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                <title>Karnataka Politics - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Karnataka Politics RSS Feed</description>
                
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                <title>कर्नाटक में सत्ता बदलाव तय, डीके शिवकुमार बन सकते हैं नए मुख्यमंत्री</title>
                                    <description><![CDATA[सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद दिल्ली में तेज हुई हलचल, कांग्रेस 4 डिप्टी सीएम फॉर्मूले पर कर रही मंथन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/change-of-power-fixed-in-karnataka-dk-shivakumar-may-become/article-54495"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/karnataka-cm-change.jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr" style="text-align:justify;">कर्नाटक की राजनीति में पिछले तीन दिनों से चल रही हलचल अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के एक दिन बाद ही सिद्धारमैया शुक्रवार को दिल्ली पहुंचे, जहां उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की। करीब आधे घंटे चली इस बैठक के बाद राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। माना जा रहा है कि कांग्रेस हाईकमान अब राज्य में नेतृत्व परिवर्तन को अंतिम रूप देने में जुटा है और अगले हफ्ते डीके शिवकुमार नए मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ले सकते हैं।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;"> दिल्ली में हुई बैठकों के दौरान सिद्धारमैया ने हाईकमान के सामने अपनी कई राजनीतिक मांगें रखीं। इनमें उनके बेटे यतींद्र सिद्धारमैया को नई कैबिनेट में अहम मंत्रालय देने की मांग भी शामिल बताई जा रही है। चर्चा यह भी है कि नई सरकार में सिद्धारमैया गुट का प्रभाव बरकरार रहेगा और कैबिनेट गठन में उनकी राय को अहमियत दी जाएगी। यही वजह है कि इस्तीफे के तुरंत बाद उनका दिल्ली पहुंचना काफी अहम माना जा रहा है।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">उधर कांग्रेस पार्टी के भीतर अब 4 डिप्टी सीएम बनाने का फॉर्मूला तेजी से चर्चा में है। पार्टी सूत्रों के अनुसार सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए यह रणनीति तैयार की जा रही है। बताया जा रहा है कि डीके शिवकुमार के साथ अलग-अलग समुदायों और क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले नेताओं को उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। इनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे और मौजूदा मंत्री प्रियंक खड़गे का नाम भी प्रमुखता से सामने आ रहा है।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">नई कैबिनेट में बड़े फेरबदल की भी संभावना जताई जा रही है। खबरें हैं कि मौजूदा सरकार के करीब 10 मंत्रियों को हटाया जा सकता है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि नई टीम के जरिए सरकार के खिलाफ बन रही नाराजगी को कम किया जाए। पिछले कुछ महीनों में वाल्मीकि डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन घोटाले जैसे मामलों ने सरकार को घेरा था। कांग्रेस हाईकमान को लग रहा है कि समय रहते नेतृत्व बदलने से एंटी-इंकम्बेंसी का असर कम किया जा सकता है।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">दिल्ली में बैठकों के समानांतर बेंगलुरु में भी राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। इस्तीफे से पहले सिद्धारमैया ने अपने आवास पर मंत्रियों की ब्रेकफास्ट मीटिंग बुलाई थी। इस दौरान एक तस्वीर सबसे ज्यादा चर्चा में रही, जिसमें डीके शिवकुमार सिद्धारमैया के पैर छूते नजर आए। बाद में दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को गले लगाया और साथ बैठकर नाश्ता किया। राजनीतिक जानकार इसे कांग्रेस के भीतर शक्ति संतुलन और समझौते का संकेत मान रहे हैं।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">दरअसल कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन की अटकलें नई नहीं हैं। 