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                <title>Healthy Lifestyle - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Healthy Lifestyle RSS Feed</description>
                
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                <title>महात्मा गांधी का जीवन मंत्र: स्वास्थ्य ही वास्तविक धन, सुखी जीवन की सबसे बड़ी पूंजी</title>
                                    <description><![CDATA[बदलती जीवनशैली और बढ़ते तनाव के दौर में महात्मा गांधी का स्वास्थ्य पर दिया गया संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक माना जाता है, जितना उनके समय में था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/mantras-of-life/mahatma-gandhis-life-mantra-health-is-the-real-wealth-and/article-58449"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/mahatma-gandhi.jpg" alt=""></a><br /><p>महात्मा गांधी ने अपने जीवन में सादगी, अनुशासन और स्वस्थ जीवनशैली को जितना महत्व दिया, उतना ही जोर उन्होंने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी दिया था। उनका प्रसिद्ध विचार, "स्वास्थ्य ही वास्तविक धन है, सोने और चांदी के टुकड़े नहीं", आज भी लोगों को यह समझाने का काम करता है कि जीवन में सबसे बड़ी पूंजी अच्छी सेहत है। बदलती जीवनशैली, बढ़ते तनाव, अनियमित खानपान और भागदौड़ के दौर में यह संदेश पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गया है। आज लोग आर्थिक सफलता, करियर और सुविधाओं के पीछे लगातार भाग रहे हैं, लेकिन इसी दौड़ में अपनी सेहत को पीछे छोड़ देते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी मानते हैं कि यदि शरीर और मन स्वस्थ नहीं हैं, तो धन-दौलत और भौतिक सुविधाओं का आनंद लेना भी मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि गांधीजी के इस विचार को आज के समय में स्वस्थ जीवन का मूल मंत्र माना जा रहा है। उनका मानना था कि व्यक्ति का वास्तविक विकास तभी संभव है जब वह शारीरिक, मानसिक और नैतिक रूप से स्वस्थ हो। उन्होंने अपने जीवन में प्राकृतिक जीवनशैली, नियमित दिनचर्या, संतुलित भोजन और आत्मसंयम को अपनाकर इसका उदाहरण भी प्रस्तुत किया।</p>
<p>गांधीजी का जीवन केवल राजनीतिक संघर्ष तक सीमित नहीं था, बल्कि वह स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का भी एक बड़ा संदेश देता है। वे सादा भोजन करते थे, नियमित पैदल चलते थे और प्राकृतिक चिकित्सा में विश्वास रखते थे। उनका मानना था कि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए महंगे संसाधनों की नहीं, बल्कि सही आदतों की जरूरत होती है। आज जब जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं, तब उनका यह संदेश लोगों को अपनी प्राथमिकताओं पर दोबारा सोचने के लिए प्रेरित करता है। डॉक्टरों के अनुसार, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा और हृदय रोग जैसी कई समस्याएं अनियमित दिनचर्या और खराब खानपान से जुड़ी हुई हैं। यदि लोग समय पर भोजन करें, पर्याप्त नींद लें, रोजाना कुछ समय व्यायाम या पैदल चलने के लिए निकालें और तनाव को नियंत्रित रखने का प्रयास करें, तो कई बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है। गांधीजी भी आत्मअनुशासन को स्वस्थ जीवन की सबसे बड़ी कुंजी मानते थे। उनका विश्वास था कि संयमित जीवन व्यक्ति को शारीरिक रूप से मजबूत बनाने के साथ-साथ मानसिक रूप से भी संतुलित रखता है। यही कारण है कि उनके विचार आज केवल इतिहास की किताबों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आधुनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए इसी तरह की सलाह देते हैं।</p>
<p>आज के दौर में मोबाइल, लैपटॉप और डिजिटल उपकरणों पर बढ़ती निर्भरता ने लोगों की दिनचर्या को पूरी तरह बदल दिया है। घंटों एक ही जगह बैठकर काम करना, फास्ट फूड का बढ़ता चलन और शारीरिक गतिविधियों में कमी ने स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को और बढ़ा दिया है। ऐसे समय में गांधीजी का संदेश याद दिलाता है कि स्वस्थ शरीर के बिना जीवन का संतुलन बनाए रखना कठिन है। मानसिक स्वास्थ्य भी आज बड़ी चिंता का विषय बन चुका है। तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याएं हर आयु वर्ग के लोगों को प्रभावित कर रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि स्वस्थ जीवन केवल शारीरिक फिटनेस तक सीमित नहीं है, बल्कि मानसिक शांति भी उतनी ही जरूरी है। नियमित योग, ध्यान, संतुलित भोजन, पर्याप्त आराम और परिवार के साथ समय बिताना मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। गांधीजी का जीवन भी आत्मचिंतन, धैर्य और सकारात्मक सोच का उदाहरण रहा है। उन्होंने हमेशा यह संदेश दिया कि सरल जीवन और उच्च विचार व्यक्ति को भीतर से मजबूत बनाते हैं। यही सोच आज भी लोगों को प्रेरित करती है कि सफलता का वास्तविक अर्थ केवल आर्थिक समृद्धि नहीं, बल्कि स्वस्थ और संतुलित जीवन भी है। बदलती दुनिया में जहां भौतिक उपलब्धियों को सफलता का पैमाना माना जाता है, वहीं गांधीजी का यह विचार याद दिलाता है कि यदि स्वास्थ्य साथ नहीं है, तो बाकी उपलब्धियां अधूरी रह जाती हैं। इसलिए जरूरी है कि लोग अपने व्यस्त जीवन में स्वास्थ्य को सबसे पहली प्राथमिकता दें, नियमित दिनचर्या अपनाएं, संतुलित खानपान रखें और मानसिक शांति बनाए रखने के लिए समय निकालें। यही आदतें लंबे समय तक बेहतर जीवन की आधारशिला बन सकती हैं और महात्मा गांधी के इस अमर संदेश को व्यवहार में उतारने का सबसे अच्छा तरीका भी यही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>जीवन के मंत्र</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 00:01:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मानसून में स्किन इंफेक्शन से बचना है? जानिए एक्सपर्ट्स का सही स्किनकेयर रूटीन</title>
