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                <title>Infrastructure News - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Infrastructure News RSS Feed</description>
                
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                <title>रायपुर समेत पांच शहरों में रिडेवलपमेंट परियोजनाओं की शुरुआत, हडको ने जारी किए टेंडर</title>
                                    <description><![CDATA[250 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं से बदलेगी शहरी तस्वीर, शासकीय परिसंपत्तियों के बेहतर उपयोग पर सरकार का जोर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/hudco-has-started-redevelopment-projects-in-five-cities-including-raipur/article-56216"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chhattisgarh-redevelopment-projects.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ में शहरी विकास को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य के विभिन्न शहरों में लंबे समय से अनुपयोगी या कम उपयोग में आने वाली शासकीय परिसंपत्तियों को आधुनिक स्वरूप देने के लिए पांच प्रमुख रिडेवलपमेंट परियोजनाओं की शुरुआत की जा रही है। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की ओर से इन परियोजनाओं को अमलीजामा पहनाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इसी क्रम में हाउसिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (HUDCO) के माध्यम से परियोजनाओं के लिए टेंडर भी जारी कर दिए गए हैं। राज्य सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से न केवल शहरों का स्वरूप बदलेगा, बल्कि शासकीय भूमि और परिसंपत्तियों का बेहतर उपयोग भी सुनिश्चित किया जा सकेगा। प्रस्तावित रिडेवलपमेंट परियोजनाएं रायपुर, महासमुंद, राजनांदगांव, कोरबा और जगदलपुर में विकसित की जाएंगी। इन सभी परियोजनाओं को राज्य की रिडेवलपमेंट नीति के तहत क्रियान्वित किया जाएगा। इसके लिए आवास एवं पर्यावरण विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है, जबकि छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल को क्रियान्वयन एजेंसी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। परियोजनाओं के लिए प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट और विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन पहले ही तैयार किए जा चुके हैं। साथ ही निजी डेवलपर्स के चयन के लिए पारदर्शी निविदा प्रक्रिया भी तय की गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राज्य सरकार के अनुसार इन पांच परियोजनाओं का कुल क्षेत्रफल लगभग 19.14 एकड़ है। वर्ष 2025-26 की संशोधित गाइडलाइन दरों के आधार पर इनकी अनुमानित कीमत करीब 250.30 करोड़ रुपये आंकी गई है। जिन स्थानों पर रिडेवलपमेंट किया जाना है उनमें रायपुर का बी.टी.आई. रोड शंकर नगर क्षेत्र, महासमुंद का क्लब पारा, राजनांदगांव का कैलाश नगर, कोरबा का कटघोरा और जगदलपुर का चांदनी चौक फेज-2 शामिल हैं। इन क्षेत्रों को स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण और संभावनाओं से भरपूर माना जाता है। इन परियोजनाओं में रायपुर की योजना को विशेष महत्व दिया जा रहा है। राजधानी के शंकर नगर क्षेत्र में बी.टी.आई. ग्राउंड के सामने और सिंधु भवन के समीप प्रस्तावित परियोजना शहर के सबसे विकसित और व्यस्त इलाकों में से एक में स्थित है। यह क्षेत्र शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी कार्यालयों, व्यावसायिक गतिविधियों और आवासीय कॉलोनियों का प्रमुख केंद्र माना जाता है। ऐसे में यहां आधुनिक अधोसंरचना विकसित होने से पूरे क्षेत्र की उपयोगिता और आकर्षण दोनों में वृद्धि होने की उम्मीद है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रिडेवलपमेंट मॉडल के माध्यम से शहरों के भीतर मौजूद पुरानी और कम उपयोग वाली परिसंपत्तियों को नई उपयोगिता दी जा सकती है। इससे सरकार को नई भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता कम होगी और पहले से उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल संभव हो सकेगा। यही वजह है कि देश के कई बड़े शहरों में रिडेवलपमेंट