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                <title>Grand Slam - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Grand Slam RSS Feed</description>
                
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                <title>विंबलडन में सिनर का जलवा, जोकोविच का 25वें ग्रैंड स्लैम का सपना फिर अधूरा</title>
                                    <description><![CDATA[विश्व नंबर-1 जैनिक सिनर ने सेमीफाइनल में नोवाक जोकोविच को सीधे सेटों में हराया, पहली बार फाइनल में पहुंचे अलेक्जेंडर ज्वेरेव; सचिन तेंदुलकर, शुभमन गिल और रोजर फेडरर रहे आकर्षण का केंद्र]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/sinner-shines-in-wimbledon-djokovics-dream-of-25th-grand-slam/article-58504"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/wimbledon-2026-(4).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">विंबलडन टेनिस चैंपियनशिप 2026 में पुरुष एकल वर्ग का सेमीफाइनल मुकाबला टेनिस प्रेमियों के लिए बेहद यादगार साबित हुआ। विश्व नंबर-1 इटली के जैनिक सिनर ने सात बार के विंबलडन चैंपियन और 24 ग्रैंड स्लैम विजेता नोवाक जोकोविच को सीधे सेटों में हराकर न सिर्फ फाइनल का टिकट हासिल किया, बल्कि दिग्गज सर्बियाई खिलाड़ी के रिकॉर्ड 25वें ग्रैंड स्लैम जीतने के सपने को भी एक बार फिर अधूरा छोड़ दिया। लंदन के प्रतिष्ठित ऑल इंग्लैंड क्लब में खेले गए इस मुकाबले में 24 वर्षीय सिनर ने 39 वर्षीय जोकोविच को 6-4, 6-4 और 6-4 से मात दी।</p>
<p>करीब दो घंटे 20 मिनट तक चले इस मुकाबले में जैनिक सिनर ने शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज अपनाया। उनकी दमदार सर्विस, सटीक बेसलाइन शॉट्स और बेहतरीन कोर्ट कवरेज के सामने जोकोविच अपनी लय हासिल नहीं कर सके। तीनों सेटों में सिनर ने महत्वपूर्ण मौकों पर शानदार प्रदर्शन करते हुए बढ़त बनाई और एक भी सेट गंवाए बिना मुकाबला अपने नाम कर लिया।</p>
<p>यह जीत जैनिक सिनर के लिए कई मायनों में खास रही। पिछले साल भी उन्होंने विंबलडन के फाइनल में जगह बनाई थी और इस बार लगातार दूसरे वर्ष फाइनल में पहुंचने में सफल रहे। इसके साथ ही उन्होंने इस साल ऑस्ट्रेलियन ओपन के सेमीफाइनल में जोकोविच से मिली हार का बदला भी पूरा कर लिया। विश्व नंबर-1 खिलाड़ी के रूप में सिनर ने साबित कर दिया कि वे मौजूदा दौर के सबसे मजबूत टेनिस खिलाड़ियों में शामिल हैं।</p>
<p>दूसरी ओर, नोवाक जोकोविच के लिए यह हार बेहद निराशाजनक रही। 24 ग्रैंड स्लैम खिताब जीत चुके सर्बियाई स्टार रिकॉर्ड 25वां ग्रैंड स्लैम जीतने के इरादे से विंबलडन पहुंचे थे, लेकिन सेमीफाइनल में उनका सफर समाप्त हो गया। जोकोविच का आखिरी ग्रैंड स्लैम खिताब 2023 के यूएस ओपन में आया था। इसके बाद वे कई बड़े टूर्नामेंटों में खिताब के करीब पहुंचे, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी।</p>
<p>इस साल भी उनका अभियान उम्मीद के मुताबिक आगे नहीं बढ़ सका। ऑस्ट्रेलियन ओपन में उन्हें फाइनल में हार का सामना करना पड़ा, जबकि फ्रेंच ओपन में उनका सफर तीसरे दौर में ही समाप्त हो गया। विंबलडन में भी वे फाइनल तक पहुंचने में असफल रहे। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनका संघर्ष और फिटनेस प्रशंसकों के लिए प्रेरणा बनी हुई है, लेकिन युवा खिलाड़ियों की चुनौती लगातार कठिन होती जा रही है।</p>
<p>मैच समाप्त होने के बाद दोनों खिलाड़ियों ने खेल भावना का शानदार परिचय दिया। जैनिक सिनर और नोवाक जोकोविच ने नेट पर एक-दूसरे को गले लगाया। इसके बाद जोकोविच ने सेंटर कोर्ट पर मौजूद दर्शकों का अभिवादन किया। स्टेडियम में मौजूद हजारों दर्शकों ने खड़े होकर तालियों के साथ इस महान खिलाड़ी का सम्मान किया।</p>
<p>अब विंबलडन 2026 के पुरुष एकल वर्ग के फाइनल में जैनिक सिनर का सामना जर्मनी के अलेक्जेंडर ज्वेरेव से होगा। पहले सेमीफाइनल में ज्वेरेव ने ब्रिटेन के वाइल्ड कार्ड खिलाड़ी आर्थर फेरी को 7-6, 6-2 और 6-4 से हराकर पहली बार विंबलडन फाइनल में जगह बनाई। 29 वर्षीय ज्वेरेव 1995 के बाद विंबलडन के फाइनल में पहुंचने वाले पहले जर्मन खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में अब तक केवल दो सेट गंवाए हैं और शानदार फॉर्म में नजर आ रहे हैं।</p>
<p>फाइनल मुकाबले को लेकर टेनिस विशेषज्ञों में उत्साह है। एक ओर विश्व नंबर-1 जैनिक सिनर हैं, जिन्होंने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया है, वहीं दूसरी ओर पहली बार विंबलडन फाइनल में पहुंचे अलेक्जेंडर ज्वेरेव हैं, जो अपने पहले खिताब के लिए पूरी ताकत झोंकेंगे। दोनों खिलाड़ियों की मौजूदा फॉर्म को देखते हुए मुकाबले के बेहद रोमांचक होने की उम्मीद जताई जा रही है।</p>
<p>विंबलडन का यह सेमीफाइनल केवल कोर्ट पर खेले गए मुकाबले के कारण ही नहीं, बल्कि रॉयल बॉक्स में मौजूद खेल जगत की दिग्गज हस्तियों की वजह से भी चर्चा में रहा। भारतीय क्रिकेट के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर, भारतीय टेस्ट कप्तान शुभमन गिल, वेस्टइंडीज के महान बल्लेबाज ब्रायन लारा और नीदरलैंड्स के फुटबॉलर वर्जिल वान डाइक सहित कई अंतरराष्ट्रीय सितारों ने सेंटर कोर्ट से मुकाबले का आनंद लिया।</p>
<p>विंबलडन आयोजकों ने सचिन तेंदुलकर का विशेष स्वागत करते हुए उन्हें "क्रिकेट रॉयल्टी" बताया। मैच के दौरान सचिन तेंदुलकर और शुभमन गिल की मुलाकात टेनिस के महान खिलाड़ी रोजर फेडरर से भी हुई। तीनों दिग्गजों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं और खेल प्रेमियों ने इसे अलग-अलग खेलों के महान खिलाड़ियों का यादगार संगम बताया।</p>
<p>रॉयल बॉक्स विंबलडन की सबसे प्रतिष्ठित परंपराओं में से एक माना जाता है। करीब 80 सीटों वाली यह विशेष दीर्घा 1922 से विंबलडन का हिस्सा रही है। यहां बैठने के लिए टिकट नहीं खरीदे जा सकते। ऑल इंग्लैंड लॉन टेनिस क्लब के चेयरमैन स्वयं खेल, संस्कृति, समाज और सार्वजनिक जीवन की प्रतिष्ठित हस्तियों को आमंत्रित करते हैं। यही वजह है कि रॉयल बॉक्स में मौजूद होना अपने आप में सम्मान माना जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 17:50:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अलेक्जेंडर ज्वेरेव पहली बार विंबलडन फाइनल में, आर्थर फेरी को सीधे सेटों में हराया</title>
                                    <description><![CDATA[जर्मनी के स्टार टेनिस खिलाड़ी अलेक्जेंडर ज्वेरेव ने ब्रिटेन के वाइल्ड कार्ड खिलाड़ी आर्थर फेरी को हराकर पहली बार विंबलडन फाइनल में जगह बनाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/alexander-zverev-beats-arthur-ferry-in-straight-sets-in-wimbledon/article-58453"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/alexander-zverev-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">जर्मनी के स्टार टेनिस खिलाड़ी अलेक्जेंडर ज्वेरेव ने विंबलडन 2026 के पुरुष एकल सेमीफाइनल में शानदार प्रदर्शन करते हुए मेजबान ब्रिटेन के वाइल्ड कार्ड खिलाड़ी आर्थर फेरी को 7-6, 6-2, 6-4 से हराकर पहली बार इस प्रतिष्ठित ग्रैंड स्लैम के फाइनल में जगह बना ली। 29 वर्षीय ज्वेरेव के लिए यह जीत उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मानी जा रही है। लंबे समय से ग्रैंड स्लैम खिताब की तलाश में जुटे ज्वेरेव अब रविवार को होने वाले फाइनल में मौजूदा चैंपियन जैनिक सिनर और सात बार के विंबलडन विजेता नोवाक जोकोविच के बीच होने वाले दूसरे सेमीफाइनल के विजेता से भिड़ेंगे। इस जीत के साथ ज्वेरेव 1995 के बाद विंबलडन फाइनल में पहुंचने वाले पहले जर्मन खिलाड़ी बन गए हैं। इसके अलावा वे फ्रेंच ओपन जीतने के बाद अगले ही ग्रैंड स्लैम के फाइनल में पहुंचने वाले ओपन एरा के केवल तीसरे खिलाड़ी भी बन गए हैं। पूरे टूर्नामेंट में उनका प्रदर्शन लगातार प्रभावशाली रहा है और उन्होंने अब तक केवल दो सेट गंवाए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सेंटर कोर्ट पर खेले गए इस मुकाबले का पहला सेट काफी रोमांचक रहा। घरेलू दर्शकों के समर्थन के बीच खेल रहे आर्थर फेरी ने शुरुआत से ही ज्वेरेव को कड़ी चुनौती दी। दोनों खिलाड़ियों के बीच शानदार रैलियां देखने को मिलीं और मुकाबला टाई-ब्रेक तक पहुंच गया। हालांकि निर्णायक क्षणों में ज्वेरेव ने अपना अनुभव दिखाया और लगातार सात अंक जीतकर पहला सेट अपने नाम कर लिया। पहला सेट जीतने के बाद उनका आत्मविश्वास और बढ़ गया। दूसरे सेट में उन्होंने अपनी तेज सर्विस और मजबूत बेसलाइन खेल के दम पर फेरी को ज्यादा मौके नहीं दिए। तीसरे सेट में भी जर्मन खिलाड़ी ने लय बरकरार रखी और सीधे सेटों में मुकाबला जीतकर फाइनल का टिकट हासिल कर लिया। मैच के बाद दोनों खिलाड़ियों ने नेट पर एक-दूसरे को गले लगाकर खेल भावना का परिचय दिया। इस मुकाबले को देखने के लिए सेंटर कोर्ट के रॉयल बॉक्स में खेल जगत की कई बड़ी हस्तियां मौजूद थीं। भारत के महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर, भारतीय टेस्ट टीम के कप्तान शुभमन गिल, वेस्टइंडीज के दिग्गज बल्लेबाज ब्रायन लारा और नीदरलैंड के फुटबॉल स्टार वर्जिल वान डाइक भी दर्शकों के बीच नजर आए। विंबलडन की ओर से सचिन तेंदुलकर का विशेष स्वागत किया गया और उन्हें क्रिकेट की दुनिया की रॉयल्टी बताते हुए सम्मानित किया गया। खेल प्रेमियों के लिए यह नजारा भी खास आकर्षण का केंद्र रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि आर्थर फेरी का सफर सेमीफाइनल में समाप्त हो गया, लेकिन उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में अपने प्रदर्शन से सभी को प्रभावित किया। विश्व रैंकिंग में 114वें स्थान पर मौजूद फेरी ने वाइल्ड कार्ड के सहारे मुख्य ड्रॉ में जगह बनाई थी और लगातार कई बड़े खिलाड़ियों को हराकर पहली बार किसी ग्रैंड स्लैम के सेमीफाइनल तक पहुंचे। उन्होंने दमीर जुमहुर, ओट्टो विर्टानेन, जिजू बर्ग्स, ग्रिगोर दिमित्रोव और फ्लावियो कोबोली जैसे खिलाड़ियों को मात देकर इतिहास रचा। सेमीफाइनल में हार के बावजूद उनका प्रदर्शन उन्हें बड़ी उपलब्धि दिलाने वाला है। अनुमान है कि नई एटीपी रैंकिंग में वे 114वें स्थान से सीधे 36वें स्थान पर पहुंच जाएंगे, जिससे भविष्य में उन्हें बड़े टूर्नामेंटों में सीधे प्रवेश मिलने की संभावना बढ़ जाएगी। दूसरी ओर ज्वेरेव अब अपने पहले विंबलडन खिताब से सिर्फ एक जीत दूर हैं। मैच के बाद उन्होंने कहा कि विंबलडन हमेशा उनके लिए सबसे कठिन ग्रैंड स्लैम रहा है, लेकिन इस बार उन्होंने खुद पर भरोसा बनाए रखा और मेहनत का परिणाम मिला। उन्होंने स्वीकार किया कि फाइनल आसान नहीं होगा क्योंकि सामने चाहे मौजूदा चैंपियन जैनिक सिनर हों या अनुभवी नोवाक जोकोविच, दोनों ही विश्वस्तरीय खिलाड़ी हैं। इसके बावजूद उन्होंने विश्वास जताया कि वह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 00:00:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>19 साल बाद विंबलडन फाइनल में एक ही देश की दो खिलाड़ी आमने-सामने</title>
                                    <description><![CDATA[चेक गणराज्य की कारोलिना मुचोवा और लिंडा नोस्कोवा ने सेमीफाइनल जीतकर रचा इतिहास। चोटों से जूझकर लौटी मुचोवा पहली ग्रैंड स्लैम ट्रॉफी से सिर्फ एक कदम दूर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/after-19-years-two-players-from-the-same-country-face/article-58395"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/wimbledon-2026-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">विंबलडन टेनिस चैंपियनशिप 2026 का महिला एकल वर्ग इस बार इतिहास रचने जा रहा है। प्रतिष्ठित ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट के फाइनल में पहली बार चेक गणराज्य की दो खिलाड़ी आमने-सामने होंगी। कारोलिना मुचोवा और लिंडा नोस्कोवा ने अपने-अपने सेमीफाइनल मुकाबले जीतकर खिताबी मुकाबले में जगह बना ली है। दोनों खिलाड़ियों के बीच यह बहुप्रतीक्षित फाइनल 11 जुलाई को लंदन के प्रतिष्ठित सेंटर कोर्ट पर खेला जाएगा। इस मुकाबले ने न केवल चेक गणराज्य के टेनिस प्रेमियों में उत्साह बढ़ाया है, बल्कि पूरे टेनिस जगत का ध्यान भी अपनी ओर खींच लिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">विंबलडन के इतिहास में 19 साल बाद ऐसा मौका आया है, जब किसी एक ही देश की दो महिला खिलाड़ी फाइनल में आमने-सामने होंगी। इससे पहले वर्ष 2009 में अमेरिका की दिग्गज विलियम्स बहनों, सेरेना विलियम्स और वीनस विलियम्स, के बीच खिताबी मुकाबला खेला गया था। अब चेक गणराज्य की दो प्रतिभाशाली खिलाड़ी इस ऐतिहासिक सूची में अपना नाम दर्ज कराने जा रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पहले सेमीफाइनल में अनुभवी खिलाड़ी कारोलिना मुचोवा ने अमेरिका की सातवीं वरीयता प्राप्त स्टार कोको गॉफ को रोमांचक मुकाबले में 6-2, 1-6, 7-6 (12-10) से हराया। यह मुकाबला लगभग पूरे समय रोमांच से भरपूर रहा और दोनों खिलाड़ियों ने शानदार खेल का प्रदर्शन किया। पहले सेट में मुचोवा ने आक्रामक शुरुआत करते हुए गॉफ की कमजोर सर्विस का फायदा उठाया और आसानी से बढ़त बना ली। हालांकि दूसरे सेट में कोको गॉफ ने दमदार वापसी करते हुए मुकाबले को बराबरी पर ला दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">निर्णायक तीसरे सेट में दोनों खिलाड़ियों के बीच जबरदस्त संघर्ष देखने को मिला। टाई-ब्रेकर में स्कोर 8-8 की बराबरी पर पहुंच चुका था। इसी दौरान सर्विस में देरी होने के कारण मुचोवा को टाइम वॉयलेशन की चेतावनी मिली। अगले अंक पर उनका फोरहैंड शॉट बाहर चला गया और कोको गॉफ को मैच पॉइंट मिल गया। ऐसा लग रहा था कि मुकाबला गॉफ के पक्ष में जा सकता है, लेकिन दबाव के क्षण में गॉफ नेट पर ड्रॉप शॉट लगाने से चूक गईं। मुचोवा ने इस अवसर का पूरा फायदा उठाया और लगातार दो महत्वपूर्ण अंक जीतकर मुकाबला अपने नाम कर लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">जीत के बाद मुचोवा काफी भावुक नजर आईं। उन्होंने कहा कि विंबलडन फाइनल में पहुंचना उनके करियर का सबसे खास पल है। उनके अनुसार मुकाबला बेहद कठिन था और पूरे मैच के दौरान लगातार उतार-चढ़ाव आते रहे। उन्होंने स्वीकार किया कि कोर्ट पर सोचने का समय नहीं था और आखिरी अंक तक मुकाबला तनाव से भरा रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">कारोलिना मुचोवा की यह सफलता इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि उनका करियर लंबे समय तक चोटों से प्रभावित रहा है। पिछले कुछ वर्षों में वह कलाई, पीठ, पेट, जांघ, टखने और पैर की गंभीर चोटों से जूझती रही हैं। वर्ष 2022 में डॉक्टरों ने उन्हें पेशेवर टेनिस छोड़ने तक की सलाह दे दी थी। इसके बाद उनकी दाईं कलाई की दो बार सर्जरी हुई और उन्हें लगभग दस महीने तक कोर्ट से दूर रहना पड़ा। कठिन संघर्ष और लगातार मेहनत के बाद उन्होंने शानदार वापसी की है और अब वह अपने पहले ग्रैंड स्लैम खिताब से सिर्फ एक जीत दूर हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरे सेमीफाइनल में चेक गणराज्य की युवा खिलाड़ी लिंडा नोस्कोवा ने यूक्रेन की मार्ता कोस्त्युक को सीधे सेटों में 6-4, 6-4 से हराकर पहली बार किसी ग्रैंड स्लैम फाइनल में जगह बनाई। नोस्कोवा ने पूरे मुकाबले में संयमित और आत्मविश्वास से भरा खेल दिखाया। उन्होंने अपनी सर्विस पर शानदार नियंत्रण बनाए रखा और महत्वपूर्ण मौकों पर विपक्षी खिलाड़ी की गलतियों का पूरा लाभ उठाया। महज कम उम्र में नोस्कोवा का यह प्रदर्शन उन्हें भविष्य की बड़ी स्टार खिलाड़ियों की सूची में शामिल करता है। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में लगातार बेहतरीन खेल दिखाया है और अब वह अपने करियर का पहला ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने के बेहद करीब पहुंच चुकी हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 15:08:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>विंबलडन में आर्थर फेरी का बड़ा उलटफेर: वाइल्ड कार्ड खिलाड़ी ने सेमीफाइनल में बनाई ऐतिहासिक जगह</title>
