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                <title>Political News India - दैनिक जागरण</title>
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                <title>रात 3 बजे अभिषेक बनर्जी घर पुलिस रेड, सियासी हड़कंप</title>
                                    <description><![CDATA[कोलकाता में तड़के हुई कार्रवाई से राजनीतिक माहौल गरमाया, टीएमसी ने लगाए गंभीर आरोप]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/6a2ce67146ff8/article-55781"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/abhishek-banerjee-raid.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">कोलकाता के कालीघाट इलाके में शनिवार तड़के करीब 3 बजे जो घटनाक्रम सामने आया, उसने पूरे पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा हंगामा खड़ा कर दिया। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के घर पर पुलिस की अचानक हुई कार्रवाई को लेकर “अभिषेक बनर्जी घर रेड” अब राज्य की सबसे बड़ी राजनीतिक बहसों में शामिल हो गया है। जानकारी के मुताबिक कोलकाता पुलिस सेंट्रल फोर्स के जवानों के साथ उनके आवास पर पहुंची और करीब चार घंटे तक तलाशी अभियान चलाया गया। बाहर भारी सुरक्षा तैनात रही और इलाके में देर रात से ही हलचल बढ़ गई थी। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई एक कथित वित्तीय अनियमितता से जुड़े मामले की जांच के सिलसिले में की गई, जो पश्चिम मिदनापुर के सालबनी थाने में दर्ज है। हालांकि, इस पूरी घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेजी से शुरू हो गई है और माहौल लगातार गरमाता गया। पुलिस टीम जब रात लगभग 3 बजे कालीघाट स्थित आवास पर पहुंची तो कई बार दरवाजा खटखटाने के बाद भी कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद जो स्थिति बनी, उस पर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। टीएमसी का आरोप है कि पुलिस ने ताला तोड़कर घर के अंदर प्रवेश किया और पूरे परिसर की तलाशी ली, जबकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई जांच प्रक्रिया का हिस्सा थी और सभी नियमों का पालन किया गया। घर के बाहर सेंट्रल फोर्स के जवानों को तैनात किया गया था, जबकि अंदर पुलिस टीम और कुछ महिला अधिकारी मौजूद थे। लगभग चार घंटे तक चली इस कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके में सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी और स्थानीय लोग भी अचानक हुई इस घटना से हैरान रह गए। “अभिषेक बनर्जी घर रेड” को लेकर सुबह तक राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर जारी रहा और टीएमसी कार्यकर्ताओं की भीड़ धीरे-धीरे उनके आवास के बाहर जमा होने लगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी बीच जैसे ही इस कार्रवाई की खबर फैली, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद कालीघाट स्थित आवास पर पहुंचीं। उनके पहुंचते ही राजनीतिक माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया। टीएमसी नेताओं और समर्थकों का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से राजनीतिक दबाव में की गई है, जबकि प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि जांच एजेंसियां अपने काम के तहत कार्रवाई कर रही हैं और इसमें किसी तरह की असामान्यता नहीं है। अभिषेक बनर्जी ने बाद में मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि उनके घर में जबरन प्रवेश किया गया और पूरे घर की तलाशी ली गई। उन्होंने कहा कि पुलिस ने बिना उचित जवाब का इंतजार किए कार्रवाई की, हालांकि पुलिस का पक्ष है कि जांच के लिए जरूरी प्रक्रिया अपनाई गई थी और यह एक चल रही जांच का हिस्सा है। यह पूरा मामला ऐसे समय में सामने आया है जब अभिषेक बनर्जी पहले से ही कई जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। कुछ दिन पहले ही सीआईडी ने उनसे विधानसभा से जुड़े कथित सिग्नेचर फर्जीवाड़े मामले में पूछताछ की थी, जबकि साइबर शिकायत से जुड़े एक मामले में भी उन्हें नोटिस दिया गया था। इसके अलावा उन्हें 16 जून को दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया गया है। वहीं ईडी ने भी प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले से जुड़े मामले में 15 जून को पेश होने के लिए समन जारी किया है। लगातार चल रही इन जांचों के बीच “अभिषेक बनर्जी घर रेड” ने राजनीतिक तापमान को और बढ़ा दिया है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने भी जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए हैं और फिलहाल किसी भी कठोर कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाई हुई है, फिर भी जांच एजेंसियों की सक्रियता और लगातार हो रही पूछताछ ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। घटना के बाद भारतीय जनता पार्टी ने इसे पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया बताया है और कहा है कि जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं, इसमें किसी प्रकार की राजनीति नहीं होनी चाहिए। दूसरी ओर टीएमसी का आरोप है कि यह सब विपक्षी नेताओं को दबाने की कोशिश है और जांच एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है। इलाके में सुबह तक पुलिस की मौजूदगी बनी रही, हालांकि तलाशी अभियान समाप्त होने के बाद टीम वहां से रवाना हो गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 11:37:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सिद्धारमैया को राष्ट्रीय भूमिका का ऑफर, कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन की चर्चा तेज</title>
                                    <description><![CDATA[सीएम पद छोड़ने के बदले राज्यसभा और 2029 लोकसभा चुनाव में बड़ी जिम्मेदारी की पेशकश, दिल्ली में हाईलेवल मीटिंग के बाद अटकलें बढ़ीं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/siddaramaiah-offered-national-role-discussion-on-change-of-power-in/article-54302"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/karnataka-politics.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">कर्नाटक की राजनीति में बड़ा बदलाव तय माना जा रहा है। दिल्ली में मंगलवार को कांग्रेस हाईकमान के साथ हुई लंबी बैठकों के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को सीएम पद छोड़ने के बदले राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका का प्रस्ताव दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस नेतृत्व उन्हें राज्यसभा भेजकर 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले दिल्ली में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी कर रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">सूत्रों का दावा है कि दिल्ली में करीब सात घंटे चली हाईलेवल मीटिंग के दौरान सत्ता परिवर्तन और संगठनात्मक बदलावों पर गंभीर चर्चा हुई। हालांकि सार्वजनिक तौर पर कांग्रेस नेताओं ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि बातचीत केवल राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों को लेकर थी, लेकिन अंदरखाने से निकल रही जानकारी कुछ और ही संकेत दे रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि सिद्धारमैया को यह समझाने की कोशिश की गई है कि पार्टी को अब राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत ओबीसी नेतृत्व की जरूरत है। खासकर ऐसे समय में जब कांग्रेस सामाजिक न्याय और जाति जनगणना जैसे मुद्दों को राष्ट्रीय एजेंडे में आगे बढ़ा रही है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>राज्यसभा और दिल्ली भूमिका का ऑफर</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस नेतृत्व ने सिद्धारमैया से कहा है कि यदि वे मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा के रास्ते दिल्ली आते हैं तो उन्हें केंद्र में एक बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसमें 2029 के लोकसभा चुनाव की रणनीति में अहम भूमिका शामिल हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस प्रस्ताव को एक “सम्मानजनक एग्जिट फॉर्मूला” के रूप में देखा जा रहा है, ताकि सिद्धारमैया का राजनीतिक कद भी बना रहे और कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन भी सहज तरीके से पूरा हो सके। इसी बीच यह भी चर्चा है कि पार्टी उन्हें ओबीसी चेहरे के तौर पर राष्ट्रीय स्तर पर प्रोजेक्ट करना चाहती है, जिससे कांग्रेस की सामाजिक न्याय की राजनीति को मजबूती मिल सके।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">राजनीतिक हलकों में यह लगभग तय माना जा रहा है कि कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन हो सकता है। चर्चा है कि सिद्धारमैया 28 मई के आसपास मुख्यमंत्री पद छोड़ सकते हैं, जबकि उनके स्थान पर डीके शिवकुमार के नाम पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस के भीतर पिछले काफी समय से नेतृत्व को लेकर खींचतान चल रही थी, जो अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। सूत्रों का कहना है कि सिद्धारमैया को पार्टी की ओर से यह संकेत दे दिया गया है कि उन्हें राष्ट्रीय भूमिका स्वीकार करनी चाहिए। बताया जा रहा है कि गुरुवार को सिद्धारमैया अपने आवास पर राज्य कैबिनेट के मंत्रियों के साथ ब्रेकफास्ट मीटिंग भी करने वाले हैं, जिसे राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>दिल्ली में हुई अहम बैठकें</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी के साथ सिद्धारमैया की सीधी बातचीत हुई, जिसमें