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                <title>Health Department - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Health Department RSS Feed</description>
                
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                <title>रायपुर ने रचा नया रिकॉर्ड, 99 सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं को मिला NQAS प्रमाणन</title>
                                    <description><![CDATA[इलाज, जांच, स्वच्छता और मरीजों की सुरक्षा के मानकों पर खरे उतरे अस्पताल; छत्तीसगढ़ का पहला जिला बना रायपुर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/6a4f3c907401d/article-58260"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/raipur-health.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">रायपुर जिले ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जिले की 99 सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्यूएएस) यानी नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड (NQAS) का प्रमाणन प्राप्त हुआ है। इस उपलब्धि के साथ रायपुर छत्तीसगढ़ का पहला जिला बन गया है, जहां सबसे अधिक सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को यह राष्ट्रीय स्तर का गुणवत्ता प्रमाणपत्र मिला है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह उपलब्धि लगातार मॉनिटरिंग, बेहतर प्रबंधन और स्वास्थ्य कर्मियों की टीमवर्क का परिणाम है। अभी जिले की दो स्वास्थ्य संस्थाओं के मूल्यांकन का परिणाम भारत सरकार से आना बाकी है, जबकि तीन अन्य संस्थानों का राष्ट्रीय स्तर पर मूल्यांकन होना शेष है। राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा संचालित एक महत्वपूर्ण गुणवत्ता मूल्यांकन कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों को बेहतर, सुरक्षित और मानक आधारित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। प्रमाणन प्रक्रिया के दौरान अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थाओं का कई स्तरों पर विस्तृत मूल्यांकन किया जाता है। इनमें मरीजों की सुरक्षा, संक्रमण नियंत्रण, इलाज और जांच की गुणवत्ता, दवाओं की उपलब्धता, अस्पताल की स्वच्छता, रिकॉर्ड प्रबंधन, जैव-चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन, मरीजों की सुविधा और प्रशासनिक व्यवस्था जैसे अनेक मानकों को परखा जाता है। निर्धारित मानकों पर सफल होने के बाद ही किसी स्वास्थ्य संस्था को NQAS प्रमाणपत्र दिया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्वास्थ्य विभाग के अनुसार रायपुर जिले में पिछले कुछ वर्षों से सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे थे। अस्पतालों में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने, चिकित्सकीय सेवाओं में सुधार, नियमित निरीक्षण और कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया गया। इसी का परिणाम है कि बड़ी संख्या में स्वास्थ्य संस्थाएं राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर खरी उतर सकीं। अधिकारियों का कहना है कि यह प्रमाणन केवल एक उपलब्धि नहीं बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार सुधार की जिम्मेदारी भी है। रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने इस उपलब्धि पर स्वास्थ्य विभाग की पूरी टीम को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि जिले के प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उनके अनुसार स्वास्थ्य संस्थाओं में नियमित मॉनिटरिंग, समय-समय पर समीक्षा बैठकें और टीमवर्क के कारण यह सफलता हासिल हुई है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी गुणवत्ता के इन मानकों को बनाए रखने और स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास जारी रहेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश चौधरी ने कहा कि NQAS प्रमाणन किसी भी स्वास्थ्य संस्था के लिए गुणवत्ता और विश्वसनीयता का महत्वपूर्ण प्रमाण होता है। उन्होंने बताया कि मरीजों की सुरक्षा, संक्रमण नियंत्रण, अस्पतालों की स्वच्छता और सेवा व्यवस्था की लगातार निगरानी की जा रही है। यही कारण है कि रायपुर जिले ने प्रदेश में सबसे अधिक NQAS प्रमाणित स्वास्थ्य संस्थाओं वाला पहला जिला बनने का गौरव हासिल किया है। उन्होंने यह भी बताया कि जिन संस्थानों का मूल्यांकन अभी बाकी है, उन्हें भी आवश्यक तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">NQAS प्रमाणन का सबसे बड़ा लाभ आम मरीजों को मिलता है। इससे अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता बेहतर होती है, मरीजों को सुरक्षित वातावरण मिलता है और स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ती है। अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण की प्रभावी व्यवस्था होने से मरीजों और स्वास्थ्य कर्मियों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है। साथ ही रिकॉर्ड प्रबंधन और दवा वितरण प्रणाली में सुधार आने से सेवाएं अधिक व्यवस्थित और भरोसेमंद बनती हैं। सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं में गुणवत्ता सुधार का सीधा असर मरीजों के भरोसे पर भी पड़ता है। जब अस्पताल राष्ट्रीय स्तर के गुणवत्ता मानकों को पूरा करते हैं, तो लोग सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर अधिक विश्वास जताते हैं। इससे निजी अस्पतालों पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलती है। रायपुर जिले में बड़ी संख्या में स्वास्थ्य संस्थाओं को NQAS प्रमाणन मिलने के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि प्रदेश के अन्य जिले भी इसी दिशा में तेजी से काम करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक के तहत प्रमाणित संस्थाओं का समय-समय पर दोबारा मूल्यांकन भी किया जाता है। इसलिए प्रमाणपत्र मिलने के बाद भी अस्पतालों को लगातार गुणवत्ता बनाए रखनी होती है। यदि किसी संस्था में निर्धारित मानकों का पालन नहीं होता है तो उसका प्रमाणन प्रभावित हो सकता है। इसी कारण स्वास्थ्य विभाग लगातार निगरानी और सुधार की प्रक्रिया को जारी रखता है। रायपुर की इस उपलब्धि को प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इससे जिले की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी। साथ ही यह उपलब्धि अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा का काम करेगी। विभाग का लक्ष्य है कि आने वाले समय में शेष स्वास्थ्य संस्थाओं को भी NQAS प्रमाणन दिलाया जाए और पूरे प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 13:13:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मानसून तैयारियों पर सख्त हुए कलेक्टर, सभी पीएचसी में एंटीवेनम वैक्सीन उपलब्ध रखने के निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[बलौदाबाजार में स्वास्थ्य सेवाओं, बाढ़ प्रबंधन, पेयजल व्यवस्था और खरीफ सीजन की तैयारियों की समीक्षा; अस्पतालों, क्विक रिस्पॉन्स टीम और कंट्रोल रूम को अलर्ट रहने के आदेश।