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                <title>Indo-Pacific - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Indo-Pacific RSS Feed</description>
                
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                <title>चीन के मिसाइल परीक्षण ने बढ़ाई हिंद-प्रशांत की चिंता, परमाणु पनडुब्बी से बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च के बाद भारत भी सतर्क</title>
                                    <description><![CDATA[चीन की समुद्र आधारित परमाणु क्षमता में बढ़ोतरी से क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण बदलने की आशंका, भारत के लिए समुद्री निगरानी और रक्षा तैयारियों को मजबूत करना होगा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/chinas-missile-test-increases-the-concern-of-indo-pacific-india-also/article-58131"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/china-missile-test.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक बार फिर रणनीतिक तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। चीन ने परमाणु ऊर्जा से संचालित अपनी पनडुब्बी से लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण कर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इस परीक्षण को चीन ने नियमित सैन्य अभ्यास का हिस्सा बताया है, लेकिन अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड समेत कई देशों ने इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर संकेत माना है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल एक सैन्य परीक्षण नहीं, बल्कि चीन की बदलती रणनीति और समुद्र आधारित परमाणु शक्ति को मजबूत करने का स्पष्ट संदेश भी है।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारों के अनुसार इस परीक्षण में चीन ने अपनी नई पीढ़ी की सबमरीन लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM) का इस्तेमाल किया है, जिसे परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम माना जाता है। माना जा रहा है कि यह मिसाइल हजारों किलोमीटर दूर तक लक्ष्य भेदने की क्षमता रखती है। इसका सबसे बड़ा रणनीतिक महत्व यह है कि ऐसी मिसाइलें समुद्र में गहराई तक मौजूद परमाणु पनडुब्बियों से दागी जा सकती हैं, जिससे दुश्मन के लिए उनका पता लगाना बेहद कठिन हो जाता है। चीन लंबे समय से अपनी समुद्री परमाणु क्षमता को मजबूत करने पर काम कर रहा है। पहले उसका सैन्य फोकस मुख्य रूप से दक्षिण चीन सागर और ताइवान के आसपास देखा जाता था, लेकिन अब उसकी गतिविधियां हिंद महासागर और व्यापक हिंद-प्रशांत क्षेत्र तक फैल चुकी हैं। इसी वजह से भारत सहित कई देशों की रणनीतिक चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत के लिए यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में चीनी नौसेना की पनडुब्बियां कई बार हिंद महासागर क्षेत्र में देखी गई हैं। इसके अलावा जिबूती में चीन का सैन्य अड्डा, पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह में उसकी सक्रियता और श्रीलंका के हम्बनटोटा बंदरगाह पर बढ़ता प्रभाव पहले से ही भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। यदि चीन अधिक आधुनिक, कम शोर वाली और लंबी दूरी की मिसाइलों से लैस परमाणु पनडुब्बियों की तैनाती बढ़ाता है तो हिंद महासागर में उसकी रणनीतिक मौजूदगी और मजबूत हो सकती है। समुद्र आधारित परमाणु हथियार किसी भी देश की रणनीतिक ताकत का महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते हैं। पनडुब्बी से छोड़ी गई बैलिस्टिक मिसाइलों का पता लगाना बेहद मुश्किल होता है और यही कारण है कि दुनिया की प्रमुख सैन्य शक्तियां अपनी नौसेना में इस क्षमता को लगातार विकसित कर रही हैं। चीन का हालिया परीक्षण इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत की परमाणु नीति "क्रेडिबल मिनिमम डेटेरेंस" और "नो फर्स्ट यूज" के सिद्धांत पर आधारित है। ऐसे में यदि चीन अपनी समुद्र आधारित परमाणु क्षमता तेजी से बढ़ाता है तो भारत को भी अपने रणनीतिक प्रतिरोधक तंत्र को और मजबूत करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में भारत को अधिक परमाणु पनडुब्बियों के निर्माण, लंबी दूरी की K-4 और K-5 बैलिस्टिक मिसाइलों के विकास तथा समुद्री निगरानी प्रणाली के विस्तार पर और अधिक ध्यान देना होगा। चीन की बढ़ती समुद्री सक्रियता का असर केवल सैन्य संतुलन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र की भू-राजनीति पर भी पड़ सकता है। भारत पहले से उत्तरी सीमा पर चीन और पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान जैसी दोहरी सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है। यदि समुद्री क्षेत्र में भी चीन की मौजूदगी लगातार बढ़ती है तो भारत को भूमि, वायु और