नेतृत्व परिवर्तन और भविष्य की भूमिका पर चर्चा की गई। सूत्रों के मुताबिक इसी बैठक में उन्हें संकेत दिए गए कि पार्टी चाहती है कि वे मुख्यमंत्री के रूप में अपना कार्यकाल पूरा करते हुए राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका निभाएं। हालांकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने सार्वजनिक बयान में इन सभी दावों को खारिज किया है और कहा है कि अभी केवल संगठनात्मक चुनावों और राज्यसभा नामांकन पर चर्चा हो रही है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>परिवार और राजनीतिक समीकरण</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">एक राजनीतिक फॉर्मूले के तहत सिद्धारमैया के बेटे को कर्नाटक में डिप्टी सीएम बनाए जाने की भी चर्चा है, हालांकि इस पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। साथ ही उनके करीबी नेताओं को सरकार में महत्वपूर्ण विभाग दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। राज्यसभा नामांकन की अंतिम तारीख 8 जून होने के कारण कांग्रेस नेतृत्व के पास इस फैसले को टालने का ज्यादा समय नहीं है। ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कर्नाटक की राजनीति में बड़ा फैसला देखने को मिल सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 May 2026 13:05:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बंगाल चुनाव में गरजे पीएम मोदी, TMC पर हमला और महिला सुरक्षा का वादा</title>
                                    <description><![CDATA[कोलकाता रैली में पीएम मोदी बोले- TMC का दीया बुझने वाला, महिला आरक्षण और सुरक्षा पर BJP का जोर बंगाल चुनावी माहौल में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। पीएम मोदी और अमित शाह के बयानों ने मुकाबले को और धार दे दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/pm-modi-roars-in-bengal-elections-attacks-tmc-and-promises/article-52003"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/_pm-modi-attacks-tmc.jpg" alt=""></a><br /><p>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच शुक्रवार को कोलकाता के दमदम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जोरदार चुनावी रैली को संबोधित किया। उन्होंने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “TMC का दीया अब बुझने वाला है, और बुझता हुआ दीया फड़फड़ाता है।” पीएम ने दावा किया कि राज्य में बदलाव की लहर चल रही है और पहले चरण की रिकॉर्ड वोटिंग ने इस संकेत को और मजबूत कर दिया है।</p>
<p>रैली में प्रधानमंत्री ने महिला सुरक्षा और महिला आरक्षण को प्रमुख मुद्दा बनाते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) “बेटियों के सपनों को कुचलने नहीं देगी।” उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य में सरकार बनने पर महिलाओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।</p>
<h5><strong>चुनावी माहौल गरम</strong></h5>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में TMC सरकार पर भ्रष्टाचार, सिंडिकेट और कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बंगाल को “TMC के डर, भ्रष्टाचार और अत्याचार से मुक्ति” की जरूरत है।</p>
<p>पीएम ने यह भी कहा कि बंगाल की जनता अब परिवर्तन चाहती है और दूसरे चरण की वोटिंग में यह रुझान और स्पष्ट होगा। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए अधिक से अधिक संख्या में मतदान करें।</p>
<h5><strong>महिला मुद्दे पर फोकस</strong></h5>
<p>महिला सुरक्षा और अधिकारों को लेकर पीएम ने कहा कि राज्य की बेटियां न्याय चाहती हैं और उन्हें पूरा समर्थन मिलेगा। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह महिलाओं के अधिकारों के प्रति गंभीर नहीं है।</p>
<p>इस दौरान संदेशखाली जैसे मामलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा महिलाओं को नेतृत्व देने और उनकी आवाज को मजबूत करने का काम कर रही है।</p>
<h5><strong>शाह का दावा और रणनीति</strong></h5>
<p>इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि पहले चरण की 152 सीटों में से भाजपा 110 से अधिक सीटों पर बढ़त बना रही है। उन्होंने कहा कि “भय से भरोसे की यात्रा” शुरू हो चुकी है और राज्य में भाजपा की सरकार बनना तय है।</p>
<p>शाह ने यह भी कहा कि भाजपा सरकार बनने के बाद “भतीजा टैक्स” और सिंडिकेट व्यवस्था खत्म की जाएगी और भ्रष्टाचार के मामलों की जांच कराई जाएगी।</p>
<h5><strong>आंकड़े</strong></h5>
<p>बंगाल में पहले चरण में 23 अप्रैल को 152 सीटों पर मतदान हुआ, जिसमें रिकॉर्ड 92% से अधिक वोटिंग दर्ज की गई। यह पिछले कई वर्षों में सबसे अधिक मतदान प्रतिशत बताया जा रहा है।</p>