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/collector-becomes-strict-on-monsoon-preparations-instructions-to-keep-antivenom/article-58200"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/balodabazar-news-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">मानसून के दौरान संभावित स्वास्थ्य और आपदा संबंधी चुनौतियों को देखते हुए बलौदाबाजार जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मंगलवार को आयोजित समय-सीमा बैठक में कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में पर्याप्त मात्रा में एंटीवेनम वैक्सीन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में सर्पदंश की घटनाएं बढ़ जाती हैं, इसलिए किसी भी मरीज को इलाज के लिए इंतजार नहीं करना पड़े। सभी स्वास्थ्य केंद्रों में दवाइयों, जरूरी उपकरणों और प्रशिक्षित स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए ताकि आपात स्थिति में तुरंत उपचार शुरू किया जा सके। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ राजस्व, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, कृषि और आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों ने भी भाग लिया।</p>
<p>कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि मानसून के दौरान मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में पूरे स्वास्थ्य अमले को अलर्ट मोड पर रखा जाए और किसी भी क्षेत्र से बीमारी फैलने की सूचना मिलते ही तत्काल कार्रवाई की जाए। विकासखंड स्तर पर गठित क्विक रिस्पॉन्स टीमों को सक्रिय रखने के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने कहा कि यदि किसी गांव या मोहल्ले में अचानक बुखार, डायरिया, उल्टी या अन्य संक्रामक बीमारी के मामले सामने आते हैं तो टीम तुरंत मौके पर पहुंचे और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराए। अधिकारियों के अनुसार समय रहते कार्रवाई होने से बीमारी के फैलाव को रोका जा सकता है।</p>
<p>बैठक में मितानिनों की भूमिका पर भी विशेष जोर दिया गया। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि सभी मितानिनें अपनी दवा पेटी में आवश्यक दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक रखें और नियमित रूप से घर-घर जाकर लोगों के स्वास्थ्य की जानकारी लें। यदि किसी परिवार में कोई व्यक्ति बीमार मिले या संक्रामक बीमारी के लक्षण दिखाई दें तो इसकी सूचना तुरंत संबंधित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को दी जाए। साथ ही लोगों को साफ-सफाई, हाथ धोने, उबला या स्वच्छ पानी पीने और खुले में रखे भोजन से बचने के बारे में जागरूक करने को भी कहा गया। प्रशासन का मानना है कि गांव स्तर पर सक्रिय निगरानी से कई बीमारियों को शुरुआती चरण में ही नियंत्रित किया जा सकता है।</p>
<p>बरसात के मौसम में पेयजल की शुद्धता भी प्रशासन की प्राथमिकता में शामिल रही। बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को निर्देश दिए गए कि जिले के सभी पेयजल स्रोतों की जांच समय पर पूरी की जाए और जहां जरूरत हो वहां क्लोरीनीकरण कराया जाए। कलेक्टर ने कहा कि दूषित पानी के कारण डायरिया और अन्य जलजनित बीमारियां तेजी से फैल सकती हैं, इसलिए किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोगों को स्वच्छ पेयजल लगातार उपलब्ध हो।</p>
<p>बैठक के दौरान संभावित बाढ़ और जलभराव की स्थिति पर भी विस्तार से चर्चा हुई। प्रशासन ने नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए राजस्व विभाग, पुलिस और आपदा राहत दलों को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। जिले के पांच चिन्हित पुलों पर विशेष निगरानी रखने और जरूरत पड़ने पर आवागमन अस्थायी रूप से रोकने की तैयारी रखने को कहा गया। जिला कंट्रोल रूम को चौबीसों घंटे सक्रिय रखने और किसी भी आपात सूचना पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। अधिकारियों से कहा गया कि राहत एवं बचाव कार्यों में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए।</p>
<p>कृषि क्षेत्र की तैयारियों की भी बैठक में समीक्षा की गई। खरीफ सीजन को देखते हुए किसानों के लिए खाद और बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि किसी भी समिति में उर्वरक या बीज की कमी नहीं होनी चाहिए। किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के तहत ऋण वितरण की स्थिति की भी समीक्षा की गई और पात्र किसानों को समय पर लाभ दिलाने पर जोर दिया गया। इसके अलावा एग्रीस्टेक पंजीयन की प्रगति की जानकारी लेते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा में कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए।</p>
<p>समय-सीमा बैठक में जिले में चल रही विभिन्न सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों की भी समीक्षा की गई। राजस्व प्रकरणों के निराकरण, स्वामित्व योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री जनदर्शन, सीएम हेल्पलाइन, सीपी ग्राम्स और सड़क तथा पुल-पुलिया निर्माण से जुड़े मामलों की प्रगति पर चर्चा हुई। कलेक्टर ने सभी विभागों को लंबित मामलों का जल्द समाधान करने और आम नागरिकों की शिकायतों का समय पर निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक समय पर पहुंचना चाहिए और विकास कार्यों में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।</p>
<p>बैठक में अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ काम करने की भी सलाह दी गई। कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि मानसून के दौरान छोटी लापरवाही भी बड़ी समस्या का कारण बन सकती है। इसलिए स्वास्थ्य, पेयजल, राहत एवं बचाव, कृषि और राजस्व विभाग लगातार एक-दूसरे के संपर्क में रहें और किसी भी स्थिति में तत्काल संयुक्त कार्रवाई करें। उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य केवल आपदा आने के बाद राहत पहुंचाना नहीं बल्कि पहले से ऐसी तैयारी करना है जिससे लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 15:53:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>AI से बने शपथ-पत्र पर भड़के चीफ जस्टिस, CIMS की व्यवस्था पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी</title>
                                    <description><![CDATA[बिलासपुर स्थित CIMS अस्पताल की अव्यवस्थाओं पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि कागजों में सब कुछ ठीक दिखाने से हकीकत नहीं बदलती। जरूरतमंद मरीजों को बेहतर इलाज मिलना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/chief-justice-angry-over-affidavit-made-by-ai-high-court/article-58199"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/cims-bilaspur.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (CIMS) की बदहाल व्यवस्थाओं और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई। सुनवाई के दौरान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव की ओर से अदालत में प्रस्तुत किए गए शपथ-पत्र को देखकर मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि दस्तावेज के कई हिस्सों में एक जैसी भाषा और दोहराव दिखाई देता है, जिससे यह प्रतीत होता है कि इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से तैयार किया गया है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केवल व्यवस्थित और आकर्षक दस्तावेज पेश करने से अस्पताल की वास्तविक स्थिति नहीं बदल जाती।</p>