परियोजनाओं को शहरी विकास का प्रभावी माध्यम माना जा रहा है। अब छत्तीसगढ़ भी इसी दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इन परियोजनाओं में सार्वजनिक-निजी सहभागिता यानी पीपीपी मॉडल को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता और निवेश का लाभ मिलेगा, वहीं सरकारी निगरानी के कारण परियोजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहेगी। निजी डेवलपर्स के लिए भी यह अवसर महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उन्हें शहरों की प्राइम लोकेशन पर विकास कार्य करने का मौका मिलेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार आधुनिक और नागरिक-केंद्रित शहरी विकास के लिए लगातार काम कर रही है। रिडेवलपमेंट नीति के जरिए जर्जर और अनुपयोगी शासकीय परिसंपत्तियों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त परिसरों में बदला जाएगा। इससे शहरों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव ने कहा कि यह पहल केवल भवन निर्माण परियोजनाओं तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि इन योजनाओं का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों का समग्र कायाकल्प करना है। उन्होंने विशेष रूप से रायपुर की प्रस्तावित परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह राजधानी के लिए एक आदर्श शहरी विकास मॉडल बन सकती है और भविष्य की परियोजनाओं के लिए मार्गदर्शक साबित होगी। इन परियोजनाओं के लागू होने से रोजगार के अवसर भी बढ़ने की संभावना है। निर्माण कार्यों के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा, वहीं परियोजनाएं पूरी होने के बाद व्यावसायिक गतिविधियों में भी वृद्धि हो सकती है। शहरी नियोजन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परियोजनाओं का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन होता है तो यह राज्य के शहरी विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है। टेंडर प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही इन परियोजनाओं को लेकर प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 15:56:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भोपाल मेट्रो की रफ्तार बढ़ेगी, जुलाई से दोनों ट्रैक पर संचालन</title>
                                    <description><![CDATA[सिग्नलिंग सिस्टम का काम पूरा, CMRS निरीक्षण के बाद नया शेड्यूल होगा लागू; यात्रियों को कम इंतजार और ज्यादा फेरे मिलेंगे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/bhopal-metro-speed-will-increase-operation-on-both-tracks-from/article-56166"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bhopal-metro.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भोपाल मेट्रो को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों के बीच अब यात्रियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। अपनी धीमी रफ्तार और कम फ्रीक्वेंसी के कारण चर्चा में रही भोपाल मेट्रो जल्द ही नए अंदाज में दिखाई देगी। मेट्रो के सुभाष नगर से एम्स तक के प्रायोरिटी कॉरिडोर पर सिग्नलिंग सिस्टम का काम पूरा हो चुका है और जुलाई से इसके पूरी क्षमता के साथ संचालन की तैयारी शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का दावा है कि नए सिस्टम के लागू होने के बाद न केवल मेट्रो की गति बढ़ेगी, बल्कि ट्रेनों के फेरे भी बढ़ जाएंगे और यात्रियों को लंबे इंतजार से राहत मिलेगी। मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के अधिकारियों के अनुसार सुभाष नगर से एम्स तक करीब सात किलोमीटर लंबे ट्रैक पर आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया है। इसके बाद अब कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम को निरीक्षण के लिए आमंत्रित किया गया है। संभावना है कि अगले सप्ताह यह टीम भोपाल पहुंचकर पूरे सिस्टम का परीक्षण करेगी। यदि निरीक्षण के बाद हरी झंडी मिल जाती है तो जुलाई से नए सिस्टम के साथ मेट्रो का संचालन शुरू कर दिया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">भोपाल मेट्रो एक सीमित व्यवस्था के तहत संचालित हो रही है। वर्तमान में सिग्नलिंग सिस्टम