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                <title>Bar Council of India - दैनिक जागरण</title>
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                <title>सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, AI के फर्जी कानूनी उदाहरणों को बताया न्याय व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[एनसीएलटी का फैसला रद्द करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से तैयार किए गए झूठे कानूनी उदाहरण अदालतों में पेश करना न्यायिक व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर असर डाल सकता है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/supreme-courts-strict-comment-calls-fake-legal-examples-of-ai/article-57706"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/supreme-court-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने अदालतों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार किए गए फर्जी कानूनी उदाहरणों के इस्तेमाल पर कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे न्याय व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताया है। अदालत ने कहा कि AI तकनीक अपने आप में समस्या नहीं है, लेकिन यदि उससे तैयार की गई गलत या मनगढ़ंत जानकारी को असली कानूनी मिसाल बताकर अदालत के सामने पेश किया जाता है तो इससे न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सीधा असर पड़ता है। कोर्ट ने इस खतरे की गंभीरता समझाने के लिए भोपाल गैस त्रासदी में मिथाइल आइसोसाइनेट गैस के रिसाव का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह जहरीली गैस का प्रभाव दूरगामी और विनाशकारी था, उसी तरह न्यायिक प्रक्रिया में झूठी कानूनी जानकारी का प्रवेश भी बेहद नुकसानदायक हो सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने यह टिप्पणी नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) मुंबई के एक आदेश को रद्द करते हुए की। मामला एस्सेल इन्फ्राप्रोजेक्ट लिमिटेड, जम्मू-कश्मीर बैंक लिमिटेड और पूजा रमेश सिंह से जुड़े दिवालियापन विवाद का था। एनसीएलटी ने दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) की धारा-7 के तहत दायर याचिका को स्वीकार करते हुए अपने फैसले में कई ऐसे कानूनी मामलों का हवाला दिया था, जिनका वास्तविक अस्तित्व ही नहीं था। जांच के दौरान सामने आया कि आदेश में जिन फैसलों का उल्लेख किया गया, उनमें कुछ पूरी तरह मनगढ़ंत थे और उनकी कानूनी साइटेशन भी वास्तविक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती थीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालतों में किसी भी फैसले का आधार केवल प्रमाणिक और सत्यापित कानूनी सामग्री होनी चाहिए। यदि किसी आदेश में ऐसे मामलों का हवाला दिया जाए जो वास्तव में मौजूद ही नहीं हैं, तो यह केवल तकनीकी गलती नहीं बल्कि न्यायिक प्रक्रिया की मूल भावना के खिलाफ है। पीठ ने स्पष्ट किया कि इस तरह की चूक लोगों के न्यायपालिका पर भरोसे को कमजोर कर सकती है और भविष्य के मामलों में भी गलत कानूनी आधार तैयार कर सकती है। अदालत ने कहा कि न्याय व्यवस्था का पूरा ढांचा सत्य, पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर आधारित है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की फर्जी जानकारी के लिए कोई जगह नहीं हो सकती।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामले की सुनवाई के दौरान जम्मू-कश्मीर बैंक लिमिटेड ने शपथपत्र दाखिल कर कहा कि उसके वकीलों ने अपने तर्कों में इन कथित मामलों का कोई उल्लेख नहीं किया था। बैंक के अनुसार, एनसीएलटी ने अपने स्तर पर की गई कानूनी रिसर्च के दौरान इन उदाहरणों को आदेश में शामिल किया। इस दलील के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पूरे रिकॉर्ड की समीक्षा की और पाया कि आदेश में शामिल कुछ कानूनी संदर्भ वास्तविक न्यायिक अभिलेखों में उपलब्ध ही नहीं थे। इसके बाद अदालत ने एनसीएलटी का आदेश रद्द कर दिया और भविष्य के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश भी जारी किए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि वह AI तकनीक के उपयोग के खिलाफ नहीं है। अदालत ने कहा कि आधुनिक तकनीक न्यायिक शोध और दस्तावेजों की तैयारी में उपयोगी हो सकती है, लेकिन अंतिम जिम्मेदारी हमेशा इंसानों की ही रहेगी। यदि कोई वकील बिना तथ्य जांचे AI से प्राप्त जानकारी को अदालत में पेश करता है, तो यह उसकी गंभीर पेशेवर लापरवाही मानी जाएगी। इसी तरह यदि कोई न्यायिक अधिकारी या न्यायाधीश बिना सत्यापन के ऐसी सामग्री पर भरोसा करता है, तो यह भी न्यायिक जिम्मेदारी के अनुरूप नहीं माना जाएगा। अदालत ने कहा कि तकनीक केवल सहायक हो सकती है, लेकिन निर्णय और तथ्य सत्यापन का दायित्व मानव विवेक पर ही आधारित रहना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पीठ ने कहा कि केवल चेतावनी देना पर्याप्त नहीं होगा। यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर या लापरवाही से अदालत में फर्जी AI-आधारित कानूनी सामग्री प्रस्तुत करता है, तो उसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए। अदालत ने इस मुद्दे को भविष्य की न्यायिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि समय रहते स्पष्ट नियम बनाना आवश्यक है ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। न्यायपालिका में विश्वास बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि अदालतों में प्रस्तुत हर कानूनी