<p>दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होना है, जबकि चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे। इस बार चुनाव में TMC, BJP और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है।अब सभी की नजर दूसरे चरण के मतदान पर टिकी है, जहां राजनीतिक दल अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। चुनाव परिणाम यह तय करेंगे कि बंगाल में सत्ता किसके हाथ में जाएगी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 13:30:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>SIR के बाद भी बंपर वोटिंग: बंगाल में 95% तक मतदान</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल में SIR के बावजूद रिकॉर्ड मतदान, कई सीटों पर 95% से ज्यादा वोटिंग दर्ज बंगाल में वोटरों ने हर अनुमान को पीछे छोड़ दिया।जहां नाम कटे, वहीं सबसे ज्यादा मतदान ने चौंकाया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/even-after-sir-bumper-voting-voting-up-to-95-in/article-51995"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/west-bengal-election-2026.jpg" alt=""></a><br /><p><span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">पश्चिम बंगाल</span></span> में विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। 23 अप्रैल को 152 सीटों पर हुए मतदान में राज्यभर में 92.9 फीसदी वोटिंग दर्ज की गई, जो 2011 के बाद सबसे ज्यादा है। खास बात यह रही कि जिन सीटों पर विशेष पुनरीक्षण अभियान (SIR) के तहत बड़ी संख्या में वोटर सूची से नाम हटाए गए थे, वहां भी 95 फीसदी से अधिक मतदान हुआ। यह ट्रेंड चुनावी माहौल और मतदाताओं के उत्साह को साफ तौर पर दर्शाता है।</p>
<p>चुनाव आयोग के अनुसार, मुर्शिदाबाद जिले की समसेरगंज सीट पर 96.03 फीसदी मतदान हुआ, जबकि यहां सबसे ज्यादा करीब 91 हजार से अधिक नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए थे। इसी तरह लालगोला, भगवानगोला, रघुनाथगंज और फरक्का सीटों पर भी 96 फीसदी के आसपास मतदान दर्ज किया गया, जबकि इन क्षेत्रों में भी SIR के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए गए थे।</p>
<h5><strong>SIR के बाद असर</strong></h5>
<p>SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन अभियान के तहत राज्य में करीब 11.63 फीसदी वोटरों के नाम सूची से हटाए गए थे। चुनाव आयोग के मुताबिक, हटाए गए नामों में मृत, स्थानांतरित या डुप्लिकेट प्रविष्टियां शामिल थीं। इसके बावजूद जिस तरह से वोटिंग प्रतिशत बढ़ा, उसने कई राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है।</p>
<p>बंपर मतदान को लेकर सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इसे जनता का समर्थन बताते हुए कहा कि लोगों ने बड़े पैमाने पर मतदान कर विपक्ष की रणनीतियों को नाकाम कर दिया है। वहीं, भाजपा नेताओं का कहना है कि यह बदलाव और सत्ता परिवर्तन की इच्छा का संकेत है।</p>
<p>पृष्ठभूमि की बात करें तो 2011 में पश्चिम बंगाल में 84.72 फीसदी मतदान हुआ था, जब ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस ने वाम मोर्चा सरकार को सत्ता से हटाया था। इस बार का मतदान प्रतिशत उस रिकॉर्ड को भी पार कर गया है।</p>
<p>महिला मतदाताओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, महिलाओं ने 92.69 फीसदी और पुरुषों ने 90.92 फीसदी मतदान किया। यह अंतर दर्शाता है कि महिला वोटर्स इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं।</p>
<p>विश्लेषकों का मानना है कि SIR प्रक्रिया चुनावी मुद्दा भी बनी, जिसका असर मतदाताओं के रुझान पर पड़ा। कुछ विपक्षी दलों ने इसे लेकर आपत्ति जताई थी और सुप्रीम कोर्ट तक मामला पहुंचा था।</p>
<p>आगे के चरणों में भी मतदान का यह रुझान बना रहता है या नहीं, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। फिलहाल, पहले चरण की रिकॉर्ड वोटिंग ने यह साफ कर दिया है कि बंगाल में लोकतंत्र के इस उत्सव में जनता बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/even-after-sir-bumper-voting-voting-up-to-95-in/article-51995</link>
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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 12:39:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राज्यसभा उपनेता पद से हटे राघव चड्ढा, बोले- 'AAP मेरी आवाज दबा रही'</title>
