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                <title>Tree Transplantation - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Tree Transplantation RSS Feed</description>
                
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                <title>विकास परियोजनाओं में पेड़ों की कटाई पर सख्ती, हाईकोर्ट में पेश हुई ट्री ट्रांसलोकेशन पॉलिसी-2026</title>
                                    <description><![CDATA[एक पेड़ काटने पर लगाने होंगे 20 पौधे, 80% पेड़ों के वैज्ञानिक प्रत्यारोपण का प्रस्ताव]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/strictness-on-cutting-of-trees-in-development-projects-tree-translocation/article-56169"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/tree-translocation-policy-2026.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश में विकास कार्यों के नाम पर बड़ी संख्या में होने वाली पेड़ों की कटाई पर अब सख्ती दिखाई दे सकती है। राज्य सरकार ने 'ट्री ट्रांसलोकेशन पॉलिसी-2026' का मसौदा तैयार कर लिया है, जिसे मंगलवार को हाईकोर्ट की डबल बेंच के समक्ष पेश किया गया। प्रस्तावित नीति का मुख्य उद्देश्य सड़क, मेट्रो, रेलवे, फ्लाईओवर और अन्य बड़े निर्माण कार्यों के दौरान पेड़ों को काटने की बजाय उन्हें वैज्ञानिक तरीके से दूसरी जगह स्थानांतरित करना है। सरकार का कहना है कि तेजी से हो रहे शहरी विकास और आधारभूत संरचना परियोजनाओं के बीच पर्यावरण संरक्षण को भी समान महत्व देना जरूरी है। इसी सोच के तहत यह नीति तैयार की गई है, ताकि विकास और हरित संतुलन दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ा जा सके। किसी भी सरकारी या निजी निर्माण एजेंसी के लिए पेड़ों की कटाई अब पहला विकल्प नहीं होगी। एजेंसियों को पहले यह साबित करना होगा कि परियोजना के डिजाइन में बदलाव या अन्य तकनीकी विकल्पों के माध्यम से पेड़ों को बचाने की पूरी कोशिश की गई है। यदि इसके बावजूद पेड़ों को हटाना अपरिहार्य हो जाता है, तो प्रभावित पेड़ों में से कम से कम 80 प्रतिशत का वैज्ञानिक तरीके से प्रत्यारोपण करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा यदि किसी पेड़ को काटने की अनुमति दी जाती है, तो उसके बदले 20 नए पौधे लगाने होंगे। इन पौधों के संरक्षण और विकास की जिम्मेदारी भी संबंधित एजेंसी की होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि इस नीति के पीछे ग्वालियर की थाटीपुर पुनर्विकास परियोजना एक बड़ा कारण बनी। उस परियोजना के दौरान कई पेड़ों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया गया था, लेकिन बाद में उनकी उचित देखभाल नहीं हो सकी। परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में पेड़ नष्ट हो गए। इस मामले ने पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कई सवाल खड़े किए थे। बाद में हाईकोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए सरकार से स्पष्ट और वैज्ञानिक नीति तैयार करने के निर्देश दिए थे। न्यायालय का मानना था कि केवल प्रत्यारोपण करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पेड़ों के जीवित रहने और उनकी निगरानी के लिए भी प्रभावी व्यवस्था जरूरी है। नई नीति में इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए तकनीक का व्यापक उपयोग करने का प्रस्ताव रखा गया है। प्रत्यारोपित किए गए पेड़ों और उनके बदले लगाए गए नए पौधों की जियो-टैगिंग की जाएगी। इसके लिए एक केंद्रीकृत ऑनलाइन डैशबोर्ड विकसित किया जाएगा, जहां प्रत्येक पेड़ की लोकेशन, तस्वीर, स्वास्थ्य स्थिति और रखरखाव से जुड़ी जानकारी दर्ज रहेगी। इससे न केवल निगरानी आसान होगी बल्कि पारदर्शिता भी बढ़ेगी। अधिकारियों के अनुसार, आम नागरिक और संबंधित विभाग भी इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से पेड़ों की स्थिति पर नजर रख सकेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">पर्यावरण विशेषज्ञ लंबे समय से इस तरह की नीति की मांग कर रहे थे। उनका कहना है कि बड़े शहरों में तेजी से बढ़ते निर्माण कार्यों के कारण हर साल हजारों पेड़ काटे जाते हैं, जिससे स्थानीय पर्यावरण और जैव विविधता पर असर पड़ता है। गर्मी बढ़ने, भूजल स्तर में गिरावट और वायु प्रदूषण जैसी समस्याओं के पीछे हरित क्षेत्र में लगातार कमी भी एक प्रमुख कारण मानी जाती है। ऐसे में यदि पेड़ों को बचाने और उनके प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को कानूनी रूप से मजबूत किया जाता है तो इसका सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे सकता है। केवल नीति बनाना पर्याप्त नहीं होगा। उसके प्रभावी क्रियान्वयन और नियमित निगरानी पर भी उतना ही ध्यान देना होगा। कई बार प्रत्यारोपित पेड़ों की देखभाल शुरुआती महीनों में नहीं हो पाती, जिससे उनकी जीवित रहने की संभावना कम हो जाती है। इसलिए सरकार द्वारा प्रस्तावित डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम और जवाबदेही तय करने की व्यवस्था को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किए गए ड्राफ्ट पर आगे विचार किया जाएगा। आवश्यक सुझावों और संशोधनों के बाद इसे अंतिम रूप दिया जा सकता है। यदि यह नीति लागू होती है तो मध्यप्रदेश उन राज्यों में शामिल हो जाएगा जहां विकास परियोजनाओं के साथ पर्यावरण संरक्षण को कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर अधिक मजबूती देने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 12:36:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>इंदौर में नए MYH बिल्डिंग का काम शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[10 एकड़ क्षेत्र में बनेगी नई नौ मंजिला अस्पताल बिल्डिंग, 200 डंपर मलबा हटाया गया, पुराने पेड़ों का होगा ट्रांसप्लांट]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/work-on-new-myh-building-started-in-indore/article-54280"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/new-myh-building-indore.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">इंदौर में महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज से जुड़े एमवाय अस्पताल की दूसरी नई बिल्डिंग के निर्माण कार्य ने गति पकड़ ली है। करीब 773 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली इस आधुनिक चिकित्सा परियोजना के लिए प्रारंभिक स्तर पर बड़े पैमाने पर जमीन तैयार करने का काम जारी है। अस्पताल परिसर में अब तक लगभग 200 डंपर मलबा और मिट्टी हटाई जा चुकी है, जबकि आने वाले दिनों में करीब 500 डंपर अतिरिक्त मलबा हटाया जाना बाकी है।</p>
