<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bengal-news/tag-14976" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>दैनिक जागरण RSS Feed Generator</generator>
                <title>Bengal News - दैनिक जागरण</title>
                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/tag/14976/rss</link>
                <description>Bengal News RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>बंगाल की सियासत में बड़ा उलटफेर, TMC के तीन पूर्व राज्यसभा सांसद भाजपा में शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[राज्यसभा उपचुनाव से पहले भाजपा ने सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर राय और प्रकाश चिक बराइक को बनाया उम्मीदवार, टीएमसी में बढ़ी राजनीतिक हलचल।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-upheaval-in-bengal-politics-three-former-tmc-rajya-sabha/article-58360"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/tmc-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के तीन पूर्व राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर राय और प्रकाश चिक बराइक ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया है। भाजपा ने पार्टी में शामिल होते ही तीनों नेताओं को राज्यसभा की रिक्त सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर दिया। इस राजनीतिक बदलाव को पश्चिम बंगाल की बदलती सियासी तस्वीर और आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। राज्यसभा उपचुनाव से ठीक पहले हुए इस घटनाक्रम ने बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। तीनों नेताओं ने कुछ सप्ताह पहले ही राज्यसभा सदस्यता और तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा दिया था। उस समय उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर मनमाने तरीके से फैसले लेने और वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी करने के आरोप लगाए थे। अब भाजपा में शामिल होने के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को नई दिशा मिलने की संभावना जताई जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">भाजपा ने इन तीनों नेताओं को जिस तेजी से राज्यसभा उपचुनाव का उम्मीदवार बनाया है, उससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि पार्टी बंगाल में अपने संगठन को और मजबूत करने के लिए अनुभवी नेताओं पर भरोसा जता रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम केवल राज्यसभा चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों की रणनीति का भी हिस्सा हो सकता है। राज्यसभा की इन तीन रिक्त सीटों के लिए 24 जुलाई को मतदान और मतगणना होगी। निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार 14 जुलाई तक नामांकन दाखिल किए जाएंगे, जबकि 15 जुलाई को नामांकन पत्रों की जांच होगी। ऐसे में अगले कुछ दिनों तक बंगाल की राजनीति पूरी तरह इन उपचुनावों और दल-बदल की चर्चाओं के इर्द-गिर्द घूमती रहेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">भाजपा में शामिल होने के बाद सुखेंदु शेखर राय ने अपने इस्तीफे के पीछे की वजह भी सार्वजनिक रूप से बताई। उन्होंने कहा कि आरजी कर अस्पताल रेप और हत्या मामले में उन्होंने सबूतों से कथित छेड़छाड़ और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए थे। इसके बाद उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियां मिलने लगीं। उन्होंने दावा किया कि उनके परिवार के सदस्यों के अपहरण की धमकी भी दी गई। सुखेंदु के अनुसार उन्होंने पुलिस आयुक्त और अस्पताल प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की थी, लेकिन उनकी बात पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया। यहां तक कि खराब स्वास्थ्य के बावजूद उन्हें पुलिस मुख्यालय बुलाया गया, जिसके बाद उन्हें न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।</p>
