एशियाई बाजारों में भी कमजोरी का माहौल देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक चार प्रतिशत से अधिक टूट गया, जबकि जापान का निक्केई भी भारी गिरावट के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। हांगकांग के हैंगसेंग सूचकांक में भी गिरावट दर्ज की गई। इससे पहले अमेरिकी बाजारों में भी सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन बड़ी गिरावट देखी गई थी। नैस्डैक, डॉव जोंस और एसएंडपी 500 जैसे प्रमुख सूचकांकों में कमजोरी ने वैश्विक निवेशकों की चिंता को और बढ़ा दिया है।</p>
<p>विदेशी मुद्रा बाजार में भी तनाव का असर दिखाई दिया। सोमवार सुबह रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 17 पैसे कमजोर होकर 95.35 के स्तर पर पहुंच गया। जानकारों के अनुसार कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों की बिकवाली भारतीय मुद्रा पर दबाव बना रही हैं। आने वाले दिनों में यदि भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ता है तो रुपये में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। निवेशकों की नजर मध्य पूर्व से आने वाली खबरों और वैश्विक बाजारों के रुख पर बनी हुई है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है और निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े फैसले लेने से बचना चाहिए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/6a265aa8a5d71/article-55252</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/6a265aa8a5d71/article-55252</guid>
                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 12:58:59 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/sensex-today-%282%29.jpg"                         length="199909"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सेंसेक्स 700 अंक टूटा, निफ्टी 23,350 के करीब फिसला, आईटी शेयरों में भारी बिकवाली</title>
                                    <description><![CDATA[वैश्विक तनाव, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कमजोर मानसून अनुमान से बाजार पर दबाव]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/6a1fe1bfdc827/article-54853"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/sensex-today-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को कारोबार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई और दिन चढ़ने के साथ बिकवाली का दबाव और बढ़ता गया। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स करीब 700 अंक टूटकर 73,950 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया, जबकि निफ्टी भी लगभग 150 अंकों की गिरावट के साथ 23,350 के आसपास पहुंच गया। बाजार में सबसे ज्यादा दबाव आईटी और रियल्टी सेक्टर के शेयरों पर देखने को मिला। निवेशकों की सतर्कता और वैश्विक घटनाक्रमों ने बाजार के माहौल को प्रभावित किया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">मंगलवार को बाजार मजबूत बढ़त के साथ बंद हुआ था और निवेशकों को उम्मीद थी कि यह तेजी आगे भी जारी रह सकती है। हालांकि बुधवार को शुरुआती कारोबार से ही तस्वीर बदलती नजर आई। कई बड़े शेयरों में बिकवाली शुरू हुई और इसका असर प्रमुख सूचकांकों पर साफ दिखाई दिया। घरेलू और वैश्विक दोनों स्तरों पर मौजूद अनिश्चितताओं ने निवेशकों को सतर्क रुख अपनाने के लिए मजबूर किया है। बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव माना जा रहा है। अमेरिका, इजराइल और ईरान से जुड़ी घटनाओं पर दुनिया भर के निवेशकों की नजर बनी हुई है। क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल है। निवेशक फिलहाल जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाते दिखाई दे रहे हैं, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा है। ऐसे समय में कई निवेशक मुनाफावसूली करना बेहतर समझ रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">दूसरा बड़ा कारण विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली को माना जा रहा है। हाल के दिनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजार से बड़ी मात्रा में धन निकाला है। आंकड़ों के अनुसार मई महीने के दौरान विदेशी निवेशकों ने हजारों करोड़ रुपए के शेयर बेचे हैं। केवल पिछले कारोबारी सत्र में भी विदेशी निवेशकों की ओर से भारी बिकवाली दर्ज की गई। इससे बाजार में दबाव और बढ़ गया। विदेशी निवेशक इस समय वैश्विक परिस्थितियों का मूल्यांकन कर रहे हैं। ब्याज दरों, अंतरराष्ट्रीय तनाव और अन्य आर्थिक कारकों के चलते वे अपने निवेश पोर्टफोलियो में बदलाव कर रहे हैं। इसका असर उभरते बाजारों पर देखने को मिल रहा है, जिनमें भारत भी शामिल है।</p>