पूरी तरह लागू नहीं होने के कारण मेट्रो केवल एक ट्रैक पर चल रही है। यही वजह है कि यात्रियों को काफी लंबा इंतजार करना पड़ता है। अभी ट्रेनें दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक सीमित समय के लिए चलाई जा रही हैं और उनकी फ्रीक्वेंसी लगभग 75 मिनट रखी गई है। इससे कई लोग मेट्रो का नियमित उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। अभी सुभाष नगर से एम्स तक डाउन ट्रैक पर ही ट्रेन दोनों दिशाओं में संचालित की जा रही है। यानी जिस ट्रैक से ट्रेन आगे जाती है, उसी ट्रैक से वापस भी लौटती है। अप ट्रैक का उपयोग नहीं हो पाने के कारण मेट्रो की पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं हो रहा है। यही वजह है कि ट्रेनों की संख्या और गति दोनों प्रभावित हो रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सिग्नलिंग सिस्टम किसी भी मेट्रो नेटवर्क की रीढ़ माना जाता है। यह सिस्टम तय करता है कि ट्रेन किस गति से चलेगी, ट्रेनों के बीच कितना अंतर रहेगा और किसी भी आपात स्थिति में किस प्रकार नियंत्रण किया जाएगा। आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम के बिना एक साथ कई ट्रैक पर सुरक्षित संचालन संभव नहीं होता। भोपाल मेट्रो में अब जो तकनीक लागू की जा रही है, वह दिल्ली मेट्रो जैसी आधुनिक व्यवस्था पर आधारित है। इस तकनीक के लागू होने के बाद सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि मेट्रो दोनों ट्रैक पर एक साथ दौड़ सकेगी। इससे ट्रेनों के बीच का अंतर काफी कम हो जाएगा और यात्रियों को हर थोड़ी देर में मेट्रो उपलब्ध हो सकेगी। अधिकारियों का मानना है कि इससे मेट्रो की लोकप्रियता भी बढ़ेगी और यात्री संख्या में इजाफा होगा।  कई यात्रियों का कहना है कि 75 मिनट का इंतजार सार्वजनिक परिवहन के लिए काफी लंबा समय है। ऐसे में लोग बस, ऑटो या निजी वाहनों को प्राथमिकता देते हैं। लेकिन नए सिस्टम के बाद यह स्थिति बदल सकती है। मेट्रो प्रबंधन की योजना है कि सिग्नलिंग सिस्टम चालू होने के बाद नया टाइम टेबल जारी किया जाए। इसमें सुबह और शाम के व्यस्त समय को ध्यान में रखते हुए ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जाएगी। खासतौर पर कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों, विद्यार्थियों और नियमित यात्रियों को इसका लाभ मिलेगा। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो आने वाले महीनों में भोपाल मेट्रो शहर के प्रमुख सार्वजनिक परिवहन साधनों में शामिल हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">भोपाल और इंदौर मेट्रो परियोजना के तहत कुल लगभग 30 किलोमीटर लंबे रूट पर काम किया जा रहा है। वर्तमान में केवल सीमित हिस्से में संचालन हो रहा है, लेकिन धीरे-धीरे पूरे नेटवर्क को विकसित किया जा रहा है। ऐसे में सिग्नलिंग सिस्टम का पूरा होना परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यात्रियों को अब CMRS की अंतिम मंजूरी का इंतजार है। निरीक्षण रिपोर्ट सकारात्मक आने के बाद भोपाल मेट्रो न सिर्फ तेज रफ्तार से दौड़ेगी, बल्कि अधिक ट्रेनों और बेहतर समय-सारिणी के साथ शहर की परिवहन व्यवस्था को नई दिशा देने का काम भी करेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 12:36:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>इंदौर मेट्रो का दूसरा फेज तैयार, 21 जून से नए ट्रैक पर दौड़ेगी</title>
                                    <description><![CDATA[20 जून को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर करेंगे लोकार्पण, लाखों यात्रियों को मिलेगा फायदा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a2cf375974d1/article-55792"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/indore-metro-phase-2-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">इंदौर मेट्रो परियोजना ने एक और महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर लिया है। येलो लाइन के दूसरे फेज को हरी झंडी मिलने के बाद अब 20 जून को इसका औपचारिक लोकार्पण किया जाएगा, जबकि 21 जून से आम लोग नए रूट पर मेट्रो की सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। इस विस्तार के साथ इंदौर मेट्रो न केवल अपने