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                <title>Election Commission India - दैनिक जागरण</title>
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                <title>मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द, मध्य प्रदेश में बढ़ी राजनीतिक हलचल</title>
                                    <description><![CDATA[राज्यसभा चुनाव के बीच कांग्रेस ने फैसले पर जताई आपत्ति, चुनाव आयोग से विस्तृत स्पष्टीकरण की मांग तेज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/6a2901e8ed034/article-55470"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/meenakshi-natarajan-nomination.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश की सियासत में मंगलवार को उस समय हलचल बढ़ गई जब कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र निरस्त कर दिया गया। यह फैसला सामने आते ही राजधानी भोपाल से लेकर चुनाव आयोग कार्यालय तक राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गईं। सुबह से ही कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की आवाजाही बढ़ने लगी और बाद में विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिला। कुछ समय के लिए माहौल गर्म रहा, हालांकि प्रशासन की मौजूदगी में स्थिति सामान्य बनी रही।</p>
<p style="text-align:justify;">मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस ने इस फैसले पर आपत्ति जताई है। पार्टी का कहना है कि यह निर्णय कई सवाल खड़े करता है और इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। कांग्रेस नेताओं के अनुसार राज्यसभा चुनाव के दौरान यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है और इससे राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। मीनाक्षी नटराजन ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एक कानूनी शिकायत के आधार पर उनके नामांकन पर आपत्ति दर्ज की गई थी। उन्होंने कहा कि जब पार्टी एकजुट होकर चुनावी प्रक्रिया में भाग ले रही थी, तभी यह स्थिति सामने आई। हालांकि चुनाव आयोग की ओर से नामांकन निरस्त किए जाने के कारणों को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी का इंतजार किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस घटनाक्रम पर मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल एक सीट तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़ा विषय है। उनके अनुसार पार्टी इस मुद्दे को संवैधानिक और कानूनी तरीके से आगे बढ़ाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि कांग्रेस कार्यकर्ता और विधायक चुनाव आयोग के समक्ष अपनी बात रखने के लिए विरोध कार्यक्रम आयोजित करेंगे। पटवारी ने कहा कि पार्टी इस मामले में उपलब्ध सभी लोकतांत्रिक विकल्पों का उपयोग करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">घटनास्थल पर मौजूद नेताओं के मुताबिक सुबह करीब 11 बजे से कांग्रेस कार्यकर्ता चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर जुटने लगे थे। नामांकन निरस्त होने की जानकारी सामने आने के बाद विरोध का स्वर तेज हो गया। पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए। कई वरिष्ठ नेता भी मौके पर पहुंचे और कार्यकर्ताओं से शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने की अपील की।</p>
<p style="text-align:justify;">राजनीतिक हलकों में इस फैसले को लेकर चर्चा लगातार जारी है। चुनावी प्रक्रिया से जुड़े जानकारों का कहना है कि नामांकन पत्रों की जांच के दौरान नियमों और कानूनी प्रावधानों का पालन किया जाता है। ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय संबंधित चुनाव अधिकारी द्वारा उपलब्ध दस्तावेजों और नियमों के आधार पर लिया जाता है। इसी वजह से अब सभी की नजर चुनाव आयोग की ओर से आने वाली विस्तृत जानकारी पर टिकी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया का प्रमुख मुद्दा बन गया है। आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर गतिविधियां बढ़ सकती हैं। कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि वह इस विषय को लेकर अपनी आवाज उठाती रहेगी, जबकि राजनीतिक पर्यवेक्षक पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। चुनाव आयोग की ओर से यदि विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया जाता है, तो उससे स्थिति और अधिक स्पष्ट हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:03:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>SIR के बाद भी बंपर वोटिंग: बंगाल में 95% तक मतदान</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल में SIR के बावजूद रिकॉर्ड मतदान, कई सीटों पर 95% से ज्यादा वोटिंग दर्ज बंगाल में वोटरों ने हर अनुमान को पीछे छोड़ दिया।