<p class="isSelectedEnd">तीसरा महत्वपूर्ण कारण मौसम से जुड़ा हुआ है। भारतीय मौसम विभाग द्वारा मानसून के अनुमान में हल्की कमी किए जाने के बाद कृषि और ग्रामीण मांग को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। मानसून भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि देश की बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है। बारिश सामान्य से कम रहने की आशंका बाजार के कुछ वर्गों में चिंता का कारण बनी हुई है। वास्तविक प्रगति आने वाले सप्ताहों में अधिक स्पष्ट तस्वीर पेश करेगी। सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी देखी गई। कई बड़ी तकनीकी कंपनियों के शेयर दबाव में रहे। वैश्विक मांग को लेकर चिंताओं और विदेशी बाजारों से मिलने वाले संकेतों का असर इस क्षेत्र पर दिखाई दिया। इसके अलावा रियल्टी सेक्टर में भी बिकवाली का माहौल बना रहा। निवेशकों ने कई प्रमुख रियल एस्टेट कंपनियों के शेयरों में मुनाफावसूली की।</p>
<p class="isSelectedEnd">बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के कुछ शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली, हालांकि चुनिंदा कंपनियों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। बाजार में व्यापक रूप से देखा जाए तो अधिकांश सेक्टर लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव बना रहा, जिससे निवेशकों का रुझान कमजोर दिखाई दिया। एशियाई बाजारों से मिले संकेत भी मिश्रित रहे। जापान के बाजार में मजबूती देखने को मिली, जबकि हांगकांग के बाजार में गिरावट दर्ज की गई। दक्षिण कोरिया का बाजार सीमित दायरे में कारोबार करता दिखाई दिया। इन मिश्रित संकेतों ने भी भारतीय बाजार को स्पष्ट दिशा देने में मदद नहीं की।</p>
<p class="isSelectedEnd">वहीं अमेरिकी बाजारों ने पिछले कारोबारी सत्र में सकारात्मक प्रदर्शन किया था। डाउ जोंस, नैस्डैक और एसएंडपी 500 सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए थे। इसके बावजूद भारतीय बाजार में घरेलू कारणों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर अधिक देखने को मिला। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में घरेलू निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों के साथ-साथ स्थानीय आर्थिक परिस्थितियों पर भी बनी हुई है। निवेशकों को इस समय घबराने के बजाय संतुलित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है और अल्पकालिक घटनाएं अक्सर बाजार की दिशा को प्रभावित करती हैं। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मजबूत कंपनियों पर ध्यान देना और सोच-समझकर निवेश करना अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/6a1fe1bfdc827/article-54853</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/6a1fe1bfdc827/article-54853</guid>
                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 14:17:39 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/sensex-today-%281%29.jpg"                         length="153484"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>RBI MPC Meeting 2026: आज से शुरू हुई बैठक, रेपो रेट पर टिकी बाजार और कर्जदारों की नजर</title>
                                    <description><![CDATA[5 जून को आएगा फैसला, फिलहाल 5.25% पर कायम है रेपो रेट]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/rbi-mpc-meeting-2026-meeting-starts-from-today-eyes-of/article-54852"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/rbi-mpc-meeting-2026.jpg" alt=""></a><br /><p>भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की तीन दिवसीय बैठक आज 3 जून 2026 से शुरू हो गई है। यह बैठक 5 जून तक चलेगी, जिसके बाद आरबीआई गवर्नर की ओर से नीतिगत दरों और अर्थव्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों की घोषणा की जाएगी। इस बैठक पर बैंकिंग सेक्टर, उद्योग जगत, शेयर बाजार और आम कर्जदारों की खास नजर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार रेपो रेट में किसी बड़े बदलाव की संभावना कम है और केंद्रीय बैंक फिलहाल मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए दरों को स्थिर रख सकता है। वर्तमान में रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर है। रेपो रेट वह दर होती है जिस पर वाणिज्यिक बैंक आरबीआई से अल्पकालिक कर्ज लेते हैं। इसी दर के आधार पर बैंकों के लोन और जमा योजनाओं की ब्याज दरें प्रभावित होती हैं। ऐसे में हर मॉनेटरी पॉलिसी बैठक का सीधा असर करोड़ों लोगों की जेब पर पड़ता है। गृह ऋण, वाहन ऋण, शिक्षा ऋण और व्यापारिक कर्ज लेने वाले लोग विशेष रूप से इस फैसले का इंतजार करते हैं।</p>