<p style="text-align:justify;">सुष्मिता देव ने भी भाजपा में शामिल होने के बाद अपने बयान से राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल, असम, ओडिशा और त्रिपुरा जैसे राज्यों में भाजपा की लगातार बढ़ती ताकत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनता के विश्वास को दर्शाती है। उन्होंने असम में लगातार तीसरी बार भाजपा सरकार बनने को इसकी बड़ी मिसाल बताया। साथ ही उन्होंने टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि अन्य राजनीतिक दल उन्हें अपने साथ नहीं लेना चाहते, इसलिए वे अब भी टीएमसी में हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने इन इस्तीफों और भाजपा में शामिल होने की घटना को ज्यादा महत्व देने से इनकार किया है। टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कहा कि तीनों नेता पहले से ही भाजपा के संपर्क में थे। उनके अनुसार अब भाजपा ने केवल अपनी राजनीतिक जरूरत के कारण उन्हें उम्मीदवार बनाया है। उन्होंने दावा किया कि इससे तृणमूल कांग्रेस को कोई राजनीतिक नुकसान नहीं होगा और भाजपा को भी कोई बड़ा लाभ मिलने वाला नहीं है। सौगत रॉय का कहना है कि दल बदलने वाले नेताओं का राजनीतिक प्रभाव सीमित होता है और जनता ऐसे नेताओं को अधिक महत्व नहीं देती।</p>
<p style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर लगातार असंतोष की खबरें सामने आती रही हैं। कई नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने पार्टी छोड़ दी या अलग गुट बना लिया। उपलब्ध राजनीतिक आंकड़ों के अनुसार लोकसभा में टीएमसी के सांसदों की संख्या में भी कमी आई है। राज्यसभा में भी कई सांसदों के इस्तीफे के बाद पार्टी की स्थिति पहले जैसी मजबूत नहीं रही।</p>
<p style="text-align:justify;">विधानसभा में भी पार्टी के सामने चुनौती बढ़ी है। चुनाव में बड़ी जीत हासिल करने के बावजूद कई विधायक अलग गुट का हिस्सा बन चुके हैं। इससे ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के सामने संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने की चुनौती और बढ़ गई है। हालांकि पार्टी नेतृत्व लगातार दावा कर रहा है कि संगठन पूरी तरह मजबूत है और कुछ नेताओं के जाने से उसके जनाधार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। पश्चिम बंगाल में दल-बदल की राजनीति नई नहीं है, लेकिन हाल के वर्षों में इसकी रफ्तार काफी बढ़ी है। भाजपा और टीएमसी दोनों एक-दूसरे के नेताओं को अपने साथ जोड़ने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इससे राज्य की राजनीति लगातार अधिक प्रतिस्पर्धी होती जा रही है। राज्यसभा उपचुनाव के नतीजे भले ही सीमित सीटों तक हों, लेकिन उनका राजनीतिक संदेश आने वाले चुनावों के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जाएगा। भाजपा बंगाल में अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए ऐसे नेताओं को प्राथमिकता दे रही है जिनका प्रशासनिक अनुभव और राजनीतिक पहचान मजबूत हो। वहीं टीएमसी अपने संगठन को मजबूत रखने और असंतुष्ट नेताओं को रोकने की कोशिश में जुटी हुई है। आने वाले महीनों में दोनों दलों के बीच राजनीतिक संघर्ष और तेज होने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-upheaval-in-bengal-politics-three-former-tmc-rajya-sabha/article-58360</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-upheaval-in-bengal-politics-three-former-tmc-rajya-sabha/article-58360</guid>
                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 10:41:51 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/tmc-%281%29.jpg"                         length="204728"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>टीएमसी को एक और झटका, राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक ने दिया इस्तीफा</title>
                                    <description><![CDATA[एक हफ्ते में तीसरे सांसद ने छोड़ी पार्टी, बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल; ममता बनर्जी के नेतृत्व पर उठने लगे सवाल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/6a2a563257bd5/article-55605"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/prakash-chik-baraik.