                                    <description><![CDATA[ब्रिटेन के 23 वर्षीय आर्थर फेरी ने नौवीं वरीयता प्राप्त फ्लावियो कोबोली को सीधे सेटों में हराया, अब सेमीफाइनल में दूसरी वरीयता प्राप्त अलेक्जेंडर ज्वेरेव से होगी टक्कर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/arthur-ferrys-big-upset-in-wimbledon-wild-card-player-made/article-58300"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/arthur-fery.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">विंबलडन 2026 में ब्रिटेन के युवा टेनिस खिलाड़ी आर्थर फेरी ने ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसकी उम्मीद टूर्नामेंट शुरू होने से पहले शायद ही किसी ने की होगी। दुनिया के 114वें नंबर के खिलाड़ी और वाइल्ड कार्ड एंट्री पाने वाले 23 वर्षीय आर्थर फेरी ने पुरुष एकल क्वार्टर फाइनल में इटली के नौवीं वरीयता प्राप्त फ्लावियो कोबोली को सीधे सेटों में हराकर पहली बार किसी ग्रैंड स्लैम के सेमीफाइनल में जगह बना ली। सेंटर कोर्ट पर खेला गया यह मुकाबला फेरी के आत्मविश्वास, आक्रामक खेल और शानदार रणनीति का बेहतरीन उदाहरण रहा। फेरी ने मुकाबला 6-4, 7-6 (7-4), 6-0 से अपने नाम किया। तीनों सेटों में उन्होंने जिस तरह का प्रदर्शन किया, उसने दर्शकों को भी प्रभावित किया। खास बात यह रही कि तीसरे सेट में उन्होंने कोबोली को कोई भी गेम जीतने का मौका नहीं दिया और 6-0 से मुकाबला खत्म कर दिया। यह जीत उनके करियर की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस जीत के साथ आर्थर फेरी विंबलडन के इतिहास में पुरुष एकल सेमीफाइनल तक पहुंचने वाले केवल दूसरे वाइल्ड कार्ड खिलाड़ी बन गए हैं। इससे पहले वर्ष 2001 में क्रोएशिया के गोरान इवानिसेविच ने यह उपलब्धि हासिल की थी। इवानिसेविच ने उसी साल विंबलडन का खिताब भी अपने नाम किया था। अब फेरी के सामने भी इतिहास दोहराने का मौका होगा। मैच की शुरुआत से ही फेरी ने आक्रामक अंदाज अपनाया। पहले सेट में उन्होंने अपनी सर्विस गेम पर पूरा नियंत्रण बनाए रखा और सही समय पर ब्रेक हासिल कर 6-4 से बढ़त बना ली। दूसरे सेट में कोबोली ने वापसी की कोशिश की और मुकाबला टाई-ब्रेक तक पहुंचा, लेकिन निर्णायक क्षणों में फेरी ने शानदार संयम दिखाया और टाई-ब्रेक 7-4 से जीतकर मैच पर मजबूत पकड़ बना ली। तीसरे सेट में फेरी पूरी तरह हावी रहे। उन्होंने लगातार दबाव बनाकर कोबोली को कोई मौका नहीं दिया। इटली के खिलाड़ी कई बार गलतियां करते नजर आए, जबकि फेरी हर अंक के लिए पूरी ऊर्जा के साथ खेलते रहे। अंततः उन्होंने 6-0 से सेट जीतकर मुकाबला समाप्त किया और जीत के साथ सेंटर कोर्ट पर दर्शकों की जोरदार तालियां बटोरीं।</p>
<p style="text-align:justify;">यह फेरी के करियर का पहला ग्रैंड स्लैम क्वार्टर फाइनल भी था और उन्होंने अपने पहले ही क्वार्टर फाइनल मुकाबले को जीतकर सेमीफाइनल का टिकट हासिल कर लिया। इस प्रदर्शन ने उन्हें ब्रिटिश टेनिस के नए सितारे के रूप में स्थापित कर दिया है। दिलचस्प बात यह भी है कि वर्ष 2026 में यह दूसरी बार है जब आर्थर फेरी ने फ्लावियो कोबोली को किसी ग्रैंड स्लैम में हराया है। इससे पहले ऑस्ट्रेलियन ओपन के पहले दौर में भी उन्होंने कोबोली को 7-6, 6-4, 6-1 से हराया था। हालांकि फ्रेंच ओपन में दोनों खिलाड़ियों की भिड़ंत नहीं हुई थी। उस टूर्नामेंट में कोबोली ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल तक का सफर तय किया था, जहां उन्हें अलेक्जेंडर ज्वेरेव के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था।</p>
<p style="text-align:justify;">अब विंबलडन के सेमीफाइनल में आर्थर फेरी का सामना दूसरी वरीयता प्राप्त और मौजूदा फ्रेंच ओपन चैंपियन अलेक्जेंडर ज्वेरेव से होगा। ज्वेरेव इस समय शानदार फॉर्म में हैं और खिताब के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। ऐसे में फेरी के लिए यह मुकाबला आसान नहीं होगा, लेकिन जिस आत्मविश्वास के साथ उन्होंने अब तक खेल दिखाया है, उससे यह मुकाबला बेहद रोमांचक होने की उम्मीद है। आर्थर फेरी की इस उपलब्धि ने ब्रिटिश टेनिस प्रेमियों को भी उत्साहित कर दिया है। ओपन एरा में वह विंबलडन पुरुष एकल के सेमीफाइनल में पहुंचने वाले पांचवें ब्रिटिश खिलाड़ी बन गए हैं। उनसे पहले एंडी मरे, टिम हेनमैन, रोजर टेलर और कैमरून नॉरी यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं। एंडी मरे सात बार, टिम हेनमैन चार बार, रोजर टेलर दो बार और कैमरून नॉरी एक बार सेमीफाइनल तक पहुंचे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">ब्रिटेन में लंबे समय से ऐसे युवा खिलाड़ी की तलाश थी जो भविष्य में बड़े टूर्नामेंटों में देश का प्रतिनिधित्व कर सके। आर्थर फेरी ने अपने खेल से यह संकेत दिया है कि आने वाले वर्षों में वह विश्व टेनिस के बड़े खिलाड़ियों को चुनौती देने की क्षमता रखते हैं। मैच के बाद फेरी अपनी भावनाएं छिपा नहीं सके। उन्होंने कहा कि उन्हें अब भी विश्वास नहीं हो रहा कि वह विंबलडन के सेमीफाइनल में पहुंच गए हैं। उनके अनुसार हर मुकाबले के साथ उनका आत्मविश्वास बढ़ता गया और उन्होंने केवल एक-एक मैच पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने स्वीकार किया कि क्वार्टर फाइनल से पहले वह काफी घबराए हुए थे, लेकिन कोर्ट पर उतरने के बाद उन्होंने खुद को शांत रखा और अपनी रणनीति पर अमल किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 15:40:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>5 घंटे 15 मिनट का ऐतिहासिक मुकाबला जीतकर जोकोविच विंबलडन सेमीफाइनल में पहुंचे</title>
                                    <description><![CDATA[39 वर्षीय नोवाक जोकोविच ने विंबलडन इतिहास का सबसे लंबा पुरुष एकल क्वार्टर फाइनल जीतते हुए कनाडा के फेलिक्स ऑगर-अलियासिमे को पांच सेटों में हराया। अब सेमीफाइनल में उनका सामना दुनिया के नंबर-1 जैनिक सिनर से होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/djokovic-reaches-wimbledon-semi-finals-after-winning-a-historic-match-of/article-58193"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/novak-djokovic-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">39 वर्षीय सर्बियाई टेनिस स्टार नोवाक जोकोविच ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बड़े मुकाबलों में उनका अनुभव और मानसिक मजबूती उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाती है। ऑल इंग्लैंड क्लब के सेंटर कोर्ट पर खेले गए विंबलडन पुरुष एकल क्वार्टर फाइनल में जोकोविच ने कनाडा के फेलिक्स ऑगर-अलियासिमे को पांच घंटे 15 मिनट तक चले रोमांचक मुकाबले में 7-6 (10), 3-6, 6-3, 6-7 (4), 7-6 (4) से हराकर सेमीफाइनल में जगह बना ली। यह मुकाबला विंबलडन इतिहास का सबसे लंबा पुरुष एकल क्वार्टर फाइनल बन गया। इससे पहले 2008 में रेनर शुटलर और अरनो क्लेमेंट के बीच खेला गया क्वार्टर फाइनल पांच घंटे 12 मिनट तक चला था। इस जीत के साथ जोकोविच ने कई नए रिकॉर्ड भी अपने नाम किए और अपने शानदार करियर में एक और ऐतिहासिक अध्याय जोड़ दिया।</p>
<p>शुरुआत से ही मुकाबला बेहद कड़ा रहा। पहले सेट में दोनों खिलाड़ियों ने शानदार सर्विस और दमदार रैलियों का प्रदर्शन किया। कोई भी खिलाड़ी आसानी से बढ़त बनाने में सफल नहीं हुआ और पहला सेट टाई-ब्रेक तक पहुंचा। टाई-ब्रेक में जोकोविच ने अनुभव का परिचय देते हुए 10-8 से बढ़त बनाई और पहला सेट अपने नाम किया। हालांकि युवा कनाडाई खिलाड़ी फेलिक्स ऑगर-अलियासिमे ने हार नहीं मानी और दूसरे सेट में आक्रामक खेल दिखाते हुए 6-3 से जीत दर्ज कर मुकाबले में बराबरी कर ली।</p>
<p>तीसरे सेट में जोकोविच ने फिर से अपनी लय हासिल की। उन्होंने लंबी रैलियों में बढ़त बनाई और प्रतिद्वंद्वी की गलतियों का पूरा फायदा उठाते हुए 6-3 से सेट जीत लिया। लेकिन चौथे सेट में फेलिक्स ने शानदार वापसी की। दोनों खिलाड़ियों के बीच एक बार फिर कड़ी टक्कर देखने को मिली और फैसला टाई-ब्रेक में पहुंचा। इस बार कनाडाई खिलाड़ी ने बाजी मारते हुए मुकाबले को निर्णायक पांचवें सेट तक पहुंचा दिया। स्टेडियम में मौजूद दर्शकों को लगातार उतार-चढ़ाव से भरा मुकाबला देखने को मिला और हर अंक पर रोमांच चरम पर था।</p>
<p>पांचवां और अंतिम सेट दोनों खिलाड़ियों की फिटनेस, धैर्य और मानसिक मजबूती की असली परीक्षा साबित हुआ। पांच घंटे से अधिक समय तक कोर्ट पर संघर्ष करने के बावजूद दोनों खिलाड़ी लगातार शानदार टेनिस खेलते रहे। आखिरकार मुकाबले का फैसला सुपर टाई-ब्रेक में हुआ। यहीं 22 शॉट की लंबी रैली मैच का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बनी। जोकोविच ने अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए फेलिक्स को कोर्ट के एक कोने से दूसरे कोने तक दौड़ाया। आखिर में कनाडाई खिलाड़ी का फोरहैंड शॉट बाहर चला गया और जोकोविच ने 9-4 की अहम बढ़त बना ली। अगले ही अंक पर उन्होंने मैच अपने नाम कर लिया और सेंटर कोर्ट पर दर्शकों की तालियों के बीच ऐतिहासिक जीत का जश्न मनाया।</p>