                                    <description><![CDATA[राघव चड्ढा को राज्यसभा उपनेता पद से हटाने पर AAP में हलचल, बोले- आवाज दबाई जा रही। जानें पूरा मामला।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/69cf649a2df65/article-50040"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/raghav-chadha-aap-rajya-sabha-deputy-leader-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">राघव चढ्ढा (Raghav Chadha) को राज्यसभा में उपनेता (डिप्टी लीडर) के पद से हटाए जाने के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई है। इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए चड्ढा ने आरोप लगाया कि पार्टी उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">उन्होंने एक वीडियो जारी कर कहा कि वह सदन में आम लोगों के मुद्दे उठाते रहे हैं और यदि यही कारण है तो यह सवाल उठता है कि इसमें गलत क्या है। चड्ढा ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “खामोश करवाया गया हूं, हारा नहीं हूं,” और इसे अपनी राजनीतिक लड़ाई का नया चरण बताया। इस घटनाक्रम को Arvind Kejriwal के नेतृत्व में लिए गए निर्णय के रूप में देखा जा रहा है, जिसने पार्टी के भीतर नेतृत्व और रणनीति को लेकर चर्चाओं को जन्म दिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर चड्ढा की जगह सांसद अशोक मित्तल को उपनेता नियुक्त करने की सिफारिश की है। पार्टी की ओर से इसे “रूटीन प्रक्रिया</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;">”</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;"> बताया गया है। पत्र में यह भी कहा गया कि सदन में पार्टी के कोटे का जो समय पहले चड्ढा को मिलता था, अब वह अशोक मित्तल को दिया जाए।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">बयान और विवाद</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">राघव चड्ढा ने अपने 2 मिनट 18 सेकंड के वीडियो संदेश में कहा कि उन्होंने संसद में मोबाइल डेटा की कीमत, मध्यम वर्ग पर टैक्स का बोझ, एयरपोर्ट पर महंगे खाने और डिलिवरी कर्मियों की समस्याओं जैसे मुद्दे उठाए। उनके मुताबिक इन मुद्दों को जनता का समर्थन मिला और कुछ मामलों में समाधान भी निकला।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">उन्होंने सवाल उठाया कि अगर ये मुद्दे जनता से जुड़े हैं, तो इन्हें उठाने से पार्टी को क्या नुकसान हो सकता है। चड्ढा ने यह भी दावा किया कि पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को लिखकर उनके बोलने के समय को सीमित करने की मांग की थी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">राजनीतिक संकेत</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">चड्ढा का बयान केवल व्यक्तिगत नाराजगी तक सीमित नहीं दिखता, बल्कि इसे पार्टी नेतृत्व को खुली चुनौती के रूप में भी देखा जा रहा है। उन्होंने कहा, “मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझना, मैं वो दरिया हूं जो सैलाब ला सकता हूं,” जो सियासी संदेश के तौर पर लिया जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">पार्टी के भीतर इससे पहले भी नेतृत्व और रणनीति को लेकर मतभेद की खबरें सामने आती रही हैं, हालांकि आधिकारिक तौर पर इन्हें कभी स्वीकार नहीं किया गया। सूत्रों के मुताबिक, हाल के महीनों में चड्ढा की सक्रियता और उनके मुद्दों को लेकर पार्टी के भीतर अलग-अलग राय थी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">पृष्ठभूमि</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">AAP में राज्यसभा में डिप्टी लीडर का पद पहले एनडी गुप्ता के पास था, जिसके बाद यह जिम्मेदारी राघव चड्ढा को सौंपी गई थी। चड्ढा को पार्टी का युवा और मुखर चेहरा माना जाता रहा है, जिन्होंने संसद में कई जनहित से जुड़े मुद्दे उठाए।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">हालांकि, हालिया घटनाक्रम यह संकेत देता है कि पार्टी अब अपने संसदीय चेहरों और रणनीति में बदलाव कर रही है। अशोक मित्तल की नियुक्ति इसी दिशा में एक कदम मानी जा रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">असर और आगे की राह</span></strong></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">इस फैसले का असर केवल पार्टी के अंदरूनी समीकरण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संसद में AAP की रणनीति और आवाज पर भी पड़ेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम आने वाले समय में पार्टी की छवि और आंतरिक एकजुटता को प्रभावित कर सकता है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 14:02:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मालदा हिंसा केस में बड़ा एक्शन, मुख्य साजिशकर्ता गिरफ्तार, 35 लोग अन्य अरेस्ट, NIA जांच शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[मालदा प्रोटेस्ट केस में मुख्य साजिशकर्ता गिरफ्तार, 35 लोग अरेस्ट। सुप्रीम कोर्ट के बाद NIA जांच तेज, जानिए पूरी अपडेट।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-action-in-malda-violence-case-main-conspirator-arrested-35/article-50019"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/malda-protest-case-isf-candidate-arrest.