<p style="text-align:justify;">करीब 10 एकड़ क्षेत्र में बनने वाली इस नई बिल्डिंग को तीन बड़े ब्लॉकों में विकसित किया जाएगा। परियोजना के तहत पुरानी संरचनाओं को हटाने, मिट्टी परीक्षण और जमीन समतलीकरण का कार्य तेजी से चल रहा है। अधिकारियों के मुताबिक नई बिल्डिंग आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं से लैस होगी और इससे इंदौर सहित मालवा-निमाड़ क्षेत्र के मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने बताया कि निर्माण कार्य के दौरान पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए वर्षों पुराने बड़े पेड़ों को काटने के बजाय ट्रांसप्लांट करने की तैयारी की गई है। अब तक 19 बड़े पेड़ों को चिन्हित किया गया है, जिन्हें एमआरटीबी हॉस्पिटल परिसर में स्थानांतरित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि ट्रांसप्लांटेशन के लिए वहां खुदाई का काम शुरू हो चुका है और विशेषज्ञों की निगरानी में पेड़ों को सुरक्षित तरीके से शिफ्ट किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि अस्पताल परिसर के विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जा रही है ताकि क्षेत्र का इको सिस्टम प्रभावित न हो।</p>
<p style="text-align:justify;">नई बिल्डिंग के लिए चयनित क्षेत्र में बने अधिकांश सरकारी क्वार्टर्स को तोड़ा जा चुका है। इन क्वार्टर्स से निकले मलबे को हटाने का काम लगातार जारी है। अभी कुछ क्वार्टर्स को खाली कराया जाना बाकी है, जिनमें रहने वाले कर्मचारियों को वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार कुछ रहवासियों ने मकान खाली करने के लिए दो महीने का अतिरिक्त समय मांगा है। प्रशासन उनकी स्थिति को देखते हुए चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई कर रहा है ताकि निर्माण कार्य प्रभावित न हो और कर्मचारियों को भी असुविधा न हो।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>तीन ब्लॉक में बनेगा अस्पताल</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">नई एमवायएच बिल्डिंग को आधुनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। मौजूदा एमवाय अस्पताल की तुलना में नई संरचना अधिक व्यवस्थित और तकनीकी रूप से उन्नत होगी। वर्तमान अस्पताल भवन में वार्ड, ट्रॉमा सेंटर और प्रशासनिक इकाइयां एक ही ब्लॉक में संचालित हो रही हैं। नई बिल्डिंग में अलग-अलग ब्लॉकों में सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे मरीजों और मेडिकल स्टाफ को बेहतर व्यवस्था मिल सकेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">अस्पताल भवन तल मंजिल सहित नौ मंजिला होगा। इसकी लोकेशन ऐसी रखी गई है कि चाचा नेहरू अस्पताल, सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और कैंसर अस्पताल जैसी प्रमुख चिकित्सा सुविधाएं नजदीक रहेंगी। इससे मरीजों को विभागों और अस्पतालों के बीच आने-जाने में आसानी होगी। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह परियोजना प्रदेश के सबसे बड़े चिकित्सा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में शामिल है। नई बिल्डिंग बनने के बाद मरीजों की बढ़ती संख्या और आधुनिक उपचार सुविधाओं की जरूरत को बेहतर तरीके से पूरा किया जा सकेगा।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>1450 बिस्तरों की सुविधा</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">इस परियोजना पर करीब 773.73 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसमें 1450 बिस्तरों वाला आधुनिक अस्पताल, 500 बिस्तरों का नर्सिंग होस्टल और विस्तृत पार्किंग व्यवस्था शामिल है।</p>
<p style="text-align:justify;">अस्पताल परिसर में अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण, आपातकालीन सेवाएं और बेहतर मरीज प्रबंधन प्रणाली विकसित की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि नई बिल्डिंग बनने के बाद मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं दोनों को मजबूती मिलेगी। परियोजना का निर्माण कार्य मध्यप्रदेश भवन निर्माण निगम लिमिटेड, भोपाल द्वारा कराया जाएगा। वहीं डिजाइन और तकनीकी परामर्श की जिम्मेदारी नई दिल्ली की एक विशेषज्ञ कंसल्टेंसी संस्था को सौंपी गई है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा विस्तार</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">इंदौर और आसपास के जिलों में मरीजों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में नई एमवायएच बिल्डिंग स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। मेडिकल कॉलेज से जुड़े डॉक्टरों का कहना है कि आधुनिक ढांचे और नई तकनीकों के आने से मरीजों को इलाज के लिए अन्य शहरों पर कम निर्भर रहना पड़ेगा। साथ ही मेडिकल छात्रों और डॉक्टरों को भी बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएं मिलेंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 May 2026 11:52:26 +0530</pubDate>
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