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को एक और बड़ा झटका लगा है। पार्टी के राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक ने अपने पद से इस्तीफा देकर राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। पिछले एक सप्ताह के भीतर टीएमसी छोड़ने वाले वे तीसरे राज्यसभा सांसद बन गए हैं। इससे पहले सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव के इस्तीफे ने भी पार्टी को असहज स्थिति में ला दिया था। लगातार हो रहे इन इस्तीफों को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के लिए गंभीर राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">जानकारी के मुताबिक प्रकाश चिक बराइक ने अपना इस्तीफा राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन को सौंप दिया है। अपने संक्षिप्त इस्तीफा पत्र में उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का अनुरोध किया है। साथ ही उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान मिले सहयोग के लिए सभापति और राज्यसभा सचिवालय का आभार भी व्यक्त किया। हालांकि इस्तीफे के पीछे की स्पष्ट वजह सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में बदले राजनीतिक समीकरणों का असर अब टीएमसी के संगठन और संसदीय दल पर भी दिखाई देने लगा है। राज्यसभा में पार्टी की ताकत लगातार घट रही है। प्रकाश चिक बराइक के इस्तीफे के बाद उच्च सदन में टीएमसी सांसदों की संख्या और कम हो गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd"> बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही थीं। कई नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने सार्वजनिक रूप से संगठन की कार्यशैली और नेतृत्व को लेकर नाराजगी जताई थी। अब सांसदों के इस्तीफे उस असंतोष को और स्पष्ट रूप से सामने ला रहे हैं। बताया जा रहा है कि राज्य में कई विधायक भी अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर नए विकल्प तलाश रहे हैं। इसी बीच कुछ नेताओं के दूसरे राजनीतिक समूहों के संपर्क में होने की चर्चाएं भी तेज हैं। हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक इन अटकलों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। टीएमसी के लिए चिंता की बात केवल राज्यसभा तक सीमित नहीं है। बंगाल विधानसभा में भी पार्टी की स्थिति पहले जैसी मजबूत नहीं मानी जा रही। राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच विपक्ष लगातार दावा कर रहा है कि टीएमसी के कई विधायक और नेता पार्टी नेतृत्व से संतुष्ट नहीं हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रकाश चिक बराइक के इस्तीफे ने ऐसे समय में राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है, जब राज्य में विपक्षी दल लगातार टीएमसी पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में और सांसद या विधायक पार्टी छोड़ते हैं तो इसका असर राष्ट्रीय राजनीति में टीएमसी की भूमिका पर भी पड़ सकता है। टीएमसी लंबे समय से खुद को राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत विपक्षी शक्ति के रूप में स्थापित करने की कोशिश करती रही है। लेकिन लगातार सामने आ रही अंदरूनी चुनौतियां उस रणनीति को प्रभावित कर सकती हैं। पार्टी नेतृत्व के सामने अब संगठन को एकजुट रखने और कार्यकर्ताओं का विश्वास बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उधर, विपक्षी दल इन इस्तीफों को टीएमसी के कमजोर होते जनाधार और संगठनात्मक संकट से जोड़कर देख रहे हैं। उनका कहना है कि पार्टी के भीतर बढ़ती असहमति अब खुलकर सामने आने लगी है। हालांकि टीएमसी के नेताओं का दावा है कि पार्टी अभी भी मजबूत स्थिति में है और कुछ नेताओं के जाने से संगठन पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। आने वाले सप्ताह टीएमसी के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। यदि पार्टी नेतृत्व असंतुष्ट नेताओं को मनाने में सफल रहता है तो स्थिति संभल सकती है, लेकिन यदि इस्तीफों का सिलसिला जारी रहा तो बंगाल की राजनीति में नए समीकरण बनते दिखाई दे सकते हैं। प्रकाश चिक बराइक के इस्तीफे ने इतना जरूर स्पष्ट कर दिया है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल अभी थमने वाली नहीं है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/6a2a563257bd5/article-55605</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/6a2a563257bd5/article-55605</guid>