                                    <description><![CDATA[बारिश के मौसम में बढ़ जाती हैं त्वचा संबंधी समस्याएं, जानिए विशेषज्ञों द्वारा सुझाए गए आसान उपाय और स्किन केयर टिप्स जो त्वचा को रखेंगे स्वस्थ और सुरक्षित।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/life-style/adopt-proper-skincare-in-monsoon-to-avoid-fungal-infections-and/article-57958"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/monsoon-skin-care-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">बारिश का मौसम जहां गर्मी से राहत लेकर आता है, वहीं यह त्वचा संबंधी कई समस्याओं को भी साथ लेकर आता है। लगातार बढ़ी हुई नमी, पसीना, गीले कपड़े और बैक्टीरिया-फंगस के तेजी से पनपने के कारण मानसून में स्किन इंफेक्शन, खुजली, रैशेज, दाद, फंगल संक्रमण और एलर्जी जैसी परेशानियां आम हो जाती हैं। यदि इस मौसम में त्वचा की सही देखभाल न की जाए तो छोटी-सी समस्या भी गंभीर संक्रमण का रूप ले सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार मानसून में स्किन को साफ, सूखा और हाइड्रेटेड रखना सबसे जरूरी होता है। सही स्किनकेयर रूटीन अपनाकर न केवल संक्रमण से बचा जा सकता है, बल्कि त्वचा को स्वस्थ और चमकदार भी बनाए रखा जा सकता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>नमी बढ़ने से क्यों बढ़ता है स्किन इंफेक्शन?</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">बारिश के मौसम में वातावरण में नमी अधिक रहती है। इससे त्वचा पर पसीना लंबे समय तक बना रहता है। गीली त्वचा पर बैक्टीरिया और फंगस तेजी से विकसित होते हैं, जिससे खुजली, लाल चकत्ते, फंगल इंफेक्शन और दाद जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। पैरों की उंगलियों के बीच, बगल, गर्दन और कमर जैसे हिस्सों में संक्रमण का खतरा सबसे अधिक रहता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>दिन में दो बार करें त्वचा की सफाई</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">मानसून के दौरान चेहरे और शरीर को दिन में कम से कम दो बार साफ करना चाहिए। अपनी त्वचा के अनुसार माइल्ड फेसवॉश और बॉडी क्लेंजर का उपयोग करें। बाहर से घर लौटने के बाद चेहरे और हाथ-पैरों की सफाई अवश्य करें ताकि धूल, पसीना और बैक्टीरिया त्वचा पर जमा न रहें।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>त्वचा को हमेशा सूखा रखें</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">यदि बारिश में भीग जाएं तो घर पहुंचते ही कपड़े बदलें और शरीर को अच्छी तरह सुखाएं। खासकर पैरों की उंगलियों, बगल और त्वचा की सिलवटों को अच्छी तरह पोंछें। लंबे समय तक गीले कपड़े पहनने से फंगल संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>हल्का मॉइस्चराइजर लगाना न भूलें</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">कई लोग सोचते हैं कि बारिश में मॉइस्चराइजर की जरूरत नहीं होती, जबकि ऐसा नहीं है। ऑयल-फ्री या जेल बेस्ड मॉइस्चराइजर त्वचा को हाइड्रेट रखता है और उसकी प्राकृतिक नमी बनाए रखने में मदद करता है। इससे त्वचा रूखी होने और जलन की समस्या भी कम होती है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">सनस्क्रीन का इस्तेमाल जारी रखें</h5>
<p style="text-align:justify;">बादल छाए रहने के बावजूद सूरज की यूवी किरणें त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए मानसून में भी बाहर निकलते समय एसपीएफ़ युक्त सनस्क्रीन लगाना जरूरी है। यह त्वचा को टैनिंग, पिगमेंटेशन और समय से पहले बूढ़ा होने से बचाता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>सूती कपड़े पहनें</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">बारिश के मौसम में ढीले और सूती कपड़े पहनना सबसे अच्छा विकल्प है। सूती कपड़े पसीना जल्दी सोख लेते हैं और त्वचा को सांस लेने का मौका देते हैं। सिंथेटिक या टाइट कपड़े पहनने से त्वचा में रगड़ बढ़ती है, जिससे रैशेज और संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>पैरों की सफाई पर दें विशेष ध्यान</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">बारिश में सबसे ज्यादा संक्रमण पैरों में होता है। बाहर से आने के बाद पैरों को साफ पानी से धोकर अच्छी तरह सुखाएं। यदि जूते गीले हो जाएं तो उन्हें पूरी तरह सूखने के बाद ही दोबारा पहनें। रोज साफ और सूखे मोजे पहनने की आदत डालें।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>संतुलित आहार भी है जरूरी</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">स्वस्थ त्वचा के लिए केवल बाहरी देखभाल ही नहीं, बल्कि संतुलित आहार भी जरूरी है। मौसमी फल, हरी सब्जियां, दही, विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर खाद्य पदार्थ त्वचा की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>स्किन इंफेक्शन होने पर क्या करें?</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">यदि त्वचा पर लगातार खुजली, लाल चकत्ते, जलन, पानी वाले दाने या फंगल संक्रमण दिखाई दे तो घरेलू उपचार करने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लें। बिना डॉक्टर की सलाह के स्टेरॉयड क्रीम या दवाओं का इस्तेमाल करने से संक्रमण और गंभीर हो सकता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>किन बातों का रखें विशेष ध्यान?</strong></h5>
<ul style="text-align:justify;">
<li>गीले कपड़े तुरंत बदलें।</li>
<li>तौलिया और कपड़े किसी के साथ साझा न करें।</li>
<li>रोजाना साफ कपड़े पहनें।</li>
<li>त्वचा को ज्यादा देर तक गीला न रहने दें।</li>
<li>संतुलित आहार और पर्याप्त पानी का सेवन करें।</li>
<li>संक्रमण के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>मानसून में सही स्किनकेयर ही सबसे बड़ा बचाव</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">बारिश का मौसम आनंद और ताजगी लेकर आता है, लेकिन थोड़ी-सी लापरवाही त्वचा संबंधी समस्याओं का कारण बन सकती है। यदि नियमित सफाई, सही स्किनकेयर, संतुलित खानपान और स्वच्छता का ध्यान रखा जाए तो मानसून में भी त्वचा को स्वस्थ, सुरक्षित और संक्रमण मुक्त रखा जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लाइफ स्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 17:40:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रात में चावल खाना सही या नहीं? जानिए खिचड़ी बेहतर विकल्प है या नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[रात के भोजन को लेकर लोगों में कई तरह की धारणाएं हैं। विशेषज्ञों के अनुसार चावल पूरी तरह नुकसानदायक नहीं, लेकिन मात्रा, समय और खाने का तरीका आपकी सेहत पर बड़ा असर डालता है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/life-style/is-it-right-to-eat-rice-at-night-or-not/article-57241"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/rice-at-night.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिनभर की भागदौड़ के बाद रात का खाना शरीर के लिए सबसे अहम भोजन में से एक माना जाता है। लेकिन अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या रात में चावल खाना चाहिए या नहीं। कई लोग मानते हैं कि रात में चावल खाने से वजन बढ़ता है, पेट निकलने लगता है और पाचन खराब हो जाता है। वहीं कुछ लोग बिना चावल के खाना अधूरा मानते हैं। ऐसे में सवाल यह है कि सच्चाई क्या है और यदि रात में चावल नहीं खाना चाहिए तो क्या खिचड़ी बेहतर विकल्प हो सकती है। रात में चावल खाना पूरी तरह गलत नहीं है। असल फर्क इस बात से पड़ता है कि आप कितनी मात्रा में चावल खाते हैं, उसके साथ क्या खाते हैं और आपका रोजाना का शारीरिक गतिविधि स्तर कितना है। यदि कोई व्यक्ति दिनभर पर्याप्त मेहनत करता है या नियमित व्यायाम करता है तो सीमित मात्रा में चावल खाना उसके लिए सामान्य हो सकता है। दूसरी ओर जो लोग लंबे समय तक बैठे रहकर काम करते हैं और रात का खाना खाने के तुरंत बाद सो जाते हैं, उन्हें चावल की मात्रा पर ध्यान देना चाहिए।