<p style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यदि अस्पताल में सभी व्यवस्थाएं वास्तव में संतोषजनक होतीं तो मामला अदालत तक पहुंचता ही नहीं। उन्होंने सरकार और संबंधित अधिकारियों को यह भी कहा कि अदालत को गुमराह करने की बजाय अस्पताल की वास्तविक स्थिति से अवगत कराया जाए। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि जनहित याचिका का उद्देश्य किसी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करना नहीं, बल्कि अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार सुनिश्चित करना है ताकि मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने यह भी कहा कि किसी सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए आने वाला मरीज केवल मशीनों और इमारतों पर भरोसा नहीं करता, बल्कि उसे समय पर उपचार और आवश्यक सुविधाओं की उम्मीद होती है। यदि जरूरतमंद व्यक्ति को सही समय पर इलाज मिलेगा तो वह अस्पताल और वहां कार्यरत लोगों के लिए दुआ करेगा। इसलिए केवल कागजों पर दावे करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि वास्तविक सुधार दिखाई देना भी जरूरी है।</p>
<p style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष मार्च और अप्रैल महीने में किए गए निरीक्षण की रिपोर्ट भी रखी गई। कोर्ट कमिश्नरों ने अपनी रिपोर्ट में अस्पताल की कई गंभीर खामियों का उल्लेख किया। रिपोर्ट के अनुसार अस्पताल की इमारत में कई स्थानों पर पानी का रिसाव हो रहा था और हाल ही में हुई बारिश के बाद अस्पताल के कुछ हिस्सों में पानी भर गया था। इसके अलावा अस्पताल का फायर फाइटिंग सिस्टम भी लंबे समय से बंद पड़ा हुआ मिला, जिससे किसी भी आपात स्थिति में मरीजों और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि फायर फाइटिंग सिस्टम की मरम्मत के लिए 15 जून 2026 को आदेश जारी कर दिया गया था और वर्तमान में मरम्मत का कार्य तेजी से चल रहा है। अधिकारियों ने दावा किया कि जल्द ही यह प्रणाली पूरी तरह चालू कर दी जाएगी। हालांकि अदालत ने इस दावे पर संतोष व्यक्त करने के बजाय कहा कि इन कार्यों की वास्तविक स्थिति का सत्यापन आवश्यक है।</p>
<p style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (CGMSC) ने भी अदालत में एक अलग शपथ-पत्र प्रस्तुत किया। इसमें CIMS के लिए खरीदी जा रही आधुनिक चिकित्सा मशीनों और उपकरणों की विस्तृत जानकारी दी गई। रिपोर्ट के अनुसार अस्पताल के लिए कुल 31 अत्याधुनिक मशीनों की खरीद प्रक्रिया जारी है। इनमें से 13 मशीनें अस्पताल पहुंच चुकी हैं, जबकि दो मशीनों के लिए जून महीने में खरीद आदेश जारी किए जा चुके हैं। दो अन्य मशीनों की कीमत अधिक होने के कारण उनकी खरीद के लिए CIMS प्रशासन से अतिरिक्त स्वीकृति मांगी गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">शपथ-पत्र में यह भी बताया गया कि कुछ मशीनें अभी तकनीकी परीक्षण के चरण में हैं। परीक्षण पूरा होने के बाद उनकी वित्तीय बोली खोली जाएगी। वहीं कुछ अन्य उपकरणों के टेंडर का मूल्यांकन जारी है और शेष मशीनों की निविदाएं भी तय कार्यक्रम के अनुसार खोली जानी हैं। अदालत ने इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी दर्ज करते हुए कहा कि मशीनों की खरीद तभी सार्थक मानी जाएगी जब वे अस्पताल में स्थापित होकर मरीजों के इलाज में उपयोग होने लगें।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य न्यायाधीश ने यह भी स्पष्ट किया कि अदालत केवल सरकारी दावों पर निर्भर नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि कोर्ट कमिश्नर किसी भी समय अस्पताल का निरीक्षण कर सकते हैं और यह जांच सकते हैं कि अदालत में प्रस्तुत किए गए दावों के अनुरूप वास्तव में काम हुआ है या नहीं। उन्होंने अधिकारियों को याद दिलाया कि न्यायालय के समक्ष तथ्यों को पूरी ईमानदारी के साथ रखना उनकी जिम्मेदारी है।</p>
<p style="text-align:justify;">AI से तैयार किए गए शपथ-पत्र को लेकर की गई टिप्पणी भी सुनवाई का महत्वपूर्ण हिस्सा रही। अदालत ने संकेत दिया कि यदि किसी दस्तावेज को आधुनिक तकनीक की सहायता से तैयार किया जाता है, तब भी उसमें वास्तविक तथ्यों का सही और स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए। केवल भाषा को आकर्षक बनाकर या एक जैसी सामग्री दोहराकर अदालत को प्रभावित करने की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती। न्यायालय ने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे भविष्य में ऐसे दस्तावेज प्रस्तुत करें जो वास्तविक स्थिति का सटीक चित्र प्रस्तुत करें।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला पिछले कुछ समय से CIMS अस्पताल में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं, भवन की स्थिति, चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार चर्चा में है। जनहित याचिका के माध्यम से अस्पताल की कई कमियों को अदालत के सामने रखा गया था, जिसके बाद हाईकोर्ट ने नियमित रूप से इस मामले की निगरानी शुरू की। अदालत का मानना है कि सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारना राज्य की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 15:52:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हाईकोर्ट से CMHO डॉ. हसानी को बड़ी राहत: 62 नहीं, 65 वर्ष की उम्र में होंगे रिटायर</title>
                                    <description><![CDATA[इंदौर खंडपीठ का अहम फैसला, कहा- मेडिकल अधिकारियों की सेवाएं स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए जरूरी; डॉ. हसानी 65 वर्ष की आयु तक सेवा जारी रख सकेंगे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/big-relief-to-cmho-dr-hasani-from-high-court-he/article-58179"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/cmho-dr-madhav-prasad-hasani.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हसानी को बड़ी राहत देते हुए राज्य सरकार के उस आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसके तहत उन्हें 62 वर्ष की आयु पूरी होने पर 31 जुलाई 2026 को सेवानिवृत्त किया जाना था। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि डॉ. हसानी 65 वर्ष की आयु तक सेवा में बने रहने के पात्र हैं और राज्य सरकार को इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। यह फैसला केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि प्रदेश के चिकित्सा अधिकारियों के सेवा नियमों और सेवानिवृत्ति आयु से जुड़े मामलों में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि राज्य सरकार द्वारा चिकित्सा अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष निर्धारित करने का उद्देश्य अनुभवी डॉक्टरों की सेवाओं का अधिक समय तक लाभ स्वास्थ्य व्यवस्था को उपलब्ध कराना है।