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                <title>Court Case - दैनिक जागरण</title>
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                <title>मध्यप्रदेश में 4 लाख कर्मचारियों को प्रमोशन, हाईकोर्ट स्टे नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[जीएडी ने जारी किए निर्देश, डीपीसी बैठकें शुरू करने की प्रक्रिया तेज, कोर्ट के अंतिम फैसले पर रहेगा प्रमोशन निर्भर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/high-court-no-stay-on-promotion-of-4-lakh-employees/article-57477"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/madhya-pradesh-promotion.jpg" alt=""></a><br /><div class="text-base my-auto mx-auto [--thread-content-margin:var(--thread-content-margin-xs,calc(var(--spacing)*4))] @w-sm/main:[--thread-content-margin:var(--thread-content-margin-sm,calc(var(--spacing)*6))] @w-lg/main:[--thread-content-margin:var(--thread-content-margin-lg,calc(var(--spacing)*16))] px-(--thread-content-margin)">
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<div class="markdown prose dark:prose-invert wrap-break-word w-full light markdown-new-styling">
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश में चार लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए लंबे इंतजार के बाद अब पदोन्नति की राह खुलती नजर आ रही है। राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि पदोन्नति प्रक्रिया पर हाई कोर्ट की तरफ से कोई अंतरिम रोक नहीं है, ऐसे में मप्र लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 के तहत रुकी हुई प्रक्रिया को दोबारा शुरू किया जा सकता है। इस फैसले के बाद पूरे प्रशासनिक ढांचे में हलचल देखी जा रही है और अलग-अलग विभागों में तैयारियां भी तेज हो गई हैं। कई कर्मचारी संगठनों ने इसे राहत भरा कदम बताया है, क्योंकि पिछले कई सालों से प्रमोशन की फाइलें अटकी हुई थीं और वरिष्ठ पद खाली पड़े थे। सामान्य प्रशासन विभाग ने मंगलवार को सभी विभागों के सचिवों, विभागाध्यक्षों और जिला कलेक्टरों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने-अपने विभागों में पात्र कर्मचारियों की सूची तैयार करें और पदोन्नति प्रक्रिया को आगे बढ़ाएं। इसके साथ ही विभागीय पदोन्नति समिति यानी डीपीसी की बैठकें आयोजित करने को भी कहा गया है। यह पूरा फैसला राज्य सरकार ने महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन की कानूनी राय के आधार पर लिया है। आदेश में यह भी साफ किया गया है कि भले ही पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, लेकिन हर प्रमोशन आदेश में यह उल्लेख अनिवार्य होगा कि यह मामला अदालत में लंबित अंतिम फैसले के अधीन रहेगा। मतलब यह कि अगर भविष्य में कोर्ट का निर्णय इसके विपरीत आता है तो सरकार को आवश्यक बदलाव या संशोधन करने होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पूरे मामले में कानूनी स्थिति काफी अहम रही है। बताया जा रहा है कि हाई कोर्ट में पदोन्नति नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाएं लंबित हैं, लेकिन अभी तक उन पर कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई गई है। इसी आधार पर सरकार को यह राय दी गई कि पदोन्नति प्रक्रिया को रोका जाना जरूरी नहीं है। आने वाले समय में कोर्ट का अंतिम फैसला इस पूरी प्रक्रिया की दिशा तय करेगा। इसी वजह से प्रशासनिक स्तर पर सावधानी बरतते हुए हर कदम रिकॉर्ड में रखा जा रहा है ताकि भविष्य में किसी तरह की कानूनी अड़चन न आए। विभागीय स्तर पर अधिकारी अब पात्र कर्मचारियों की सूची तैयार करने और रिक्त पदों का आकलन करने में जुट गए हैं, ताकि डीपीसी की बैठकों में किसी तरह की देरी न हो। इधर, प्रदेश के प्रशासनिक हालात को लेकर सरकार ने यह भी बड़ा दावा किया है कि वर्तमान में स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल लगभग 40 प्रतिशत स्टाफ के भरोसे ही पूरा सिस्टम चल रहा है। कई विभागों में वर्षों से पदोन्नति न होने के कारण वरिष्ठ पद खाली पड़े हैं, जिससे कामकाज की गति प्रभावित हो रही है। निचले स्तर पर कर्मचारियों पर काम का दबाव बढ़ गया है और नई भर्तियों की प्रक्रिया भी धीमी पड़ गई है। ऐसे में सरकार का मानना है कि पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करना न केवल प्रशासनिक जरूरत है बल्कि यह जनहित से भी जुड़ा हुआ कदम है। बताया जा रहा है कि अगर यह प्रक्रिया सुचारू रूप से आगे बढ़ती है तो लगभग चार लाख कर्मचारियों को प्रमोशन का लाभ मिलेगा और इसके साथ ही करीब 1.5 लाख नए पद भी रिक्त हो सकते हैं, जिन पर आने वाले समय में नई भर्तियों का रास्ता खुलेगा। इस फैसले को लेकर पूरी स्थिति पूरी तरह आसान भी नहीं मानी जा रही है। अगर भविष्य में कोर्ट का फैसला सरकार के नियमों के खिलाफ आता है तो जिन कर्मचारियों को प्रमोशन मिला होगा, उनकी स्थिति प्रभावित हो सकती है। उन्हें फिर से पुराने पदों पर लौटना भी पड़ सकता है, जिसे लेकर प्रशासनिक स्तर पर संभावित चुनौतियों पर चर्चा चल रही है। </p>