नेटवर्क को और मजबूत करेगी, बल्कि भोपाल मेट्रो की तुलना में विकास की रफ्तार में भी आगे निकलती दिखाई दे रही है। मेट्रो के नए कॉरिडोर के शुरू होने से शहर के सबसे व्यस्त इलाकों को तेज, सुरक्षित और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन से जोड़ा जाएगा। मेट्रो का नया रूट सुपर कॉरिडोर-2 से रेडिसन चौराहे तक रहेगा। यह कॉरिडोर इंदौर के कई प्रमुख आवासीय, व्यावसायिक और आईटी क्षेत्रों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग माना जा रहा है। मेट्रो अधिकारियों के अनुसार इस रूट से सीधे तौर पर 4 से 6 लाख लोगों को लाभ मिलेगा, जबकि फीडर बसों और अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को जोड़ने के बाद यह संख्या 8 से 10 लाख यात्रियों तक पहुंच सकती है। शहर के जिन इलाकों से यह मेट्रो गुजरेगी, वहां प्रतिदिन लाखों लोग निजी और सार्वजनिक वाहनों से सफर करते हैं। ऐसे में ट्रैफिक दबाव कम होने के साथ-साथ यात्रा का समय भी घटने की उम्मीद है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस रूट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह इंदौर के तेजी से विकसित हो रहे आईटी और कॉरपोरेट हब को जोड़ता है। टीसीएस, इंफोसिस और यश टेक्नोलॉजीज जैसी बड़ी कंपनियों के कैंपस इसी कॉरिडोर के आसपास स्थित हैं। इसके अलावा एयरपोर्ट, एसईजेड, आईटी पार्क, होटल, शैक्षणिक संस्थान और कई कॉरपोरेट कार्यालय भी इस क्षेत्र में मौजूद हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि संचालन के शुरुआती दिनों में प्रतिदिन 25 से 40 हजार यात्री इस रूट का उपयोग कर सकते हैं। आने वाले वर्षों में जब सुपर कॉरिडोर और आसपास के क्षेत्र और विकसित होंगे, तब यह संख्या एक लाख यात्रियों प्रतिदिन तक पहुंच सकती है। लोकार्पण से पहले भोपाल स्थित मेट्रो मुख्यालय में लगातार बैठकें चल रही हैं। मेट्रो प्रबंधन किराया, टाइमिंग और ट्रेनों के फेरों को अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है। अधिकारियों के मुताबिक अगले कुछ दिनों में पूरा शेड्यूल जारी कर दिया जाएगा। नए फेज के साथ करीब 17 किलोमीटर लंबे नेटवर्क पर मेट्रो सेवाएं उपलब्ध होंगी। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए स्टेशन संचालन, टिकटिंग व्यवस्था और फीडर सेवाओं पर भी काम किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">मेट्रो परियोजना के तहत सुपर कॉरिडोर स्टेशन-2, सुपर कॉरिडोर स्टेशन-1, भौंरासला चौराहा, एमआर-10 रोड, आईएसबीटी, चंद्रगुप्त चौराहा, हीरा नगर, बापट चौराहा, मेघदूत गार्डन, विजय नगर चौराहा और मालवीय नगर चौराहा जैसे स्टेशन शामिल होंगे। ये सभी इलाके शहर के प्रमुख यातायात और व्यावसायिक केंद्र माने जाते हैं। ऐसे में मेट्रो के संचालन से यात्रियों को रोजाना होने वाली ट्रैफिक समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है। दूसरी ओर भोपाल मेट्रो परियोजना पर भी तेजी से काम जारी है, लेकिन निर्माण की जटिलताओं के कारण उसका दूसरा फेज इंदौर से पीछे चल रहा है। भोपाल में ऑरेंज लाइन और ब्लू लाइन पर कार्य प्रगति पर है। यहां सुभाष नगर से एम्स तक का प्रायोरिटी कॉरिडोर पहले ही शुरू हो चुका है, जबकि अगले चरण में अंडरग्राउंड रूट का निर्माण किया जा रहा है। करीब 3.39 किलोमीटर लंबी सुरंग और दो भूमिगत स्टेशन इस परियोजना का हिस्सा हैं। अधिकारियों के अनुसार यह कार्य वर्ष 2028 तक पूरा होने की संभावना है।</p>
<p style="text-align:justify;">भोपाल मेट्रो परियोजना की लागत में भी बड़ा इजाफा हुआ है। वर्ष 2016 में करीब 6,241 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली परियोजना अब बढ़कर 10,033 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। सरकार का कहना है कि बढ़ी हुई लागत से निर्माण कार्य में तेजी लाई जाएगी और अगले दो वर्षों में परियोजना का स्वरूप और स्पष्ट दिखाई देगा। इंदौर मेट्रो के दूसरे फेज का शुभारंभ शहर के सार्वजनिक परिवहन ढांचे के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे न केवल यातायात व्यवस्था बेहतर होगी बल्कि आईटी सेक्टर, व्यापारिक गतिविधियों और शहरी विकास को भी नई गति मिलेगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 12:36:58 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अडाणी एनर्जी बनी देश की सबसे बड़ी स्मार्ट मीटर कंपनी, ₹3,050 करोड़ में इंटेलिस्मार्ट का अधिग्रहण</title>
