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                <title>Digital Evidence - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Digital Evidence RSS Feed</description>
                
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                <title>ट्विशा केस में जांच तेज, जेल में मिलीं गिरिबाला सिंह; CBI को दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[महिला आयोग ने भोपाल सेंट्रल जेल में की मुलाकात, मेडिकल और डिजिटल सबूतों की कड़ियां जोड़ने में जुटी CBI]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/6a2a537bb245b/article-55595"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/twisha-sharma-case-(5).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भोपाल की चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। एक ओर जहां केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) मेडिकल, डिजिटल और फोरेंसिक सबूतों को खंगाल रही है, वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश महिला आयोग की टीम ने भोपाल सेंट्रल जेल पहुंचकर मामले में गिरफ्तार रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह से मुलाकात की। जेल में हुई इस मुलाकात के दौरान गिरिबाला सिंह शांत नजर आईं और उन्होंने किसी तरह की परेशानी होने से इनकार किया।</p>
<p style="text-align:justify;">महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव के नेतृत्व में पहुंची टीम ने जेल में महिला वार्ड, अस्पताल, रसोईघर, पुस्तकालय, आर्ट एंड क्राफ्ट सेंटर और अन्य सुविधाओं का निरीक्षण किया। इसी दौरान गिरिबाला सिंह पुस्तकालय में देवदत्त पटनायक की चर्चित पुस्तक ‘द प्रेग्नेंट किंग’ पढ़ती हुई मिलीं। बताया गया कि आयोग की टीम को देखते ही उन्होंने किताब बंद कर दी। बातचीत के दौरान आयोग ने उनके स्वास्थ्य, भोजन और जेल की व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली। गिरिबाला सिंह ने कहा कि उन्हें किसी प्रकार की समस्या नहीं है और जेल में सभी व्यवस्थाएं सामान्य हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">महिला आयोग ने भी अपनी प्रारंभिक टिप्पणी में कहा कि निरीक्षण के दौरान ऐसा कोई संकेत नहीं मिला कि गिरिबाला सिंह को जेल में विशेष सुविधा या वीआईपी ट्रीटमेंट दिया जा रहा हो। हालांकि इस मामले को लेकर पहले से ऐसे आरोप लगते रहे हैं, जिसके बाद जेल प्रशासन ने सुरक्षा और निगरानी के इंतजाम बढ़ा दिए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उधर, ट्विशा शर्मा मौत मामले की जांच कर रही CBI को दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिल गई है। जांच एजेंसी अब इस रिपोर्ट का मिलान पहले से उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड और फोरेंसिक तथ्यों से कर रही है। सूत्रों के मुताबिक एजेंसी विशेष रूप से प्रेग्नेंसी, कथित अबॉर्शन, शरीर पर मिले चोटों के निशान और फांसी से जुड़े सबूतों की पड़ताल कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">CBI की जांच का एक अहम हिस्सा डिजिटल सबूत भी हैं। एजेंसी मोबाइल फोन, लैपटॉप, चैट रिकॉर्ड, कॉल डिटेल्स, फोटो, वीडियो और डिलीट किए गए डेटा की जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल जानकारी मामले की पूरी घटनाक्रम को समझने और विभिन्न दावों की पुष्टि करने में मदद कर सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच ट्विशा के परिवार की ओर से लगातार जांच में शुरुआती स्तर पर हुई कथित चूकों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। परिवार के वकील अंकुर पांडे का कहना है कि घटनास्थल से जब्त किए गए सबूतों और उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। उनका आरोप है कि जिस रस्सी या बेल्ट को मामले में अहम सबूत माना गया, उसकी जब्ती प्रक्रिया में कई कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">वकील के अनुसार, घटनास्थल की तस्वीरों में दो अलग-अलग स्थानों पर दो बेल्ट दिखाई दे रही थीं, लेकिन पुलिस रिकॉर्ड में केवल एक बेल्ट की जब्ती का उल्लेख किया गया। इसके अलावा जिस व्यक्ति ने उस बेल्ट या रस्सी की पहचान की, उसका नाम भी दस्तावेजों में स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं किया गया। परिवार का दावा है कि ऐसी खामियां जांच को प्रभावित कर सकती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले में एक और महत्वपूर्ण सवाल उन दस्तावेजों को लेकर उठाया गया है जो कथित तौर पर केस डायरी का हिस्सा थे। ट्विशा के परिवार के वकील का आरोप है कि जांच से जुड़े कुछ दस्तावेज आरोपियों तक समय से पहले पहुंच गए थे, जिससे उन्हें कानूनी रणनीति बनाने में मदद मिली। हालांकि इस संबंध में अभी तक किसी जांच एजेंसी की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।</p>