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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 09:48:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>ट्विशा केस में जांच तेज, जेल में मिलीं गिरिबाला सिंह; CBI को दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[महिला आयोग ने भोपाल सेंट्रल जेल में की मुलाकात, मेडिकल और डिजिटल सबूतों की कड़ियां जोड़ने में जुटी CBI]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/6a2a537bb245b/article-55595"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/twisha-sharma-case-(5).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भोपाल की चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। एक ओर जहां केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) मेडिकल, डिजिटल और फोरेंसिक सबूतों को खंगाल रही है, वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश महिला आयोग की टीम ने भोपाल सेंट्रल जेल पहुंचकर मामले में गिरफ्तार रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह से मुलाकात की। जेल में हुई इस मुलाकात के दौरान गिरिबाला सिंह शांत नजर आईं और उन्होंने किसी तरह की परेशानी होने से इनकार किया।</p>
<p style="text-align:justify;">महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव के नेतृत्व में पहुंची टीम ने जेल में महिला वार्ड, अस्पताल, रसोईघर, पुस्तकालय, आर्ट एंड क्राफ्ट सेंटर और अन्य सुविधाओं का निरीक्षण किया। इसी दौरान गिरिबाला सिंह पुस्तकालय में देवदत्त पटनायक की चर्चित पुस्तक ‘द प्रेग्नेंट किंग’ पढ़ती हुई मिलीं। बताया गया कि आयोग की टीम को देखते ही उन्होंने किताब बंद कर दी। बातचीत के दौरान आयोग ने उनके स्वास्थ्य, भोजन और जेल की व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली। गिरिबाला सिंह ने कहा कि उन्हें किसी प्रकार की समस्या नहीं है और जेल में सभी व्यवस्थाएं सामान्य हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">महिला आयोग ने भी अपनी प्रारंभिक टिप्पणी में कहा कि निरीक्षण के दौरान ऐसा कोई संकेत नहीं मिला कि गिरिबाला सिंह को जेल में विशेष सुविधा या वीआईपी ट्रीटमेंट दिया जा रहा हो। हालांकि इस मामले को लेकर पहले से ऐसे आरोप लगते रहे हैं, जिसके बाद जेल प्रशासन ने सुरक्षा और निगरानी के इंतजाम बढ़ा दिए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उधर, ट्विशा शर्मा मौत मामले की जांच कर रही CBI को दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिल गई है। जांच एजेंसी अब इस रिपोर्ट का मिलान पहले से उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड और फोरेंसिक तथ्यों से कर रही है। सूत्रों के मुताबिक एजेंसी विशेष रूप से प्रेग्नेंसी, कथित अबॉर्शन, शरीर पर मिले चोटों के निशान और फांसी से जुड़े सबूतों की पड़ताल कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">CBI की जांच का एक अहम हिस्सा डिजिटल सबूत भी हैं। एजेंसी मोबाइल फोन, लैपटॉप, चैट रिकॉर्ड, कॉल डिटेल्स, फोटो, वीडियो और डिलीट किए गए डेटा की जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल जानकारी मामले की पूरी घटनाक्रम को समझने और विभिन्न दावों की पुष्टि करने में मदद कर सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच ट्विशा के परिवार की ओर से लगातार जांच में शुरुआती स्तर पर हुई कथित चूकों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। परिवार के वकील अंकुर पांडे का कहना है कि घटनास्थल से जब्त किए गए सबूतों और उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। उनका आरोप है कि जिस रस्सी या बेल्ट को मामले में अहम सबूत माना गया, उसकी जब्ती प्रक्रिया में कई कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">वकील