<p>इस जीत के साथ जोकोविच लगातार आठवीं बार विंबलडन के सेमीफाइनल में पहुंचने वाले खिलाड़ी बन गए। उन्होंने इस मामले में रोजर फेडरर के लगातार सात सेमीफाइनल के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। अब उनका अगला मुकाबला दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी और मौजूदा चैंपियन जैनिक सिनर से होगा। सिनर ने अपने क्वार्टर फाइनल में जर्मनी के जान-लेनार्ड स्ट्रफ को सीधे सेटों में 7-5, 7-6 (4), 6-3 से हराकर अंतिम चार में जगह बनाई। पिछले साल विंबलडन के सेमीफाइनल में सिनर ने जोकोविच को सीधे सेटों में हराया था, जबकि इस साल ऑस्ट्रेलियन ओपन के सेमीफाइनल में जोकोविच ने पांच सेटों तक चले मुकाबले में सिनर को मात दी थी। ऐसे में दोनों दिग्गजों के बीच होने वाला सेमीफाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक माना जा रहा है।</p>
<p>जोकोविच ने इस मुकाबले में कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम किए। उन्होंने अपने करियर का 50वां पांच सेट वाला ग्रैंड स्लैम मैच खेला और ओपन एरा में सबसे ज्यादा पांच सेट के ग्रैंड स्लैम मुकाबले खेलने वाले खिलाड़ी बन गए। इससे पहले यह रिकॉर्ड स्विट्जरलैंड के स्टेन वावरिंका के नाम था, जिन्होंने 49 ऐसे मुकाबले खेले थे। इसके अलावा जोकोविच ओपन एरा में किसी एक ग्रैंड स्लैम में 15 पुरुष एकल सेमीफाइनल खेलने वाले तीसरे खिलाड़ी भी बन गए। इससे पहले रोजर फेडरर ऑस्ट्रेलियन ओपन और राफेल नडाल फ्रेंच ओपन में यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं।</p>
<p>39 साल और 38 दिन की उम्र में जोकोविच विंबलडन पुरुष एकल के सेमीफाइनल में पहुंचने वाले दूसरे सबसे उम्रदराज खिलाड़ी भी बन गए। उनसे आगे केवल केन रोसेवाल हैं, जिन्होंने 39 साल 234 दिन की उम्र में यह उपलब्धि हासिल की थी। इसके साथ ही जोकोविच ने विंबलडन में अपनी 107वीं जीत दर्ज की और टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा मैच जीतने का अपना रिकॉर्ड और मजबूत कर लिया। यह उनके करियर का 55वां ग्रैंड स्लैम सेमीफाइनल भी है, जो अपने आप में एक सर्वकालिक रिकॉर्ड है।</p>
<p>मुकाबले के दौरान जोकोविच को शारीरिक परेशानी का भी सामना करना पड़ा। पहले सेट में उनके बाएं टखने और पिंडली में दर्द महसूस हुआ, जिसके बाद उन्होंने मेडिकल टाइमआउट लिया। फिजियो ने उनकी मसाज की और पट्टी बांधी, जिसके बाद उन्होंने खेल जारी रखा। दूसरे सेट के बाद सेंटर कोर्ट की छत बंद करने के फैसले पर भी उन्होंने नाराजगी जताई। उनका कहना था कि बाहर पर्याप्त रोशनी थी और खेल बिना छत बंद किए भी जारी रह सकता था।</p>
<p>मैच के बाद जोकोविच ने कहा कि वह आज भी ऐसे ही ऐतिहासिक मुकाबलों के लिए टेनिस खेलते हैं। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि उन्हें खुद भी हैरानी होती है कि वह अब भी युवा खिलाड़ियों के साथ इतने लंबे और कठिन मुकाबले जीत पा रहे हैं। सेमीफाइनल में सिनर से होने वाली भिड़ंत पर उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि काश यह फाइनल होता, ताकि अगले दिन शरीर की हालत को लेकर चिंता नहीं करनी पड़ती। उन्होंने यह भी बताया कि चौथे सेट के बाद उन्होंने अपने बच्चों से सो जाने के लिए कहा था, लेकिन वे मैच खत्म होने तक रुके रहे। जोकोविच के अनुसार यह सेंटर कोर्ट पर उनके करियर के सर्वश्रेष्ठ मुकाबलों में से एक था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 15:51:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>विम्बलडन में आर्थर फेरी का बड़ा उलटफेर, दिमित्रोव को हराकर पहली बार क्वार्टर फाइनल में पहुंचे</title>
                                    <description><![CDATA[जैस्मीन पाओलिनी ने भी अंतिम-8 में बनाई जगह, डिफेंडिंग चैंपियन ब्रिटिश जोड़ी ने डबल्स में बरकरार रखी खिताब की उम्मीद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/arthur-ferrys-big-upset-in-wimbledon-defeating-dimitrov-and-reaching/article-58099"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/wimbledon-2026-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">लंदन के प्रतिष्ठित ऑल इंग्लैंड क्लब में खेले जा रहे विम्बलडन 2026 का रोमांच लगातार बढ़ता जा रहा है। सोमवार को टूर्नामेंट में कई ऐसे मुकाबले देखने को मिले, जिन्होंने दर्शकों को हैरान कर दिया। सबसे बड़ा उलटफेर पुरुष एकल वर्ग में देखने को मिला, जहां ब्रिटेन के 23 वर्षीय वाइल्डकार्ड खिलाड़ी आर्थर फेरी ने पूर्व विश्व नंबर-3 ग्रिगोर दिमित्रोव को पांच सेट तक चले बेहद रोमांचक मुकाबले में 7-5, 3-6, 4-6, 6-4, 7-6 (10-7) से हराकर पहली बार विम्बलडन के क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली। इस जीत के साथ फेरी पूरे टूर्नामेंट के सबसे चर्चित खिलाड़ियों में शामिल हो गए हैं। यह मुकाबला शुरुआत से ही बेहद संघर्षपूर्ण रहा। पहले सेट में फेरी ने संयमित खेल दिखाते हुए बढ़त बनाई, लेकिन अनुभवी दिमित्रोव ने अगले दो सेट जीतकर मुकाबले पर पकड़ मजबूत कर ली। इसके बाद लगा कि अनुभव युवा खिलाड़ी पर भारी पड़ जाएगा, लेकिन फेरी ने शानदार वापसी करते हुए चौथा सेट अपने नाम किया और निर्णायक पांचवें सेट में दबाव के बीच बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए मुकाबला जीत लिया। अंतिम सेट का टाईब्रेक दर्शकों के लिए बेहद रोमांचक रहा, जिसमें फेरी ने 10-7 से जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस जीत के साथ आर्थर फेरी 2014 में निक किर्गियोस के बाद विम्बलडन के क्वार्टर फाइनल में पहुंचने वाले पहले वाइल्डकार्ड खिलाड़ी बन गए हैं। घरेलू दर्शकों की मौजूदगी में मिली इस जीत ने उनके आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी है। पूरे सेंटर कोर्ट में मौजूद हजारों दर्शकों ने जीत के बाद खड़े होकर तालियों से उनका स्वागत किया। आर्थर फेरी की यह सफलता इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि कुछ महीने पहले तक उनका करियर मुश्किल दौर से गुजर रहा था। इस साल जनवरी में कैनबरा चैलेंजर टूर्नामेंट के दौरान कोहनी की गंभीर चोट के कारण उन्हें प्रतियोगिता बीच में छोड़नी पड़ी थी। चोट इतनी गंभीर थी कि वे सामान्य सर्विस भी नहीं कर पा रहे थे। लगातार इलाज और कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने कोर्ट पर वापसी की और अब महज 26 सप्ताह बाद विम्बलडन के क्वार्टर फाइनल तक पहुंचकर अपनी क्षमता का शानदार परिचय दिया है। पूर्व ब्रिटिश नंबर-1 ग्रेग रुसेद्स्की ने भी फेरी के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि युवा खिलाड़ी ने दबाव की परिस्थितियों में जिस परिपक्वता से खेल दिखाया, वह किसी अनुभवी खिलाड़ी से कम नहीं था। अब क्वार्टर फाइनल में उनका मुकाबला इटली के नौवीं वरीयता प्राप्त फ्लेवियो कोबोली से होगा। दोनों खिलाड़ियों के बीच होने वाला मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फेरी की इस जीत का असर उनकी विश्व रैंकिंग पर भी साफ दिखाई देगा। साल की शुरुआत उन्होंने विश्व रैंकिंग में 185वें स्थान से की थी, लेकिन अब क्वार्टर फाइनल में पहुंचने के बाद उनकी रैंकिंग कम से कम 63वें स्थान तक पहुंचना तय माना जा रहा है। इसके अलावा उन्हें लगभग 4.80 लाख पाउंड यानी करीब 5.2 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि भी मिलेगी। बेहतर रैंकिंग मिलने के बाद अब उन्हें भविष्य के ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंटों के मुख्य ड्रॉ में सीधे प्रवेश मिलने की संभावना भी बढ़ गई है। महिला एकल वर्ग में भी इटली की स्टार खिलाड़ी और 2024 की फाइनलिस्ट जैस्मीन पाओलिनी ने अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखा। उन्होंने फिलीपींस की 21 वर्षीय एलेक्जेंड्रा ईला को तीन सेट तक चले मुकाबले में 6-4, 4-6, 6-3 से हराकर अंतिम-8 में जगह बनाई। एलेक्जेंड्रा ईला ने पिछले दौर में पूर्व चैंपियन इगा स्वियातेक को हराकर बड़ा उलटफेर किया था, इसलिए उनसे काफी उम्मीदें थीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पाओलिनी और ईला के बीच मुकाबला काफी संतुलित रहा। दूसरे सेट में ईला ने शानदार वापसी कर मैच बराबरी पर ला दिया था, लेकिन तीसरे और निर्णायक सेट में