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">पश्चिम बंगाल के मालदा प्रोटेस्ट केस में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां कथित मुख्य साजिशकर्ता को गिरफ्तार कर लिया गया है और अब तक कुल 35 लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद चुनाव आयोग के निर्देश पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने मामले की जांच शुरू कर दी है। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई उस घटना के बाद तेज हुई, जिसमें मालदा जिले के कालियाचक क्षेत्र में सात न्यायिक अधिकारियों को करीब आठ घंटे तक बंधक बनाकर रखा गया था। इस घटना ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं और इसे एक सुनियोजित साजिश के रूप में भी देखा जा रहा है। राज्य पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां अब मिलकर पूरे मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रही हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">मुख्य कार्रवाई और गिरफ्तारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">ADG नॉर्थ बंगाल के अनुसार, मोफक्करुल इस्लाम को बागडोगरा एयरपोर्ट से उस समय हिरासत में लिया गया जब वह कथित रूप से भागने की कोशिश कर रहा था। जांच एजेंसियों का कहना है कि वह लोगों को भड़काने और हिंसा को उकसाने में प्रमुख भूमिका निभा रहा था। इसी मामले में ISF से जुड़े उम्मीदवार शाहजहां अली समेत कुल 35 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने कहा है कि सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है और डिजिटल व भौतिक साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">घटना की पृष्ठभूमि</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">बुधवार को मालदा के कालियाचक इलाके में हुई इस घटना ने राज्य प्रशासन को हिला दिया था। उपद्रवियों ने सात न्यायिक अधिकारियों को घेरकर बंधक बना लिया था, जिससे इलाके में तनाव फैल गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, स्थिति तब नियंत्रण में आई जब सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद प्रशासन हरकत में आया। इसके बाद कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने राज्य के डीजीपी से सीधे बातचीत की, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">आधिकारिक बयान</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान देश के मुख्य न्यायाधीश ने इस घटना को गंभीर बताते हुए कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने संकेत दिया कि यह मामला सामान्य विरोध प्रदर्शन से आगे बढ़कर एक संगठित साजिश हो सकता है। वहीं, राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक साजिश करार दिया है। उनका कहना है कि बंगाल को बदनाम करने के उद्देश्य से इस मामले को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">दूसरी ओर, आरोपी मोफक्करुल इस्लाम ने अपनी गिरफ्तारी के बाद दावा किया कि वह केवल एक आंदोलन में शामिल लोगों की मदद के लिए वहां मौजूद था और उसने किसी भी प्रकार की हिंसा या साजिश में भाग नहीं लिया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">जांच का दायरा</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">NIA की एंट्री के बाद जांच का दायरा काफी बढ़ गया है। एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यह विरोध प्रदर्शन पहले से योजनाबद्ध था और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे। सूत्रों के मुताबिक, कॉल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया गतिविधियां और वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">असर और आगे की स्थिति</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">इस मामले ने न केवल राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि चुनावी माहौल में भी हलचल पैदा कर दी है। सुरक्षा एजेंसियां अब संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात कर रही हैं।</span></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं, क्योंकि NIA की जांच जारी है। मालदा प्रोटेस्ट केस अब एक बड़ी राष्ट्रीय जांच में बदल चुका है और इसकी हर अपडेट पर देशभर की नजर बनी हुई है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 12:25:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>2029 से लागू होगा 33% महिला आरक्षण: लोकसभा सीटें बढ़कर 816, 273 सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार ला सकती है दो नए बिल; 2011 जनगणना के आधार पर परिसीमन का प्रस्ताव]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/33-women-reservation-will-be-implemented-from-2029-lok-sabha/article-48900"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/2019-chunav.jpg" alt=""></a><br /><p>केंद्र सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिलाओं को 33% आरक्षण लागू करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। इस प्रस्ताव के तहत लोकसभा में सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर 816 की जा सकती है, जिनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।</p>