जहां नाम कटे, वहीं सबसे ज्यादा मतदान ने चौंकाया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/even-after-sir-bumper-voting-voting-up-to-95-in/article-51995"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/west-bengal-election-2026.jpg" alt=""></a><br /><p><span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">पश्चिम बंगाल</span></span> में विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। 23 अप्रैल को 152 सीटों पर हुए मतदान में राज्यभर में 92.9 फीसदी वोटिंग दर्ज की गई, जो 2011 के बाद सबसे ज्यादा है। खास बात यह रही कि जिन सीटों पर विशेष पुनरीक्षण अभियान (SIR) के तहत बड़ी संख्या में वोटर सूची से नाम हटाए गए थे, वहां भी 95 फीसदी से अधिक मतदान हुआ। यह ट्रेंड चुनावी माहौल और मतदाताओं के उत्साह को साफ तौर पर दर्शाता है।</p>
<p>चुनाव आयोग के अनुसार, मुर्शिदाबाद जिले की समसेरगंज सीट पर 96.03 फीसदी मतदान हुआ, जबकि यहां सबसे ज्यादा करीब 91 हजार से अधिक नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए थे। इसी तरह लालगोला, भगवानगोला, रघुनाथगंज और फरक्का सीटों पर भी 96 फीसदी के आसपास मतदान दर्ज किया गया, जबकि इन क्षेत्रों में भी SIR के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए गए थे।</p>
<h5><strong>SIR के बाद असर</strong></h5>
<p>SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन अभियान के तहत राज्य में करीब 11.63 फीसदी वोटरों के नाम सूची से हटाए गए थे। चुनाव आयोग के मुताबिक, हटाए गए नामों में मृत, स्थानांतरित या डुप्लिकेट प्रविष्टियां शामिल थीं। इसके बावजूद जिस तरह से वोटिंग प्रतिशत बढ़ा, उसने कई राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है।</p>
<p>बंपर मतदान को लेकर सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इसे जनता का समर्थन बताते हुए कहा कि लोगों ने बड़े पैमाने पर मतदान कर विपक्ष की रणनीतियों को नाकाम कर दिया है। वहीं, भाजपा नेताओं का कहना है कि यह बदलाव और सत्ता परिवर्तन की इच्छा का संकेत है।</p>
<p>पृष्ठभूमि की बात करें तो 2011 में पश्चिम बंगाल में 84.72 फीसदी मतदान हुआ था, जब ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस ने वाम मोर्चा सरकार को सत्ता से हटाया था। इस बार का मतदान प्रतिशत उस रिकॉर्ड को भी पार कर गया है।</p>
<p>महिला मतदाताओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, महिलाओं ने 92.69 फीसदी और पुरुषों ने 90.92 फीसदी मतदान किया। यह अंतर दर्शाता है कि महिला वोटर्स इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं।</p>
<p>विश्लेषकों का मानना है कि SIR प्रक्रिया चुनावी मुद्दा भी बनी, जिसका असर मतदाताओं के रुझान पर पड़ा। कुछ विपक्षी दलों ने इसे लेकर आपत्ति जताई थी और सुप्रीम कोर्ट तक मामला पहुंचा था।</p>
<p>आगे के चरणों में भी मतदान का यह रुझान बना रहता है या नहीं, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। फिलहाल, पहले चरण की रिकॉर्ड वोटिंग ने यह साफ कर दिया है कि बंगाल में लोकतंत्र के इस उत्सव में जनता बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 12:39:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यूपी में फाइनल वोटर लिस्ट जारी: 84 लाख नए मतदाता जुड़े, कुल संख्या 13.39 करोड़ पार</title>
                                    <description><![CDATA[SIR अभियान के बाद बड़ा इजाफा, प्रयागराज और लखनऊ में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी; 4 मई को अगली चुनावी प्रक्रिया पर नजर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/final-voter-list-released-in-up-84-lakh-new-voters/article-50830"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/up-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के बाद 10 अप्रैल 2026 को फाइनल मतदाता सूची जारी कर दी गई है। इस सूची के अनुसार राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या बढ़कर 13 करोड़ 39 लाख 84 हजार 792 हो गई है। जनवरी में जारी ड्राफ्ट सूची की तुलना में यह संख्या 84 लाख से अधिक बढ़ी है, जो राज्य की चुनावी तैयारियों के लिहाज से अहम संकेत माना जा रहा है।</p>
<p>राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">नवदीप रिनवा</span></span> ने लखनऊ में प्रेस ब्रीफिंग के दौरान बताया कि 6 जनवरी 2026 को प्रकाशित ड्राफ्ट सूची में कुल 12.55 करोड़ मतदाता थे। SIR प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसमें 84,28,767 मतदाताओं का इजाफा दर्ज किया गया है।</p>