                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 12:36:27 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/prakash-chik-baraik.jpg"                         length="104408"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>TMC में बड़ी बगावत: 58 विधायकों ने बनाया अलग गुट, ऋतब्रत बनर्जी बने विधायक दल के नेता</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल की राजनीति में भूचाल, ममता बनर्जी की पार्टी में सबसे बड़ा आंतरिक संकट]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-rebellion-in-tmc-58-mlas-formed-a-separate-group/article-54881"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/tmc-split.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) में अभूतपूर्व बगावत देखने को मिली है। पार्टी से हाल ही में निष्कासित किए गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी को 58 बागी विधायकों ने अपना नेता चुन लिया है। इस कदम ने न केवल TMC के भीतर गहरे मतभेदों को उजागर किया है, बल्कि राज्य की राजनीति में नए समीकरणों की संभावना भी पैदा कर दी है। बुधवार को बागी विधायकों के समूह ने विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस से मुलाकात कर समर्थन पत्र सौंपा। इस पत्र में ऋतब्रत बनर्जी को विधायक दल का नेता घोषित किया गया है। इसके अलावा जावेद खान, संदीपन साहा और सिउली साहा को उपनेता तथा अखरुज्जमान को चीफ व्हिप नियुक्त किया गया है। हालांकि बागी गुट ने अभी भी ममता बनर्जी को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष माना है, लेकिन उन्होंने पार्टी के भीतर अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व और उनके फैसलों को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया है। यही मुद्दा इस पूरे राजनीतिक संकट का मुख्य कारण माना जा रहा है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>फर्जी हस्ताक्षर विवाद से शुरू हुआ संकट</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">इस राजनीतिक बगावत की शुरुआत उस समय हुई जब विधायक संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी ने विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष शिकायत दर्ज कराई कि नेता प्रतिपक्ष के चयन संबंधी प्रस्ताव में उनके हस्ताक्षर फर्जी तरीके से लगाए गए हैं।अभिषेक बनर्जी के लेटरहेड पर विधानसभा अध्यक्ष को भेजे गए एक प्रस्ताव में शोभनदेव को नेता विपक्ष बनाने की सिफारिश की गई थी। दोनों विधायकों का आरोप था कि इस प्रस्ताव में उनकी सहमति के बिना उनके हस्ताक्षरों का इस्तेमाल किया गया। शिकायत के बाद पार्टी नेतृत्व ने दोनों विधायकों को अनुशासनहीनता का आरोप लगाते हुए TMC से निष्कासित कर दिया। इसके बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा और धीरे-धीरे कई विधायक उनके समर्थन में आ गए।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>58 विधायकों का समर्थन, बढ़ी TMC की मुश्किलें</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">58 विधायकों का एक साथ अलग गुट बनाना TMC के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह केवल कुछ नेताओं की नाराजगी नहीं, बल्कि पार्टी के अंदर लंबे समय से चल रहे असंतोष का परिणाम है। बागी विधायकों का दावा है कि पार्टी में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की अनदेखी की जा रही है और महत्वपूर्ण निर्णय कुछ चुनिंदा नेताओं तक सीमित हो गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायकों की राय को महत्व नहीं दिया जा रहा और संगठनात्मक ढांचे में पारदर्शिता की कमी है। यही वजह है कि उन्होंने विधायक दल के भीतर अलग पहचान बनाने का निर्णय लिया है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>ममता बनर्जी ने सभी कमेटियां भंग कीं</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">बढ़ते राजनीतिक संकट के बीच मुख्यमंत्री और TMC प्रमुख ममता बनर्जी ने बड़ा कदम उठाते हुए राज्य की सभी पार्टी कमेटियों और फ्रंटल संगठनों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि संगठन के व्यापक पुनर्गठन की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। हालांकि राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह फैसला बागी गुट की ताकत को सीमित करने और संगठन पर नियंत्रण बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। कमेटियों के भंग होने से संगठनात्मक स्तर पर शक्ति संतुलन पूरी तरह बदल सकता है और नए नेतृत्व को सामने लाने का रास्ता खुल सकता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>क्या बागी विधायक TMC पर दावा कर सकते हैं?