</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर 30 जनवरी 2026 को जारी उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें 62 वर्ष की आयु पूरी होने पर सेवानिवृत्त करने के निर्देश दिए गए थे। याचिका में कहा गया कि उन्होंने वर्ष 1999 में संविदा ग्रामीण चिकित्सा अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं शुरू की थीं। इसके बाद वर्ष 2005 में उनकी सेवाओं का नियमितीकरण किया गया और तब से उन्होंने लगातार चिकित्सा सेवाएं प्रदान की हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि डॉ. हसानी ने लंबे समय तक क्लीनिकल सेवाएं दीं और बाद में विभिन्न प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाते हुए मुख्य ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। उनके अनुभव और सेवा अवधि को देखते हुए उन्हें 65 वर्ष तक सेवा का लाभ मिलना चाहिए। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से यह भी तर्क रखा गया कि मध्यप्रदेश सरकार पहले ही मेडिकल अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष निर्धारित कर चुकी है। इसके अलावा हाईकोर्ट पूर्व में भी डॉ. कांतिलाल साहू सहित कई मामलों में इसी प्रकार का फैसला दे चुका है। ऐसे में समान परिस्थितियों में डॉ. हसानी को अलग तरीके से सेवानिवृत्त करना न्यायसंगत नहीं होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं राज्य सरकार की ओर से अदालत में दलील दी गई कि 65 वर्ष तक सेवा जारी रखने का लाभ केवल उन्हीं अधिकारियों को मिल सकता है, जो नियमों में निर्धारित सभी शर्तों को पूरा करते हों। सरकार का कहना था कि याचिकाकर्ता उन निर्धारित शर्तों के अनुरूप पात्र नहीं हैं, इसलिए उन्हें 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त करने का आदेश जारी किया गया था। दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति संदीप एन. भट्ट की एकलपीठ ने मामले का परीक्षण किया। अदालत ने पाया कि डॉ. हसानी वर्ष 1999 से लगातार चिकित्सा सेवाओं से जुड़े रहे हैं और उनके मामले के तथ्य पूर्व में दिए गए न्यायिक निर्णयों से काफी हद तक मेल खाते हैं। अदालत ने यह भी माना कि उन्होंने लंबे समय तक चिकित्सा क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई है और स्वास्थ्य सेवाओं में उनका अनुभव महत्वपूर्ण है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मेडिकल अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने का उद्देश्य केवल सेवा अवधि बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को अनुभवी चिकित्सकों की सेवाएं उपलब्ध कराना है। ऐसे में इस नीति की भावना को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि 30 जनवरी 2026 को जारी किया गया सेवानिवृत्ति आदेश विधिसम्मत नहीं है और इसे निरस्त किया जाता है। साथ ही यह भी निर्देश दिया कि डॉ. माधव प्रसाद हसानी को 65 वर्ष की आयु तक सेवा जारी रखने की अनुमति दी जाए और राज्य सरकार आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित करे। इस फैसले के बाद स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच भी चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि जिन चिकित्सा अधिकारियों के मामले समान परिस्थितियों वाले हैं, वे भी इस निर्णय का हवाला देते हुए कानूनी राहत की मांग कर सकते हैं। हालांकि प्रत्येक मामले का निर्णय उसके तथ्यों और सेवा रिकॉर्ड के आधार पर ही होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 13:54:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कबीर जयंती पर रायपुर में मांस-मटन बिक्री पर रोक, उल्लंघन पर होगी जब्ती</title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम ने जारी किए सख्त निर्देश, होटल और रेस्टोरेंट भी निगरानी के दायरे में, स्वास्थ्य विभाग की टीमें पूरे शहर में करेंगी निरीक्षण]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/6a42378c29b81/article-57313"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/kabir-jayanti.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर में कबीर जयंती के अवसर पर सोमवार 29 जून को मांस-मटन की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। रायपुर नगर निगम ने इस संबंध में आदेश जारी करते हुए पूरे नगर निगम क्षेत्र में सभी पशुवध गृहों और मांस-मटन की दुकानों को बंद रखने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ मौके पर कार्रवाई की जाएगी। यदि किसी दुकान, होटल या अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान में मांस-मटन की बिक्री या परोसने की पुष्टि होती है तो संबंधित सामग्री जब्त करने के साथ नियमानुसार कार्रवाई भी की जाएगी। नगर निगम की ओर से जारी आदेश के अनुसार यह फैसला नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के निर्देशों के पालन में लिया गया है। हर वर्ष की तरह इस बार भी कबीर जयंती के दिन धार्मिक और सामाजिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए शहर में मांस-मटन के विक्रय पर रोक लगाने का निर्णय किया गया है। आदेश पूरे नगर निगम क्षेत्र में प्रभावी रहेगा और सभी संबंधित व्यापारियों को इसका पालन करना अनिवार्य होगा। निगम अधिकारियों ने बताया कि पहले ही संबंधित दुकानदारों और पशुवध गृह संचालकों को इसकी जानकारी दे दी गई है ताकि किसी तरह की परेशानी की स्थिति पैदा न हो।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महापौर मीनल चौबे के निर्देश पर नगर निगम का स्वास्थ्य विभाग इस दौरान विशेष निगरानी रखेगा। अधिकारियों के मुताबिक कार्रवाई केवल मांस-मटन की दुकानों तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि शहर के होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों की भी जांच की जाएगी। यदि किसी स्थान पर मांसाहारी भोजन बेचते या परोसते हुए पाया गया तो मौके पर ही सामग्री जब्त की जाएगी और संचालक के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई होगी। निगम का कहना है कि आदेश का उद्देश्य केवल प्रतिबंध लागू करना नहीं बल्कि उसका प्रभावी पालन सुनिश्चित करना भी है। नगर निगम ने सभी जोन स्वास्थ्य अधिकारियों और स्वच्छता निरीक्षकों को अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार निरीक्षण करने की जिम्मेदारी सौंपी है। सुबह से लेकर देर शाम तक अलग-अलग टीमें बाजारों, व्यावसायिक इलाकों और प्रमुख खाद्य प्रतिष्ठानों का दौरा करेंगी। अधिकारी यह भी देखेंगे कि कहीं बंद दुकान के नाम पर अवैध रूप से बिक्री तो नहीं की जा रही। यदि ऐसी कोई शिकायत मिलती है तो तत्काल जांच कर कार्रवाई की जाएगी। निगम ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि कहीं आदेश का उल्लंघन होता दिखाई दे तो उसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को दें। बताया जा रहा है कि पिछले वर्षों में भी विशेष अवसरों पर इस तरह के प्रतिबंध लागू किए जाते रहे हैं और अधिकांश व्यापारियों ने प्रशासन के निर्देशों का पालन किया है। इस बार भी नगर निगम को उम्मीद है कि