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                <title>Water Dispute - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Water Dispute RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>नर्मदा जल विवाद पर तीन दशक बाद समझौता, मप्र का 7,669 करोड़ का दावा खारिज; अब गुजरात को देगा 550 करोड़</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली में चार राज्यों के बीच वन टाइम सेटलमेंट पर हस्ताक्षर, सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े वित्तीय विवाद का हुआ समाधान; केंद्र की मौजूदगी में बनी सहमति।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/agreement-on-narmada-water-dispute-after-three-decades-mps-claim/article-58146"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/narmada-water-dispute-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">करीब तीन दशक से सरदार सरोवर परियोजना को लेकर मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के बीच चला आ रहा वित्तीय विवाद आखिरकार समाप्त हो गया। मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्र सरकार की मध्यस्थता में चारों राज्यों के बीच वन टाइम सेटलमेंट पर सहमति बन गई। इस समझौते के साथ ही मध्यप्रदेश का गुजरात पर किया गया 7,669 करोड़ रुपये का दावा भी समाप्त हो गया। इसके उलट अब मध्यप्रदेश गुजरात को 550 करोड़ रुपये का भुगतान करेगा। इसी तरह महाराष्ट्र और राजस्थान भी गुजरात को 550-550 करोड़ रुपये देंगे। इस तरह गुजरात को तीनों भागीदार राज्यों से कुल 1,650 करोड़ रुपये मिलेंगे। लंबे समय से लंबित इस विवाद के समाधान को नर्मदा परियोजना से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">समझौते पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की मौजूदगी में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने हस्ताक्षर किए। बैठक में परियोजना से जुड़े वित्तीय दावों और लागत के बंटवारे पर विस्तृत चर्चा के बाद सभी राज्यों ने सहमति जताई। केंद्र सरकार का कहना है कि इस समझौते से वर्षों से लंबित वित्तीय विवाद का स्थायी समाधान निकल गया है और भविष्य में परियोजना से जुड़े मामलों में समन्वय बेहतर होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">सरदार सरोवर बांध नर्मदा नदी पर बनी देश की सबसे महत्वपूर्ण बहुउद्देशीय परियोजनाओं में शामिल है। इस परियोजना का निर्माण गुजरात में हुआ और इसका संचालन भी गुजरात सरकार के नियंत्रण में है। हालांकि बांध बनने से सबसे अधिक भूमि मध्यप्रदेश की जलमग्न हुई। परियोजना के कारण हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि, वन क्षेत्र, सरकारी संपत्तियां और बड़ी संख्या में गांव प्रभावित हुए। मध्यप्रदेश का लगातार कहना था कि उसकी सबसे अधिक जमीन डूब क्षेत्र में आने के कारण उसे उचित मुआवजा मिलना चाहिए। इसी आधार पर राज्य सरकार ने गुजरात पर 7,669 करोड़ रुपये का दावा किया था। इसमें भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास, वन भूमि, सरकारी परिसंपत्तियों और अन्य मदों का खर्च शामिल किया गया था।</p>
<p class="isSelectedEnd">दूसरी ओर गुजरात का तर्क था कि सरदार सरोवर परियोजना की लागत समय के साथ काफी बढ़ गई थी और निर्माण में आए अतिरिक्त खर्च में भागीदार राज्यों को भी हिस्सा देना चाहिए। गुजरात ने मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान पर कुल 7,974.86 करोड़ रुपये की वसूली का दावा किया था। इसमें सबसे अधिक 5,516.50 करोड़ रुपये का दावा मध्यप्रदेश पर किया गया था। महाराष्ट्र पर 1,883.84 करोड़ और राजस्थान पर 574.52 करोड़ रुपये का दावा किया गया था। इसी मुद्दे पर दोनों राज्यों के बीच वर्षों तक सहमति नहीं बन सकी और मामला लगातार लंबित रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd">मध्यप्रदेश का कहना था कि सरदार सरोवर परियोजना के कारण राज्य की लगभग 55.5 प्रतिशत भूमि जलमग्न हुई। डूब क्षेत्र में बड़ी संख्या में वन, खेती की जमीन और कुल 178 गांव शामिल थे। बाद में वर्ष 2014 में बांध की ऊंचाई बढ़ाए जाने के निर्णय के बाद अतिरिक्त पांच हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि भी जलमग्न हो गई। इससे प्रभावित गांवों की संख्या बढ़कर 192 तक पहुंच गई। राज्य सरकार ने वर्ष 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून और उस समय के बाजार मूल्य के आधार पर मुआवजे की राशि का संशोधित आकलन तैयार किया और गुजरात पर 7,669 करोड़ रुपये का दावा प्रस्तुत किया। दूसरी ओर गुजरात पुरानी दरों के आधार पर केवल 281 करोड़ रुपये देने की बात कहता रहा। इसी अंतर के कारण विवाद लगातार गहराता गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">महाराष्ट्र ने भी अपने नंदुरबार जिले में डूबी वन भूमि, सरकारी परिसंपत्तियों और अन्य मदों के आधार पर गुजरात से लगभग 3,000 करोड़ रुपये की मांग की थी। वहीं राजस्थान का कहना था कि उसने परियोजना में 556 करोड़ रुपये की लागत साझेदारी की थी और वह पूरे खर्च के ऑडिट तथा वित्तीय समायोजन की मांग कर रहा था। चारों राज्यों के अलग-अलग दावों के कारण वर्षों तक कोई अंतिम समाधान नहीं निकल सका। कई दौर की बैठकों और तकनीकी चर्चाओं के बावजूद विवाद बना रहा। अब केंद्र सरकार की पहल पर सभी पक्षों ने वन टाइम सेटलमेंट को स्वीकार कर लिया है। समझौते के अनुसार पुराने सभी दावे और प्रतिदावे समाप्त माने जाएंगे। इसके बदले मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान गुजरात को 550-550 करोड़ रुपये का भुगतान करेंगे। माना जा रहा है कि इससे भविष्य में परियोजना के संचालन, वित्तीय प्रबंधन और राज्यों के बीच समन्वय में आसानी होगी। सरकार का कहना है कि लंबे समय से लंबित इस विवाद के समाप्त होने से प्रशासनिक और कानूनी जटिलताएं भी कम होंगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 11:16:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सिंधु जल विवाद पर बिलावल भुट्टो का नया बयान, भारत के लिए क्या हैं इसके मायने?</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री के ताजा बयान के बाद फिर चर्चा में आया सिंधु जल समझौता, जानिए भारत की रणनीति, कानूनी स्थिति और आगे की संभावनाएं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/bilawal-bhuttos-new-statement-on-indus-water-dispute-what-does/article-57514"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bilawal-bhutto.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे सिंधु जल विवाद को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी के ताजा बयान के बाद दोनों देशों के बीच जल सहयोग और सिंधु जल समझौते को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। इस बयान को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब दोनों देशों के रिश्ते पहले से ही कई मुद्दों पर संवेदनशील बने हुए हैं। हालांकि भारत की ओर से अब तक इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन विशेषज्ञ इसे क्षेत्रीय जल सुरक्षा और भविष्य की कूटनीतिक बातचीत के संदर्भ में अहम मान रहे हैं। सिंधु जल समझौता भारत और पाकिस्तान के बीच वर्ष 1960 में हुआ था। इस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच सिंधु नदी प्रणाली की छह प्रमुख नदियों के जल उपयोग को लेकर स्पष्ट व्यवस्था बनाई गई थी। इस समझौते के अनुसार पूर्वी नदियों का अधिकांश जल उपयोग भारत के हिस्से में है, जबकि पश्चिमी नदियों के जल उपयोग से जुड़े अधिकारों का बड़ा हिस्सा पाकिस्तान को मिला है। इसके बावजूद भारत को पश्चिमी नदियों पर निर्धारित नियमों के तहत जलविद्युत परियोजनाएं और सीमित उपयोग की अनुमति भी प्राप्त है।</p>
<p>बिलावल भुट्टो के हालिया बयान के बाद पाकिस्तान में एक बार फिर सिंधु जल समझौते को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। पाकिस्तान लगातार यह कहता रहा है कि सिंधु नदी प्रणाली उसके कृषि क्षेत्र और पेयजल व्यवस्था की रीढ़ है। वहीं भारत का कहना रहा है कि वह समझौते के सभी प्रावधानों का पालन करते हुए अपने वैध अधिकारों का उपयोग करता है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच जलविद्युत परियोजनाओं को लेकर तकनीकी और कानूनी स्तर पर कई दौर की बातचीत भी हो चुकी है। सिंधु जल विवाद केवल पानी का विषय नहीं बल्कि रणनीतिक, आर्थिक और क्षेत्रीय स्थिरता से भी जुड़ा हुआ है। भारत के उत्तरी राज्यों में सिंचाई, बिजली उत्पादन और जल प्रबंधन की कई परियोजनाएं इसी नदी प्रणाली से जुड़ी हैं। दूसरी ओर पाकिस्तान की कृषि व्यवस्था भी इन नदियों पर काफी हद तक निर्भर करती है। इसलिए इस विषय पर दोनों देशों की ओर से दिए जाने वाले प्रत्येक सार्वजनिक बयान को गंभीरता से देखा जाता है।</p>