<p style="text-align:justify;">CBI अब शुरुआती जांच करने वाले पुलिस अधिकारियों से भी दोबारा पूछताछ की तैयारी कर रही है। विशेष रूप से उस पुलिस अधिकारी की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं जिसने घटनास्थल का निरीक्षण किया था और सबूतों की जब्ती की प्रक्रिया पूरी की थी। एजेंसी यह जानने का प्रयास कर रही है कि जांच के शुरुआती चरण में कहीं कोई लापरवाही या प्रक्रिया संबंधी त्रुटि तो नहीं हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले में ट्विशा की मानसिक स्थिति को लेकर भी जांच जारी है। गिरिबाला सिंह की ओर से अदालत में कुछ मेडिकल दस्तावेज पेश किए गए थे, जिनमें दावा किया गया था कि ट्विशा मानसिक तनाव और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही थीं। अब CBI इन दस्तावेजों की सत्यता की जांच कर रही है। इसी सिलसिले में मनोचिकित्सक डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी से भी पूछताछ की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">जेल प्रशासन के लिए भी यह मामला संवेदनशील बना हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, गिरिबाला सिंह ने अपने न्यायिक कार्यकाल के दौरान जिन आरोपियों को सजा सुनाई थी, उनमें से कई वर्तमान में भोपाल सेंट्रल जेल में बंद हैं। इसी वजह से उनकी सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। जेल परिसर में निगरानी बढ़ाई गई है और अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। पूरे मामले में CBI विभिन्न सबूतों, दस्तावेजों और गवाहों के बयानों को जोड़कर घटनाक्रम की पूरी तस्वीर सामने लाने की कोशिश कर रही है। दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिलने के बाद जांच के अगले चरण को महत्वपूर्ण माना जा रहा है </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 11:52:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title> ट्विशा शर्मा मौत केस में बड़ा मोड़, सास गिरिबाला सिंह कोर्ट में पेश होगी</title>
                                    <description><![CDATA[सबूतों से छेड़छाड़ के आरोप में गिरफ्तारी, CBI करेगी समर्थ और गिरिबाला से आमने-सामने पूछताछ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/big-twist-in-twisha-sharma-death-case-mother-in-law-giribala-singh/article-54471"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/twisha-sharma-case-(2).jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr" style="text-align:justify;">एक्ट्रेस और मॉडल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत मामले में जांच अब तेजी से आगे बढ़ रही है। सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन यानी CBI ने इस मामले में ट्विशा की सास और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। उन पर सबूतों से छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया गया है। गुरुवार देर शाम करीब सात घंटे चली लंबी पूछताछ के बाद एजेंसी ने यह कार्रवाई की। अब गिरिबाला सिंह को आज कोर्ट में पेश किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी पति समर्थ सिंह और गिरिबाला को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की तैयारी कर रही है ताकि बयानों में सामने आ रहे विरोधाभासों को समझा जा सके।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">मामला भोपाल के बाग मुगलिया एक्सटेंशन इलाके का है, जहां 12 मई की रात ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। शुरुआती जांच भोपाल पुलिस ने की थी, लेकिन परिजनों ने पुलिस जांच पर सवाल उठाए थे। मामला लगातार सुर्खियों में बना रहा, जिसके बाद जांच CBI को सौंप दी गई। एजेंसी ने 25 मई की रात इस केस में औपचारिक एफआईआर दर्ज की थी। अगले ही दिन CBI की टीम पहली बार गिरिबाला सिंह के घर पहुंची और करीब दो घंटे तक पूछताछ की थी।