समुद्र—तीनों मोर्चों पर अपनी रक्षा तैयारियों को संतुलित तरीके से मजबूत करना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बदलते परिदृश्य में अंडमान एवं निकोबार कमांड की रणनीतिक भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाएगी। यह कमांड मलक्का जलडमरूमध्य के निकट स्थित है, जहां से दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्ग गुजरते हैं। यदि चीन की पनडुब्बियों की गतिविधियां इस क्षेत्र में बढ़ती हैं तो भारत को पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता, समुद्री निगरानी ड्रोन, आधुनिक सोनार सिस्टम और P-8I समुद्री निगरानी विमानों की तैनाती और बढ़ानी पड़ सकती है। चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों का एक और बड़ा प्रभाव QUAD समूह पर भी पड़ सकता है। भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया पहले से ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मुक्त और सुरक्षित समुद्री मार्ग बनाए रखने के लिए सहयोग कर रहे हैं। ऐसे में समुद्री सुरक्षा, खुफिया जानकारी साझा करने और संयुक्त नौसैनिक अभ्यासों की संख्या आने वाले समय में और बढ़ सकती है। मालाबार जैसे संयुक्त अभ्यास इस सहयोग को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन अपनी सैन्य शक्ति बढ़ाकर ताइवान पर दबाव बनाए रखना चाहता है। साथ ही वह प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका की रणनीतिक बढ़त को चुनौती देने और वैश्विक स्तर पर अपनी सैन्य क्षमता का प्रदर्शन करने की कोशिश भी कर रहा है। समुद्र आधारित परमाणु क्षमता को मजबूत करना इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। दूसरी ओर भारत भी अपनी समुद्री शक्ति को लगातार मजबूत कर रहा है। भारतीय नौसेना के पास पहले से परमाणु पनडुब्बियां, बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम, आधुनिक समुद्री निगरानी विमान और मजबूत नौसैनिक कमांड मौजूद हैं। इसके अलावा मित्र देशों के साथ बढ़ता रक्षा सहयोग और हिंद महासागर क्षेत्र में सक्रिय रणनीतिक निगरानी भारत की सुरक्षा नीति का अहम हिस्सा बन चुका है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 10:12:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>मोदी बोले- भारत और इंडोनेशिया साथ आएं तो ‘कुछ-कुछ’ नहीं, ‘बहुत कुछ’ होता है, जकार्ता में रिश्तों को मिली नई मजबूती</title>
                                    <description><![CDATA[20 अहम समझौतों पर हस्ताक्षर, ब्रह्मोस मिसाइल की अतिरिक्त यूनिट देगा भारत; राष्ट्रपति प्रबोवो ने कहा- मैं मोदी के नेतृत्व और योजनाओं से सीख लेता हूं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/modi-said-if-india-and-indonesia-come-together-not/article-58129"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/narendra-modi-(5).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारत और इंडोनेशिया के रिश्तों को नई दिशा देने वाले दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जकार्ता में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए दोनों देशों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की बात कही। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने लोकप्रिय बॉलीवुड फिल्म के गीत का जिक्र करते हुए कहा कि इंडोनेशिया में भारत का गाना ‘कुछ-कुछ होता है’ काफी पसंद किया जाता है, लेकिन जब भारत और इंडोनेशिया मिलकर आगे बढ़ते हैं तो सिर्फ ‘कुछ-कुछ’ नहीं बल्कि ‘बहुत कुछ’ होता है। प्रधानमंत्री के इस बयान पर वहां मौजूद भारतीय समुदाय ने तालियों के साथ उनका स्वागत किया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच केवल कूटनीतिक संबंध ही नहीं, बल्कि हजारों वर्षों पुराना सांस्कृतिक और सभ्यतागत जुड़ाव भी है। उन्होंने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके भीतर भारत का डीएनए है। मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति की यह बात भारत के लोगों के दिलों को छू गई। उन्होंने आगे कहा कि दोनों देशों का असली डीएनए आपसी विश्वास, साझेदारी और पारस्परिक सम्मान से बना है। यही भरोसा दोनों देशों को भविष्य में और मजबूत सहयोग की ओर लेकर जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इससे पहले इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने प्रधानमंत्री मोदी की खुले मंच से जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि वे प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और कार्यशैली से काफी प्रभावित हैं। प्रबोवो ने मुस्कुराते हुए कहा कि वह प्रधानमंत्री मोदी के राजनीतिक करियर और उनकी कई योजनाओं को कॉपी करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत सरकार की अनेक योजनाएं बेहद सफल रही हैं और वे चाहते हैं कि इंडोनेशिया भी उनसे सीख लेकर