सफेद चावल जल्दी पच जाते हैं और इनमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है। अगर इन्हें अधिक मात्रा में खाया जाए और शरीर को ऊर्जा खर्च करने का मौका न मिले तो अतिरिक्त कैलोरी वसा के रूप में जमा हो सकती है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि हर व्यक्ति के लिए रात में चावल नुकसानदायक हैं। संतुलित भोजन के साथ सीमित मात्रा में चावल लेने से आमतौर पर कोई बड़ी समस्या नहीं होती।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यदि रात के खाने में चावल के साथ दाल, हरी सब्जियां, सलाद और दही जैसी चीजें शामिल की जाएं तो भोजन अधिक संतुलित बन जाता है। इससे पाचन भी बेहतर रहता है और शरीर को जरूरी पोषक तत्व भी मिलते हैं। केवल बड़ी मात्रा में चावल खाना या तली-भुनी चीजों के साथ खाना स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं माना जाता। कई लोग रात में वजन कम करने के उद्देश्य से चावल पूरी तरह छोड़ देते हैं। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि केवल चावल छोड़ देने से वजन कम नहीं होता। वजन घटाने के लिए पूरे दिन की कुल कैलोरी, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और संतुलित आहार ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि पूरे दिन असंतुलित भोजन लिया जाए और केवल रात में चावल न खाया जाए तो इससे विशेष लाभ नहीं मिलता।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अब बात खिचड़ी की करें तो इसे हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन माना जाता है। दाल और चावल से बनने वाली खिचड़ी में कार्बोहाइड्रेट के साथ प्रोटीन भी मिलता है। यदि इसमें हरी सब्जियां, हल्दी, जीरा और थोड़ा घी मिलाया जाए तो इसका पोषण मूल्य और बढ़ जाता है। बीमारी के दौरान या पाचन संबंधी परेशानी होने पर डॉक्टर भी अक्सर खिचड़ी खाने की सलाह देते हैं। हालांकि यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि खिचड़ी भी चावल से ही बनती है। इसलिए यह मान लेना सही नहीं होगा कि खिचड़ी खाने से कैलोरी बिल्कुल नहीं बढ़ती। यदि बहुत अधिक मात्रा में घी या मक्खन डालकर खिचड़ी खाई जाए तो उसकी कैलोरी भी बढ़ सकती है। इसलिए खिचड़ी का सेवन भी संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए। अगर किसी व्यक्ति को मधुमेह, मोटापा या फैटी लिवर जैसी समस्या है तो उसे अपने डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह के अनुसार भोजन चुनना चाहिए। ऐसे लोगों के लिए ब्राउन राइस, मिलेट्स या मल्टीग्रेन विकल्प अधिक लाभकारी हो सकते हैं। वहीं स्वस्थ व्यक्ति सप्ताह में कई दिन रात के भोजन में सीमित मात्रा में चावल या खिचड़ी आराम से खा सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रात का भोजन हमेशा सोने से कम से कम दो से तीन घंटे पहले कर लेना चाहिए। खाना खाने के तुरंत बाद बिस्तर पर जाने की आदत पाचन को प्रभावित कर सकती है। भोजन के बाद कुछ देर टहलना भी फायदेमंद माना जाता है। इससे पाचन बेहतर होता है और शरीर भोजन का सही उपयोग कर पाता है। भोजन को लेकर किसी एक नियम को सभी पर लागू नहीं किया जा सकता। हर व्यक्ति की उम्र, वजन, स्वास्थ्य, दिनचर्या और शारीरिक गतिविधि अलग होती है। इसलिए किसी भी भोजन को पूरी तरह अच्छा या बुरा कहना उचित नहीं है। सही मात्रा, संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली ही बेहतर स्वास्थ्य की कुंजी है। आप स्वस्थ हैं और संतुलित मात्रा में खाते हैं तो रात में चावल खाना नुकसानदायक नहीं माना जाता। वहीं यदि हल्का भोजन करना चाहते हैं तो दाल और सब्जियों से बनी खिचड़ी एक अच्छा विकल्प हो सकती है। सबसे जरूरी बात यह है कि भोजन संतुलित हो, समय पर किया जाए और उसके साथ नियमित शारीरिक गतिविधि भी बनी रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लाइफ स्टाइल</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/life-style/is-it-right-to-eat-rice-at-night-or-not/article-57241</link>
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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:56:57 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>मानसून में फंगल संक्रमण से बचाएगा एंटी-फंगल साबुन, त्वचा विशेषज्ञों ने दी जरूरी सलाह</title>
                                    <description><![CDATA[बारिश के मौसम में नमी और पसीने से बढ़ता है स्किन इंफेक्शन का खतरा, सही स्किनकेयर अपनाकर कई समस्याओं से बचा जा सकता है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/life-style/anti-fungal-soap-will-protect-against-fungal-infection-in-monsoon-dermatologists/article-55857"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/monsoon-skin-care.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बारिश का मौसम गर्मी से राहत और हरियाली लेकर आता है, लेकिन इसी मौसम में त्वचा संबंधी समस्याएं भी तेजी से बढ़ जाती हैं। बढ़ी हुई नमी, लगातार पसीना आना और लंबे समय तक गीले कपड़े पहनकर रहने की आदत कई लोगों के लिए परेशानी का कारण बनती है। त्वचा विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून में फंगल संक्रमण के मामले सामान्य दिनों की तुलना में अधिक देखने को मिलते हैं। ऐसे में एंटी-फंगल साबुन या बॉडी वॉश का इस्तेमाल त्वचा को सुरक्षित रखने में मददगार साबित हो सकता है। मानसून के दौरान वातावरण में नमी का स्तर काफी बढ़ जाता है। शरीर के जिन हिस्सों में हवा का प्रवाह कम होता है, वहां फंगस तेजी से पनप सकता है। बगल, गर्दन, जांघों के बीच का हिस्सा, पैर की उंगलियों के बीच की जगह और त्वचा की सिलवटें संक्रमण के लिए सबसे संवेदनशील मानी जाती हैं। शुरुआत में खुजली, लालिमा, जलन या छोटे चकत्तों के रूप में दिखने वाली यह समस्या समय के साथ गंभीर रूप ले सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">केवल सामान्य साबुन से सफाई करना हमेशा पर्याप्त नहीं होता। एंटी-फंगल गुणों वाले साबुन में मौजूद तत्व संक्रमण पैदा करने वाले फंगस और बैक्टीरिया को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। बाजार में उपलब्ध कई उत्पादों