<p>यह पहल 2023 में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लागू करने के लिए की जा रही है। इस कानून को संविधान के 106वें संशोधन के रूप में मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया है।</p>
<p>सरकार का प्लान है कि संसद के मौजूदा सत्र में दो अहम बिल पेश किए जाएं। पहला बिल महिला आरक्षण कानून में संशोधन से जुड़ा होगा, जबकि दूसरा परिसीमन कानून में बदलाव के लिए लाया जाएगा। इन बिलों को पारित कराने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत जरूरी होगा, इसलिए सरकार विपक्षी दलों से सहमति बनाने में जुटी है।</p>
<p>गृहमंत्री अमित शाह ने इस मुद्दे पर एनडीए और गैर-कांग्रेसी विपक्षी दलों के नेताओं के साथ बैठक भी की है। कांग्रेस समेत अन्य दलों से भी चर्चा जारी है।</p>
<p>सरकार का प्रस्ताव है कि नई जनगणना का इंतजार किए बिना 2011 की जनगणना के आधार पर ही परिसीमन प्रक्रिया पूरी की जाए। इससे महिला आरक्षण को समय पर लागू करना संभव हो सकेगा।</p>
<p>आरक्षण व्यवस्था के तहत अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग की महिलाओं को उनके कोटे के भीतर आरक्षण मिलेगा। हालांकि, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की महिलाओं के लिए अलग से प्रावधान फिलहाल शामिल नहीं किया गया है।</p>
<p>यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो यह देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे संसद में महिला प्रतिनिधित्व में बड़ा बदलाव आएगा और नीति निर्माण में महिलाओं की भूमिका मजबूत होगी।</p>
<p>-------------------------</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 11:22:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>PM मोदी बने भारत में सबसे लंबे समय तक सरकार प्रमुख रहने वाले नेता, 8931 दिन का रिकॉर्ड</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के कार्यकाल को मिलाकर पवन कुमार चामलिंग को पीछे छोड़ा; लगातार प्रधानमंत्री रहने में नेहरू अब भी आगे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/pm-modi-becomes-the-leader-who-has-been-the-head/article-48769"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/pm-modi.jpg" alt=""></a><br /><p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत में सबसे लंबे समय तक सरकार के प्रमुख रहने वाले नेता बन गए हैं। मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में कुल 8,931 दिन पूरे करने के साथ उन्होंने सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। चामलिंग 8,930 दिनों तक इस पद पर रहे थे।</p>
<p>यह उपलब्धि 22 मार्च 2026 को दर्ज हुई, जब मोदी ने अपने राजनीतिक जीवन में सरकार के प्रमुख के तौर पर कुल कार्यकाल के मामले में नया कीर्तिमान स्थापित किया। इससे पहले वे गुजरात के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेता भी रह चुके हैं।</p>
<p>मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। इसके बाद उन्होंने 2002, 2007 और 2012 में लगातार चुनाव जीतकर करीब 14 साल तक राज्य का नेतृत्व किया। इसके बाद 26 मई 2014 को उन्होंने पहली बार देश के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली और तब से लगातार इस पद पर बने हुए हैं। वर्तमान में वे अपने तीसरे कार्यकाल में हैं।</p>
<p>प्रधानमंत्री के रूप में भी मोदी ने कई रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं। 2025 में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के लगातार 4077 दिनों तक प्रधानमंत्री रहने के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया था। 22 मार्च 2026 तक वे 4318 दिनों से अधिक समय तक प्रधानमंत्री पद पर रह चुके हैं।</p>
<p>हालांकि, देश में सबसे लंबे समय तक लगातार प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड अब भी जवाहरलाल नेहरू के नाम है, जिन्होंने 15 अगस्त 1947 से 27 मई 1964 तक कुल 6126 दिन इस पद पर बिताए। इस लिहाज से मोदी अभी भी इस रिकॉर्ड से पीछे हैं और इसे तोड़ने के लिए उन्हें 2029 के बाद भी पद पर बने रहना होगा।</p>
<p>जिस रिकॉर्ड को मोदी ने पीछे छोड़ा है, वह पवन कुमार चामलिंग के नाम था। चामलिंग ने 1994 से 2019 तक सिक्किम के मुख्यमंत्री के रूप में करीब 24 साल 165 दिन तक लगातार शासन किया। उनके कार्यकाल को राजनीतिक स्थिरता और विकास के लिए जाना जाता है।</p>