<p>भारत के लिए इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि सिंधु जल समझौता आज भी लागू है और इसकी व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है। यदि किसी तकनीकी या कानूनी विवाद की स्थिति बनती है तो उसके समाधान के लिए समझौते में पहले से निर्धारित प्रक्रियाएं मौजूद हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी बयान से समझौते की कानूनी स्थिति तत्काल प्रभावित नहीं होती, लेकिन राजनीतिक माहौल अवश्य प्रभावित हो सकता है। आने वाले वर्षों में जल संसाधनों का महत्व और बढ़ेगा। जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा, बढ़ती आबादी और कृषि की बढ़ती जरूरतों के कारण दक्षिण एशिया में जल प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल होता जा रहा है। ऐसे में सिंधु नदी प्रणाली से जुड़े मुद्दों का समाधान संवाद और तकनीकी सहयोग के माध्यम से ही संभव माना जाता है।</p>
<p>भारत पिछले कुछ वर्षों से अपने हिस्से के जल संसाधनों के बेहतर उपयोग पर लगातार काम कर रहा है। जलविद्युत परियोजनाओं का विस्तार, सिंचाई व्यवस्था का आधुनिकीकरण, नदी प्रबंधन और जल संरक्षण जैसी योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अपने वैध अधिकारों का प्रभावी उपयोग करना भारत की दीर्घकालिक जल नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।</p>
<p>भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी संवेदनशील मुद्दे पर सार्वजनिक बयान अक्सर राजनीतिक संदेश भी होते हैं। ऐसे बयानों का उद्देश्य घरेलू राजनीति, अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करना या अपनी स्थिति स्पष्ट करना भी हो सकता है। इसलिए किसी भी टिप्पणी का मूल्यांकन उसके व्यापक कूटनीतिक संदर्भ में किया जाता है। व्यापार और आर्थिक दृष्टि से भी स्थिर क्षेत्रीय संबंध महत्वपूर्ण माने जाते हैं। दक्षिण एशिया में शांति और सहयोग का माहौल बनने से निवेश, ऊर्जा परियोजनाओं, परिवहन और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिल सकता है। वहीं लंबे समय तक तनाव बने रहने से विकास परियोजनाओं और आर्थिक सहयोग पर भी असर पड़ सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 13:58:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि पर फिर दी चेतावनी, पानी रोकने पर भारत को धमकी</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि पर भारत के फैसले का विरोध दोहराया, जल अधिकारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवाज तेज की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/pakistan-again-warns-on-indus-water-treaty-threatens-india-if/article-57359"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/pakistan-india.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">पाकिस्तानी जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने कहा कि पाकिस्तान के हिस्से का पानी रोकने की कोशिश हुई तो उसका जवाब दिया जाएगा। वहीं इस्लामाबाद ने दावा किया कि सिंधु जल संधि अब भी पूरी तरह प्रभावी है और भारत इसे एकतरफा समाप्त नहीं कर सकता। पाकिस्तान ने एक बार फिर सिंधु जल संधि को लेकर भारत के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने सोमवार को इस्लामाबाद में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यदि किसी ने पाकिस्तान के हिस्से का पानी रोकने की कोशिश की तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत पाकिस्तान के हिस्से के पानी के प्रवाह को प्रभावित करना चाहता है। इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच जल विवाद एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई होने तक सिंधु जल संधि को बहाल करने का कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा।<br /><img alt="9k="></img></p>
