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                <title>Panchamrit Pujan - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Panchamrit Pujan RSS Feed</description>
                
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                <title>सोमवार भस्म आरती में महाकाल का दिव्य श्रृंगार, पंचामृत पूजन के बाद दिए राजा स्वरूप दर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में तड़के भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल का जलाभिषेक, पंचामृत पूजन और रजत आभूषणों से विशेष श्रृंगार किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन किए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a38cce6c593f/article-56623"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mahakal-bhasma-aarti-(9).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में सोमवार तड़के आयोजित होने वाली भस्म आरती के दौरान श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। अलसुबह चार बजे मंदिर के पट खुलते ही गर्भगृह में धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम शुरू हुआ। मंदिर के पंडे-पुजारियों ने विधि-विधान के साथ भगवान महाकाल का पूजन-अर्चन किया और इसके बाद जलाभिषेक संपन्न कराया। भस्म आरती में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालु देर रात से ही मंदिर परिसर में कतारबद्ध होकर बाबा महाकाल के दर्शन की प्रतीक्षा कर रहे थे। सोमवार होने के कारण महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में अधिक रही। मंदिर के पट खुलने के बाद सबसे पहले गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का पूजन किया गया। इसके पश्चात भगवान महाकाल का पवित्र जल से अभिषेक किया गया। धार्मिक परंपराओं के अनुसार अभिषेक के दौरान वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया गया, जिससे मंदिर परिसर पूरी तरह आध्यात्मिक वातावरण में डूब गया। हर-हर महादेव और जय श्री महाकाल के जयघोष से पूरा परिसर गूंज उठा। जलाभिषेक के बाद भगवान महाकाल का पंचामृत से विशेष पूजन किया गया। दूध, दही, घी, शक्कर और विभिन्न फलों के रस से तैयार पंचामृत भगवान को अर्पित किया गया। सनातन परंपरा में पंचामृत पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इससे भगवान प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर अपनी विशेष कृपा बनाए रखते हैं। पूजन के दौरान पुजारियों ने वैदिक विधि से आराधना करते हुए भक्तों की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भस्म आरती से पहले प्रथम घंटाल बजाकर मंदिर में प्रवेश किया गया और मंत्रोच्चार के साथ भगवान का ध्यान किया गया। इसके बाद हरिओम का पवित्र जल अर्पित कर विशेष पूजा की गई। कपूर आरती के पश्चात भगवान महाकाल के मस्तक पर भांग, चंदन और त्रिपुंड अर्पित किया गया। यह श्रृंगार भगवान शिव के स्वरूप का प्रतीक माना जाता है और महाकाल मंदिर की परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस समय भगवान महाकाल का स्वरूप अत्यंत दिव्य और आकर्षक दिखाई देता है। श्रृंगार की अगली प्रक्रिया में भगवान महाकाल को रजत आभूषणों से अलंकृत किया गया। जटाधारी स्वरूप में विराजमान बाबा महाकाल को राजा स्वरूप में सजाया गया। रजत मुकुट, रजत की मुंडमाल, रुद्राक्ष की मालाएं और अन्य आभूषण अर्पित किए गए। इसके साथ ही सुगंधित पुष्पों से निर्मित विशेष मालाओं से भी भगवान का श्रृंगार किया गया। मोगरा और गुलाब के फूलों की सुगंध से पूरा गर्भगृह महक उठा। भगवान महाकाल का यह राजसी स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">श्रृंगार पूर्ण होने के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर भस्म अर्पित करने की प्रक्रिया शुरू की गई। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को पवित्र भस्म अर्पित की गई। भस्म आरती महाकाल मंदिर की सबसे प्राचीन और विशेष परंपराओं में से एक मानी जाती है। यह परंपरा केवल उज्जैन के महाकाल मंदिर में ही देखने को मिलती है, जिसके कारण देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि भस्म आरती को देखने और इसमें शामिल होने की श्रद्धालुओं में विशेष उत्सुकता रहती है। आरती के दौरान मंदिर परिसर में मौजूद भक्त पूरी श्रद्धा के साथ बाबा महाकाल के जयकारे लगाते नजर आए। कई श्रद्धालु इस पल को अपने जीवन का सौभाग्य मानते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भस्म आरती के पश्चात भगवान महाकाल को फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया। मंदिर प्रशासन के अनुसार प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन सोमवार और विशेष पर्वों पर यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है। सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर मंदिर प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए थे ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसकी धार्मिक मान्यता अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यहां प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती को देखने के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन को आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से विशेष स्थान प्राप्त है। सावन, महाशिवरात्रि और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है। सोमवार की भस्म आरती में भी यही आस्था और भक्ति देखने को मिली। पंचामृत पूजन, रजत आभूषणों से सुसज्जित राजसी श्रृंगार और भस्म आरती के दिव्य दृश्य ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। बाबा महाकाल के दर्शन कर भक्तों ने अपने परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की। मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्ति का माहौल बना रहा और श्रद्धालु महाकाल के जयघोष के साथ आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करते रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 14:07:24 +0530</pubDate>