अनुभव ने युवा खिलाड़ी पर बढ़त बना ली। आठवें गेम में ईला की दो महत्वपूर्ण गलतियों का फायदा उठाते हुए पाओलिनी ने बढ़त हासिल की और फिर मुकाबला अपने नाम कर लिया। अब क्वार्टर फाइनल में उनका सामना यूक्रेन की मार्ता कोस्त्युक से होगा। पुरुष युगल वर्ग में भी ब्रिटेन के खिलाड़ियों ने अपने घरेलू दर्शकों को खुश होने का मौका दिया। मौजूदा चैंपियन जूलियन कैश और लॉयड ग्लासपूल की तीसरी वरीय जोड़ी ने पेट्र नौजा और नील ओबरलीटनर को 6-3, 3-6, 7-5 से हराकर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर लिया। इस जीत के साथ ब्रिटिश जोड़ी लगातार दूसरा विम्बलडन खिताब जीतने से अब केवल तीन जीत दूर रह गई है। मैच के बाद लॉयड ग्लासपूल ने कहा कि पिछले वर्ष की सफलता ने टीम का आत्मविश्वास बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि वे खिताब बचाने के दबाव में नहीं हैं, बल्कि हर मुकाबले को नई चुनौती मानकर खेल रहे हैं। टीम का लक्ष्य लगातार अच्छा प्रदर्शन करते हुए एक बार फिर ट्रॉफी अपने नाम करना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 14:47:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>21 साल की एलेक्जेंड्रा ईला ने विंबलडन में रचा इतिहास, डिफेंडिंग चैंपियन इगा स्वियातेक को हराकर पहुंचीं प्री-क्वार्टर फाइनल</title>
                                    <description><![CDATA[तीन साल पहले स्वियातेक से मिला था ‘100% देने’ का संदेश, अब उसी खिलाड़ी को हराकर फिलीपींस की पहली ग्रैंड स्लैम प्री-क्वार्टर फाइनलिस्ट बनीं एलेक्जेंड्रा ईला]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/21-year-old-alexandra-ila-created-history-in-wimbledon-by/article-57929"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/alexandra-eala.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">विंबलडन 2026 में शनिवार को महिला एकल वर्ग में ऐसा बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जिसने टेनिस जगत को चौंका दिया। फिलीपींस की 21 वर्षीय युवा खिलाड़ी एलेक्जेंड्रा ईला ने सेंटर कोर्ट पर मौजूदा चैंपियन और दुनिया की तीसरी वरीयता प्राप्त इगा स्वियातेक को सीधे सेटों में 7-6 (9), 6-2 से हराकर टूर्नामेंट से बाहर कर दिया। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ईला किसी भी ग्रैंड स्लैम के महिला एकल प्री-क्वार्टर फाइनल में पहुंचने वाली फिलीपींस की पहली खिलाड़ी बन गई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मैच खत्म होते ही एलेक्जेंड्रा ईला भावुक हो गईं। जीत का अंतिम अंक हासिल करते ही उनके हाथ से रैकेट छूट गया और वह कोर्ट पर घुटनों के बल बैठ गईं। उनकी आंखों में खुशी के आंसू साफ दिखाई दे रहे थे। यह जीत उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हो गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस मुकाबले की सबसे खास बात यह रही कि तीन वर्ष पहले यही इगा स्वियातेक एलेक्जेंड्रा ईला को प्रेरित कर रही थीं। फ्रेंच ओपन जीतने के बाद स्वियातेक राफेल नडाल अकादमी पहुंची थीं, जहां ईला अपनी पढ़ाई पूरी कर रही थीं। ग्रेजुएशन समारोह में स्वियातेक ने ईला को डिप्लोमा सौंपा था और अपने संबोधन में कहा था, "जो भी करना, उसमें अपना 100 प्रतिशत देना।"</p>
<p style="text-align:justify;">तीन साल बाद वही छात्रा अपने आदर्श को विंबलडन जैसे प्रतिष्ठित मंच पर हराकर नई कहानी लिख चुकी है। यह पल खेल जगत के सबसे प्रेरणादायक क्षणों में से एक माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">मैच जीतने के बाद एलेक्जेंड्रा ईला ने कहा कि यह जीत केवल उनकी नहीं, बल्कि पूरे फिलीपींस की है। उन्होंने कहा कि बचपन से उनके देश के लोगों ने उनका समर्थन किया और वही उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहा। ईला ने अपनी जीत अपने परिवार और उन सभी छोटी लड़कियों को समर्पित की, जो बड़े सपने देखने का साहस रखती हैं। उन्होंने कहा कि बचपन में वह स्कूल के बाद रफल्ड मोजे और चमकने वाले जूते पहनकर अभ्यास के लिए जाती थीं। आज का दिन उसी संघर्ष का परिणाम है।</p>
<p style="text-align:justify;">फिलीपींस में टेनिस के लिए पर्याप्त ग्रास कोर्ट उपलब्ध नहीं थे। ऐसे में एलेक्जेंड्रा ईला ने बास्केटबॉल कोर्ट पर अभ्यास किया। उन्होंने बताया कि कोर्ट के पीछे लगे बास्केटबॉल हूप्स की वजह से वह ज्यादा पीछे नहीं जा सकती थीं, क्योंकि टकराने का डर रहता था। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने लगातार मेहनत की और आज दुनिया की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को चुनौती देने की क्षमता हासिल कर ली। उनकी यह यात्रा युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">दो घंटे 15 मिनट तक चले मुकाबले में ईला ने शुरुआत से ही आत्मविश्वास भरा खेल दिखाया। पहला सेट बेहद रोमांचक रहा और टाईब्रेक तक पहुंचा। इस दौरान उन्होंने दो सेट प्वाइंट बचाए और 7-6 (9) से बढ़त बना ली। दूसरे सेट में ईला ने आक्रामक रणनीति अपनाई और स्वियातेक को वापसी का कोई अवसर नहीं दिया। दमदार सर्विस, सटीक ग्राउंड स्ट्रोक और बेहतरीन कोर्ट कवरेज की बदौलत उन्होंने दूसरा सेट 6-2 से जीतकर मुकाबला अपने नाम कर लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">यह पहला मौका नहीं है जब एलेक्जेंड्रा ईला ने इगा स्वियातेक को हराया हो। इससे पहले भी वह पिछले वर्ष मियामी ओपन में स्वियातेक को मात दे चुकी हैं। लगातार दूसरी जीत ने साबित कर दिया कि ईला अब केवल उभरती हुई खिलाड़ी नहीं, बल्कि बड़ी प्रतियोगिताओं में शीर्ष खिलाड़ियों को चुनौती देने वाली मजबूत दावेदार बन चुकी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हार के बाद इगा स्वियातेक ने ईला के प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण मौकों पर एलेक्जेंड्रा ने उनसे बेहतर खेल दिखाया और जीत की पूरी हकदार रहीं। पिछले वर्ष विंबलडन का खिताब जीतने वाली स्वियातेक इस बार अपने खिताब का बचाव नहीं कर सकीं। इसके साथ ही 2016 में सेरेना विलियम्स के बाद लगातार दो बार महिला एकल विंबलडन जीतने वाली खिलाड़ी का इंतजार भी जारी रहेगा। इस ऐतिहासिक जीत के बाद एलेक्जेंड्रा ईला अब प्री-क्वार्टर फाइनल में 13वीं वरीयता प्राप्त जैस्मिन पाओलिनी का सामना करेंगी। शानदार फॉर्म में चल रही ईला से अब फिलीपींस के खेल प्रेमियों को नई उम्मीदें हैं। यदि वह इसी तरह का प्रदर्शन जारी रखती हैं, तो विंबलडन में और भी बड़े उलटफेर देखने को मिल सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 15:43:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जोकोविच ने सितसिपास को हराकर विंबलडन तीसरे दौर में बनाई जगह, सिनर भी आगे बढ़े</title>
                                    <description><![CDATA[लंदन के सेंटर कोर्ट पर 39 वर्षीय नोवाक जोकोविच ने 98 मिनट में आसान जीत दर्ज की, वहीं डिफेंडिंग चैंपियन जैनिक सिनर ने कड़े मुकाबले में जीत के साथ अगले दौर में प्रवेश किया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/djokovic-defeated-tsitsipas-and-made-it-to-wimbledon-third-round/article-57660"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/wimbledon-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">लंदन में चल रहे विंबलडन 2026 में पुरुष सिंगल्स मुकाबलों ने एक बार फिर दर्शकों को रोमांच से भर दिया। दिग्गज टेनिस खिलाड़ी नोवाक जोकोविच ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ग्रीस के स्टेफानोस सितसिपास को सीधे सेटों में हराकर तीसरे दौर में प्रवेश कर लिया है। सेंटर कोर्ट पर खेले गए इस मुकाबले में 39 साल के सर्बियाई स्टार ने पूरी तरह नियंत्रण बनाए रखा और महज 98 मिनट में मैच अपने नाम कर लिया। जोकोविच ने यह मुकाबला 6-3, 6-4, 6-2 से जीता। उनकी इस जीत के साथ एक बार फिर यह चर्चा तेज हो गई है कि उम्र केवल एक आंकड़ा है, खासकर जब खिलाड़ी का अनुभव और फिटनेस उच्च स्तर पर हो। मैच के बाद जोकोविच ने अपने अंदाज में दर्शकों से बातचीत की और कहा कि वह कोर्ट पर इस तरह का प्रदर्शन करके बेहद खुश हैं। उन्होंने सेंटर कोर्ट को अपने बचपन का सपना बताया और कहा कि इस मैदान पर खेलना उनके लिए हमेशा खास रहा है। इस दौरान जोकोविच काफी रिलैक्स मूड में नजर आए। मैच के दौरान भी उनके खेल में आत्मविश्वास साफ दिख रहा था और उन्होंने सितसिपास को किसी भी सेट में वापसी का मौका नहीं दिया। तीसरे सेट तक आते-आते मुकाबला पूरी तरह एकतरफा हो गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी दिन खेले गए एक अन्य मुकाबले में डिफेंडिंग चैंपियन और वर्ल्ड नंबर-1 जैनिक सिनर ने भी अगले दौर में जगह बना ली। हालांकि उनका मैच उतना आसान नहीं रहा। पुर्तगाल के नूनो बोर्गेस ने शुरुआत से ही सिनर को कड़ी टक्कर दी और कई मौकों पर दबाव बनाने में सफल रहे। मुकाबला करीब 2 घंटे 32 मिनट तक चला, जिसमें दोनों खिलाड़ियों के बीच लंबी रैलियां देखने को मिलीं। अंत में सिनर ने अनुभव और धैर्य का परिचय देते हुए मैच 7-6 (7-4), 7-6 (7-2), 6-4 से जीत लिया। दूसरे सेट में बोर्गेस सेट पॉइंट तक पहुंच गए थे, लेकिन सिनर ने उस मौके पर वापसी करते हुए मैच पर पकड़ बना ली।