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                <title>Public Works Department - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Public Works Department RSS Feed</description>
                
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                <title>इंजीनियरों का कमाल... गारंटी वाली सड़कों को फिर बनाने का भेज दिया प्रस्ताव, 9 अफसरों को नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[परफॉर्मेंस गारंटी में शामिल सड़कों पर दोबारा निर्माण की मांग, 140 करोड़ रुपए के प्रस्ताव पर विभाग सख्त]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/amazing-work-of-engineers-proposal-to-reconstruct-roads-with-guarantee/article-54714"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/pwd-road-scam.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने विभागीय कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जिन सड़कों की मरम्मत और रखरखाव की जिम्मेदारी अभी भी संबंधित ठेकेदारों के पास थी, उन्हीं सड़कों को दोबारा बनाने के लिए करोड़ों रुपए के प्रस्ताव शासन को भेज दिए गए। मामला सामने आने के बाद विभाग ने इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए नौ इंजीनियरों को नोटिस जारी कर दिया है और उनसे 15 दिन के भीतर जवाब मांगा गया है। अधिकारियों का कहना है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक प्रदेश के विभिन्न जिलों में ऐसी 19 सड़कें चिन्हित हुई हैं जो अभी परफॉर्मेंस गारंटी अवधि में हैं। नियमों के अनुसार इस अवधि के दौरान सड़क की गुणवत्ता बनाए रखने, मरम्मत करने और किसी भी प्रकार की खराबी दूर करने की जिम्मेदारी ठेकेदार की होती है। इसके बावजूद कुछ अधिकारियों ने इन सड़कों के लिए नए निर्माण और पुनर्निर्माण के प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिए। इन प्रस्तावों की कुल लागत लगभग 140 करोड़ रुपए बताई गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामला सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर जांच की गई तो पता चला कि भोपाल, रायसेन, ग्वालियर, नर्मदापुरम, मंदसौर और मुरैना जिलों की सड़कों के लिए यह प्रस्ताव तैयार किए गए थे। नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अधिकारियों ने नियमों के विपरीत कार्य करते हुए परफॉर्मेंस गारंटी अवधि में ही नई लागत का आकलन कर प्रशासकीय स्वीकृति के लिए प्रस्ताव भेज दिए। यह प्रक्रिया विभागीय नियमों और वित्तीय अनुशासन के खिलाफ मानी गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सबसे बड़ा प्रस्ताव भोपाल और रायसेन क्षेत्र से जुड़ा बताया जा रहा है। यहां कार्यपालन यंत्री योगेंद्र कुमार ने आठ सड़कों पर व्हाइट टॉपिंग के लिए करीब 51.65 करोड़ रुपए का प्रस्ताव भेजा था। विभागीय अधिकारियों के अनुसार जिन सड़कों के लिए यह प्रस्ताव बनाया गया, उनमें से कई सड़कें अभी गारंटी अवधि में थीं। ऐसे में नए निर्माण का प्रस्ताव भेजना सवालों के घेरे में आ गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी तरह राकेश निगम ने तीन सड़कों के लिए 27.50 करोड़ रुपए की मांग की थी। वहीं एसआर परते ने तीन सड़कों को दोबारा बनाने के लिए 19.03 करोड़ रुपए का प्रस्ताव तैयार किया। ग्वालियर क्षेत्र में एके जैन ने गांधी रोड के निर्माण के लिए 13.56 करोड़ रुपए का प्रस्ताव भेजा था। दिलचस्प बात यह रही कि इसी सड़क के लिए ओमहरि शर्मा द्वारा भी प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था। इससे विभागीय स्तर पर समन्वय और प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मंदसौर जिले में आदित्य सोनी ने दो सड़कों के लिए 5.20 करोड़ रुपए की लागत का प्रस्ताव तैयार किया था। वहीं रायसेन जिले में पीके झा ने छींद मार्ग के लिए 5.12 करोड़ रुपए की मांग रखी। नर्मदापुरम क्षेत्र में सुभाष पाटिल और संजय रायकवार ने चार सड़कों की मरम्मत के लिए 2.23 करोड़ रुपए का प्रस्ताव शासन को भेजा था। अब इन सभी प्रस्तावों की जांच की जा रही है और संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विभागीय सूत्रों का कहना है कि परफॉर्मेंस गारंटी अवधि का उद्देश्य ही यह सुनिश्चित करना होता है कि सड़क निर्माण के बाद यदि कोई तकनीकी कमी सामने आती है तो उसका खर्च सरकारी खजाने पर न पड़े। ठेकेदार निर्धारित अवधि तक सड़क की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए बाध्य रहता है। ऐसे में यदि उसी अवधि के दौरान सड़क को दोबारा बनाने या मरम्मत कराने के लिए सरकारी धन की मांग की जाती है तो यह नियमों की मूल भावना के विपरीत माना जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामले ने विभाग के भीतर भी हलचल बढ़ा दी है। अधिकारियों का कहना है कि यदि प्रस्तावों को समय रहते नहीं रोका जाता तो करोड़ों रुपए का अतिरिक्त वित्तीय बोझ सरकार पर पड़ सकता था। यही वजह है कि अब पूरे मामले की गहन समीक्षा की जा रही है। संबंधित फाइलों, तकनीकी स्वीकृतियों और प्रस्तावों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। इस तरह के मामलों में जवाबदेही तय होना जरूरी है ताकि सार्वजनिक धन का सही उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। सभी नौ इंजीनियरों को नोटिस जारी कर 15 दिन के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 12:36:04 +0530</pubDate>