में टी ट्री ऑयल, नीम, तुलसी और एलोवेरा जैसे प्राकृतिक तत्व शामिल होते हैं। टी ट्री ऑयल अपने एंटीसेप्टिक और एंटी-फंगल गुणों के लिए जाना जाता है, जबकि नीम त्वचा को संक्रमण से बचाने और खुजली कम करने में सहायक माना जाता है। बारिश के मौसम में सबसे बड़ी समस्या गीले कपड़ों और जूतों को लंबे समय तक पहने रखना है। ऑफिस, कॉलेज या यात्रा के दौरान भीगने के बाद कई लोग कपड़े नहीं बदलते, जिससे त्वचा लंबे समय तक नमी के संपर्क में रहती है। यही स्थिति फंगल संक्रमण के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करती है। इसी तरह गीले मोजे और जूते पहनने से पैरों में संक्रमण, दुर्गंध और एथलीट फुट जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">डॉक्टर सलाह देते हैं कि बारिश में भीगने के बाद जल्द से जल्द सूखे कपड़े पहनने चाहिए। स्नान के दौरान एंटी-फंगल साबुन का उपयोग करना लाभकारी हो सकता है। नहाने के बाद शरीर को अच्छी तरह सुखाना भी बेहद जरूरी है। त्वचा पर बची थोड़ी सी नमी भी संक्रमण को बढ़ावा दे सकती है। खासतौर पर पैरों और त्वचा की सिलवटों को सूखा रखना चाहिए। मानसून में पसीना अधिक आने की समस्या भी आम है। पसीना और नमी मिलकर फंगस के विकास के लिए आदर्श स्थिति बनाते हैं। इसलिए इस मौसम में सूती कपड़े पहनने की सलाह दी जाती है। सूती कपड़े पसीना आसानी से सोख लेते हैं और त्वचा को सांस लेने का मौका देते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा कम हो जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखना उतना ही जरूरी है जितना सही उत्पाद का चयन करना। तौलिया, कपड़े और जूते किसी अन्य व्यक्ति के साथ साझा नहीं करने चाहिए। यदि परिवार में किसी सदस्य को पहले से फंगल संक्रमण है तो उसकी निजी वस्तुओं के उपयोग से बचना चाहिए, ताकि संक्रमण दूसरों तक न फैले। बच्चों, बुजुर्गों और मधुमेह के मरीजों को मानसून में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। इन लोगों में संक्रमण का खतरा अपेक्षाकृत अधिक होता है। ऐसे में त्वचा की नियमित सफाई और उचित देखभाल बेहद जरूरी मानी जाती है। यदि खुजली, लाल चकत्ते, त्वचा का छिलना या जलन जैसी समस्या लंबे समय तक बनी रहे तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">संतुलित आहार भी त्वचा को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पर्याप्त पानी पीना, हरी सब्जियां और ताजे फल खाना शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है, जिसका सकारात्मक असर त्वचा पर भी दिखाई देता है।  मानसून में स्किनकेयर रूटीन में छोटे-छोटे बदलाव बड़े फायदे दे सकते हैं। एंटी-फंगल साबुन का इस्तेमाल, गीले कपड़ों से बचाव, नियमित सफाई और त्वचा को सूखा रखने जैसी आदतें फंगल संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम कर सकती हैं। इसलिए बारिश के मौसम में त्वचा की देखभाल को नजरअंदाज करने के बजाय उसे दैनिक दिनचर्या का जरूरी हिस्सा बनाना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लाइफ स्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 17:42:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>100 साल तक स्वस्थ जीवन चाहते हैं? आज ही छोड़ दें ये 10 बुरी आदतें</title>
                                    <description><![CDATA[ कुछ आदतें बदलकर बढ़ाई जा सकती है उम्र और बेहतर बनाया जा सकता है स्वास्थ्य।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/life-style/if-you-want-a-healthy-life-for-100-years-leave/article-55757"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/longevity.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आज की तेज रफ्तार जिंदगी में हर व्यक्ति लंबा और स्वस्थ जीवन जीना चाहता है। केवल अच्छी चिकित्सा सुविधाएं या बेहतर जीन ही लंबी उम्र की गारंटी नहीं होते। हमारी रोजमर्रा की आदतें भी यह तय करती हैं कि हम कितने समय तक स्वस्थ, सक्रिय और ऊर्जावान बने रहेंगे। दुनिया के कई शोध बताते हैं कि कुछ सामान्य लेकिन नुकसानदायक आदतें समय के साथ शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकती हैं। यदि आप भी 100 साल तक स्वस्थ जीवन जीने का सपना देखते हैं, तो इन 10 आदतों को छोड़ना आपके लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>1. अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड खाना</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">प्रोसेस्ड और पैकेटबंद खाद्य पदार्थों में अक्सर अधिक मात्रा में नमक, चीनी, ट्रांस फैट और कृत्रिम रसायन होते हैं। लगातार ऐसे भोजन का सेवन मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोगों का खतरा बढ़ा सकता है। विशेषज्ञ ताजा फल, सब्जियां, साबुत अनाज और घर का बना भोजन खाने की सलाह देते हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>2. धूम्रपान करना</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">धूम्रपान को दुनिया भर में समय से पहले मृत्यु के प्रमुख कारणों में गिना जाता है। यह फेफड़ों के कैंसर, हृदय रोग, स्ट्रोक और सांस संबंधी कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। धूम्रपान छोड़ने के बाद शरीर धीरे-धीरे खुद को सुधारना शुरू कर देता है और स्वास्थ्य जोखिम कम होने लगते हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>3. लंबे समय तक बैठे रहना</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">आधुनिक जीवनशैली में घंटों कुर्सी पर बैठकर काम करना आम हो गया है। लेकिन लगातार बैठे रहने से मोटापा, मधुमेह और हृदय रोगों का खतरा बढ़ सकता है। विशेषज्ञ हर 30 से 60 मिनट में कुछ देर टहलने या हल्की शारीरिक गतिविधि करने की सलाह देते हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>4. मन में नाराजगी और गुस्सा रखना</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">किसी के प्रति लंबे समय तक गुस्सा या नाराजगी रखने से मानसिक तनाव बढ़ सकता है। इससे रक्तचाप बढ़ने, चिंता और अवसाद जैसी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं। माफ करना और सकारात्मक सोच विकसित करना मानसिक शांति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>5. खुद को सामाजिक रूप से अलग रखना</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">अकेलापन सिर्फ भावनात्मक नहीं बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है। कई अध्ययनों में पाया गया है कि सामाजिक संबंध मजबूत होने से मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहता है और जीवन संतुष्टि बढ़ती है। परिवार, मित्रों और समुदाय से जुड़े रहना लंबी उम्र के लिए लाभदायक माना