2023 विधानसभा चुनाव के बाद भी मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस में लंबी खींचतान चली थी। चुनाव में कांग्रेस ने AHINDA फॉर्मूले के सहारे बड़ी जीत हासिल की थी। AHINDA यानी अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित वोट बैंक। सिद्धारमैया खुद कुरुबा समुदाय से आते हैं, जिसका असर चुनावी नतीजों में भी दिखाई दिया था। दूसरी तरफ डीके शिवकुमार ने दावा किया था कि उन्होंने पार्टी को मुश्किल दौर से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">दोनों नेताओं की दावेदारी के चलते कांग्रेस हाईकमान को मुख्यमंत्री तय करने में करीब एक हफ्ता लग गया था। उस समय यह चर्चा भी चली कि दोनों नेताओं के बीच ढाई-ढाई साल मुख्यमंत्री रहने का फॉर्मूला तय हुआ है, हालांकि कांग्रेस ने इसे कभी आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं किया। अब तीन साल बाद वही फॉर्मूला फिर चर्चा में है और सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद माना जा रहा है कि समझौते का दूसरा चरण लागू किया जा रहा है।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">26 मई को कांग्रेस आलाकमान ने सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार दोनों को दिल्ली बुलाया था। राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और केसी वेणुगोपाल के साथ कई दौर की बैठकें हुईं। सूत्रों के मुताबिक शुरुआती दौर में सिद्धारमैया पद छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे। यहां तक कि उन्होंने समर्थक विधायकों के साथ अलग रुख अपनाने के संकेत भी दिए थे। हालांकि बाद में पार्टी नेतृत्व ने उन्हें संगठन में बड़ी भूमिका और सम्मानजनक राजनीतिक स्पेस देने का भरोसा दिया।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">इधर डीके शिवकुमार का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए लगभग तय माना जा रहा है। कर्नाटक कांग्रेस में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। वोक्कालिगा समुदाय से आने वाले डीके की पहचान संकटमोचक नेता के तौर पर रही है। पार्टी विधायकों को टूटने से बचाने से लेकर चुनाव प्रबंधन तक में उनकी भूमिका अहम मानी जाती है। हालांकि उनके खिलाफ कई आपराधिक और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की जांच भी चल रही है। 2019 में उन्हें ईडी ने गिरफ्तार भी किया था और उन्हें करीब 50 दिन तिहाड़ जेल में बिताने पड़े थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 15:20:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन तय, सिद्धारमैया आज 3 बजे इस्तीफा देंगे</title>
                                    <description><![CDATA[डीके शिवकुमार होंगे नए मुख्यमंत्री, कांग्रेस में लंबे विवाद के बाद फैसला]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/6a17e9ebebac8/article-54404"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/karnataka-cm.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कर्नाटक की राजनीति में लंबे समय से चल रहा नेतृत्व परिवर्तन का विवाद अब लगभग खत्म हो गया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया आज दोपहर 3 बजे अपने पद से इस्तीफा देने जा रहे हैं। बेंगलुरु स्थित उनके सरकारी आवास पर गुरुवार सुबह हुई अहम बैठक में इस फैसले की जानकारी मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं को दी गई। कांग्रेस हाईकमान की सहमति के बाद अब डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार को राज्य का नया मुख्यमंत्री बनाए जाने की तैयारी तेज हो गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सुबह हुई बैठक में उस समय भावुक माहौल देखने को मिला जब डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से मिलने पहुंचे। बैठक के दौरान शिवकुमार ने सिद्धारमैया के पैर छुए और दोनों नेता एक-दूसरे से गले मिले। इस दृश्य को कांग्रेस के भीतर सत्ता हस्तांतरण और राजनीतिक संतुलन के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। बैठक में मौजूद कर्नाटक सरकार के मंत्री एचके पाटिल ने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने डीके शिवकुमार के नाम पर सहमति बना ली है और वही अगले मुख्यमंत्री होंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सिद्धारमैया ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात के लिए समय मांगा था, लेकिन राज्यपाल फिलहाल पारिवारिक कारणों से बेंगलुरु से बाहर बताए जा रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री अपना इस्तीफा राजभवन कार्यालय को सौंप सकते हैं। संवैधानिक नियमों के मुताबिक मुख्यमंत्री राज्यपाल की अनुपस्थिति में भी लिखित इस्तीफा ई-मेल या राजभवन कार्यालय के माध्यम से भेज सकते हैं। इस्तीफा स्वीकार होने तक सिद्धारमैया कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में पद पर बने रहेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री बदलने की चर्चा पिछले कई महीनों से चल रही थी। मई 2023 में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच खींचतान सामने आई थी। उस समय पार्टी नेतृत्व ने समझौते के तहत रोटेशनल मुख्यमंत्री फार्मूला तय किया था। सूत्रों के मुताबिक समझौते में ढाई-ढाई साल तक दोनों नेताओं को मौका देने की बात कही गई थी। अब सरकार के ढाई साल पूरे होने के करीब हैं, ऐसे में शिवकुमार समर्थक लगातार नेतृत्व परिवर्तन की मांग कर रहे थे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान के साथ हुई बैठकों के बाद स्थिति तेजी से बदली। 