<p>राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मोदी का यह लंबा कार्यकाल भारतीय राजनीति में निरंतर नेतृत्व और जनाधार को दर्शाता है। वहीं, विपक्ष इस उपलब्धि को लोकतांत्रिक प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में देखता है और इसे राजनीतिक परिस्थितियों से जोड़कर विश्लेषित करता है।</p>
<p>आगे आने वाले वर्षों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या मोदी लगातार प्रधानमंत्री के रूप में नेहरू के रिकॉर्ड को भी पार कर पाते हैं या नहीं। फिलहाल, उनका यह नया रिकॉर्ड भारतीय राजनीति में एक अहम मील का पत्थर माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 16:06:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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                <title>इंदौर कांग्रेस कार्यकारिणी में बड़ा फैसला: पार्षद दावेदारों को नहीं मिलेगा संगठन पद</title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम चुनाव से पहले संगठन सुदृढ़ीकरण पर फोकस, सक्रिय कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/69930b6a555d1/article-46364"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-02/mp-(55).jpg" alt=""></a><br /><p>नगर निगम चुनाव से पहले इंदौर शहर कांग्रेस ने संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण रणनीतिक निर्णय लिया है। आगामी कार्यकारिणी में उन नेताओं को शामिल नहीं किया जाएगा जो पार्षद टिकट के दावेदार हैं या जिन्हें चुनाव में उम्मीदवार बनाया जा सकता है। साथ ही वर्तमान पार्षदों को भी किसी संगठनात्मक पद से दूर रखा जाएगा। यह फैसला संगठन सृजन अभियान के तहत लिया गया है।</p>
<p>करीब 50 सदस्यों की नई शहर कार्यकारिणी का गठन प्रस्तावित है। सूची को प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) के अनुमोदन के लिए भेजा जाना था, लेकिन नामों पर चल रही चर्चा और समीकरणों के कारण फिलहाल इसे रोक दिया गया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि सूची जारी होने के बाद असंतोष की संभावना को देखते हुए नेतृत्व सतर्कता बरत रहा है।</p>
<h5><strong>वार्ड स्तर पर काम की जिम्मेदारी</strong></h5>
<p>शहर कांग्रेस का तर्क है कि जो नेता चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं, वे संगठनात्मक दायित्व निभाने की बजाय अपने-अपने वार्ड में अधिक सक्रिय रहेंगे। ऐसे में उन्हें संगठनात्मक पद देने से पार्टी संरचना कमजोर हो सकती है। इसलिए संभावित प्रत्याशियों को वार्ड स्तर पर संगठन मजबूत करने का दायित्व सौंपा जाएगा।</p>
<p>इस फैसले का उद्देश्य स्पष्ट है—चुनाव से पहले बूथ और वार्ड स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाना। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि मजबूत जमीनी ढांचा ही आगामी नगर निगम चुनाव में बेहतर प्रदर्शन की कुंजी है।</p>
<h5><strong>सक्रिय कार्यकर्ताओं को मिलेगा मौका</strong></h5>
<p>विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, इस बार कार्यकारिणी में उन्हीं कार्यकर्ताओं को स्थान दिया जाएगा जो लंबे समय से संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं। निष्क्रिय या केवल टिकट की दावेदारी रखने वाले नेताओं को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी। यह कदम पार्टी के भीतर जवाबदेही और अनुशासन को बढ़ावा देने के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<h5><strong>अंदरूनी खींचतान भी चुनौती</strong></h5>
<p>सीमित पदों के कारण वरिष्ठ नेताओं के बीच अपने समर्थकों को जगह दिलाने की होड़ भी देखी जा रही है। यही वजह है कि अंतिम सूची पर सहमति बनाने में समय लग रहा है। पार्टी नेतृत्व संतुलन साधने की कोशिश में है ताकि निर्णय के बाद विवाद की स्थिति न बने।</p>
<h5><strong>वार्ड और बूथ अध्यक्षों की सूची लंबित</strong></h5>
<p>जिला कांग्रेस कमेटी ने ग्रामीण स्तर पर नियुक्तियां पूरी कर ली हैं, लेकिन शहर में अभी वार्ड अध्यक्ष और बूथ अध्यक्षों की घोषणा शेष है। शहर अध्यक्ष ने इन पदों के लिए नाम पुनः आमंत्रित किए हैं और अंतिम सूची 28 फरवरी तक तय होने की संभावना है।</p>
<p>राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह निर्णय संगठन और चुनावी तैयारी को अलग-अलग रखने की रणनीति का हिस्सा है। यदि इसे प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो नगर निगम चुनाव में पार्टी को लाभ मिल सकता है।</p>
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                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Feb 2026 18:40:28 +0530</pubDate>
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