अपने यहां लागू करे। राष्ट्रपति ने मजाकिया अंदाज में कहा कि अच्छी बात यह है कि इन योजनाओं पर कोई कॉपीराइट नहीं है, इसलिए उन्हें अपनाने में कोई परेशानी नहीं होगी। उनके इस बयान पर समारोह में मौजूद लोगों ने जोरदार तालियां बजाईं। प्रधानमंत्री मोदी के इंडोनेशिया दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच कुल 20 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इन समझौतों में रक्षा, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल सहयोग, व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा और तकनीकी साझेदारी जैसे कई अहम क्षेत्र शामिल हैं। दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने पर भी सहमति जताई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दौरे की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में रक्षा सहयोग को लेकर हुआ समझौता माना जा रहा है। भारत ने इंडोनेशिया को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की अतिरिक्त यूनिट उपलब्ध कराने पर सहमति जताई है। इसके साथ ही इंडोनेशिया, फिलीपींस और वियतनाम के बाद ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने वाला तीसरा देश बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे दोनों देशों के बीच रक्षा संबंध और अधिक मजबूत होंगे तथा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सामरिक सहयोग को नई मजबूती मिलेगी। प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा केवल राजनीतिक और रणनीतिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अपने कार्यक्रम के तहत वह इंडोनेशिया के सबसे बड़े और विश्व प्रसिद्ध हिंदू मंदिर प्रम्बानन भी जाएंगे। एक हजार वर्ष से अधिक पुराने इस मंदिर को दक्षिण-पूर्व एशिया में भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की जीवंत पहचान माना जाता है। प्रधानमंत्री का यह दौरा दोनों देशों की साझा सांस्कृतिक विरासत को और मजबूत करने का संदेश भी देगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इंडोनेशिया सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से भी सम्मानित किया। राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने विशेष समारोह में यह सम्मान प्रदान किया। इसे भारत और इंडोनेशिया के मजबूत होते संबंधों तथा क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका का प्रतीक माना जा रहा है। जकार्ता स्थित राष्ट्रपति भवन में प्रधानमंत्री मोदी का भव्य स्वागत किया गया। राष्ट्रपति प्रबोवो ने स्वयं उन्हें गले लगाकर स्वागत किया। इसके बाद प्रधानमंत्री को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस दौरान उन्होंने वहां मौजूद भारतीय मूल के बच्चों और प्रवासी भारतीयों से मुलाकात भी की। भारतीय समुदाय ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से प्रधानमंत्री का स्वागत किया और दोनों देशों की मित्रता का संदेश दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी सोमवार को इंडोनेशिया पहुंचे थे। उनके विमान के इंडोनेशियाई हवाई क्षेत्र में प्रवेश करते ही वहां की वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने विशेष एस्कॉर्ट प्रदान किया। इसे दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और सम्मान का प्रतीक माना गया। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सामरिक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। चीन पिछले कुछ वर्षों से दक्षिण चीन सागर और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में अपनी सैन्य मौजूदगी मजबूत कर रहा है। चीन लगभग पूरे दक्षिण चीन सागर पर दावा करता है, जबकि फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान भी इसके अलग-अलग हिस्सों पर अपना अधिकार जताते हैं। चीन ने कई कृत्रिम द्वीप बनाकर वहां सैन्य ढांचा तैयार किया है, जिससे क्षेत्रीय देशों की चिंता बढ़ी है। ऐसे माहौल में भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा सहयोग और समुद्री सुरक्षा को लेकर बढ़ती साझेदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देश स्वतंत्र, सुरक्षित और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के पक्षधर हैं। समुद्री व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखने के लिए दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 10:12:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Quad बैठक के बाद जयशंकर का बड़ा ऐलान, भारत-अमेरिका बनाएंगे खास मिनरल फ्रेमवर्क</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली में हुई Quad बैठक के बाद एस जयशंकर ने भारत-अमेरिका के बीच महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ धातुओं पर नए फ्रेमवर्क का ऐलान किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/jaishankars-big-announcement-after-quad-meeting-india-america-will-create-special/article-54231"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/quad,-s.