<p>पिछले कुछ महीनों में महंगाई दर नियंत्रित दायरे में बनी हुई है, लेकिन वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं ने आरबीआई के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता जैसे कारक भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में केंद्रीय बैंक किसी भी जल्दबाजी से बचते हुए संतुलित नीति अपनाने के पक्ष में दिखाई दे रहा है। बीते वर्ष 2025 में आरबीआई ने अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए कई बार ब्याज दरों में कटौती की थी। फरवरी 2025 में पहली बार करीब पांच साल बाद रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती की गई थी। इसके बाद अप्रैल, जून और दिसंबर में भी दरों में कमी की गई। कुल मिलाकर वर्ष 2025 में चार चरणों में 1.25 प्रतिशत की कटौती हुई और रेपो रेट 6.50 प्रतिशत से घटकर 5.25 प्रतिशत तक आ गया। इन फैसलों का असर यह हुआ कि कई बैंकों ने अपने लोन की ब्याज दरें कम कीं और उपभोक्ताओं को राहत मिली।</p>
<p>अब स्थिति पहले जैसी नहीं है। महंगाई भले ही नियंत्रण में है, लेकिन वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां लगातार बदल रही हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई फिलहाल ब्याज दरों को यथावत रखकर आर्थिक संकेतकों पर नजर बनाए रखना चाहेगा। कई वित्तीय संस्थानों की रिपोर्ट में भी अनुमान जताया गया है कि इस बैठक में रेपो रेट में कटौती की संभावना बेहद सीमित है। आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी में कुल छह सदस्य होते हैं। इनमें तीन सदस्य रिजर्व बैंक के प्रतिनिधि होते हैं जबकि तीन सदस्य केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। समिति आर्थिक विकास, महंगाई, रोजगार, उपभोक्ता मांग और वैश्विक परिस्थितियों का आकलन करने के बाद नीतिगत फैसले लेती है। प्रत्येक सदस्य अपना मत देता है और बहुमत के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाता है।</p>
<p>रेपो रेट का आम लोगों के जीवन पर सीधा प्रभाव पड़ता है। जब आरबीआई ब्याज दरें बढ़ाता है तो बैंकों के लिए धन जुटाना महंगा हो जाता है। इसके बाद बैंक ग्राहकों को दिए जाने वाले लोन की ब्याज दरें भी बढ़ा देते हैं। इससे होम लोन, कार लोन और अन्य कर्ज महंगे हो जाते हैं। दूसरी ओर जब रेपो रेट घटाया जाता है तो बैंकों को सस्ता कर्ज मिलता है और वे ग्राहकों को भी कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध करा सकते हैं। मौजूदा समय में भारतीय अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है। विनिर्माण गतिविधियों में सुधार, सेवाक्षेत्र की मजबूती और सरकारी निवेश योजनाओं से विकास को समर्थन मिल रहा है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में जारी अस्थिरता और वैश्विक मांग में कमजोरी जैसी चुनौतियां भी मौजूद हैं। इसलिए आरबीआई को विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखना होगा।</p>
<p>शेयर बाजार भी इस बैठक पर करीबी नजर बनाए हुए है। निवेशकों को उम्मीद है कि आरबीआई अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक संकेत देगा। यदि केंद्रीय बैंक विकास दर के अनुमान को बरकरार रखता है और महंगाई को नियंत्रित बताता है तो बाजार में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है। वहीं किसी अप्रत्याशित फैसले का असर बाजार की चाल पर भी पड़ सकता है। 5 जून को होने वाली घोषणा के साथ यह साफ हो जाएगा कि आने वाले महीनों में ब्याज दरों की दिशा क्या रहने वाली है।आरबीआई इस बार रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर ही बनाए रख सकता है। हालांकि केंद्रीय बैंक के बयान और भविष्य के संकेत निवेशकों, उद्योगों और आम उपभोक्ताओं के लिए कहीं अधिक महत्वपूर्ण होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/rbi-mpc-meeting-2026-meeting-starts-from-today-eyes-of/article-54852</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/rbi-mpc-meeting-2026-meeting-starts-from-today-eyes-of/article-54852</guid>
                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 14:17:22 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/rbi-mpc-meeting-2026.jpg"                         length="195080"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        