                                    <description><![CDATA[इंटेलिस्मार्ट की 100% हिस्सेदारी खरीदने के बाद अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस के पास 4.7 करोड़ से अधिक स्मार्ट मीटर का पोर्टफोलियो होगा, बिजली वितरण क्षेत्र में बढ़ेगी कंपनी की पकड़।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/adani-energy-becomes-countrys-largest-smart-meter-company-acquires-intellismart/article-55498"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/adani-energy-solutions.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">देश के स्मार्ट मीटरिंग सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड (AESL) ने इंटेलिस्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड का अधिग्रहण कर लिया है। करीब 3,050 करोड़ रुपए के इस सौदे के साथ ही कंपनी देश की सबसे बड़ी स्मार्ट मीटरिंग कंपनी बन गई है। इस अधिग्रहण के बाद अडाणी एनर्जी के पास कुल 4.7 करोड़ से अधिक स्मार्ट मीटर का पोर्टफोलियो हो जाएगा, जो भारतीय बिजली वितरण क्षेत्र में उसकी स्थिति को और मजबूत करेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">मंगलवार को सामने आई इस जानकारी के बाद ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में इसकी काफी चर्चा रही। इंटेलिस्मार्ट पहले से ही देश की प्रमुख स्मार्ट मीटरिंग कंपनियों में गिनी जाती है और इसके पास उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, बिहार तथा असम जैसे राज्यों में 2.2 करोड़ से ज्यादा स्मार्ट मीटरों का नेटवर्क मौजूद है। अब यह पूरा कारोबार अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस के नियंत्रण में आ जाएगा। कंपनी को इंटेलिस्मार्ट की 100 प्रतिशत इक्विटी हिस्सेदारी मिलेगी, जिसके साथ उससे जुड़ी वित्तीय देनदारियां भी शामिल होंगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">यह सौदा सिर्फ एक कारोबारी विस्तार नहीं बल्कि भारत के तेजी से बढ़ते स्मार्ट ऊर्जा बाजार में लंबी अवधि की रणनीति का हिस्सा है। केंद्र सरकार पिछले कुछ वर्षों से देशभर में पारंपरिक बिजली मीटरों की जगह स्मार्ट मीटर लगाने की योजना पर तेजी से काम कर रही है। इसका उद्देश्य बिजली वितरण कंपनियों की दक्षता बढ़ाना, लाइन लॉस कम करना और उपभोक्ताओं को पारदर्शी बिलिंग व्यवस्था उपलब्ध कराना है। ऐसे समय में अडाणी एनर्जी का यह अधिग्रहण काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">कंपनी के अनुसार अधिग्रहण से पहले AESL के पास 2.46 करोड़ से अधिक स्मार्ट मीटरों की ऑर्डर बुक थी। इंटेलिस्मार्ट के जुड़ने के बाद यह संख्या बढ़कर 4.7 करोड़ से ऊपर पहुंच जाएगी। इससे कंपनी न केवल स्मार्ट मीटरिंग के क्षेत्र में अग्रणी बनेगी बल्कि बड़े पैमाने पर संचालन की क्षमता भी हासिल करेगी। ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि इतने बड़े पोर्टफोलियो के साथ कंपनी देश के विभिन्न राज्यों में बिजली वितरण सुधार कार्यक्रमों में और अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">स्मार्ट मीटरों को बिजली क्षेत्र में तकनीकी क्रांति का हिस्सा माना जा रहा है। इनकी मदद से उपभोक्ताओं को अपनी बिजली खपत की रियल टाइम जानकारी मिलती है। साथ ही बिजली कंपनियों को भी खपत के आंकड़े तुरंत प्राप्त होते हैं, जिससे बिलिंग प्रक्रिया अधिक सटीक बनती है। बिजली चोरी रोकने, लाइन लॉस कम करने और उपभोक्ता शिकायतों को घटाने में भी इन मीटरों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। यही वजह है कि देशभर में इनके उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है स्मार्ट मीटरिंग बाजार आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ने वाला है। सरकार की योजनाओं और डिजिटलीकरण की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए इस क्षेत्र में निवेश लगातार बढ़ रहा है। अडाणी समूह का यह कदम भी उसी दिशा में एक बड़ा निवेश माना जा रहा है। इससे कंपनी को तकनीकी विशेषज्ञता, बड़े ग्राहक आधार और कई राज्यों में मौजूद