जाता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>6. यह सोचना कि केवल बड़े बदलाव ही मायने रखते हैं</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">कई लोग मानते हैं कि स्वास्थ्य सुधारने के लिए बड़े और कठिन बदलाव जरूरी हैं। जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि छोटी-छोटी सकारात्मक आदतें भी समय के साथ बड़ा प्रभाव डाल सकती हैं। रोजाना 15 मिनट की वॉक, अतिरिक्त पानी पीना या जंक फूड कम करना भी महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकते हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>7. डर या लापरवाही के कारण स्वास्थ्य जांच से बचना</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">कई लोग बीमारी के डर से नियमित स्वास्थ्य जांच नहीं करवाते। कुछ लोग लक्षणों को नजरअंदाज करते रहते हैं। इससे कई बीमारियां गंभीर अवस्था में पहुंच जाती हैं। समय पर जांच और उपचार गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को रोकने में मदद कर सकते हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>8. पर्याप्त नींद नहीं लेना</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">नींद शरीर और मस्तिष्क की मरम्मत का सबसे महत्वपूर्ण समय होती है। लगातार कम नींद लेने से प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो सकती है और हृदय रोग, मोटापा तथा मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। अधिकांश वयस्कों के लिए प्रतिदिन 7 से 9 घंटे की नींद जरूरी मानी जाती है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>9. लगातार तनाव में रहना</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">तनाव जीवन का हिस्सा है, लेकिन लगातार तनाव में रहना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। इससे रक्तचाप बढ़ सकता है, नींद प्रभावित हो सकती है और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। योग, ध्यान, व्यायाम और समय प्रबंधन जैसी तकनीकें तनाव कम करने में मददगार साबित हो सकती हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>10. हर चीज के लिए जीन को जिम्मेदार ठहराना</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">बहुत से लोग मानते हैं कि उनकी सेहत पूरी तरह जीन पर निर्भर करती है। जीवनशैली और पर्यावरण भी स्वास्थ्य पर बड़ा प्रभाव डालते हैं। स्वस्थ खानपान, नियमित व्यायाम और सकारात्मक आदतें कई आनुवंशिक जोखिमों को कम करने में मदद कर सकती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">लंबी उम्र का कोई जादुई फार्मूला नहीं है। लेकिन संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, तनाव नियंत्रण और मजबूत सामाजिक संबंध स्वस्थ जीवन की मजबूत नींव बन सकते हैं। छोटी-छोटी अच्छी आदतें समय के साथ बड़े बदलाव लाती हैं और जीवन को अधिक खुशहाल व सक्रिय बना सकती हैं। स्वस्थ और लंबा जीवन जीने का लक्ष्य केवल वर्षों की संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि उन वर्षों को बेहतर स्वास्थ्य, ऊर्जा और मानसिक संतुलन के साथ जीना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसलिए यदि आप अपने भविष्य को बेहतर बनाना चाहते हैं, तो आज से ही इन 10 बुरी आदतों को छोड़ने की शुरुआत कर सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लाइफ स्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 16:51:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>गर्मी में थकान और कमजोरी बढ़ा सकती हैं ये गलतियां, डाइट में शामिल करें ये चीजें</title>
                                    <description><![CDATA[गर्मी में थकान, कमजोरी और डिहाइड्रेशन से बचने के लिए जानिए क्या खाएं, क्या नहीं और किन आसान आदतों से शरीर को रखें एक्टिव।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/life-style/these-mistakes-can-increase-fatigue-and-weakness-in-summer-include/article-53615"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/summer-health-tips.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जैसे ही गर्मी का मौसम आता है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लोगों को थकान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कमजोरी और आलस्य जैसी समस्याएं परेशान करने लगती हैं। कभी-कभी तो ऐसा लगता है कि बिना ज्यादा काम किए ही शरीर थक गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिर भारी होने लगता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और थोड़ी देर धूप में रहने पर चक्कर भी आ सकते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसका सबसे बड़ा कारण शरीर में पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी है। तेज धूप और लगातार पसीना बहाने से शरीर धीरे-धीरे डिहाइड्रेशन की ओर बढ़ने लगता है। और अगर सही खानपान न हो तो कमजोरी और बढ़ जाती है। गर्मियों में थोड़ी सतर्कता बरतकर डाइट और लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करके इन समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है। डॉक्टर भी यही कहते हैं कि इस मौसम में हल्का</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पौष्टिक और पानी से भरपूर भोजन शरीर को सक्रिय बनाए रखने में मदद करता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">गर्मी में कमजोरी के कुछ सामान्य लक्षण भी होते हैं। बहुत से लोगों को दिन भर आलस्य होता है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">काम में मन नहीं लगता और आराम करने के बाद भी शरीर तरोताजा महसूस नहीं करता। डिहाइड्रेशन बढ़ने पर सिरदर्द और चक्कर आना जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं। कुछ लोगों की भूख भी कम हो जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे शरीर को जरूरी पोषण नहीं मिल पाता। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ज्यादा पसीना बहने के कारण इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी होने लगती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इसका असर मांसपेशियों पर पड़ता है। कभी-कभी हाथ-पैरों में कमजोरी या हल्की ऐंठन तक महसूस होने लगती है। विशेषज्ञों का कहना है कि पानी कम पीना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नींद पूरी न लेना और अनियमित खानपान इन समस्याओं को बढ़ा देते हैं। यही वजह है कि गर्मियों में खानपान में लापरवाही करना हानिकारक हो सकता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ऐसे मौसम में पानी से भरपूर फल खाना काफी फायदेमंद होता है। जैसे तरबूज</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">खरबूजा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संतरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनानास और स्ट्रॉबेरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये सारे फल शरीर को लंबे समय तक हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं। इनमें मौजूद विटामिन और मिनरल्स शरीर को ऊर्जा देने में मददगार साबित होते हैं। सुबह का हेल्दी नाश्ता भी बेहद जरूरी है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि नाश्ते में दूध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंडा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्प्राउट्स या पनीर जैसी चीजें शामिल करनी चाहिए ताकि शरीर को पर्याप्त प्रोटीन और ऊर्जा मिल सके। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ड्राई फ्रूट्स और बीज भी शरीर की कमजोरी दूर करने में मदद करते हैं। गर्मियों में नारियल पानी और नींबू पानी भी बहुत फायदेमंद होते हैं क्योंकि ये शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखते हैं। हाल के कुछ समय में गोंद कतीरा का इस्तेमाल भी बढ़ गया है। आयुर्वेद में इसे शरीर को ठंडक देने वाला माना गया है और कई लोग इसे दूध या शरबत में मिलाकर पीते हैं।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि सिर्फ खानपान ही नहीं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लाइफस्टाइल में बदलाव भी जरूरी हैं। दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना सबसे अहम होता है। कोशिश करें कि धूप में ज्यादा देर न रहें और शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाकर रखें। अच्छी नींद भी शरीर की रिकवरी के लिए जरूरी है। गर्मियों में लोग अक्सर देर रात तक जागते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो शरीर की ऊर्जा पर असर डालता है। सुबह की हल्की वॉक या योग भी शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन बहुत गर्मी में भारी एक्सरसाइज से बचने की सलाह दी जाती है। साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तली-भुनी और मसालेदार चीजों का सेवन कम करना चाहिए। ज्यादा चाय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कॉफी और कोल्ड ड्रिंक पीने से भी शरीर में पानी की कमी बढ़ सकती है। पैकेटबंद और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाना बेहतर होता है क्योंकि इनमें सोडियम की मात्रा ज्यादा होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो शरीर को और ज्यादा डिहाइड्रेट कर सकती है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लाइफ स्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 16:18:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>घर पर बनाएं बिना मैदा-खमीर की हेल्दी मसूर दाल ब्रेड, जानें तरीका</title>
                                    <description><![CDATA[बिना मैदा, खमीर और चीनी वाली हेल्दी मसूर दाल ब्रेड घर पर बनाएं। आसान स्टेप्स से सॉफ्ट और टेस्टी ब्रेड तैयार करें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/life-style/learn-how-to-make-healthy-masoor-dal-bread-at-home/article-52798"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ-(82).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">आजकल बाजार में मिलने वाली ब्रेड को लेकर लोगों में चिंता बढ़ती जा रही है क्योंकि इसमें मैदा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">ज्यादा चीनी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खमीर और कई तरह के प्रिजर्वेटिव का इस्तेमाल किया जाता है। रोजमर्रा की डाइट में ब्रेड का इस्तेमाल काफी ज्यादा होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर सुबह के नाश्ते और बच्चों के टिफिन में। ऐसे में लोग अब हेल्दी विकल्प तलाश रहे हैं। इसी बीच एक आसान तरीका सामने आया है जिसमें आप घर पर बनाएं बिना मैदा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खमीर और चीनी वाली हेल्दी ब्रेड तैयार कर सकते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो भी बिल्कुल सॉफ्ट और बाजार जैसी टेक्सचर के साथ। खास बात यह है कि इसमें मसूर दाल का इस्तेमाल किया जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो इसे पौष्टिक भी बनाता है और हल्का भी रखता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लोगों का कहना है कि यह रेसिपी न सिर्फ आसान है बल्कि सेहत के लिहाज से भी बेहतर विकल्प बनकर सामने आ रही है। मसूर दाल से बनी यह ब्रेड बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी के लिए फायदेमंद मानी जा रही है। इसमें न तो मैदा है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">न ही खमीर और न ही अतिरिक्त चीनी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर भी इसका स्वाद और टेक्सचर काफी हद तक बाजार जैसी ब्रेड जैसा ही रहता है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर भी यह रेसिपी तेजी से वायरल हो रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस ब्रेड को बनाने के लिए सबसे पहले 150 ग्राम लाल मसूर दाल को लिया जाता है और उसे लगभग 2 घंटे तक पानी में भिगोकर रखा जाता है ताकि वह नरम हो जाए। इसके बाद दाल को अच्छे से धोकर पानी निकाल दिया जाता है। फिर एक ब्लेंडर में भीगी हुई दाल के साथ 2 बड़े चम्मच ऑलिव ऑयल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">2 बड़े चम्मच दही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वादानुसार नमक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">थोड़ा पैपरिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लहसुन पाउडर और मिक्स्ड हर्ब्स डाले जाते हैं। इन्हें मिलाकर एक गाढ़ा बैटर तैयार किया जाता है। इसके बाद इसमें एक छोटा चम्मच बेकिंग पाउडर और लगभग 20 ग्राम इसबगोल की भूसी मिलाई जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे ब्रेड को सॉफ्ट और स्पंजी टेक्सचर मिलता है। सभी चीजों को अच्छे से मिक्स करने के बाद एक गाढ़ा मिश्रण तैयार हो जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे हाथों की मदद से ब्रेड का आकार दिया जाता है। इसे पार्चमेंट पेपर लगी ट्रे में रखा जाता है और ऊपर से हल्के तिल छिड़के जाते हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"> </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इसके बाद असली प्रोसेस बेकिंग का आता है। ओवन को पहले से 180 डिग्री सेल्सियस पर प्रीहीट किया जाता है और फिर तैयार मिश्रण को उसमें लगभग 25 से 30 मिनट तक बेक किया जाता है। इस दौरान ब्रेड धीरे-धीरे फूलती है और सुनहरे रंग की हो जाती है। जब इसे बाहर निकाला जाता है तो इसकी खुशबू और टेक्सचर देखकर किसी को भी यकीन नहीं होता कि यह बिना मैदा और खमीर के बनी है। कई लोग इसे नाश्ते में मक्खन</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैम या फिर सैंडविच की तरह भी इस्तेमाल कर रहे हैं। बाजार जैसी सॉफ्टनेस और घर की शुद्धता इसे और खास बना देती है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लाइफ स्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 18:34:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गर्मी में शरीर को ठंडा रखने के लिए पिएं ये हेल्दी जूस</title>