</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">बागी विधायक विधायक दल के भीतर अलग गुट बनाकर नेता और चीफ व्हिप जैसे पद हासिल कर सकते हैं, लेकिन पार्टी संगठन और चुनाव चिह्न पर उनका सीधा दावा अभी आसान नहीं होगा। भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची यानी दलबदल विरोधी कानून और चुनाव आयोग के नियम इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। 91वें संविधान संशोधन के अनुसार यदि किसी दल के कम से कम दो-तिहाई विधायक अलग होने का फैसला करते हैं, तो उन्हें अयोग्यता से राहत मिल सकती है। इसके बाद यह प्रश्न उठता है कि पार्टी का वास्तविक नियंत्रण किसके पास है। चुनाव आयोग इस स्थिति में कई पहलुओं की जांच करता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>चुनाव आयोग किन आधारों पर फैसला करता है?</strong></h5>
<ol style="text-align:justify;">
<li>पार्टी संगठन का समर्थन किसके पास है।</li>
<li>राष्ट्रीय और राज्य कार्यकारिणी किस गुट के साथ है।</li>
<li>पार्टी संविधान क्या कहता है।</li>
<li>चुने हुए जनप्रतिनिधियों का बहुमत किसके पक्ष में है।</li>
</ol>
<p style="text-align:justify;">इन्हीं मानकों के आधार पर चुनाव आयोग तय करता है कि पार्टी और उसके चुनाव चिह्न पर किसका अधिकार होगा।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>महाराष्ट्र जैसा राजनीतिक घटनाक्रम?</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">राजनीतिक विश्लेषक इस पूरे घटनाक्रम की तुलना महाराष्ट्र की राजनीति से कर रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में महाराष्ट्र में शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) दोनों बड़े विभाजन का सामना कर चुकी हैं। 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना का बड़ा गुट अलग हुआ था। इसके बाद 2023 में अजित पवार के नेतृत्व में NCP का विभाजन हुआ। दोनों मामलों में अलग हुए गुटों ने पार्टी और चुनाव चिह्न पर दावा किया था। पश्चिम बंगाल में भी वैसी ही स्थिति बनने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि TMC का संगठनात्मक ढांचा और नेतृत्व शैली महाराष्ट्र की पार्टियों से अलग मानी जाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-rebellion-in-tmc-58-mlas-formed-a-separate-group/article-54881</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-rebellion-in-tmc-58-mlas-formed-a-separate-group/article-54881</guid>
                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 17:00:33 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/tmc-split.jpg"                         length="155874"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>TMC में बढ़ी अंदरूनी कलह, बागी विधायकों के दावों से सियासत गरमाई</title>
                                    <description><![CDATA[पार्टी से निकाले गए विधायकों ने बहुमत समर्थन का दावा किया, आज विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर सकते हैं बागी नेता]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/internal-strife-increased-in-tmc-politics-heated-up-due-to/article-54758"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/tmc-crisis.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर बढ़ते असंतोष और बागी सुरों ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। पार्टी से निष्कासित किए गए विधायक रिजू दत्ता ने दावा किया है कि बड़ी संख्या में विधायक उनके साथ हैं और वे खुद को असली तृणमूल कांग्रेस मानते हैं। इस दावे के बाद राज्य की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या टीएमसी के भीतर चल रहा असंतोष आने वाले दिनों में किसी बड़े राजनीतिक बदलाव का कारण बन सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रिजू दत्ता का कहना है कि पार्टी के कुल 80 विधायकों में से 50 से अधिक विधायक उनके विचारों से सहमत हैं। उन्होंने दावा किया कि ये विधायक विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगे। बागी गुट की ओर से यह भी कहा गया है कि यदि उनके पास दो-तिहाई बहुमत का समर्थन है तो उन्हें ही पार्टी का वास्तविक प्रतिनिधि माना जाना चाहिए। साथ ही विधानसभा में विपक्ष के नेता के पद को लेकर भी नए दावे सामने आए हैं। बागी नेताओं का कहना है कि नेतृत्व के