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि जांच के दौरान एजेंसी को कई ऐसे संकेत मिले, जिससे घटनास्थल पर सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका मजबूत हुई। इसी आधार पर गिरिबाला सिंह को हिरासत में लिया गया। CBI अधिकारियों ने घर के हर हिस्से की बारीकी से जांच की। कमरों की स्थिति, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, CCTV फुटेज और मोबाइल रिकॉर्ड खंगाले गए। एजेंसी यह समझने की कोशिश कर रही है कि ट्विशा की मौत वाली रात घर में आखिर क्या हुआ था और घटना के बाद किस तरह की गतिविधियां हुईं।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">इस पूरे मामले में सबसे अहम पहलू अब डिजिटल जांच को माना जा रहा है। CBI टनल व्यू इन्वेस्टिगेशन तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। एजेंसी ट्विशा शर्मा के आखिरी घंटों का वर्चुअल रीक्रिएशन तैयार कर रही है। इसके लिए मोबाइल फोन डेटा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, वाई-फाई लॉग, इंटरनेट एक्टिविटी और CCTV फुटेज को एक साथ जोड़ा जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि तीन मंजिला मकान के भीतर ट्विशा की आवाजाही का डिजिटल ट्रैक तैयार किया जा रहा है ताकि मिनट-टू-मिनट घटनाक्रम समझा जा सके।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">जांच एजेंसी ट्विशा का डिजिटल अवतार भी तैयार कर रही है। यह एक तरह का सिम्युलेटेड वर्चुअल मॉडल होगा, जिसके जरिए यह देखा जाएगा कि घटना से पहले वह घर के किस हिस्से में थी, किन लोगों से उसका संपर्क हुआ और किस समय कौन व्यक्ति किस कमरे में आया या बाहर गया। अधिकारियों के अनुसार कैमरों के टाइमस्टैंप और मोबाइल एक्टिविटी का मिलान किया जा रहा है। इससे यह पता लगाने की कोशिश होगी कि बयानों और डिजिटल सबूतों में कोई अंतर तो नहीं है।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">इस बीच समर्थ सिंह पहले से ही CBI रिमांड पर है। सूत्रों के मुताबिक, समर्थ से पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। अब एजेंसी दोनों को आमने-सामने बैठाकर सवाल-जवाब करेगी। जांच अधिकारी यह जानना चाहते हैं कि घटना की रात घर के भीतर क्या स्थिति थी और मौत के बाद किन लोगों से संपर्क किया गया था। कॉल रिकॉर्ड और टावर लोकेशन भी जांच के दायरे में हैं।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">मामले में एक नया एंगल आर्थिक दबाव और घरेलू प्रताड़ना का भी सामने आया है। जांच में पता चला है कि ट्विशा शर्मा ने कई कंपनियों में करीब 20 लाख रुपए के शेयर खरीद रखे थे। आरोप है कि पति समर्थ और सास गिरिबाला उन शेयरों को अपने नाम कराने का दबाव बना रहे थे। ट्विशा के वकील अंकुर पांडे ने दावा किया है कि शादी के बाद जब परिवार को शेयरों की जानकारी मिली, तभी से विवाद बढ़ने लगा था।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक ट्विशा ने अपनी मां से फोन पर कई बार मानसिक प्रताड़ना की बात भी कही थी। उसने बताया था कि दहेज को लेकर विवाद होता था और कई बार हाथापाई तक की स्थिति बन जाती थी। बच्चे को लेकर भी उसे मानसिक दबाव में रखा जाता था। हालांकि इन सभी आरोपों की जांच अभी जारी है और CBI हर पहलू को ध्यान में रखकर जांच कर रही है।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">गिरिबाला सिंह को गुरुवार रात मेडिकल जांच के लिए मेनिट परिसर भी ले जाया गया था। इसके बाद उन्हें हिरासत में रखा गया। अब कोर्ट में पेशी के दौरान एजेंसी उनकी रिमांड मांग सकती है। जांच एजेंसी आने वाले दिनों में परिवार से जुड़े अन्य लोगों, घरेलू कर्मचारियों और घटना के बाद संपर्क में आए लोगों से भी पूछताछ कर सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 13:06:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नासिक TCS केस में 1500 पन्नों की चार्जशीट हुई दाखिल, चैट्स और मेडिकल रिपोर्ट भी शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[नासिक TCS उत्पीड़न केस में SIT ने 1500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। WhatsApp चैट, मेडिकल रिपोर्ट और 17 गवाहों के बयान शामिल।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/1500-page-charge-sheet-filed-in-nashik-tcs-case-chats/article-54043"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/nashik-tcs-case-charge-sheet.