26 मई को सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के साथ लंबी बैठक की थी। करीब छह घंटे चली इस बैठक में सत्ता हस्तांतरण, संगठनात्मक संतुलन और आगामी चुनावी रणनीति पर चर्चा हुई। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि समय रहते नेतृत्व परिवर्तन करने से सरकार के खिलाफ बन रही एंटी-इंकम्बेंसी को कम किया जा सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कांग्रेस इस बदलाव के जरिए राज्य में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश कर रही है। डीके शिवकुमार वोक्कालिगा समुदाय के बड़े नेता माने जाते हैं और दक्षिण कर्नाटक में उनकी मजबूत पकड़ है। वहीं सिद्धारमैया को ओबीसी वर्ग का प्रभावशाली चेहरा माना जाता है। कांग्रेस नेतृत्व दोनों नेताओं के बीच संतुलन बनाकर आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों की रणनीति तैयार कर रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> केवल मुख्यमंत्री ही नहीं बल्कि पूरे मंत्रिमंडल में बड़ा फेरबदल भी हो सकता है। मौजूदा 35 मंत्रियों में से बड़ी संख्या में बदलाव की संभावना जताई जा रही है। पार्टी नए चेहरों को मौका देकर सरकार की छवि सुधारने की कोशिश कर सकती है। साथ ही दो डिप्टी सीएम बनाए जाने की भी चर्चा है, जिनमें एक दलित और दूसरा लिंगायत या ओबीसी समुदाय से हो सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कांग्रेस के भीतर यह बदलाव केवल सत्ता हस्तांतरण नहीं बल्कि संगठनात्मक अनुशासन का संदेश भी माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में राजस्थान, पंजाब और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में नेतृत्व विवादों ने पार्टी को नुकसान पहुंचाया था। ऐसे में कर्नाटक में हाईकमान समय रहते स्थिति संभालने की कोशिश करता दिखाई दे रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस बीच डीके शिवकुमार के समर्थकों में उत्साह का माहौल देखने को मिला। बेंगलुरु में उनके आवास के बाहर सुबह से ही समर्थकों की भीड़ जमा रही। कई समर्थक फूलों के गुलदस्ते और मिठाइयों के साथ पहुंचे। घर के बाहर टेंट और स्वागत की तैयारियां भी शुरू हो गईं। समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों के साथ खुशी जाहिर की और डीके शिवकुमार के समर्थन में नारे लगाए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर सिद्धारमैया समर्थकों में भावुक माहौल देखा गया। कई नेताओं ने कहा कि सिद्धारमैया ने राज्य में कई जनहित योजनाएं लागू कीं और कांग्रेस सरकार को मजबूत नेतृत्व दिया। हालांकि पार्टी नेतृत्व के फैसले को सभी नेताओं ने स्वीकार करने की बात कही है। राजनीतिक गलियारों में अब इस बात पर नजर है कि डीके शिवकुमार के नेतृत्व में नई सरकार किस तरह काम करेगी और कैबिनेट में किन चेहरों को जगह मिलेगी। माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाकर औपचारिक रूप से डीके शिवकुमार को नेता चुना जाएगा। इसके बाद राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 12:47:22 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>सिद्धारमैया को राष्ट्रीय भूमिका का ऑफर, कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन की चर्चा तेज</title>
                                    <description><![CDATA[सीएम पद छोड़ने के बदले राज्यसभा और 2029 लोकसभा चुनाव में बड़ी जिम्मेदारी की पेशकश, दिल्ली में हाईलेवल मीटिंग के बाद अटकलें बढ़ीं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/siddaramaiah-offered-national-role-discussion-on-change-of-power-in/article-54302"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/karnataka-politics.