<p>प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि सिंधु जल संधि अंतरराष्ट्रीय समझौता है और यह कानूनी रूप से अब भी लागू है। उनके अनुसार भारत इस संधि को न तो एकतरफा स्थगित कर सकता है, न समाप्त कर सकता है और न ही इसकी शर्तों में बदलाव कर सकता है। पाकिस्तानी मंत्रियों ने यह भी बताया कि मंगलवार को इस्लामाबाद में सिंधु जल संधि पर पहला अंतरराष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया जाएगा। इसमें जल विशेषज्ञ, कानूनी विशेषज्ञ और विभिन्न देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। सेमिनार में संधि के कानूनी, तकनीकी और अंतरराष्ट्रीय पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। पाकिस्तान सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उसके जल अधिकार सुरक्षित हैं। अधिकारियों के मुताबिक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर पहले भी कई बार कह चुके हैं कि पानी पाकिस्तान की जीवनरेखा है और इस मुद्दे पर कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। ऐसे में पाकिस्तान इस विषय को वैश्विक स्तर पर उठाने की भी तैयारी कर रहा है।<br /><br /></p>
<p>इससे पहले 21 जून को पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी इसी मुद्दे पर भारत को चेतावनी दी थी। एक पाकिस्तानी टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि यदि पाकिस्तान को अपनी जल सुरक्षा पर खतरा महसूस हुआ तो स्थिति गंभीर हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया था कि भारत पानी को रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया था कि हाल के महीनों में इस मामले में हुए सभी घटनाक्रमों की उन्हें पूरी जानकारी नहीं है। भारत ने अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को निलंबित करने का फैसला लिया था। उस हमले में 26 लोगों की जान गई थी। इसके बाद भारत सरकार ने कहा था कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय कार्रवाई नहीं करता, तब तक संधि को बहाल नहीं किया जाएगा। भारत का यह कदम दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ाने वाला माना गया।<br /><br /><img alt="Z"></img></p>
<p>सिंधु जल संधि वर्ष 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई थी। इस समझौते पर तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने हस्ताक्षर किए थे। इस संधि के तहत सिंधु नदी प्रणाली की छह नदियों के जल के उपयोग को लेकर दोनों देशों के अधिकार तय किए गए थे। सिंधु, झेलम और चिनाब का अधिकांश जल पाकिस्तान को मिला, जबकि रावी, ब्यास और सतलुज का उपयोग भारत के हिस्से में आया। पिछले छह दशकों से अधिक समय तक यह संधि दोनों देशों के बीच जल बंटवारे का आधार बनी रही। पाकिस्तान की कृषि और अर्थव्यवस्था काफी हद तक सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है। वहां की लगभग 90 प्रतिशत सिंचित कृषि भूमि को इसी नदी तंत्र से पानी मिलता है। कृषि क्षेत्र पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और लाखों लोगों की आजीविका इससे जुड़ी हुई है। यदि पानी की उपलब्धता प्रभावित होती है तो इसका असर खेती, बिजली उत्पादन, उद्योग और ग्रामीण रोजगार पर भी पड़ सकता है। पाकिस्तान के प्रमुख जलाशय और जलविद्युत परियोजनाएं भी इसी नदी प्रणाली पर आधारित हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 11:09:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सिंधु जल संधि पर फिर बढ़ा तनाव, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री का बड़ा बयान</title>
                                    <description><![CDATA[ख्वाजा आसिफ ने जल सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि पाकिस्तान अपने हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठा सकता है। संधि निलंबन के बाद दोनों देशों के बीच विवाद गहराता नजर आ रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/tension-increases-again-on-indus-water-treaty-big-statement-of/article-56609"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/indus-water-treaty-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर तनावपूर्ण बयानबाजी सामने आई है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा है कि यदि पाकिस्तान को यह महसूस होता है कि उसकी जल सुरक्षा को खतरा पहुंच रहा है तो स्थिति गंभीर हो सकती है और देश अपनी सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। उनके इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच सिंधु जल संधि को लेकर चल रही बहस फिर चर्चा में आ गई है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब पाकिस्तान पहले से ही पानी की कमी और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। ख्वाजा आसिफ ने पाकिस्तानी मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि भारत पाकिस्तान के हिस्से के