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">महाराष्ट्र के नासिक में चर्चित </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">TCS <span lang="hi" xml:lang="hi">उत्पीड़न और कथित धर्मांतरण मामले में अब जांच में बड़ा मोड़ आया है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (</span>SIT) <span lang="hi" xml:lang="hi">ने इस मामले में पहली चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें करीब 1500 पन्ने हैं। इस चार्जशीट में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जैसे डिजिटल सबूत</span>, WhatsApp <span lang="hi" xml:lang="hi">चैट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मेडिकल रिपोर्ट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बैंक रिकॉर्ड और गवाहों के बयान शामिल हैं। मामला अप्रैल 2026 में तब सामने आया जब कुछ महिला कर्मचारियों ने </span>Tata Consultancy Services <span lang="hi" xml:lang="hi">के नासिक </span>BPO <span lang="hi" xml:lang="hi">यूनिट में यौन उत्पीड़न</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मानसिक प्रताड़ना और जबरन धर्म परिवर्तन के आरोप लगाए थे। शुरुआती शिकायतों के बाद मामला तेजी से बढ़ा और पुलिस ने विशेष जांच टीम का गठन किया। अब तक इस केस में कुल 9</span> FIR <span lang="hi" xml:lang="hi">दर्ज की जा चुकी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि अभी तक पहली चार्जशीट सिर्फ एक ही मामले में प्रस्तुत की गई है। नासिक पुलिस के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जांच अभी भी जारी है और आगे सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी दाखिल की जा सकती है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">चार्जशीट में चार आरोपियों के नाम शामिल हैं: दानिश शेख</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तौसिफ बिलाल अख्तर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निदा इजाज खान और मदीन मजीद पटेल। बताया जाता है कि </span>HR <span lang="hi" xml:lang="hi">मैनेजर रहीं निदा खान फिलहाल फरार हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और पुलिस उनकी तलाश कर रही है। प्रारंभिक जांच में कुछ महिला कर्मचारियों ने यह आरोप लगाया था कि कार्यालय के अंदर मानसिक दबाव डाला जाता था और शिकायत करने पर नौकरी पर प्रभाव डालने की धमकी दी जाती थी। कुछ पीड़िताओं ने शादी का झांसा देकर संबंध बनाने और धार्मिक दबाव डालने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं। इस मामले में </span>SC/ST <span lang="hi" xml:lang="hi">एक्ट की धाराएं भी जोड़ी गई हैं। </span>SIT <span lang="hi" xml:lang="hi">ने जांच के दौरान 17 गवाहों के बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराए हैं। पुलिस के सूत्रों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल डेटा की जांच में कई बातचीत और दस्तावेज मिले हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्हें अब कोर्ट रिकॉर्ड में शामिल किया गया है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं के तहत केस दर्ज किया है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें बलात्कार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यौन उत्पीड़न</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आपराधिक साजिश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धोखे से संबंध बनाना और धार्मिक भावनाओं को आहत करने जैसी धाराएं शामिल हैं। जांच अधिकारियों के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कथित घटनाएं 2022 से 2026 के बीच हुई हैं। इस दौरान कई पीड़िताओं ने अलग-अलग समय पर शिकायतें दीं। मामला सामने आने के बाद यह राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर काफी बहस हुई। </span>SIT <span lang="hi" xml:lang="hi">का दावा है कि जांच में कुछ संगठित गतिविधियों के संकेत मिले हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इस पर अंतिम निष्कर्ष कोर्ट की प्रक्रिया के बाद ही साफ होगा। फिलहाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सभी आरोपियों को जमानत नहीं मिली है और पुलिस बाकी मामलों की जांच में जुटी हुई है। आने वाले दिनों में और खुलासे होने की भी संभावना जताई जा रही है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 13:45:01 +0530</pubDate>
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