संदर्भ का स्वतंत्र सत्यापन किया जाए। इसी क्रम में सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया को एक विशेषज्ञ समिति गठित करने की सिफारिश की है। अदालत का कहना है कि यह समिति अदालतों में AI के जिम्मेदार उपयोग के लिए दिशा-निर्देश तैयार करे और यह सुनिश्चित करे कि किसी भी वकील या पक्षकार द्वारा फर्जी अथवा भ्रामक AI सामग्री प्रस्तुत न की जाए। यदि ऐसे मामलों में नियमों का उल्लंघन होता है तो उसके लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई का भी प्रावधान होना चाहिए। अदालत ने कहा कि तकनीक का उपयोग स्वागतयोग्य है, लेकिन न्याय की प्रक्रिया में सत्य और प्रमाणिकता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 06:06:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>ऑल इंडिया बार परीक्षा का एडमिट कार्ड हुआ जारी, 7 जून को होगी परीक्षा</title>
                                    <description><![CDATA[AIBE 21 Admit Card 2026 जारी हो गया है। उम्मीदवार allindiabarexamination.com से हॉल टिकट डाउनलोड कर सकते हैं। परीक्षा 7 जून को होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/admit-card-of-all-india-bar-exam-released-exam-will/article-54050"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/aibe-21-admit-card-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"><strong>AIBE <span lang="hi" xml:lang="hi">21</span> Admit Card </strong><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>2026:</strong> बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या </span>AIBE <span lang="hi" xml:lang="hi">21</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">का एडमिट कार्ड जारी कर दिया है। परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवार अब आधिकारिक वेबसाइट </span>allindiabarexamination.com <span lang="hi" xml:lang="hi">पर जाकर अपना हॉल टिकट डाउनलोड कर सकते हैं। </span>AIBE <span lang="hi" xml:lang="hi">21 परीक्षा 7 जून 2026 को होने जा रही है। परीक्षा की तारीख नजदीक आते ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उम्मीदवारों के बीच एडमिट कार्ड डाउनलोड करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना एडमिट कार्ड के किसी भी अभ्यर्थी को परीक्षा के केंद्र में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इसलिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम समय का इंतजार न करें और जल्दी से अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर लें। जानकारी के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एडमिट कार्ड डाउनलोड करने की सुविधा परीक्षा के दिन दोपहर 1 बजे तक उपलब्ध रहेगी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">AIBE <span lang="hi" xml:lang="hi">21 एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के लिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उम्मीदवार को सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। वहां होमपेज पर </span>“AIBE Admit Card <span lang="hi" xml:lang="hi">2026</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">लिंक पर क्लिक करना होगा। फिर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लॉगिन आईडी और पासवर्ड दर्ज कर सबमिट करना होगा। लॉगिन के बाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एडमिट कार्ड स्क्रीन पर दिखेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे डाउनलोड करके प्रिंट निकाला जा सकता है। उम्मीदवारों से अनुरोध किया गया है कि वे एडमिट कार्ड पर दर्ज सभी जानकारी को ध्यान से चेक करें। इसमें उम्मीदवार का नाम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोल नंबर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परीक्षा केंद्र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रिपोर्टिंग टाइम और परीक्षा से जुड़ी जरूरी गाइडलाइन शामिल होंगी। अगर कोई गलती नजर आती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो तुरंत </span>BCI <span lang="hi" xml:lang="hi">हेल्प डेस्क से संपर्क करने को कहा गया है। परीक्षा केंद्र पर फोटो आईडी के साथ एडमिट कार्ड ले जाना अनिवार्य रहेगा।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ऑल इंडिया बार परीक्षा देशभर के लॉ ग्रेजुएट्स के लिए बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। 3 साल या 5 साल का </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">LLB <span lang="hi" xml:lang="hi">कोर्स पूरा कर चुके उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। दरअसल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह एक सर्टिफिकेशन एग्जाम है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे पास करने के बाद उम्मीदवारों को सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस यानी </span>COP <span lang="hi" xml:lang="hi">दिया जाता है। इसके बाद ही वे देश की अदालतों में वकालत करने के योग्य माने जाते हैं। हर साल बड़ी संख्या में लॉ ग्रेजुएट्स इस परीक्षा में शामिल होते हैं। इस बार भी परीक्षा को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं और उम्मीदवार एडमिट कार्ड डाउनलोड करने में जुटे हुए हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 14:57:18 +0530</pubDate>
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