व्यापारी और होटल संचालक नियमों का सम्मान करेंगे। अधिकारियों का कहना है कि धार्मिक अवसरों पर शांति और व्यवस्था बनाए रखना सभी की साझा जिम्मेदारी है। इसलिए किसी भी तरह की लापरवाही या नियमों की अनदेखी को गंभीरता से लिया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंध केवल कबीर जयंती के दिन प्रभावी रहेगा। इसके बाद सामान्य दिनों की तरह मांस-मटन की बिक्री पूर्व निर्धारित नियमों के अनुसार की जा सकेगी। हालांकि प्रतिबंध के दौरान किसी प्रकार की छूट नहीं दी जाएगी। स्वास्थ्य विभाग की टीमें पूरे दिन सक्रिय रहेंगी और कार्रवाई की रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को भेजेंगी। प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए सभी नागरिकों और व्यापारियों का सहयोग जरूरी है। शहर में जारी इस आदेश के बाद मांस-मटन कारोबार से जुड़े व्यापारियों ने भी आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी हैं। कई दुकानदारों ने पहले ही ग्राहकों को सूचना देना शुरू कर दिया है कि कबीर जयंती के दिन उनकी दुकानें बंद रहेंगी। वहीं होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को भी अपने मेन्यू में आवश्यक बदलाव करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन को उम्मीद है कि लोगों के सहयोग से आदेश का शांतिपूर्ण तरीके से पालन होगा और पूरे दिन किसी तरह की अप्रिय स्थिति सामने नहीं आएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 16:56:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खाना खिलाने के बाद युवक की हत्या, आरोपी HIV संक्रमित निकला; पुलिस संपर्क में आए लोगों की कर रही जांच</title>
                                    <description><![CDATA[भोपाल में समलैंगिक संबंध बनाने के विवाद के बाद हत्या का आरोप, मेडिकल जांच में आरोपी के HIV संक्रमित होने की पुष्टि; पुलिस और स्वास्थ्य विभाग सतर्क]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/accused-of-murder-of-young-man-after-feeding-him-found/article-56993"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bhopal-murder-case.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सामने आए एक सनसनीखेज हत्याकांड ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कटारा हिल्स थाना क्षेत्र में एक युवक की हत्या के मामले में पुलिस ने जिस आरोपी को गिरफ्तार किया है, वह मेडिकल जांच में HIV संक्रमित पाया गया है। पुलिस का कहना है कि आरोपी लंबे समय से अलग-अलग लोगों के संपर्क में रहा है। अब स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर यह पता लगाया जा रहा है कि वह किन-किन लोगों के संपर्क में आया था। पुलिस के अनुसार, हत्या की यह वारदात 24 मई को इकोलॉजिकल पार्क के पास हुई थी। पुलिस के मुताबिक मृतक की पहचान सतलापुर निवासी रोहित (बदला हुआ नाम) के रूप में हुई है। वह मंडीदीप की एक फैक्ट्री में काम करता था और उस रात ड्यूटी के लिए घर से निकला था। रास्ते में उसकी मुलाकात भोपाल निवासी सुरेश (बदला हुआ नाम) से हुई। प्रारंभिक जांच के अनुसार आरोपी ने पहले रोहित को विश्वास में लिया, उसे खाना खिलाया और फिर इकोलॉजिकल पार्क के पास पुलिया के नीचे स्थित सुनसान जगह पर ले गया। वहां दोनों के बीच समलैंगिक संबंध बनाने को लेकर विवाद हुआ। पुलिस का दावा है कि विरोध होने पर आरोपी ने पहले युवक को धक्का दिया और बाद में भारी पत्थर से सिर पर हमला कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच अधिकारियों के अनुसार हत्या के बाद आरोपी ने मामले को सड़क हादसा दिखाने की कोशिश भी की। उसने मृतक की एक्टिवा को घटनास्थल से कुछ दूरी पर सड़क किनारे कंटीले तारों के पास खड़ा कर दिया और उसकी चाबी दूर फेंक दी। इतना ही नहीं, मृतक का मोबाइल फोन भी अपने साथ ले गया। बाद में वह मोबाइल किसी अन्य व्यक्ति को बेच दिया गया। पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड, मोबाइल सर्विलांस और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी तक पहुंच बनाई और उसे गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी का मेडिकल परीक्षण कराया गया, जिसमें उसके HIV संक्रमित होने की पुष्टि हुई। इसके बाद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग दोनों सतर्क हो गए हैं। अधिकारियों के अनुसार अब यह पता लगाया जा रहा है कि आरोपी किन लोगों के संपर्क में आया था, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें स्वास्थ्य जांच और काउंसलिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और सभी पहलुओं की विस्तार से पड़ताल की जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कटारा हिल्स थाना प्रभारी के अनुसार पूछताछ में यह जानकारी सामने आई कि आरोपी अक्सर भोपाल के न्यू मार्केट और वीआईपी रोड इलाके में घूमता था और वहां लोगों से संपर्क बनाने की कोशिश करता था। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि जेल से छूटने के बाद वह किन लोगों के संपर्क में आया था। हालांकि संपर्क में आए लोगों की वास्तविक संख्या और संक्रमण से जुड़े सभी पहलुओं की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी का पहले भी आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। अधिकारियों के मुताबिक वह पहले एक युवक के साथ दुष्कर्म जैसे मामले में जेल जा चुका है। वर्ष 2023 में भी उसके खिलाफ इसी तरह का मामला दर्ज हुआ था और वह कई महीने तक जेल में रहा था। पुलिस अब उसके पुराने मामलों और वर्तमान केस के बीच भी कड़ियां जोड़ने की कोशिश कर रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग की भूमिका भी अहम हो गई है। HIV संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने का मतलब यह नहीं होता कि संक्रमण स्वतः फैल गया है। संक्रमण केवल कुछ विशेष परिस्थितियों में फैलता है और समय पर जांच तथा इलाज से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए पुलिस जिन लोगों की पहचान कर रही है, उन्हें घबराने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेने और आवश्यक जांच कराने की सलाह दी जाएगी। आरोपी के खिलाफ हत्या समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। उसे अदालत में पेश किए जाने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य सबूतों के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 13:23:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रीवा के संजय गांधी अस्पताल में एक्सपायर दवा का आरोप, जांच शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[आईसीयू में भर्ती मरीज के परिजनों ने उठाए सवाल, अस्पताल अधीक्षक बोले- शिकायत गंभीर, दोषियों पर होगी कार्रवाई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/investigation-started-into-allegations-of-expired-medicine-in-rewas-sanjay/article-56381"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/rewa-sanjay-gandhi-hospital.