के अनुसार, घटनास्थल की तस्वीरों में दो अलग-अलग स्थानों पर दो बेल्ट दिखाई दे रही थीं, लेकिन पुलिस रिकॉर्ड में केवल एक बेल्ट की जब्ती का उल्लेख किया गया। इसके अलावा जिस व्यक्ति ने उस बेल्ट या रस्सी की पहचान की, उसका नाम भी दस्तावेजों में स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं किया गया। परिवार का दावा है कि ऐसी खामियां जांच को प्रभावित कर सकती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले में एक और महत्वपूर्ण सवाल उन दस्तावेजों को लेकर उठाया गया है जो कथित तौर पर केस डायरी का हिस्सा थे। ट्विशा के परिवार के वकील का आरोप है कि जांच से जुड़े कुछ दस्तावेज आरोपियों तक समय से पहले पहुंच गए थे, जिससे उन्हें कानूनी रणनीति बनाने में मदद मिली। हालांकि इस संबंध में अभी तक किसी जांच एजेंसी की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।</p>
<p style="text-align:justify;">CBI अब शुरुआती जांच करने वाले पुलिस अधिकारियों से भी दोबारा पूछताछ की तैयारी कर रही है। विशेष रूप से उस पुलिस अधिकारी की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं जिसने घटनास्थल का निरीक्षण किया था और सबूतों की जब्ती की प्रक्रिया पूरी की थी। एजेंसी यह जानने का प्रयास कर रही है कि जांच के शुरुआती चरण में कहीं कोई लापरवाही या प्रक्रिया संबंधी त्रुटि तो नहीं हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले में ट्विशा की मानसिक स्थिति को लेकर भी जांच जारी है। गिरिबाला सिंह की ओर से अदालत में कुछ मेडिकल दस्तावेज पेश किए गए थे, जिनमें दावा किया गया था कि ट्विशा मानसिक तनाव और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही थीं। अब CBI इन दस्तावेजों की सत्यता की जांच कर रही है। इसी सिलसिले में मनोचिकित्सक डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी से भी पूछताछ की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">जेल प्रशासन के लिए भी यह मामला संवेदनशील बना हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, गिरिबाला सिंह ने अपने न्यायिक कार्यकाल के दौरान जिन आरोपियों को सजा सुनाई थी, उनमें से कई वर्तमान में भोपाल सेंट्रल जेल में बंद हैं। इसी वजह से उनकी सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। जेल परिसर में निगरानी बढ़ाई गई है और अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। पूरे मामले में CBI विभिन्न सबूतों, दस्तावेजों और गवाहों के बयानों को जोड़कर घटनाक्रम की पूरी तस्वीर सामने लाने की कोशिश कर रही है। दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिलने के बाद जांच के अगले चरण को महत्वपूर्ण माना जा रहा है </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 11:52:23 +0530</pubDate>
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                <title>जबलपुर में दहेज प्रताड़ना और संदिग्ध मौत का मामला, मेजर दामाद पर हत्या के आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[3 करोड़ रुपये खर्च कर बेटी की शादी करने वाले पिता ने कोर्ट में लगाई न्याय की गुहार, पुलिस पर एफआईआर दर्ज न करने का आरोप]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/case-of-dowry-harassment-and-suspicious-death-in-jabalpur-major/article-54828"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/jabalpur-dowry-case.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश में भोपाल की एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला अभी चर्चा में बना हुआ है, इसी बीच जबलपुर से एक और गंभीर मामला सामने आया है जिसने दहेज प्रताड़ना और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। चेन्नई के रहने वाले व्यवसायी पी. दक्षिणामूर्ति ने अपनी 27 वर्षीय बेटी कविता नागार्जुन की मौत को हत्या बताते हुए सेना में मेजर पद पर पदस्थ अपने दामाद डॉ. ओम नागार्जुन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पिता का दावा है कि शादी में करोड़ों रुपये खर्च करने और महंगे उपहार देने के बावजूद अतिरिक्त दहेज की मांग की गई और मांग पूरी नहीं होने पर उनकी बेटी की जान ले ली गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामला अब न्यायालय तक पहुंच चुका है। परिजनों का आरोप है कि घटना को एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। इसके चलते उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। 