                                    <description><![CDATA[गर्मी में राहत देने वाले ये देसी जूस घर पर आसानी से बनाएं, शरीर को रखें ठंडा और हाइड्रेटेड]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/life-style/drink-this-healthy-juice-to-keep-your-body-cool-in/article-48765"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/lifestyle-(54)1.jpg" alt=""></a><br /><p>तेज गर्मी में शरीर का तापमान बढ़ना, डिहाइड्रेशन और थकान आम समस्या बन जाती है। ऐसे में कुछ प्राकृतिक जूस न सिर्फ शरीर को ठंडा रखते हैं बल्कि ऊर्जा भी देते हैं। यहां जानिए ऐसे ही असरदार और आसानी से मिलने वाले जूस:</p>
<h5><strong>तरबूज का जूस</strong></h5>
<p><strong>सामग्री</strong></p>
<ul>
<li>2 कप तरबूज (बीज निकालकर)</li>
<li>4-5 पुदीने की पत्तियां</li>
<li>1 चम्मच नींबू रस</li>
<li>बर्फ (वैकल्पिक)</li>
</ul>
<p><strong>विधि</strong></p>
<ol>
<li>तरबूज को छोटे टुकड़ों में काटें।</li>
<li>ब्लेंडर में तरबूज और पुदीना डालकर पीस लें।</li>
<li>नींबू रस मिलाएं और चाहें तो छान लें।</li>
<li>ठंडा-ठंडा सर्व करें।</li>
</ol>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-03/image-(19).png" alt="image (19)" width="333" height="222"></img></p>
<h5><strong>आम पन्ना</strong></h5>
<p><strong>सामग्री:</strong></p>
<ul>
<li>2 कच्चे आम</li>
<li>3-4 चम्मच चीनी या गुड़</li>
<li>½ चम्मच भुना जीरा पाउडर</li>
<li>काला नमक स्वादानुसार</li>
<li>पुदीना पत्तियां</li>
</ul>
<p><strong>विधि:</strong></p>
<ol>
<li>आम को उबालकर गूदा निकाल लें।</li>
<li>गूदे में चीनी, जीरा, काला नमक मिलाएं।</li>
<li>ठंडा पानी डालकर अच्छी तरह मिक्स करें।</li>
<li>पुदीना डालकर ठंडा सर्व करें।</li>
</ol>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-03/image-(20).png" alt="image (20)" width="357" height="201"></img></p>
<h5>बेल का जूस</h5>
<div class="no-scrollbar flex min-h-36 flex-nowrap gap-0.5 overflow-auto sm:gap-1 sm:overflow-hidden xl:min-h-44 mt-1 mb-5 [&amp;:not(:first-child)]:mt-4">
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<div class="shrink-0">
<div class="flex items-center gap-1 rounded-full px-2 py-1.5 text-white backdrop-blur-md backdrop-brightness-75"><strong style="color:rgb(33,37,41);">सामग्री:</strong></div>
<div class="flex items-center gap-1 rounded-full px-2 py-1.5 text-white backdrop-blur-md backdrop-brightness-75"><span style="color:rgb(33,37,41);">1 पका बेल फल</span></div>
<div class="flex items-center gap-1 rounded-full px-2 py-1.5 text-white backdrop-blur-md backdrop-brightness-75"><span style="color:rgb(33,37,41);">3-4 चम्मच गुड़/चीनी</span></div>
<div class="flex items-center gap-1 rounded-full px-2 py-1.5 text-white backdrop-blur-md backdrop-brightness-75"><span style="color:rgb(33,37,41);">2-3 गिलास पानी</span></div>
<div class="flex items-center gap-1 rounded-full px-2 py-1.5 text-white backdrop-blur-md backdrop-brightness-75"><strong style="color:rgb(33,37,41);">विधि:</strong></div>
<div class="flex items-center gap-1 rounded-full px-2 py-1.5 text-white backdrop-blur-md backdrop-brightness-75"><span style="color:rgb(33,37,41);">बेल को तोड़कर गूदा निकाल लें।</span></div>
<div class="flex items-center gap-1 rounded-full px-2 py-1.5 text-white backdrop-blur-md backdrop-brightness-75"><span style="color:rgb(33,37,41);">पानी मिलाकर हाथ से मसलें।</span></div>
<div class="flex items-center gap-1 rounded-full px-2 py-1.5 text-white backdrop-blur-md backdrop-brightness-75"><span style="color:rgb(33,37,41);">छानकर गुड़ या चीनी मिलाएं।</span></div>
<div class="flex items-center gap-1 rounded-full px-2 py-1.5 text-white backdrop-blur-md backdrop-brightness-75"><span style="color:rgb(33,37,41);">ठंडा करके परोसें।</span></div>
<div class="flex items-center gap-1 rounded-full px-2 py-1.5 text-white backdrop-blur-md backdrop-brightness-75"> </div>
<div class="flex items-center gap-1 rounded-full px-2 py-1.5 text-white backdrop-blur-md backdrop-brightness-75"><span style="color:rgb(33,37,41);"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-03/image-(21).png" alt="image (21)" width="339" height="188"></img></span></div>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लाइफ स्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 15:38:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्मार्ट बच्चों की स्क्रीन टाइम आदत कैसे कंट्रोल करें:  पेरेंटिंग के असरदार तरीके</title>
                                    <description><![CDATA[मोबाइल और टीवी के बढ़ते उपयोग के बीच बच्चों की दिनचर्या संतुलित रखने के व्यावहारिक उपाय]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/life-style/6996c1d6edb13/article-46674"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-02/busniess-(76).jpg" alt=""></a><br /><p>डिजिटल दौर में बच्चों का स्क्रीन से जुड़ाव तेजी से बढ़ा है। ऑनलाइन पढ़ाई, गेम्स और मनोरंजन के साधनों ने मोबाइल, टैबलेट और टीवी को उनकी दिनचर्या का हिस्सा बना दिया है। हालांकि जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों की आंखों, नींद, व्यवहार और मानसिक विकास पर असर डाल सकता है। ऐसे में माता-पिता के लिए यह समझना जरूरी है कि स्क्रीन को पूरी तरह हटाने के बजाय संतुलित उपयोग कैसे सुनिश्चित किया जाए।</p>
<h5><strong>स्क्रीन टाइम के लिए स्पष्ट नियम बनाएं</strong></h5>