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रीवा के संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में मरीजों को एक्सपायर दवा और इंजेक्शन दिए जाने के आरोप सामने आने के बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। मामला उस समय उजागर हुआ जब अस्पताल के आईसीयू में भर्ती एक मरीज के परिजनों ने दावा किया कि उनके परिजन को उपयोग अवधि समाप्त हो चुकी दवा दी गई। शिकायत सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने मामले की जांच शुरू करने की बात कही है। हालांकि अस्पताल अधीक्षक का कहना है कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार ऐसी दवाओं से मरीज की जान को तत्काल कोई खतरा नहीं होता, फिर भी पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। विवेक त्रिपाठी ने अस्पताल प्रबंधन और सोशल मीडिया के माध्यम से शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि उनके पिता अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष में भर्ती हैं। उनका कहना है कि 18 जून को इलाज के दौरान जो दवा और इंजेक्शन दिए गए, उनकी एक्सपायरी डेट समाप्त हो चुकी थी। परिजनों ने दवा के पैकेट और इंजेक्शन की तस्वीरें भी साझा की हैं। तस्वीरें सामने आने के बाद मरीजों और उनके परिवारों में चिंता बढ़ गई है। मामले के सार्वजनिक होते ही अस्पताल प्रशासन सक्रिय हो गया। संबंधित विभाग से जानकारी मांगी गई और दवाओं के स्टॉक की जांच शुरू की गई। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी अस्पताल में दवाओं की वैधता और गुणवत्ता की नियमित निगरानी बेहद जरूरी होती है। यदि एक्सपायर दवाओं के उपयोग की पुष्टि होती है तो यह गंभीर लापरवाही मानी जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शिकायत केवल एक्सपायर दवाओं तक सीमित नहीं है। मरीजों और उनके परिजनों ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में इलाज के लिए शुल्क लिया जाता है, लेकिन सुविधाएं अपेक्षित स्तर की नहीं हैं। कई मरीजों के परिजनों का कहना है कि उन्हें दवाइयां बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं क्योंकि अस्पताल में जरूरी दवाओं का स्टॉक उपलब्ध नहीं है। बताया जा रहा है कि पैनटॉप इंजेक्शन सहित कई आवश्यक दवाइयों की कमी बनी हुई है। दिल के मरीजों को दी जाने वाली कुछ दवाएं भी अस्पताल में उपलब्ध नहीं हैं, जिसके चलते मरीजों के परिजनों को मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। इससे आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है और अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। अस्पताल की एक अन्य बड़ी समस्या वार्ड ब्वाय और सहायक स्टाफ की कमी को लेकर सामने आई है। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन थिएटर से लेकर वार्ड तक मरीजों को ले जाने की जिम्मेदारी भी कई बार परिवार के सदस्यों को ही निभानी पड़ती है। हाल ही में कार्डियोलॉजी विभाग में भर्ती मरीजों के परिजन खुद स्ट्रेचर धकेलते दिखाई दिए। यही स्थिति न्यूरो और अन्य विभागों में भी देखने को मिली।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हैरानी की बात यह है कि अस्पताल में 51 वार्ड ब्वाय तैनात होने की जानकारी दी जाती है, लेकिन मरीजों और परिजनों का कहना है कि जरूरत के समय वे दिखाई नहीं देते। कई लोगों का आरोप है कि वार्ड ब्वाय का उपयोग अन्य कार्यों में किया जा रहा है, जबकि मरीजों की मूलभूत जरूरतों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा। करीब 150 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए इस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल से लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की उम्मीद थी। अस्पताल की स्थापना का उद्देश्य रीवा और आसपास के जिलों के मरीजों को बड़े शहरों में जाने से राहत देना था। लेकिन हाल के आरोपों ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि एक्सपायर दवा देने की शिकायत की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है। इस बीच मरीजों और उनके परिजनों की नजरें जांच के नतीजों पर टिकी हुई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 14:08:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुख्यमंत्री की कैबिनेट बैठक आज, तबादला अवधि बढ़ाने और स्वास्थ्य नीति पर बड़ा फैसला संभव</title>
                                    <description><![CDATA[स्वास्थ्य अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति-2026 को मिल सकती है मंजूरी, इंदौर मेट्रो, वन्यजीव पर्यटन और संविदा कर्मचारियों से जुड़े प्रस्तावों पर भी होगी चर्चा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/chief-ministers-cabinet-meeting-today-big-decision-possible-on-extension/article-56076"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/madhya-pradesh-cabinet-meeting.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश सरकार की मंगलवार को होने वाली कैबिनेट बैठक कई महत्वपूर्ण फैसलों के कारण चर्चा में है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आयोजित होने वाली इस बैठक में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े बड़े प्रस्तावों के साथ-साथ तबादला अवधि बढ़ाने जैसे मुद्दों पर भी फैसला लिया जा सकता है। राज्य के विभिन्न विभागों और कर्मचारियों की नजर इस बैठक पर टिकी हुई है क्योंकि कई ऐसे प्रस्ताव एजेंडे में शामिल हैं जिनका सीधा असर प्रशासनिक व्यवस्था और आम लोगों पर पड़ सकता है। कैबिनेट बैठक में स्वास्थ्य अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति-2026 को मंजूरी मिलने की संभावना है। सरकार का मानना है कि प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने और लोगों तक बेहतर चिकित्सा सेवाएं पहुंचाने के लिए नई नीति महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इस प्रस्ताव के तहत परोपकारी, सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं द्वारा संचालित अस्पतालों तथा डायग्नोस्टिक केंद्रों को प्रोत्साहन देने की योजना बनाई गई है। सरकार इन संस्थाओं को बुनियादी सुविधाओं के विस्तार, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की खरीद और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध करा सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">स्वास्थ्य विभाग का तर्क है कि प्रदेश के कई हिस्सों में निजी और सामाजिक संस्थाएं स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। ऐसे में यदि उन्हें आवश्यक संसाधन और सहयोग दिया जाता है तो ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता में सुधार संभव होगा। उपमुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री राजेंद्र शुक्ल के विभाग द्वारा तैयार किए गए इस प्रस्ताव को लेकर पहले भी कई दौर की चर्चा हो चुकी है। अब अंतिम निर्णय कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही सामने आएगा। प्रदेश सरकार पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य क्षेत्र में लगातार निवेश बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। मेडिकल कॉलेजों के