पानी के प्रवाह में दखल देने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि पानी किसी भी देश के लिए जीवनरेखा की तरह होता है और यदि इस पर असर पड़ता है तो इसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। हालांकि बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि हाल के महीनों में इस विषय पर हुए सभी तकनीकी घटनाक्रमों की उन्हें पूरी जानकारी नहीं है। इसके बावजूद उनका बयान पाकिस्तान में जल संकट को लेकर बढ़ती चिंताओं को दर्शाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दरअसल अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित करने का फैसला लिया था। उस हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी। भारत ने स्पष्ट किया था कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं करता, तब तक संधि को बहाल नहीं किया जाएगा। भारत का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा उसके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है और आतंकवाद से जुड़े मामलों पर किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती। सिंधु जल संधि वर्ष 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई थी। विश्व बैंक की मध्यस्थता में तैयार इस समझौते को दुनिया के सबसे सफल अंतरराष्ट्रीय जल समझौतों में गिना जाता रहा है। इस संधि के तहत सिंधु नदी प्रणाली की छह प्रमुख नदियों के जल उपयोग को लेकर दोनों देशों के अधिकार तय किए गए थे। इनमें सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों का अधिकांश जल पाकिस्तान को दिया गया, जबकि रावी, ब्यास और सतलुज नदियों पर भारत को अधिकार मिला। कई युद्धों और राजनीतिक तनावों के बावजूद यह संधि दशकों तक लागू रही।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पाकिस्तान की जल व्यवस्था काफी हद तक सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है। देश की लगभग 90 प्रतिशत सिंचित कृषि भूमि को पानी इसी नदी तंत्र से मिलता है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी महत्वपूर्ण है और ग्रामीण आबादी का बड़ा हिस्सा खेती पर निर्भर है। ऐसे में पानी की उपलब्धता में किसी भी प्रकार की कमी का असर सीधे खाद्य उत्पादन, रोजगार और ग्रामीण आय पर पड़ सकता है। पाकिस्तान इस समय गंभीर जल संकट से जूझ रहा है। सिंध और बलूचिस्तान जैसे क्षेत्रों में पानी की कमी लगातार बढ़ती जा रही है। सिंध के सिंचाई विभाग के आंकड़ों के मुताबिक कई प्रमुख नहरों में पानी का स्तर सामान्य से काफी नीचे पहुंच चुका है। नॉर्थ वेस्ट कैनाल में 64 प्रतिशत से अधिक पानी की कमी दर्ज की गई है, जबकि राइस कैनाल और दादू कैनाल में भी स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। किसानों का कहना है कि यदि यही हाल रहा तो आने वाले मौसम में फसलों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जल संकट का असर केवल खेती तक सीमित नहीं है। पाकिस्तान के कई बड़े बांध और हाइड्रोपावर परियोजनाएं भी नदी के जल प्रवाह पर निर्भर करती हैं। मंगल और तारबेला जैसे प्रमुख जलाशयों में पानी की उपलब्धता कम होने की आशंका जताई जा रही है। यदि जल स्तर में लगातार गिरावट आती है तो बिजली उत्पादन प्रभावित हो सकता है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे औद्योगिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है और पहले से दबाव झेल रही अर्थव्यवस्था को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। दूसरी ओर भारत का कहना है कि सिंधु जल संधि को लेकर उसका रुख स्पष्ट है। भारत लंबे समय से यह आरोप लगाता रहा है कि पाकिस्तान अपनी जमीन से संचालित होने वाले आतंकी ढांचे के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं करता। इसी कारण भारत ने पहलगाम हमले के बाद कड़ा रुख अपनाया। भारतीय अधिकारियों का मानना है कि आतंकवाद और द्विपक्षीय सहयोग एक साथ नहीं चल सकते। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि जल संसाधनों का मुद्दा आने वाले वर्षों में और अधिक महत्वपूर्ण होने वाला है। दक्षिण एशिया में बढ़ती आबादी, जलवायु परिवर्तन और सीमित जल स्रोतों के कारण पानी को लेकर चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में भारत और पाकिस्तान जैसे देशों के लिए जल प्रबंधन और क्षेत्रीय स्थिरता एक बड़ा विषय बना रहेगा। हालांकि वर्तमान परिस्थितियों में दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी इस मुद्दे को और जटिल बना रही है। सिंधु जल संधि को लेकर बयानबाजी का दौर जारी है। पाकिस्तान अपनी जल सुरक्षा को लेकर चिंता जता रहा है, जबकि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपने रुख पर कायम है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 11:38:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>दुर्ग में पानी विवाद ने लिया खूनी संघर्ष का रूप, एक ही परिवार के 9 लोग हुए घायल</title>