-jaishankar-india-us-relations.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">नई दिल्ली में मंगलवार को </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">Quad <span lang="hi" xml:lang="hi">देशों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक बड़ा ऐलान किया। उन्होंने बताया कि भारत और अमेरिका खास खनिजों और दुर्लभ धातुओं की सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए एक नया द्विपक्षीय ढांचा तैयार कर रहे हैं। इस बैठक में अमेरिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों ने भी भाग लिया। चर्चा में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समुद्री सहयोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइबर सुरक्षा</span>, AI <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीक और वैश्विक सप्लाई चेन पर गहराई से बात की गई। वैश्विक तनाव और मध्य पूर्व की स्थितियों का असर भी प्रमुख विषय रहा।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बैठक के बाद</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">संयुक्त प्रेस बयान में जयशंकर ने कहा कि चारों देशों के बीच समन्वय लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने उल्लेख किया कि समुद्री निगरानी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लॉजिस्टिक्स नेटवर्क</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंडरसी केबल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशिक्षण और आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है और इसे और भी मजबूत किया जाएगा। विदेश मंत्री ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति हमेशा से रही है। उन्होंने ये भी बताया कि वर्तमान वैश्विक हालात के मद्देनज़र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक भरोसेमंद और मजबूत सप्लाई चेन बनाना बहुत जरूरी हो गया है। इसी दिशा में भारत और अमेरिका के बीच नया ढांचा तैयार किया जा रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बैठक के बाद दो बड़ी समुद्री सुरक्षा पहलों का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">‘<span lang="hi" xml:lang="hi">इंडो-पैसिफिक समुद्री निगरानी सहयोग पहल</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">शुरू हो रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे सदस्य देशों के बीच समुद्री सूचनाओं का आदान-प्रदान बेहतर होगा। इसके अलावा</span>, ‘<span lang="hi" xml:lang="hi">इंडो-पैसिफिक समुद्री क्षेत्र जागरूकता पहल</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">का विस्तार किया जाएगा ताकि क्षेत्रीय देशों को रियल टाइम समुद्री डेटा मिल सके। रुबियो ने भारत को </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">क्वाड एट सी</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">मिशन के अगले चरण की मेज़बानी के लिए धन्यवाद भी दिया।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने कहा कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में तेजी से बदलते हालात को देखते हुए </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">Quad <span lang="hi" xml:lang="hi">की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने बताया कि क्षेत्र में रणनीतिक तनाव बढ़ रहा है और ऊर्जा सुरक्षा पर भी दबाव है। उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े हालात का हवाला देते हुए समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता बनाए रखने पर जोर दिया।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बैठक के बाद</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत और अमेरिका के बीच महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ धातुओं के खनन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोसेसिंग और रिसाइक्लिंग को लेकर एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। जयशंकर ने कहा कि यह ढांचा सप्लाई चेन को और अधिक लचीला और सुरक्षित बनाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साथ ही निवेश और तकनीकी सहयोग को भी बढ़ावा मिलेगा। सूत्रों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इलेक्ट्रिक व्हीकल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सेमीकंडक्टर और हाईटेक सेक्टर में इन खनिजों की बढ़ती जरूरत को देखते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस समझौते को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 May 2026 14:19:47 +0530</pubDate>
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