विस्तार, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों की भर्ती तथा चिकित्सा ढांचे को मजबूत करने के लिए कई योजनाएं पहले से संचालित हैं। ऐसे में नई स्वास्थ्य अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति को सरकार की स्वास्थ्य सुधार रणनीति का अगला कदम माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कैबिनेट बैठक का दूसरा बड़ा मुद्दा तबादला अवधि को लेकर है। राज्य सरकार ने इस वर्ष एक जून से 15 जून तक स्थानांतरण की अवधि निर्धारित की थी। हालांकि कई विभागों में अब तक तबादलों की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। बताया जा रहा है कि कई मंत्रियों और विभागीय अधिकारियों ने तबादला अवधि बढ़ाने की मांग रखी है ताकि लंबित मामलों का निपटारा किया जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहले कई बार सार्वजनिक रूप से यह संकेत दे चुके हैं कि इस बार तबादला अवधि को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। इसके बावजूद प्रशासनिक जरूरतों और विभागों की मांग को देखते हुए कैबिनेट में इस विषय पर चर्चा होने की संभावना बनी हुई है। यदि अवधि बढ़ाने का फैसला होता है तो हजारों कर्मचारियों और अधिकारियों को इसका लाभ मिल सकता है। वहीं यदि सरकार अपने पुराने रुख पर कायम रहती है तो स्थानांतरण प्रक्रिया निर्धारित समय सीमा के भीतर ही समाप्त मानी जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक में इंदौर मेट्रो रेल परियोजना की संशोधित लागत को मंजूरी देने का प्रस्ताव भी रखा जा सकता है। प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण शहरी परिवहन परियोजनाओं में शामिल इंदौर मेट्रो को लेकर सरकार पहले ही कई चरणों में मंजूरी दे चुकी है। अब परियोजना की लागत में संशोधन के बाद इसे कैबिनेट की स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया जा रहा है। माना जा रहा है कि मंजूरी मिलने के बाद परियोजना की गति और तेज हो सकती है। वन्यजीव पर्यटन से जुड़ी तीन महत्वपूर्ण योजनाओं को जारी रखने का प्रस्ताव भी एजेंडे में शामिल है। प्रदेश में कान्हा, बांधवगढ़, पेंच और सतपुड़ा जैसे राष्ट्रीय उद्यानों के कारण वन्यजीव पर्यटन का बड़ा नेटवर्क विकसित हुआ है। सरकार इन योजनाओं को आगे बढ़ाकर पर्यटन और स्थानीय रोजगार को प्रोत्साहन देना चाहती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसके अलावा गांवों के पुनर्वास से जुड़े मामलों में मुआवजा स्वीकृति पर भी चर्चा होने की संभावना है। श्रम विभाग की विभिन्न योजनाओं को जारी रखने और स्थानीय निधि संपरीक्षा से संबंधित कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने पर भी निर्णय लिया जा सकता है। प्रशासनिक दृष्टि से यह फैसले महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं क्योंकि इनका असर बड़ी संख्या में हितग्राहियों पर पड़ता है। कैबिनेट के एजेंडे में रीवा, देवास और गुना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के संचालन से जुड़ा एक पायलट प्रोजेक्ट भी शामिल है। प्रस्ताव के अनुसार इन केंद्रों का संचालन आउटसोर्स प्रणाली के माध्यम से किया जा सकता है। सरकार का मानना है कि इससे स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और गुणवत्ता दोनों में सुधार संभव होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सामाजिक न्याय विभाग से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी बैठक में रखा जाएगा। इसके तहत विभाग की शासकीय संस्थाओं में मानदेय के आधार पर कार्यरत कर्मचारियों को विशेष प्रकरण मानते हुए संविदा कर्मचारी घोषित करने पर विचार किया जाएगा। यदि यह प्रस्ताव मंजूर होता है तो संबंधित कर्मचारियों को सेवा सुरक्षा और अन्य प्रशासनिक लाभ मिलने का रास्ता खुल सकता है। मंगलवार की कैबिनेट बैठक कई महत्वपूर्ण निर्णयों के कारण बेहद अहम मानी जा रही है। स्वास्थ्य नीति, तबादला अवधि, इंदौर मेट्रो, पर्यटन, पुनर्वास और कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों पर होने वाले फैसले आने वाले समय में प्रदेश की प्रशासनिक और विकास संबंधी दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 13:25:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गुना में दूषित पानी पीने से 18 बच्चे बीमार, अस्पताल में भर्ती</title>
                                    <description><![CDATA[टूटी पाइपलाइन से घरों में पहुंचा गंदा पानी, उल्टी-दस्त और पेट दर्द की शिकायत; स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की जांच]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/18-children-admitted-to-hospital-after-drinking-contaminated-water-in/article-55283"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/guna-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के गुना शहर में दूषित पेयजल की आपूर्ति ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। शहर के बूढ़े बालाजी, पुरानी छावनी और हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी क्षेत्र में गंदा पानी सप्लाई होने के बाद करीब 18 बच्चे बीमार पड़ गए। सभी बच्चों को उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कई स्थानों पर टूटी हुई पाइपलाइनों के कारण पेयजल में गंदगी और दूषित तत्व मिल गए, जिससे यह स्थिति बनी। जानकारी के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों के लोगों ने पिछले कुछ दिनों से नलों में गंदा और बदबूदार पानी आने की शिकायत की थी। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पानी का रंग भी सामान्य नहीं था, लेकिन शुरुआत में लोगों ने इसे अस्थायी समस्या समझकर नजरअंदाज कर दिया। बाद में जब बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी तो मामला गंभीर हो गया। एक-एक कर कई बच्चों में उल्टी, दस्त और पेट दर्द जैसी समस्याएं सामने आने लगीं। कुछ बच्चों में पीलिया के शुरुआती लक्षण भी दिखाई दिए, जिसके बाद परिजन घबरा गए और उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अस्पताल में भर्ती बच्चों की उम्र 5 से 11 वर्ष के बीच बताई जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार अधिकांश बच्चों में डायरिया और डिहाइड्रेशन की शिकायत थी। लगातार उल्टी और दस्त के कारण शरीर में पानी की कमी हो रही थी, जिसके चलते उन्हें तत्काल चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया। राहत की बात यह है कि समय पर उपचार मिलने से सभी बच्चों की स्थिति फिलहाल स्थिर बनी हुई है और किसी भी बच्चे की हालत गंभीर नहीं बताई गई है। जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने बताया कि दूषित पानी पीने से इस तरह के संक्रमण तेजी से फैल सकते हैं। गर्मी और बारिश के मौसम में जलजनित बीमारियों का खतरा और बढ़ जाता है। ऐसे मामलों में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कम होने के कारण वे जल्दी प्रभावित होते हैं। अस्पताल प्रशासन लगातार बच्चों की निगरानी कर रहा है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग और जल जीवन मिशन की टीम सक्रिय हो गई। अधिकारियों ने प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया और लोगों से बातचीत कर स्थिति का जायजा लिया। जांच के दौरान कई स्थानों पर पाइपलाइन क्षतिग्रस्त पाई गई। माना जा रहा है कि टूटी पाइपलाइन के जरिए नालियों और आसपास जमा गंदा पानी पेयजल लाइन में मिल गया, जिससे पानी दूषित हो गया। प्रशासन ने मुख्य वाटर टैंक और संबंधित पाइपलाइन क्षेत्रों से पानी के नमूने एकत्र कर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे हैं। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद पानी की गुणवत्ता और संक्रमण के कारणों की स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी। साथ ही जिन स्थानों पर पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हैं, वहां मरम्मत कार्य भी शुरू कर दिया गया है ताकि आगे ऐसी स्थिति न बने।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर नाराजगी भी देखी जा रही है। निवासियों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद जलापूर्ति व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि दोषी अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी तय की जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते पाइपलाइन की मरम्मत की जाती तो बच्चों की सेहत से खिलवाड़ नहीं होता। स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों को एहतियात बरतने की सलाह दी है। अधिकारियों ने कहा है कि जिन क्षेत्रों में पानी की गुणवत्ता को लेकर संदेह हो, वहां लोग पानी को कम से कम 20 मिनट तक उबालकर ही उपयोग करें। इसके अलावा क्लोरीन टैबलेट का उपयोग करने की भी सलाह दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि उबालने से पानी में मौजूद अधिकांश हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस नष्ट हो जाते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा कम हो जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">डॉक्टरों ने अभिभावकों को भी सतर्क रहने को कहा है। यदि बच्चों में उल्टी, दस्त, तेज पेट दर्द, बुखार या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। ऐसे मामलों में देरी करना गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों ने ओआरएस घोल और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ देने की भी सलाह दी है ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। गुना में सामने आया यह मामला एक बार फिर शहरी जलापूर्ति व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। पेयजल की गुणवत्ता सीधे लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी होती है और छोटी सी लापरवाही भी बड़े संकट का कारण बन सकती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 14:04:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उज्जैन में सोशल मीडिया से मरीजों को इलाज देता मिला डॉक्टर, अस्पताल सील</title>
                                    <description><![CDATA[उज्जैन के बड़नगर में फर्जी इलाज और सोशल मीडिया से इलाज करने वाले डॉक्टरों पर कार्रवाई हुई। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल और 8 क्लीनिक सील किए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/doctor-found-giving-treatment-to-patients-through-social-media-in/article-54075"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/ujjain-badnagar-fake-doctor-health-department-hospital-sealed.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शनिवार को उज्जैन के बड़नगर क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने फिर से बड़ा कदम उठाते हुए एक फर्जी इलाज के मामले का पर्दाफाश किया। यह मामला तब और गंभीर हो गया जब जिस अस्पताल को टीम ने पहले सील किया था</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह कुछ ही घंटों बाद फिर से खुल गया। जैसे ही इस बारे में जानकारी मिली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और सख्ती से उस अस्पताल को फिर से सील कर दिया। पूरे इलाके में इस कार्रवाई के बाद हड़कंप मच गया।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जांच के दौरान पता चला कि एक डॉक्टर होम्योपैथिक डिग्री के आधार पर एलोपैथिक इलाज कर रहा था और मरीजों को उसी हिसाब से दवाईयां दे रहा था। सबसे अजीब बात यह थी कि वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक और इंस्टाग्राम के जरिए भी मरीजों को इलाज और सलाह दे रहा था। स्वास्थ्य विभाग की टीम को अस्पताल से भारी मात्रा में अवैध और संदिग्ध दवाएं भी मिली हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनकी जांच अलग स्तर पर की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि पूरा मामला बिना पंजीकरण और गलत डिग्री के आधार पर इलाज करने से संबंधित है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शुक्रवार को बड़नगर तहसील के ग्रामीण क्षेत्रों में कई अस्पतालों और क्लीनिकों की एक साथ जांच की। इस दौरान कई जगह गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। टीम ने एक मेडिकल स्टोर</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक पैथोलॉजी लैब और करीब 8 क्लीनिकों को सील किया। जिन संस्थानों पर कार्रवाई हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनमें आरोग्यम क्लीनिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वेदांता अस्पताल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">देवकमल पॉली क्लीनिक और कई अन्य निजी क्लीनिक शामिल हैं। जांच में यह भी पता चला कि कई जगह बिना वैध अनुमति के इलाज किया जा रहा था।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जांच टीम में शामिल अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई जिला स्वास्थ्य अधिकारी के निर्देश पर की गई। टीम ने देखा कि कई क्लीनिकों में न तो उचित लाइसेंस था और न ही योग्य डॉक्टर मौजूद थे</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर भी मरीजों का इलाज किया जा रहा था। इसी दौरान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक अन्य मामले में सामने आया कि एक डॉक्टर आयुर्वेदिक डिग्री होने के बावजूद एलोपैथिक दवाओं से उपचार कर रहा था। अस्पतालों में मरीजों की भीड़ भी खासा देखने को मिली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे स्थिति और भी गंभीर लग रही थी।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया के जरिए इलाज करने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो कि नियमों के खिलाफ है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और जिन संस्थानों ने नियमों का उल्लंघन किया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनके खिलाफ कानूनी कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल सभी सील किए गए क्लीनिकों और अस्पतालों की फाइलें जांच में हैं और आगे और खुलासे की संभावना जताई जा रही है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 17:58:07 +0530</pubDate>
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