जोकोविच और सिनर दोनों की जीत के बाद टूर्नामेंट का रोमांच और बढ़ गया है। जोकोविच अब तीसरे दौर में फ्रांस के आर्थर रिंडरनेच से भिड़ेंगे, जबकि सिनर का सामना अमेरिका के जेनसन ब्रूक्सबी से होगा। विशेषज्ञों के मुताबिक दोनों खिलाड़ियों के लिए आने वाले मुकाबले अहम होंगे क्योंकि आगे का रास्ता अब और कठिन होता जाएगा। खासकर सिनर के लिए यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि फ्रेंच ओपन में शुरुआती हार के बाद उनकी ग्रास कोर्ट तैयारी को लेकर सवाल उठ रहे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">मैच के दौरान जोकोविच ने एक बार फिर अपने मजाकिया अंदाज से दर्शकों का ध्यान खींचा। तीसरे सेट से पहले ब्रेक के दौरान उन्होंने बॉल किड के साथ हल्का-फुल्का मजाक किया और रॉयल बॉक्स में मौजूद गोल्फर रोरी मैक्लरॉय को टेनिस खेलने की चुनौती भी दे दी। यह पल दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बन गया। वहीं सिनर ने मैच के बाद कहा कि वह अपनी लय से खुश हैं और आगे हर मैच को एक नई चुनौती की तरह लेंगे। विंबलडन 2026 में अब जैसे-जैसे मुकाबले आगे बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे दिग्गज खिलाड़ियों और युवा सितारों के बीच दिलचस्प टक्कर देखने को मिल रही है। जोकोविच की अनुभवभरी मजबूती और सिनर की युवा ऊर्जा ने टूर्नामेंट को और भी रोमांचक बना दिया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 16:06:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विंबलडन में वापसी फीकी पड़ी, पहले दौर में हारकर बाहर हुईं सेरेना विलियम्स</title>
                                    <description><![CDATA[करीब चार साल बाद ग्रैंड स्लैम कोर्ट पर लौटीं 44 वर्षीय सेरेना विलियम्स को ऑस्ट्रेलिया की युवा खिलाड़ी माया जॉइंट ने तीन सेट तक चले मुकाबले में हराया। वहीं इगा स्वियातेक और ग्रिगोर दिमित्रोव ने संघर्षपूर्ण जीत के साथ दूसरे दौर में जगह बनाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/wimbledon-comeback-faded-serena-williams-was-eliminated-after-losing-in/article-57549"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/serena-williams.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">विंबलडन 2026 के पहले दौर में दुनिया की सबसे सफल टेनिस खिलाड़ियों में शामिल सेरेना विलियम्स की वापसी उम्मीदों के मुताबिक नहीं रही। लगभग चार साल बाद ग्रैंड स्लैम कोर्ट पर उतरीं 44 वर्षीय सेरेना को ऑस्ट्रेलिया की 20 वर्षीय खिलाड़ी माया जॉइंट ने तीन सेट तक चले मुकाबले में 6-3, 6-7, 6-3 से हराकर बड़ा उलटफेर कर दिया। लंबे समय बाद कोर्ट पर लौटीं सेरेना ने दूसरे सेट में शानदार जुझारूपन दिखाया, लेकिन निर्णायक सेट में उनकी फिटनेस और मैच प्रैक्टिस की कमी साफ नजर आई। इसके बावजूद दर्शकों ने उनकी वापसी का जोरदार स्वागत किया और मुकाबले के दौरान पूरे समय उनका उत्साह बढ़ाते रहे। सेरेना विलियम्स ने वर्ष 2022 में मां बनने के बाद पेशेवर टेनिस से दूरी बना ली थी। इसके बाद यह उनका पहला बड़ा टूर्नामेंट था, जिसमें उन्हें सिंगल्स और डबल्स दोनों वर्गों में वाइल्ड कार्ड एंट्री मिली। पहले दौर के मुकाबले में शुरुआत से ही माया जॉइंट ने आक्रामक खेल दिखाया। उन्होंने पहले सेट में सेरेना की धीमी मूवमेंट और गलतियों का फायदा उठाते हुए आसानी से बढ़त बना ली। दूसरे सेट में मुकाबला पूरी तरह बदल गया। सेरेना ने अनुभव का शानदार प्रदर्शन किया और दो बार पिछड़ने के बावजूद मुकाबले को टाई-ब्रेकर तक पहुंचाया। टाई-ब्रेकर जीतने के बाद ऐसा लगा कि वह मैच में वापसी कर लेंगी, लेकिन तीसरे सेट में लगातार लंबे रैलियों के दौरान उनकी थकान साफ दिखाई दी। युवा माया ने इस मौके का पूरा फायदा उठाया और निर्णायक सेट अपने नाम करते हुए करियर की सबसे बड़ी जीत दर्ज कर ली।</p>
<p style="text-align:justify;">हार के बाद सेरेना ने कहा कि विंबलडन में दोबारा खेलना उनके लिए बेहद खास अनुभव रहा। उन्होंने माना कि उन्होंने इस तरह की वापसी की उम्मीद नहीं की थी, लेकिन यहां का माहौल हमेशा की तरह शानदार रहा। उन्होंने दर्शकों का समर्थन मिलने पर खुशी जताई और कहा कि इस अनुभव को वह लंबे समय तक याद रखेंगी। हालांकि सिंगल्स अभियान खत्म हो गया है, लेकिन उनका टूर्नामेंट अभी समाप्त नहीं हुआ है। अब वह महिला युगल वर्ग में अपनी बड़ी बहन वीनस विलियम्स के साथ कोर्ट पर उतरेंगी। दोनों बहनों की जोड़ी पहले भी कई ग्रैंड स्लैम खिताब जीत चुकी है और प्रशंसकों को एक बार फिर उनसे अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी। महिला सिंगल्स में मौजूदा चैंपियन इगा स्वियातेक को भी पहले दौर में आसान जीत नहीं मिली। तीसरी वरीयता प्राप्त पोलैंड की खिलाड़ी को अमेरिका की टेलर टाउनसेंड के खिलाफ कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा। स्वियातेक ने पहला सेट आसानी से 6-1 से जीत लिया, लेकिन दूसरे सेट में उनका खेल पूरी तरह बिखर गया और टाउनसेंड ने मुकाबले को बराबरी पर ला दिया। निर्णायक सेट की शुरुआत भी स्वियातेक के लिए अच्छी नहीं रही। उन्होंने पहले ही गेम में तीन डबल फॉल्ट किए, लेकिन कठिन परिस्थिति से बाहर निकलते हुए सभी महत्वपूर्ण ब्रेक प्वाइंट बचा लिए। लगभग दो घंटे तक चले मुकाबले में आखिरकार उन्होंने 6-3 से तीसरा सेट जीतकर अगले दौर में जगह बनाई। जीत के बाद वह काफी भावुक नजर आईं और कोर्ट पर ही तौलिए से चेहरा छिपाकर अपनी भावनाओं को संभालती दिखीं। यह दृश्य दर्शकों के लिए भी काफी भावुक रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">पुरुष सिंगल्स में बुल्गारिया के अनुभवी खिलाड़ी ग्रिगोर दिमित्रोव ने भी शानदार वापसी की कहानी लिखी। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के डेन स्वीनी को सीधे सेटों में 7-6, 6-3, 7-5 से हराकर दूसरे दौर में प्रवेश किया। पिछले साल इसी टूर्नामेंट में उन्हें गंभीर चोट के कारण मुकाबला बीच में छोड़ना पड़ा था। उस समय वह कोर्ट से बाहर जाते हुए भावुक हो गए थे। इस बार जीत के बाद दिमित्रोव ने मुस्कुराते हुए दर्शकों का अभिवादन किया, ऑटोग्राफ दिए और प्रशंसकों के साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं। उनकी वापसी को लेकर टेनिस प्रेमियों ने भी खुशी जताई। टूर्नामेंट के दूसरे दिन मेजबान ब्रिटेन के खिलाड़ियों के लिए निराशाजनक तस्वीर देखने को मिली। विंबलडन के 38 साल के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि पहले दौर में ही ब्रिटेन के 15 खिलाड़ी हारकर बाहर हो गए। इससे पहले 1988 में 16 ब्रिटिश खिलाड़ी शुरुआती दौर में बाहर हुए थे। हालांकि कुछ स्थानीय खिलाड़ियों ने जीत दर्ज कर घरेलू दर्शकों की उम्मीदें कायम रखीं। केटी स्वान ने रोमानिया की इरिना-कैमेलिया बेगु को सीधे सेटों में हराया, जबकि जैकब फर्नली ने दो सेट से पिछड़ने के बाद शानदार वापसी करते हुए मुकाबला अपने नाम किया। आर्थर फेरी और जान चोइंस्की ने भी जीत दर्ज कर अगले दौर में जगह बनाई। विंबलडन के शुरुआती मुकाबलों ने साफ कर दिया है कि इस बार अनुभव और युवा जोश के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिलेगी। सेरेना विलियम्स की हार ने जहां उनके प्रशंसकों को निराश किया, वहीं माया जॉइंट जैसी युवा खिलाड़ी के लिए यह जीत करियर का सबसे बड़ा पड़ाव बन गई। दूसरी ओर इगा स्वियातेक और ग्रिगोर दिमित्रोव जैसे खिलाड़ियों ने संघर्ष के बाद जीत हासिल कर यह संकेत दे दिया कि इस प्रतिष्ठित ग्रैंड स्लैम में हर मुकाबला आसान नहीं होने वाला। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 16:59:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>11 साल का इंतजार खत्म, एलेक्जेंडर ज्वेरेव ने जीता पहला ग्रैंड स्लैम खिताब</title>