<p>फाइनल आंकड़ों के मुताबिक, पुरुष मतदाताओं की संख्या 7,30,71,061 (54.54%) और महिला मतदाता 6,09,09,525 (45.46%) हैं। वहीं, थर्ड जेंडर मतदाताओं की संख्या 4,206 दर्ज की गई है। जेंडर रेशियो में भी सुधार हुआ है, जो अब 834 तक पहुंच गया है।</p>
<p>जिलों के स्तर पर सबसे ज्यादा बढ़ोतरी <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">प्रयागराज</span></span> में 3,29,421 मतदाताओं की रही। इसके बाद <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">लखनऊ</span></span> (2,85,961), <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">बरेली</span></span> (2,57,920), <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">गाजियाबाद</span></span> (2,43,666) और <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">जौनपुर</span></span> (2,37,590) का स्थान रहा।</p>
<p>विधानसभा क्षेत्रों में <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">साहिबाबाद</span></span> सीट पर सबसे अधिक 82,898 मतदाताओं की वृद्धि दर्ज की गई, जो पूरे प्रदेश में शीर्ष पर रही। इसके अलावा जौनपुर, लखनऊ पश्चिम, लोनी और फिरोजाबाद विधानसभा क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई।</p>
<p>निर्वाचन आयोग के मुताबिक, SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन करने के लिए व्यापक सत्यापन अभियान चलाया गया। इस दौरान 1.04 करोड़ ऐसे मतदाता चिन्हित किए गए जिन्होंने मिलान नहीं कराया था, जबकि 2.22 करोड़ मामलों में तार्किक विसंगतियां पाई गईं। सभी मामलों का निस्तारण सुनवाई प्रक्रिया के जरिए किया गया।</p>
<p>राजनीतिक दलों की भागीदारी भी इस प्रक्रिया में अहम रही। कुल 107 ज्ञापन विभिन्न दलों से प्राप्त हुए, जिनमें अधिकांश समाजवादी पार्टी की ओर से थे। बूथ लेवल एजेंट्स (BLA) ने भी सक्रिय भूमिका निभाई और 5.82 लाख से अधिक एजेंट्स ने इस अभियान में हिस्सा लिया।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>चुनाव</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 10:27:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बंगाल वोटर लिस्ट में गड़बड़ी पर चुनाव आयोग की सफाई: तकनीकी त्रुटि से सभी वोटर ‘जांच’ में दिखे</title>
                                    <description><![CDATA[2 घंटे में ठीक हुआ डिस्प्ले एरर; TMC ने उठाए सवाल, आयोग ने कहा—डेटा सुरक्षित, जांच जारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/election-commissions-clarification-on-irregularities-in-bengal-voter-list-all/article-49012"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/image-(23).png" alt=""></a><br /><p>पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट को लेकर उत्पन्न विवाद के बीच चुनाव आयोग ने बुधवार को स्पष्ट किया कि मतदाताओं के स्टेटस में दिख रही गड़बड़ी एक तकनीकी त्रुटि थी, जिसे कुछ ही घंटों में ठीक कर लिया गया। आयोग ने कहा कि यह केवल “डिस्प्ले एरर” था और इससे वोटर डेटा या सूची की वैधता पर कोई असर नहीं पड़ा है।</p>
<p>यह मामला मंगलवार शाम सामने आया, जब बड़ी संख्या में मतदाताओं ने अपना EPIC नंबर डालकर स्टेटस चेक किया। कई लोगों के नाम के आगे “जांच के दायरे में” (Under Verification) लिखा दिखा, जबकि वे पहले से ही अंतिम मतदाता सूची में शामिल थे। इससे भ्रम की स्थिति पैदा हो गई और राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज हो गई।</p>
<p>चुनाव आयोग के अधिकारियों के मुताबिक, तकनीकी टीम ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए करीब दो घंटे के भीतर समस्या को ठीक कर दिया। साथ ही, इस गड़बड़ी के कारणों की विस्तृत जांच भी शुरू कर दी गई है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो।</p>
<p>इस मुद्दे पर सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने सवाल उठाए। पार्टी नेताओं का कहना था कि इस तरह की गड़बड़ी से यह संदेश जाता है कि सभी मतदाताओं की विश्वसनीयता पर संदेह किया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए चिंता का विषय है।</p>
<p>वहीं, चुनाव आयोग ने दोहराया कि मतदाता सूची पूरी तरह सुरक्षित है और किसी भी नाम को हटाया या बदला नहीं गया है। आयोग ने नागरिकों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध जानकारी पर भरोसा करें और किसी भी तकनीकी गड़बड़ी को लेकर घबराएं नहीं।</p>