परिचालन नेटवर्क का लाभ मिलेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कंदर्प पटेल ने कहा कि इंटेलिस्मार्ट का अधिग्रहण कंपनी की निष्पादन क्षमता और तकनीकी ताकत को और मजबूत करेगा। उनके मुताबिक इस सौदे से बिजली वितरण क्षेत्र के आधुनिकीकरण में तेजी आएगी और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि बड़े स्तर पर संचालन से लागत कम होगी और दक्षता में सुधार देखने को मिलेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">बिजली उपभोक्ताओं के लिए भी यह अधिग्रहण कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्मार्ट मीटरों के विस्तार से गलत बिलिंग की शिकायतों में कमी आ सकती है। उपभोक्ता अपनी खपत पर बेहतर नियंत्रण रख सकेंगे और उन्हें समय पर सटीक बिल मिलने की संभावना बढ़ेगी। इसके अलावा बिजली वितरण कंपनियों के लिए भी राजस्व संग्रह में सुधार हो सकता है। 3,050 करोड़ रुपए का यह अधिग्रहण भारतीय ऊर्जा क्षेत्र में इस वर्ष के प्रमुख सौदों में शामिल हो गया है। स्मार्ट मीटरिंग बाजार में अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस की स्थिति अब पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो गई है और आने वाले समय में यह क्षेत्र कंपनी की विकास रणनीति का अहम आधार बन सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 13:25:10 +0530</pubDate>
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                <title>जबलपुर में जंगल से मिले बिजली विभाग के अहम कागजात</title>
                                    <description><![CDATA[स्थानीय लोगों ने अधिकारियों को सौंपे दस्तावेज, लापरवाही पर उठे सवाल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/important-documents-of-electricity-department-found-in-forest-in-jabalpur/article-46373"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-02/mp-(59).jpg" alt=""></a><br /><p>शहर के रामपुर स्थित बिजली विभाग मुख्यालय के पास जंगल में सोमवार दोपहर कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बिखरे हुए मिले। राहगीरों की नजर जब इन फाइलों पर पड़ी तो उन्होंने तुरंत बिजली विभाग को सूचना दी। सूचना मिलते ही विभागीय कर्मचारी मौके पर पहुंचे और दस्तावेजों को एकत्र कर कार्यालय ले गए।</p>
<h5><strong>पुराने प्रोजेक्ट से जुड़े बताए जा रहे दस्तावेज</strong></h5>
<p>प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, ये कागजात पावर जनरेटिंग कंपनी की सिविल परियोजनाओं से संबंधित हैं। बताया जा रहा है कि संबंधित कार्यालय वर्ष 2000 में बंद हो चुका है। सोमवार को नयागांव से ऑटो के जरिए पुराने रिकॉर्ड शक्ति भवन लाए जा रहे थे, इसी दौरान रास्ते में फाइलें गिर गईं।</p>
<p>स्थानीय लोगों ने जब दस्तावेजों को देखा तो उनमें प्रोजेक्ट रिपोर्ट, ऑपरेशन-मेंटेनेंस मैन्युअल, ड्रॉइंग और मैप से जुड़े कागजात पाए गए। कुछ फाइलों पर मध्य प्रदेश इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड, रामपुर जबलपुर का उल्लेख भी था।</p>
<h5><strong>वकील और पूर्व पार्षद ने उठाए सवाल</strong></h5>
<p>रामपुर निवासी एडवोकेट दिनेश बर्मन और पूर्व पार्षद ठाड़ेश्वर महावर ने बताया कि यदि ये दस्तावेज संवेदनशील हैं तो इन्हें इस तरह खुले में नहीं छोड़ा जाना चाहिए था। उनका कहना है कि यदि रिकॉर्ड अनुपयोगी हो चुके थे तो नियमानुसार उन्हें नष्ट किया जाना चाहिए था।</p>
<p>दोनों ने आशंका जताई कि यदि ऐसे दस्तावेज गलत हाथों में चले जाते तो नुकसान संभव था। उन्होंने इस पूरे मामले को विभागीय लापरवाही करार दिया और जांच की मांग की।</p>
<p>सिविल परियोजना से जुड़े चीफ इंजीनियर एम.एल. अहिरवार से संपर्क करने पर उन्होंने कहा कि वे एक कार्यक्रम में व्यस्त हैं और बाद में विस्तृत जानकारी देंगे।</p>
<p>फिलहाल विभाग ने सभी दस्तावेजों को सुरक्षित रखने का दावा किया है। मामले को लेकर प्रशासनिक स्तर पर जांच की संभावना जताई जा रही है।</p>
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                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Feb 2026 19:28:46 +0530</pubDate>
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