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                <title>Reuse Water - दैनिक जागरण</title>
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                <title>इंदौर में गहराया जल संकट, 125 अतिरिक्त टैंकरों से हो रही पानी सप्लाई</title>
                                    <description><![CDATA[भीषण गर्मी और सूखते बोरवेल के बीच नगर निगम अलर्ट मोड में, निर्माण कार्यों में रीयूज वाटर अनिवार्य करने की तैयारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a167c8e6f889/article-54279"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/indore-water-crisis-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">इंदौर में लगातार बढ़ती गर्मी के बीच जल संकट गहराता जा रहा है। शहर के कई इलाकों में लोगों को पेयजल की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि नियमित सप्लाई व्यवस्था प्रभावित होने के बाद नगर निगम को करीब 125 अतिरिक्त टैंकर चलाने पड़ रहे हैं। इसके बावजूद कई क्षेत्रों में लोगों को तय समय पर पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">नगर निगम अब इस स्थिति से निपटने के लिए अभियान मोड में काम कर रहा है। निगम प्रशासन ने साफ किया है कि निर्माण कार्यों में रीयूज वाटर का उपयोग नहीं करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही रूफ वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को लेकर भी सख्ती बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल ने बताया कि इस बार गर्मी अधिक होने और प्री-मानसून बारिश नहीं होने के कारण पानी की समस्या तेजी से बढ़ी है। शहर के कई बोरवेल सूख चुके हैं, जिससे जलापूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। अधिकारियों के अनुसार आने वाले दिनों में यदि बारिश नहीं होती है तो हालात और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कमिश्नर ने बताया कि फिलहाल शहर में तीन अलग-अलग माध्यमों से पानी की सप्लाई की जा रही है। सबसे पहले नर्मदा परियोजना के जरिए पानी को टंकियों तक पहुंचाकर पंपिंग के माध्यम से घरों तक सप्लाई किया जाता है। जिन क्षेत्रों में नर्मदा लाइन नहीं पहुंची है, वहां बोरवेल कनेक्शन के जरिए पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं जिन इलाकों में दोनों सुविधाएं नहीं हैं, वहां टैंकरों से पानी पहुंचाया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">नगर निगम के मुताबिक जिन क्षेत्रों में पानी की अधिक किल्लत है, वहां अतिरिक्त टैंकर भेजे जा रहे हैं। कई कॉलोनियों और बाहरी इलाकों में सुबह से शाम तक टैंकरों के जरिए पानी वितरित किया जा रहा है। इसके चलते निगम के संसाधनों पर भी अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>पिछले साल से ज्यादा संकट</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल ने बताया कि पिछले साल की तुलना में इस बार ज्यादा टैंकर चलाने पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में करीब सवा सौ अतिरिक्त टैंकर लगातार शहर के विभिन्न हिस्सों में पानी सप्लाई कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों के अनुसार कई इलाकों में भूमिगत जल स्तर काफी नीचे चला गया है। इससे बोरवेल की क्षमता प्रभावित हुई है और कुछ क्षेत्रों में मोटर भी काम नहीं कर रही हैं। नगर निगम की तकनीकी टीमें खराब बोरवेल और पंपिंग सिस्टम को सुधारने में लगी हुई हैं। कमिश्नर ने कहा कि नगर निगम की टीम लगातार मॉनिटरिंग कर रही है ताकि लोगों को कम से कम परेशानी हो। अधिकारियों और कर्मचारियों को जलापूर्ति व्यवस्था पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इंदौर के कई रहवासी क्षेत्रों में लोग सुबह से पानी का इंतजार करते दिखाई दे रहे हैं। कुछ इलाकों में टैंकर पहुंचने पर लोगों की लंबी कतारें लग रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बढ़ती गर्मी में पानी की समस्या ने रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर दिया है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>रीयूज वाटर पर सख्ती</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">जल संकट को देखते हुए नगर निगम अब पानी बचाने पर भी जोर दे रहा है। कमिश्नर क्षितिज सिंघल ने कहा कि निर्माण कार्यों में पीने योग्य पानी का उपयोग रोकने के लिए अभियान चलाया जाएगा। निर्माण स्थलों पर रीयूज वाटर का उपयोग अनिवार्य किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई निर्माण एजेंसी या व्यक्ति रीयूज पानी का इस्तेमाल नहीं करता पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम की टीमें निर्माण स्थलों का निरीक्षण भी करेंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा शहर में रूफ वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को लेकर भी सख्ती बढ़ाई जा रही है। भवन निर्माण नियमों के तहत यह व्यवस्था अनिवार्य है, लेकिन कई भवन मालिक अभी भी इसका पालन नहीं कर रहे हैं। कमिश्नर ने कहा कि लोगों से कई बार अपील की जा चुकी है कि बारिश के पानी को सहेजने के लिए रूफ वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाएं। इसके बावजूद नियमों का पालन नहीं करने वालों पर नियमानुसार पेनाल्टी लगाई जाएगी।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>पानी बचाने पर जोर</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">तेजी से बढ़ते शहरीकरण और घटते भूजल स्तर के कारण बड़े शहरों में जल संकट गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। इंदौर जैसे शहरों में पानी की बढ़ती मांग और सीमित संसाधनों के कारण स्थिति लगातार कठिन हो रही है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि रेन वॉटर हार्वेस्टिंग, रीयूज वाटर और जल संरक्षण के उपायों को बड़े स्तर पर लागू करना जरूरी है। इससे भविष्य में जल संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है। नगर निगम आने वाले मानसून से पहले जल संरक्षण अभियान को तेज करने की तैयारी में है। शहर में पानी बचाने और वैकल्पिक संसाधनों के उपयोग को लेकर जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 May 2026 10:59:33 +0530</pubDate>
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