                                    <description><![CDATA[फ्रेंच ओपन 2026 के रोमांचक फाइनल में फ्लेवियो कोबोली को पांच सेटों में हराया, 89 साल बाद जर्मनी को मिला नया पुरुष चैंपियन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/11-year-wait-ends-alexander-zverev-wins-first-grand-slam/article-55334"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/alexander-zverev.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पेरिस के क्ले कोर्ट पर रविवार को इतिहास बन गया। जर्मनी के स्टार टेनिस खिलाड़ी एलेक्जेंडर ज्वेरेव ने आखिरकार वह उपलब्धि हासिल कर ली जिसका इंतजार उन्हें पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय से था। फ्रेंच ओपन 2026 के पुरुष एकल फाइनल में ज्वेरेव ने इटली के युवा खिलाड़ी फ्लेवियो कोबोली को हराकर अपने करियर का पहला ग्रैंड स्लैम खिताब जीत लिया। मैच पांच सेटों तक चला और करीब पूरे मुकाबले के दौरान दर्शकों को उतार-चढ़ाव से भरपूर टेनिस देखने को मिली। जीत के बाद ज्वेरेव भावुक नजर आए और ट्रॉफी हाथ में लेते ही उनकी वर्षों की मेहनत और संघर्ष का अंत सुखद तरीके से हुआ।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी वरीयता प्राप्त ज्वेरेव ने फाइनल मुकाबले की शुरुआत बेहद आक्रामक अंदाज में की। पहले सेट में उन्होंने कोबोली को संभलने का मौका ही नहीं दिया और केवल 6-1 से सेट अपने नाम कर लिया। शुरुआती प्रदर्शन को देखकर ऐसा लग रहा था कि मुकाबला एकतरफा हो सकता है, लेकिन इटली के 24 वर्षीय खिलाड़ी ने शानदार वापसी की। दूसरे सेट में कोबोली ने अपनी रणनीति बदली और लंबी रैलियों के जरिए ज्वेरेव पर दबाव बनाया। इसका फायदा उन्हें मिला और उन्होंने दूसरा सेट 6-4 से जीतकर मैच में बराबरी कर ली।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तीसरे सेट में दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। हालांकि महत्वपूर्ण मौकों पर ज्वेरेव ने अनुभव का फायदा उठाया और 6-4 से सेट जीतकर फिर बढ़त हासिल कर ली। लेकिन कोबोली हार मानने वालों में नहीं थे। चौथे सेट में दोनों खिलाड़ियों ने शानदार खेल दिखाया। सेट टाई-ब्रेकर तक पहुंचा, जहां कोबोली ने दबाव में बेहतर प्रदर्शन करते हुए 7-6 (5) से जीत दर्ज की और मुकाबले को निर्णायक पांचवें सेट तक पहुंचा दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जब मैच पांचवें और अंतिम सेट में पहुंचा तो स्टेडियम में मौजूद दर्शकों की धड़कनें तेज हो गईं। कई लोगों को लग रहा था कि मुकाबला किसी भी दिशा में जा सकता है। लेकिन निर्णायक सेट में ज्वेरेव पूरी तरह अलग अंदाज में नजर आए। उन्होंने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया और कोबोली को कोई मौका नहीं दिया। जर्मन खिलाड़ी ने 6-1 से अंतिम सेट जीतकर मुकाबला और खिताब दोनों अपने नाम कर लिया। जीत के बाद उन्होंने कोर्ट पर ही अपनी भावनाएं जाहिर कीं और दर्शकों का अभिवादन किया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह जीत ज्वेरेव के लिए सिर्फ एक ग्रैंड स्लैम खिताब नहीं बल्कि वर्षों के संघर्ष का परिणाम भी है। 29 वर्षीय खिलाड़ी पिछले 11 साल से ग्रैंड स्लैम प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले रहे हैं। इस दौरान उन्होंने कई यादगार मुकाबले खेले, लेकिन सबसे बड़े मंच पर सफलता उनसे दूर ही रही। इससे पहले वे तीन बार ग्रैंड स्लैम फाइनल तक पहुंचे थे, लेकिन हर बार खिताब जीतने से चूक गए। इसके अलावा सात बार उन्हें सेमीफाइनल में हार का सामना करना पड़ा था। यही वजह है कि फ्रेंच ओपन 2026 की यह जीत उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिनी जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस खिताबी जीत के साथ ज्वेरेव ने जर्मन टेनिस इतिहास में भी अपना नाम दर्ज करा लिया है। वे फ्रेंच ओपन जीतने वाले 89 साल बाद पहले जर्मन पुरुष खिलाड़ी बने हैं। इससे पहले 1937 में जर्मनी के हेनर हेन्केल ने यह उपलब्धि हासिल की थी। वहीं किसी भी ग्रैंड स्लैम पुरुष एकल खिताब को जीतने वाले आखिरी जर्मन खिलाड़ी बोरिस बेकर थे, जिन्होंने 1996 में ऑस्ट्रेलियन ओपन अपने नाम किया था। ऐसे में ज्वेरेव की यह सफलता जर्मन टेनिस के लिए भी बेहद खास मानी जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ज्वेरेव इससे पहले टोक्यो ओलिंपिक में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं और एटीपी टूर पर भी कई बड़ी उपलब्धियां अपने नाम कर चुके हैं। उन्होंने कई मास्टर्स 1000 खिताब जीते और एटीपी फाइनल्स में भी सफलता हासिल की, लेकिन ग्रैंड स्लैम ट्रॉफी की कमी हमेशा उनके करियर पर चर्चा का विषय बनी रहती थी। अब वह कमी भी पूरी हो गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर फ्लेवियो कोबोली भले ही खिताब जीतने से चूक गए हों, लेकिन पूरे टूर्नामेंट में उनका प्रदर्शन शानदार रहा। 24 वर्षीय इटालियन खिलाड़ी पहली बार किसी ग्रैंड स्लैम फाइनल में पहुंचे थे। उन्होंने रास्ते में कई मजबूत खिलाड़ियों को हराकर सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। फाइनल में भी उन्होंने ज्वेरेव को कड़ी चुनौती दी और साबित किया कि आने वाले वर्षों में वे टेनिस की दुनिया के बड़े सितारों में शामिल हो सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 18:03:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>20 वर्षीय याकूब मेन्सिक ने रचा इतिहास, पहली बार पहुंचे फ्रेंच ओपन सेमीफाइनल में</title>
                                    <description><![CDATA[चेक रिपब्लिक के युवा टेनिस स्टार याकूब मेन्सिक ने जोआओ फोंसेका को हराकर अपने करियर का पहला ग्रैंड स्लैम सेमीफाइनल हासिल किया, 20 साल पुराने नडाल-जोकोविच रिकॉर्ड की बराबरी की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/20-year-old-yakub-mensik-created-history-reached-french-open/article-54872"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/jakub-mensik.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">फ्रेंच ओपन 2026 में युवा खिलाड़ियों का दबदबा लगातार देखने को मिल रहा है और इसी कड़ी में चेक रिपब्लिक के 20 वर्षीय टेनिस खिलाड़ी याकूब मेन्सिक ने एक नया इतिहास रच दिया है। मेन्सिक ने अपने करियर में पहली बार किसी ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में जगह बनाई है। पेरिस में खेले गए पुरुष एकल क्वार्टर फाइनल मुकाबले में उन्होंने ब्राजील के 19 वर्षीय खिलाड़ी जोआओ फोंसेका को सीधे सेटों में 6-4, 6-3, 7-6(3) से हराकर अंतिम चार में प्रवेश किया। यह मुकाबला सिर्फ जीत और हार तक सीमित नहीं था, बल्कि युवा टेनिस प्रतिभाओं के उभार का प्रतीक भी बना। दोनों खिलाड़ियों के बीच खेला गया यह क्वार्टर फाइनल पिछले दो दशकों में सबसे युवा मुकाबलों में से एक रहा। इससे पहले 2006 में फ्रेंच ओपन के क्वार्टर फाइनल में 20 वर्षीय राफेल नडाल और 19 वर्षीय नोवाक जोकोविच आमने-सामने आए थे। अब मेन्सिक और फोंसेका ने उसी ऐतिहासिक उपलब्धि की बराबरी कर दी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">याकूब मेन्सिक का यह प्रदर्शन इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में शानदार आत्मविश्वास और परिपक्वता का परिचय दिया है। कम उम्र के बावजूद उनके खेल में अनुभव और मानसिक मजबूती साफ दिखाई दे रही है। फ्रेंच ओपन जैसे बड़े मंच पर दबाव को संभालना आसान नहीं होता, लेकिन मेन्सिक ने यह साबित कर दिया कि वे भविष्य के बड़े सितारों में शामिल होने की क्षमता रखते हैं। क्वार्टर फाइनल मुकाबले की बात करें तो मैच की शुरुआत से ही मेन्सिक ने आक्रामक रवैया अपनाया। उन्होंने पहले सेट में अपने सर्विस गेम पर पूरा नियंत्रण बनाए रखा और महत्वपूर्ण मौकों पर अंक जुटाकर 6-4 से सेट अपने नाम किया। दूसरे सेट में भी उन्होंने लय बरकरार रखी और फोंसेका को वापसी का मौका नहीं दिया। 6-3 से दूसरा सेट जीतकर उन्होंने मुकाबले में मजबूत बढ़त बना ली।</p>