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                <title>बाबा महाकाल की भस्म आरती में पंचामृत पूजन, दिव्य श्रृंगार के दर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[उज्जैन के महाकाल मंदिर में तड़के हुई भस्म आरती, भांग-चंदन और रजत आभूषणों से सजे बाबा महाकाल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/6a1688937fb88/article-54288"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/mahakal-bhasma-aarti-(3)1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बुधवार तड़के होने वाली भस्म आरती के दौरान भक्तिभाव और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। अलसुबह मंदिर के कपाट खुलते ही बाबा महाकाल के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में मौजूद रहे। परंपरा के अनुसार सबसे पहले वीरभद्र जी को प्रणाम कर स्वस्ति वाचन किया गया। इसके बाद विधिवत अनुमति लेकर चांदी द्वार खोला गया और गर्भगृह के पट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोले गए। मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार, घंटियों और डमरू की ध्वनि से पूरा वातावरण शिवमय हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">भस्म आरती की शुरुआत बाबा महाकाल के अभिषेक से हुई। मंदिर के पुजारियों ने भगवान का पूर्व श्रृंगार उतारकर जलाभिषेक किया। इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और विभिन्न फलों के रस से तैयार पंचामृत से विशेष पूजन संपन्न कराया गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार पंचामृत पूजन भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है और इससे भक्तों को सुख-समृद्धि तथा आध्यात्मिक शांति की प्राप्ति होती है। पूजन के दौरान गर्भगृह में मौजूद पुजारी वैदिक मंत्रों के साथ विधिविधान से अनुष्ठान करते रहे, जबकि नंदी हाल और मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालु ‘हर हर महादेव’ के जयकारे लगाते रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">पंचामृत पूजन के बाद भगवान महाकाल की कर्पूर आरती की गई। आरती के समय मंदिर परिसर का दृश्य अत्यंत मनोहारी दिखाई दिया। जलती हुई कर्पूर की लौ और शिव स्तुति के स्वर ने भक्तों को आध्यात्मिक भाव से भर दिया। इसके बाद बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। भगवान को भांग, चंदन और सुगंधित इत्र से अलंकृत किया गया। साथ ही शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाल और रुद्राक्ष माला धारण कराई गई। विभिन्न प्रकार के सुगंधित पुष्पों से बाबा का अलौकिक श्रृंगार किया गया, जिसने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">मंदिर प्रशासन के अनुसार प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती में बाबा महाकाल को अलग-अलग स्वरूपों में सजाया जाता है। बुधवार की आरती में पारंपरिक शिव स्वरूप के साथ विशेष भस्म श्रृंगार आकर्षण का केंद्र रहा। नंदी हाल में भी विशेष पूजन किया गया। यहां नंदी महाराज का स्नान, ध्यान और पूजन विधिवत संपन्न कराया गया। श्रद्धालुओं ने नंदी जी के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और मंगलकामना की प्रार्थना की।</p>
<p style="text-align:justify;">उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती देश और दुनिया में अपनी विशिष्ट पहचान रखती है। यह भारत की सबसे प्रसिद्ध धार्मिक परंपराओं में शामिल मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बाबा महाकाल को अर्पित की जाने वाली भस्म जीवन और मृत्यु के सनातन सत्य का प्रतीक है। मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु हर दिन तड़के होने वाली इस आरती में शामिल होने उज्जैन पहुंचते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">महाकाल मंदिर की भस्म आरती का उल्लेख कई धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में मिलता है। कहा जाता है कि भगवान शिव श्मशानवासी और विरक्त स्वरूप में पूजे जाते हैं, इसलिए उन्हें भस्म अर्पित की जाती है। इस परंपरा को देखने और अनुभव करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु महीनों पहले ऑनलाइन बुकिंग कराते हैं। मंदिर प्रशासन के मुताबिक भस्म आरती में शामिल होने के लिए देश के अलग-अलग राज्यों के अलावा विदेशों से भी श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल को ड्रायफ्रूट, फल और मिष्ठान का भोग भी लगाया गया। इसके बाद महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से पारंपरिक विधि से बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की गई। पुजारियों ने बताया कि भस्म अर्पण की यह परंपरा सदियों पुरानी है और इसे विशेष नियमों के साथ संपन्न कराया जाता है। आरती के दौरान मंदिर में मौजूद श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और अनुशासन के साथ अनुष्ठान में शामिल हुए।</p>
<p style="text-align:justify;">बुधवार की भस्म आरती में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। मंदिर परिसर में सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल और मंदिर प्रशासन के कर्मचारी तैनात रहे। श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर अपने परिवार की खुशहाली, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना की। कई श्रद्धालुओं ने बताया कि भस्म आरती के दर्शन मात्र से मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">मंदिर प्रशासन के अनुसार सामान्य दिनों की तुलना में इन दिनों श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी है। सावन, महाशिवरात्रि और विशेष धार्मिक अवसरों पर यहां लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। उज्जैन का श्री महाकालेश्वर मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है, बल्कि मध्यप्रदेश के धार्मिक पर्यटन का भी बड़ा आकर्षण माना जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 May 2026 11:51:34 +0530</pubDate>
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