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                <title>8 साल बाद खुला कचना ओवरब्रिज, सीएम साय ने किया उद्घाटन</title>
                                    <description><![CDATA[रायपुर में 8 साल बाद कचना रेलवे ओवरब्रिज शुरू हुआ। CM विष्णुदेव साय ने लोकार्पण किया, लेकिन उद्घाटन के दिन ही शहर जाम से जूझता नजर आया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/kachna-overbridge-opened-after-8-years-cm-sai-inaugurated-it/article-54037"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/chhattisgarh-raipur-kachna-overbridge-vishnudeo-sai.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रायपुर की ट्रैफिक समस्या से जूझ रहे लोगों को आखिरकार कचना रेलवे ओवरब्रिज की सौगात मिल गई है। करीब 8 साल के लंबे इंतजार के बाद शुक्रवार को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस ओवरब्रिज का उद्घाटन किया। 48 करोड़ 78 लाख रुपए की लागत से बना ये ब्रिज राजधानी के सबसे अहम ट्रैफिक प्रोजेक्ट्स में से एक माना जा रहा है। 787 मीटर लंबे और 13 मीटर चौड़े इस ओवरब्रिज के शुरू होने से कचना रेलवे फाटक पर लगने वाले रोजाना के जाम से राहत मिलने की आस जताई जा रही है। प्रशासन का दावा है कि इससे हर दिन करीब दो लाख लोगों को फायदा होगा। उद्घाटन कार्यक्रम को लेकर सुबह से ही इलाके में हलचल मची रही</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">और बड़ी संख्या में लोग भी मौके पर पहुंचे। लेकिन शाम होते-होते हालात कुछ और ही नजर आने लगे और उद्घाटन के दिन ही शहर के कई हिस्सों में लंबा ट्रैफिक जाम लग गया।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कचना रेलवे क्रॉसिंग लंबे समय से राजधानी की सबसे बड़ी ट्रैफिक समस्याओं में से एक रही है। यहां हर रोज यात्री और मालगाड़ियों की आवाजाही होती है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे फाटक बार-बार बंद करना पड़ता था। इस वजह से शंकर नगर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खम्हारडीह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जोरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वीआईपी कॉलोनी और भावना नगर जैसे इलाकों के लोग घंटों जाम में फंसे रहते थे। स्कूल बसें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एंबुलेंस और ऑफिस जाने वाले कर्मचारियों को सबसे ज्यादा दिक्कत होती थी। लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नए ओवरब्रिज में सर्विस लेन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोड मार्किंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रिफलेक्टिव साइन बोर्ड और लाइटिंग जैसी सुविधाएं दी गई हैं ताकि रात में भी यातायात सुरक्षित रहे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कार्यक्रम में कहा कि ये क्षेत्र की वर्षों पुरानी मांग थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे अब पूरा किया गया है। उपमुख्यमंत्री और लोक निर्माण मंत्री अरुण साओ ने भी कहा कि करीब 25 कॉलोनियों के लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उद्घाटन के कुछ घंटे बाद ही राजधानी की सड़कों पर भारी दबाव देखा गया। शुक्रवार शाम शंकर नगर से कचना फाटक तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। बताया जा रहा है कि वीआईपी मूवमेंट और उद्घाटन कार्यक्रम के कारण कुछ समय के लिए ट्रैफिक रोका गया था। इसी दौरान बीटीआई मैदान में लगे मेले से निकली भीड़ ने स्थिति को और बिगाड़ दिया। कई जगह गाड़ियां धीरे-धीरे चलती नजर आईं। स्थानीय लोगों का कहना था कि नए ओवरब्रिज से राहत की उम्मीद थी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन पहले ही दिन लोगों को घंटों सड़क पर फंसे रहना पड़ा। एक निजी कंपनी में काम करने वाले युवक ने बताया कि शंकर नगर से घर पहुंचने में उसे करीब एक घंटा लग गया। राजीव भवन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनुपम नगर ओवरब्रिज और अशोका रतन इलाके में भी ट्रैफिक व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित रही। पुलिसकर्मी लगातार अपनी ड्यूटी पर तैनात रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन देर रात तक हालात में कोई सुधार नहीं हुआ। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि शुरुआत में ट्रैफिक डायवर्जन और भीड़ की वजह से परेशानी हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन आने वाले दिनों में सब कुछ सामान्य हो जाएगा।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 13:45:08 +0530</pubDate>
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