<p>इस घटनाक्रम के बीच पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में चुनावी गतिविधियां तेज हो गई हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों ने प्रचार अभियान को गति दी है और चुनावी तैयारियों के बीच इस तरह की तकनीकी समस्या ने प्रशासनिक सतर्कता की आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित किया है।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ती निर्भरता के बीच तकनीकी ढांचे को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि मतदाताओं का भरोसा बना रहे।</p>
<p>फिलहाल स्थिति सामान्य है और मतदाता अपने विवरण फिर से सामान्य तरीके से देख पा रहे हैं। चुनाव आयोग ने भरोसा दिलाया है कि चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से ही संपन्न कराई जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 14:09:52 +0530</pubDate>
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                <title>इंदौर में मतदाता सूची का पुनरीक्षण पूरा, 5,108 नाम हटे</title>
                                    <description><![CDATA[विधानसभा-5, सांवेर और इंदौर-1 में सर्वाधिक विलोपन; जिले में अब 24.19 लाख मतदाता दर्ज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/revision-of-voter-list-completed-in-indore-5108-names-removed/article-46366"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-02/mp-(56).jpg" alt=""></a><br /><p>मध्यप्रदेश के इंदौर जिले में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान के बाद 5,108 नाम अंतिम प्रकाशन से पहले सूची से हटाने का निर्णय लिया गया है। जिला निर्वाचन कार्यालय की स्क्रूटनी और सुनवाई प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह कार्रवाई की गई। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार सबसे अधिक प्रभाव विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-5, सांवेर और इंदौर-1 में देखने को मिला है।</p>
<p>निर्वाचन कार्यालय के मुताबिक, पुनरीक्षण के दौरान ऐसे मतदाताओं की पहचान की गई जिनके रिकॉर्ड में त्रुटियां थीं, नाम दोहराए गए थे या वे निर्धारित मापदंडों पर खरे नहीं उतर रहे थे। पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत नोटिस जारी कर सुनवाई के बाद संपन्न की गई।</p>
<h5><strong>किन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा असर</strong></h5>
<p>जारी सूची के अनुसार इंदौर-5 में 979 नाम विलोपित किए गए, सांवेर में 946 और इंदौर-1 में 900 मतदाताओं के नाम हटाए गए। इसके अलावा इंदौर-3 में 630, इंदौर-4 में 580, राऊ में 565 नाम हटे। इंदौर-2 में 192, देपालपुर में 168 और महू में 148 नाम हटाए गए, जो जिले में सबसे कम है।</p>
<h5><strong>क्यों और कैसे हुई कार्रवाई</strong></h5>
<p>प्रशासन ने बताया कि ‘नो मैपिंग’ और रिकॉर्ड संबंधी त्रुटियों के आधार पर कुल 6 लाख 78 हजार 748 मतदाताओं को नोटिस भेजे गए थे। इनमें से 6 लाख 73 हजार से अधिक मामलों में जानकारी सही पाई गई और पोर्टल पर अद्यतन कर दी गई। 5,108 लोगों को अपात्र घोषित किया गया, जबकि 551 मतदाता अन्य स्थानों पर स्थानांतरित पाए गए, जिनके नाम संबंधित सूचियों में स्थानांतरित या विलोपित किए गए।</p>
<p>अधिकारियों का कहना है कि उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और त्रुटिरहित बनाना है। पात्र नागरिक यदि सूची से छूट गए हैं तो वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा-आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।</p>
<h5><strong>जिले में मतदाताओं की नई तस्वीर</strong></h5>
<p>सुधार प्रक्रिया के बाद जिले में कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 24 लाख 19 हजार 620 दर्ज की गई है। इस दौरान 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले 60 हजार से अधिक नए मतदाताओं के नाम भी जोड़े गए। बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) ने 33,701 रिकॉर्ड्स में मौके पर जाकर सुधार किए।</p>
<h5><strong>चुनावी तैयारी और पब्लिक इंटरेस्ट</strong></h5>
<p>विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रक्रिया आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम है। सटीक मतदाता सूची न केवल निष्पक्ष मतदान के लिए जरूरी है, बल्कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था में पारदर्शिता भी बढ़ाती है।</p>
<p>जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अंतिम प्रकाशन से पहले भी निर्धारित समय सीमा के भीतर दावे और आपत्तियां स्वीकार की जाएंगी। </p>
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                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Feb 2026 18:40:11 +0530</pubDate>
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