3 जून को इस मामले में महत्वपूर्ण सुनवाई होने की जानकारी सामने आई है। मामला सामने आने के बाद यह प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है। पीड़ित पिता के अनुसार उनकी इकलौती बेटी कविता पेशे से अधिवक्ता थीं। उनका विवाह 2 मार्च 2025 को तमिलनाडु निवासी डॉ. ओम नागार्जुन के साथ हुआ था, जो वर्तमान में जबलपुर के जेकेआरआरसी में मेजर के पद पर तैनात बताए जाते हैं। परिवार का कहना है कि बेटी की शादी धूमधाम से की गई थी और लगभग 3 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। शादी में करीब 100 तोला सोना, 25 लाख रुपये का हीरे का हार, लग्जरी कार सहित कई महंगे उपहार दिए गए थे। परिजनों का आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद ही कविता को अतिरिक्त दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाने लगा। बताया गया कि मेजर दामाद नया अस्पताल स्थापित करना चाहता था और इसके लिए वह कविता पर मायके से 2 करोड़ रुपये लाने का दबाव बना रहा था। परिवार का कहना है कि कविता ने इस मांग को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद से उसके साथ व्यवहार और अधिक कठोर हो गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना के दिन की जानकारी देते हुए परिजनों ने बताया कि कविता की तबीयत खराब होने की सूचना मिली थी। जब उसे अस्पताल ले जाया गया तो डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पोस्टमार्टम कराया गया। परिजनों का दावा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर पर चोट के निशान दर्ज किए गए थे, लेकिन मौत का कारण कार्डियक अरेस्ट बताया गया। यही बात परिवार के संदेह को और गहरा करती है। कविता की मौत की खबर मिलने के बाद परिवार चेन्नई से जबलपुर पहुंचा। यहां पहुंचकर पिता ने बेटी की मौत को संदिग्ध बताते हुए गोराबाजार थाने में शिकायत दर्ज कराई और एफआईआर की मांग की। उनका आरोप है कि पुलिस ने उनकी शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। पुलिस द्वारा पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देकर मामला दर्ज करने से इनकार किए जाने का आरोप भी लगाया गया है। जब पुलिस स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो परिवार ने अदालत की शरण ली। जिला न्यायालय में दाखिल याचिका के साथ कई दस्तावेज और कथित सबूत भी प्रस्तुत किए गए हैं। परिवार के वकील का कहना है कि शादी से पहले और बाद की परिस्थितियों से जुड़े कई ऐसे तथ्य हैं जो दहेज प्रताड़ना की ओर संकेत करते हैं। अदालत में यह भी बताया गया कि विवाह से पहले महंगी कार की मांग की गई थी, हालांकि बाद में लड़की पक्ष ने अन्य लग्जरी वाहन और बड़ी मात्रा में सोना-चांदी तथा घरेलू सामान दिया था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पिता पी. दक्षिणामूर्ति ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि उनकी बेटी की मौत प्राकृतिक नहीं बल्कि सुनियोजित साजिश का परिणाम है। उनका कहना है कि पति और उसके परिवार ने दहेज के लालच में कविता को लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया। उन्होंने अदालत से निष्पक्ष जांच और एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है। यदि अदालत इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश देती है तो जांच का दायरा और व्यापक हो सकता है। ऐसे मामलों में पुलिस को दहेज प्रताड़ना, संदिग्ध मृत्यु और अन्य संबंधित पहलुओं की जांच करनी पड़ती है। फिलहाल अदालत में दायर याचिका पर सभी की नजर बनी हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 13:31:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>नासिक TCS केस में 1500 पन्नों की चार्जशीट हुई दाखिल, चैट्स और मेडिकल रिपोर्ट भी शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[नासिक TCS उत्पीड़न केस में SIT ने 1500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। WhatsApp चैट, मेडिकल रिपोर्ट और 17 गवाहों के बयान शामिल।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/1500-page-charge-sheet-filed-in-nashik-tcs-case-chats/article-54043"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/nashik-tcs-case-charge-sheet.