                                    <description><![CDATA[दुर्ग के दांडेसरा गांव में पानी विवाद को लेकर एक ही परिवार के दो पक्षों में जमकर मारपीट हुई। कुल्हाड़ी-रॉड हमले में 9 लोग घायल हुए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/water-dispute-took-the-form-of-bloody-conflict-in-durg/article-54112"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/durg-assault-water-dispute-dandesara-village-family-dispute.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में पानी को लेकर जो विवाद शुरू हुआ</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो शनिवार को हिंसक झड़प में बदल गया। एक ही परिवार के दो पक्षों के बीच जोरदार मारपीट हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें डंडे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लोहे की रॉड और कुल्हाड़ी तक का इस्तेमाल किया गया। इस घटना में 9 लोग घायल हुए हैं। कुछ घायलों को गंभीर चोटें आई हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यह मामला जेवरा सिरसा चौकी क्षेत्र के ग्राम दांडेसरा का है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ग्रामीणों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">दोनों परिवारों के बीच लंबे समय से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। दोनों पक्ष रिश्तेदार हैं और उनके दादा सगे भाई बताए जा रहे हैं। पहले भी जमीन के मुद्दे पर झगड़ा हो चुका है। हाल ही में गांव में पानी की समस्या ने पुराने विवाद को फिर से भड़का दिया। पिछले तीन दिनों से गांव में बिजली नहीं थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे पानी की किल्लत बढ़ गई थी। इसी दौरान पंचायत की पानी टंकी और उसकी चाबी को लेकर विवाद शुरू हुआ।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बताया गया कि एक पक्ष पानी भरने के लिए पंचायत पहुंचा था। आरोप है कि दूसरे पक्ष ने टंकी की चाबी देने से मना कर दिया। इसी बात पर पहले कहासुनी हुई और फिर मामला हाथापाई तक पहुंच गया। देखते ही देखते दोनों तरफ के लोग जुट गए और लाठी-डंडे चलने लगे। महिलाएं भी एक-दूसरे पर हमलावर हो गईं। गांव में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पहले पक्ष से मोनू यादव ने आरोप लगाया कि उसका चाचा खेत में भैंस चराने गया था</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तभी दूसरे पक्ष के लोगों ने उसे घेरकर हमला कर दिया। मोनू का कहना है कि जब वह बीच-बचाव करने गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसके ऊपर भी टंगिया और डंडों से हमला किया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे उसे हाथ और कंधे में गंभीर चोटें आई हैं। मोनू ने कहा कि उनके परिवार के पांच लोग घायल हुए हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दूसरे पक्ष की सियाराम की बेटी ने आरोप लगाया कि विरोधी पक्ष के लोग उनके घर में घुसकर मारपीट करते हैं। उसने बताया कि पानी भरने के लिए पंचायती चाबी लेने पहुंचे थे</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन वहां ताला लगा हुआ था। विरोध करने पर विवाद बढ़ गया और महिलाओं के साथ भी मारपीट की गई। परिवार के कुछ सदस्यों पर खेतों में जाकर हमला करने का भी आरोप है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है। देर रात पुलिस की टीम दुर्ग जिला अस्पताल पहुंची और घायलों के बयान दर्ज किए। जेवरा सिरसा चौकी पुलिस ने बताया कि दोनों पक्षों की शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर लिया गया है और जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस का कहना है कि मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 May 2026 13:04:56 +0530</pubDate>
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