<p class="isSelectedEnd">तीसरे सेट में हालांकि ब्राजील के युवा खिलाड़ी जोआओ फोंसेका ने जोरदार संघर्ष किया। उन्होंने कुछ बेहतरीन शॉट लगाए और मेन्सिक पर दबाव बनाने की कोशिश की। एक समय ऐसा भी आया जब मेन्सिक ब्रेक पॉइंट गंवाने के कारण पीछे दिखाई दे रहे थे। लेकिन उन्होंने धैर्य नहीं खोया और लगातार फोकस बनाए रखा। मुकाबला टाई-ब्रेकर तक पहुंचा, जहां मेन्सिक ने अपना सर्वश्रेष्ठ खेल दिखाते हुए सेट और मैच दोनों अपने नाम कर लिए। दो घंटे 33 मिनट तक चले इस मुकाबले में दोनों खिलाड़ियों ने कई शानदार रैलियां खेलीं। दर्शकों को युवा ऊर्जा और बेहतरीन टेनिस का शानदार मिश्रण देखने को मिला। हालांकि अंत में अनुभव और मानसिक मजबूती के दम पर मेन्सिक ने जीत हासिल की।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस ऐतिहासिक जीत के साथ याकूब मेन्सिक कई महत्वपूर्ण उपलब्धियों के मालिक बन गए हैं। वे 2004 या उसके बाद जन्म लेने वाले पहले पुरुष खिलाड़ी बन गए हैं जिन्होंने किसी ग्रैंड स्लैम के सेमीफाइनल में जगह बनाई है। इसके अलावा वे चेक रिपब्लिक के इतिहास में ग्रैंड स्लैम सेमीफाइनल तक पहुंचने वाले सबसे युवा खिलाड़ी भी बन गए हैं। मैच के बाद मेन्सिक ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि मुकाबले की शुरुआत में दोनों खिलाड़ी थोड़े नर्वस थे, लेकिन जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ा, खेल का स्तर बेहतर होता गया। उन्होंने कहा कि तीसरे सेट में पीछे होने के बावजूद उन्होंने खुद पर भरोसा बनाए रखा और अंत तक लड़ते रहे। यही मानसिकता उन्हें जीत दिलाने में सफल रही।</p>
<p class="isSelectedEnd">अब सेमीफाइनल में मेन्सिक का सामना जर्मनी के स्टार खिलाड़ी और टूर्नामेंट के दूसरे वरीय अलेक्जेंडर ज्वेरेव से होगा। ज्वेरेव ने अपने क्वार्टर फाइनल मुकाबले में युवा स्पेनिश खिलाड़ी राफेल जोदार को 7-6(3), 6-1, 6-3 से हराकर अंतिम चार में प्रवेश किया। अलेक्जेंडर ज्वेरेव के लिए यह फ्रेंच ओपन का पांचवां सेमीफाइनल होगा। उन्होंने अब तक टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया है और पांच मुकाबलों में केवल एक सेट गंवाया है। हालांकि क्वार्टर फाइनल के पहले सेट में वे 2-5 से पीछे चल रहे थे, लेकिन अनुभव और धैर्य के दम पर उन्होंने वापसी करते हुए मैच जीत लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">ज्वेरेव ने मुकाबले के बाद कहा कि बंद छत के कारण कोर्ट की परिस्थितियां अलग थीं। गेंद अपेक्षाकृत कम उछाल ले रही थी, जिससे उनके टॉपस्पिन शॉट प्रभावी नहीं हो रहे थे। ऐसे में उन्हें अपनी रणनीति बदलकर फ्लैट शॉट्स खेलने पड़े। उन्होंने माना कि विरोधी खिलाड़ी अच्छा खेल रहे थे, लेकिन सही समय पर मिले अवसर का उन्होंने पूरा फायदा उठाया। अब सभी की निगाहें सेमीफाइनल मुकाबले पर टिकी हैं, जहां युवा सनसनी याकूब मेन्सिक और अनुभवी अलेक्जेंडर ज्वेरेव आमने-सामने होंगे। एक तरफ भविष्य का उभरता सितारा होगा, तो दूसरी तरफ ग्रैंड स्लैम खिताब की तलाश में जुटा अनुभवी खिलाड़ी। यह मुकाबला फ्रेंच ओपन 2026 के सबसे रोमांचक मैचों में से एक साबित हो सकता है। मेन्सिक की अब तक की यात्रा ने साबित कर दिया है कि टेनिस जगत को एक नया सितारा मिल चुका है। यदि वे इसी तरह का प्रदर्शन जारी रखते हैं, तो आने वाले वर्षों में वे ग्रैंड स्लैम खिताबों के प्रमुख दावेदारों में शामिल हो सकते हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 17:03:10 +0530</pubDate>
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                <title>सबालेंका फ्रेंच ओपन क्वार्टर फाइनल में पहुंचीं, ओसाका को हराया</title>
                                    <description><![CDATA[1 घंटे 27 मिनट के मुकाबले में सीधे सेटों से जीत, नाइट मैच में महिलाओं की भागीदारी पर फिर चर्चा तेज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/sabalenka-defeated-osaka-to-reach-french-open-quarterfinals/article-54771"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/french-open-2026-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फ्रेंच ओपन 2026 में महिला सिंगल्स के चौथे दौर का मुकाबला उस वक्त खास बन गया जब वर्ल्ड नंबर-1 आर्यना सबालेंका ने जापान की स्टार खिलाड़ी नाओमी ओसाका को सीधे सेटों में हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली। पेरिस के रोलां गैरो कोर्ट पर खेले गए इस मुकाबले में सबालेंका ने 7-5, 6-3 से जीत दर्ज की। मैच करीब 1 घंटे 27 मिनट तक चला और अंत तक दर्शकों को रोमांच बनाए रखा। यह मुकाबला इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि पिछले तीन वर्षों में पहली बार फ्रेंच ओपन में महिलाओं का नाइट मैच खेला गया। रात के समय बड़ी संख्या में दर्शक स्टेडियम पहुंचे और दोनों खिलाड़ियों के हर पॉइंट पर जोरदार प्रतिक्रिया देखने को मिली। माहौल पूरी तरह से ग्रैंड स्लैम स्तर का था, जिसमें दोनों खिलाड़ियों ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पहले सेट में मुकाबला काफी कड़ा रहा। नाओमी ओसाका, जो चार बार ग्रैंड स्लैम चैंपियन रह चुकी हैं, ने सबालेंका की सर्विस का शानदार जवाब दिया और लंबे रैलियों में मजबूती दिखाई। दोनों खिलाड़ी 5-5 की बराबरी पर थीं, लेकिन यहीं पर सबालेंका ने दबाव बनाते हुए ओसाका की सर्विस ब्रेक की और पहला सेट 7-5 से अपने नाम कर लिया। इस सेट ने मैच का पूरा रुख बदल दिया। पहला सेट जीतने के बाद सबालेंका का आत्मविश्वास साफ तौर पर बढ़ गया। दूसरे सेट में उन्होंने शुरुआत से ही तेज गति और दमदार ग्राउंड स्ट्रोक्स के जरिए ओसाका पर दबाव बनाए रखा। ओसाका ने वापसी की कोशिश जरूर की, लेकिन सबालेंका की लगातार आक्रामक रणनीति के आगे वे ज्यादा देर तक टिक नहीं पाईं। दूसरा सेट 6-3 से जीतकर सबालेंका ने मैच अपने नाम कर लिया और क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मैच के बाद सबालेंका ने नाइट सेशन में महिला मैच को शामिल किए जाने के फैसले की खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि यह कदम बेहद जरूरी था और इससे महिला टेनिस को सही मंच मिलता है। सबालेंका ने यह भी कहा कि स्टेडियम में दर्शकों की मौजूदगी और उनका उत्साह यह साबित करता है कि महिलाओं के मैच भी उतने ही लोकप्रिय और रोमांचक हो सकते हैं जितने पुरुषों के मुकाबले। उनके अनुसार, यह अनुभव खिलाड़ियों के लिए भी खास होता है क्योंकि रात के मैचों में दबाव और माहौल अलग होता है। उन्होंने आयोजकों से अपील की कि भविष्य में ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट्स में महिलाओं के मैचों को भी नियमित रूप से नाइट सेशन में जगह दी जानी चाहिए। इससे खेल को और ज्यादा दर्शक मिलेंगे और महिला टेनिस को नई पहचान मिलेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नाओमी ओसाका ने भी मैच के बाद सबालेंका की तारीफ की और कहा कि यह मुकाबला उच्च स्तर का था। हार के बावजूद उन्होंने नाइट सेशन में महिला मैच रखे जाने के फैसले का समर्थन किया। ओसाका ने कहा कि दर्शकों की प्रतिक्रिया बेहद सकारात्मक थी और इससे यह साफ है कि महिला टेनिस को प्राइम टाइम में और अधिक अवसर मिलने चाहिए। टेनिस जगत में लंबे समय से यह चर्चा रही है कि ग्रैंड स्लैम नाइट सेशन्स में अक्सर पुरुष खिलाड़ियों को प्राथमिकता दी जाती है। इसका कारण मैचों की लंबी अवधि और व्यूअरशिप माना जाता है। लेकिन इस मुकाबले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या महिला टेनिस को बराबरी का मंच मिलना चाहिए। दोनों खिलाड़ियों के बयान के बाद यह बहस और तेज हो गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सबालेंका की इस जीत ने उन्हें खिताब की मजबूत दावेदारों में शामिल कर दिया है। उनका मौजूदा फॉर्म और आक्रामक खेल शैली उन्हें बाकी खिलाड़ियों से आगे खड़ा कर रहा है। वहीं ओसाका ने भी संकेत दिए हैं कि वह आने वाले टूर्नामेंट्स में और मजबूत वापसी करेंगी। फ्रेंच ओपन 2026 में यह मुकाबला सिर्फ एक मैच नहीं रहा, बल्कि महिला टेनिस के भविष्य और उसके मंच को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश भी दे गया। दर्शकों की भारी मौजूदगी और खिलाड़ियों के सकारात्मक विचारों ने यह साफ कर दिया है कि महिला टेनिस के लिए संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 16:57:32 +0530</pubDate>
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