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">महाराष्ट्र के नासिक में चर्चित </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">TCS <span lang="hi" xml:lang="hi">उत्पीड़न और कथित धर्मांतरण मामले में अब जांच में बड़ा मोड़ आया है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (</span>SIT) <span lang="hi" xml:lang="hi">ने इस मामले में पहली चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें करीब 1500 पन्ने हैं। इस चार्जशीट में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जैसे डिजिटल सबूत</span>, WhatsApp <span lang="hi" xml:lang="hi">चैट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मेडिकल रिपोर्ट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बैंक रिकॉर्ड और गवाहों के बयान शामिल हैं। मामला अप्रैल 2026 में तब सामने आया जब कुछ महिला कर्मचारियों ने </span>Tata Consultancy Services <span lang="hi" xml:lang="hi">के नासिक </span>BPO <span lang="hi" xml:lang="hi">यूनिट में यौन उत्पीड़न</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मानसिक प्रताड़ना और जबरन धर्म परिवर्तन के आरोप लगाए थे। शुरुआती शिकायतों के बाद मामला तेजी से बढ़ा और पुलिस ने विशेष जांच टीम का गठन किया। अब तक इस केस में कुल 9</span> FIR <span lang="hi" xml:lang="hi">दर्ज की जा चुकी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि अभी तक पहली चार्जशीट सिर्फ एक ही मामले में प्रस्तुत की गई है। नासिक पुलिस के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जांच अभी भी जारी है और आगे सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी दाखिल की जा सकती है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">चार्जशीट में चार आरोपियों के नाम शामिल हैं: दानिश शेख</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तौसिफ बिलाल अख्तर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निदा इजाज खान और मदीन मजीद पटेल। बताया जाता है कि </span>HR <span lang="hi" xml:lang="hi">मैनेजर रहीं निदा खान फिलहाल फरार हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और पुलिस उनकी तलाश कर रही है। प्रारंभिक जांच में कुछ महिला कर्मचारियों ने यह आरोप लगाया था कि कार्यालय के अंदर मानसिक दबाव डाला जाता था और शिकायत करने पर नौकरी पर प्रभाव डालने की धमकी दी जाती थी। कुछ पीड़िताओं ने शादी का झांसा देकर संबंध बनाने और धार्मिक दबाव डालने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं। इस मामले में </span>SC/ST <span lang="hi" xml:lang="hi">एक्ट की धाराएं भी जोड़ी गई हैं। </span>SIT <span lang="hi" xml:lang="hi">ने जांच के दौरान 17 गवाहों के बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराए हैं। पुलिस के सूत्रों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल डेटा की जांच में कई बातचीत और दस्तावेज मिले हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्हें अब कोर्ट रिकॉर्ड में शामिल किया गया है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं के तहत केस दर्ज किया है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें बलात्कार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यौन उत्पीड़न</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आपराधिक साजिश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धोखे से संबंध बनाना और धार्मिक भावनाओं को आहत करने जैसी धाराएं शामिल हैं। जांच अधिकारियों के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कथित घटनाएं 2022 से 2026 के बीच हुई हैं। इस दौरान कई पीड़िताओं ने अलग-अलग समय पर शिकायतें दीं। मामला सामने आने के बाद यह राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर काफी बहस हुई। </span>SIT <span lang="hi" xml:lang="hi">का दावा है कि जांच में कुछ संगठित गतिविधियों के संकेत मिले हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इस पर अंतिम निष्कर्ष कोर्ट की प्रक्रिया के बाद ही साफ होगा। फिलहाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सभी आरोपियों को जमानत नहीं मिली है और पुलिस बाकी मामलों की जांच में जुटी हुई है। आने वाले दिनों में और खुलासे होने की भी संभावना जताई जा रही है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/1500-page-charge-sheet-filed-in-nashik-tcs-case-chats/article-54043</link>
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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 13:45:01 +0530</pubDate>
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