<p>सबसे पहले घर में स्क्रीन उपयोग को लेकर स्पष्ट और व्यावहारिक नियम तय करें। बच्चों की उम्र के अनुसार समय सीमा तय करें और उसे नियमित रूप से लागू करें। उदाहरण के तौर पर पढ़ाई के बाद सीमित समय तक ही मोबाइल या टीवी देखने की अनुमति दें। नियम जितने स्पष्ट होंगे, बच्चे उन्हें उतनी आसानी से स्वीकार करेंगे।</p>
<h5><strong>खुद उदाहरण बनें</strong></h5>
<p>बच्चे वही सीखते हैं जो वे देखते हैं। यदि घर के बड़े लगातार मोबाइल में व्यस्त रहते हैं, तो बच्चों से स्क्रीन कम करने की अपेक्षा प्रभावी नहीं होगी। परिवार के साथ समय बिताते समय स्क्रीन से दूरी बनाकर सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करें।</p>
<h5><strong>वैकल्पिक गतिविधियों को बढ़ावा दें</strong></h5>
<p>स्क्रीन की जगह रोचक और रचनात्मक गतिविधियों को शामिल करें। खेलकूद, पेंटिंग, कहानी पढ़ना, संगीत या आउटडोर गतिविधियां बच्चों को व्यस्त रखने के बेहतर विकल्प हैं। जब बच्चे नई गतिविधियों में रुचि लेने लगते हैं, तो स्क्रीन पर निर्भरता स्वतः कम होने लगती है।</p>
<h5><strong>नो-स्क्रीन ज़ोन तय करें</strong></h5>
<p>घर में कुछ जगहों और समय को ‘नो-स्क्रीन’ घोषित करना प्रभावी उपाय हो सकता है। जैसे भोजन के समय, सोने से एक घंटा पहले और परिवार के साथ बातचीत के दौरान स्क्रीन का उपयोग न करने का नियम बनाएं। इससे बच्चों में अनुशासन और संतुलन की आदत विकसित होती है।</p>
<h5><strong>बातचीत और समझ जरूरी</strong></h5>
<p>स्क्रीन के नुकसान केवल प्रतिबंध लगाकर नहीं समझाए जा सकते। बच्चों से सरल भाषा में बातचीत करें और उन्हें बताएं कि आंखों की सेहत, नींद और पढ़ाई पर इसका क्या असर पड़ता है। जब बच्चे कारण समझते हैं, तो वे नियमों का पालन करने के लिए अधिक तैयार होते हैं।</p>
<h5><strong>तकनीक का समझदारी से उपयोग</strong></h5>
<p>पैरेंटल कंट्रोल, स्क्रीन टाइम ट्रैकिंग और कंटेंट फिल्टर जैसे विकल्प तकनीक को सुरक्षित बनाने में मदद करते हैं। इन सुविधाओं के माध्यम से माता-पिता बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रख सकते हैं और अनुचित सामग्री से उन्हें दूर रख सकते हैं।</p>
<h5><strong>संतुलन ही सबसे बेहतर समाधान</strong></h5>
<p>विशेषज्ञों के अनुसार पूरी तरह प्रतिबंध लगाने से बच्चों में जिज्ञासा और विरोध की भावना बढ़ सकती है। इसलिए संतुलित उपयोग और सही मार्गदर्शन ही सबसे कारगर तरीका है। परिवार का सहयोग, नियमित संवाद और सकारात्मक वातावरण बच्चों को स्वस्थ डिजिटल आदतें अपनाने में मदद करता है।</p>
<p>बदलते समय में तकनीक से दूरी संभव नहीं, लेकिन उसका सही उपयोग जरूर सिखाया जा सकता है। थोड़े प्रयास और नियमितता से बच्चों की स्क्रीन टाइम आदत को संतुलित बनाया जा सकता है, जिससे उनका शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर बना रहता है।</p>
<p>-------------------------</p>
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<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लाइफ स्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Feb 2026 14:54:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हेयर फॉल रोकने के लिए अपनाएं ये लाइफस्टाइल बदलाव, बालों की सेहत में दिखेगा फर्क</title>
                                    <description><![CDATA[डाइट, स्ट्रेस कंट्रोल और सही हेयर केयर रूटीन से बाल झड़ने की समस्या को काफी हद तक किया जा सकता है नियंत्रित]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/life-style/adopt-these-lifestyle-changes-to-prevent-hair-fall-you-will/article-46348"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-02/busniess-(5).jpg" alt=""></a><br /><p>बालों का झड़ना आज के समय में आम समस्या बन चुका है। बदलती जीवनशैली, तनाव, असंतुलित आहार और प्रदूषण इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार केवल महंगे प्रोडक्ट्स ही नहीं, बल्कि दैनिक आदतों में बदलाव से भी हेयर फॉल को काफी हद तक रोका जा सकता है। सही लाइफस्टाइल अपनाने से बालों की जड़ों को मजबूती मिलती है और स्कैल्प हेल्थ बेहतर होती है।</p>
<p><strong>संतुलित आहार है सबसे जरूरी</strong><br />बालों की मजबूती का सीधा संबंध पोषण से होता है। डाइट में प्रोटीन, आयरन, बायोटिन और ओमेगा-3 फैटी एसिड शामिल करना जरूरी है। दालें, हरी सब्जियां, अंडे, मेवे और फल बालों के लिए फायदेमंद माने जाते हैं। पर्याप्त पानी पीना भी उतना ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि शरीर में पानी की कमी से स्कैल्प ड्राय हो सकता है और बाल कमजोर हो सकते हैं।</p>
<p><strong>तनाव नियंत्रण से मिलेगा लाभ</strong><br />लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव बाल झड़ने का बड़ा कारण बन सकता है। नियमित योग, ध्यान और हल्की एक्सरसाइज से मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है। विशेषज्ञों का कहना है कि रोजाना 20–30 मिनट शारीरिक गतिविधि करने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है, जिससे बालों की जड़ों को पोषण मिलता है।</p>
<p><strong>सही हेयर केयर रूटीन अपनाएं</strong><br />बार-बार केमिकल युक्त प्रोडक्ट्स का उपयोग बालों को नुकसान पहुंचा सकता है। हल्के और सल्फेट-फ्री शैम्पू का उपयोग करना बेहतर माना जाता है। गीले बालों को जोर से कंघी करने से बचना चाहिए, क्योंकि इस समय बाल सबसे कमजोर होते हैं। सप्ताह में एक या दो बार हल्के तेल से स्कैल्प मसाज करने से जड़ों को मजबूती मिलती है।</p>
<p><strong>पर्याप्त नींद भी है जरूरी</strong><br />नींद की कमी शरीर के हार्मोनल संतुलन को प्रभावित करती है, जिसका असर बालों पर भी पड़ता है। विशेषज्ञ रोजाना 7–8 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद लेने की सलाह देते हैं। अच्छी नींद से शरीर की मरम्मत प्रक्रिया बेहतर होती है और बालों की ग्रोथ को समर्थन मिलता है।</p>
<p><strong>हीट स्टाइलिंग और प्रदूषण से बचाव</strong><br />अत्यधिक हीट स्टाइलिंग उपकरणों का उपयोग बालों को कमजोर कर सकता है। हेयर ड्रायर, स्ट्रेटनर और कर्लिंग टूल्स का सीमित उपयोग करना चाहिए। बाहर जाते समय बालों को धूप और धूल से बचाने के लिए कवर करना भी उपयोगी माना जाता है।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि हेयर फॉल को पूरी तरह रोकना हमेशा संभव नहीं होता, लेकिन सही जीवनशैली अपनाकर इसकी गति को कम किया जा सकता है। संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या और सही देखभाल बालों को लंबे समय तक स्वस्थ बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।</p>
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                <pubDate>Mon, 16 Feb 2026 17:32:11 +0530</pubDate>
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