सवाल पर भी पुनर्विचार होना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सोमवार शाम को कोलकाता स्थित विधायक आवास में हुई एक बैठक ने इस पूरे घटनाक्रम को और अधिक चर्चा में ला दिया। बैठक में निष्कासित विधायक संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी के साथ कई अन्य विधायक भी मौजूद बताए गए। हालांकि बैठक में शामिल विधायकों की सटीक संख्या को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, लेकिन इस बैठक ने पार्टी के भीतर मौजूद असंतोष को खुलकर सामने ला दिया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब नेता प्रतिपक्ष के मुद्दे पर विधानसभा अध्यक्ष को भेजे गए एक प्रस्ताव में कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षरों का आरोप लगाया गया। संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी ने इस मामले पर आपत्ति जताई थी और शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद दोनों नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। निष्कासन के बाद दोनों नेता लगातार पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं और संगठन के भीतर लोकतांत्रिक प्रक्रिया की मांग कर रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस घटनाक्रम ने विपक्षी दलों को भी प्रतिक्रिया देने का अवसर दे दिया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि टीएमसी के भीतर लंबे समय से असंतोष मौजूद था, जो अब सामने आ रहा है। कुछ कांग्रेस नेताओं ने यहां तक कहा कि पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो चुके हैं। वहीं भारतीय जनता पार्टी ने भी इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा नेताओं का कहना है कि वे इस राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं, हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि पार्टी अपनी रणनीति और संगठनात्मक ढांचे के अनुसार आगे बढ़ेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर टीएमसी नेतृत्व ने बागी नेताओं के दावों को खारिज कर दिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि अधिकांश विधायक अब भी ममता बनर्जी के नेतृत्व के साथ खड़े हैं और पार्टी संगठन पूरी तरह मजबूत है। उनका दावा है कि कुछ नेताओं के व्यक्तिगत असंतोष को पूरे संगठन की राय नहीं माना जा सकता। पार्टी का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस अपने संगठनात्मक ढांचे और जनाधार के बल पर पहले की तरह एकजुट बनी हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यदि किसी दल के दो-तिहाई विधायक अलग होकर नया गुट बनाते हैं तो संवैधानिक और कानूनी स्तर पर कई प्रक्रियाएं शुरू होती हैं। ऐसे मामलों में दलबदल कानून, निर्वाचन आयोग के नियम और पार्टी संगठन की स्थिति महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि कोई गुट खुद को मूल पार्टी बताता है तो चुनाव आयोग को यह तय करना होता है कि संगठन, कार्यकारिणी और निर्वाचित प्रतिनिधियों का वास्तविक समर्थन किसके साथ है। ऐसे मामलों में कई बार कानूनी विवाद भी उत्पन्न हो जाते हैं और अंतिम निर्णय में लंबा समय लग सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पिछले कुछ दिनों में टीएमसी के भीतर कई ऐसी घटनाएं हुई हैं जिन्होंने संगठन में मतभेदों की चर्चा को बढ़ावा दिया है। पार्टी की बैठकों में अपेक्षा से कम विधायकों की उपस्थिति, कुछ नेताओं के इस्तीफे और सार्वजनिक मंचों पर उठे सवालों ने नेतृत्व के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह असंतोष सीमित स्तर तक है या वास्तव में संगठन के भीतर बड़ा बदलाव आकार ले रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/internal-strife-increased-in-tmc-politics-heated-up-due-to/article-54758</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/internal-strife-increased-in-tmc-politics-heated-up-due-to/article-54758</guid>