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">कर्नाटक की राजनीति में बड़ा बदलाव तय माना जा रहा है। दिल्ली में मंगलवार को कांग्रेस हाईकमान के साथ हुई लंबी बैठकों के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को सीएम पद छोड़ने के बदले राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका का प्रस्ताव दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस नेतृत्व उन्हें राज्यसभा भेजकर 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले दिल्ली में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी कर रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">सूत्रों का दावा है कि दिल्ली में करीब सात घंटे चली हाईलेवल मीटिंग के दौरान सत्ता परिवर्तन और संगठनात्मक बदलावों पर गंभीर चर्चा हुई। हालांकि सार्वजनिक तौर पर कांग्रेस नेताओं ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि बातचीत केवल राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों को लेकर थी, लेकिन अंदरखाने से निकल रही जानकारी कुछ और ही संकेत दे रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि सिद्धारमैया को यह समझाने की कोशिश की गई है कि पार्टी को अब राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत ओबीसी नेतृत्व की जरूरत है। खासकर ऐसे समय में जब कांग्रेस सामाजिक न्याय और जाति जनगणना जैसे मुद्दों को राष्ट्रीय एजेंडे में आगे बढ़ा रही है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>राज्यसभा और दिल्ली भूमिका का ऑफर</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस नेतृत्व ने सिद्धारमैया से कहा है कि यदि वे मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा के रास्ते दिल्ली आते हैं तो उन्हें केंद्र में एक बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसमें 2029 के लोकसभा चुनाव की रणनीति में अहम भूमिका शामिल हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस प्रस्ताव को एक “सम्मानजनक एग्जिट फॉर्मूला” के रूप में देखा जा रहा है, ताकि सिद्धारमैया का राजनीतिक कद भी बना रहे और कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन भी सहज तरीके से पूरा हो सके। इसी बीच यह भी चर्चा है कि पार्टी उन्हें ओबीसी चेहरे के तौर पर राष्ट्रीय स्तर पर प्रोजेक्ट करना चाहती है, जिससे कांग्रेस की सामाजिक न्याय की राजनीति को मजबूती मिल सके।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">राजनीतिक हलकों में यह लगभग तय माना जा रहा है कि कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन हो सकता है। चर्चा है कि सिद्धारमैया 28 मई के आसपास मुख्यमंत्री पद छोड़ सकते हैं, जबकि उनके स्थान पर डीके शिवकुमार के नाम पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस के भीतर पिछले काफी समय से नेतृत्व को लेकर खींचतान चल रही थी, जो अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। सूत्रों का कहना है कि सिद्धारमैया को पार्टी की ओर से यह संकेत दे दिया गया है कि उन्हें राष्ट्रीय भूमिका स्वीकार करनी चाहिए। बताया जा रहा है कि गुरुवार को सिद्धारमैया अपने आवास पर राज्य कैबिनेट के मंत्रियों के साथ ब्रेकफास्ट मीटिंग भी करने वाले हैं, जिसे राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>दिल्ली में हुई अहम बैठकें</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी के साथ सिद्धारमैया की सीधी बातचीत हुई, जिसमें नेतृत्व परिवर्तन और भविष्य की भूमिका पर चर्चा की गई। सूत्रों के मुताबिक इसी बैठक में उन्हें संकेत दिए गए कि पार्टी चाहती है कि वे मुख्यमंत्री के रूप में अपना कार्यकाल पूरा करते हुए राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका निभाएं। हालांकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने सार्वजनिक बयान में इन सभी दावों को खारिज किया है और कहा है कि अभी केवल संगठनात्मक चुनावों और राज्यसभा नामांकन पर चर्चा हो रही है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>परिवार और राजनीतिक समीकरण</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">एक राजनीतिक फॉर्मूले के तहत सिद्धारमैया के बेटे को कर्नाटक में डिप्टी सीएम बनाए जाने की भी चर्चा है, हालांकि इस पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। साथ ही उनके करीबी नेताओं को सरकार में महत्वपूर्ण विभाग दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। राज्यसभा नामांकन की अंतिम तारीख 8 जून होने के कारण कांग्रेस नेतृत्व के पास इस फैसले को टालने का ज्यादा समय नहीं है। ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कर्नाटक की राजनीति में बड़ा फैसला देखने को मिल सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 May 2026 13:05:24 +0530</pubDate>
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