                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 15:53:05 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/tmc-crisis.jpg"                         length="225561"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फाल्टा सीट पर मतगणना जारी, BJP-TMC में किसके खाते में जाएगी जीत</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल की फाल्टा विधानसभा सीट पर मतगणना जारी है। भाजपा ने बड़ी जीत का दावा किया, जबकि TMC उम्मीदवार पहले ही चुनाव से हट चुके हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/counting-of-votes-continues-on-falta-seat-who-will-win/article-54125"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/west-bengal-falta-seat-assembly-elections-bjp-tmc.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">आज सुबह से पश्चिम बंगाल की फाल्टा विधानसभा सीट पर वोटों की गिनती चल रही है और पूरे राज्य की निगाहें इस सीट के नतीजों पर टिकी हुई हैं। ये सीट दक्षिण 24 परगना जिले में है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां 21 मई को फिर से मतदान हुआ था। इसके पहले 29 अप्रैल को हुए चुनाव में गड़बड़ी और धांधली की शिकायतें आई थीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके चलते चुनाव आयोग ने री-पोल का निर्णय लिया। शनिवार सुबह 8 बजे से डायमंड हार्बर महिला विश्वविद्यालय में मतगणना शुरू हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। शुरुआती दौर से ही राजनीतिक दलों के समर्थकों की काफी भीड़ देखी जा रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">फाल्टा सीट को इस बार बंगाल की प्रमुख सीटों में माना जा रहा है। यहाँ भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला होने की उम्मीद थी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन मतदान से ठीक दो दिन पहले टीएमसी के उम्मीदवार जहांगीर खान ने चुनाव से हटने का ऐलान कर दिया। इसके बाद से भाजपा लगातार अपनी जीत का दावा कर रही है। भाजपा नेता दिलीप घोष का कहना है कि फाल्टा में कोई मुकाबला नहीं रह गया है और जनता का मूड बिलकुल साफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि हार के डर से टीएमसी ने पीछे हटने का फैसला किया। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टीएमसी की ओर से इस पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मतगणना स्थल के बाहर सुरक्षा कड़ी है। पुलिस और केंद्रीय बलों की कई कंपनियां तैनात की गई हैं। अधिकारियों ने बताया कि हर राउंड की गिनती पर ध्यान रखा जा रहा है और किसी भी गड़बड़ी से बचने के लिए अतिरिक्त इंतजाम किए गए हैं। सुबह से ही समर्थकों के बीच अलग-अलग राउंड के नतीजों को लेकर चर्चा हो रही है। कुछ जगहों पर भाजपा समर्थक शुरुआती बढ़त की बातें कर रहे हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन चुनाव आयोग ने अंतिम नतीजों का इंतजार करने को कहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">फाल्टा सीट पर कुल छह उम्मीदवार हैं। भाजपा ने देबांग्शु पांडा को मैदान में उतारा है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं कांग्रेस ने अब्दुर रज्जाक मुल्ला और सीपीएम ने संभूनाथ कुर्मी को चुनाव लड़ाया है। इसके अलावा कुछ निर्दलीय उम्मीदवार भी हैं। टीएमसी उम्मीदवार के हटने के बाद मुकाबले का समीकरण बदल गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस सीट का परिणाम भविष्य में बंगाल की राजनीति पर असर डाल सकता है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">फाल्टा सीट पर 21 मई को पुनर्मतदान में करीब 88 प्रतिशत से ज्यादा वोटिंग हुई थी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">और भारी गर्मी के बावजूद लोगों में मतदान के प्रति उत्साह दिखाई दिया। कई मतदान केंद्रों पर सुबह से लंबी कतारें थीं। ग्रामीण इलाकों में महिलाओं और बुजुर्गों ने भी अच्छी भागीदारी की। अब शाम तक फाइनल नतीजे आने की उम्मीद है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और देखना दिलचस्प होगा कि क्या भाजपा यहां जीत हासिल करती है या मुकाबला आखिरी दौर तक चलेगा।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/counting-of-votes-continues-on-falta-seat-who-will-win/article-54125</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/counting-of-votes-continues-on-falta-seat-who-will-win/article-54125</guid>
                <pubDate>Sun, 24 May 2026 15:05:38 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/west-bengal-falta-seat-assembly-elections-bjp-tmc.jpg"                         length="137305"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        